Punjab
कर्मचारी संगठनों से मिले वित्त मंत्री हरपाल चीमा, भर्ती, प्रमोशन और नियमितीकरण समेत मांगों पर हुई चर्चा
पंजाब सरकार कर्मचारियों की लंबित मांगों और समस्याओं के समाधान के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में कर्मचारियों के मुद्दों के निपटारे के लिए गठित कैबिनेट सब-कमेटी के अध्यक्ष एवं पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने सोमवार को विभिन्न कर्मचारी यूनियनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर उनकी मांगों और शिकायतों पर विस्तार से चर्चा की।
बैठक के दौरान हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि विभिन्न यूनियनों द्वारा सौंपे गए मांग पत्रों का गंभीरता से अध्ययन किया जा रहा है, ताकि भर्ती, पदोन्नति, नियमितीकरण, वेतनमान और अन्य जायज मांगों का समयबद्ध एवं निष्पक्ष समाधान सुनिश्चित किया जा सके।
बैठक में शिक्षा विभाग से जुड़े मुद्दों पर विशेष रूप से चर्चा हुई। बेरोजगार स्पेशल एजुकेटर फ्रंट पंजाब ने वर्ष 2026 में 1,200 स्पेशल एजुकेशन शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग रखी। वहीं पंजाब एजुकेशन डिपार्टमेंट मिनिस्टीरियल स्टाफ एसोसिएशन ने सुपरिंटेंडेंट पदों पर पदोन्नति के लिए अनुभव संबंधी शर्तों में एकमुश्त छूट, समाप्त की गई पदों की बहाली, जूनियर सहायकों को 50 प्रतिशत अनुपात में पदोन्नति तथा मिनिस्टीरियल कर्मचारियों को भी शिक्षकों की तरह राज्य पुरस्कार देने की मांग उठाई।
इसके अलावा कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर्स एसोसिएशन ने वेतन, लॉयल्टी बोनस और सेवाओं को नियमित करने की मांग रखी। वहीं डेमोक्रेटिक वन कर्मचारी यूनियन ने सेवाएं नियमित करने के लिए सरकार का धन्यवाद देते हुए शेष कच्चे और संविदा कर्मचारियों को भी जल्द नियमित करने की मांग की। यूनियन ने वेतन और सेवानिवृत्ति से जुड़े मुद्दे भी उठाए।
वित्त मंत्री ने जॉइंट एसोसिएशन ऑफ इंडिपेंडेंट मेडिकल लेबोरेटरी एंड एलाइड प्रोफेशनल्स के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की। उन्होंने भरोसा दिलाया कि उनकी प्रमुख मांगों पर सरकार पहले से ही कार्रवाई कर रही है और संबंधित प्रक्रियाएं जारी हैं।
बैठक के अंत में हरपाल सिंह चीमा ने सभी कर्मचारी संगठनों को आश्वस्त किया कि उनकी जायज मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और चरणबद्ध तरीके से उचित समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।
Politics
CM भगवंत सिंह मान द्वारा पराली जलाने को रोकने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाने का आह्वान
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज राज्य में पराली जलाने की प्रवृत्ति को और रोकने के लिए व्यापक सूचना और जागरूकता अभियान चलाने का आह्वान किया, क्योंकि पंजाब सरकार के निरंतर प्रयासों के कारण 2023 से 2025 तक ऐसी घटनाओं में पहले ही 86 प्रतिशत की कमी आ चुकी है। अधिकारियों को इस अभियान को गांवों और ब्लॉकों तक और अधिक प्रभावी ढंग से ले जाने का निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि इन उपलब्धियों को मजबूत करने और पंजाब के पर्यावरण को बचाने के लिए गैर-सरकारी संगठनों (एन.जी.ओज़.), समाजसेवियों, पंचायतों और किसानों की सक्रिय भागीदारी, बड़े पैमाने पर सोशल मीडिया की पहुंच और मजबूत इन-सीटू तथा एक्स-सीटू (खेत में और खेत से बाहर) पराली प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है।
पराली प्रबंधन की रणनीति से संबंधित बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बताया कि इस वर्ष पंजाब में लगभग 30 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की बुआई की गई है, जिससे 18.81 मिलियन टन पराली उत्पन्न होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, “पंजाब सरकार के भरपूर प्रयासों के कारण पंजाब में 2023 से 2025 तक पराली जलाने की घटनाओं में 86 प्रतिशत की कमी आई है। ये घटनाएं 2023 में 36,663 से घटकर 2024 में 10,909 और 2025 में और घटकर 5,114 रह गई हैं। हमें इसे और आगे बढ़ाना है और यह सुनिश्चित करना है कि इस वर्ष पराली जलाने की घटनाओं में और भी कमी आए।”
