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Haryana

पत्रकारों से बात करते वक्त Anup Dhanak हुए भावुक, कहा कि “मैं अनुसूचित जाति परिवार से हूं “

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हरियाणा में नेता रह चुकीं और दुष्यंत चौटाला की मां नैना चौटाला ने कुछ ऐसा कहा जिससे मंत्री रहे Anup Dhanak परेशान हो गए। नैना की बातें सुनने के बाद जब अनूप ने पत्रकारों से बात की तो वे काफी भावुक हो गए। नैना चौटाला ने कहा कि उन्होंने अनूप को प्यार और सम्मान दिया, लेकिन उन्हें लगता है कि वे वाकई चालाक हैं और भरोसेमंद नहीं हैं। उन्होंने उनकी तुलना एक ऐसे सांप से की जो अच्छा होने का दिखावा तो करता है लेकिन कभी-कभी बुरा भी हो सकता है। उनका मानना ​​है कि सांप भी बेहतर होता है क्योंकि कम से कम आपको पता होता है कि वह आपको कब काट सकता है।

उन्हें लगता है कि अनूप अच्छे नहीं हैं और देखने में भी डरावने सांप जैसे बुरे लगते हैं और उनकी कोई कीमत नहीं है, जैसे कोई छोटा जानवर बिक रहा हो। अनूप धानक ने काफी परेशान होकर कहा कि वे एक खास परिवार से आते हैं, जिन्हें कभी-कभी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इस वजह से उनका मानना ​​है कि कुछ लोग उन्हें जानबूझकर गांवों और सामुदायिक स्थानों पर जाने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं। नैना चौटाला ने कहा कि वे किसी खास व्यक्ति के बारे में बात नहीं करना चाहतीं। उन्होंने बताया कि वह उस परिवार के लिए लंबे समय से काम कर रही हैं, करीब 20 से 25 साल, और हमेशा नैना चौटाला को मां की तरह मानती हैं। नैना ने यह भी बताया कि किसी महत्वपूर्ण मीटिंग में जाने से पहले वह उनके पैर छूकर सम्मान जताते थे। उन्होंने बताया कि उन्होंने पार्टी को गलत तरीके से नहीं छोड़ा, बल्कि पांच साल तक पार्टी का हिस्सा रहने के बाद उन्होंने पार्टी छोड़ दी। वह आज भी वैसी ही दिखती हैं, जैसी 20 साल पहले दिखती थीं। भले ही उन्हें नैना चौटाला की बातों से दुख होता है, लेकिन वह आज भी उनका सम्मान करती हैं।

अनूप धानक ने कहा कि चूंकि वह गरीब परिवार से हैं, इसलिए कुछ लोग उन्हें बोलने नहीं देते और कई बार तो उनसे माइक्रोफोन भी छीन लेते हैं। उन्हें लगता है कि मतदाता लाठी-डंडे से लड़ने के बजाय समझदार हैं और देखते हैं कि क्या हो रहा है। इसलिए वे अपने वोट का इस्तेमाल उन बुरे लोगों को रोकने के लिए करेंगे।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर कोई वोट मांग सकता है और अलग-अलग गांवों में लोगों से बात कर सकता है। लेकिन चूंकि वह गरीब हैं, इसलिए कुछ लोग उन्हें ऐसा करने से रोकना चाहते हैं। उन्हें आश्चर्य है कि क्या गरीब परिवार में पैदा होना गलत है। उन्होंने यह भी कहा कि जो भी उनसे नाराज है, उसके साथ वह शांति बनाने की कोशिश करेंगे और अगर उन्होंने कुछ गलत किया है, तो वह माफी मांगेंगे।

नैना ने कहा कि उन्होंने लोगों के विशेष समूहों और उन लोगों के प्रति सम्मान दिखाने के लिए हर संभव प्रयास किया, जिन्हें अतिरिक्त मदद की आवश्यकता हो सकती है। उन्होंने अनूप धानक को राज्य मंत्री के रूप में भी चुना। सिर्फ इसलिए कि कोई अच्छा लगता है, इसका मतलब यह नहीं है कि वह बाद में हमें चोट नहीं पहुँचाएगा। जब कोई हमारे पक्ष में होता है, तो हम उसे अपना दोस्त मानते हैं।

