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भारत-कनाडा के बीच UPI की तैयारी! पंजाबियों को मिल सकता है बड़ा फायदा

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भारत और कनाडा के बीच रहने वाले भारतीयों, खासकर पंजाबियों के लिए आने वाले समय में पैसों के लेन-देन को लेकर बड़ी सुविधा शुरू हो सकती है। दोनों देशों के बीच आर्थिक रिश्तों को मजबूत करने के लिए अब UPI के जरिए सीमा पार भुगतान और पैसे भेजने की संभावनाओं पर चर्चा शुरू हो गई है। अगर यह व्यवस्था लागू होती है तो कनाडा में रहने वाले भारतीयों और पंजाब में उनके परिवारों के लिए पैसे भेजना और प्राप्त करना पहले से आसान हो सकता है।

दरअसल, भारत और कनाडा के बीच हुए पहले भारत-कनाडा आर्थिक और वित्तीय संवाद में इस मुद्दे पर चर्चा हुई। भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और कनाडा के वित्त मंत्री फ्रांस्वा-फिलिप शैंपेन के बीच सीमा पार रेमिटेंस यानी एक देश से दूसरे देश पैसे भेजने और कारोबारियों के लिए सीधे भुगतान की संभावनाओं पर बातचीत हुई।

बैठक में कनाडा में पार्टनर पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स के जरिए UPI के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर भी विचार किया गया। हालांकि, अभी यह सुविधा शुरू नहीं हुई है। इसे लागू करने से पहले दोनों देशों को टेक्निकल सिस्टम, नियम-कानून, सुरक्षा और विदेशी मुद्रा से जुड़े कई पहलुओं पर काम करना होगा।

इस व्यवस्था का महत्व इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि कनाडा में भारतीय समुदाय की संख्या काफी बड़ी है। बड़ी संख्या में भारतीय छात्र कनाडा में पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि हजारों भारतीय वहां नौकरी, कारोबार और स्थायी निवास के लिए रह रहे हैं। ऐसे में भारत और कनाडा के बीच हर साल बड़ी मात्रा में पैसे का लेन-देन होता है।

पंजाबी समुदाय के लिए भी यह खबर खास मानी जा रही है। कनाडा में बड़ी संख्या में पंजाबी परिवार रहते हैं और उनका पंजाब से लगातार आर्थिक जुड़ाव बना हुआ है। अगर UPI के जरिए सीमा पार भुगतान की सुविधा शुरू होती है, तो भारत में अपने परिवारों को पैसे भेजने की प्रक्रिया तेज और आसान हो सकती है।

इसका फायदा खास तौर पर कनाडा में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों के परिवारों को मिल सकता है। फीस, किराया, रोजमर्रा के खर्च या किसी Emergency जरूरत के लिए पैसे भेजने में आसानी हो सकती है। वहीं, भारत से कनाडा जाने वाले छात्र, कारोबारी और पर्यटक भी भविष्य में भारतीय बैंक अकाउंट के जरिए भुगतान करने की सुविधा का लाभ उठा सकते हैं।

इसका असर सिर्फ व्यक्तिगत पैसे भेजने तक सीमित नहीं रहेगा। भारत और कनाडा के बीच कारोबार करने वाले छोटे-बड़े व्यापारियों के लिए भी सीधे डिजिटल पेमेंट की सुविधा व्यापार को आसान बना सकती है। भारत से सामान खरीदने, सेवाओं के लिए भुगतान करने और कारोबारी लेन-देन में समय और प्रक्रिया दोनों कम हो सकते हैं।

हालांकि, फिलहाल इसे लागू हुई सुविधा नहीं माना जा सकता। दोनों देशों के बीच इस दिशा में बातचीत और तैयारी का दौर चल रहा है। अगर आगे चलकर यह व्यवस्था लागू होती है, तो यह भारत की डिजिटल पेमेंट व्यवस्था के अंतरराष्ट्रीय विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

यानी आने वाले समय में अगर भारत-कनाडा के बीच UPI कनेक्टिविटी शुरू होती है, तो इसका सबसे बड़ा फायदा उन परिवारों और कारोबारियों को मिल सकता है जिनका आर्थिक जुड़ाव दोनों देशों से है। खासकर पंजाब और कनाडा के बीच मजबूत रिश्तों को देखते हुए यह सुविधा हजारों परिवारों के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकती है।

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सोना-चांदी के दाम में बड़ी गिरावट! खरीददारों को मिली राहत

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सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए आज की बड़ी खबर है। 2 सितंबर को दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है। सोने के भाव में करीब 2 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम की कमी आई है, जिसके बाद यह लगभग 1,49,904 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है। वहीं चांदी भी सस्ती हुई है और इसकी कीमत में करीब 3,549 रुपये प्रति किलोग्राम की गिरावट दर्ज की गई है। चांदी अब लगभग 2.26 लाख रुपये प्रति किलो के आसपास कारोबार कर रही है।

सर्राफा बाजार में भी सोने के दाम नीचे आए हैं। 24 कैरेट सोना करीब 15,423 रुपये प्रति ग्राम, 22 कैरेट सोना 14,319 रुपये प्रति ग्राम और 18 कैरेट सोना करीब 11,571 रुपये प्रति ग्राम पर है। दिल्ली में 22 कैरेट सोने के 10 ग्राम की कीमत करीब 1,63,108 रुपये बताई जा रही है।

दिल्ली में चांदी की कीमत भी कम हुई है। यहां चांदी करीब 245 रुपये प्रति ग्राम, यानी लगभग 2,45,000 रुपये प्रति किलो के स्तर पर है। इसमें करीब 5 हजार रुपये तक की गिरावट बताई जा रही है।

आखिर क्यों गिर रहे हैं सोने के दाम?

