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केजरीवाल की बड़ी जीत, आबकारी केस से हटीं जज स्वर्ण कांता शर्मा
तथाकथित आबकारी केस से अंततः जज स्वर्ण कांता शर्मा ने खुद को अलग कर लिया। आम आदमी पार्टी ने जज स्वर्ण कांता शर्मा के आबकारी केस से अलग हटने के फैसले को अरविंद केजरीवाल की बड़ी जीत बताया है। “आप” के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने जज स्वर्ण कांता शर्मा को आबकारी केस से हटने के फैसले पर कहा कि सत्य की जीत हुई। गांधी जी के सत्याग्रह की एक बार फिर जीत हुई।
“आप” का कहना है कि अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत अन्य लोगों ने हितों का टकराव बताते हुए जज स्वर्ण कांता शर्मा को आबकारी केस से खुद को अलग करने का अनुरोध किया था। इस बाबत अरविंद केजरीवाल ने एक पत्र लिख कर 10 वाजिब वजहें बताई थीं और उम्मीद जताई थी कि जज खुद को इस केस से अलग कर लेंगी। लेकिन जज स्वर्ण कांता शर्मा ने मामले की सुनवाई करते हुए इस केस से अलग नहीं होने का फैसला सुनाया था। इसके बाद अरविंद केजरीवाल ने राजघाट जाकर गांधी समाधि पर नतमस्तक हुए और उनके सत्याग्रह के मार्ग पर चलते हुए इस केस में उनकी कोर्ट में पेश न होने का फैसला लिया था।
आम आदमी पार्टी का कहना है कि अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि उनकी कोर्ट का जो भी फैसला होगा, वह स्वीकार होगा और उस पर वह अपने कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। अरविंद केजरीवाल ने जज स्वर्ण कांता शर्मा को आबकारी केस से हटने के लिए दस कारण बताए थे। इनमें से एक प्रमुख कारण यह है कि न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा के बच्चे केंद्र सरकार के पैनल में हैं और आबकारी केस में सीबीआई की तरफ से वकील सॉलिसिटर जनरल हैं जो जज के दोनों बच्चों बाॅस के तौर पर केस आवंटित करते हैं और उसके बदले में मोटी फीस भी सरकार की तरफ से दी जाती है। पिछले कुछ सालों में उनके बच्चों को सबसे ज्यादा केस आवंटित किया गया। अरविंद केजरीवाल ने आशंका जताई थी कि जब जज के बच्चों के करियर सॉलिसिटर जनरल के हाथ में है तो वह उनके खिलाफ फैसला क्या दे सकती है?
आम आदमी पार्टी ने कहा कि दूसरा प्रमुख कारण जज स्वर्ण कांता शर्मा का आरएसएस के अधिवक्ता परिषद के कार्यक्रमों में जाना है। अधिवक्ता परिषद के कार्यक्रम में कई बार जज स्वर्ण कांता शर्मा के जाने की वजह से अरविंद केजरीवाल ने न्याय न मिलने आशंका जताई थी। इन प्रमुख वाजिब कारण बताने के बाद भी जज स्वर्ण कांता शर्मा ने केस से नहीं हटने का फैसला सुनाया।
इसके बाद अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया राजघाट पहुंच कर महात्मा गांधी की समाधि पर नतमस्तक हुए और सत्याग्रह की राह दिखाने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी को नमन करते हुए सत्याग्रह के मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराया। अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि हम न्यायपालिका का बहुत सम्मान करते हैं, लेकिन कुछ ऐसी परिस्थितियां पैदा हुई हैं कि हमें यह सत्याग्रह करना पड़ रहा है। मेरा अटूट विश्वास है कि बापू के आशीर्वाद से सत्याग्रह के इस कठिन पथ पर हम पूर्ण निष्ठा के साथ अडिग रहेंगे।
उधर, दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने अवमानना नोटिस पर कहा कि खबर आ रही है कि हाई कोर्ट की माननीय जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह और मेरे खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू कर दी है। अपने फैसले के दौरान जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने बार-बार दो बातें दोहराईं। पहली बात जो वे बार-बार कहती रहीं कि वे यह अपनी किसी नाराजगी की वजह से नहीं कर रही हैं, बल्कि न्यायपालिका की साख और प्रतिष्ठा बचाने के लिए कर रही हैं। यह बात उन्होंने बार-बार दोहराई कि वे यह खुद के लिए नहीं कर रही हैं। दूसरी बात उन्होंने यह कही कि उनके पास दो रास्ते थे। एक आसान रास्ता और एक मुश्किल रास्ता और उन्होंने हर बार मुश्किल रास्ता चुना। इस विषय में मैं एक-दो बातें कहना चाहता हूं।