Punjab
भगवंत मान सरकार धान सीजन के दौरान किसानों को निर्बाध 8 घंटे बिजली सप्लाई सुनिश्चित कर रही है: तरुनप्रीत सिंह सौंद
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार की किसानों के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराते हुए आज बिजली मंत्री स.तरुनप्रीत सिंह सौंद ने कहा कि पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) द्वारा आगामी धान बुवाई सीजन के दौरान किसानों को निर्बाध 8 घंटे बिजली सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए व्यापक और आवश्यक प्रबंध किए गए हैं।
बिजली मंत्री स.तरुनप्रीत सिंह सौंद ने कहा, “मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार द्वारा विभिन्न जिलों के लिए धान सीजन संबंधी जारी किए गए शेड्यूल के अनुसार 8 घंटे बिजली सप्लाई सुनिश्चित की जाएगी। यह समय-सारणी 1 जून से गुरदासपुर, पठानकोट, अमृतसर, तरनतारन, रूपनगर, एसएएस नगर, फतेहगढ़ साहिब और होशियारपुर जिलों में लागू होगी, जबकि 5 जून से फरीदकोट, बठिंडा, फिरोजपुर, श्री मुक्तसर साहिब और फाजिल्का जिलों में लागू की जाएगी। इसके अतिरिक्त 9 जून से लुधियाना, मलेरकोटला, मानसा, मोगा, पटियाला, संगरूर, बरनाला, कपूरथला, जालंधर और एसबीएस नगर जिलों में प्रतिदिन 8 घंटे से अधिक बिजली उपलब्ध करवाई जाएगी।”
उन्होंने आगे कहा, “राज्य सरकार ने कृषि क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है और धान सीजन के दौरान किसानों की सुविधा के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।”
तरुनप्रीत सिंह सौंद ने बताया, “मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के निर्देशों के अनुसार पीएसपीसीएल राज्य में कृषि हेतु जारी प्रत्येक मोटर कनेक्शन को प्रतिदिन 8 घंटे से अधिक बिजली उपलब्ध करवाना सुनिश्चित करेगा, ताकि किसान बिना किसी परेशानी के धान की रोपाई सुचारू रूप से कर सकें।”
उन्होंने कहा, “पंजाब के मेहनती किसान देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और राज्य सरकार इस महत्वपूर्ण समय के दौरान उन्हें हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।”
मंत्री ने आगे कहा, “बिजली वितरण प्रणाली की निरंतर निगरानी के लिए पूरे राज्य में पीएसपीसीएल के अधिकारियों और तकनीकी स्टाफ की समर्पित टीमें तैनात की गई हैं। फील्ड अधिकारियों को 24 घंटे उपलब्ध रहने तथा किसी भी प्रकार की खराबी, ट्रांसफार्मर संबंधी समस्याओं और अन्य तकनीकी दोषों का प्राथमिकता के आधार पर तुरंत समाधान सुनिश्चित करने के विशेष निर्देश जारी किए गए हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “धान रोपाई के दौरान किसानों की शिकायतों का तुरंत समाधान सुनिश्चित करने के लिए समर्पित कंट्रोल रूम तथा शिकायत निवारण तंत्र को और अधिक मजबूत किया गया है।”
तरुनप्रीत सिंह सौंद ने कहा, “पीएसपीसीएल ने पहले ही ट्रांसमिशन लाइनों, ट्रांसफार्मरों तथा अन्य बिजली ढांचे के आवश्यक रखरखाव संबंधी कार्य पूरे कर लिए हैं ताकि मांग के इस सीजन के दौरान अनावश्यक बाधाओं से बचा जा सके।”
बिजली मंत्री ने आगे कहा, “पंजाब सरकार राज्य में बिजली ढांचे को और मजबूत करने के लिए लगातार कार्य कर रही है तथा सभी क्षेत्रों, विशेषकर कृषि क्षेत्र को आवश्यक बिजली उपलब्ध करवाना भगवंत मान सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक है।”
