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जहाँ भी चुनाव आते हैं, भाजपा विपक्षी सरकारों को निशाना बनाने के लिए सीबीआई, ईडी और दूसरी एजेंसियों का इस्तेमाल करती है: बलतेज पन्नू
आम आदमी पार्टी (आप) के पंजाब मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने बुधवार को भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार पर राज्य के फंड रोक कर राजनीतिक मकसद के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग करके मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार को बदनाम करने के लिए लगातार मुहिम चला कर पंजाब सरकार को जानबूझ कर कमजोर करने की कोशिश का आरोप लगाया है।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आप पंजाब मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने कहा कि 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले, भाजपा और उसके समर्थकों ने यह कहकर लोगों में डर पैदा करने की कोशिश की थी कि आप सरकार के पास अनुभव की कमी है और वह ठीक से काम नहीं कर पाएगी। उन्होंने कहा, “पंजाब के लोगों ने उस बात को नकार दिया और आप को साफ़ जनादेश दिया। विरोधियों ने कहा था कि इस सरकार के पास कोई अनुभव नहीं है, यह काम नहीं कर पाएगी और मुख्यमंत्री तीन महीने भी नहीं टिक पाएंगे। लेकिन पंजाब के लोगों ने मन बना लिया था कि वे 2017 की गलती नहीं दोहराएंगे और उन्होंने भगवंत मान को भारी बहुमत दिया।”
आप के मीडिया इंचार्ज ने कहा कि आप सरकार के सत्ता में आने के बाद, केंद्र ने एक-एक करके पंजाब का फंड रोकना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा, “आरडीएफ का हज़ारों करोड़ का पैसा अभी भी केंद्र के पास पेंडिंग है। यहां तक कि मनरेगा का स्ट्रक्चर और नाम बदलकर उसे कमज़ोर कर दिया गया, जिसका असर पंजाब पर भी पड़ा।”
पंजाब में आई बाढ़ का ज़िक्र करते हुए, बलतेज पन्नू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राज्य के दौरे और बाढ़ से हुए भारी नुकसान की जानकारी देने के बावजूद, पंजाब को सिर्फ़ 1,600 करोड़ रुपये मिले, जो मदद के लिए बहुत कम रकम थी। उन्होंने आगे कहा, “वादा की गई एक्स्ट्रा मदद भी नहीं मिली। केंद्र की लगाई गई वित्तीय पाबंदियों के बावजूद, भगवंत सिंह मान सरकार ने अपने विकास और भलाई के काम जारी रखे।”
उन्होंने कहा, “उन्होंने सोचा कि अगर पंजाब का फंड रोक दिया गया, तो सरकार स्कूल नहीं बना पाएगी, हेल्थकेयर सिस्टम को मज़बूत नहीं कर पाएगी, मोहल्ला क्लीनिक नहीं बना पाएगी, हॉस्पिटल नहीं सुधार पाएगी या सड़कें नहीं बना पाएगी। लेकिन सरकार काम करती रही क्योंकि उसमें ईमानदारी और काम करने का पक्का इरादा था।”
शिक्षा के क्षेत्र में राज्य सरकार के काम पर ज़ोर देते हुए, बलतेज पन्नू ने कहा कि इस क्षेत्र में केरल को पीछे छोड़कर पंजाब एक प्रोग्रेसिव राज्य के तौर पर उभरा है। उन्होंने आगे कहा, “रोड सेफ्टी फोर्स बनाई गई, जो पंजाब की सड़कों पर कीमती जानें बचाने का काम कर रही है, साथ ही जनता की भागीदारी से ड्रग्स के खिलाफ ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ मुहिम भी जारी है।”
आप पंजाब के मीडिया इंचार्ज ने कहा, “भाजपा बार-बार पुराने वीडियो और चुनिंदा बातों का इस्तेमाल करके पंजाब को नेगेटिव दिखा रही है। चुनी हुई सरकारों को गिराने के मकसद से चुनावों के आसपास केंद्रीय जांच एजेंसियों को लगाया जाता है। जब भी किसी राज्य में चुनाव पास आते हैं, भाजपा सीबीआई और ईडी जैसी एजेंसियों को लगा देती है। उनका एकमात्र मकसद मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के काम में रुकावट डालने के तरीके ढूंढना और यह माहौल बनाना है कि उनकी सरकार फेल हो गई है।”
बलतेज पन्नू ने कहा कि ‘मावां-धीया सत्कार योजना’ जैसी भलाई की पहल के खिलाफ भी ऐसी ही कोशिशें की गईं, लेकिन भगवंत मान सरकार ने विरोध के बावजूद ऐसी योजनाओं को सफलतापूर्वक लागू किया।
ईडी से जुड़े हालिया घटनाक्रम पर, बलतेज पन्नू ने एजेंसी पर आप नेताओं के खिलाफ मीडिया में नेगेटिव नैरेटिव बनाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। आप मंत्री संजीव अरोड़ा का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा, “वह अभी भी जेल में हैं और उन्हें परेशान किया जा रहा है, जबकि एक के बाद एक मंत्री पर आरोप लग रहे हैं।”