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि पहली बात तो यह है कि फैसले के दौरान जस्टिस शर्मा ने मेरी प्रेस कॉन्फ्रेंस और मेरे एक्स हैंडल का जिक्र किया। मुझे खुशी हुई कि वे मेरी प्रेस वार्ता देखती हैं। मैं पिछले एक हफ्ते से तीन साल की बच्ची के रेप का मामला उठा रहा हूं, जिसमें निचली अदालत के जज ने 57 साल के आरोपी को जमानत दे दी है। मुझे खुशी होती कि उन प्रेस वार्ताओं या मीडिया में चलती हुई क्लिपिंग से वे इस मामले पर स्वतः संज्ञान लेकर कोई कार्रवाई करतीं, क्योंकि यह बहुत संजीदा मामला था।
सौरभ भारद्वाज ने आगे कहा कि मैंने प्रेस वार्ता करके बताया था कि कैसे दिल्ली की मौजूदा मुख्यमंत्री और भाजपा नेता रेखा गुप्ता ने एक मीडिया पर ऑन रिकॉर्ड बोला कि राउस एवेन्यू के स्पेशल सीबीआई जज ने अरविंद केजरीवाल और अन्य को आबकारी मामले में जो दोषमुक्त किया, वह मामला सेट करके हुआ है। इसका साफ मतलब है कि उन्होंने एक मौजूदा जज को भ्रष्टाचारी कह दिया। हमने इसके ऊपर प्रेस वार्ता में और वीडियो बनाकर भी कई बार बात रखी। मुझे खुशी होती अगर न्यायपालिका को बचाने के लिए जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा इस मामले में भाजपा की मुख्यमंत्री के ऊपर अवमानना की कार्यवाही शुरू करतीं।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि इसके अलावा मैंने 31 मार्च को हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार को बाकायदा सबूतों के साथ लिखा था कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने न्यायपालिका के एक जज को सेट बताया है, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। मैं सिर्फ जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को यह बताना चाहता हूं कि कानून यह नहीं कहता कि आसान या मुश्किल में से आसान रास्ते को छोड़कर मुश्किल को चुनना है। कानून की किताब में ऐसा कहीं नहीं है। जज को सिर्फ न्याय का रास्ता चुनना होता है। वे बार-बार कहती हैं कि उनके पास दो रास्ते थे, लेकिन न्याय की मंजिल में सिर्फ एक ही रास्ता होता है और वह सत्य व न्याय का रास्ता है। उसमें आसान या मुश्किल रास्ते नहीं होते।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि अगर मुश्किल रास्ता चुनना ही है, तो भाजपा की मुख्यमंत्री के खिलाफ कार्यवाही की होती तो माना जाता कि यह मुश्किल रास्ता है। आम आदमी पार्टी या विपक्षी दल के नेताओं के ऊपर अवमानना का मामला चलाना मुश्किल रास्ता है, यह मैं नहीं मानता। न्यायपालिका की साख को बचाने के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के ऊपर कार्यवाही होनी चाहिए थी। यह बात एक्स, यूट्यूब सहित पूरे सोशल मीडिया व मीडिया में बार-बार हम लोगों ने उठाई है। मुझे अच्छा लगता अगर वे इस मामले पर स्वतः संज्ञान लेतीं और उस पर कार्रवाई करतीं, क्योंकि हम लोग अगर उसकी शिकायत करेंगे तो हमें उसके लिए केंद्र सरकार की इजाजत लेनी पड़ेगी और वह सरकार इजाजत देगी नहीं।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के ऊपर अवमानना की कार्यवाही तभी चल सकती है जब हाई कोर्ट या स्वयं सुप्रीम कोर्ट इसमें स्वतः संज्ञान लेकर मामला दर्ज करे। लेकिन अफसोस की बात है कि इस मुश्किल रास्ते पर जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा अब तक चलती हुई नहीं दिखी हैं।
वहीं, वहीं, दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने कहा कि अरविंद केजरीवाल के लिए यह एक बड़ी जीत है, क्योंकि अंततः जस्टिस स्वर्ण कांता ने आबकारी नीति मामले से खुद को अलग कर लिया है!
