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मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान द्वारा किसानों के लिए ऐतिहासिक ऐलान, किसान क्रेडिट कार्ड की कर्ज सीमा में वृद्धि

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पिछले कुछ दशकों के दौरान पंजाब में हुए कृषि सुधारों में सबसे बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज किसान क्रेडिट कार्ड (के.सी.सी.) प्रणाली में ऐतिहासिक सुधार किया है। इसके तहत 26 साल पुराने उस ढांचे को बदल दिया गया है जिसने किसानों को लंबे समय से अपर्याप्त संस्थागत कर्ज पर निर्भर रहने और साहूकारों के रहमो-करम पर छोड़ दिया था।

यह नई नीति फसल की वास्तविक लागत के अनुसार फसल-वार कर्ज की सीमा (क्रेडिट लिमिट) को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाती है, ब्याज के बोझ को कम करती है, अधिक मुनाफे वाली फसलों और सहायक क्षेत्रों के लिए कर्ज की पात्रता का विस्तार करती है। यहां तक कि पराली प्रबंधन के लिए विशेष वित्तीय सहायता शुरू करती है और किसानों को ए.टी.एम. और यू.पी.आई. जैसे आधुनिक डिजिटल प्लेटफार्मों के माध्यम से धन का उपयोग करने में सक्षम बनाती है।

इन सुधारों को कृषि को अधिक लाभदायक और टिकाऊ बनाने की दिशा में अहम फैसला बताते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि नया के.सी.सी. ढांचा किसानों के हाथों में अधिक पैसा सीधे पहुंचाएगा, गेहूं-धान के चक्र से बाहर फसल विविधता को तेज करेगा, सहकारी कर्ज संस्थाओं को मजबूत करेगा और किसानों को कर्ज के जाल से बाहर निकालने में मदद करेगा। इन सुधारों से पंजाब भर के 13 लाख से अधिक किसानों को लाभ होने की उम्मीद है, जिसमें कई फसलों के लिए कर्ज सहायता में भारी वृद्धि होगी। इसमें बागवानी फसलें भी शामिल हैं, जहां पहले मिलने वाली 32,000 रुपए प्रति एकड़ की एकसमान सीमा के मुकाबले अब कर्ज 1.57 लाख रुपए प्रति एकड़ तक जा सकता है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “यह सिर्फ कोई नीतिगत बदलाव नहीं है, बल्कि पंजाब के किसानों की आर्थिक आजादी के उद्देश्य से लिया गया ऐतिहासिक फैसला है। हमने लाल फीताशाही को समाप्त कर दिया है, यह सुनिश्चित किया है कि अधिक पैसा सीधे किसानों के बैंक खातों में पहुंचे और प्राथमिक कृषि सहकारी सभाओं (पी.ए.सी.एस.) और जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों के लिए प्रभावी ढंग से किसानों की सेवा करना आसान बना दिया है। हमने अपने किसानों को 21वीं सदी के डिजिटल साधनों से लैस किया है और वे अब पंजाब की तरक्की की नई कहानी लिखेंगे।”

