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देश के हर बूथ के लोग राम लला का करेंगे दर्शन, लोकसभा चुनाव से पहले BJP का बड़ा प्लान
लोकसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने बूथ स्तर से पार्टी के कार्यकर्ताओं और आम लोगों को अयोध्या में राम मंदिर का दर्शन करवाने का बड़ा प्लान बनाया है. पार्टी की ओर से इस बाबत 25 जनवरी से 25 मार्च तक बड़ा अभियान चलाया जाएगा और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं और आम लोगों के लिए राम लला के दर्शन की व्यवस्था की जाएगी.
लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी देश भर में बूथ स्तर से आम लोगों को राम लला का दर्शन कराएगी. इसके लिए बीजेपी की ओर से 25 जनवरी से 25 मार्च तक अभियान चलाया जाएगा. देश भर के बीजेपी के कार्यकर्ता और आम लोग अयोध्या जाएंगे और राम मंदिर में राम लला का दर्शन करेंगे. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने मंगलवार को बैठक की. उन्होंने 22 जनवरी को दीवाली जैसा माहौल बनाने के लिए बीजेपी कार्यकर्ताओं को कहा है. इसके साथ ही 22 जनवरी को सभी लोगों को राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम दिखाने के लिए कहा गया है.
बता दें कि पीएम नरेंद्र मोदी अयोध्या में मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे. अयोध्या दौरे के दौरान पीएम मोदी ने इस दिन पूरे देश के लोगों से आह्वान किया था कि वह घर-घर में दीये जलाएं.
बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि सबको अच्छे से दर्शन करवाना है. किसी को असुविधा ना हो. बिना भेदभाव के सभी को दर्शन करवाना है. 22 जनवरी के बाद राम मंदिर के दर्शन की व्यवस्था आम लोगों के लिए की जाएगी. इसमें पार्टी के कार्यकर्ता सहयोग करेंगे.
25 जनवरी से 25 मार्च तक अभियान चलाएगी बीजेपी
बीजेपी हर बूथ लेबल से कार्यकर्ताओं को राम मंदिर का दर्शन कराएगी. 25 जनवरी से 25 मार्च तक बीजेपी इसके लिए अभियान चलाएगी. 50 हजार लोगों के एक दिन में दर्शन करवाने का टारगेट रखा गया है. बीजेपी हर बूथ से आम लोगों को राम मंदिर के दर्शन करने के लोगों को भेजेगी. सभी लोग अपने पैसे दर्शन करने जाएंगे. बीजेपी नेता सिर्फ सहयोग और व्यवस्था करेंगे.
राज्य, लोकसभा और विधानसभा लेबल पर संयोजक नियुक्त किया गया है. राम मंदिर के दर्शन के लिए जानें वाले लोग बीजेपी के झंडे का इस्तेमाल नहीं करेंगे. बैठक में कहा गया है कि संगठन कार्यकर्ताओं के अयोध्या दर्शन के अलावा पार्टी पदाधिकारियों को यह पता लगाना है कि क्या क्षेत्र का कोई आम आदमी भी अयोध्या जाना चाहता है? यदि कोई राम मंदिर दर्शन के लिए जाना चाहता है, तो उसके लिए व्यवस्था करने को कहा गया है.
राम मंदिर का दर्शन करने वालों का होगा धूमधाम से स्वागत
पार्टी नेताओं ने कहा कि राम मंदिर के दर्शन के लिए आने वालों का अभिनंदन और स्वागत करने के लिए हर मोहल्ले में ढोल, नगाड़े, झांझ बजाए जाएं. इसके साथ ही राम मंदिर अभियान के दौरान ‘तीसरी बार मोदी सरकार/अबकी बार मोदी सरकार 400 पार’ का नारा प्रचारित करने के लिए कहा गया है.
दूसरी ओर, राम मंदिर दर्शन के लिए अयोध्या की संचार व्यवस्था में क्या बुनियादी ढांचा विकास किया गया है. इसे लेकर केंद्र सरकार ने एक वीडियो जारी किया है. दावा किया गया है कि प्राण प्रतिष्ठा की स्थापना के बाद पहले 100 दिनों में 1000 ट्रेनें चलाई जाएंगी. रेल मंत्री पर बीजेपी के मेगा प्लान को लागू करने की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है.
देश के कुल 430 स्थानों से ट्रेनें अयोध्या जाएंगी. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से अयोध्या के लिए प्रतिदिन 35 ट्रेनें चलाने का अनुरोध किया गया है. अब कुल 37 ट्रेनें रेलवे द्वारा अयोध्या से जुड़ी हुई हैं. आस्था ट्रेन 25 जनवरी से शुरू होगी.
