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धर्मेंद्र प्रधान को हटाकर सोनम वांगचुक को देश का शिक्षा मंत्री बनाया जाए- केजरीवाल

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आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने जंतर मंतर से शिक्षाविद् सोनम वांगचुक को देश का शिक्षा मंत्री बनाने की मांग रख कर युवाओं के अंदर उम्मीद की नई किरण जगा दी है। गुरुवार को उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक से मुलाकात कर उनके संघर्ष का समर्थन किया। उन्होंने प्रधानमंत्री से कहा कि धर्मेंद्र प्रधान को हटाकर सोनम वांगचुक को देश का शिक्षा मंत्री बनाया जाए। लेकिन प्रधानमंत्री ऐसा करेंगे नहीं, क्योंकि उन्हें डर है कि कहीं सोनम वांगचुक शिक्षा में कोई क्रांति न ला दें। देश की सड़ चुकी शिक्षा व्यवस्था को एक क्रांतिकारी कदम ही ठीक कर सकता है। इसलिए देश को सोनम वांगचुक जैसा एक क्रांतिकारी शिक्षा मंत्री के साथ ही क्रांतिकारी कदम दोनों की जरूरत है। इस दौरान सांसद संजय सिंह समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हमारे देश की शिक्षा प्रणाली को दुरुस्त करने के लिए पूरे देश के युवा जो कॉकरोच आंदोलन के बैनर तले इकट्ठे हुए हैं, मैं उन सब लोगों को सलाम करता हूं। मैं सोनम वांगचुक को सलाम करता हूं जो अपने लिए नहीं, बल्कि युवाओं और हमारे देश के बच्चों के लिए अपनी जान दांव पर लगाकर पिछले 19 दिन से अनशन कर रहे हैं।

अरविंद केजरीवाल ने बताया कि हमारे देश में ऐसे बहुत सारे टीचर्स हैं जिन्होंने पेपर लीक के खिलाफ अपने-अपने शहर से आवाज उठाई, लेकिन उनको गिरफ्तार कर लिया गया। उन टीचर्स को तरह-तरह से टॉर्चर किया गया और उनके खिलाफ एफआईआर की गई, मैं उन सब लोगों को भी सलाम करता हूं। सोनम वांगचुक एक बहुत बड़े शिक्षाविद् हैं। उन्होंने पहले भी लद्दाख और देश के लिए कई बार अनशन किए हैं और आज उन्होंने देश के लिए अपनी जान दांव पर लगाई हुई है।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि जब कोई बच्चा कॉम्पिटिटिव एग्जाम देने जाता है तो वह सिर्फ एक एग्जाम नहीं, बल्कि उसके लिए एक सपना होता है। जब वह एग्जामिनेशन हॉल में घुसता है तो उसे विश्वास होता है कि मैं अपनी मेहनत और अपनी बुद्धिमत्ता के बल पर अपना भविष्य बनाऊंगा। मैंने भी आईआईटी के पेपर दिए थे और उसमें सफल होकर आईआईटी गया था, लेकिन उन दिनों पेपर लीक नहीं होते थे। अगर उन दिनों पेपर लीक हो रहे होते तो शायद मेरा आईआईटी देने का विश्वास ही नहीं बनता। मेरे दोनों बच्चे भी आईआईटी से हैं और उनके समय पर भी पेपर लीक नहीं होते थे।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पिछले कुछ सालों से जिस तरह से देश में पेपर लीक होने लगे हैं, उससे बच्चे का वह आत्म विश्वास लड़खड़ाने लगा है कि अगर वह मेहनत करेगा और इंटेलिजेंट है तो अमीरों के बच्चों को भी पीछे छोड़ देगा। आज बच्चों का यह लड़खड़ाता हुआ आत्म विश्वास सही नहीं है और देश के लिए बहुत खतरनाक बात है।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अब हर साल पेपर लीक हो रहे हैं। साल 2024 में जो पेपर लीक हुआ था, सरकार ने उसके मास्टरमाइंड को बेल दिला दी। अब यह एक सिस्टम बन गया है कि हर साल पेपर लीक होते हैं, कमेटी बैठती हैं, जांच होती है, एफआईआर होती है, गिरफ्तारी होती है, बेल हो जाती है और अगले साल के पेपर लीक होने की फिर तैयारी शुरू हो जाती है। देश का युवा और ये बच्चे इसे कब तक बर्दाश्त करेंगे?

