Connect with us

Punjab

पंजाब में बेअदबी पर नया कानून पेश करेगी AAP government :चारों धर्मों के ग्रंथ शामिल

Published

on

पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार आज विधानसभा में धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी को लेकर बिल पेश करेगी। यह बिल पंजाब पवित्र ग्रंथ (अपराधों की रोकथाम) एक्ट, 2025 के नाम से हो सकता है।

इसके तहत बेअदबी करने वालों को 10 साल तक कैद की सजा हो सकती है। अगर बेअदबी की वजह से कोई हिंसा या उसमें किसी की मौत होती है तो ऐसी सूरत में आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है।

हालांकि, इस बिल के बारे में आधिकारिक तौर पर अभी जानकारी सामने नहीं आई है। विधानसभा में बिल पेश किए जाने के बाद इसकी सारी जानकारी सार्वजनिक होगी।

खास बात यह है कि यह कानून सिर्फ श्री गुरु ग्रंथ साहिब ही नहीं बल्कि, श्रीमद्भागवत गीता, कुरान शरीफ और पवित्र बाइबल की बेअदबी पर भी लागू किया जाएगा।

पंजाब सरकार के एक्ट में हो सकते हैं ये प्रावधान…

  • बेअदबी की कोशिश करने पर भी होगी सजा: अगर कोई व्यक्ति बेअदबी की कोशिश करता है, लेकिन उसे पूरी तरह अंजाम नहीं दे पाता, तो भी उसे 3 से 5 साल की सजा और 3 लाख रुपए तक जुर्माना हो सकता है। इसके साथ-साथ यदि कोई व्यक्ति साजिश रचता है, उकसाता है या धार्मिक अनुष्ठान में बाधा डालता है, तो उसे भी इसी कानून के तहत सजा दी सकती है।
  • नाबालिग या मानसिक अक्षम आरोपी तो पेरेंट्स होंगे जिम्मेदार: एक्ट में यह प्रावधान किया जा सकता है कि अगर कोई नाबालिग या मानसिक रूप से अक्षम व्यक्ति बेअदबी करता है, तो उसके पेरेंट्स या संरक्षक को भी अपराध का भागीदार माना जाएगा। उस पर भी जानबूझकर या लापरवाही से उसे नियंत्रण में रखने में असफल होने का कसूरवार ठहराने पर कानूनी कार्रवाई होगी। अभी अधिकतर बेअदबी के मामलों में आरोपी मानसिक रूप से अक्षम बता कर बच जाता था।
  • अधिकतम सजा उम्रकैद तक: इस कानून में यह प्रावधान किया जा सकता है कि अगर कोई व्यक्ति किसी भी धर्म के पवित्र ग्रंथ की बेअदबी करता है तो उसे कम से कम 10 साल कैद और अधिकतम उम्रकैद तक की सजा दी जा सकती है।
  • अगर हिंसा या मौत हुई तो आजीवन कारावास संभव: यदि किसी बेअदबी की घटना के कारण सांप्रदायिक तनाव फैलता है। जिसमें किसी की मौत हो जाती है या सार्वजनिक अथवा निजी संपत्ति को नुकसान होता है, तो दोषी को 20 साल से लेकर जीवन भर (प्राकृतिक मृत्यु तक) जेल में रखा जा सकता है। इसके साथ-साथ उसे 10 लाख से 20 लाख रुपए तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
  • पैरोल-फरलो नहीं मिलेगी, दोबारा अपराध पर आजीवन कारावास: 
  • स कानून में यह भी प्रावधान हो सकता है कि बेअदबी के मामले में उम्रकैद या सबसे अधिक सजा पाने वाले दोषियों को पैरोल या फरलो का कोई अधिकार नहीं होगा, यानी उन्हें जेल में ही रहना पड़ सकता है, चाहे उनकी सजा लंबी ही क्यों न हो। यदि कोई व्यक्ति पहले से इस अपराध में दोषी है और दोबारा बेअदबी करता है, तो उसे सीधे जिंदा रहने तक जेल की सजा दी जा सकती है, चाहे उसकी उम्र कुछ भी हो।
  • धार्मिक सेवकों को हो सकती है सख्त सजा: अगर कोई ग्रंथी, पाठी, रागी, पंडित, मौलवी या पादरी, जो धार्मिक सेवा में लगे हुए हैं, बेअदबी के दोषी पाए जाते हैं, तो उन्हें सबसे कठोर सजा दी जा सकती है। इसके पीछे का तर्क ये हो सकता है कि इनसे पवित्र ग्रंथों की रक्षा की उम्मीद की जाती है। अगर यही गलत कदम उठाएंगे तो उन्हें अन्य से सख्त सजा भी हो सकती है।
  • विशेष अदालतों का भी प्रावधान, जांच 60 दिन में होगी: 
  • राज्य सरकार इस कानून को लेकर विशेष अदालतें गठित करने का अधिकार दे सकती है। इनमें सेशन जज या अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हो सकते हैं। जांच की जिम्मेदारी डीएसपी या उससे ऊंचे रैंक के अधिकारी को दी जा सकती है। आरोपियों को सजा समय पर मिले, इसे ध्यान में रखते हुए जांच के लिए 60 दिन निर्धारित किए जा सकते हैं।
Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Punjab