जमीनी स्तर पर तीव्र अभियान की आवश्यकता पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “किसानों को पराली जलाने के नुकसानों के प्रति जागरूक करने के लिए गांव और ब्लॉक स्तर पर व्यापक सूचना और जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए। प्रत्येक हितधारक को किसानों को पराली जलाने के स्थायी विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित करने हेतु मिलकर काम करना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि किसानों को प्रेरित करने के प्रयासों को और मजबूत करने के लिए गैर-सरकारी संगठनों (एन.जी.ओज़.) और समाजसेवियों को इस अभियान में सक्रिय रूप से शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “गैर-सरकारी संगठनों और समाजसेवियों को किसानों को प्रेरित करने के लिए साथ जोड़ा जाए। मशीनरी के प्रदर्शन, नुक्कड़ नाटक, सरपंचों के साथ बैठकें, शपथ ग्रहण समारोह और अन्य जागरूकता कार्यक्रम व्यापक स्तर पर करवाए जाएं ताकि यह संदेश जमीनी स्तर तक किसानों तक पहुंच सके।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने जमीनी स्तर की गतिविधियों के पूरक के रूप में एक व्यापक डिजिटल और मल्टीमीडिया रणनीति अपनाने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा, “रेडियो जिंगल्स, प्रिंट मीडिया, टेलीविजन, मोबाइल एस.एम.एस. और आउटडोर मीडिया को शामिल करते हुए विस्तृत डिजिटल योजना लागू की जानी चाहिए। पराली जलाने के दुष्प्रभावों और उपलब्ध प्रबंधन विकल्पों के बारे में व्यापक जागरूकता पैदा करने के लिए सोशल मीडिया जागरूकता अभियान भी बड़े पैमाने पर चलाया जाना चाहिए।”
उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले किसानों और ग्रामीण संस्थानों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “प्रगतिशील किसानों, उत्कृष्ट प्रदर्शन वाली पंचायतों, पैक्स (प्राइमरी एग्रीकल्चरल क्रेडिट सोसायटियों) और अन्य हितधारकों को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया जाना चाहिए। ऐसा सम्मान दूसरों को अच्छी प्रथाओं को अपनाने और पराली प्रबंधन को एक सामूहिक आंदोलन बनाने के लिए प्रोत्साहित करेगा।”
उन्होंने इस रणनीति को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सभी हितधारकों और जिलों के बीच आपसी समन्वय की आवश्यकता पर भी जोर दिया। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “सभी हितधारकों और जिलों के बीच बेहतरीन समन्वय सुनिश्चित किया जाए ताकि पूरी योजना को सुचारू और प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके। वांछित परिणाम प्राप्त करने के लिए प्रत्येक विभाग और हितधारक को समन्वय में काम करना चाहिए।”
मुख्यमंत्री ने पराली के खेत में और खेत से बाहर प्रबंधन दोनों तरीकों के महत्व को भी उजागर किया। उन्होंने कहा, “धान की पराली के खेत में और खेत से बाहर प्रबंधन को बढ़ावा दिया जाना चाहिए ताकि किसानों को बड़े पैमाने पर लाभ मिल सके और पर्यावरण की भी सुरक्षा हो सके। हमारा उद्देश्य किसानों को पराली जलाने के व्यावहारिक और स्थायी विकल्प प्रदान करना होना चाहिए।”
बैठक में कैबिनेट मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां और हरदीप सिंह मुंडियां, मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा, सचिव विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के.के. यादव, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव डॉ. रवि भगत, सचिव कृषि विभाग अर्शदीप सिंह थिंद और अन्य उच्च अधिकारी भी उपस्थित थे।
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बिक्रम मजीठिया अपने रिकॉर्ड और कथित नशा तस्करी संबंधों पर सवालों के जवाब दें: कुलदीप सिंह धालीवाल
शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया द्वारा लगाए गए आरोपों का पलटवार करते हुए आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के मुख्य प्रवक्ता कुलदीप सिंह धालीवाल ने कहा कि बिक्रम सिंह मजीठिया को राजनीतिक कीचड़ उछालना बंद करना चाहिए और पहले अपने रिकॉर्ड तथा नशा विवाद से जुड़े कथित संबंधों के बारे में उठ रहे गंभीर सवालों का जवाब देना चाहिए।