बलतेज पन्नू ने पंजाब पुलिस के साथ ईडी की बातचीत पर भी सवाल उठाया, उन्होंने कहा कि ईडी द्वारा डीजीपी को कथित तौर पर भेजे गए पत्र के बारे में मीडिया रिपोर्ट्स को बार-बार हाईलाइट किया जा रहा है, जबकि पंजाब पुलिस द्वारा एजेंसी से मांगे गए जवाब को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है। “पंजाब पुलिस ने ईडी से केस के साफ सबूत और पूरी डिटेल्स देने को कहा है। अगर जो कंटेंट दिखाया जा रहा है वह सिर्फ चैट के धुंधले स्क्रीनशॉट हैं, तो उसके आधार पर एफआईआर कैसे दर्ज की जा सकती है? ईडी को दस्तावेज और डिटेल्स देने चाहिए ताकि केस को आगे बढ़ाया जा सके। लेकिन कोई जवाब नहीं आ रहा है।”
बलतेज पन्नू ने कहा कि बार-बार लीक और चुनिंदा मीडिया रिपोर्ट्स का मकसद मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को बदनाम करना है क्योंकि भाजपा उनके खिलाफ कुछ भी नहीं ढूंढ पाई है। “पंजाब के लोग सच जानते हैं। उन्होंने भगवंत मान सरकार का काम देखा है, चाहे कितनी भी मुश्किलें क्यों न हों। भाजपा भले ही मुख्यमंत्री को बदनाम करने की कोशिश करती रहे, लेकिन लोगों ने पहले ही अपना मन बना लिया है। आने वाले विधानसभा चुनावों में, पंजाब एक बार फिर भगवंत सिंह मान को राज्य की सेवा करते रहने के लिए चुनेगा।”
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DA-DR पर पंजाब सरकार का बड़ा कदम, हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती
पंजाब सरकार ने कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) से जुड़े मामले में बड़ा कदम उठाते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के 3 अगस्त के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सरकार की ओर से इस मामले में स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दाखिल की गई है।
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में पंजाब सरकार ने कहा है कि वह राज्य के कर्मचारियों को केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बराबर टेक-होम सैलरी सुनिश्चित करने के लिए जरूरत के मुताबिक DA बढ़ाने को तैयार है। हालांकि, सरकार ने केंद्र सरकार के बराबर उसी प्रतिशत की DA दर लागू करने पर आपत्ति जताई है।
पंजाब सरकार का तर्क है कि राज्य में कई पदों पर कर्मचारियों की बेसिक सैलरी केंद्रीय कर्मचारियों की तुलना में पहले ही अधिक है। ऐसे में सिर्फ DA का प्रतिशत एक जैसा कर देने से दोनों वर्गों के कर्मचारियों के बीच वास्तविक समानता नहीं होगी।
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने सात अलग-अलग कर्मचारी श्रेणियों से जुड़े आंकड़े भी पेश किए हैं। सरकार के मुताबिक, इनमें से पांच श्रेणियों में 42 प्रतिशत DA दिए जाने के बावजूद पंजाब के कर्मचारियों की कुल सैलरी केंद्रीय कर्मचारियों से ज्यादा बनती है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह कर्मचारियों के बकाया भुगतान से पीछे नहीं हट रही है। पंजाब सरकार के अनुसार, 13 फरवरी 2025 को मंजूर की गई लिक्विडेशन योजना के तहत कर्मचारियों की बकाया राशि का भुगतान चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है।
पंजाब सरकार ने अपनी याचिका में आर्थिक बोझ का भी हवाला दिया है। सरकार का कहना है कि अगर केंद्र सरकार की DA दर को उसी प्रतिशत के आधार पर पंजाब में लागू किया जाता है तो राज्य के खजाने पर हर साल करीब 6,500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
सरकार के मुताबिक, पंजाब में कर्मचारियों के वेतन और पेंशन पर पहले ही राज्य की राजस्व प्राप्तियों का लगभग 51 प्रतिशत हिस्सा खर्च हो रहा है। ऐसे में DA को लेकर लिया गया कोई भी फैसला राज्य की वित्तीय स्थिति पर सीधा असर डाल सकता है।
अब पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाने की मांग की है। इसके साथ ही सरकार ने मौजूदा भुगतान योजना को जारी रखने की अनुमति देने की भी अपील की है।
अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के रुख पर कर्मचारियों और पंजाब सरकार, दोनों की नजरें टिकी हैं। फैसला आने के बाद राज्य के लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स के DA-DR से जुड़े भुगतान पर इसका असर पड़ सकता है।
