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मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान द्वारा 2,800 नए राशन डिपो धारकों को लाइसेंस सौंपेने से अब पूरे पंजाब में घरों के नजदीक मिलेगा राशन
पंजाब की सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मजबूत करने और आवश्यक खाद्य आपूर्ति को और अधिक सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज 2,800 नए राशन डिपो धारकों को लाइसेंस सौंपे, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि राज्य भर के लोगों को राशन उनके घरों के नजदीक उपलब्ध कराया जा सके। इस कदम से लगभग 5.5 लाख राशन कार्ड धारकों को लाभ होगा, जिन्हें अब अपना मासिक राशन लेने के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी या काम छोड़ना नहीं पड़ेगा।
आम आदमी पार्टी (आप) सरकार द्वारा साक्षात्कार-आधारित चयन प्रक्रिया के माध्यम से नए डिपो आवंटित किए गए हैं, जिससे समाज के सभी वर्गों, जिनमें अनुसूचित जाति (एस.सी.), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओ.बी.सी.), पूर्व सैनिक, स्वतंत्रता सेनानी, दिव्यांग व्यक्ति और दंगा पीड़ित परिवार शामिल हैं, के लिए प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया है। मोहाली के विकास भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में नवनियुक्त डिपो धारकों को संबोधित करते हुए, मुख्यमंत्री ने इन लाइसेंसों को ईमानदारी, निष्पक्षता और सहानुभूति के साथ लोगों की सेवा करने की एक बड़ी जिम्मेदारी बताया।
सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नए राशन डिपो खुलने से लगभग 5.5 लाख राशन कार्ड धारकों को अपने मासिक राशन के लिए लंबी दूरी तय करने या काम छोड़कर लंबी कतारों में खड़े होने से मुक्ति मिलेगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने नए राशन डिपो धारकों को लाइसेंस जारी करते समय समाज के सभी वर्गों का समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया है। उन्होंने कहा, “आवंटन निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से किया गया है, जबकि समाज के हर वर्ग के लिए प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया है। 2,800 नए लाइसेंसों में से, 633 अनुसूचित जाति वर्ग के परिवारों को, 199 अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित परिवारों को, 181 पूर्व सैनिकों को, 39 स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों को, 156 दिव्यांग व्यक्तियों को और 17 दंगा पीड़ित परिवारों को आवंटित किए गए हैं।”
खाद्य सुरक्षा के प्रति अपनी सरकार की प्रतिबद्धता को उजागर करते हुए, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि स्मार्ट राशन कार्ड योजना के तहत राज्य सरकार द्वारा पंजाब भर के 40 लाख परिवारों को मुफ्त गेहूं और मेरी रसोई राशन किट प्रदान की जा रही हैं। उन्होंने कहा, “पिछली सरकारों ने राजनीतिक सिफारिशों के आधार पर राशन डिपो लाइसेंस वितरित किए थे। हमने पक्षपात को खत्म करने और पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए साक्षात्कार-आधारित चयन प्रणाली शुरू करके इस परंपरा को खत्म कर दिया है।”
नए चुने गए डिपो धारकों और उनके परिवारों को बधाई देते हुए, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि लाइसेंसों ने हजारों परिवारों के लिए रोजी-रोटी का एक नया रास्ता खोला है और साथ ही उन्हें समाज की सेवा करने का अवसर भी दिया है। उन्होंने कहा, “आज, 2,800 डिपो धारकों को नई डिपो आवंटन नीति के तहत लाइसेंस दिए जा रहे हैं। यह सिर्फ एक लाइसेंस नहीं है, बल्कि लोगों की सेवा करते हुए रोजी-रोटी कमाने का अवसर है। आप सरकार और लोगों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करेंगे और मैं इसे ईश्वर का आशीर्वाद मानता हूं कि आपको यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।”