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि नीट पेपर लीक के बाद 20 से ज्यादा बच्चों ने सुसाइड कर लिया, लेकिन सरकार को कोई अक्ल नहीं आई। इनके कान पर जूं तक नहीं रेंगती, चाहे जितने बच्चे सुसाइड कर लें। जो बच्चे सुसाइड कर रहे हैं वे हमारे घरों के बच्चे थे, लेकिन सरकार ने कुछ नहीं किया। सीबीएसई में पूरा इवैल्यूएशन सिस्टम गड़बड़ा गया, गिरफ्तार करना तो दूर की बात है, सरकार ने जिम्मेदार कंपनी के खिलाफ एफआईआर तक दर्ज नहीं की। इतने बड़े स्तर पर पूरे देश में आंदोलन चल रहा है, फिर भी सरकार ने कोई ऐसा सिस्टम में बदलाव नहीं किया जिससे अगले साल पेपर लीक न हों। अगले साल फिर पेपर लीक होंगे और हमारे बच्चे फिर मरेंगे, फिर आत्महत्या करेंगे। यह सिस्टम कब बदलेगा? इस सिस्टम को बदलना ही पड़ेगा।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि यही जंतर-मंतर था, 4 अप्रैल 2011 का दिन था और यहीं अन्ना हजारे बैठे हुए थे। उस वक्त की सरकार को भी बड़ा अहंकार था, लेकिन तीन साल के बाद वह सरकार अपने अहंकार की वजह से नहीं बची और डूब गई। आज 2026 है और मैं सरकार को कहना चाहता हूं कि वह युवाओं के कॉकरोच आंदोलन और सोनम वांगचुक की बात सुन ले, नहीं तो आज से तीन साल बाद उनका भी यही हश्र होगा, जो 2014 में उस अहंकारी सरकार का हुआ था। इस सरकार को अक्ल नहीं आ रही है और ये भी बहुत ज्यादा अहंकार में डूबे हुए हैं।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान को तो इस्तीफा देना ही चाहिए, लेकिन सोनम वांगचुक को देश का शिक्षा मंत्री बनाना चाहिए। मैं प्रधानमंत्री जी से कहना चाहता हूं कि धर्मेंद्र प्रधान को हटाओ और सोनम वांगचुक को देश का शिक्षा मंत्री बनाओ। मुझे पता है कि प्रधानमंत्री सुनने वाले नहीं हैं। प्रधानमंत्री सोनम वांगचुक को देश का शिक्षा मंत्री नहीं बनाएंगे, क्योंकि उन्हें डर लगता है कि कहीं सोनम वांगचुक कोई क्रांतिकारी चीज न कर दे। आज शिक्षा व्यवस्था जितनी खराब हो गई है, उसे ठीक करने के लिए हमें क्रांतिकारी कदम ही चाहिए। बिना क्रांति के शिक्षा व्यवस्था ठीक नहीं होने वाली है। इसके लिए हमें सोनम वांगचुक जैसा एक क्रांतिकारी शिक्षा मंत्री और क्रांतिकारी कदम दोनों की जरूरत है। उन्होंने देशवासियों से अपील करते हुए कहा कि 20 जुलाई को ज्यादा से ज्यादा संख्या में जंतर-मंतर आना है और शांतिपूर्ण संसद मार्च को सफल बनाना है।

इस दौरान “आप” के वरिष्ठ नेता व राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह श्दिनकर’ की पंक्तियों ‘समर शेष है, नहीं पाप का भागी केवल व्याध, जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध’ का जिक्र करते हुए घरों में बैठे लोगों से अपील की कि वे बाहर निकलकर जंतर-मंतर पहुंचें। लोगों को सोनम वांगचुक की आवाज में आवाज मिलाकर भारत सरकार और नरेंद्र मोदी को झुकने के लिए मजबूर करना है।

