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मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की ओर से अधिकारियों को 1,350 करोड़ रुपए की लागत से पंजाब भर में 3,100 स्टेडियमों का कार्य जून 2026 तक पूरा करने के निर्देश

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चंडीगढ़, 24 दिसंबर 2025: Chief Minister Bhagwant Singh Mann has Instructed Officials: मुख्यमंत्री स. भगवंत सिंह मान ने आज खेल और युवा सेवाएं विभाग के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान पंजाब के खेल बुनियादी ढांचे के नवीनीकरण के लिए स्पष्ट, समयबद्ध निर्देश जारी करते हुए अधिकारियों को प्रदेश भर में 1,350 करोड़ रुपए की लागत से बनाए जा रहे 3,100 स्टेडियमों का कार्य जून 2026 तक पूरा करने के निर्देश दिए।

इस दौरान मुख्यमंत्री द्वारा एक व्यापक पैकेज की भी शुरुआत की गई जिसमें लगभग 3,000 स्थानों पर अत्याधुनिक जिम स्थापित करना, 50 करोड़ रुपए की लागत से 17,000 खेल किटों का वितरण, एक व्यापक खेल पोर्टल की शुरुआत और 43 करोड़ रुपए की लागत से एक नए युवा भवन का निर्माण शामिल है। उन्होंने कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य पंजाब के युवाओं की असीम ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में लगाना और उन्हें नशे के खतरे से दूर रखना है।

आज यहां खेल और युवा सेवाएं विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नई खेल नीति 2023 के अनुसार प्रदेश भर के गांवों में ये स्टेडियम बनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन स्टेडियमों पर 1350 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे जिनमें बाड़, गेट, जॉगिंग ट्रैक, समतल खेल का मैदान, पेड़, वॉलीबॉल कोर्ट, स्टोर और अन्य सुविधाएं शामिल हैं। भगवंत सिंह मान ने कहा कि इन स्टेडियमों का कार्य निर्धारित समय के अंदर पूरा किया जाना चाहिए और साथ ही हर हालत में कार्यों की गुणवत्ता भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में ले जाने के लिए प्रदेश भर में लगभग 3000 स्थानों पर अत्याधुनिक जिम स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि पहले चरण के तहत प्रदेश भर में 1000 स्थानों पर 35 करोड़ रुपए की लागत से ऐसे अत्याधुनिक जिम स्थापित किए जाएंगे। भगवंत सिंह मान ने कहा कि इन जिमों में बारबेल, वेट लिफ्टिंग सेट, बेंच, डंबल सेट, केटलबेल सेट, रैक, फ्लोर मैट और अन्य कई अत्याधुनिक उपकरण शामिल होंगे।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार द्वारा 50 करोड़ रुपए की लागत से खिलाड़ियों को 17000 खेल किटें वितरित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि इन किटों में वॉलीबॉल और फुटबॉल (प्रत्येक के लिए तीन वॉलीबॉल और फुटबॉल तथा दो नेट), क्रिकेट के लिए दो बैट, विकेट, छह टेनिस गेंदें शामिल होंगी। भगवंत सिंह मान ने अधिकारियों को 31 मार्च, 2026 तक गांवों में 5600 खेल किटें वितरित करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बहुत गर्व और संतोष की बात है कि विभाग द्वारा एक व्यापक खेल पोर्टल शुरू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि खेल प्रेमी और खिलाड़ी एक क्लिक पर खिलाड़ियों की रजिस्ट्रेशन, ऑनलाइन ग्रेडेशन, ऑनलाइन डी.बी.टी., खेल आयोजन करवाना, ग्राउंड रिजर्वेशन, ई-सर्टिफिकेट, परिणाम रिकॉर्ड करना, पेंशन/वजीफा और अन्य सुविधाएं प्राप्त कर सकेंगे। भगवंत सिंह मान ने कहा कि 10,000 युवाओं के लिए प्रदेश के नौ जंगली क्षेत्रों में ट्रैकिंग, एडवेंचर, टीम एक्टिविटी कैंप भी लगाए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाली जनवरी से पल्लणपुर, सिसवां, मिर्जापुर (मोहाली), टिब्बा टपरिया (रोपड़), नारा (होशियारपुर), और हरिके पत्तन रख (तरनतारन) में कैंप लगाए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि 43 करोड़ रुपए की लागत से सेक्टर 42ए में एक नया युवा भवन बनाया जाएगा। भगवंत सिंह मान ने कहा कि इसमें 200 युवाओं के लिए हॉस्टल सुविधाएं, 400 व्यक्तियों की क्षमता वाला ऑडिटोरियम, एक कॉन्फ्रेंस हॉल, सेमिनार रूम और अन्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने खेल नीति 2023 पेश की और बजट को वर्ष 2023-2024 में 350 करोड़ रुपए से बढ़ाकर वर्ष 2024-25 के लिए 1000 करोड़ रुपए कर दिया। उन्होंने कहा कि मोहाली, बठिंडा और लुधियाना में 10.50 करोड़ रुपए की लागत से हॉकी टर्फ को बदला जा रहा है और इन्हें भारतीय हॉकी फेडरेशन द्वारा मंजूरी दी गई है।

