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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से आप पंजाब प्रधान अमन अरोड़ा के 8 सवाल:

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मोगा रैली से पहले, आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब प्रधान और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने शनिवार को भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार से आठ मुश्किल सवाल पूछे। उन्होंने पंजाब के रोके गए फंड, जीएसटी का भारी नुकसान, बाढ़ राहत, इंडस्ट्री, नशा तस्करी, रोज़गार और रसोई गैस की बढ़ती कीमतों जैसे मुद्दों पर साफ जवाब मांगे।

अमन अरोड़ा ने कहा कि यह दौरा सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रह सकता। उन्होंने कहा कि तीन करोड़ पंजाबी केंद्रीय गृह मंत्री से जवाबदेही की उम्मीद कर रहे हैं और वे पंजाब की गंभीर आर्थिक और प्रशासनिक चिंताओं पर खोखले नारों या “जुमलों” के बजाय ठोस जवाब के हकदार हैं।

चंडीगढ़ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए आप पंजाब प्रधान और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने कहा कि पंजाबियों की मेहमानों का सम्मान के साथ स्वागत करने की पुरानी परंपरा है, लेकिन इस बार पंजाब के लोग केंद्रीय गृह मंत्री से जवाबदेही की उम्मीद रखते हैं। अमन अरोड़ा ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह पंजाब की धरती पर आए हैं, हम उनका स्वागत करते हैं। लेकिन तीन करोड़ पंजाबियों की चिंता सीधी है—खोखले वादे न करें और जुमले न सुनाएं।

आप पंजाब प्रधान ने नोट किया कि दो दिन पहले उन्होंने पंजाब से जुड़े कई ज़रूरी मुद्दे उठाए थे और उम्मीद जताई थी कि भाजपा की पंजाब लीडरशिप अमित शाह के दौरे से पहले कोई जवाब देगी या कोई घोषणा करेगी। अमन अरोड़ा ने कहा कि हालांकि, पिछले दो दिनों में, भाजपा पंजाब के एक भी नेता ने इन चिंताओं पर बात नहीं की है। उन्होंने मीडिया से भी अपील की कि वे अमित शाह और भाजपा पंजाब नेताओं से पंजाब के लोगों द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों पर सवाल पूछें।

पंजाब का 8,300 करोड़ रुपये का आरडीएफ और एमडीएफ फंड रोके गए

पहला मुद्दा उठाते हुए, अमन अरोड़ा ने केंद्रीय गृह मंत्री से यह साफ़ करने को कहा कि केंद्र सरकार ने पिछले चार सालों से ग्रामीण विकास फंड (आरडीएफ) और मार्केट विकास फंड (एमडीएफ) के तहत पंजाब का 8,300 करोड़ रुपये किस कानून के तहत रोक रखे है। अमन अरोड़ा ने पूछा कि यह पैसा पंजाब के मेहनती किसानों और लोगों का है। यह ग्रामीण विकास के लिए है। केंद्र ने इसे क्यों रोका है और यह कब जारी किया जाएगा?

पंजाब को 60,000 करोड़ रुपये का जीएसटी नुकसान

जीएसटी सिस्टम के तहत पंजाब को हुए वित्तीय नुकसान पर रोशनी डालते हुए, अमन अरोड़ा ने कहा कि मुआवज़ा प्रणाली सिर्फ़ पाँच साल तक चला, जिससे पंजाब को बहुत बड़ा नुकसान हुआ। अमन अरोड़ा ने सवाल किया कि जीएसटी मुआवज़ा सिर्फ़ पाँच साल के लिए दिया गया था, लेकिन पंजाब को लगभग 60,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। केंद्र सरकार पंजाब को इस बड़े नुकसान की भरपाई कैसे करने की योजना बना रही है?