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सोना-चांदी खरीदना होगा महंगा! केंद्र सरकार ने बढ़ाई इंपोर्ट ड्यूटी
अगर आप आने वाले समय में सोना या चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो अब आपको पहले से ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं। केंद्र सरकार ने सोना, चांदी और अन्य कीमती धातुओं के आयात पर लगने वाली ड्यूटी में बड़ा इजाफा कर दिया है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक नई दरें 13 मई 2026 से लागू हो गई हैं।
सरकार के इस फैसले के बाद देश में सोने और चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी होने की संभावना है। विदेशों से सोना मंगवाना अब महंगा हो जाएगा, जिसका सीधा असर ज्वेलरी बाजार और ग्राहकों पर पड़ेगा।
नई दरों के अनुसार सोने पर कुल आयात शुल्क 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया गया है। बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) को 5 फीसदी से बढ़ाकर 10 फीसदी कर दिया गया है, जबकि एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (AIDC) को 1 फीसदी से बढ़ाकर 5 फीसदी कर दिया गया है। यूएई से तय कोटे के तहत आने वाले सोने पर भी अब बढ़ी हुई ड्यूटी लागू होगी।
इस फैसले का सबसे ज्यादा असर गहने खरीदने वालों पर पड़ सकता है। शादी या निवेश के लिए सोना खरीदना अब और महंगा हो जाएगा। ज्वेलर्स की लागत बढ़ेगी और इसका बोझ आखिरकार ग्राहकों पर ही पड़ेगा।
इसके साथ ही निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स और रीसाइक्लिंग जैसे उद्योग भी प्रभावित हो सकते हैं, क्योंकि इन क्षेत्रों में कीमती धातुओं का बड़े स्तर पर इस्तेमाल होता है। लागत बढ़ने से कई उत्पाद महंगे हो सकते हैं।
भारत में पिछले कुछ वर्षों के दौरान सोने के आयात में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2025-26 में सोने का आयात 24 फीसदी से ज्यादा बढ़कर 71.98 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 58 बिलियन डॉलर था। हालांकि मात्रा के हिसाब से आयात 757 टन से घटकर 721 टन रह गया।
भारत दुनिया का चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता है। देश सबसे ज्यादा सोना स्विट्जरलैंड से आयात करता है, जिसका हिस्सा करीब 40 फीसदी है। इसके बाद यूएई और दक्षिण अफ्रीका का नंबर आता है।
गौरतलब है कि जुलाई 2024 के बजट में सरकार ने लोगों को राहत देने के लिए सोने पर ड्यूटी 15 फीसदी से घटाकर 6 फीसदी कर दी थी। लेकिन अब बढ़ते आयात और विदेशी मुद्रा पर दबाव को देखते हुए सरकार ने फिर से ड्यूटी बढ़ाने का फैसला लिया है।
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पीएम की सलाह आर्थिक इमरजेंसी की आहट?- केजरीवाल
आम आदमी पार्टी ने प्रधानमंत्री की ओर से देशवासियों को पेट्रोल, डीजल, खाद्य तेल का कम इस्तेमाल करने और सोने समेत अन्य कीमतीे चीजें खरीदने में कटौती करने की सलाह देने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी ने सवाल किया है कि कहीं देश भारी आर्थिक संकट में तो नहीं फंस गया है। ‘‘आप’’ के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पीएम ने देश के सभी नागरिकों को खाने-पीने, घूमने- फिरने और विदेश यात्राओं में कटौती करने की सलाह दी है। साथ ही, सोना और अन्य कीमती चीज़ें खरीदने में भी कटौती करने की सलाह दी है। उन्होंने पूछा है कि क्या यह देश में आर्थिक इमरजेंसी की आहट है? क्या देश भारी आर्थिक संकट में फंस गया है? ऐसा तो देश में पहले कभी नहीं हुआ। प्रधानमंत्री को देश के सामने सच्चाई रखनी चाहिए। आखिर देश की असली आर्थिक हालत क्या है?