एक बयान में ‘आप’ पंजाब के मुख्य प्रवक्ता कुलदीप सिंह धालीवाल ने कहा कि जिस व्यक्ति पर बिक्रम सिंह मजीठिया आरोप लगा रहे हैं, उसने खुद एक वीडियो में साफ कहा है कि कोई वित्तीय लेन-देन नहीं हुआ। उसने न तो किसी को पैसे दिए हैं और न ही किसी से पैसे लिए हैं। उन्होंने कहा, “अगर आपके पास कोई सबूत है तो महज आरोप लगाने की बजाय उसे पंजाब के लोगों के सामने रखो।”
‘आप’ पंजाब के मुख्य प्रवक्ता ने बिक्रम सिंह मजीठिया को मंत्री के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान सरकारी वाहनों के कथित इस्तेमाल के बारे में सवालों के जवाब देने के लिए कहा। उन्होंने कहा, “जब आप मंत्री थे, क्या आपकी सरकारी गाड़ियों के जरिए कथित नशे का लेन-देन होता था? पंजाब के लोगों को इस बारे में स्पष्ट जवाब दो।”
उन्होंने बिक्रम सिंह मजीठिया के उन व्यक्तियों के साथ कथित संबंधों पर भी सवाल उठाए, जिनके नाम नशा तस्करी की जांच के दौरान सामने आए थे। उन्होंने कहा, “जांच में नशा तस्करी से जुड़े लोगों के नाम सामने आए हैं। क्या ऐसे कथित नशा तस्कर आपके साथ नहीं जुड़े हुए थे या आपके निवास पर नहीं ठहरते थे? अगर आप दूसरों से जवाब मांग रहे हैं, तो आपको खुद भी इन सवालों का जवाब देना होगा।”
दोषी नशा तस्कर जगदीश भोला का हवाला देते हुए कुलदीप सिंह धालीवाल ने कहा, “नशा तस्करी के मामले में जेल में बंद जगदीश भोला ने सार्वजनिक तौर पर आपका नाम लिया था और आप पर गंभीर आरोप लगाए थे। क्या उसने आपका नाम लिया था या नहीं? उन आरोपों पर आपकी क्या प्रतिक्रिया थी, और आज आपका स्पष्ट जवाब क्या है?”
कुलदीप सिंह धालीवाल ने कहा, “नशे की लानत ने पंजाब की जवानी को तबाह कर दिया है। जिन्होंने पंजाब की नौजवान पीढ़ी के भविष्य को बर्बाद करने में योगदान दिया, वे महज दूसरों पर उंगलियां उठाकर जवाबदेही से नहीं बच सकते। नशे से जुड़े गंभीर आरोपों का सामना कर रहे हर व्यक्ति को जवाब देना होगा, चाहे उसकी पार्टी या पद कोई भी हो।”
उन्होंने बिक्रम सिंह मजीठिया से उनकी वित्तीय स्थिति और पंजाब के बढ़ रहे कर्ज के बारे में सवाल करते हुए कहा कि वह सार्वजनिक जीवन में आने के बाद की अपनी निजी संपत्ति और देनदारियों का पारदर्शी हिसाब-किताब दें। “जब आप सत्ता में आए थे, तब आपका निजी कर्ज और संपत्ति कितनी थी? आज वह कहां खड़ी है? और उसी अवधि के दौरान पंजाब का कर्ज कितना बढ़ा? ये जायज सवाल हैं और पंजाब के लोगों को तथ्य जानने का पूरा हक है।”
कुलदीप सिंह धालीवाल ने कहा, “पंजाब बिना सबूतों के राजनीतिक आरोप नहीं चाहता। पंजाब तथ्य, दस्तावेज और हिसाब-किताब चाहता है। अगर बिक्रम सिंह मजीठिया दूसरों से जवाब चाहते हैं, तो उन्हें पहले अपने रिकॉर्ड के बारे में उठाए जा रहे सवालों के जवाब देने के लिए तैयार रहना चाहिए।”
Politics
1984 के सिख विरोधी दंगों के दोषी सज्जन कुमार को श्रद्धांजलि देने वाले भाजपा नेताओं के खिलाफ आम आदमी पार्टी ने पूरे पंजाब में किया विरोध प्रदर्शन
आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब ने मंगलवार को लुधियाना, जालंधर, अमृतसर और बठिंडा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के तीन सांसद रामवीर बिधूड़ी, योगेंद्र चंदोलिया और कमलजीत सेहरावत के 1984 के सिख विरोधी दंगों के दोषी सज्जन कुमार की याद में श्रद्धांजलि सभा में शामिल होने के खिलाफ बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। भाजपा सांसदों के शामिल होने की कड़ी निंदा करते हुए आप नेताओं ने कहा कि 1984 का नरसंहार सिख परिवारों के लिए एक ऐसा ज़ख्म है जो भरा नहीं है और सज्जन कुमार को श्रद्धांजलि देने से सिख समुदाय की भावनाओं को गहरा ठेस पहुंची है।
आप ने मांग की कि भाजपा अपने तीनों सांसदों के खिलाफ कार्रवाई करे। पार्टी ने सवाल किया कि जिम्मेदार सरकारी पदों पर बैठे चुने हुए प्रतिनिधि 1984 के सिख विरोधी दंगों के दोषी व्यक्ति के घर जाकर उसे श्रद्धांजलि कैसे दे सकते हैं?