मैंने उन्हें तब देखा था जब उनके जूते घिस गए थे, और आज भी वे गर्व से चल रहे हैं। अगर उकलाना में आपका परिवार है, तो आपको उनसे उनके खिलाफ वोट करने के लिए कहना चाहिए। आइए सुनिश्चित करें कि वह देवीलाल परिवार के प्रति बुरा व्यवहार करने के लिए सबक सीखें।

अनूप धानक चौटाला परिवार के लिए बहुत महत्वपूर्ण नेता थे। इनेलो समूह के टूटने के बाद, उन्होंने अजय चौटाला और दुष्यंत चौटाला के साथ काम करने का फैसला किया और वे जेजेपी नामक एक नई पार्टी में शामिल हो गए। इससे पहले, वे इनेलो का हिस्सा थे। अनूप को दो बार उकलाना नामक अपने क्षेत्र का प्रतिनिधि चुना गया है। पहली बार उन्होंने इनेलो का प्रतिनिधित्व करते हुए जीत हासिल की, और दूसरी बार उन्होंने जेजेपी के सदस्य के रूप में जीत हासिल की।

उन्हें जेजेपी नामक समूह से एक विशेष नौकरी के लिए चुनाव लड़ना था, लेकिन फिर उन्होंने उस समूह को छोड़ने का फैसला किया। उसके बाद, वह भाजपा नामक एक अन्य समूह में शामिल हो गए, और उन्होंने उन्हें नौकरी के लिए चुना।

अनूप धानक 2019 में विधायक नामक नेता बन गए, और उन्होंने जेजेपी नामक एक समूह के साथ काम किया। उन्हें सरकार में राज्य मंत्री के रूप में एक महत्वपूर्ण पद दिया गया था, जिसमें विभिन्न समूह एक साथ काम कर रहे थे। जब 2024 के चुनावों की घोषणा हुई, तो उन्होंने जेजेपी को छोड़कर भाजपा नामक एक अन्य समूह में शामिल होने का फैसला किया। अब, भाजपा ने उन्हें उकलाना में नौकरी के लिए चुना है।

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अब शादी के लिए मजबूर नहीं कर सकते माता-पिता, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अपनी पसंद से विवाह करने के अधिकार को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि कोई भी माता-पिता या रिश्तेदार किसी बालिग व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध शादी करने के लिए मजबूर नहीं कर सकते।

जस्टिस दीपक गुप्ता ने एक एमबीए छात्रा की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि शादी करना है या नहीं, कब करनी है और किससे करनी है, यह पूरी तरह से व्यक्ति का निजी निर्णय है। यह अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का हिस्सा है।

याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि वह नौकरी और उच्च शिक्षा के कारण स्वतंत्र रूप से रह रही है, लेकिन उसके माता-पिता, मामा और अन्य रिश्तेदार उस पर अपनी पसंद के व्यक्ति से विवाह करने का लगातार दबाव बना रहे हैं।

अदालत ने कहा कि विवाह किसी व्यक्ति के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण निजी निर्णय होता है और इस मामले में किसी भी प्रकार का बाहरी दबाव या जबरदस्ती स्वीकार नहीं की जा सकती। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि किसी भी व्यक्ति को उसकी इच्छा के खिलाफ विवाह के बंधन में नहीं बांधा जा सकता।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में राज्य की जिम्मेदारी है कि वह नागरिकों के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा सुनिश्चित करे।

मामले का निपटारा करते हुए अदालत ने मोहाली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) या उनके द्वारा अधिकृत अधिकारी को छात्रा की शिकायत पर विचार करने, खतरे का आकलन करने और यदि उसकी जान या स्वतंत्रता को वास्तविक खतरा हो तो तत्काल सुरक्षा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