भगवंत सिंह मान ने अधिकारियों को मोहाली स्पोर्ट्स स्टेडियम सेक्टर 78 में 9 करोड़ रुपए की लागत से निर्माणाधीन सिंथेटिक ट्रैक का कार्य मार्च, 2026 तक पूरा करने के लिए भी कहा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बहुत गर्व और संतोष की बात है कि पंजाब देश का पहला राज्य है जहां स्पोर्ट्स मेडिसिन कैडर मौजूद है। उन्होंने कहा कि चोटों से जूझ रहे खिलाड़ियों की देखभाल और उनके प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए इस कैडर के लिए 92 कर्मचारियों का चयन किया गया है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि राज्य सरकार के हर प्रयास का उद्देश्य युवाओं की असीम ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में ले जाना है ताकि उन्हें नशे के खतरे से दूर रखा जा सके।

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Politics

भाजपा मशीनरी पंजाब और उसके युवाओं को बदनाम करने के लिए फर्जी वीडियो फैला रही है: हरपाल सिंह चीमा

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आम आदमी पार्टी (आप) के सीनियर नेता और पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने राजस्थान का एक वीडियो शेयर करने, उसे गलत तरीके से पंजाब से जोड़ने और राज्य और उसके युवाओं को बदनाम करने की कोशिश करने के लिए पूर्व इंडियन क्रिकेटर और राज्यसभा मेंबर हरभजन सिंह पर निराशा जताई है।

मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने इस बात पर दुख जताया कि हरभजन सिंह, जिन्हें आप ने पंजाब के हितों को रिप्रेजेंट करने और राज्य के युवाओं के लिए काम करने के लिए राज्यसभा भेजा था, अब भाजपा के कैंपेन को प्रमोट कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “हरभजन सिंह को पंजाब के युवाओं को खेल के प्रति प्रेरित करने के लिए और उनके भविष्य से जुड़े मुद्दे उठाने के लिए अपने प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करना चाहिए था, न कि गुमराह करने वाला कंटेंट शेयर करना चाहिए था जो पंजाब की छवि को ठेस पहुंचाता है।”

हरभजन सिंह के शेयर किए गए वीडियो का ज़िक्र करते हुए उन्होंने बताया, “पंजाब पुलिस ने वीडियो की जांच की और पाया कि यह असल में भाजपा शासित राजस्थान के श्री गंगानगर का है और इसका पंजाब से कोई लेना-देना नहीं है।”

हरपाल सिंह चीमा ने आगे कहा, “तथ्यों की जांच करने के बजाय, भाजपा की आईटी मशीनरी दूसरे राज्यों से वीडियो उठाकर उन्हें पंजाब की घटनाओं के तौर पर दिखा रही है ताकि हमारे राज्य और उसके युवाओं को बदनाम किया जा सके।”

पंजाब सरकार के ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ मुहिम पर ज़ोर देते हुए, कैबिनेट मंत्री ने कहा, “भाजपा, नशों के विरुद्ध लड़ाई में भगवंत मान सरकार की तरक्की को कमज़ोर करने की कोशिश कर रही है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने एक ढृड़ ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ मुहिम शुरू किया है, और सरकार ड्रग्स को खत्म करने और पंजाब के युवाओं को बेहतर मौके देने के लिए हर लेवल पर काम कर रही है।”