CM भगवंत सिंह मान ने पी.एस.पी.सी.एल. में नियुक्त 665 युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपे

Published

on

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज कहा कि पंजाब सरकारी नौकरियों के लिए पसंदीदा स्थान के रूप में उभर रहा है। यहां तक कि विदेश गए युवा भी अब सरकार की पारदर्शी और योग्यता-आधारित भर्ती नीति के माध्यम से रोजगार प्राप्त करने के लिए राज्य में वापस लौट रहे हैं। पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) में नवभर्ती 665 उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र सौंपते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य ने मात्र साढ़े चार वर्षों में 68268 सरकारी नौकरियां प्रदान करके रिकॉर्ड बनाया है, जिससे रिश्वत या सिफारिशों से नौकरियां लेने के युग का पूरी तरह से अंत हो गया है।

मुख्यमंत्री ने विदेशों में काम करने वाले पंजाबियों से अपनी मातृभूमि वापस लौटने की अपील की और उन्हें भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार द्वारा उन्हें नियमित रोजगार के अवसर दिए जाएंगे और उन्हें पंजाब की सामाजिक-आर्थिक प्रगति में सक्रिय भागीदार बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा अपनाई गई पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया ने युवाओं का व्यवस्था में विश्वास बहाल किया है और विदेशों में गए युवा अब देश लौटने लगे हैं।

इस बारे में एक्स पर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने लिखा, “बठिंडा में नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में, पंजाब की प्रगति और इसके युवाओं के लिए एक उज्ज्वल भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से कई बड़े फैसले साझा किए गए। पिछली सरकारों द्वारा अपनाए गए रिश्वतखोरी और सिफारिशों के भ्रष्ट आचरणों को पूरी तरह से समाप्त करके आपकी सरकार ने अब तक योग्यता के आधार पर युवाओं को 68268 सरकारी नौकरियां दी हैं। इस पारदर्शी भर्ती नीति के कारण, वे युवा भी जो विदेश चले गए थे, अब पंजाब वापस आ रहे हैं।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “शिक्षा क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधारों के कारण पंजाब आज स्कूल शिक्षा में देश के अग्रणी राज्य के रूप में उभरा है। सरकारी कर्मचारियों, विशेषकर महिला कर्मचारियों की भलाई के उद्देश्य से एक और बड़े फैसले की घोषणा की गई कि उनके परिवीक्षा काल की अवधि पूरी होने के बाद उन्हें उनके घरों के 40 किलोमीटर के दायरे में तैनात किया जाएगा ताकि वे पारिवारिक और कार्यकारी जीवन में संतुलन बनाकर रख सकें।”

पोस्ट के अंत में उन्होंने कहा, “कड़ी मेहनत, ईमानदारी और जनसेवा हमारी सरकार के मूल सिद्धांत हैं। प्रत्येक योग्य युवा को समान अवसर प्रदान करके हम एक जीवंत और समृद्ध रंगला पंजाब की सृजना की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।”

युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पिछली सरकारों के दौरान पक्षपातपूर्ण प्रणाली के कारण बहुत से युवा पंजाब छोड़कर विदेशों में बस गए थे, लेकिन अब इस रुझान में बदलाव आने लगा है और युवा वापस पंजाब आ रहे हैं। उन्होंने कहा, “अब चीजें बदल गई हैं। इस बदलाव का प्रमाण इस तथ्य से देखा जा सकता है कि आज यहां मौजूद एक लड़की को तीन नौकरियां मिली हैं और वह नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाली सफल उम्मीदवारों में से एक है। यह एक नया युग है। मैं युवाओं से अपील करता हूं कि वे विदेशों में रहने वाले अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को पंजाब वापस बुलाएं, उन्हें नौकरियां हम देंगे।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बहुत गर्व और संतोष की बात है कि राज्य सरकार ने पंजाब के युवाओं को लगभग 68268 सरकारी नौकरियां प्रदान की हैं। उन्होंने कहा, “पंजाब में रिश्वत और भाई-भतीजावाद का युग समाप्त हो गया है। अब पंजाब के युवा सिर्फ मेरिट और योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरियां प्राप्त कर रहे हैं और राज्य सरकार द्वारा अपनाई गई पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के कारण एक भी नियुक्ति को अदालत में चुनौती नहीं दी गई है।”

मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि नव-नियुक्त युवा अपने पदों का उपयोग समाज के जरूरतमंद और पिछड़े वर्गों की सेवा के लिए करेंगे। उन्होंने कहा, “नवभर्ती युवाओं को लोगों की अधिकतम भलाई सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि समाज के हर वर्ग को इसका लाभ मिल सके। ये भर्तियां पूरी तरह से पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से की गई हैं और युवाओं ने कड़ी प्रतिस्पर्धा में परीक्षाएं पास करने के बाद नौकरियां हासिल की हैं।”

नव-नियुक्त अधिकारियों के जीवन में सफल होने की कामना करते हुए मुख्यमंत्री ने उन्हें बड़े सपने देखने और उन सपनों को साकार करने के लिए कड़ी मेहनत करते रहने की अपील की। उन्होंने कहा, “आपको सिर्फ इसलिए गर्व नहीं करना चाहिए कि आपने ये नौकरियां प्राप्त कर ली हैं। नम्र रहें और जीवन में बड़ी सफलता के लिए कड़ी मेहनत करते रहें। इन पदों को प्राप्त करने के बाद भी हमेशा जमीन से जुड़े रहें और कड़ी मेहनत करते रहें क्योंकि यही सफलता की कुंजी है। आपको इस मंच का उपयोग जीवन में बड़ी सफलता प्राप्त करने के लिए करना चाहिए और साथ ही अच्छे इंसान बनना चाहिए।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने शिक्षा को प्राथमिकता दी है और लोगों के जीवन को बदलने के लिए इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण पहल की हैं। उन्होंने आगे कहा, “कोई भी ‘मुफ्त’ मिली चीज़ या रियायत कार्ड राज्य से गरीबी अथवा अन्य सामाजिक बुराइयों को समाप्त नहीं कर सकता। शिक्षा ही वह कुंजी है, जो लोगों के जीवन स्तर को सुधारकर उन्हें इस दुष्चक्र से बाहर निकाल सकती है। इसलिए हमारी सरकार शिक्षा के स्तर को और बेहतर बनाने तथा आम लोगों को सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि राज्य सरकार के सख्त प्रयासों के कारण पंजाब ने प्राथमिक और मिडिल स्कूल शिक्षा में केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली को पीछे छोड़कर पहला स्थान हासिल किया है।