उधर, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने भी स्वदेशी अपनाने और विदेशी चीजें कम से कम खरीदने की सलाह पर प्रधामंत्री पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री शब्दों के उस्ताद हैं, लेकिन उनको देश के सामने सच बोलना चाहिए। यह सर्वविदित है कि मौजूदा समय में भारत की डोर व्हाइट हाउस के हाथों में है, क्योंकि हर फैसला व्हाइट हाउस की सहमति से ही लिया जा रहा है। भारत-पाकिस्तान युद्ध जैसे मुद्दों में भी सीज फायर की घोषणा अमेरिकी अधिकारियों की ओर से की गई थी, जो देश की संप्रभुता पर एक गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
सीएम भगवंत सिंह मान ने कहा कि भले ही देश के शासक विश्व गुरु होने का दावा करते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि वे विश्व चेला बनने की ओर बढ़ रहे हैं क्योंकि व्हाइट हाउस के आदेशों का आंख मूंदकर पालन किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने मेक इन इंडिया को लेकर बड़े-बड़े दावे किए थे, लेकिन रक्षा क्षेत्र तक में एफडीआई जैसे उनके कदमों ने देश को बर्बाद कर दिया है। भगवंत मान ने आगाह किया कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौता भारतीय कृषि को और अधिक नुकसान पहुंचा सकता है।
देश के युवाओं को पेपर लीक के खिलाफ निर्णायक लड़ाई छेड़नी होगी- केजरीवाल
अरविंद केजरीवाल ने नीट परीक्षा का पेपर लीक होने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि हर साल 7 करोड़ युवा इंजीनियरिंग, मेडिकल कॉलेजों में दाखिले और सरकारी नौकरियों के लिए परीक्षाएँ देते हैं। लेकिन राजनीतिक संरक्षण में चल रहे पेपर लीक गिरोह इन युवाओं का भरोसा और हौसला तोड़ रहे हैं। पेपर लीक में शामिल माफिया और उन्हें संरक्षण देने वाले नेता देश के दुश्मन हैं। ये लोग देश की नींव को खोखला कर रहे हैं। सरकारें इस अपराध की साझेदार बन चुकी हैं। इसके खिलाफ युवाओं को देशभर में एक निर्णायक लड़ाई छेड़नी होगी।
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‘एक साल तक सोना न खरीदें’ PM मोदी की बड़ी अपील
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में हैदराबाद में एक रैली के दौरान देशवासियों से एक साल तक गैर-जरूरी सोने की खरीद से बचने की अपील किए जाने के बाद देशभर की ज्वेलरी इंडस्ट्री में चर्चा और चिंता का माहौल बन गया है। PM मोदी ने देश की आर्थिक स्थिति, विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव और वैश्विक संकटों को ध्यान में रखते हुए लोगों से सोने की खरीद कम करने और “मेड इन इंडिया” उत्पादों को प्राथमिकता देने की अपील की थी।
इस बयान के बाद दिल्ली और देशभर के व्यापारियों एवं उद्यमियों के संगठन ‘चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री’ (CTI) ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री की अपील के बाद ज्वेलरी और सोने के कारोबार से जुड़े सैकड़ों व्यापारियों ने चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि इस तरह की अपीलों से ग्राहकों में असमंजस और डर का माहौल बन सकता है, जिसका सीधा असर सोने की बिक्री पर पड़ सकता है।
CTI के अनुसार चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता देश है। मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक भारत में हर साल करीब 700 से 800 टन सोने की खपत होती है। यदि लोग प्रधानमंत्री की अपील को बड़े स्तर पर मानते हैं तो देश में सोने की मांग 800 टन से घटकर लगभग 500 टन तक आ सकती है। व्यापारियों का मानना है कि इससे ज्वेलरी बाजार में बड़ी मंदी आ सकती है।
ज्वेलर्स ने खास तौर पर चिंता जताई है कि यह अपील ऐसे समय पर आई है जब देश में शादी-विवाह का सीजन चरम पर है। भारत में शादी समारोहों के दौरान सोने की खरीद को पारंपरिक और सांस्कृतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में यदि ग्राहक सोने की खरीद से पीछे हटते हैं तो इसका बड़ा असर छोटे ज्वेलर्स से लेकर बड़ी ज्वेलरी कंपनियों तक सभी पर पड़ सकता है।
CTI ने यह भी कहा कि इस अपील का असर सिर्फ बाजार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शेयर बाजार में सूचीबद्ध बड़ी ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। निवेशकों की चिंता के कारण ज्वेलरी सेक्टर के स्टॉक्स में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
व्यापारिक संगठनों का कहना है कि ज्वेलरी इंडस्ट्री देश की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा है, जिससे लाखों लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई है। इसलिए उद्योग को मजबूत बनाए रखने के लिए संतुलित नीतियां और स्पष्ट संदेश बेहद जरूरी हैं। अब ज्वेलरी कारोबार से जुड़े व्यापारी नई रणनीतियों और ग्राहकों को आकर्षित करने के नए तरीकों पर काम करने की तैयारी कर रहे हैं।
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