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भगवंत मान सरकार ने ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ का किया विस्तार; निजी अस्पतालों में 17 और इलाजों को मंजूरी, अकेले रहने वाले व्यक्तियों को भी मिलेगा कैशलेस इलाज
लोगों तक स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर ढंग से पहुंचाने और सरकारी अस्पतालों पर बढ़ते बोझ को कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए भगवंत मान सरकार ने ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के तहत सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में 17 और मेडिकल प्रक्रियाओं को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही योजना का दायरा बढ़ाकर अकेले रहने वाले व्यक्तियों को भी इसमें शामिल किया गया है। यह फैसला राज्य की स्वास्थ्य बीमा योजना के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
पंजाब के अनगिनत परिवारों के लिए अस्पताल जाना अक्सर लंबी कतारों, भीड़-भाड़ वाले वार्डों और इलाज के लिए लंबी प्रतीक्षा करना माना जाता है। इस बोझ को कम करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को और व्यापक बनाते हुए उन 17 मेडिकल प्रक्रियाओं को सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में कराने की अनुमति दे दी है, जो पहले केवल सरकारी अस्पतालों तक सीमित थीं।
इस फैसले से केवल सरकारी अस्पतालों के लिए आरक्षित प्रक्रियाओं की सूची और छोटी हो गई है और अब लाभार्थियों को काफी बड़े स्वास्थ्य सेवा नेटवर्क से इलाज कराने का अवसर मिलेगा। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि इससे खासकर उन जिलों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता में सुधार होगा, जहां विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं सीमित हैं या सरकारी अस्पतालों पर अधिक मरीजों की निर्भरता है। उन्होंने कहा, “इससे बड़े सरकारी अस्पतालों पर दबाव घटेगा, प्रतीक्षा समय कम होगा और मरीजों को समय पर इलाज मिल सकेगा।”
नई स्वीकृत प्रक्रियाएं विभिन्न मेडिकल विशेषताओं से संबंधित हैं, जिससे लोगों को भीड़-भाड़ वाले बड़े अस्पतालों में परेशान होने की बजाय अपने घर के नजदीक ही इलाज मिल सकेगा।
कान, नाक और गला (ईएनटी) इलाज के तहत अब सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में नाक की हड्डी के फ्रैक्चर की सेटिंग और एडेनोइडेक्टोमी जैसे ऑपरेशन कराए जा सकेंगे। ये आम ऑपरेशन हैं, जिनमें खास तौर पर बच्चों और दुर्घटना पीड़ितों के लिए समय पर इलाज जरूरी होता है।
जनरल सर्जरी के क्षेत्र में सबसे बड़ा विस्तार किया गया है। हाइड्रोसील ऑपरेशन, फोड़े का इलाज, एपेंडिक्स सर्जरी और ओपन तथा लैप्रोस्कोपिक दोनों तरह की गॉल ब्लैडर सर्जरी अब योजना के तहत सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में उपलब्ध होंगी। इससे मरीजों की प्रतीक्षा घटेगी और घर के नजदीक इलाज का लाभ मिलेगा।
महिला स्वास्थ्य सेवाओं को भी विशेष प्राथमिकता दी गई है। विस्तारित सूची में 12 सप्ताह से अधिक समय के गर्भपात संबंधी प्रक्रिया, हिस्टेरोटॉमी, गर्भावस्था से जुड़ी समस्याओं के लिए अस्पताल में भर्ती और नाबालिग लड़कियों, अविवाहित यौन रूप से निष्क्रिय महिलाओं और यौन शोषण की पीड़िताओं की एनेस्थीसिया के तहत जांच को शामिल किया गया है।