1,600 करोड़ रुपये की बाढ़ राहत अभी तक जारी नहीं हुई

पंजाब में आई भयानक बाढ़ का ज़िक्र करते हुए कैबिनेट मंत्री ने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रभावित इलाकों के दौरे के दौरान 1,600 करोड़ रुपये के राहत पैकेज का ऐलान किया था। अमन अरोड़ा ने कहा कि अमित शाह आज अपने साथ क्या वे 1,600 करोड़ रुपये का चेक लेकर आ रहे हैं? अगर हाँ, तो उन्हें पंजाब को सौंप देना चाहिए। अगर नहीं, तो उन्हें अपनी रैली में बताना चाहिए कि पैसा अभी तक जारी क्यों नहीं किया गया।

एकतरफ़ा भारत-यूएस ट्रेड डील

आप पंजाब प्रधान ने भारत-यूएस ट्रेड डील को एकतरफ़ा कहने के लिए केंद्र सरकार की आलोचना की। अमन अरोड़ा ने कहा कि डील बराबर के लोगों के बीच होती है, लेकिन जिस तरह से भाजपा सरकार ने यूएस राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आगे घुटने टेके हैं, वह डील से ज़्यादा एक आदेश जैसा लग रहा है। इस डील से देश भर के करोड़ों किसानों और छोटे कारोबारियों को नुकसान होगा। उन्होंने सवाल किया कि भाजपा सरकार को ऐसी शर्तें मानने की क्या मजबूरी थी और अमित शाह से पंजाब के लोगों को यह मुद्दा करें।

पड़ोसी राज्यों में टैक्स में छूट से पंजाब की इंडस्ट्री को नुकसान

पंजाब के उद्योगिक क्षेत्र की हालत का ज़िक्र करते हुए अमन अरोड़ा ने कहा कि केंद्र की तरफ़ से हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर जैसे पड़ोसी राज्यों को दी गई टैक्स में छूट से पंजाब के उद्योगों पर बुरा असर पड़ा है। अमन अरोड़ा ने पूछा कि सीमा पर अंतरराष्ट्रीय व्यापार रूट बंद होने से पंजाब पहले से ही परेशान है। इसके साथ ही, पड़ोसी राज्यों को छूट देने से पंजाब के उद्योग और व्यापारी संकट में पड़ गए हैं। केंद्र पंजाब की इंडस्ट्री को क्या राहत या मुआवज़ा देगा?”

अंतरराष्ट्रीय सीमा और गुजरात के बंदरगाहो से द्वारा पंजाब में दाखिल हो रहा है नशा

नशा तस्करी की चुनौती के बारे में बात करते हुए अमन अरोड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने पूरे पंजाब में नशा के ख़िलाफ़ एक बड़ा अभियान शुरू किया है। उन्होंने बताया कि नशा अक्सर केंद्र सरकार के नियंत्रण वाली अंतरराष्ट्रीय सीमा या गुजरात जैसे राज्यों में मौजूद बंदरगाहो से आता हैं। अमन अरोड़ा ने पूछा, “नशा तस्करी को रोकने के लिए केंद्र सरकार क्या ठोस कदम उठा रही है, और वह इस लड़ाई में पंजाब सरकार का कैसे सहयोग करेगी?

मनरेगा को खत्म करना

अमन अरोड़ा ने केंद्र सरकार के 20 साल पुरानी ग्रामीण रोजगार योजना महात्मा गांधी नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी एक्ट (मनरेगा) को बंद करने और उसकी जगह ‘वीबी-जी राम जी’ नाम की नई योजना लाने के फैसले पर चिंता जताई। अमन अरोड़ा ने पूछा, “मनरेगा देश भर के लाखों गरीब मजदूरों के लिए सहारा बन गया था। केंद्र सरकार इस स्कीम को खत्म करके ऐसा गोलमोल कानून क्यों ला रही है जिससे करोड़ों लोग बेरोज़गार हो सकते हैं?”