संजय सिंह ने आगे कहा कि मोदी जी से बड़ा नौटंकीबाज पूरी दुनिया में कोई नहीं मिलेगा। जब देश में कोरोना आया और नोटबंदी में लोग मर गए, तब वे रोने लगे। देश के प्रधानमंत्री दिन-रात सिर्फ झूठ बोलने का काम करते हैं। इसलिए मैं यकीन दिलाकर जा रहा हूं कि 20 जुलाई से संसद के अंदर सभी साथी सांसदों से बात करके हम लोग युवाओं के लिए लड़ाई लड़ने का काम करेंगे। 20 जुलाई को सोनम वांगचुक के आह्वान पर मैं भी एक कार्यकर्ता और साथी के रूप में इस आंदोलन में शामिल होने के लिए जंतर-मंतर आऊंगा और हमारे अन्य साथी भी यहां पहुंचेंगे।

संजय सिंह ने कहा कि अरविंद केजरीवाल ने भरोसा दिलाया है कि हम इस आंदोलन को हर तरीके से अपना समर्थन देंगे। हम अन्य राजनीतिक दलों और जन आंदोलनों से भी इस आंदोलन को समर्थन देने की अपील करते हैं, क्योंकि सोनम वांगचुक कोई अपनी निजी लड़ाई नहीं लड़ रहे हैं, बल्कि देश के करोड़ों नौजवानों, हिंदुस्तान के भविष्य और आने वाले कल की लड़ाई लड़ रहे हैं।

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Mahatma Gandhi की समाधि पर जाकर केजरीवाल और मनीष सिसोदिया हुए नतमस्तक, सत्याग्रह के मार्ग पर डटे रहने की मांगी शक्ति

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आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और वरिष्ठ नेता व पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया मंगलवार को राजघाट पहुंच कर महात्मा गांधी की समाधि पर नतमस्तक हुए। उनके साथ पार्टी के विधायक और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता भी मौजूद थे। उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ सत्याग्रह की राह दिखाने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी को नमन करते हुए सत्याग्रह के मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराया। इस दौरान अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हम न्यायपालिका का बहुत सम्मान करते हैं, लेकिन कुछ ऐसी परिस्थितियां पैदा हुई हैं कि हमें यह सत्याग्रह करना पड़ रहा है। मेरा अटूट विश्वास है कि बापू के आशीर्वाद से सत्याग्रह के इस कठिन पथ पर हम पूर्ण निष्ठा के साथ अडिग रहेंगे।

अरविंद केजरीवाल ने एक्स पर कहा कि आज मनीष सिसोदिया और अन्य साथियों के साथ राजघाट पहुंच कर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी को नमन किया। मेरी बापू से यही प्रार्थना है कि उनके दिखाए ‘सत्याग्रह’ के मार्ग पर चलने के हमारे संकल्प को वे सदैव शक्ति दें। मेरा अटूट विश्वास है कि बापू के आशीर्वाद से, सत्याग्रह के इस कठिन पथ पर हम पूर्ण निष्ठा के साथ अडिग रहेंगे।

वहीं, मीडिया से बातचीत के दौरान अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मामला अदालत का है। हम अदालत का बहुत सम्मान करते हैं। हम अपने देश की न्याय प्रणाली का बहुत सम्मान करते हैं, क्योंकि इसी न्याय प्रणाली और न्यायपालिका ने हमें बेल दिलवाई और आरोप मुक्त किया है। आज हम लोग अगर आजाद घूम रहे हैं, तो हमारी न्याय प्रणाली की वजह से ही घूम रहे हैं। लेकिन कुछ ऐसी परिस्थितियां पैदा हुई हैं, जिनकी वजह से हमें यह सत्याग्रह करना पड़ रहा है। वे सभी हमने जज साहिबा को लिखी चिट्ठी में बयां कर दिए हैं।

उधर, ‘‘आप’’ के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बापू समाधि पर नतमस्तक होने के बाद एक्स पर कहा कि मंगलवार को राजघाट जाकर पूज्य बापू की समाधि पर अरविंद केजरीवाल के साथ नतमस्तक हुआ। महात्मा गांधी जी ने हमें हमेशा सत्य के रास्ते पर अडिग रहने और सत्य के लिए आत्मबल के साथ सत्याग्रह करने की प्रेरणा दी है। आज उसी मार्ग पर चलने का संकल्प और मजबूत हुआ।