उन्होंने आगे कहा, “हमारी सरकार ने प्राथमिक और मिडिल स्कूल शिक्षा को उन्नत किया, व्यवस्था को मजबूत बनाया, स्मार्ट कक्षाएं शुरू कीं और शिक्षकों को उन्नत प्रशिक्षण प्रदान किया है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप पंजाब स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहा है। भारत सरकार के प्रमुख संस्थानों में से एक (नेशनल इंस्टीच्यूशन फार ट्रांसफारमिंग इंडिया) आयोग द्वारा जारी आंकड़े दर्शाते हैं कि पंजाब ने प्राथमिक और मिडिल स्कूल शिक्षा में केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली को पीछे छोड़कर अग्रणी स्थान प्राप्त किया है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले चार वर्षों से राज्य सरकार ने शिक्षक प्रशिक्षण, आधुनिक शिक्षा पद्धतियों और स्मार्ट कक्षाओं पर ध्यान केंद्रित किया है। उन्होंने आगे कहा, “पहले केरल पहले स्थान पर था, लेकिन अब पंजाब ने बड़े अंतर से पहला स्थान प्राप्त कर लिया है। भविष्य में भी ऐसे और प्रयास किए जाएंगे। शिक्षा वह प्रकाश है, जो अंधकार को दूर कर पूरे संसार को रोशन करता है और इसी कारण राज्य सरकार इस पर विशेष जोर दे रही है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का दृढ़ विश्वास है कि आर्थिक रूप से कमजोर हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच का अधिकार है। उन्होंने आगे कहा, “हमारी सरकार शिक्षा क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए ठोस प्रयास कर रही है। हमारी पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सामान्य परिवारों के बच्चों को भी अन्य बच्चों के समान उत्कृष्टता प्राप्त करने के अवसर मिलें। शिक्षा आने वाली पीढ़ियों को सशक्त बनाने और समृद्ध पंजाब के निर्माण का सबसे मजबूत साधन है तथा हमारी सरकार इसे मजबूत करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार के प्रयासों के कारण पंजाब बुनियादी शिक्षा, डिजिटल बुनियादी ढांचे और स्कूल सुविधाओं में देश का नेतृत्व कर रहा है। राज्य ने राज भाषा और गणित के क्षेत्र में केरल से भी अधिक अंक प्राप्त किए हैं। उन्होंने कहा, “पंजाब के 99.9 प्रतिशत स्कूलों में बिजली की सुविधा उपलब्ध है, जबकि 99 प्रतिशत स्कूलों में कंप्यूटर उपलब्ध हैं। जब मैंने पदभार संभाला था, उस समय स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में पंजाब 27वें स्थान पर था, लेकिन आज पंजाब पहले स्थान पर पहुंच गया है।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि लोगों के टैक्स का पैसा राज्य का है और सरकार इसे जनता की भलाई के लिए समझदारी से खर्च कर रही है। उन्होंने आगे कहा, “जनता का पैसा विकास कार्यों, स्कूलों, अस्पतालों और सड़कों के माध्यम से लोगों के पास वापस पहुंच रहा है। राज्य सरकार लोगों की भलाई के लिए काम कर रही है। हमने 90 प्रतिशत घरों को मुफ्त बिजली प्रदान की है, सड़कों को बेहतर बनाया है, टोल प्लाज़ा बंद किए हैं जिससे प्रतिदिन 70 लाख रुपये की बचत हो रही है और लगातार बुनियादी ढांचे का निर्माण किया जा रहा है।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि जब वर्तमान सरकार ने पदभार संभाला था, तब सिंचाई के लिए केवल 22 प्रतिशत नहरी पानी का उपयोग किया जा रहा था, लेकिन आज यह आंकड़ा 80 प्रतिशत से अधिक हो गया है।

मुख्यमंत्री ने दोहराया कि उनकी सरकार ने पंजाब के हर कोने तक नहरी पानी पहुंचाने के लिए किसानों की सुविधा हेतु पूरे राज्य में 14,000 किलोमीटर पाइपलाइनें और खालें बनाई हैं। उन्होंने आगे कहा, “नहरों और नदियों में रिचार्ज प्वाइंट बनाए गए हैं ताकि भूजल स्तर को बढ़ाया जा सके। इसके परिणामस्वरूप जल स्तर दो से चार मीटर तक बढ़ा है। यह फैसला आने वाली पीढ़ियों के हितों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है क्योंकि पंजाब एक कृषि प्रधान राज्य है और पानी के बिना राज्य का कोई अस्तित्व नहीं है।”

