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“आप” की पहली प्राथमिकता शिक्षा-स्वास्थ्य, पहले दिल्ली में सरकारी स्कूल सुधारे, अब पंजाब में सुधार रहे- केजरीवाल
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पंजाब के एक सरकारी स्कूल का पुराना वीडियो ट्वीट कर भगवंत मान सरकार को बदनाम करने की हो रही साजिश पर पलटवार किया। उन्होंने उस स्कूल का दौरा कर सच जानने पहुंचे शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस का वीडियो एक्स पर साझा कर कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य, आम आदमी पार्टी की पहली प्राथमिकता है। शिक्षा मंत्री का स्कूल का दौरा करना इसी प्राथमिकता का सबूत है। हमारी सरकार ने पहले दिल्ली में सरकारी स्कूलों को सुधारा, अब पंजाब के सरकारी स्कूलों को सुधार रही है। उन्होंने कहा कि पंजाब के अधिकांश सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं मुहैया करा दी गईं हैं और बाकी बच्चे कुछ स्कूलों में भी जल्द उपलब्ध करा दी जाएगीं। यही वजह है कि आज पंजाब के कई सरकारी स्कूल शिक्षा और सुविधा के मामले में सबसे बड़े प्राइवेट स्कूलों को टक्कर दे रहे हैं।
मंगलवार को “आप” के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मुझे बहुत खुशी है कि आज पूरे देश में शिक्षा और स्कूलों की चर्चा हो रही है और यह एक जन आंदोलन बन गया है, जो बहुत पहले ही हो जाना चाहिए था। शिक्षा और स्वास्थ्य हमेशा से आम आदमी पार्टी के लिए दो सबसे अहम मुद्दे रहे हैं और हमारा मानना है कि कोई भी देश अपने नागरिकों को बेहतरीन और मुफ्त शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवा दिए बिना तरक्की नहीं कर सकता, क्योंकि ये किसी भी देश के विकास की नींव हैं।
अरविंद केजरीवाल ने बताया कि “आप” ने पहले दिल्ली और फिर पंजाब के सरकारी स्कूलों में कई सुधार किए, जिसके चलते कई स्कूल अब बेहतरीन प्राइवेट स्कूलों से भी अच्छे हो गए हैं। दिल्ली और पंजाब दोनों ही जगहों पर ऐसे हजारों उदाहरण हैं जहां माता-पिता ने अपने बच्चों का दाखिला प्राइवेट से निकालकर सरकारी स्कूलों में करवाया है।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पंजाब में सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने का काम जारी है और कुछ को छोड़कर ज्यादातर स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं मुहैया करा दी गई हैं। जल्द ही बाकी बचे स्कूलों में भी ये सुविधाएं होंगी। आज पंजाब के कई सरकारी स्कूल सुविधाओं और शिक्षा की गुणवत्ता के मामले में सबसे अच्छे प्राइवेट स्कूलों को टक्कर दे रहे हैं।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आज किसी ने पंजाब के एक सरकारी स्कूल का पुराना वीडियो पोस्ट किया था। मुझे इस बात की खुशी है कि जमीनी हकीकत का जायजा लेने के लिए खुद शिक्षा मंत्री ने उस स्कूल का दौरा किया और लोगों को शिक्षा मंत्री की रिपोर्ट जरूर पढ़नी चाहिए।
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मुख्यमंत्री सेहत योजना (MMSY) के तहत मच्छर जनित बीमारियों के लिए 351 लाभार्थियों को 89.35 लाख रुपये के 357 उपचार मिले
मानसून के दौरान मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ बनने के साथ ही पंजाब डेंगू, मलेरिया और अन्य वेक्टर जनित बीमारियों की निगरानी, रोकथाम और उपचार को मज़बूत कर रहा है। इन जनस्वास्थ्य उपायों के साथ-साथ, मुख्यमंत्री सेहत योजना (एमएमएसवाई) पात्र परिवारों को बीमारी की स्थिति में कैशलेस स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध करवाने में मदद कर रही है।