इन सेवाओं के शामिल होने से जरूरतमंद और कमजोर वर्गों को और अधिक आसानी से एवं समय पर इलाज मिल सकेगा। इसी तरह नेत्र रोग और ऑर्थोपेडिक सेवाओं को भी मजबूत किया गया है। अब पटेरीजियम एक्सीजन और एंट्रोपियन करेक्शन जैसी आंखों से संबंधित प्रक्रियाएं भी निजी अस्पतालों में कराई जा सकेंगी। वहीं ऑर्थोपेडिक मरीजों को टेंडन रिलीज, छोटे जोड़ों की चोटों के इलाज और टखने के फ्रैक्चर के ऑपरेशन जैसी सर्जरी का लाभ मिलेगा। इन नई प्रक्रियाओं के पैकेज रेट 2,000 रुपये से 27,800 रुपये तक निर्धारित किए गए हैं।
इस एलान के साथ योजना के दायरे का एक और महत्वपूर्ण विस्तार किया गया है। अब अकेले रहने वाले व्यक्ति, जिनमें वरिष्ठ नागरिक, विधवाएं और स्वतंत्र रूप से रहने वाले अन्य व्यक्ति शामिल हैं, भी इस योजना का लाभ ले सकेंगे।
सबके लिए उपलब्ध यह स्वास्थ्य बीमा प्रोग्राम पहले केवल दो या अधिक सदस्यों वाले परिवारों तक सीमित था। अब इसका लाभ उन माता-पिता को भी मिलेगा जिनके बच्चे विदेशों में रहते हैं। आवेदन देने के लिए पंजाब का आधार कार्ड और वोटर पहचान पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा, जबकि 18 वर्ष से कम उम्र के आवेदकों को जन्म प्रमाण पत्र देना होगा। अकेले रहने वाले व्यक्तियों को नामांकन के लिए एक घोषणा पत्र जमा करवाना होगा, जिसकी सत्यापन स्थानीय निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा की जाएगी।
राज्य स्वास्थ्य एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान समय में लगभग 65 लाख परिवार इस योजना के तहत कवर किए जा चुके हैं। इस समय 824 अस्पताल, जिनमें सरकारी, केंद्र सरकार के और सूचीबद्ध निजी अस्पताल शामिल हैं, योजना के तहत इलाज प्रदान कर रहे हैं। लगभग 2,300 बीमारियों और मेडिकल प्रक्रियाओं को कवर करने वाली और लगातार विकसित होती हुई मुख्यमंत्री सेहत योजना पंजाब के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुरक्षा कवच बन चुकी है, जो पहले से कहीं अधिक लोगों तक कैशलेस इलाज की सुविधा पहुंचा रही है।
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ई-20 पेट्रोल से वाहनों के नुकसान का मुद्दा पंजाब विधानसभा में गूंजा
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज पंजाब विधानसभा में ई-20 इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल का मुद्दा उठाते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने संसद में यह मानने के बावजूद कि ई-20 से वाहनों की माइलेज घटती है, इसे जबरदस्ती थोपा है। उन्होंने कहा कि इस कदम से वाहन मालिकों पर वित्तीय बोझ पड़ रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि इसे लागू करने में इतनी जल्दबाजी क्यों की गई है और आरोप लगाया कि इसका मकसद अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते के हितों की पूर्ति करना है, जिसके तहत भारत अगले पाँच सालों में 20 अरब डॉलर का इथेनॉल आयात करेगा। इस बात पर जोर देते हुए कि उपभोक्ताओं को चुनाव के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता, पंजाब विधानसभा ने केंद्र सरकार से फ्यूल स्टेशनों पर शुद्ध पेट्रोल और ई-20 दोनों उपलब्ध कराने और आम लोगों के हितों की रक्षा के लिए ई-20 की कीमत घटाने की मांग करता हुआ एक प्रस्ताव पारित किया।
अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब विधानसभा सत्र के दौरान, मैंने उपभोक्ताओं पर ई-20 इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल थोपे जाने और इससे लोगों के वाहनों को हो रहे नुकसान का गंभीर मुद्दा उठाया। यह तेल केंद्र सरकार द्वारा बिना किसी वैज्ञानिक अध्ययन के थोपा गया है। एक सर्वेक्षण के अनुसार, इससे 67 फीसदी वाहनों की माइलेज घटी है, जबकि 45 फीसदी वाहनों के इंजन खराब हुए हैं, जिससे आम लोगों पर सीधा वित्तीय बोझ पड़ा है।”