एलपीजी संकट और बढ़ती कीमतें

एलपीजी संकट और गैस की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र पर निशाना साधते हुए अमन अरोड़ा ने कहा कि कई जगहों पर एलपीजी सिलेंडर के लिए लंबी लाइनें लग रही हैं। उन्होंने बरनाला की एक दुखद घटना का ज़िक्र किया, जहाँ सिलेंडर के लिए लाइन में खड़े एक व्यक्ति की कथित तौर पर हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। अमन अरोड़ा ने कहा कि यह स्थिति लोगों को नोटबंदी के दर्दनाक दिनों की याद दिलाती है, जब कई नागरिक लाइनों में खड़े-खड़े मर गए थे।

अमन अरोड़ा ने आगे कहा कि यह संकट केंद्र सरकार की घरेलू और विदेशी नीतियों की नाकामी को दर्शाता है। अमन अरोड़ा ने कहा कि भाजपा सरकार यूएस के दबाव में आत्मसमर्पण करते हुए ईरान और रूस जैसे दोस्त देशों के साथ भी संतुलित रिश्ते बनाए रखने में असफल रही है। यह नीतियां पूरे देश को नुकसान पहुंचा रही है।

आखिर में, अमन अरोड़ा ने कहा कि उठाए गए आठ सवाल पंजाब के लोगों की चिंताओं को दर्शाता हैं और अमित शाह के दौरे के दौरान इनका जवाब दिया जाना चाहिए। अमन अरोड़ा ने कहा कि अगर अमित शाह सच में लोगों के प्रति ज़िम्मेदार महसूस करते हैं, तो उन्हें अपने दौरे के दौरान इन आठ सवालों का जवाब देना चाहिए। पंजाब को जवाब मिलना चाहिए, खोखले नारे नहीं।

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भगवंत मान ने आरोपों को बताया ‘गंदी राजनीति’, कहा- फर्जी वीडियो से छवि खराब करने की साजिश

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने ऊपर लगाए गए “अपवित्र आचरण” और सिख गुरुओं के अपमान से जुड़े आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक विरोधियों की साजिश बताया है। उन्होंने कहा कि उनकी छवि खराब करने के लिए फर्जी वीडियो वायरल किए जा रहे हैं और धर्म का राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी वीडियो संदेश में मान ने कहा कि जिस वीडियो को लेकर विवाद खड़ा किया गया है, वह पूरी तरह फर्जी है। उन्होंने दावा किया कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति न तो उनके शरीर से मेल खाता है और न ही उनके हाव-भाव उनसे मिलते हैं। उन्होंने कहा कि फोरेंसिक जांच में भी वीडियो को फर्जी बताया गया है।

मुख्यमंत्री ने भाजपा, कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि जब उनके विरोधियों को सरकार के कामकाज पर हमला करने का कोई मुद्दा नहीं मिलता, तो वे धर्म का सहारा लेकर उन्हें बदनाम करने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि जनता जानती है कि कौन सच बोल रहा है और कौन झूठ फैला रहा है।

भगवंत मान ने कहा कि वे पंजाब के विकास, रोजगार, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सरकार के कार्यों को उसी गति से जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि विरोधी दल उनकी लोकप्रियता से घबराकर ऐसे हथकंडे अपना रहे हैं।

वहीं, इस मामले को लेकर भाजपा लगातार आम आदमी पार्टी और मुख्यमंत्री भगवंत मान पर हमलावर है। भाजपा नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर मामला इतना गंभीर है तो मुख्यमंत्री के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही। उन्होंने आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की चुप्पी पर भी सवाल खड़े किए।

इधर, गुरुग्राम पुलिस ने वायरल वीडियो और कथित फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट मामले में जांच तेज कर दी है। पुलिस के अनुसार दो लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कथित फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार करने के लिए बड़ी रकम का लेन-देन हुआ था। मामले की विस्तृत जांच जारी है।

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मौसम ने ली करवट, हरियाणा-पंजाब-चंडीगढ़ में 26 जून तक आंधी-बारिश का येलो अलर्ट