इस अवसर को ऐतिहासिक बताते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पहल से पंजाब के लोगों को अत्यधिक लाभ होगा और साथ ही जमीनी स्तर पर आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति को और बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार की नीतियां सिर्फ लोगों की भलाई के लिए लागू की जा रही हैं। आज, 40 लाख परिवारों को हल्दी से लेकर दालों तक आवश्यक घरेलू सामान वाली मुफ्त मेरी रसोई किट मिल रही हैं। यह हर सरकार का कर्तव्य है कि वह यह सुनिश्चित करे कि कोई भी परिवार भूखा न सोए और हम सिर्फ लोगों के प्रति अपना कर्तव्य निभा रहे हैं।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की सोच है कि हर गांव और हर शहर में राशन डिपो स्थापित किए जाएं ताकि लोगों को उनके घरों के नजदीक ही सेवाएं मिल सकें।
नवनियुक्त डिपो धारकों को अपनी जिम्मेदारियां पूरी लगन से निभाने की अपील करते हुए, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि वे हर लाभार्थी के साथ निष्पक्षता, ईमानदारी और सहानुभूति से पेश आएं। उन्होंने कहा, “मैं आप सभी से अनुरोध करता हूं कि इसे सिर्फ एक व्यवसाय न समझें, बल्कि एक पवित्र जिम्मेदारी समझें। बुजुर्गों, विकलांगों और गरीब परिवारों की विशेष देखभाल करें। जहां भी जरूरत हो, यह सुनिश्चित करें कि विकलांगों को उनके घरों में राशन मिले। यह आवंटन एक पारदर्शी साक्षात्कार प्रक्रिया के माध्यम से योग्यता के आधार पर किया गया है, ताकि योग्य लोगों को ये लाइसेंस मिल सकें। समाज की सेवा करने के साथ-साथ, यह पहल हजारों परिवारों को एक सम्मानजनक रोजी-रोटी कमाने और उनके भविष्य को सुरक्षित करने में भी मदद करेगी।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकारों के कार्यकाल के दौरान ऐसे लोक कल्याणकारी प्रयास रुक गए थे, जिनका एकमात्र उद्देश्य लोगों की सेवा करने के बजाय उनका शोषण करना था। उन्होंने कहा, “पिछली सरकारों के पास पंजाब के लिए कोई दृष्टिकोण नहीं था। उनका एकमात्र उद्देश्य लोगों को लूटना और गुमराह करना था।”
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पार्टी आंतरिक संघर्षों में डूबी रहती है। उन्होंने कहा, “एक दिन वे एक नेता को महत्व देते हैं, अगले दिन दूसरे को। उनकी राजनीति सिर्फ कुर्सी के इर्द-गिर्द घूमती है। उनके अपने ही एक नेता ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि उनकी पार्टी में मुख्यमंत्री बनने के लिए 500 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते हैं। उन्होंने पूछा कि इतना पैसा कहां से आएगा?”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि ऐसा पैसा आखिरकार आम लोगों की जेब से आता है, जो लोक कल्याण पर केंद्रित प्रशासन पर बुरा प्रभाव डालता है। उन्होंने कहा, “यह पैसा लोगों से वसूला जाएगा। जब राजनीति इतनी महंगी हो जाती है, तो लोगों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है।”