उन्होंने पोस्ट के अंत में लिखा, “केंद्र सरकार ने स्वयं संसद में माना है कि ई-20 पेट्रोल वाहनों की माइलेज घटाता है। यह सब अमेरिका के साथ हुए एक बड़े व्यापार समझौते के हितों की पूर्ति करने और कॉरपोरेट कंपनियों को लाभ पहुँचाने के लिए किया जा रहा है। हमारी मांग है कि फ्यूल स्टेशनों पर उपभोक्ताओं को शुद्ध पेट्रोल और ई-20 के बीच चयन करने का अधिकार दिया जाए और ई-20 की कीमत तुरंत घटाई जाए। पंजाब विधानसभा ने आम लोगों के हितों की रक्षा के लिए इस मुद्दे पर प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेज दिया है। इंकलाब जिंदाबाद।”
विधानसभा में इस मुद्दे पर बहस को समेटते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “यह देश के हर नागरिक के लिए गंभीर चिंता का विषय है। ई-20 इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल बिना किसी उचित शोध, वैज्ञानिक अध्ययन या सलाह-मशवरे के वाहन मालिकों पर थोपा गया है। केंद्र सरकार ने यह साबित करने के लिए कोई अध्ययन नहीं किया और न ही किसी इंजीनियरिंग कॉलेज या आई.आई.टी. से प्रमाण-पत्र लिया है कि ई-20 पेट्रोल वाहनों के इंजनों के लिए सुरक्षित है।”
केंद्र पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “ई-10 पेट्रोल पर चलने के लिए डिज़ाइन किए गए इंजनों को व्यापक विरोध के बावजूद मनमाने ढंग से ई-20 पर तब्दील कर दिया गया। 45,000 से अधिक वाहनों के सर्वेक्षण के अनुसार, 67 फीसदी ने माइलेज में भारी गिरावट दर्ज की, जबकि 45 फीसदी इंजन खराब हो गए हैं। यह आम लोगों, जो सालों की बचत और किश्तों पर वाहन खरीदते हैं, की खून-पसीने की कमाई की खुली लूट के अलावा कुछ नहीं है।”
वाहन मालिकों पर पड़ रहे बोझ का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “पहले तो आम लोग बड़ी मुश्किल से वाहन खरीदते हैं और फिर उन्हें इस नीति के कारण मरम्मत का अतिरिक्त बोझ झेलना पड़ता है। यह बहुत अफसोसजनक है कि केंद्र सरकार ई-20 के नाम पर लोगों को गुमराह कर रही है। आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी यह मुद्दा उठाया है और दो लाख से अधिक हस्ताक्षर वाली जनता की याचिका तैयार की है, जो वे प्रधानमंत्री को सौंपने जा रहे हैं।”
केंद्र के अपने कबूलनामे का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, “शुरू में केंद्र सरकार ने दावा किया था कि सिर्फ वाहन निर्माता ही माइलेज का निर्धारण कर सकते हैं। लेकिन हर चालक अपने वाहन की माइलेज देख सकता है, जो आधुनिक वाहनों के डैशबोर्ड पर दिखाई देती है। केंद्र ने अब संसद में मान लिया है कि ई-20 पेट्रोल माइलेज को छह फीसदी तक घटा सकता है और यह वाहनों के इंजनों को प्रभावित करता है।”
इस नीति के उद्देश्य पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “यह सिर्फ इथेनॉल के बारे में नहीं, बल्कि इस संबंध में अमेरिका के साथ व्यापार समझौते से है। इस समझौते के तहत भारत अगले पाँच सालों में इथेनॉल के आयात को पाँच गुना बढ़ाकर लगभग एक अरब लीटर से पाँच अरब लीटर करेगा, जो कि लगभग 20 अरब डॉलर बनता है। अमेरिका इथेनॉल का दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक है और भारत को यह बोझ उठाने के लिए मजबूर किया जा रहा है।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को डोनाल्ड ट्रंप के आगे झुकने और उनकी हर बात को स्वीकार करने के लिए क्यों मजबूर किया जा रहा है? अमेरिकी किसान अपनी अतिरिक्त पैदावार का निपटारा कर रहे हैं, जबकि भारतीय उपभोक्ताओं को उसकी कीमत चुकाने के लिए मजबूर किया जा रहा है।”