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Heatwave Alert : बढ़ती गर्मी को लेकर सरकार सख्त, स्कूलों के लिए जारी किए कड़े निर्देश

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भीषण गर्मी और हीटवेव के बढ़ते खतरे को देखते हुए दिल्ली सरकार ने राजधानी के सभी स्कूलों के लिए सख्त और विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों का उद्देश्य छात्रों की सेहत और सुरक्षा को सुनिश्चित करना है।

मौजूदा तापमान में लगातार वृद्धि और हीटवेव की चेतावनियों को ध्यान में रखते हुए यह नया प्रोटोकॉल लागू किया गया है।

“वॉटर बेल” सिस्टम अनिवार्य

नए दिशा-निर्देशों के तहत स्कूलों में “वॉटर बेल” प्रणाली लागू करना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अंतर्गत हर 45 से 60 मिनट के अंतराल पर घंटी बजाई जाएगी, ताकि छात्रों को नियमित रूप से पानी पीने की याद दिलाई जा सके। इसका मुख्य उद्देश्य डिहाइड्रेशन से बचाव करना और छात्रों को हाइड्रेट रखना है।

पीने के पानी और सुविधाओं पर जोर

सरकार ने स्कूल प्रशासन को निर्देश दिया है कि छात्र पर्याप्त मात्रा में पानी साथ लाएं। साथ ही, स्कूल परिसर में साफ और ठंडे पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

बाहरी गतिविधियों पर रोक

तेज धूप से बचाने के लिए बाहरी गतिविधियों और असेंबली को सीमित करने को कहा गया है। इन्हें छायादार या इनडोर स्थानों पर आयोजित करने की सलाह दी गई है। खुले में कक्षाएं लगाने पर भी रोक लगा दी गई है।

स्वास्थ्य जागरूकता पर विशेष फोकस

स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि हीटवेव से संबंधित जानकारी, शिक्षा और संचार (IEC) सामग्री को नोटिस बोर्ड, गलियारों और कक्षाओं में प्रदर्शित किया जाए। छात्रों को गर्मी से बचाव, पानी की महत्ता और हीट से जुड़ी बीमारियों के लक्षणों के बारे में जागरूक किया जाए।

मेडिकल और इमरजेंसी व्यवस्था

जरूरत पड़ने पर तुरंत प्राथमिक उपचार और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा “बड्डी सिस्टम” लागू किया जाएगा, जिसके तहत हर छात्र को एक साथी के साथ जोड़ा जाएगा, ताकि वे एक-दूसरे की सेहत पर नजर रख सकें।

खेल-कूद और शारीरिक गतिविधियों पर नियंत्रण

भीषण गर्मी के दौरान छात्रों को भारी और बाहरी शारीरिक गतिविधियों से दूर रखने की सलाह दी गई है।

निगरानी के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त

इन सभी दिशा-निर्देशों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए हर स्कूल में एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए गए हैं, जो पूरे सिस्टम की निगरानी करेगा।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि छात्रों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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पंजाब को नशा मुक्त बनाने के लिए विधायक पूरी ज़िम्मेदारी लें और हर गांव की रोज़ की जवाबदेही सुनिश्चित करें: Manish Sisodia

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आम आदमी पार्टी (आप) के पंजाब प्रभारी और दिल्ली के पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने अमृतसर में ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ मुहिम के तहत पार्टी नेताओं, विधायकों, ब्लॉक इंचार्ज और पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि पंजाब को नशा मुक्त बनाने के लिए विधायकों को पूरी जिम्मेदारी लेनी होगी और हर गांव की रोजाना जवाबदेही पक्की करनी होगी। उन्होंने पूरे पंजाब में नशे के खिलाफ एक मजबूत और मिशन-मोड लड़ाई की अपील की, और इस बात पर जोर दिया कि ‘आप’ की नींव संघर्ष और कुर्बानी में है, न कि पावर या सुविधाओं में।