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‘Digi Punjab’ पोर्टल लॉन्च, अब एक ही जगह मिलेंगी 300+ सरकारी सेवाएं
पंजाब के लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से राहत देने के लिए पंजाब सरकार ने डिजिटल क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाया है। कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने आज ‘Digi.Punjab.gov.in’ पोर्टल लॉन्च किया। इस पोर्टल के जरिए अब अलग-अलग सरकारी विभागों की सेवाएं एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगी।
सरकार के मुताबिक, पहले चरण में इस पोर्टल पर 12 अलग-अलग विभागों की 300 से ज्यादा सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इसका मकसद सरकारी सेवाओं की प्रक्रिया को आसान, तेज और पारदर्शी बनाना है। अब लोगों को हर सेवा के लिए अलग-अलग सरकारी वेबसाइट पर जाने या बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी।
‘Digi Punjab’ पोर्टल पर लोग जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र, मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट, विवाह पंजीकरण, आय प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र और जाति प्रमाण पत्र जैसी जरूरी सेवाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। इसके अलावा पुलिस वेरिफिकेशन, संपत्ति हस्तांतरण, सामाजिक सुरक्षा पेंशन और पानी के कनेक्शन से जुड़ी सेवाएं भी ऑनलाइन उपलब्ध होंगी।
इसके साथ ही लेबर वेलफेयर स्कीमों और कुछ अन्य जरूरी सरकारी सेवाओं का लाभ भी इसी प्लेटफॉर्म के माध्यम से लिया जा सकेगा। सरकार की योजना आने वाले समय में इस पोर्टल पर 800 से ज्यादा सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराने की है।
इस पोर्टल की एक खास सुविधा यह होगी कि आवेदन करने के बाद लोग उसकी स्थिति को ऑनलाइन ट्रैक कर सकेंगे। सरकार के मुताबिक, प्रत्येक सेवा के लिए एक निर्धारित समय-सीमा तय की जाएगी। अगर आवेदन में अनावश्यक देरी होती है तो संबंधित अधिकारी की जवाबदेही भी तय की जाएगी।
कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने कहा कि इस डिजिटल व्यवस्था से लोगों का समय और पैसा दोनों बचेंगे। खास तौर पर दिहाड़ी मजदूरों को किसी प्रमाण पत्र या सरकारी सेवा के लिए अपनी मजदूरी छोड़कर कार्यालय जाने की जरूरत कम होगी।
सरकार का कहना है कि पंजाब के दूर-दराज और सीमावर्ती गांवों में रहने वाले लोगों को भी डिजिटल माध्यम से वही सुविधाएं उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है, जो शहरों में रहने वाले लोगों को मिलती हैं।
हालांकि, जहां लोगों के पास तकनीक या इंटरनेट की पर्याप्त सुविधा नहीं है, वहां सेवा केंद्र और डोरस्टेप डिलीवरी सेवा 1076 के जरिए सरकारी सेवाओं तक पहुंच बनाए रखने की व्यवस्था जारी रहेगी।
सरकार के मुताबिक, ‘Digi Punjab’ के जरिए पुरानी कागजी और लंबी प्रक्रिया को आसान बनाने की कोशिश की गई है। इससे सरकारी सेवाओं की पहुंच बढ़ने के साथ-साथ बिचौलियों पर निर्भरता कम करने और सरकारी कामकाज में पारदर्शिता बढ़ाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
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CM भगवंत सिंह मान द्वारा पराली जलाने को रोकने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाने का आह्वान
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज राज्य में पराली जलाने की प्रवृत्ति को और रोकने के लिए व्यापक सूचना और जागरूकता अभियान चलाने का आह्वान किया, क्योंकि पंजाब सरकार के निरंतर प्रयासों के कारण 2023 से 2025 तक ऐसी घटनाओं में पहले ही 86 प्रतिशत की कमी आ चुकी है। अधिकारियों को इस अभियान को गांवों और ब्लॉकों तक और अधिक प्रभावी ढंग से ले जाने का निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि इन उपलब्धियों को मजबूत करने और पंजाब के पर्यावरण को बचाने के लिए गैर-सरकारी संगठनों (एन.जी.ओज़.), समाजसेवियों, पंचायतों और किसानों की सक्रिय भागीदारी, बड़े पैमाने पर सोशल मीडिया की पहुंच और मजबूत इन-सीटू तथा एक्स-सीटू (खेत में और खेत से बाहर) पराली प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है।