राज्य सरकार की पहलों को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब ने सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने और राज्य तथा राष्ट्रीय राजमार्गों पर अनमोल जानें बचाने के लिए देश की पहली समर्पित सड़क सुरक्षा बल (एस.एस.एफ.) की शुरुआत की है। उन्होंने कहा, “दुर्घटना पीड़ितों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने और पूरे पंजाब में सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के लिए 1,597 नव-भर्ती कर्मियों के विशेष रूप से प्रशिक्षित बल को 144 पूर्णतः सुसज्जित वाहनों के साथ तैनात किया गया है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष फरवरी में अपनी शुरुआत के बाद से सड़क सुरक्षा बल ने सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में 48 प्रतिशत की कमी लाई है। उन्होंने आगे कहा कि जानें बचाने के अलावा इस बल ने दुर्घटना पीड़ितों से संबंधित कीमती सामान और नकदी की सुरक्षित वापसी भी सुनिश्चित की है।
सिंचाई क्षेत्र में सरकार के प्रयासों का उल्लेख करते हुए भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब में नहरी पानी के उपयोग में उल्लेखनीय परिवर्तन आया है। उन्होंने कहा, “वर्ष 2022 में पंजाब अपने नहरी पानी का केवल 22 प्रतिशत उपयोग कर रहा था। आज यह आंकड़ा 80 प्रतिशत से अधिक हो गया है। अनेक क्षेत्रों में लोगों ने लगभग 80 वर्षों में पहली बार अपने गांवों तक नहरी पानी पहुंचते देखा है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले किसानों के पास सिंचाई के लिए बोरवेलों पर निर्भर रहने के अलावा कोई विकल्प नहीं था, लेकिन राज्य सरकार के निरंतर प्रयासों ने भूजल पर निर्भरता को काफी कम कर दिया है। उन्होंने कहा, “केंद्र सरकार की अपनी रिपोर्ट के अनुसार हमारे निरंतर प्रयासों के कारण पंजाब के भूजल स्तर में लगभग चार मीटर का सुधार हुआ है। हम नहरी पानी का अधिक और भूजल का कम उपयोग कर रहे हैं तथा वह दिन दूर नहीं जब पंजाब अपने उपलब्ध नहरी पानी का 100 प्रतिशत उपयोग करेगा।”
नदी जल पर राज्य के दृढ़ रुख को दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब अपने वैध हिस्से की रक्षा करेगा। उन्होंने कहा, “पंजाब का पानी पंजाब का है। हम अपना पानी किसी को भी नहीं लेने देंगे, चाहे वह हरियाणा हो या राजस्थान। पहले पंजाब का शोषण किया जाता था, लेकिन वे दिन अब बीत चुके हैं।”
अकाली दल के प्रमुख सुखबीर बादल पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि वह पंजाब की वास्तविकताओं से अनभिज्ञ हैं। उन्होंने कहा, “सुखबीर सिंह बादल ने अपना पूरा जीवन विशेषाधिकारों और ऐशो-आराम में बिताया है। वह पंजाब की जमीनी वास्तविकताओं से अनजान हैं, फिर भी राज्य का नेतृत्व करने का प्रयास करते हैं। वर्षों तक सत्ता में रहने के बावजूद पूर्व उपमुख्यमंत्री को पंजाब के भूगोल और कृषि की बुनियादी जानकारी तक नहीं है। वह राज्य की प्रमुख फसलों में भी अंतर नहीं कर सकते। इसके बावजूद उनकी पार्टी हम पर एक के बाद एक निराधार आरोप लगा रही है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब उन्हें राजनीतिक रूप से प्रेरित अभियानों के माध्यम से बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “अब शिरोमणि समिति ने गुरुद्वारों के बाहर मेरे बहिष्कार वाले पोस्टर लगाने के निर्देश दिए हैं। लेकिन मैं पूछना चाहता हूं कि अकाली दल या सुखबीर सिंह बादल के खिलाफ ऐसे पोस्टर क्यों नहीं लगाए गए, जब उन्होंने स्वयं बेअदबी की घटनाओं की जिम्मेदारी स्वीकार की थी?”
