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आम आदमी पार्टी ने Sukhbir Badal पर हमले की कड़ी निंदा, पंजाब पुलिस की कार्रवाई की सराहना

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आम आदमी पार्टी (आप) ने शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के पूर्व प्रधान Sukhbir Badal पर हुए हमले की कड़ी निंदा की है। आप पंजाब के अध्यक्ष अमन अरोड़ा ने इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना बताया और राज्य में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पार्टी की प्रतिबद्धता को दोहराया।

अरोड़ा ने पंजाब पुलिस का धन्यवाद करते हुए कहा कि हमलावर को पकड़ने में पुलिस की त्वरित कार्रवाई और सतर्कता सराहनीय रही। उन्होंने बताया कि इस घटना में एक बड़ी त्रासदी को पंजाब पुलिस के सक्रिय दृष्टिकोण ने टाल दिया। उन्होंने उन अधिकारियों के प्रयासों की सराहना की जिन्होंने मौके पर ही खतरे की पहचान की और उसे रोकने में सफलता पाई।

अरोड़ा ने आगे बताया कि दरबार साहिब, जो एक पवित्र स्थल है, सुरक्षा के लिहाज से बड़ी चुनौती पेश करता है, क्योंकि वहां तलाशी और औपचारिक जांच संभव नहीं है। सुखबीर बादल और अन्य नेताओं की सुरक्षा के लिए लगभग 200 पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया था। हमलावर नारायण सिंह चौरा, जो आपराधिक मामलों में शामिल था, को निगरानी में रखा गया था और पुलिस ने हमले के तुरंत बाद उसे पकड़ लिया। घटना में प्रयुक्त हथियार भी बरामद कर लिया गया।

आप पंजाब अध्यक्ष ने यह स्पष्ट किया कि राज्य में शांति भंग करने का प्रयास करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा, “पंजाब सद्भाव का राज्य है, और हम किसी को भी राज्य की शांति भंग करने की इजाजत नहीं देंगे।” उन्होंने विश्वास जताया कि पंजाब पुलिस इस मामले में पूरी तरह से सक्षम और प्रतिबद्ध है।

अरोड़ा ने शिअद की मांग को लेकर कहा कि न्यायिक या सीबीआई जांच से संबंधित मांगें उनका अधिकार हैं, लेकिन इस मामले में सबूतों की स्पष्टता को देखते हुए पुलिस की कार्रवाई पर कोई संदेह नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच में कोई अन्य लिंक या साजिश सामने आई, तो पंजाब पुलिस सख्त कार्रवाई करेगी।

वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने भी इस हमले की निंदा की और कहा कि इस घटना में शामिल दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा, “किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा, और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी।”

आप सांसद मलविंदर सिंह कंग ने इस घटना को शर्मनाक और निंदनीय करार दिया। उन्होंने कहा, “गुरु साहिब के पवित्र स्थल पर ऐसी हरकत करने वाला सिख नहीं हो सकता।” कंग ने पंजाब पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया की सराहना करते हुए कहा कि पुलिस की सतर्कता ने इस घृणित कृत्य को बढ़ने से रोक दिया। उन्होंने यह भी कहा कि दरबार साहिब एक शांति और भक्ति का स्थान है, और यहां अशांति पैदा करने का कोई भी प्रयास बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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आप सांसद मालविंदर कंग ने पंजाब यूनिवर्सिटी में पंजाबी साइनबोर्ड फिर से लगाने के फैसले का किया स्वागत

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आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद मालविंदर सिंह कंग ने पंजाब यूनिवर्सिटी के अपने कैंपस में पंजाबी साइनबोर्ड और नेमप्लेट फिर से लगाने के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने इसे पंजाब की भाषाई और सांस्कृतिक विरासत को बचाने की दिशा में एक ज़रूरी कदम बताया।

कंग ने पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ में साइनबोर्ड और नेमप्लेट से पंजाबी (गुरुमुखी) हटाने पर कड़ा एतराज़ जताया था। उन्होंने इस कदम को पंजाब के इतिहास, संस्कृति और पहचान को दिखाने वाली भाषा का अपमान बताया।

इस मामले को भारत के माननीय उपराष्ट्रपति और पंजाब यूनिवर्सिटी के चांसलर, सीपी राधाकृष्णन के सामने उठाते हुए, कंग ने उनसे तुरंत दखल देने की मांग की ताकि पंजाबी को उसकी सही जगह और सम्मान मिले, खासकर एक ऐसे संस्थान में जो पंजाब के नाम और विरासत को बनाए रखता है।

इस बारे में जानकारी सांझा करते हुए, कंग ने कहा कि उन्हें पंजाब यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर से एक ऑफिशियल लेटर मिला है, जिसमें कन्फर्म किया गया है कि पंजाबी साइनबोर्ड लगाने का प्रोसेस शुरू हो चुका है। लेटर के मुताबिक, यूनिवर्सिटी ने पंजाबी साइनबोर्ड के लिए ऑर्डर दे दिया है और उन्हें लगाने का काम जल्द से जल्द पूरा कर लिया जाएगा।

इस फैसले का स्वागत करते हुए, कंग ने कहा कि इससे एक मजबूत संदेस जाता है कि पंजाब के वजूद और पंजाबी भाषा की इज्ज़त को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। उन्होंने आगे कहा कि पंजाबी सिर्फ एक भाषा नहीं है, बल्कि पंजाब की रिच कल्चरल विरासत और सामूहिक पहचान की निशानी है, जिसका हर लेवल पर सम्मान किया जाना चाहिए और उसे बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