पंजाब में भाजपा के रिकॉर्ड की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा, “भाजपा को अपना रिकॉर्ड भी देखना चाहिए। 2007 से 2017 तक अकाली-भाजपा सरकार के 10 सालों के दौरान ड्रग्स का खतरा बढ़ गया था। इसी दौरान ‘चिट्टा’ और ‘स्मैक’ जैसे शब्द पंजाब से बड़े पैमाने पर जुड़ गए, जिसकी वजह से अनगिनत युवाओं की ज़िंदगी ड्रग्स की गिरफ़्त में आकर बर्बाद हो गई।”

खेल ढांचे पर सरकार के फोकस के बारे में बताते हुए हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “भगवंत मान सरकार युवाओं को पॉजिटिव विकल्प देने के लिए स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर को भी मजबूत कर रही है। पंजाब में 3,000 से ज़्यादा स्पोर्ट्स स्टेडियम बनाए गए हैं, जबकि 6,000 और तैयार किए जा रहे हैं। हम स्पोर्ट्स में इन्वेस्ट कर रहे हैं क्योंकि हम चाहते हैं कि पंजाब के युवा नशों से दूर रहें और एक हेल्दी और बेहतर भविष्य की ओर बढ़ें।”

मंत्री ने कहा, “पंजाब के युवा और किसान भाजपा के प्रोपेगैंडा से गुमराह नहीं होंगे। पंजाब के लोग आप सरकार के जमीनी स्तर पर किए गए काम और भाजपा की सोशल मीडिया पर गुमराह करने वाली पोस्ट के ज़रिए राज्य को बदनाम करने की कोशिशों के बीच का अंतर समझते हैं।”

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‘लाइक’ और ‘व्यू’ पाने के लिए, राजस्थान के एक वीडियो को पंजाब का बताकर झूठ फैलाया जा रहा है: बलतेज पन्नू

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आम आदमी पार्टी (आप) के पंजाब स्टेट मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने पूर्व क्रिकेटर और राज्यसभा मेंबर हरभजन सिंह भज्जी और दूसरे सेलिब्रिटीज़ द्वारा सोशल मीडिया पर पंजाब को बदनाम करने के लिए चलाए जा रहे कैंपेन पर तीखा हमला किया है। उन्होंने कहा कि जिस पार्टी ने भज्जी को इज्ज़त दी और राज्यसभा की कुर्सी पर बिठाया, उसी ने उनकी पीठ में छुरा घोंपा और भाजपा से मिल गई। आज ये भ्रष्ट नेता और सेलिब्रिटीज़ भाजपा के इशारों पर नाच रहे हैं और उनके परोसे गए झूठ के पुलिंदे को अनदेखा करके और उन्हें वायरल करके पंजाब, पंजाब पुलिस और सरकार की पीठ में छुरा घोंपने की गंदी साज़िश रच रहे हैं।

मंगलवार को एक कॉन्फ्रेंस के दौरान मीडिया से बात करते हुए बलतेज पन्नू ने स्पष्ट किया कि हरभजन भज्जी और सोनू सूद जैसे सेलिब्रिटीज़ जो वीडियो पंजाब का बताकर सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं, वह पंजाब का नहीं, बल्कि राजस्थान का है। बिना कोई फैक्ट जाने, सिर्फ ‘लाइक’ और ‘व्यूज़’ पाने के लिए ऐसे फर्जी वीडियो पोस्ट करके पंजाब को बदनाम किया जा रहा है।

पन्नू ने सवाल किया कि ये नेता और सेलिब्रिटी तब चुप क्यों हैं जब मुंद्रा पोर्ट (गुजरात) से हजारों किलो ड्रग्स बरामद होने और चूहों द्वारा खाए जाने की खबरें आई थीं। ड्रग्स आज एक विश्व व्यापी समस्या है, जिसके खिलाफ एफबीआई के ‘ऑपरेशन हार्ड बॉल’ जैसे ऑपरेशन भी चलाए जा रहे हैं, लेकिन पंजाब में भाजपा की चाल के तहत राज्य को टारगेट किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ मुहिम के तहत जिला, विधानसभा, शहर और गांव लेवल पर ‘विलेज डिफेंस कमेटियों’ के जरिए ग्राउंड लेवल पर ड्रग्स के खिलाफ जंग लड़ी जा रही है। बॉर्डर पर एंटी-ड्रोन सिस्टम लगाए गए हैं और आम लोग डायरेक्ट ऐप के जरिए डीजीपी और मुख्यमंत्री को जानकारी भेज रहे हैं।