2 दिसंबर को श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष हुई कार्रवाई को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अकाली नेतृत्व ने सार्वजनिक रूप से अपनी गलतियां स्वीकार की थीं। उन्होंने कहा, “उन्होंने अपनी गलती मानी, गोलीबारी की घटनाओं की जिम्मेदारी ली और स्वीकार किया कि संगत के विरुद्ध आदेश जारी किए गए थे। जब उन्होंने श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष यह स्वीकार किया था, तब क्या किसी ने गुरुद्वारों के बाहर उनके बहिष्कार की अपील करने वाले पोस्टर लगाए थे? संगत समझदार है और जनता सर्वोच्च है। ऐसी कार्रवाइयां केवल इसलिए की जा रही हैं क्योंकि उनके पास मेरे खिलाफ उठाने के लिए कोई वास्तविक मुद्दा नहीं बचा है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि अकाली नेतृत्व ने नशे को संरक्षण देकर पंजाब को अपूरणीय क्षति पहुंचाई है। उन्होंने कहा, “उन्होंने नशे के कारोबार को बढ़ावा देकर और उसे संरक्षण देकर पंजाब की पीढ़ियों को बर्बाद कर दिया। रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि सरकारी वाहनों का उपयोग नशे की तस्करी के लिए किया जाता था। उन्होंने अपने संकीर्ण राजनीतिक हितों के लिए धर्म का दुरुपयोग कर प्रत्येक पंजाबी की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है, जो एक अक्षम्य पाप है।”
उन्होंने आगे कहा कि ऐसे नेताओं ने पंजाब और सिख पंथ विरोधी शक्तियों के हितों में काम किया है। उन्होंने कहा, “कांग्रेस, भाजपा और अकाली दल मेरे खिलाफ साजिश रचने के लिए एकजुट हो गए हैं क्योंकि वे हमारी सरकार द्वारा किए जा रहे जनहितैषी कार्यों को पचा नहीं पा रहे हैं।”
जनकल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के खजाने का एक-एक रुपया जनता के हित में सोच-समझकर खर्च किया जा रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब के 90 प्रतिशत से अधिक घरों को मुफ्त बिजली मिल रही है। पहली बार किसानों को खेती के लिए दिन के समय निर्बाध बिजली आपूर्ति मिल रही है। हमारी सरकार का प्रत्येक निर्णय केवल और केवल जनता के कल्याण से प्रेरित होता है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां केंद्र सरकार देशभर में सार्वजनिक संपत्तियों को कौड़ियों के भाव बेच रही है, वहीं पंजाब ने सार्वजनिक स्वामित्व को मजबूत कर एक अलग रास्ता चुना है। उन्होंने कहा, “ऐसे समय में जब देश की मूल्यवान सार्वजनिक संपत्तियां कुछ चुनिंदा लोगों के हवाले की जा रही हैं, पंजाब ने व्यापक जनहित में एक निजी ताप विद्युत संयंत्र खरीदकर इतिहास रच दिया है।”
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री लाल चंद कटारूचक तथा कई अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।
इस समारोह की कुछ झलकियां साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “आज मोहाली में हमने 2,800 नए डिपो धारकों को लाइसेंस सौंपे हैं, जिससे हजारों परिवारों को आजीविका का नया साधन मिला है। यह केवल एक लाइसेंस नहीं, बल्कि लोगों की सेवा करने की एक पवित्र जिम्मेदारी है।”
मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “मैं आप सभी से अपील करता हूं कि प्रत्येक पात्र लाभार्थी के साथ निष्पक्षता, ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ व्यवहार करें। बुजुर्गों, दिव्यांग व्यक्तियों और गरीब परिवारों की विशेष देखभाल और सहायता करना अपना कर्तव्य समझें।”
पोस्ट के अंत में लिखा था, “हमारी सरकार का प्रत्येक निर्णय जनता के कल्याण से प्रेरित होता है और करदाताओं से एकत्र किया गया एक-एक रुपया जनता के हित में खर्च किया जा रहा है। आइए, सेवा, ईमानदारी और विश्वास के साथ मिलकर एक ‘रंगला पंजाब’ का निर्माण करें।”
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बादल का ‘धर्म युद्ध मोर्चा’ का ऐलान पंजाबियों को गुमराह करने के लिए सिर्फ़ एक राजनीतिक ड्रामा है: बलतेज पन्नू
आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब स्टेट मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने शुक्रवार को शिरोमणि अकाली दल के प्रेसिडेंट सुखबीर सिंह बादल के “धर्म युद्ध मोर्चा” शुरू करने के ऐलान की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि अकाली दल ने एक बार फिर अपनी धोखे की राजनीति को सामने ला दिया है, क्योंकि यह बहुत ज़्यादा चर्चा में रहा आंदोलन अब चुपचाप खत्म होता दिख रहा है।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आप पंजाब मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने कहा, “लगभग एक महीने पहले, सुखबीर सिंह बादल ने बड़े ही नाटकीय अंदाज़ में ऐलान किया था कि श्री अकाल तख्त साहिब पर अरदास करने के बाद, अकाली दल 19 जुलाई को धर्म युद्ध मोर्चा शुरू करेगा। लेकिन, सिर्फ़ दो दिन बचे हैं, पार्टी ने न तो कोई तैयारी की है और न ही कोई प्रोग्राम की घोषणी की।”
उन्होंने आगे कहा, “जो लोग पिज़्ज़ा और कोक खाकर बड़े हुए हैं, वे अब धर्म युद्ध शुरू करने की बात कर रहे हैं, बिना यह समझे कि ऐसे ऐतिहासिक आंदोलन का क्या मतलब है। जिन नेताओं ने असल में ऐसे आंदोलनों में हिस्सा लिया है, वे जानते हैं कि ऐसा ऐलान करने से पहले कितनी ज़मीनी तैयारी, लोगों को इकट्ठा करना और प्रतिबद्धता की ज़रूरत होती है।”
बलतेज पन्नू ने कहा, “अकाली दल अपना वादा आसानी से भूल गया है। यहां तक कि पार्टी की हाल की कोर कमेटी मीटिंग में भी, प्रस्तावित धर्म युद्ध मोर्चा के बारे में कोई चर्चा नहीं हुई। ऐसा लगता है कि उन्हें लगा कि पंजाब के लोग भी भूल जाएंगे कि उन्होंने इतना बड़ा ऐलान किया था।”
उन्होंने आगे कहा, “प्रस्तावित मोर्चा कभी भी कोई गंभीर आंदोलन नहीं था, बल्कि लोगों को गुमराह करने और मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के खिलाफ बेवजह राजनीतिक झगड़ा पैदा करने की एक और कोशिश थी।”
बलतेज पन्नू ने कहा, “अकाली दल का पंजाबियों को गुमराह करने का लंबा इतिहास रहा है। 2007 से 2017 के बीच अपनी सरकारों के दौरान, पार्टी ने पंजाब को नशों के संकट में धकेल दिया, पूरे राज्य में ‘चिट्टे’ को फैलने दिया और युवाओं की एक पूरी पीढ़ी को बर्बाद कर दिया। धोखे का यह पैटर्न और भी पुराना है। बादल परिवार 1990 के दशक से पंजाबियों को गुमराह कर रहा है। प्रकाश सिंह बादल ने ‘ट्रुथ कमीशन’ का वादा किया था, लेकिन सरकार बनाने के बाद, वे सब कुछ भूल गए।”
2015 में हुई बेअदबी की घटनाओं का ज़िक्र करते हुए बलतेज पन्नू ने कहा, “अकाली दल अब इंसाफ़ के लिए लड़ने का दावा कैसे कर सकता है, जबकि इस मामले में सभी बड़े डेवलपमेंट उनकी अपनी सरकार के दौरान हुए थे? गुरु साहिब के सरूप की चोरी अकाली सरकार के दौरान ही हुई थी।”
आप पंजाब मीडिया इंचार्ज ने कहा, “इसके बाद की बेअदबी की घटनाएं भी उनके कार्यकाल में हुईं। जब संगत ने कोटकपूरा और बहबल कलां में इंसाफ़ की मांग करते हुए शांति से प्रदर्शन किया, तो अकाली सरकार ने ही पुलिस कार्रवाई की थी। बहबलकलां गोलीकांड की घटना भी बादल सरकार के दौरान हुई थी और उस दौरान बेअदबी के मामलों से जुड़े सबूतों को योजनाबद्ध तरीके से नष्ट कर दिया गया था।”
बलतेज पन्नू ने आगे कहा, “2020 में चार्जशीट फाइल होने के बाद, अकाली दल के नेताओं ने मामले में बेल ले ली थी। पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल उन लोगों में शामिल थे जिन्हें फरीदकोट कोर्ट से बेल मिली थी।”