पराली प्रबंधन की रणनीति से संबंधित बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बताया कि इस वर्ष पंजाब में लगभग 30 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की बुआई की गई है, जिससे 18.81 मिलियन टन पराली उत्पन्न होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, “पंजाब सरकार के भरपूर प्रयासों के कारण पंजाब में 2023 से 2025 तक पराली जलाने की घटनाओं में 86 प्रतिशत की कमी आई है। ये घटनाएं 2023 में 36,663 से घटकर 2024 में 10,909 और 2025 में और घटकर 5,114 रह गई हैं। हमें इसे और आगे बढ़ाना है और यह सुनिश्चित करना है कि इस वर्ष पराली जलाने की घटनाओं में और भी कमी आए।”
जमीनी स्तर पर तीव्र अभियान की आवश्यकता पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “किसानों को पराली जलाने के नुकसानों के प्रति जागरूक करने के लिए गांव और ब्लॉक स्तर पर व्यापक सूचना और जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए। प्रत्येक हितधारक को किसानों को पराली जलाने के स्थायी विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित करने हेतु मिलकर काम करना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि किसानों को प्रेरित करने के प्रयासों को और मजबूत करने के लिए गैर-सरकारी संगठनों (एन.जी.ओज़.) और समाजसेवियों को इस अभियान में सक्रिय रूप से शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “गैर-सरकारी संगठनों और समाजसेवियों को किसानों को प्रेरित करने के लिए साथ जोड़ा जाए। मशीनरी के प्रदर्शन, नुक्कड़ नाटक, सरपंचों के साथ बैठकें, शपथ ग्रहण समारोह और अन्य जागरूकता कार्यक्रम व्यापक स्तर पर करवाए जाएं ताकि यह संदेश जमीनी स्तर तक किसानों तक पहुंच सके।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने जमीनी स्तर की गतिविधियों के पूरक के रूप में एक व्यापक डिजिटल और मल्टीमीडिया रणनीति अपनाने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा, “रेडियो जिंगल्स, प्रिंट मीडिया, टेलीविजन, मोबाइल एस.एम.एस. और आउटडोर मीडिया को शामिल करते हुए विस्तृत डिजिटल योजना लागू की जानी चाहिए। पराली जलाने के दुष्प्रभावों और उपलब्ध प्रबंधन विकल्पों के बारे में व्यापक जागरूकता पैदा करने के लिए सोशल मीडिया जागरूकता अभियान भी बड़े पैमाने पर चलाया जाना चाहिए।”
उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले किसानों और ग्रामीण संस्थानों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “प्रगतिशील किसानों, उत्कृष्ट प्रदर्शन वाली पंचायतों, पैक्स (प्राइमरी एग्रीकल्चरल क्रेडिट सोसायटियों) और अन्य हितधारकों को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया जाना चाहिए। ऐसा सम्मान दूसरों को अच्छी प्रथाओं को अपनाने और पराली प्रबंधन को एक सामूहिक आंदोलन बनाने के लिए प्रोत्साहित करेगा।”
उन्होंने इस रणनीति को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सभी हितधारकों और जिलों के बीच आपसी समन्वय की आवश्यकता पर भी जोर दिया। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “सभी हितधारकों और जिलों के बीच बेहतरीन समन्वय सुनिश्चित किया जाए ताकि पूरी योजना को सुचारू और प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके। वांछित परिणाम प्राप्त करने के लिए प्रत्येक विभाग और हितधारक को समन्वय में काम करना चाहिए।”
मुख्यमंत्री ने पराली के खेत में और खेत से बाहर प्रबंधन दोनों तरीकों के महत्व को भी उजागर किया। उन्होंने कहा, “धान की पराली के खेत में और खेत से बाहर प्रबंधन को बढ़ावा दिया जाना चाहिए ताकि किसानों को बड़े पैमाने पर लाभ मिल सके और पर्यावरण की भी सुरक्षा हो सके। हमारा उद्देश्य किसानों को पराली जलाने के व्यावहारिक और स्थायी विकल्प प्रदान करना होना चाहिए।”
बैठक में कैबिनेट मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां और हरदीप सिंह मुंडियां, मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा, सचिव विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के.के. यादव, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव डॉ. रवि भगत, सचिव कृषि विभाग अर्शदीप सिंह थिंद और अन्य उच्च अधिकारी भी उपस्थित थे।
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