किसानों से बिजली का समझदारी से उपयोग करने और पीएसपीसीएल द्वारा जारी शेड्यूल का पालन करने की अपील करते हुए उन्होंने भरोसा दिलाया, “राज्य सरकार किसान भाईचारे के हितों की रक्षा और पूरे पंजाब में धान सीजन को सफल एवं सुचारू बनाने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ेगी
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पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ाकर भाजपा ने देश की जनता को फिर दिया महंगाई का तोहफा: बलतेज पन्नू
आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के प्रदेश मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने पेट्रोल-डीजल की आसमान छूती कीमतों को लेकर भाजपा पर तीखा हमला बोला है। पन्नू ने कहा कि भाजपा ने देश के लोगों को आज फिर महंगाई का एक बेरहम तोहफा दे दिया है। केंद्र सरकार ने एक बार फिर डीजल की कीमतों में 2.71 रुपये और पेट्रोल में 2.61 रुपये प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी कर दी है।
उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा कि पिछले महज 10 दिनों के अंदर ही पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 7.50 रुपये प्रति लीटर की बड़ी बढ़ोतरी की जा चुकी है। भाजपा की ये जन-विरोधी नीतियां न सिर्फ किसानों के लिए घातक हैं, बल्कि व्यापार जगत की भी कमर तोड़ रही हैं। आज देश का हर आम आदमी इस कमरतोड़ महंगाई के बोझ तले दबा हुआ है।
पंजाब भाजपा अध्यक्ष सुनील जाखड़ पर निशाना साधते हुए बलतेज पन्नू ने सवाल किया कि जाखड़ साहब आखिर किस मुंह से नगर निगम चुनावों में भाजपा के लिए वोट मांग रहे हैं? जाखड़ साहब को पंजाब और देश की जनता को जवाब देना चाहिए कि बीते कुछ दिनों में पेट्रोल-डीजल के दाम 7.50 रुपये बढ़ाने के बाद उनके पास ऐसी कौन सी उपलब्धि है, जिसे लेकर वे पंजाब के लोगों के बीच जा रहे हैं। पंजाब की जनता इस धोखे को अच्छी तरह समझती है और वह इस लूट के खिलाफ चुनावों में भाजपा को उसकी सही जगह दिखाएगी।
‘आप’ नेता ने आगे कहा कि पंजाब सीधे तौर पर किसानी से जुड़ा हुआ प्रदेश है और प्रदेश में जल्द ही धान का सीजन शुरू होने वाला है। इस अहम समय से ठीक पहले किसानों पर डीजल और पेट्रोल का यह भारी-भरकम बोझ डालना केंद्र सरकार की सोची-समझी साजिश है। भाजपा की यह हरकत बिल्कुल उसी तरह की तानाशाही है, जिस तरह केंद्र सरकार पहले तीन काले कृषि कानून लेकर आई थी। किसानों को आर्थिक रूप से बर्बाद करने की भाजपा की इस बेरहम मानसिकता को पंजाब के लोग कभी बर्दाशत नहीं करेंगे और इसका मुंहतोड़ जवाब देंगे।
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मोदी सरकार की नीतियां किसानों, पंजाब और आम जनता के खिलाफ, देश को बना रही हैं आर्थिक गुलाम: कुलदीप धालीवाल
आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के मुख्य प्रवक्ता और विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल ने पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की नीतियां किसानों, पंजाब और आम जनता के खिलाफ हैं, जिसकी वजह से फ्यूल की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है।
सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान धालीवाल ने कहा कि उन्होंने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर पहले ही चेतावनी दी थी, जो अब सच साबित हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की इंटरनेशनल ट्रेड पॉलिसी और बड़े कॉर्पोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने वाले फैसले देश के लोगों के लिए महंगे फ्यूल की वजह हैं।