इस वर्ष की शुरुआत में, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने मच्छर जनित बीमारियों की रोकथाम के लिए सामुदायिक भागीदारी को मज़बूत करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया था।
राज्य स्तरीय समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया की रोकथाम के लिए निगरानी व जाँच को और मज़बूत करने तथा मच्छरों के प्रजनन स्थलों को ख़त्म करने पर विशेष ज़ोर दिया।
पंजाब में डेंगू के मामलों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। डेंगू के मामले 2021 में 23,389 से घटकर 2025 में 4,981 रह गए, जबकि मौतों की संख्या 55 से घटकर आठ हो गई। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ने इस सुधार का श्रेय आंशिक रूप से सक्रिय घर-घर निगरानी अभियान को दिया, जिसके तहत पिछले संक्रमण सीज़न के दौरान करीब 1.5 करोड़ दौरे किए गए।
राज्य ने ‘हर शुक्रवार डेंगू ते वार’ अभियान को भी आगे बढ़ाया, जिसके तहत विद्यार्थियों, शिक्षकों और स्वास्थ्य कर्मियों को प्रत्येक शुक्रवार अपने आसपास के क्षेत्रों का निरीक्षण करने तथा कूलरों, गमलों, पानी की टंकियों और अन्य कंटेनरों में जमा पानी को हटाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
इस संबंध में, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “मच्छर जनित बीमारियों से निपटने के लिए पूरे समुदाय की भागीदारी ज़रूरी है। रोकथाम की ज़िम्मेदारी केवल स्वास्थ्य विभाग तक सीमित नहीं रह सकती। हर घर, स्कूल और संस्थान को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कहीं भी जमा पानी मच्छरों के प्रजनन का स्थान न बने।”
पंजाब ने जाँच सुविधाओं का भी विस्तार किया है। राज्य के 47 सेंटिनल सर्विलांस अस्पतालों में डेंगू और चिकनगुनिया की मुफ़्त एलिसा (एंज़ाइम-लिंक्ड इम्यूनोसॉर्बेंट अस्से) जाँच उपलब्ध है। मलेरिया के रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट और डेंगू की जाँच सुविधाओं का भी विस्तार किया गया है।
इस बीच, डॉक्टरों ने लोगों को लगातार बने रहने वाले बुख़ार को नज़रअंदाज़ न करने और हर मानसूनी बुख़ार को सामान्य न मानने की सलाह दी है। ज़िला अस्पताल, मोहाली की मेडिकल विशेषज्ञ डॉ. शिफाली चौधरी (एमबीबीएस, एमडी) ने कहा, “मच्छर जनित बीमारियों के लक्षणों को नज़रअंदाज़ करने या उपचार में देरी करने से स्थिति गंभीर हो सकती है। लगातार बुख़ार, अत्यधिक कमज़ोरी, शरीर या जोड़ों में तेज़ दर्द, बार-बार उल्टी, असामान्य रक्तस्राव, साँस लेने में कठिनाई या शरीर में पानी की कमी होने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।”
बीमार पड़ने वाले मरीज़ों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं तक आर्थिक पहुँच भी उतनी ही महत्त्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री सेहत योजना के नवीनतम उपचार आंकड़ों के अनुसार, 351 लाभार्थियों ने 357 उपचारों का लाभ लिया, जिन पर 89,35,345 रुपये ख़र्च हुए।