केंद्र सरकार की विदेश नीति की निंदा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “केंद्र के फैसले बड़े कॉरपोरेट घरानों के हितों को ध्यान में रखकर लिए जा रहे हैं। स्थिति अब यह बन चुकी है कि भारत को कहाँ से कच्चा तेल खरीदना है और कहाँ से नहीं, यह अमेरिका तय करता है। ऑपरेशन सिंधूर के दौरान भी, अमेरिका ने भारत और पाकिस्तान से संबंधित विकास की घोषणा की थी, जिससे हमारी विदेश नीति पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।”
इसे लागू करने की समय-सीमा पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “केंद्र ने असल में 2030 तक ई-20 को लागू करने की योजना बनाई थी। 2026 में इसे लागू करने की क्या जल्दी थी? उन्होंने ई-20 से शुरुआत की है और ई-25 तथा ई-50 को लागू करने से पहले विवाद के ठंडा पड़ने का इंतज़ार कर रहे हैं।”
विधानसभा के रुख को उजागर करते हुए उन्होंने कहा, “पंजाब विधानसभा ने इस गंभीर राष्ट्रीय मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की है। भाजपा सदस्यों ने हिस्सा न लेने का फैसला किया, लेकिन हम लोगों के हितों की रक्षा के लिए इस लड़ाई का नेतृत्व कर रहे हैं। उपभोक्ताओं को शुद्ध पेट्रोल और ई-20 में से एक चुनने की छूट होनी चाहिए। पहले, लोग लैड और अनलेड पेट्रोल में से एक चुन सकते थे। यह फैसला लोगों की मर्जी को ताक पर रखकर जबरन उन पर थोपा गया है।”
इस नीति की तुलना टोल प्लाज़ा से करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “दुनिया भर में, लोगों के पास टोल सड़कों या बिना टोल वाली सड़कों का चयन करने का विकल्प होता है। जब नागरिक पहले ही रोड टैक्स अदा करते हैं, तो उन्हें अलग से टोल टैक्स क्यों देना पड़े? पंजाब सरकार ने 19 टोल प्लाज़ा बंद कर दिए हैं, जिससे यात्रियों को हर रोज़ लगभग 67 लाख रुपये की बचत हो रही है।”
अपनी मांग को दोहराते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “लोगों को तुरंत पेट्रोल पंपों पर शुद्ध पेट्रोल और ई-20 में से एक चुनने की छूट दी जानी चाहिए और ई-20 की कीमत घटाई जानी चाहिए। मैंने प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय और अन्य संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर उनसे आम लोगों के हितों की रक्षा करने की अपील की है।”
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पंजाब देश में सबसे अधिक वेतनमान देने वाले राज्यों में शामिल, कई श्रेणियों में केंद्र सरकार से भी आगे: हरपाल सिंह चीमा
यह रेखांकित करते हुए कि पंजाब पहले से ही देश में सबसे अधिक सरकारी वेतनमान देने वाले राज्यों में शामिल है तथा कई श्रेणियों में केंद्र सरकार से भी अधिक वेतनमान प्रदान कर रहा है, पंजाब के वित्त मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा ने आज यहां कहा कि पूर्ववर्ती शिरोमणि अकाली दल-भाजपा तथा कांग्रेस सरकारों की नीतियों के कारण राज्य को कर्मचारियों के वेतन आयोग के बकायों के रूप में 14,191 करोड़ रुपये की देनदारी विरासत में मिली है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार हाईकोर्ट द्वारा स्वीकृत निपटान योजना के तहत पहले ही 6,000 करोड़ रुपये से अधिक के बकाये का भुगतान कर चुकी है तथा हाईकोर्ट के ताजा फैसले और उपलब्ध कानूनी उपायों का परीक्षण करते हुए सभी संवैधानिक एवं कानूनी रूप से वैध बकायों का भुगतान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