फरीदकोट कोर्ट की बातों का ज़िक्र करते हुए, बलतेज पन्नू ने कहा, “जज ने रिकार्ड किया कि सुखबीर सिंह बादल, 12 अक्टूबर, 2015 को हुई तीसरी बेअदबी की घटना और सिख समुदाय में बढ़ते गुस्से के बारे में जानते हुए भी, जानबूझकर गुरुग्राम के लिए रवाना हो गए और बाद में उस समय के डीजीपी सुमेध सिंह सैनी की गैर-कानूनी पुलिस कार्रवाई की ज़िम्मेदारी से बचने के लिए अपनी गैर-मौजूदगी का बहाना बनाया। ये टिप्पणिया पंजाब के सबसे काले अध्याय में से एक अकाली लीडरशिप के व्यवहार को बेनकाब करतीं हैं। जब शांति से प्रदर्शन कर रहे लोगों पर गोलियां चलाई जा रही थीं, तो अकाली लीडरशिप इंसाफ दिलाने के बजाय लोगों को गुमराह कर रही थी।”
बलतेज पन्नू ने पिछले कुछ सालों में इंसाफ मांगने वालों के साथ हुए बर्ताव को भी याद किया। उन्होंने कहा, “1996 में बादल सरकार के सत्ता में आने के बाद, ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट जसवंत सिंह खालड़ा की पत्नी बीबी परमजीत कौर खालड़ा के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। फिर 2007 में सत्ता में लौटने के बाद, अकाली सरकार ने खालड़ा परिवार और एक्टिविस्ट रंजीत सिंह के खिलाफ नए केस दर्ज किए। एक इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन ने भी बादल सरकार को चिट्ठी लिखकर खालड़ा कमेटी को परेशान करना बंद करने को कहा था।”
बलतेज पन्नू ने कहा, “कितनी अजीब बात है कि सुखबीर बादल आज 2015 की बेअदबी की घटनाओं की गंभीरता के बारे में बात कर रहे हैं, जबकि यह उनकी अपनी सरकार थी जो धार्मिक भावनाओं की रक्षा करने में नाकाम रही और न्याय पक्का करने के बजाय सबूतों को नष्ट होने दिया। अगर अकाली दल ने बार-बार दावा किया है कि धर्म युद्ध मोर्चा 19 जुलाई से शुरू होगा, तो उसने अभी तक अपने प्रोग्राम, स्ट्रेटेजी या उन लोगों के नामों की घोषणा क्यों नहीं की है जो आंदोलन को लीड करेंगे या पहली गिरफ्तारी देंगे?”
बलतेज पन्नू ने कहा, “सुखबीर बादल का मानना है कि वह नाटकीय घोषणाओं और भावनात्मक नारों के ज़रिए पंजाब के लोगों को गुमराह करते रह सकते हैं। पंजाब के लोग उनकी चालें समझ चुके हैं। जितने सालों तक बादल परिवार सत्ता में रहा, लोगों की भलाई के लिए काम करने के बजाय, उन्होंने अपनी दौलत बढ़ाने पर ध्यान दिया और कैबिनेट में अपने रिश्तेदारों से दिया।”
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CM भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल ने NEET टॉपर आर्यन गुप्ता को दी बधाई
पंजाब के लुधियाना के 17 वर्षीय आर्यन गुप्ता ने NEET-UG 2026 में इतिहास रच दिया है। देश की सबसे कठिन प्रवेश परीक्षाओं में से एक NEET-UG 2026 में आर्यन ने 720 में से 715 अंक हासिल कर ऑल इंडिया रैंक-1 (AIR-1) प्राप्त की है।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस शानदार उपलब्धि पर आर्यन गुप्ता को बधाई दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि लुधियाना के 17 वर्षीय आर्यन गुप्ता को NEET-UG परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल करने पर हार्दिक बधाई। उन्होंने कहा कि परीक्षा रद्द होने की निराशा को अपनी ताकत बनाकर आर्यन ने साबित कर दिया कि मेहनत और लगन के आगे कोई भी मंजिल दूर नहीं होती। उन्होंने कहा कि आर्यन की यह शानदार उपलब्धि हर युवा के लिए प्रेरणा है और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी आर्यन को बधाई देते हुए कहा, “आपने पंजाब का गौरव बढ़ाया है। आप पूरे भारत के लाखों विद्यार्थियों के लिए सच्ची प्रेरणा हैं। अच्छा प्रदर्शन करने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई। अपने माता-पिता, शिक्षकों और देश का नाम इसी तरह रोशन करते रहिए।”