इनमें से 250 मरीज़ों ने पी-टाइप अस्पतालों में 256 उपचार करवाए, जिन पर 75,02,250 रुपये ख़र्च हुए, जबकि 101 मरीज़ों ने जी-टाइप अस्पतालों में 101 उपचार करवाए, जिन पर 14,28,895 रुपये ख़र्च हुए। महिला लाभार्थियों की संख्या 194 रही, जिन्होंने 199 उपचार करवाए, जबकि पुरुष लाभार्थियों की संख्या 157 रही, जिन्होंने 158 उपचार करवाए। सबसे बड़ा आयु वर्ग 31–45 वर्ष का रहा, जिसमें 102 लाभार्थियों ने 105 उपचार करवाए। इसके बाद 46–60 वर्ष आयु वर्ग रहा, जिसमें 80 लाभार्थियों ने 80 उपचार करवाए।
डॉ. शिफाली चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री सेहत योजना इलाज के ख़र्च को लेकर होने वाली चिंता को कम करके समय पर उपचार लेने में आने वाली आर्थिक बाधाओं को दूर कर सकती है।उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री सेहत योजना (एमएमएसवाई) पंजाब भर के लोगों को इलाज के ख़र्च का तत्काल बोझ उठाए बिना समय पर चिकित्सकीय देखभाल लेने में मदद कर रही है। जब किसी बीमारी के कारण आपातकालीन उपचार या अस्पताल में भर्ती होने की ज़रूरत पड़ती है, तब कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण हो सकती है।”
राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए) के एमएमएसवाई आंकड़ों से डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया के मामलों से जुड़े उपचार की महत्त्वपूर्ण ज़रूरत का भी पता चलता है:
- कुल: मच्छर जनित बीमारियों के 357 उपचार, जिन पर 89.35 लाख रुपये का ख़र्च आया।
- डेंगू: उपचारों में सबसे बड़ा हिस्सा डेंगू का रहा, जिसमें डेंगू बुख़ार, डेंगू हेमरेजिक फीवर और डेंगू शॉक सिंड्रोम शामिल हैं।
- डेंगू बुख़ार: प्रमुख उपचार श्रेणियों में 51 उपचार शामिल रहे, जिनकी लागत 12.22 लाख रुपये, 25 उपचारों की लागत 9.11 लाख रुपये और 55 उपचारों की लागत 8.46 लाख रुपये रही।
- मलेरिया: जटिल मलेरिया सहित कई मामलों का रिकॉर्ड दर्ज किया गया।
- चिकनगुनिया: चिकनगुनिया के भी कई उपचार मामले दर्ज किए गए।
- गंभीर मामले: कुछ गंभीर मरीज़ों को अतिरिक्त चिकित्सा हस्तक्षेप की आवश्यकता पड़ी, जिनमें रक्त चढ़ाना, एडवांस्ड इमेजिंग जाँच तथा किडनी फेलियर और गंभीर सेप्सिस जैसी जटिलताओं का उपचार शामिल रहा।
इसलिए,पंजाब में व्यापक रणनीति दो प्रमुख स्तंभों पर आधारित है—निगरानी और मच्छरों के प्रजनन स्थलों को ख़त्म करके मच्छर जनित संक्रमणों की रोकथाम करना तथा बीमारी की स्थिति में मरीज़ों को समय पर और किफ़ायती उपचार उपलब्ध करवाना।
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हॉकी वर्ल्ड कप में आज भारत-पाकिस्तान की टक्कर, अगले दौर के लिए मुकाबला बेहद अहम
हॉकी वर्ल्ड कप 2026 में आज भारत और पाकिस्तान की टीमें एक बार फिर आमने-सामने होंगी। दोनों पड़ोसी देशों के बीच होने वाला यह मुकाबला नीदरलैंड्स के एम्स्टेलवीन स्थित वेगेनर हॉकी स्टेडियम में खेला जाएगा। पूल-डी का यह मुकाबला दोनों टीमों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके नतीजे से अगले दौर में पहुंचने की तस्वीर काफी हद तक साफ हो जाएगी।
भारत ने टूर्नामेंट की शुरुआत वेल्स को 3-1 से हराकर की थी, लेकिन दूसरे मुकाबले में उसे इंग्लैंड के हाथों 2-4 से हार का सामना करना पड़ा। दो मैचों के बाद भारत के खाते में 3 अंक हैं और टीम पूल-डी में दूसरे स्थान पर है। वहीं पाकिस्तान के पास 1 अंक है। पाकिस्तान ने वेल्स के साथ ड्रॉ खेला था, जबकि इंग्लैंड के खिलाफ उसे हार मिली थी।
इस मुकाबले की अहमियत इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि भारत को अगले दौर में पहुंचने के लिए कम से कम ड्रॉ की जरूरत है, जबकि पाकिस्तान के लिए जीत बेहद जरूरी है। पाकिस्तान अगर मुकाबला हारता या ड्रॉ करता है तो उसका विश्व कप अभियान ग्रुप स्टेज में ही खत्म हो जाएगा।