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना शुरू की गई है, जिसके तहत पंजाब के सभी 65 लाख परिवारों को स्वास्थ्य कार्ड जारी किए जा रहे हैं। उन्होंने आगे कहा, “इस योजना के तहत प्रत्येक परिवार 10 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज का हकदार है और 30 लाख से अधिक लाभार्थी पहले ही स्वास्थ्य कार्ड प्राप्त कर चुके हैं। इस योजना के तहत लाखों लोगों ने मुफ्त इलाज का लाभ उठाया है और मैं लोगों से इन स्वास्थ्य कार्डों का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील करता हूं।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “राज्य के इतिहास में पहली बार धान के सीजन के दौरान कृषि ट्यूबवेलों को आठ घंटे से अधिक निर्बाध बिजली आपूर्ति दी गई है। किसानों को अब पहली बार सिंचाई के लिए दिन के समय बिजली मिल रही है, जिससे उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया है।”

“मांवां -धीयां सत्कार योजना” के बारे में बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार 1 जुलाई से इस योजना को शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने आगे कहा, “इस योजना के तहत 18 वर्ष से अधिक आयु की प्रत्येक महिला को 1,000 रुपये तथा अनुसूचित जाति से संबंधित महिलाओं को 1,500 रुपये प्रतिमाह दिए जाएंगे।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि कई सरकारें आईं और चली गईं, लेकिन उनमें से किसी ने भी जनता की भलाई की परवाह नहीं की। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “इन पार्टियों ने आपस में मिलकर शासन किया और राज्य के भोले-भाले लोगों को लूटा। पंजाब के लोगों ने ‘झाड़ू’ (आप का चुनाव चिन्ह) को वोट दिया और इसके परिणामस्वरूप स्कूलों, अस्पतालों और अन्य क्षेत्रों में बदलाव आया।”

इससे पहले सफल उम्मीदवारों जिया गर्ग, अमनदीप सिंह पन्नू, लाभदीप सिंह, रबिंदर सिंह टक्कर, कीर्ति, पुष्पिंदर, अकालजोत सिंह, हर्ष, सुमनप्रीत सिंह, जतिंदर सिंह, जुगराज सिंह, हनी, नितीश और अन्य ने योग्यता के आधार पर नौकरियां प्रदान करने के लिए मुख्यमंत्री की सराहना की। उन्होंने इस नेक कार्य के माध्यम से उनकी किस्मत बदलने के लिए मुख्यमंत्री का धन्यवाद भी किया।

Continue Reading

Punjab

नितिन नबीन के पंजाब दौरे के दौरान भाजपा की दलित-विरोधी मानसिकता हुई बेनकाब, पार्टी कार्यक्रम में एससी नेताओं का किया अपमान: हरपाल सिंह चीमा

Published

on

आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता और पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने दावा किया है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के हाल के पंजाब दौरे के दौरान भाजपा की दलित-विरोधी मानसिकता पूरी तरह बेनकाब हो गई है। भाजपा के एक हालिया कार्यक्रम का हवाला देते हुए उन्होंने खुलासा किया कि पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय सांपला और सोम प्रकाश जैसे वरिष्ठ एससी नेताओं को दर्शकों में खड़ा रखा गया, जबकि बाकी नेता मंच पर बैठे थे, जो सीधे तौर पर घोर भेदभाव को दर्शाता है।

हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि भाजपा सिर्फ एक खास अमीर वर्ग का ही सम्मान करती है जबकि दलितों, मजदूरों और गरीबों को योजनाबद्ध तरीके से हाशिये पर धकेलकर अपमानित किया जाता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पंजाब की आबादी का लगभग 34% हिस्सा बनाने वाले अनुसूचित जाति समुदाय ने इस दृष्टिकोण को करीब से देखा है। उन्होंने कहा कि भाजपा पंजाब-विरोधी, किसान-विरोधी है और इसका दलित-विरोधी चेहरा अब सबके सामने आ गया है, और पंजाब के लोग ऐसी राजनीति का कड़ा जवाब देंगे।