आर्यन की इस ऐतिहासिक सफलता से उनका परिवार और शिक्षक बेहद खुश हैं। उनके पिता डॉ. सचिन गुप्ता एनेस्थीसियोलॉजिस्ट हैं, जबकि उनकी माता डॉ. रीनू गुप्ता गायनेकोलॉजिस्ट हैं। आर्यन अपनी इस सफलता का श्रेय अपनी स्वर्गीय दादी की प्रेरणा और अपने बड़े भाई के मार्गदर्शन को देते हैं।
आर्यन ने बताया, “जब मैं तीसरी कक्षा में था, तब मैंने अपनी दादी को कैंसर के कारण खो दिया। मैं उनसे बहुत जुड़ा हुआ था। हमारे परिवार में लगभग सभी लोग डॉक्टर हैं और मेरे माता-पिता भी डॉक्टर हैं, लेकिन हम उन्हें बचा नहीं सके। उसी दिन मैंने तय कर लिया था कि बड़ा होकर कैंसर विशेषज्ञ (ऑन्कोलॉजिस्ट) बनूंगा। आज NEET-UG 2026 में AIR-1 हासिल करने के बाद मेरा वह सपना साकार होने के और करीब पहुंच गया है।”
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मानसून के दौरान बढ़ रही हैं बीमारियाँ , ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ पंजाब भर में समय पर कैशलेस इलाज सुनिश्चित कर रही है
मानसून की पहली बारिश जहाँ गर्मी से राहत देती है, वहीं लोगों के स्वास्थ्य के लिए चुनौतीपूर्ण मौसम की शुरुआत भी करती है। हर साल पूरे भारत के अस्पतालों में डेंगू, मलेरिया और बुख़ार से जुड़ी अन्य बीमारियों के मामले बढ़ जाते हैं। इस साल भी यही स्थिति देखने को मिल रही है।
अमृतसर की 32 वर्षीय बलविंदर कौर, जो इस योजना की लाभार्थी हैं, ने बताया, “मैंने हाल ही में मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत 8400 रुपये का इलाज करवाया।”
बलविंदर कौर को उस समय अस्पताल ले जाया गया जब उन्हें काफ़ी तेज़ बुख़ार था। उन्होंने कहा, “अस्पताल के स्टाफ़ ने मुझे मुख्यमंत्री सेहत योजना में रजिस्टर करवाने में मदद की। मैं कपड़े सिलकर अपना गुज़ारा करती हूँ। इस योजना ने समय पर इलाज और आर्थिक सहायता देकर मेरा बोझ कम किया, जिससे मैं अपनी रिकवरी पर ध्यान दे सकी। मैं मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा शुरू की गई इस स्वास्थ्य योजना के लिए आभारी हूँ। यह वास्तव में ज़रूरत के समय परिवारों का साथ देती है।”
2025 में किए गए एक भारतीय अस्पताल अध्ययन में पाया गया कि मानसून के दौरान भर्ती किए गए मरीज़ों में एक्यूट फेब्राइल इलनेस (तीव्र बुख़ार वाली बीमारी) का सबसे आम कारण डेंगू था। यह निष्कर्ष दर्शाता है कि समय पर जाँच और तुरंत इलाज बेहद ज़रूरी हैं, क्योंकि मानसून से जुड़ी कई बीमारियों की शुरुआत एक जैसे लक्षणों के साथ होती है।
डॉक्टर लोगों से अपील कर रहे हैं कि लगातार रहने वाले बुख़ार को नज़रअंदाज़ न किया जाए , वहीं पंजाब में मुख्यमंत्री सेहत योजना (MMSY) योग्य परिवारों को अस्पताल के बिल की चिंता के बिना कैशलेस इलाज उपलब्ध करवा रही है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि सरकार ने मच्छरों और पानी से फैलने वाली मौसमी बीमारियों में बढ़ोतरी से निपटने के लिए निगरानी, अस्पतालों की तैयारी और जाँच सुविधाओं को मज़बूत किया है। उन्होंने लोगों से सामान्य रोकथाम उपाय अपनाने की अपील की, जैसे आसपास जमा पानी को साफ़ करना और बुख़ार के शुरुआती लक्षण दिखते ही चिकित्सकीय सलाह लेना।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “पानी से फैलने वाली बीमारियों की रोकथाम घर से ही शुरू होती है। मच्छरों के प्रजनन को रोकने में हर परिवार, स्कूल और समुदाय की अपनी भूमिका है। साथ ही हम लोगों को यह भी बताना चाहते हैं कि मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत योग्य लाभार्थी बिना ख़र्च की चिंता के समय पर इलाज करवा सकते हैं।”