इस फैसले को बालिग व्यक्तियों के अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने और स्वतंत्र रूप से जीवन जीने के संवैधानिक अधिकार को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।

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भीषण गर्मी के चलते हरियाणा में स्कूल बंद, छुट्टियों का ऐलान

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हरियाणा के स्कूली बच्चों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान को देखते हुए हरियाणा सरकार ने गर्मियों की छुट्टियों का ऐलान कर दिया है। मुख्यमंत्री द्वारा शिक्षा विभाग के साथ बैठक करने के बाद यह फैसला लिया गया।

अब हरियाणा के सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में 25 मई से 30 जून तक गर्मियों की छुट्टियां रहेंगी। पहले ये छुट्टियां 1 जून से शुरू होनी थीं, लेकिन मौसम विभाग द्वारा जारी हीटवेव और लू के अलर्ट के बाद सरकार ने छुट्टियां एक सप्ताह पहले करने का निर्णय लिया है।

मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ सकता है तथा कई इलाकों में लू चलने की संभावना है। इसे ध्यान में रखते हुए बच्चों की सेहत और सुरक्षा के लिए यह अहम कदम उठाया गया है। शिक्षा मंत्री और शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ चर्चा के बाद मुख्यमंत्री सैनी ने छुट्टियों के फैसले को मंजूरी दी।

गौरतलब है कि इससे पहले चंडीगढ़ प्रशासन ने भी बढ़ती गर्मी को देखते हुए सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में छुट्टियों का ऐलान किया था। अब हरियाणा सरकार ने भी इसी तरह का फैसला लेते हुए विद्यार्थियों को गर्मी से राहत दी है।

वहीं अभिभावकों ने भी सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है, क्योंकि पिछले कुछ दिनों से पड़ रही तेज गर्मी ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी थी। दोपहर के समय तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण बच्चों की सेहत पर बुरा असर पड़ने का खतरा बढ़ गया था।

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हरियाणा CM नायब सैनी का दावा: बंगाल में भाजपा का एकतरफा माहौल, पंजाब में भी खिलेगा कमल

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भाजपा के प्रमुख स्टार प्रचारकों में शामिल हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का मानना है कि बंगाल चुनाव में पार्टी के पक्ष में एकतरफा माहौल है। दीदी जा रही हैं। जनता ने कमल खिलाने का मन बना लिया है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में किए जा रहे विकास कार्यों की चर्चा बंगाल में हर तरफ हो रही है। केंद सरकार की कल्याणकारी नीतियों को लोग पसंद कर रहे हैं। बंगाल के बाद पंजाब का नंबर है। वहां के लोगों ने भी कमल खिलाने का मन बना लिया है।

पहली बार गुरुग्राम में हुई कैबिनेट बैठक

बुधवार को हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक की अध्यक्षता करने के लिए साइबर सिटी पहुंचे मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राजनीतिक विषयों पर किए गए सवालों के जवाब में कहा कि बंगाल का माहौल पूरी तरह बदला हुआ है। वहां की सरकार को लोगों ने पूरी तरह उखाड़ फेंकने का मन बना रखा है। जहां तक पंजाब का सवाल है तो वहां के काफी लोग उनसे मिलने आते रहते हैं।

कुछ दिन पहले भी काफी लोग मिलने पहुंचे थे। सभी वहां की सरकार से परेशान हैं। सभी चाहते हैं कि जल्द से जल्द पंजाब में कमल खिले। नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विरोध कर विपक्ष ने देश की आधी आबादी को नाराज कर दिया है। कई देशों की जितनी आबादी नहीं है, उससे अधिक महिलाएं अपने देश में है।

इसके बाद भी उन्हें उनके अधिकारों से वंचित करने का प्रयास विपक्ष ने किया है। चुनावों में देश की जनता जवाब देगी। बंगाल या पंजाब ही नहीं बल्कि जहां पर भी चुनाव होंगे वहां महिलाएं विपक्ष को माफ नहीं करेंगी।

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