अमृतसर में आप कार्यकर्ताओं ने राज्यसभा सांसद तरुण चुघ के घर के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और उनके घर को घेरने की कोशिश की। पुलिस ने भारी बैरिकेड्स और सुरक्षा बल तैनात किए थे, ताकि प्रदर्शन करने वाले घर तक न पहुंच सकें।
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए आप विधायक जीवन जोत कौर ने कहा, “1984 का नरसंहार सिख परिवारों के लिए एक गहरा और कभी न भरने वाला घाव है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ने बार-बार पंजाब और सिख समुदाय के हितों के खिलाफ काम किया है। भाजपा नेता ऐसे व्यक्ति को कैसे सम्मान दे सकते हैं जिसका नाम 1984 के नरसंहार से जुड़ा हो?”
जीवन जोत कौर ने आगे कहा, “सज्जन कुमार की याद में भाजपा नेताओं की मौजूदगी पीड़ितों के परिवारों के लिए बहुत दुखदायी है जिन परिवारों ने अपनों को खोया है, वे आज भी उस दुखद घटना के दर्द से पीड़ित हैं और उनकी भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए।”
जालंधर में आप विधायक बलकार सिंह ने कहा, “1984 के घल्लूघारा नरसंहार ने सिख समुदाय के मन में बहुत दर्दनाक यादें छोड़ी हैं। बेगुनाह सिखों की बेरहमी से हत्या कर दी गई और उनके परिवार दशकों से पीड़ित हैं। ऐसे समय में, सज्जन कुमार की याद में भाजपा के सीनियर नेताओं की मौजूदगी दिखाती है कि पीड़ितों को न्याय दिलाने के मुद्दे पर भाजपा का क्या स्टैंड है।”
आप विधायक ने कहा, “भाजपा और शिरोमणि अकाली दल को पंजाब के ज़ख्मों पर राजनीति करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के परिवारों के दर्द का इस्तेमाल राजनीतिक फ़ायदे के लिए नहीं किया जा सकता।”
लुधियाना में आप नेताओं, विधायक, पार्षदों, चेयरमैन, डायरेक्टरों और पार्टी के पदाधिकारियों ने सज्जन कुमार के अंतिम संस्कार/श्रद्धांजलि समारोह में भाजपा के तीन सांसदs के शामिल होने का विरोध किया।
लुधियाना ईस्ट से विधायक दलजीत सिंह ग्रेवाल ने कहा, “पंजाब गुरुओं, संतों और शहीदों की धरती है। पंजाबी 1984 के नरसंहार से प्रभावित सिख परिवारों के दर्द को चोट पहुंचाने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं करेंगे।”
दलजीत सिंह ग्रेवाल ने कहा, “सज्जन कुमार को श्रद्धांजलि देने में भाजपा सांसदों के शामिल होने से पीड़ित परिवारों का दिल और टूट गया है। भाजपा और कांग्रेस ने पंजाब के खिलाफ राजनीतिक रूप से हाथ मिला लिया है, लेकिन पंजाब के लोग ऐसी राजनीति कभी स्वीकार नहीं करेंगे।”
बठिंडा में, आप कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया और भाजपा के खिलाफ जोरदार नारे लगाए, पार्टी पर 1984 के नरसंहार से जुड़े लोगों के करीब होने का आरोप लगाया।
आप कार्यकर्ताओं ने मांग की कि भाजपा रामवीर बिधूड़ी, योगेंद्र चंदोलिया और कमलजीत सेहरावत के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे और सिख समुदाय की भावनाओं का सम्मान करे।
आप नेताओं ने कहा, “1984 के सिख विरोधी दंगे हजारों परिवारों के लिए अब भी ऐसे घाव हैं जो भरे नहीं हैं।” “आम आदमी पार्टी पीड़ितों और उनके परिवारों के लिए न्याय और सम्मान के लिए अपनी आवाज़ उठाती रहेगी। उनके दर्द और भावनाओं को नज़रअंदाज़ करने की किसी भी कोशिश का पूरी तरह से विरोध किया जाएगा।”
आप पंजाब के नेताओं ने दोहराया कि पार्टी 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों और उनके परिवारों के साथ चट्टान की तरह खड़ी रहेगी और न्याय, दया और जवाबदेही के लिए लड़ती रहेगी।
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