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देश के पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी ज़ैल सिंह को गरिमापूर्ण श्रद्धांजलि भेंट
देश के पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी ज़ैल सिंह की बरसी के मौके पर संधवां गाँव में हुए एक प्रभावशाली श्रद्धांजलि समागम के दौरान पंजाब विधान सभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने उनके द्वारा मुल्क और ख़ासकर पंजाब के लिए किए कार्यों को याद करते हुए ज्ञानी जी को सजदा किया।
कुलतार सिंह संधवां ने ज्ञानी की तुलना अमरीका के राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन के साथ करते हुए कहा कि आधी सदी तक सत्ता के साथ जुड़े रहने के बावजूद भी विनम्र रहते हुए उन्होंने समाज के पिछड़े वर्ग की भलाई के लिए प्रयास करते रहे। उन्होंने कहा कि ज्ञानी ज़ैल सिंह जी सिख धर्म के रास्ते पर चलने वाले थे और उन्होंने गुरू साहिबान की अपार कृपा स्वरूप जहाँ से गुरू गोबिन्द सिंह जी गुजऱे थे वहां गुरू गोबिन्द सिंह मार्ग बनाकर गुरू साहिब की सेवा का कार्य किया।
संधवां जोकि ख़ुद ज्ञानी ज़ैल सिंह के पोते हैं, ने उनके कार्यकाल के समय को याद करते हुए उनके द्वारा फरीदकोट को जि़ला बनाने का जिक्र करते हुए कहा कि जि़ला बनाने के मौके पर उन्होंने फरीदकोट के उसी पूर्व महाराजा से इमारत हासिल की, जिन्होंने कभी आज़ादी से पहले उन पर अत्याचार किया था। यह उनका कुशल प्रशासनिक अनुभव का ही नतीजा था कि वह हर एक को साथ लेकर चलते थे और पंजाब के मुख्यमंत्री से लेकर देश के सर्वोच्च पद राष्ट्रपति तक बने।
संधवां ने कहा कि ज्ञानी बहुत ही बुद्धिमान और दूरदर्शी राजनीतिज्ञ थे। वह अपने परिवार और राजनीति को किस तरह अगल रखते थे इसकी उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जब ज्ञानी जी मुख्यमंत्री बने तब उन्होंने अपने पुत्र को गुरुद्वारा साहिब ले जाकर प्रण करवाया कि वह उनके सरकारी कार्य से दूर रहेंगे।
ज्ञानी को विकास पुरुष बताते हुए स्पीकर संधवां ने कहा कि पंजाब के 100 प्रतिशत गाँवों का बिजलीकरण उनके कार्यकाल के समय में ही हुआ। फरीदकोट में मेडिकल कॉलेज लाना भी उनकी दूरदर्शी सोच का ही नतीजा था। शहीद उधम सिंह जी की अस्थियां भी ज्ञानी ज़ैल सिंह जी के प्रयासों के साथ ही भारत आईं। उन्होंने जंग-ए-आज़ादी के पंजाब के महान शहीदों के स्मृतिचिन्ह बनवाए। प्रजामंडल लहर में शामिल होकर जहाँ उन्होंने आज़ादी की लड़ाई में शमूलियत की थी वहीं उन्होंने आज़ादी सेनानियों को ताम्र पत्रों से सम्मानित करने की योजना लागू करने में भी अहम भूमिका निभाई।
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“संगीत का सुनहरा दौर खत्म” — आशा भोसले के निधन पर CM भगवंत मान ने जताया गहरा शोक
पंजाब के मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ने महान गायिका Asha Bhosle के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उनके निधन से न सिर्फ संगीत जगत, बल्कि पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है। मुख्यमंत्री ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर शोक संदेश जारी करते हुए कहा कि पद्म विभूषण से सम्मानित आशा भोसले का निधन बेहद दुखद है। उन्होंने कहा कि अपने लंबे संगीत करियर में आशा भोसले ने अनगिनत हिट गानों के जरिए लोगों के दिलों में अमिट छाप छोड़ी है।

सीएम भगवंत मान ने कहा कि आशा भोसले के जाने से भारतीय संगीत का एक सुनहरा युग समाप्त हो गया है। उनकी मधुर आवाज़ और अद्वितीय प्रतिभा ने संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उन्होंने यह भी कहा कि यह क्षति कभी पूरी नहीं हो सकती।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि आशा भोसले का संगीत और उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा और उनकी रचनाएं आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी। इस दुख की घड़ी में मुख्यमंत्री ने दिवंगत गायिका के परिवार, दोस्तों और लाखों प्रशंसकों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। साथ ही उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और परिवार को इस अपार दुख को सहने की शक्ति दें।