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भीषण गर्मी और उमस से परेशान हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ और हिमाचल प्रदेश के लोगों को जल्द राहत मिलने वाली है। मौसम विभाग (IMD) ने 26 जून तक मौसम के बदलते रहने का अनुमान जताते हुए कई इलाकों में आंधी, तेज हवाओं और बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार पंजाब के ऊपर बने साइक्लोनिक सर्कुलेशन और सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से अगले कुछ दिनों तक मौसम में बदलाव बना रहेगा। 24 से 26 जून के बीच कई क्षेत्रों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से धूलभरी आंधी चल सकती है और गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है।

चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार के कृषि मौसम विज्ञान विभाग के प्रमुख डॉ. मदन खीचड़ ने बताया कि 26 जून तक बादलों की आवाजाही और हवाओं की दिशा में बदलाव देखने को मिलेगा। 25 जून से प्री-मानसून गतिविधियां तेज होंगी, जबकि 25 से 30 जून के बीच दक्षिण-पश्चिम मानसून हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ में दस्तक दे सकता है।

हरियाणा के पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, कैथल, करनाल और जींद में तेज हवाओं के साथ हल्की बारिश की संभावना है। वहीं पश्चिमी जिलों सिरसा, फतेहाबाद, हिसार और भिवानी में मौसम अपेक्षाकृत शुष्क रह सकता है।

पंजाब और चंडीगढ़ में भी अगले तीन दिनों तक 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और गरज-चमक के साथ बारिश होने का अनुमान है। लुधियाना, बरनाला, संगरूर, फतेहगढ़ साहिब, पटियाला और मोहाली समेत कई जिलों में मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है।

मौसम विभाग के अनुसार पंजाब में सबसे पहले मानसून अमृतसर पहुंच सकता है, जबकि बठिंडा में इसकी एंट्री सबसे बाद में होने की संभावना है। चंडीगढ़ में 27 से 30 जून के बीच मानसून पहुंचने के आसार हैं और 28-29 जून के दौरान अच्छी बारिश हो सकती है।

उधर हिमाचल प्रदेश में भी पश्चिमी विक्षोभ के असर से शिमला, सोलन, कांगड़ा और अन्य मध्य व निचले पर्वतीय क्षेत्रों में 26 जून तक बारिश और बौछारों का दौर जारी रह सकता है। इससे तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आने की संभावना है।

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पंजाब के गांव देश में सबसे अधिक विकसित होंगे; सरपंचों को आगे बढ़कर बदलाव का नेतृत्व करना चाहिए: CM भगवंत सिंह मान

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज सरपंचों को ग्रामीण पंजाब के बदलाव का नेतृत्व करने का आह्वान किया और स्पष्ट किया कि पंजाब को देश का सबसे विकसित राज्य बनाने के सपने को साकार करने के लिए राज्य के गांव देश में सबसे अधिक विकसित होकर उभरने चाहिए। रामपुरा फूल और तलवंडी साबो के सरपंचों और पंचों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने दोहराया कि पंजाब सरकार गांवों के सर्वांगीण विकास के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और इस कार्य के लिए फंडों की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने पंचायतों से अपील की कि वे सरकारी फंडों का उपयोग इस प्रकार करें, जिससे समाज के हर वर्ग को लाभ मिले, जबकि शिक्षा, ग्रामीण बुनियादी ढांचे और सतत विकास को प्राथमिकता दी जाए।

मुख्यमंत्री ने गांवों के विकास और सिंचाई से संबंधित मुद्दों की भी समीक्षा की और किसानों के लिए नहरी पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने और पंजाब की प्रगति एवं समृद्धि की गति को तेज करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।