धालीवाल ने कहा कि किसानों की फसलों के मिनिमम सपोर्ट प्राइस (एमएसपी) में मामूली बढ़ोतरी की गई है, जबकि डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की गई है। इससे खेती की लागत और बढ़ेगी। उन्होंने आशंका जताई कि महंगे फ्यूल का सीधा असर सब्जियों, रोजमर्रा की जरूरतों और ट्रांसपोर्ट की लागत पर पड़ेगा, जिससे आम और मिडिल क्लास परिवारों की परेशानियां बढ़ेंगी।
भाजपा नेताओं पर निशाना साधते हुए धालीवाल ने कहा कि भाजपा नेता वैट कम करने की बात करते हैं, लेकिन यह नहीं बताते कि केंद्र सरकार ने फ्यूल पर कितना भारी टैक्स लगाया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि तेल कंपनियों और केंद्र सरकार की नीतियों के कारण जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
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‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के तहत पंजाब में हाई-रिस्क डिलीवरी और नवजात शिशु देखभाल को मिला बड़ा सहारा
पंजाब में भगवंत मान सरकार की ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के माध्यम से हाई-रिस्क गर्भावस्था एवं नवजात शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को विशेष रूप से मज़बूती मिल रही है। यह योजना जटिल प्रसव और गम्भीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं के इलाज को परिवारों के लिए बिना किसी आर्थिक बोझ के सुलभ बना रही है।
भारत के राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5) पर आधारित एक महत्त्वपूर्ण अध्ययन के अनुसार, देश में लगभग हर दो में से एक गर्भावस्था हाई-रिस्क श्रेणी में आती है।परिस्थितियाँ जैसे कि शिक्षा का अभाव,गरीबी, दो गर्भधारण के बीच कम अंतराल, पूर्व प्रसव जटिलताएँ तथा पहले हुए सिजेरियन ऑपरेशन माँ और शिशु दोनों के लिए रिस्क पैदा करते हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि सामाजिक और आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों की महिलाएँ सबसे अधिक रिस्क का सामना करती हैं, जिससे मातृ स्वास्थ्य सेवाओं और जागरूकता कार्यक्रमों को और मज़बूत करने की आवश्यकता स्पष्ट होती है।
सेहत-कार्ड उन महिलाओं के लिए एक महत्त्वपूर्ण सहारा बनकर उभरा है, जिन्हें प्रसव के दौरान लंबे समय तक प्रसव पीड़ा, स्वास्थ्य समस्याएँ, भ्रूण की अस्वस्थ स्थिति या पूर्व सिजेरियन डिलीवरी की समस्याओं के कारण ऑपरेशन संबंधी चिकित्सा की आवश्यकता पड़ती है। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी से प्राप्त आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार 25 मई, 2026 तक योजना के तहत मातृत्व एवं नवजात देखभाल के कुल 7300 मामलों में इलाज प्रदान किया गया, जिन पर लगभग ₹7.04 करोड़ ख़र्च हुए। इनमें 5,300 हाई-रिस्क सिजेरियन डिलीवरी के मामले शामिल रहे, जिन पर ₹6.37 करोड़ ख़र्च किए गए। यह आँकड़े पंजाब में हाई-रिस्क गर्भावस्था और आपातकालीन प्रसूति सेवाओं में योजना की बढ़ती भूमिका को दर्शाते हैं।
