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वैष्णो देवी भवन का रास्ता तीसरी आंख की देखरेख में रहेगा, लगाए गए इतने CCTV कैमरे
नेशनल डेस्क : श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोडर् के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अंशुल गर्ग ने शनिवार को नए साल 2024 की शुरुआत से पहले परेशानी मुक्त तीर्थयात्रा के लिए मंदिर की सुरक्षा और परिचालन तैयारियों की व्यापक समीक्षा करने के लिए सुरक्षा एजेंसियों तथा आध्यात्मिक विकास केंद्र के अन्य हितधारकों के साथ बैठक की। बैठक में श्री गर्ग ने इस बात पर जोर दिया कि नया साल 2024 करीब आ रहा है और बोडर् को आधार शिविर कटरा के अलावा श्री माता वैष्णो देवी जी के पवित्र मंदिर में देश और विदेश के विभिन्न हिस्सों से काफी संख्या में तीर्थयात्रियों के आने की उम्मीद है। उन्होंने सभी हितधारकों के बीच तालमेल की आवश्यकता पर बल दिया।
एसएमवीडीएसबी के अध्यक्ष एवं प्रदेश के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के निर्देशों के अनुरूप यात्रा के सुचारू परिचालन ध्यान केंद्रित करते हुए उन्होंने कहा कि सुरक्षा कर्मियों की तैनाती के अलावा सीसीटीवी के जरिए भवन और कटरा के रास्ते में निगरानी की जाएगी। इसके अलावा हितधारक यह सुनिश्चित करेंगे कि तीर्थयात्री, यात्रा पर निकलने से पहले, हर समय एक वैध आरएफआईडी काडर् पहनें, क्योंकि वे यात्रा के दौरान विभिन्न सुविधाओं से जुड़े हुए हैं और किसी भी तीर्थयात्री को वैध आरएफआईडी काडर् के बिना यात्रा शुरू करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने सभी प्रवेश बिंदुओं पर तैनात सुरक्षा एजेंसियों के प्रतिनिधियों को और अधिक सतकर् रहने का निर्देश दिया, ताकि बिना जांच और पंजीकरण के कोई भी तीर्थयात्री अपनी तीर्थयात्रा के लिए ट्रैक पर प्रवेश न कर सके।
मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने प्रभावी भीड़ प्रबंधन द्वारा परेशानी मुक्त तीर्थयात्रा के लिए विभिन्न मोर्चों पर कारर्वाई करने, ट्रैक पर और कटरा शहर में होल्डिंग क्षेत्रों को बढ़ाने, पूरे ट्रैक, विशेष रूप से भवन में पार्वती भवन के क्षेत्र में भीड़भाड़ कम करने की योजना पर काम करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि लॉकर, वॉशरूम और वेटिंग हॉल जैसी सुविधाएं, भवन में प्रवेश और निकास मार्गों का सख्त विनियमन और 700 से अधिक सीसीटीवी कैमरों के नेटवकर् के माध्यम से हर समय निगरानी की जाएगी। इस दौरान सीईओ ने आपदा प्रबंधन उपायों के विभिन्न घटकों की भी समीक्षा की और उन्हें ट्रैक पर भीड़ कम करने के लिए नियमित घोषणाएं करने का निर्देश दिया।
बोडर् के अध्यक्ष की ओर से जारी निर्देश के मद्देनजर वाहनों की आवाजाही, स्वच्छता, पीने के पानी की व्यवस्था और कटरा शहर में अंधेरे वाले स्थानों की रोशनी के साथ-साथ गहन जांच के बाद जहां भी आवश्यक हो भौतिक और व्यवस्थित सुधार के लिए निर्देश दिए गए। उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों और अन्य हितधारकों को ट्रैक पर किसी भी संदिग्ध तत्व को विफल करने के लिए पोनी पोटर्र्स की पुष्टि और जनगणना करने की आवश्यकता पर बल दिया। बैठक में उधमपुर-रियासी रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (डीआइजी) मोहम्मद सुलेमान चौधरी ने नए साल पर तीर्थयात्रियों की अपेक्षित आमद के प्रबंधन में आने वाले दिनों में तैनात सुरक्षा बलों के लिए प्रमुख चुनौतियों पर प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि अनुरोध के अनुसार सुरक्षा और प्रभावी यात्रा प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय में कटरा के आसपास और भवन के रास्ते में ट्रैक पर अतिरिक्त बल तैनात किए जाएंगे। बैठक में रियासी के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के कमांडेंट (सीआरपीएफ) ने एक विस्तृत सुरक्षा ग्रिड प्रस्तुत किया और नए साल की शुरुआत में पवित्र तीर्थस्थल के रास्ते में क्यूआरटी (त्वरित प्रतिक्रिया टीमों) की तैनाती के अलावा विभिन्न सुरक्षा उपायों पर चर्चा की। बहुस्तरीय सुरक्षा ग्रिड में पुलिस, सीआरपीएफ और अन्य अर्धसैनिक बल शामिल हैं।