पंजाब भवन में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री चीमा ने कहा कि कर्मचारियों के वेतन आयोग की रिपोर्ट वास्तव में वर्ष 2016 में तत्कालीन अकाली-भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान तैयार की गई थी, लेकिन इसे कई वर्षों तक लागू नहीं किया गया। उन्होंने कहा, “यह रिपोर्ट केवल जुलाई 2021 में लागू की गई। परिणामस्वरूप 1 जनवरी 2016 से जुलाई 2021 तक के महंगाई भत्ते (डीए) के बकाये को स्थगित कर दिया गया, जिससे 14,191 करोड़ रुपये की देनदारी उत्पन्न हो गई।”
वित्त मंत्री ने आगे कहा कि हालांकि तत्कालीन शासनकाल के दौरान वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी, लेकिन तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इन बकाया राशियों में से एक रुपया भी जारी किए बिना अपना कार्यकाल पूरा कर लिया, जिससे पूरा वित्तीय बोझ वर्तमान सरकार पर आ गया।
‘आप’ सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि विभिन्न कर्मचारियों द्वारा हाईकोर्ट का रुख किए जाने के बाद पंजाब सरकार ने एक सुनियोजित निपटान योजना तैयार की, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। उन्होंने कहा, “14,191 करोड़ रुपये की कुल देनदारी में से ‘आप’ सरकार पहले ही कर्मचारियों को 6,000 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान कर चुकी है। हाईकोर्ट ने इस निपटान योजना को स्वीकार कर लिया था और इसे लागू करने का कार्य सुचारु रूप से चल रहा है।”
वर्तमान महंगाई भत्ते (डीए) के वितरण संबंधी हाईकोर्ट के ताजा फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि एकल पीठ की व्याख्या में कुछ संवैधानिक मानदंडों तथा न्यायिक नज़ीरों की अनदेखी की गई प्रतीत होती है।
महाराष्ट्र राज्य के मामले में वर्ष 2005 के संविधान पीठ के फैसले का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि पंजाब इस समय देश में सबसे अधिक वेतनमान प्रदान कर रहा है, जो कई श्रेणियों में केंद्र सरकार के वेतन ढांचे से भी अधिक हैं।
विभिन्न पदों के लिए पंजाब सरकार और केंद्र सरकार के वेतनमानों की तुलना प्रस्तुत करते हुए मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “राज्य सरकार का कानूनी तर्क यह था कि जब राज्य का वेतन ढांचा पहले से ही काफी अधिक हो, तो कोई भी राज्य सरकार एक ही समय में सबसे अधिक मूल वेतनमान और केंद्र की सबसे अधिक डीए दरों—दोनों को बनाए नहीं रख सकती।”
उन्होंने आगे कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार ने स्वयं यह निर्णय लिया था कि नए भर्ती किए गए कर्मचारियों को केंद्रीय वेतन आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत शामिल किया जाएगा।
कर्मचारियों के प्रति पंजाब सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि सभी संवैधानिक एवं कानूनी रूप से वैध बकायों का भुगतान किया जाएगा। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “हमारी कानूनी टीम ताजा फैसले का विस्तृत अध्ययन कर रही है, न्यायिक नज़ीरों की समीक्षा कर रही है तथा उपयुक्त कानूनी रास्ता तय करने के लिए विधि विशेषज्ञों से परामर्श कर रही है, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर करने की संभावना भी शामिल है।”
प्रेस वार्ता का समापन करते हुए मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पूर्ववर्ती अकाली दल-भाजपा और कांग्रेस सरकारों से भारी वित्तीय बोझ विरासत में मिलने के बावजूद पंजाब सरकार सभी बकाया वित्तीय देनदारियों का योजनाबद्ध एवं पारदर्शी तरीके से समाधान करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