पटियाला की 28 वर्षीय लाभार्थी दीपिका, जिन्हें गर्भावस्था के दौरान एनीमिया सहित कई जटिलताओं का सामना करना पड़ा, व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताती हैं कि उनका सिजेरियन ऑपरेशन सेहत-कार्ड के तहत पूरी तरह से कैशलेस हुआ। उनके पति मनोज ने कहा कि पूरा इलाज बिना किसी आर्थिक बोझ के सुचारु रूप से सम्पन्न हुआ, जो उनके लिए राहत की बात है।
इसी तरह 31 वर्षीय दीक्षा सोनकर ने अपने तीसरे बच्चे के जन्म के दौरान ‘पंजाब इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़’ अस्पताल में समय पर मातृत्व एवं नवजात देखभाल प्राप्त की, जहाँ पूरा इलाज योजना के तहत कैशलेस हुआ। उनके पति विकास सोनकर ने कहा, “हमारी पहले से दो बेटियाँ हैं और हम चिंतित थे कि तीसरी डिलीवरी में कोई जटिलता न हो।”
विकास बताते हैं कि परिवार में किसी के अस्पताल जाने की नौबत आते ही आर्थिक तनाव बढ़ जाता है। उन्होंने कहा, “जब भी मेडिकल इमरजेंसी आती है, तो हम जैसे परिवारों के लिए यह एक चिंता का विषय होता है।” दैनिक मज़दूरी करने वाले विकास आगे बताते हैं कि ऐसे समय में हमें ब्याज पर पैसे उधार लेने पड़ते हैं;जो इस कठोर वास्तविकता को दर्शाता है कि स्वास्थ्य सेवाओं का ख़र्च उठाने के लिए निम्न-आय वर्ग के श्रमिकों को किस प्रकार संघर्ष करना पड़ता है। वे कहते हैं,”लेकिन, सेहत कार्ड के कारण इस बार पूरा इलाज बिना किसी चिंता के हो गया।”
मातृत्व सेवाओं के साथ-साथ यह योजना गंभीर रूप से बीमार और समय से पहले जन्मे नवजात शिशुओं के लिए विशेष चिकित्सा सहायता भी उपलब्ध करवा रही है।
राज्य स्वास्थ्य एजेंसी,पंजाब के आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, योजना के तहत विभिन्न पैकेजों में कुल 2,094 नवजात शिशुओं का उपचार किया गया। बेसिक नियोनेटल केयर, जो उन शिशुओं को सहायता प्रदान करती है जिनका उपचार उनकी माताओं के साथ-साथ किया जाता है, के अंतर्गत 881 नवजातों का इलाज हुआ, जिन पर ₹5.82 लाख ख़र्च हुए।
इसी प्रकार,अल्प अवधि के इंटेंसिव केयर यूनिट उपचार की आवश्यकता वाले 777 नवजातों को स्पेशल नियोनेटल केयर पैकेज के तहत लाभ मिला, जिस पर ₹28.27 लाख ख़र्च हुए। इंटेंसिव नियोनेटल केयर पैकेज के अंतर्गत 207 नवजातों को कन्टीन्यूअस पॉज़िटिव एयरवे प्रेशर (CPAP) सपोर्ट, 24 घंटे से कम वेंटिलेशन तथा नवजात संक्रमण जैसी गंभीर स्थितियों के उपचार हेतु सहायता दी गई, जिस पर ₹15.65 लाख ख़र्च किए गए।
आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, 1,200 से 1,499 ग्राम वजन वाले अथवा लंबे समय तक वेंटिलेटर सहायता की आवश्यकता वाले 116 अत्यंत संवेदनशील नवजातों को एडवांस्ड नियोनेटल केयर प्रदान की गई, जिस पर ₹9.30 लाख ख़र्च हुए।
इसके अतिरिक्त, समयपूर्व जन्म, बहु-अंग जटिलताओं या गंभीर चिकित्सीय अस्थिरता से जूझ रहे 64 नवजातों को क्रिटिकल नियोनेटल केयर उपलब्ध करवाई गई, जिस पर ₹7.88 लाख ख़र्च हुए। इसके अलावा,18 नवजातों को दीर्घकालिक क्रॉनिक नियोनेटल केयर सहायता भी प्रदान की गई। इसके अलावा, दीर्घकालिक नवजात देखभाल के तहत 17 शिशुओं को शामिल किया गया, जिन्हें ब्रोंकोपल्मोनरी डिस्प्लेसिया और नेक्रोटाइजिंग एंटेरोकोलाइटिस जैसी गम्भीर स्थितियों के लिए लंबे समय तक इलाज की आवश्यकता पड़ी, जिसकी लागत ₹56 हज़ार रही।
‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ राज्यभर के परिवारों के लिए एक बड़े स्वास्थ्य सुरक्षा कवच के रूप में उभर रही है। अब तक इस योजना के तहत लगभग 44.8 लाख रजिस्ट्रेशन की जा चुकी हैं।
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