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बेमौसम बारिश से तबाही के बीच Punjab पहुंचेगी केंद्रीय टीम, प्रभावित जिलों का करेगी दौरा
पंजाब में हाल ही में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। नुकसान की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार की नौ सदस्यीय टीम आज पंजाब का दौरा करेगी और प्रभावित जिलों का जायजा लेगी। इस टीम की अगुवाई केंद्रीय उपभोक्ता मामले एवं खाद्य मंत्रालय के डिप्टी डायरेक्टर पी.के. सिंह कर रहे हैं। टीम में भारतीय खाद्य निगम (FCI) और राज्य सरकार के अधिकारी भी शामिल हैं, जो जमीनी हालात का निरीक्षण करेंगे और गेहूं के सैंपल इकट्ठा करेंगे।
मिली जानकारी के अनुसार, राज्य में करीब 1.30 लाख एकड़ खड़ी फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, जबकि लाखों एकड़ में फसल की गुणवत्ता पर असर पड़ा है। मंडियों में पहुंच रही गेहूं की नमी सामान्य 12% की जगह 15% तक दर्ज की जा रही है, वहीं लगभग 60% तक चमक में गिरावट भी सामने आई है।
इस बीच भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने केंद्र से खरीद नियमों में ढील देने की मांग की है, ताकि किसानों की फसल ₹2,585 प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी जा सके। मुख्यमंत्री ने इस संबंध में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात कर किसानों के हित में राहत देने की अपील की है।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार पहले ही राजस्थान को इसी तरह की छूट दे चुकी है, जहां बेमौसम बारिश से बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ था। 2026-27 रबी सीजन के लिए केंद्र ने गुणवत्ता मानकों में ढील देते हुए 50% तक चमक कम और 15% तक टूटे दानों वाली गेहूं को भी MSP पर खरीदने की अनुमति दी है।
अब सभी की नजरें केंद्रीय टीम की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिसके आधार पर पंजाब के किसानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
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गुरु रविदास जी के 650वें प्रकाश पर्व पर सालभर होंगे भव्य कार्यक्रम, CM भगवंत मान ने तैयारियों को दी अंतिम मंजूरी
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने श्री गुरु रविदास जी के 650वें प्रकाश पर्व को भव्य और ऐतिहासिक तरीके से मनाने के लिए राज्यभर में आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा को अंतिम रूप दे दिया है। यह निर्णय चंडीगढ़ स्थित पंजाब भवन में संत समाज के साथ हुई अहम बैठक के दौरान लिया गया, जिसमें पूरे साल चलने वाली गतिविधियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
सरकार की योजना के तहत इस विशेष अवसर को समर्पित कार्यक्रमों में सेमिनार, कीर्तन समागम, धार्मिक यात्राएं, पौधारोपण अभियान और विभिन्न सामाजिक व सांस्कृतिक गतिविधियां शामिल होंगी। इसके अलावा पूरे पंजाब में लगभग 650 एकड़ भूमि पर ‘गुरु रविदास बगीचियां’ स्थापित करने की भी योजना बनाई गई है। मुख्य राज्य स्तरीय समागम खुरालगढ़ में आयोजित किया जाएगा, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु रविदास जी के समानता, मानवता और भेदभाव मुक्त समाज के संदेश को विश्व स्तर तक पहुंचाना सरकार का लक्ष्य है। उन्होंने यह भी कहा कि संत समाज के मार्गदर्शन से इन कार्यक्रमों को और प्रभावी बनाया जाएगा, ताकि युवा पीढ़ी भी गुरु जी की शिक्षाओं से प्रेरणा ले सके।
सरकार द्वारा प्रस्तावित कार्यक्रमों में विशेष कीर्तन दरबार, संत सम्मेलन, डॉक्यूमेंट्री शो, ड्रोन शो, रक्तदान शिविर, मैराथन, साइकिल रैलियां और स्कूल स्तर पर प्रतियोगिताएं भी शामिल हैं। इसके साथ ही मीनार-ए-बेगमपुरा में 3डी प्रोजेक्शन शो और गुरु रविदास जी के जीवन व विचारों पर प्रदर्शनी का आयोजन भी किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह प्रकाश पर्व सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि समाज को समानता, भाईचारे और मानवता के रास्ते पर आगे बढ़ाने का एक बड़ा अवसर है। उन्होंने सभी वर्गों से इस आयोजन में बढ़-चढ़कर भाग लेने और गुरु जी के संदेश को जीवन में अपनाने की अपील की।
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