सोने की कीमतों में गिरावट के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय कारण माने जा रहे हैं। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे महंगाई को लेकर चिंता बढ़ी है। इसके अलावा अमेरिका में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद भी मजबूत हुई है। ब्याज दरें बढ़ने पर सोने जैसे निवेश पर दबाव पड़ सकता है, क्योंकि इससे नियमित ब्याज या आय नहीं मिलती।

सिर्फ सोना और चांदी ही नहीं, बल्कि अन्य कीमती धातुओं में भी गिरावट देखने को मिली है। स्पॉट सिल्वर करीब 1 प्रतिशत गिरकर 63.60 डॉलर प्रति औंस पर आ गई है। वहीं प्लैटिनम करीब 1 प्रतिशत गिरकर 1,722.23 डॉलर प्रति औंस और पैलेडियम करीब 1.4 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,292.21 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया है।

आने वाले दिनों में भी सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। खास तौर पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों से जुड़े फैसले का असर ग्लोबल गोल्ड मार्केट पर देखने को मिल सकता है। अगर महंगाई पर दबाव बना रहता है और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना बढ़ती है, तो सोने के दाम पर आगे भी दबाव देखने को मिल सकता है।

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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़ी सभी FIR रद्द

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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से जुड़े प्रदर्शनकारियों को बड़ी राहत दी है। अदालत ने 20 से 25 जुलाई के बीच प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी FIR रद्द करने का आदेश दिया है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन प्रदर्शनकारियों का पहले से आपराधिक रिकॉर्ड है, उन्हें इस राहत का लाभ नहीं मिलेगा।

सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज संबंधित मामलों पर लागू होगा। अदालत ने कहा कि FIR रद्द करने का यह फैसला इस मामले के खास तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद काकरोच जनता पार्टी ने 5 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित विरोध मार्च भी वापस ले लिया है। संगठन की ओर से कहा गया कि केंद्र सरकार से मिले आश्वासन और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मार्च वापस लेने का निर्णय लिया गया।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल किया। अदालत ने साफ किया कि यह राहत इस शर्त पर दी जा रही है कि दोनों पक्ष अदालत के सामने हुए समझौते और दिए गए आश्वासनों का पूरी तरह पालन करेंगे।

दरअसल, NEET पेपर लीक और परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान कई प्रदर्शनकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी। सरकार की ओर से 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में एक अंतरिम आवेदन दाखिल किया गया था, जिसमें इन मामलों को खत्म करने की मांग की गई थी।

सरकार ने अपनी याचिका में कहा था कि 25 जुलाई के फैसले के बाद दिल्ली पुलिस प्रदर्शन से संबंधित 13 FIR को आगे नहीं बढ़ाना चाहती। इसके बाद मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों के पक्ष में यह बड़ा आदेश जारी किया।

इस फैसले के बाद प्रदर्शनकारियों को बड़ी कानूनी राहत मिली है और फिलहाल जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़े इन मामलों में दर्ज FIR को आगे बढ़ाने का रास्ता बंद हो गया है। हालांकि, आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों को दी गई छूट इस आदेश में शामिल नहीं है।

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दिल्ली मार्च पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, रोक लगाने से किया इनकार

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5 सितंबर को दिल्ली में होने वाले काकरोच जनता पार्टी के मार्च को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने प्रस्तावित मार्च पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फिलहाल ऐसा कोई ठोस आधार सामने नहीं आया है, जिसके आधार पर यह माना जाए कि मार्च के कारण किसी तरह की अप्रिय या हिंसक घटना होने की आशंका है।

मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि दिल्ली में कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मार्च में शामिल होने वाले सभी पक्षों से कानून का पालन करने और जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करने की उम्मीद की जाती है।

दरअसल, इस मामले को लेकर रिटायर्ड दिल्ली पुलिस अधिकारी राजेंद्र सिंह की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका में 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च पर रोक लगाने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि दिल्ली में BRICS सम्मेलन को देखते हुए राजधानी में बड़े जुलूस और प्रदर्शनों की अनुमति देना सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के लिहाज से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

याचिका में यह भी चिंता जताई गई थी कि बड़े स्तर पर लोगों के जुटने से राजधानी में यातायात व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इन आशंकाओं के आधार पर फिलहाल मार्च पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।

अदालत ने प्रशासन की जिम्मेदारी पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी कार्यक्रम के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए संबंधित अधिकारी आवश्यक कदम उठा सकते हैं। साथ ही मार्च में शामिल लोगों को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी गतिविधियां कानून के दायरे में रहें और किसी तरह की स्थिति न बिगड़े।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब 5 सितंबर को होने वाले मार्च को लेकर आगे की नजर दिल्ली प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की तैयारियों पर रहेगी। प्रशासन के सामने जहां कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी होगी, वहीं मार्च में शामिल संगठनों और लोगों से भी शांतिपूर्ण और जिम्मेदार तरीके से कार्यक्रम में हिस्सा लेने की उम्मीद की जा रही है।

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