सरपंच मिलनी की कुछ झलकियाँ एक्स पर साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “रामपुरा फूल और तलवंडी साबो के सरपंचों और पंचों के साथ बैठक के दौरान पंजाब सरकार की उपलब्धियों के बारे में चर्चा की गई। सभी ने पूरी तरह से मेरिट के आधार पर नौकरियाँ देने और शिक्षा के मानक को सुधारने के लिए सरकार के प्रयासों का स्वागत किया। ग्रामीण विकास और किसानों के लिए नहरी पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के बारे में भी विचार-विमर्श किया गया। पंजाब के विकास और प्रगति का यह सफर निरंतर जारी रहेगा।”

‘सरपंच मिलनी’ के दौरान सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि राज्य में सबसे कठिन चुनाव सरपंच का होता है क्योंकि वही जमीनी स्तर पर लोगों से जुड़े होते हैं। उन्होंने कहा, “सरपंच गांव का मुखिया होता है और एक अच्छा सरपंच गांव की सूरत बदल सकता है और लोगों की समृद्धि सुनिश्चित कर सकता है। वास्तव में सरपंच वह नींव हैं, जिस पर लोकतंत्र का स्तंभ खड़ा है, जिसके कारण वे समाज का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों के स्तर पर समस्याओं को जानने के लिए ये लोक मिलनियाँ अनूठी पहल हैं। उन्होंने कहा कि अनुदानों की कोई कमी नहीं है, लेकिन गांवों में इनका उपयोग सही और ईमानदारी से होना चाहिए। उन्होंने कहा, “आरोप किसी पर भी लगाए जा सकते हैं, लेकिन सही सरपंच ही गांवों के विकास का धुरा होते हैं। पहले पिछली सरकारों का अनुदानों में हिस्सा होता था, जिसके कारण विकास कार्य प्रभावित होते थे। अब गांवों को बड़ी मात्रा में अनुदान आ रहे हैं और वह दिन दूर नहीं जब इस पैसे से राज्य के गांवों की पूरी तरह से कायाकल्प हो जाएगी।”

सरपंचों को विकास कार्यों को प्राथमिकता देने की अपील करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ये फंड इस प्रकार खर्च किए जाने चाहिए कि समाज के हर वर्ग को इसका लाभ मिले। उन्होंने कहा कि सबसे पहले पुस्तकालयों, स्कूलों के निर्माण और सोलर लाइटें लगाने को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और उसके बाद गलियों-नालियों को, ताकि गांवों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा सके। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “राज्य के विकास को तेज करने के लिए यह बहुत आवश्यक है और समय की मांग है ताकि पंजाब को देश का अग्रणी राज्य बनाया जा सके।”

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि गांवों की पंचायतें लोकतांत्रिक प्रणाली का सबसे महत्वपूर्ण अंग हैं और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास में सहायक रही हैं। उन्होंने दोहराया कि उनकी सरकार सरपंचों को हर संभव सहायता और सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है क्योंकि वे संपूर्ण ग्रामीण विकास की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंचायतें और सरपंच राज्य सरकार की वास्तविक आँखें और कान हैं क्योंकि वे जमीनी स्तर पर जनता से अच्छी तरह से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा, “पंचायतों को लोकतंत्र की नींव के रूप में जाना जाता है क्योंकि उनके पास अपार शक्ति होती है और उनके फैसलों को पूरा गांव सम्मान से मानता है।”