पंजाब पुलिस के परफॉर्मेंस के आंकड़े शेयर करते हुए उन्होंने कहा कि 1 मार्च, 2025 से 9 अगस्त, 2026 तक पंजाब पुलिस ने 56,267 केस दर्ज किए और 75,552 आरोपियों को नामजद किया। इसके अलावा 3,575 किलोग्राम हेरोइन, 509 किलोग्राम स्मैक, 880 किलोग्राम अफीम, 43,271 किलोग्राम पोस्ता (डोडे), 95 किलोग्राम से ज़्यादा चरस बरामद किया गया और 21 करोड़ 71 लाख 267 रुपये की ड्रग मनी ज़ब्त की गई।

पन्नू ने कहा कि पंजाब में ड्रग्स का खतरा पिछली सरकारों के समय 2007 से 2017 के बीच शुरू हुआ, जिसने एक पूरी पीढ़ी को बर्बाद कर दिया। आज मान सरकार की कोशिशों से युवाओं का ध्यान खेलों की तरफ गया है। भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम के कप्तान, महिला क्रिकेट टीम की कप्तान और भारतीय हॉकी टीम के 9 खिलाड़ी पंजाब के युवा हैं। हरभजन भज्जी पर निशाना साधते हुए उन्होंने पूछा कि खुद खिलाड़ी होते हुए उन्होंने पंजाब के बच्चों को खेलों से जोड़ने में क्या योगदान दिया?

पन्नू ने पंजाब के लोगों, पुलिस और विलेज डिफेंस कमेटियों के योद्धाओं की पीठ थपथपाते हुए कहा कि सरकार और पंजाब के लोग इस मुहिम में पूरी तरह डटे हुए हैं। उन्होंने भज्जी और दूसरों द्वारा पंजाब को बदनाम करने के लिए रची जा रही ऐसी झूठी साजिशों की कड़ी निंदा की।

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मुख्यमंत्री सेहत योजना (MMSY) के तहत ₹38.90 लाख की लागत से पोस्ट-बर्न कॉन्ट्रैक्चर के 75 उपचार किए गए

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आग कुछ ही मिनटों तक जलती है, लेकिन उससे होने वाला नुकसान कहीं अधिक समय तक बना रह सकता है। गंभीर रूप से जलने वाले व्यक्ति के लिए आग की लपटों से बाहर निकलना केवल शुरुआत होती है। इसके बाद बार-बार ड्रेसिंग, विभिन्न चिकित्सा प्रक्रियाओं, सर्जरी और महीनों तक चलने वाली रिकवरी की आवश्यकता हो सकती है। मुख्यमंत्री सेहत योजना (एमएमएसवाई) के तहत पंजाब में जलने के उपचार के हालिया आंकड़े इस मुश्किल सफर को बयाँ करते हैं। योजना के तहत ₹1.39 करोड़ की लागत से जलने के 265 उपचार उपलब्ध करवाए गए हैं।

24 वर्षीय अर्जुन कुमार उस समय घायल हो गए, जब उनके घर में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लग गई। उन्हें उपचार के लिए बठिंडा ले जाया गया, जहाँ लगभग ₹50,000 का उपचार योजना के तहत कैशलेस उपलब्ध करवाया गया। उन्होंने अपने अनुभव को याद करते हुए कहा, “सब कुछ बहुत तेज़ी से हुआ।” उपचार कैशलेस होने की जानकारी मिलने के बाद, उन्होंने कहा कि वे अस्पताल के ख़र्चों की चिंता करने के बजाय अपने स्वस्थ होने पर ध्यान केंद्रित कर सके।

राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए), पंजाब से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत 31 से 45 वर्ष आयु वर्ग के पुरुषों के 61 उपचार हुए, जो सभी आयु-वर्गों में सबसे अधिक हैं, इन उपचारों पर ₹31.82 लाख ख़र्च हुए। 0 से 18 वर्ष आयु वर्ग के लड़कों के 39 उपचार हुए, जबकि इसी आयु वर्ग की लड़कियों के 27 उपचार किए गए।

महिलाओं में 19 से 30 वर्ष आयु वर्ग में सबसे अधिक 26 उपचार दर्ज किए गए, जबकि 31 से 45 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं के 21 उपचार हुए। सरल शब्दों में कहा जाए तो उपचार करवाने वाले लाभार्थियों में बच्चों, युवाओं और कामकाजी आयु वर्ग के लोगों की बड़ी संख्या रही।