53 साल बाद फिर उसी मैदान पर भिड़ेंगे
भारत और पाकिस्तान की हॉकी प्रतिद्वंद्विता का इतिहास काफी पुराना और रोमांचक रहा है। 1973 के विश्व कप सेमीफाइनल में भारत ने इसी एम्स्टेलवीन में पाकिस्तान को 1-0 से हराया था। इसके दो साल बाद 1975 के विश्व कप फाइनल में भारत ने पाकिस्तान को 2-1 से हराकर अपना एकमात्र पुरुष हॉकी विश्व कप खिताब जीता था।
अब लंबे अंतराल के बाद दोनों टीमें फिर एम्स्टेलवीन में आमने-सामने हैं। विश्व कप इतिहास में भारत और पाकिस्तान के बीच अब तक पांच मुकाबले खेले गए हैं, जिनमें भारत ने तीन और पाकिस्तान ने दो मैच जीते हैं।
भारतीय टीम की कमान कप्तान हरमनप्रीत सिंह के हाथों में है। टीम को उनके पेनल्टी कॉर्नर से गोल की उम्मीद होगी। इसके अलावा अभिषेक, दिलप्रीत सिंह, हार्दिक सिंह, जुगराज सिंह और सुखजीत सिंह जैसे खिलाड़ियों पर भी नजरें रहेंगी।
मुकाबला आज 19 अगस्त को शाम 6:30 बजे भारतीय समयानुसार शुरू होगा।
अब सबकी नजरें इस हाई-वोल्टेज मुकाबले पर हैं कि क्या भारत जीत के साथ अगले दौर में जगह पक्की करेगा या पाकिस्तान अपनी विश्व कप उम्मीदों को जिंदा रखने के लिए बड़ा उलटफेर करेगा।
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बांग्लादेश ने रचा इतिहास, ऑस्ट्रेलिया को उसी की धरती पर हराकर एशिया में बनाया बड़ा रिकॉर्ड
बांग्लादेश क्रिकेट टीम ने ऑस्ट्रेलिया दौरे पर इतिहास रच दिया है। दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेलने के लिए 23 साल बाद ऑस्ट्रेलिया पहुंची बांग्लादेश की टीम ने डार्विन में खेले गए पहले टेस्ट मैच में मेजबान ऑस्ट्रेलिया को 9 विकेट से हराकर शानदार जीत दर्ज की।
इस जीत के साथ बांग्लादेश ऑस्ट्रेलिया को उसकी घरेलू धरती पर टेस्ट मैच में हराने वाली एशिया की तीसरी टीम बन गई है। इससे पहले भारत और पाकिस्तान ऑस्ट्रेलिया को उसके घर में टेस्ट मैच में हरा चुके हैं। हालांकि, ऑस्ट्रेलिया में सबसे कम टेस्ट मैच खेलकर पहली जीत हासिल करने के मामले में बांग्लादेश ने भारत और पाकिस्तान दोनों को पीछे छोड़ दिया है।
ऑस्ट्रेलिया में यह बांग्लादेश का सिर्फ तीसरा टेस्ट मैच था और इसी मुकाबले में उसने अपनी पहली जीत हासिल कर ली। वहीं पाकिस्तान ने ऑस्ट्रेलिया में अपनी पहली टेस्ट जीत 7वें मैच में दर्ज की थी, जबकि भारतीय टीम को यह उपलब्धि 12वें टेस्ट मैच में मिली थी। श्रीलंका ने ऑस्ट्रेलिया में 15 टेस्ट मैच खेले हैं, लेकिन उसे अब तक एक भी जीत नहीं मिली है।
यह ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बांग्लादेश की दूसरी टेस्ट जीत है। इससे पहले बांग्लादेश ने ऑस्ट्रेलिया को अपनी घरेलू जमीन पर हराया था। डार्विन में मिली यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि ऑस्ट्रेलिया को उसकी अपनी धरती पर टेस्ट मैच में हराना विश्व क्रिकेट की सबसे मुश्किल चुनौतियों में से एक माना जाता है।
ऑस्ट्रेलिया की धरती पर टेस्ट जीतने वाली टीमों की बात करें तो इंग्लैंड 58 जीत के साथ सबसे आगे है। वेस्टइंडीज ने ऑस्ट्रेलिया में 19 टेस्ट मैच जीते हैं, जबकि भारत के नाम 10 टेस्ट जीत हैं। अब बांग्लादेश ने भी ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट जीतने वाली टीमों की इस खास सूची में अपना नाम दर्ज करा लिया है।
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