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सोना-चांदी खरीदना होगा महंगा! केंद्र सरकार ने बढ़ाई इंपोर्ट ड्यूटी
अगर आप आने वाले समय में सोना या चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो अब आपको पहले से ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं। केंद्र सरकार ने सोना, चांदी और अन्य कीमती धातुओं के आयात पर लगने वाली ड्यूटी में बड़ा इजाफा कर दिया है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक नई दरें 13 मई 2026 से लागू हो गई हैं।
सरकार के इस फैसले के बाद देश में सोने और चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी होने की संभावना है। विदेशों से सोना मंगवाना अब महंगा हो जाएगा, जिसका सीधा असर ज्वेलरी बाजार और ग्राहकों पर पड़ेगा।
नई दरों के अनुसार सोने पर कुल आयात शुल्क 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया गया है। बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) को 5 फीसदी से बढ़ाकर 10 फीसदी कर दिया गया है, जबकि एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (AIDC) को 1 फीसदी से बढ़ाकर 5 फीसदी कर दिया गया है। यूएई से तय कोटे के तहत आने वाले सोने पर भी अब बढ़ी हुई ड्यूटी लागू होगी।
इस फैसले का सबसे ज्यादा असर गहने खरीदने वालों पर पड़ सकता है। शादी या निवेश के लिए सोना खरीदना अब और महंगा हो जाएगा। ज्वेलर्स की लागत बढ़ेगी और इसका बोझ आखिरकार ग्राहकों पर ही पड़ेगा।
इसके साथ ही निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स और रीसाइक्लिंग जैसे उद्योग भी प्रभावित हो सकते हैं, क्योंकि इन क्षेत्रों में कीमती धातुओं का बड़े स्तर पर इस्तेमाल होता है। लागत बढ़ने से कई उत्पाद महंगे हो सकते हैं।
भारत में पिछले कुछ वर्षों के दौरान सोने के आयात में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2025-26 में सोने का आयात 24 फीसदी से ज्यादा बढ़कर 71.98 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 58 बिलियन डॉलर था। हालांकि मात्रा के हिसाब से आयात 757 टन से घटकर 721 टन रह गया।
भारत दुनिया का चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता है। देश सबसे ज्यादा सोना स्विट्जरलैंड से आयात करता है, जिसका हिस्सा करीब 40 फीसदी है। इसके बाद यूएई और दक्षिण अफ्रीका का नंबर आता है।
गौरतलब है कि जुलाई 2024 के बजट में सरकार ने लोगों को राहत देने के लिए सोने पर ड्यूटी 15 फीसदी से घटाकर 6 फीसदी कर दी थी। लेकिन अब बढ़ते आयात और विदेशी मुद्रा पर दबाव को देखते हुए सरकार ने फिर से ड्यूटी बढ़ाने का फैसला लिया है।
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पीएम की सलाह आर्थिक इमरजेंसी की आहट?- केजरीवाल
आम आदमी पार्टी ने प्रधानमंत्री की ओर से देशवासियों को पेट्रोल, डीजल, खाद्य तेल का कम इस्तेमाल करने और सोने समेत अन्य कीमतीे चीजें खरीदने में कटौती करने की सलाह देने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी ने सवाल किया है कि कहीं देश भारी आर्थिक संकट में तो नहीं फंस गया है। ‘‘आप’’ के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पीएम ने देश के सभी नागरिकों को खाने-पीने, घूमने- फिरने और विदेश यात्राओं में कटौती करने की सलाह दी है। साथ ही, सोना और अन्य कीमती चीज़ें खरीदने में भी कटौती करने की सलाह दी है। उन्होंने पूछा है कि क्या यह देश में आर्थिक इमरजेंसी की आहट है? क्या देश भारी आर्थिक संकट में फंस गया है? ऐसा तो देश में पहले कभी नहीं हुआ। प्रधानमंत्री को देश के सामने सच्चाई रखनी चाहिए। आखिर देश की असली आर्थिक हालत क्या है?