इस सुधार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सूबा सरकार ने वर्ष 2000 से चले आ रहे पुराने के.सी.सी. सिस्टम को बदलकर 26 सालों की स्थिरता को तोड़ा है। उन्होंने कहा, “दो दशकों से अधिक समय से पंजाब के किसानों को हाथों-हाथ कागजी कार्रवाई, चेक बुक और पासबुकों के आस-पास घूमने वाले पुराने और जटिल के.सी.सी. ढांचे पर निर्भर रहने के लिए मजबूर किया गया था। पिछली सरकारों ने इस स्थिति को सुधारने के बजाय ज्यों-का-त्यों रहने दिया। हमारी सरकार ने उस 26 साल पुराने सिस्टम को बदलकर पारदर्शी, डिजिटल और बेहतरीन कर्ज व्यवस्था लागू की है, जो कि आधुनिक कृषि की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि संशोधित नीति से किसानों को मिलने वाली कर्ज सीमा में भारी वृद्धि होगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बैंक कर्ज फसल की वास्तविक लागत को दर्शाता हो। उन्होंने कहा, “हमने गेहूं के लिए कर्ज सीमा 24,380 रुपए प्रति एकड़ से बढ़ाकर 30,000 रुपए प्रति एकड़ कर दी है। इसी तरह धान के लिए 25,440 रुपए प्रति एकड़ से बढ़ाकर 39,000 रुपए प्रति एकड़ कर दिया गया है। इससे किसानों को वह वास्तविक वित्तीय सहायता मिलेगी जिसके वे हकदार हैं।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि के.सी.सी. के नए ढांचे में फसलों के अवशेष प्रबंधन को शामिल करने वाला पहला सूबा बनकर पंजाब, देश भर में अग्रणी सूबे के रूप में उभरा है। उन्होंने कहा, “धान की संशोधित 39,000 रुपए प्रति एकड़ की सीमा में से 2,000 रुपए प्रति एकड़ विशेष रूप से फसली अवशेष प्रबंधन के लिए रखे गए हैं। देश में पहली बार किसानों को पराली प्रबंधन के लिए विशेष सहायता के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने के लिए वित्तीय रूप से मजबूत किया जा रहा है।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि सरकार द्वारा गन्ना उत्पादकों की सहायता के लिए भी शानदार कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा, “लगाए गए गन्ने के लिए कर्ज सीमा को 44,000 रुपए प्रति एकड़ से बढ़ाकर 1 लाख रुपए प्रति एकड़ कर दिया गया है। रेटून फसलों (फिर से उगने वाली) के लिए पहली बार 65,000 रुपए प्रति एकड़ की कर्ज व्यवस्था की गई है। पहले किसानों को कर्ज लेने के लिए अक्सर साहूकारों और एन.बी.एफ.सी. पर निर्भर रहना पड़ता था जो बहुत अधिक ब्याज दरें वसूलते थे क्योंकि संस्थागत कर्ज उनकी वास्तविक जरूरतों को पूरा नहीं करता था। हमारा उद्देश्य किसानों को किफायती कर्ज के माध्यम से पूरी तरह से सहकारी कर्ज नेटवर्क में शामिल करना है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि संशोधित के.सी.सी. ढांचे से फसल विविधता को भी बढ़ावा मिलेगा और सहायक क्षेत्रों को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा, “हम किसानों को उच्च-मूल्य वाली फसलों की ओर मोड़ने के लिए सक्रिय रूप से कदम उठा रहे हैं। पहली बार, पॉपलर और बांस जैसी कृषि-वानिकी फसलों के साथ-साथ जामुन जैसी कृषि-बागवानी फसलों को कर्ज प्रणाली के अधीन लाया गया है। हमने लेमनग्रास के लिए भी कर्ज सीमा लाई है, जिससे शिवालिक पहाड़ियों के किसानों को लाभ होगा।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि सरकार ने बागवानी और सब्जियों की खेती के लिए दी जा रही सहायता में काफी वृद्धि की है। उन्होंने कहा, “पहले, सभी फल और सब्जियों के लिए एकसमान कर्ज सीमा निर्धारित की गई थी। अब, फसल के अनुसार कर्ज सहायता शुरू की गई है, जिसकी सीमा प्रति एकड़ 1.57 लाख रुपए तक है। लहसुन उत्पादक अब प्रति एकड़ 1,57,372 रुपए, हाड़हू प्याज उत्पादक प्रति एकड़ 92,686 रुपए और हाइब्रिड टमाटर उत्पादक प्रति एकड़ 80,981 रुपए का कर्ज प्राप्त कर सकते हैं।”