आप पंजाब एससी विंग के चेयरमैन गुरप्रीत सिंह जीपी के साथ एक पत्रकार सम्मेलन को संबोधित करते हुए हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के 2024 के आंकड़ों के अनुसार, देश में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के खिलाफ होने वाले अपराधों का लगभग 65% हिस्सा भाजपा शासित चार राज्यों उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और राजस्थान से सामने आया है। यह दलितों की सुरक्षा करने में भाजपा सरकार की नाकामी और पिछड़े समुदायों के प्रति पार्टी के गहरे पूर्वाग्रह को दर्शाता है।

भाजपा के वरिष्ठ दलित नेताओं के साथ हुए भेदभाव को उजागर करते हुए उन्होंने खुलासा किया कि पंजाब में पार्टी के एक हालिया कार्यक्रम के दौरान, पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय सांपला और पूर्व केंद्रीय मंत्री सोम प्रकाश जैसे वरिष्ठ एससी नेताओं को दर्शकों में खड़े होने के लिए मजबूर किया गया, जबकि उच्च नेतृत्व मंच पर विराजमान था। इस घटना ने पंजाब के लोगों के सामने भाजपा का असली चेहरा नंगा कर दिया है। जिन नेताओं ने दशकों तक पार्टी की सेवा की और अनुसूचित जाति समुदाय का प्रतिनिधित्व किया, उन्हें बुनियादी सम्मान भी नहीं दिया गया।

वरिष्ठ आप नेता ने आगे कहा कि यह घटना दलितों, मजदूरों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के प्रति भाजपा की भेदभावपूर्ण मानसिकता का स्पष्ट सबूत है। भाजपा सिर्फ एक खास और अमीर वर्ग का सम्मान करती है। मजदूरों, दलितों और गरीबों का प्रतिनिधित्व करने वालों को हाशिये पर फेंक दिया जाता है और अपमानित किया जाता है।

उन्होंने आगे कहा कि पंजाब का अनुसूचित जाति समुदाय, जो प्रदेश की आबादी का लगभग 34% है, ने इस भेदभावपूर्ण रवैये को खुद महसूस किया है। पंजाब के लोग दलित नेताओं और उन पिछड़े समाजों का अपमान करने के लिए भाजपा को कभी माफ नहीं करेंगे, जिन्होंने देश की तरक्की में बड़ा योगदान दिया है।

अपनी बात समाप्त करते हुए हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि भाजपा न सिर्फ पंजाब-विरोधी और किसान-विरोधी है, बल्कि इसका दलित-विरोधी चेहरा भी अब पूरी तरह बेनकाब हो गया है। पंजाब के लोग ऐसी बंटवारे और भेदभाव वाली राजनीति का मुंहतोड़ जवाब देंगे।

Continue Reading

Punjab

अमृतसर में पुलिस-बदमाश मुठभेड़, गोली लगने के बाद 2 आरोपी गिरफ्तार

Published

on

पंजाब सरकार ने निजी स्कूलों द्वारा की जा रही मनमानी फीस वृद्धि पर रोक लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में एक महत्वपूर्ण अध्यादेश को मंजूरी दी गई, जिसके तहत अब राज्य के निजी स्कूल हर साल 5 प्रतिशत से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकेंगे।

कैबिनेट बैठक के बाद वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि सरकार का उद्देश्य अभिभावकों को अनावश्यक आर्थिक बोझ से राहत देना और शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि नए नियमों के लागू होने के बाद फीस वृद्धि को नियंत्रित किया जाएगा और निजी स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगेगा।

शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि सरकार अभिभावकों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने जानकारी दी कि जिन निजी स्कूलों ने पिछले तीन वर्षों के दौरान 15 प्रतिशत से अधिक फीस बढ़ाई है, उनसे वसूली गई अतिरिक्त राशि अभिभावकों को वापस करवाई जाएगी।

सरकार ने नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भी प्रावधान किया है। नए नियमों के तहत प्राथमिक स्कूलों पर 50 हजार रुपये तक, हाई स्कूलों पर 2 लाख रुपये तक और वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों पर 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।

पंजाब सरकार का कहना है कि यह फैसला लाखों अभिभावकों को राहत देने वाला साबित होगा। साथ ही शिक्षा क्षेत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ेगी तथा शिक्षा को व्यवसाय बनाने की प्रवृत्ति पर भी रोक लगेगी।

Continue Reading

Trending