भारी सभा को संबोधित करते हुए, आप के सीनियर नेता मनीष सिसोदिया ने कहा, “आम आदमी पार्टी जंतर-मंतर पर अरविंद केजरीवाल जी, हम सभी और आप में से कई लोगों के सहयोग से 14 दिन की भूख हड़ताल से निकली है। यह पार्टी सत्ता का आनंद लेने या विधायक मंत्री बनने के लिए ड्राइंग रूम में नहीं बनी। यह संघर्ष से पैदा हुई पार्टी है और हमने कभी हिम्मत नहीं हारी है।”

दिल्ली सरकार के सामने आई चुनौतियों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि दिल्ली में सरकार बनने के बाद पहला हमला केंद्र सरकार द्वारा किया। जब अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री बने, तो हमने तहसीलदार से लेकर एसडीएम तक, सभी लेवल पर भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ की पॉलिसी अपनाई। केंद्र को खतरा महसूस हुआ और उसने दिल्ली सरकार से एंटी-करप्शन ब्रांच (एसीबी) छीन ली। बाद में आईएएस अधिकारियों से लेकर शिक्षकों और सेवादारों तक के ट्रांसफर की पावर भी छीन ली गई। सभी पावर छीन लेने के बावजूद, हमने काम करना जारी रखा और नतीजे दिए।

उन्होंने आगे कहा कि सत्ता जाने के बाद भी, हमने ऐसे स्कूल और अस्पताल बनाए जो भारत में पहले कभी नहीं देखे गए। हमने बिजली और पानी पर ऐसी नीतियां लागू कीं जो एक मिसाल बन गईं। अरविंद केजरीवाल कह सकते थे कि वह शक्तियों के बिना काम नहीं कर सकते, लेकिन उन्होंने करके दिखाया। यही वजह है कि दिल्ली के लोगों ने उन्हें 2020 में 70 में से 62 सीटें दीं।”

आप नेताओं को राजनीति तौर पर निशाना बनाने के बारे में मनीष सिसोदिया ने कहा कि ईमानदारी की इस इमेज को तोड़ने के लिए नरेंद्र मोदी जी ने अरविंद केजरीवाल को भ्रष्ट साबित करने की कोशिश की। सत्येंद्र जैन को झूठे केस में गिरफ्तार किया गया। मुझ पर भी कथित शराब घोटाले का आरोप लगाया गया। पहले उन्होंने 10,000 करोड़ कहा, फिर 1,000 करोड़, फिर 100 करोड़ और कोर्ट में यह ज़ीरो हो गया। कोर्ट ने कहा कि कोई केस नहीं है।

हिम्मत बनाए रखने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि आपमें हिम्मत होनी चाहिए। यह एक दिन की लड़ाई नहीं है। यह एक लंबी लड़ाई है। आप गुरुओं और शहीदों की धरती पर पैदा हुए हैं। आपको वहीं से ताकत लेनी चाहिए। आज हम अपने लिए नहीं बल्कि अपने बच्चों के लिए लड़ रहे हैं। क्या आप गारंटी दे सकते हैं कि 10 साल बाद आपका बच्चा नशे में नहीं पड़ेगा? गारंटी बस यही है कि हम सब मिलकर पंजाब को नशा मुक्त बनाएं।

विधायकों और लोकल लीडरशिप को सीधे संबोधित करते हुए पंजाब आप प्रभारी ने कहा कि अगर एक भी गांव या एक भी वार्ड में नशा बिक रहा है, तो आपको नींद नहीं आनी चाहिए। कोई विधायक अपने ब्लॉक इंचार्ज को फोन करके क्यों नहीं पूछता कि क्या हो रहा है? विधायक खुद गांव क्यों नहीं जाता? ज़िम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता।

उन्होंने जवाबदेही और तालमेल की अहमियत पर जोर देते हुए कहा, “24 मार्च से 31 मार्च तक सभी ब्लॉकों में मीटिंगें की जाएंगी। हर VDC रिपोर्ट देगी कि उनका गांव नशा मुक्त है या नहीं और किस हद तक नशा अभी भी बाकी है। अगर नशा बिक रहा है तो जिम्मेदार व्यक्ति की पहचान होनी चाहिए। विधायक और हलका इंचार्ज ब्लॉक इंचार्जों का पूरा साथ दें।”