डॉ. राज कुमार (एम.डी. मेडिसिन), सीनियर मेडिकल ऑफ़िसर, कम्युनिटी हेल्थ सेंटर, वेरका, पंजाब ने कहा कि मरीज़ हर बुख़ार को अक्सर सामान्य वायरल संक्रमण समझने की ग़लती कर लेते हैं। उन्होंने कहा, “हर मानसून में हम ऐसे मरीज़ देखते हैं जो तीन-चार दिन घर पर इलाज करने के बाद अस्पताल पहुँचते हैं। तब तक उनमें डिहाइड्रेशन या डेंगू के चेतावनी संकेत दिखाई देने लगते हैं। एक सामान्य रक्त जाँच और समय पर इलाज गंभीर जटिलताओं से बचा सकता है। पहले 48 घंटे बेहद महत्त्वपूर्ण होते हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि बरसात के मौसम में डेंगू ही एकमात्र समस्या नहीं है। उन्होंने कहा, “मानसून में मलेरिया, टाइफ़ायड , वायरल हेपेटाइटिस और एक्यूट गैस्ट्रोएंटेराइटिस भी आम हैं। लक्षण एक जैसे होने के कारण लोगों को ख़ुद दवा लेने से बचना चाहिए और बुख़ार लगातार रहने पर डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। शुरुआती जाँच जीवन बचा सकती है।”
डॉ. राज कुमार ने आगे कहा, “शुरुआती चरण में इस तरह के बुख़ारों का इलाज कम्युनिटी हेल्थ सेंटर (CHC) के साथ-साथ प्राइमरी हेल्थ सेंटरों (PHC) में भी मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत सुरक्षित और प्रभावी तरीके से किया जा सकता है।”
उन्होंने कहा कि जल्दी जाँच और समय पर इलाज से जटिलताएँ कम होती हैं और बड़े अस्पतालों में रेफ़रल की ज़रूरत कम पड़ती है।
स्टेट हेल्थ एजेंसी (SHA) द्वारा साझा किए गए मुख्यमंत्री सेहत योजना के ताज़ा आंकड़े मौसमी रुझान को दर्शाते हैं। 6 जुलाई 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, एक्यूट फेब्राइल इलनेस (तीव्र बुख़ार वाली बीमारी) इस योजना के तहत इलाज की जाने वाली सबसे आम बीमारियों में से एक रही।
मरीज़ों का इलाज कम्युनिटी हेल्थ सेंटरों, सब-डिवीज़नल अस्पतालों, ज़िला अस्पतालों और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में किया गया। मरीज़ की स्थिति के अनुसार बुख़ार से जुड़ी बीमारियों के इलाज पैकेज 2100 रुपये से 8400 रुपये तक हैं।
मलेरिया, एक्यूट गैस्ट्रोएंटेराइटिस, तेज़ बुख़ार और वायरल हेपेटाइटिस के मामले भी दर्ज हुए हैं, जिससे स्पष्ट है कि मानसून बीमारियों का मौसम शुरू हो चुका है।
बुख़ार से जुड़े दावे फाज़िल्का, मोगा, संगरूर, गुरदासपुर और होशियारपुर जैसे ज़िलों से आए हैं, जिससे पता चलता है कि लोग बड़े शहरों में जाने के बजाय अपने नज़दीक ही इलाज करवा रहे हैं।
इसके साथ ही आंकड़ों से योजना की व्यापक पहुँच भी सामने आई है। बड़ी संख्या में लाभार्थियों ने मौसमी बुख़ार का इलाज करवाया, वहीं मुख्यमंत्री सेहत योजना ने डायलिसिस, दिल से जुड़ी इलाज प्रक्रियाओं, इंटेंसिव केयर और अन्य महँगे इलाज को भी कवर किया। बुख़ार के इलाज के कुछ हज़ार रुपये के पैकेज से लेकर जीवन बचाने वाली हृदय संबंधी सेवाओं तक, यह योजना सामान्य बीमारियों से लेकर आपातकालीन परिस्थितियों तक परिवारों के लिए एक मज़बूत सहारा बन रही है।
डॉ. राज कुमार ने सलाह दी कि लोग दो दिन से अधिक रहने वाले बुख़ार को नज़रअंदाज़ न करें, विशेष तौर पर यदि इसके साथ तेज़ शरीर दर्द, लगातार उल्टी, पेट-दर्द, ख़ून बहना, साँस लेने में परेशानी या अचानक कमज़ोरी जैसे लक्षण हों।
उन्होंने कूलर, गमलों और अन्य स्थानों पर जमा पानी ख़ाली करने, मच्छर रिपेलेंट का उपयोग करने, पूरी बाँहों वाले कपड़े पहनने और मानसून के दौरान अधिक साफ़-सफ़ाई रखने की भी सलाह दी।
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