पंजाब के ये आंकड़े जलने की चोटों के लंबे समय तक रहने वाले प्रभावों को लेकर मेडिकल रिसर्च के निष्कर्षों से भी मेल खाते हैं। पब्मेड में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, पंजाब के एक तृतीयक(टर्शरी) अस्पताल में जलने से पीड़ित 892 मरीज़ों पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि 79 प्रतिशत मरीज़ 15 से 45 वर्ष की आयु के थे। यह दर्शाता है कि जलने की घटनाएँ लोगों को उनकी कामकाजी उम्र में गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती हैं। अध्ययन में भारत में सुलभ और किफायती बर्न केयर की आवश्यकता पर भी ज़ोर दिया गया।

इस संबंध में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “जलने की चोट आग बुझने के साथ ख़त्म नहीं होती। कई मरीज़ों के लिए रिकवरी का अर्थ बार-बार होने वाली चिकित्सा प्रक्रियाएँ , रिहैबिलिटेशन और लंबे समय तक देखभाल होता है। हमारी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि इन परिवारों के लिए आर्थिक कठिनाई एक और चोट न बन जाए। मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत मरीज़ों को इस चिंता के बजाय कि उपचार का ख़र्च कैसे वहन करेंगे, अपने स्वास्थ्य होने , रिकवरी और जीवन को फिर से व्यवस्थित करने पर ध्यान केंद्रित करने में सक्षम होना चाहिए।”

सबसे महत्त्वपूर्ण आंकड़ों में से एक पोस्ट-बर्न कॉन्ट्रैक्चर का है, जिसके 75 उपचार किए गए और इन पर ₹38.90 लाख ख़र्च हुए।

पोस्ट-बर्न कॉन्ट्रैक्चर जलने की चोट के बाद बनने वाले स्कार टिश्यू के सिकुड़ने के कारण हो सकता है। इससे शरीर की गतिविधियाँ सीमित हो जाती हैं और रोज़मर्रा के सामान्य काम करना भी मुश्किल हो सकता है। इस प्रकार, जलने की चोट का प्रभाव त्वचा के ठीक हो जाने के काफ़ी समय बाद तक बना रह सकता है।

अन्य उपचार प्रक्रियाओं में शरीर की कुल सतह के जले हुए हिस्से का उपचार, टिश्यू एक्सपैंडर, बिजली और रसायनों से होने वाली जलन का उपचार, एंटीबायोटिक ड्रेसिंग, स्किन फ्लैप, डिब्राइडमेंट तथा कान/नाक का रिकंस्ट्रक्शन शामिल हैं। ये केवल सौंदर्य संबंधी समस्याएँ नहीं हैं। कुछ मरीज़ों के लिए, ये उपचार उनकी गतिविधियों, कार्यक्षमता और आत्मविश्वास को फिर से हासिल करने के लिए आवश्यक होते हैं।

आंकड़ों में शामिल ज़िलों में बठिंडा में सबसे अधिक लाभार्थी दर्ज किए गए, जहाँ 57 लोगों को 63 उपचार उपलब्ध करवाए गए। यहाँ उपचार पर ₹33.51 लाख ख़र्च हुए। इसके बाद फरीदकोट में 40 लाभार्थी और पटियाला में 39 लाभार्थी दर्ज किए गए। वहीं, रूपनगर, एस.ए.एस. नगर और फतेहगढ़ साहिब में एक-एक लाभार्थी दर्ज किया गया।

डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि उपचार से संबंधित आंकड़े जलने से पीड़ित मरीज़ों, विशेषकर बच्चों, युवाओं और कामकाजी आयु वर्ग के लोगों को समय पर व्यापक उपचार उपलब्ध करवाने के महत्त्व को दर्शाते हैं, क्योंकि लाभार्थियों में इन वर्गों की उल्लेखनीय संख्या है।उन्होंने कहा, “जलने की घटना कुछ ही सेकंड में किसी व्यक्ति की ज़िंदगी बदल सकती है, लेकिन रिकवरी में अक्सर काफी अधिक समय लगता है। इसलिए जलने से पीड़ित व्यक्ति के लिए कैशलेस उपचार का अर्थ बहुत व्यावहारिक है—जब आग आख़िरकार बुझ जाती है, तो परिवार को एक और आग अर्थात् अस्पताल के बिल का सामना नहीं करना पड़ता।”

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