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जुलाई के पहले दिन महंगाई से बड़ी राहत, LPG गैस सिलेंडर हुआ सस्ता
साल के दूसरे आधे हिस्से के पहले दिन ही राहत भरी खबर आई है। रिपोर्टों के अनुसार, देश में वर्ष 2026 में पहली बार कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में कटौती की गई है। इसके परिणामस्वरूप राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत 3,000 रुपये से नीचे आ गई है।
इससे पहले पिछले छह महीनों में कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतें सात बार बढ़ाई गई थीं। इस अवधि में कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में 90 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई थी। वहीं, घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में इस बार कोई बदलाव नहीं किया गया है। घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में आखिरी संशोधन 7 जून को किया गया था।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 183.50 रुपये की कमी की गई है, जिसके बाद इसकी कीमत 2,930 रुपये हो गई है। दूसरी ओर, तेल विपणन कंपनियों ने इस बार घरेलू उपभोक्ताओं को कोई राहत नहीं दी है। 14.2 किलोग्राम घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 942 रुपये पर ही बनी हुई है।
इस वर्ष 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इज़राइल के हमलों के बाद वैश्विक स्तर पर गंभीर ऊर्जा संकट पैदा हो गया था। इन हमलों के बाद ईरान ने अपने नियंत्रण वाले होरमुज़ जलडमरूमध्य से कच्चे तेल और गैस ले जाने वाले जहाजों की आवाजाही रोक दी थी। आपूर्ति बाधित होने के कारण दुनिया भर में पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी हुई।
देश के अन्य शहरों में भी कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कमी की गई है। लखनऊ में इसकी कीमत 3,236 रुपये से घटकर 3,052.50 रुपये हो गई है। कोलकाता में अब यह सिलेंडर 3,081.50 रुपये में मिलेगा, जबकि पहले इसकी कीमत 3,255.50 रुपये थी। पटना में भी नई दरें लागू कर दी गई हैं, जहां 19 किलोग्राम कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत 3,227 रुपये हो गई है। इसी बीच केंद्र सरकार ने पेट्रोल निर्यात से जुड़े नियमों में भी संशोधन किया है। 1 जुलाई से पेट्रोल निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) बढ़ाकर 4 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है, जो पहले 1.50 रुपये प्रति लीटर था।
लगातार बढ़ी थीं कीमतें
होरमुज़ जलडमरूमध्य से ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने के बाद भारत में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में लगातार चार बार बढ़ोतरी की गई थी। भारी नुकसान का हवाला देते हुए तेल विपणन कंपनियों ने मार्च में 144 रुपये, अप्रैल में 195.50 रुपये और मई में 993 रुपये की बढ़ोतरी की थी। इसके बाद जून में भी कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 42 रुपये की वृद्धि की गई। इस तरह 19 किलोग्राम कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत चार किस्तों में कुल 1,374.50 रुपये बढ़ गई थी।
वहीं, 14.2 किलोग्राम घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत भी दो चरणों में कुल 89 रुपये बढ़ाई गई थी। तेल विपणन कंपनियों ने पहले मार्च में इसकी कीमत 60 रुपये बढ़ाई और इसके बाद जून में 29 रुपये की अतिरिक्त बढ़ोतरी की।
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गायक गुरु रंधावा के जिम में हुई गोलीबारी मामले में कार्रवाई; दिल्ली पुलिस के साथ मुठभेड़ में 2 शूटर घायल
पंजाबी गायक गुरु रंधावा के दिल्ली स्थित ‘24 HS Fitness’ जिम में हुई गोलीबारी के मामले में दिल्ली पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पश्चिम विहार इलाके में स्थित इस जिम पर 11 जून को हुई फायरिंग की घटना के बाद फरार चल रहे लॉरेंस बिश्नोई गैंग के दो शूटरों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हकीकत और सागर के रूप में हुई है। दोनों को बुधवार रात एक मुठभेड़ (एनकाउंटर) के बाद गिरफ्तार किया गया। बताया जा रहा है कि पुलिस को उनकी मौजूदगी के बारे में खुफिया सूचना मिली थी, जिसके आधार पर कार्रवाई की गई। मुठभेड़ के दौरान दोनों शूटर घायल भी हो गए।