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इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल से खराब हुई गाड़ियों की मरम्मत में ₹25,000 से ₹50,000 का खर्च आता है: हरपाल सिंह चीमा
भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए, पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने मंगलवार को अप्रैल 2026 से 20 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंड (ई-20 पेट्रोल) को ज़बरदस्ती लागू करने की आलोचना की, जबकि असल में डेडलाइन 2030 से आगे बढ़ा दी गई थी। वह अपने पेश किए गए प्रस्ताव के समर्थन में सदन में बोल रहे थे। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यूएस दुनिया का 60 परसेंट इथेनॉल बनाता है जबकि भारत सिर्फ़ 5 परसेंट बनाता है। चीमा ने भाजपा की केंद्र सरकार पर भारतीय उपभोक्ताओं और गाड़ी मालिकों की कीमत पर यीएस और डोनाल्ड ट्रंप के सामने सरेंडर करने का आरोप लगाया।
राज्य में इस मुद्दे की गंभीरता पर ध्यान देते हुए, कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “पंजाब ट्रांसपोर्ट विभाग के पास अभी 1,25,88,851 रजिस्टर्ड टू-व्हीलर, फोर-व्हीलर और कमर्शियल गाड़ियां हैं, जबकि पड़ोसी राज्यों से खरीदी गई कुछ दूसरी गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन प्रोसेस अभी भी चल रहा है। इतनी ज़्यादा पुरानी गाड़ियों वाले राज्यों पर ज़बरदस्ती ई-20 फ्यूल थोपना बहुत भारी पड़ रहा है।”
लोकल मैकेनिकों से मिली जानकारी का हवाला देते हुए, उन्होंने बताया, “इथेनॉल ब्लेंड से खराब हुई कार को ठीक करने का खर्च ₹25,000 से ₹50,000 के बीच है।”
उन्होंने पुरानी गाड़ियों वाले लोगों के लिए दूसरा इंतज़ाम न करने के लिए केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय की भी आलोचना की और चेतावनी दी कि अगर डिलीवरी बॉय और छोटे व्यापारियों की गाड़ियां हर कुछ महीनों में खराब होती रहीं, तो उनकी रोजी-रोटी खतरे में पड़ जाएगी।
मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने दावा किया, “केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी संसद में माना था कि फ्यूल माइलेज में 6% की कमी आई है, जबकि असल में एफिशिएंसी का नुकसान बहुत ज़्यादा है। घरेलू वैज्ञानिकों, मैन्युफैक्चरर्स, सांसदों या आम जनता से सलाह किए बिना देश पर ऐसी पॉलिसी थोपना निंदनीय है। यह पॉलिसी देश को कॉर्पोरेट हितों के लिए बेच रही है।”
उन्होंने आगे कहा, “इथेनॉल बनाने में बहुत पानी लगता है, जो पंजाब के पहले से ही गिरते भुमिगत पानी लेवल के लिए एक गंभीर खतरा है।”
भारी जन विरोध को हाईलाइट करते हुए, मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने हाल ही में आप के नेशनल कन्वीनर अरविंद केजरीवाल द्वारा दिल्ली में ऑर्गनाइज़ किए गए एक डायलॉग का ज़िक्र किया, जिसमें 4,000 से 5,000 लोग शामिल हुए थे और 7 लाख लोगों ने इसे ऑनलाइन देखा था। उन्होंने बताया, “उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, पंजाब और राजस्थान के मैकेनिक और एक्सपर्ट्स ने हिस्सा लिया और इस बात पर अपनी आवाज़ उठाई कि यह पॉलिसी कंज्यूमर्स के लिए कितनी नुकसानदायक है, जिससे यह साबित होता है कि यह एक ज़रूरी और ज़रूरी नेशनल मुद्दा है जिस पर तुरंत दोबारा विचार करने की ज़रूरत है।”
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