इस मुहिम के सामूहिक स्वरूप के बारे में उन्होंने कहा, “पंजाब में पहली बार सरकार, पुलिस और जनता ‘नशों के खिलाफ जंग’ जैसी मुहिम में ईमानदारी से मिलकर काम कर रहे हैं। पहले ऐसा समय था जब मंत्री भी नशा तस्करी में शामिल होते थे और माफिया की बजाय ईमानदार अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की जाती थी। आज अरविंद केजरीवाल जी और मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की स्पष्ट हिदायत है कि नशों में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।”

उन्होंने ‘आप’ की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को दोहराते हुए कहा, “अगर ‘आप’ का कोई दूर का कार्यकर्ता भी नशा तस्करी से जुड़ा पाया जाता है या नशा तस्करों से उसके संबंध पाए जाते हैं, तो उसे जेल भेजा जाना चाहिए। पार्टी और शासन दोनों में जीरो टॉलरेंस लागू होनी चाहिए।”

मनीष सिसोदिया ने शिकायतों के लिए गोपनीय रिपोर्टिंग प्रणाली के बारे में बताते हुए कहा, “शिकायतों के लिए तैयार की गई ऐप पूरी तरह गोपनीयता सुनिश्चित करती है। यहां तक कि मंत्री, कमिश्नर या मुख्यमंत्री को भी यह पता नहीं चल सकता कि जानकारी किसने दी है। सिर्फ की गई कार्रवाई को ही ट्रैक किया जा सकता है। इसलिए लोग निडर होकर रिपोर्ट करें।”

भावुक अपील करते हुए उन्होंने कहा, “अगर हम पंजाब के हर गांव और शहर को नशा मुक्त नहीं कर सकते, तो हमारा राजनीति में होना बेमानी है। अरविंद केजरीवाल इस बारे में बहुत गंभीर हैं और कहते हैं कि अगर हम असफल रहे तो हमें शर्म महसूस करनी चाहिए।”

उन्होंने पंजाब की आध्यात्मिक और क्रांतिकारी विरासत का हवाला देते हुए कहा, “यह गुरु साहिबान की, सेवा और हिम्मत की धरती है। यह शहीद-ए-आजम भगत सिंह, ऊधम सिंह, करतार सिंह सराभा और मदन लाल ढींगरा की धरती है। उनसे प्रेरणा लो। अगर शहीद-ए-आजम भगत सिंह हिचकिचाते तो आज हम कहां होते? अगर जरूरत पड़े तो नशा तस्करों को 40 बार जेल भेजो, लेकिन रुको मत।”

पार्टी नेताओं को सख्त संदेश देते हुए उन्होंने कहा, “अगर आपमें नशा माफिया से टक्कर लेने की हिम्मत नहीं है, तो अरविंद केजरीवाल को शर्मिंदा मत करो। पार्टी छोड़ दो। यह पार्टी लड़ने के लिए बनी है।”

अपना निजी अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा, “CBI ने मेरे घर छापा मारा, अलमारियां खंगालीं, यहां तक कि पैसों की तलाश में तकिए भी फाड़ दिए। मैंने तीन साल तक झूठे आरोपों का बोझ उठाया। मुझसे पार्टी छोड़ने और विधायकों को तोड़ने के लिए कहा गया। लेकिन अरविंद केजरीवाल को छोड़ने का मतलब है ईमानदारी और शिक्षा के जरिए राष्ट्र निर्माण के सपने को छोड़ना। मैंने नहीं छोड़ा और आपको भी नहीं छोड़ना चाहिए।”

भविष्य की रणनीति की बात करते हुए मनीष सिसोदिया ने कहा कि 31 मार्च के बाद वह गांव-गांव की प्रगति का जायजा लेने के लिए निजी तौर पर ब्लॉक इंचार्जों और विधायकों से मिलेंगे। हर हलके को यह डेटा पेश करना होगा कि कितने गांव नशा मुक्त हो गए हैं और नशों को पूरी तरह खत्म करने के लिए समय-सीमा तय करनी होगी। यह लड़ाई सिर्फ लड़नी ही नहीं, बल्कि जीतनी भी है।

उन्होंने भरोसा जताया कि पूरी टीम नए इरादे के साथ लौटेगी और सामूहिक कोशिशों तथा दृढ़ संकल्प के साथ नशा मुक्त पंजाब का निर्माण करेगी।

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