उधर, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने भी स्वदेशी अपनाने और विदेशी चीजें कम से कम खरीदने की सलाह पर प्रधामंत्री पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री शब्दों के उस्ताद हैं, लेकिन उनको देश के सामने सच बोलना चाहिए। यह सर्वविदित है कि मौजूदा समय में भारत की डोर व्हाइट हाउस के हाथों में है, क्योंकि हर फैसला व्हाइट हाउस की सहमति से ही लिया जा रहा है। भारत-पाकिस्तान युद्ध जैसे मुद्दों में भी सीज फायर की घोषणा अमेरिकी अधिकारियों की ओर से की गई थी, जो देश की संप्रभुता पर एक गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
सीएम भगवंत सिंह मान ने कहा कि भले ही देश के शासक विश्व गुरु होने का दावा करते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि वे विश्व चेला बनने की ओर बढ़ रहे हैं क्योंकि व्हाइट हाउस के आदेशों का आंख मूंदकर पालन किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने मेक इन इंडिया को लेकर बड़े-बड़े दावे किए थे, लेकिन रक्षा क्षेत्र तक में एफडीआई जैसे उनके कदमों ने देश को बर्बाद कर दिया है। भगवंत मान ने आगाह किया कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौता भारतीय कृषि को और अधिक नुकसान पहुंचा सकता है।
देश के युवाओं को पेपर लीक के खिलाफ निर्णायक लड़ाई छेड़नी होगी- केजरीवाल
अरविंद केजरीवाल ने नीट परीक्षा का पेपर लीक होने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि हर साल 7 करोड़ युवा इंजीनियरिंग, मेडिकल कॉलेजों में दाखिले और सरकारी नौकरियों के लिए परीक्षाएँ देते हैं। लेकिन राजनीतिक संरक्षण में चल रहे पेपर लीक गिरोह इन युवाओं का भरोसा और हौसला तोड़ रहे हैं। पेपर लीक में शामिल माफिया और उन्हें संरक्षण देने वाले नेता देश के दुश्मन हैं। ये लोग देश की नींव को खोखला कर रहे हैं। सरकारें इस अपराध की साझेदार बन चुकी हैं। इसके खिलाफ युवाओं को देशभर में एक निर्णायक लड़ाई छेड़नी होगी।
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‘एक साल तक सोना न खरीदें’ PM मोदी की बड़ी अपील
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में हैदराबाद में एक रैली के दौरान देशवासियों से एक साल तक गैर-जरूरी सोने की खरीद से बचने की अपील किए जाने के बाद देशभर की ज्वेलरी इंडस्ट्री में चर्चा और चिंता का माहौल बन गया है। PM मोदी ने देश की आर्थिक स्थिति, विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव और वैश्विक संकटों को ध्यान में रखते हुए लोगों से सोने की खरीद कम करने और “मेड इन इंडिया” उत्पादों को प्राथमिकता देने की अपील की थी।
इस बयान के बाद दिल्ली और देशभर के व्यापारियों एवं उद्यमियों के संगठन ‘चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री’ (CTI) ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री की अपील के बाद ज्वेलरी और सोने के कारोबार से जुड़े सैकड़ों व्यापारियों ने चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि इस तरह की अपीलों से ग्राहकों में असमंजस और डर का माहौल बन सकता है, जिसका सीधा असर सोने की बिक्री पर पड़ सकता है।
CTI के अनुसार चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता देश है। मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक भारत में हर साल करीब 700 से 800 टन सोने की खपत होती है। यदि लोग प्रधानमंत्री की अपील को बड़े स्तर पर मानते हैं तो देश में सोने की मांग 800 टन से घटकर लगभग 500 टन तक आ सकती है। व्यापारियों का मानना है कि इससे ज्वेलरी बाजार में बड़ी मंदी आ सकती है।
ज्वेलर्स ने खास तौर पर चिंता जताई है कि यह अपील ऐसे समय पर आई है जब देश में शादी-विवाह का सीजन चरम पर है। भारत में शादी समारोहों के दौरान सोने की खरीद को पारंपरिक और सांस्कृतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में यदि ग्राहक सोने की खरीद से पीछे हटते हैं तो इसका बड़ा असर छोटे ज्वेलर्स से लेकर बड़ी ज्वेलरी कंपनियों तक सभी पर पड़ सकता है।
CTI ने यह भी कहा कि इस अपील का असर सिर्फ बाजार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शेयर बाजार में सूचीबद्ध बड़ी ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। निवेशकों की चिंता के कारण ज्वेलरी सेक्टर के स्टॉक्स में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
व्यापारिक संगठनों का कहना है कि ज्वेलरी इंडस्ट्री देश की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा है, जिससे लाखों लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई है। इसलिए उद्योग को मजबूत बनाए रखने के लिए संतुलित नीतियां और स्पष्ट संदेश बेहद जरूरी हैं। अब ज्वेलरी कारोबार से जुड़े व्यापारी नई रणनीतियों और ग्राहकों को आकर्षित करने के नए तरीकों पर काम करने की तैयारी कर रहे हैं।
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