11 जून को हुई गोलीबारी की घटना ने उस समय हड़कंप मचा दिया था, जब कुछ अज्ञात हमलावरों ने गुरु रंधावा के जिम को निशाना बनाते हुए फायरिंग की थी। हालांकि इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई थी, लेकिन इलाके में दहशत का माहौल बन गया था।
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच इस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है। इस केस में अब तक कुल चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इससे पहले पिछले सप्ताह क्राइम ब्रांच ने हरियाणा के बहादुरगढ़ से लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े दो अन्य शूटरों को भी गिरफ्तार किया था।
पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि गोलीबारी के पीछे असली मकसद क्या था और क्या इस घटना का संबंध किसी धमकी, रंगदारी या गैंगवार से जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसियां गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर गैंग के अन्य सदस्यों और साजिश से जुड़े लोगों के बारे में जानकारी जुटा रही हैं।
फिलहाल दिल्ली पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और जल्द ही इस केस से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।
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प्रधानमंत्री मोदी ने कोलकाता में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस समारोह का किया नेतृत्व, ‘स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग’ पर दिया जोर
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने रविवार को कोलकाता के प्रतिष्ठित Red Road पर आयोजित 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के राष्ट्रीय समारोह का नेतृत्व किया। इस अवसर पर हजारों लोगों ने एक साथ योगाभ्यास कर स्वास्थ्य, संतुलित जीवनशैली और समग्र कल्याण का संदेश दिया।
इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम “स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग” रखी गई है। इसका उद्देश्य जीवन के हर चरण में शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन और सक्रिय जीवनशैली को बढ़ावा देना है। बढ़ती जीवन प्रत्याशा और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के बीच योग को स्वस्थ और गुणवत्तापूर्ण जीवन का प्रभावी माध्यम बताया जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि योग केवल एक व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करने वाली जीवन पद्धति है। उन्होंने कहा कि भारत की हजारों वर्ष पुरानी योग परंपरा आज पूरी दुनिया को स्वस्थ जीवन का मार्ग दिखा रही है।
भारत और योग का संबंध सदियों पुराना है। भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं में रचा-बसा योग आज एक वैश्विक आंदोलन बन चुका है। योग के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2014 में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया था। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा संयुक्त राष्ट्र महासभा में रखे गए प्रस्ताव को 175 देशों का अभूतपूर्व समर्थन मिला था।
पहला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 21 जून 2015 को मनाया गया था। तब से लेकर अब तक यह दुनिया की सबसे बड़ी जन-स्वास्थ्य पहलों में शामिल हो चुका है, जिसमें हर वर्ष करोड़ों लोग भाग लेते हैं।
12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर भारत सहित दुनिया के अनेक देशों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस अवसर ने एक बार फिर योग के सार्वभौमिक संदेश—स्वास्थ्य, शांति और सद्भाव—को दुनिया के सामने मजबूती से प्रस्तुत किया।
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