कंग ने इस मामले पर तुरंत ध्यान देने के लिए भारत के माननीय उपराष्ट्रपति और पंजाब यूनिवर्सिटी के चांसलर, श्री सी. पी. राधाकृष्णन का धन्यवाद किया। उन्होंने यूनिवर्सिटी प्रशासन की भी तारीफ़ की कि उन्होंने सुधार के कदम उठाए और पंजाब के लोगों की चिंताओं पर पॉज़िटिव जवाब दिया।

आप सांसद ने कहा कि पंजाब से जुड़े हर संस्थान में पंजाबी के सम्मान, अहमियत और हक की हमेशा रक्षा होनी चाहिए।

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मोहाली को मिला नया मेयर, विधायक कुलवंत सिंह के बेटे सरबजीत समाना ने संभाली कमान

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मोहाली नगर निगम को नया मेयर मिल गया है। मंगलवार को हुए मेयर चुनाव में आम आदमी पार्टी के नेता और विधायक कुलवंत सिंह के पुत्र सरबजीत सिंह समाना को मेयर चुना गया। वहीं आर.पी. शर्मा को सीनियर डिप्टी मेयर और हरपाल चन्नी को डिप्टी मेयर की जिम्मेदारी सौंपी गई।

चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद पंजाब आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष अमन अरोड़ा, विधायक कुलवंत सिंह और पार्टी नेता डॉ. सन्नी आहलूवालिया ने सरबजीत समाना को बधाई दी और उनके सफल कार्यकाल की शुभकामनाएं दीं।

मेयर पद को लेकर पिछले कई दिनों से राजनीतिक चर्चाएं चल रही थीं। शुरुआत में डॉ. सन्नी आहलूवालिया को इस पद का मजबूत दावेदार माना जा रहा था। संगठन में उनकी मजबूत पकड़ और पार्टी नेतृत्व से करीबी संबंधों के चलते उनका नाम चर्चा में था, लेकिन अंतिम समय में राजनीतिक समीकरण बदले और सरबजीत समाना को उम्मीदवार बनाया गया।

बताया जा रहा है कि चुनाव से पहले विधायक कुलवंत सिंह ने पार्टी पार्षदों के साथ लगातार बैठकें कीं। नगर निगम चुनाव जीतने वाले कई पार्षद उनके करीबी सहयोगी माने जाते हैं, जिससे मेयर पद की दौड़ में उनके बेटे का पलड़ा भारी रहा।

पार्टी में एकजुटता बनाए रखने और किसी भी तरह के विवाद से बचने के लिए पंजाब आप अध्यक्ष अमन अरोड़ा खुद नगर निगम कार्यालय पहुंचे और उनकी मौजूदगी में पूरी चुनाव प्रक्रिया संपन्न हुई।

दूसरी ओर, मेयर चुनाव से पहले कांग्रेस ने चुनाव प्रक्रिया का बहिष्कार कर दिया, जबकि शिरोमणि अकाली दल के पार्षद बैठक के दौरान वॉकआउट कर गए। इसके चलते चुनावी माहौल काफी गर्म रहा।

चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और पारदर्शी ढंग से संपन्न कराने के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। गोपनीयता बनाए रखने के लिए सभी पार्षदों के मोबाइल फोन नगर निगम कार्यालय के बाहर जमा कराए गए और रिकॉर्ड दर्ज होने के बाद ही उन्हें बैठक कक्ष में प्रवेश दिया गया।

सरबजीत सिंह समाना के मेयर बनने के साथ ही मोहाली नगर निगम में आम आदमी पार्टी की पकड़ और मजबूत हो गई है। अब शहर के विकास कार्यों और नगर निगम की आगामी योजनाओं पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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अकाली दल को बड़ा झटका! मनप्रीत इयाली ‘वारिस पंजाब दे’ में हुए शामिल

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पंजाब की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। दाखा से शिरोमणि अकाली दल के विधायक मनप्रीत सिंह इयाली मंगलवार को औपचारिक रूप से ‘वारिस पंजाब दे’ संगठन में शामिल हो गए। उनके इस फैसले को पंजाब की पंथक राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

संगठन में शामिल होने के बाद मनप्रीत सिंह इयाली ने कहा कि उन्होंने बिना किसी शर्त और पद की अपेक्षा के इस मंच का साथ चुना है। उनका उद्देश्य पंजाब की पंथक और क्षेत्रीय ताकतों को एकजुट करना तथा राज्य से जुड़े अहम मुद्दों को मजबूती से उठाना है।

इयाली ने स्पष्ट किया कि वह फिलहाल विधायक पद से इस्तीफा नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि कानूनी और तकनीकी रूप से वह अभी भी शिरोमणि अकाली दल के विधायक हैं। उन्होंने बताया कि ‘वारिस पंजाब दे’ फिलहाल एक सामाजिक और संगठनात्मक मंच है, न कि चुनाव आयोग में पंजीकृत राजनीतिक दल, इसलिए विधायक पद छोड़ने का कोई सवाल नहीं उठता।

उन्होंने कहा कि पंजाब के कई महत्वपूर्ण मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं, जिनमें राज्य के पानी का मुद्दा, पंजाबी भाषी क्षेत्रों का मामला, चंडीगढ़ पर पंजाब का अधिकार और अन्य क्षेत्रीय हित शामिल हैं। इन मुद्दों को नई ऊर्जा और मजबूती के साथ उठाया जाएगा।

मनप्रीत इयाली ने कहा कि पंजाब, पंजाबी पहचान और पंथक विचारधारा को मजबूत करने के लिए समान सोच रखने वाली सभी ताकतों को एक मंच पर आने की जरूरत है। उनके इस कदम के बाद पंजाब की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं और आने वाले समय में इसके राजनीतिक असर देखने को मिल सकते हैं।

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