उन्होंने कहा कि ग्रामीणों ने सरपंचों को यह ताकत दी है और उनके हितों की रक्षा करना और उनकी उम्मीदों पर खरा उतरना सरपंचों का मूल कर्तव्य है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि ये संस्थाएँ राज्य सरकार की जन-पक्षधर और विकास-उन्मुख योजनाओं के लाभों को जमीनी स्तर तक पहुँचाने के लिए माध्यम के रूप में काम करती हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नीतियाँ राज्य सरकार द्वारा बनाई जाती हैं और सरपंच तथा पंच इन्हें जमीनी स्तर पर लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने सभी सरपंचों से अपील की कि वे स्वयं को विकास कार्यों के लिए पुनः समर्पित करें और विकास कार्यों तथा सेवाओं की निगरानी पूरी तनदेही से सुनिश्चित करें।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने सरपंचों को एक स्पष्ट आह्वान दिया कि वे विकास कार्यों में किसी भी प्रकार के अनुचित हस्तक्षेप से दूर रहें। उन्होंने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अतीत में गांवों में व्यापक गुटबाजी के कारण कई काम अधूरे रह गए थे।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि सरपंचों को गांवों में गुटबंदी समाप्त करने को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने कहा, “लोकतंत्र में बहुमत हासिल करने वाला व्यक्ति या पार्टी विजेता होती है, लेकिन एक बार चुने जाने के बाद सरपंच पूरे गांव का होता है। एक सरपंच को गांव के प्रत्येक निवासी के साथ समान व्यवहार करना चाहिए और निर्णय निष्पक्ष होकर लिए जाने चाहिए।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे कई सरपंच हैं, जिन्होंने अपनी समझदारी और दूरदर्शिता से अपने गांवों की तस्वीर बदल दी है।

सर्वसम्मति से पंचायतों का चुनाव करने वाले गांवों का धन्यवाद करते हुए उन्होंने कहा, “इन गांवों ने संकीर्ण सोच से ऊपर उठकर और एक ओर गांवों में आपसी भाईचारे तथा सौहार्द की भावना को मजबूत किया है तथा दूसरी ओर सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करने के लिए सर्वसम्मति से अपने सरपंच चुने हैं।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने दोहराया कि उनकी सरकार गांवों के समग्र विकास और प्रगति के लिए वचनबद्ध है तथा इस नेक कार्य के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जा रही है। उन्होंने कहा, “सरपंच सरकार और गांवों के बीच एक पुल हैं और उन्हें गांवों के विकास में बड़ी भूमिका निभानी चाहिए।”

उन्होंने सरपंचों से गांवों को स्वच्छ, हरा-भरा और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए कड़ी मेहनत करने की अपील भी की ताकि राज्य के पर्यावरण को बचाया जा सके। बैठक में महिला सरपंचों की बड़ी संख्या में मौजूदगी से उत्साहित होकर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि अब समय आ गया है कि महिलाएं देश की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।

मुख्यमंत्री ने प्रशासन, अर्थव्यवस्था और समाज में महिलाओं की भूमिका के प्रति व्यापक दृष्टिकोण पर जोर देते हुए कहा कि वास्तविक सशक्तिकरण शिक्षा, प्रतिनिधित्व और आर्थिक अवसरों में निहित है।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने महिलाओं से निर्णय लेने वाली भूमिकाओं में आगे आने और राज्य के भविष्य को नया स्वरूप देने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत आवश्यक है कि लड़कियां आगे आएं और शिक्षा के माध्यम से स्वयं को सशक्त बनाएं। उन्होंने कहा, “यह देश के व्यापक हित में है, क्योंकि जो महिलाएं घरों और परिवारों का कुशलतापूर्वक संचालन करती हैं, उन्हें देश भी चलाना चाहिए। राज्य सरकार इस नेक कार्य के लिए वचनबद्ध है और इसके लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ रही है।”

राजनीति में अधिक से अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं को राजनीति में आगे आकर हिस्सा लेना चाहिए ताकि वे निर्णय लेने की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बन सकें और समाज में आवश्यक परिवर्तन ला सकें।

उन्होंने कहा कि लड़कियों ने लगभग हर क्षेत्र में लड़कों को पीछे छोड़ दिया है, लेकिन राजनीति अभी भी उनकी पहुंच से दूर है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने अपनी बात समाप्त करते हुए कहा, “इस क्षेत्र को लंबे समय से पुरुष प्रधान माना जाता रहा है, लेकिन अब समय आ गया है कि महिलाएं यहां भी अपनी पहचान बनाएं। समानता आधारित समाज की स्थापना और जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए महिलाओं की भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। इससे पंजाब को एक प्रगतिशील और समृद्ध राज्य बनाने में मदद मिलेगी।”

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