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि कई उभरते और प्रगतिशील कृषि क्षेत्रों को सहायता दी गई है। उन्होंने कहा, “पहली बार, ड्रैगन फ्रूट और चिया सीड/क्विनोआ जैसी फसलों को कर्ज के दायरे में लाया गया है। नीली क्रांति को मजबूत करने के लिए मत्स्य पालन के लिए कर्ज सीमा 2.5 लाख रुपए प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर 3 लाख रुपए प्रति हेक्टेयर कर दी गई है। सफेद झींगा उत्पादकों को अब प्रति हेक्टेयर 5.5 लाख रुपए की सहायता मिलेगी, जो पहले 4.5 लाख रुपए प्रति हेक्टेयर थी।”

नई के.सी.सी. नीति के तहत उपलब्ध लाभों पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि किसानों को अब सूबा स्तरीय तकनीकी समिति द्वारा वार्षिक समीक्षाओं के साथ छह साल की के.सी.सी. मंजूरी दी जाएगी। उन्होंने कहा, “हमने पुरानी बाधाएं हटा दी हैं। बी-कंपोनेंट को अब 40 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत तक किया जा सकता है, जिससे किसान बीज, खाद, पशु चारा, कस्टम हायरिंग, पराली प्रबंधन, जमीन समतल करने और यहां तक कि ड्रोन हायरिंग के लिए भी कर्ज प्राप्त कर सकेंगे। पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने और बिचौलियों को समाप्त करने के लिए, ए-कंपोनेंट अब सीधे किसानों के बचत खातों में जमा किया जाएगा।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह नीति किसानों पर ब्याज का बोझ भी कम करेगी और आसान कर्ज सुनिश्चित करेगी। उन्होंने कहा, “किसानों पर लागू ब्याज दरें कम होंगी और सभी लाभ के.आर.पी. पोर्टल से जुड़े सुचारू के.सी.सी. खाते के माध्यम से ट्रांसफर किए जाएंगे। वास्तविक काश्त लागत के अनुसार कर्ज सीमाएं निर्धारित करके हम किसानों को साहूकारों के कर्ज के जाल से मुक्त कर रहे हैं।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि नया ढांचा किसानों के लिए डिजिटल सुविधा के नए युग की शुरुआत करेगा। उन्होंने कहा, “हम धीरे-धीरे मैनुअल चेक-आधारित प्रक्रियाओं से दूर जा रहे हैं। किसान अब ए.टी.एम., यू.पी.आई. और सी.बी.एस.-आधारित डिजिटल प्रणालियों के माध्यम से धन निकाल सकेंगे और इसका प्रबंधन कर सकेंगे। जो लोग कर्ज के भुगतान के लिए ऑनलाइन और डिजिटल तरीकों का चुनाव करते हैं, उन्हें बैंकों से विशेष छूट मिलेगी।”

इस पहल को किसान समुदाय की चिरकालिक मांग बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सूबा सरकार की किसान-हितैषी नीतियों ने किसानों की समग्र स्थिति को सुधारने में मदद की है जिससे कृषि अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा, “इन सुधारों से पंजाब भर के 13 लाख से अधिक किसानों को लाभ होगा और फसल विविधता और नवीनता को बढ़ावा देकर कृषि को पारंपरिक गेहूं-धान के चक्र से बाहर निकालने में मदद मिलेगी।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने सहकारी बैंकिंग क्षेत्र को मजबूत करने और किसानों के हितों की रक्षा के लिए सूबा सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा, “किसी भी बैंक, चाहे वह सरकारी हो या निजी, को किसानों की जमीन जब्त करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। हमारी सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है कि किसान इन सुधारों का अधिकतम लाभ उठाएं।”

मुख्यमंत्री ने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की कृषि प्रति नीतियों की आलोचना करते हुए कहा, “पिछले 12 सालों से मोदी सरकार लगातार किसानों के हितों के विरुद्ध काम कर रही है। पंजाब के 750 किसानों ने काले कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन के दौरान अपनी जानें गंवा दीं। आज, कॉरपोरेट हित किसानों के अधिकारों के लिए खतरा बने हुए हैं और कृषि क्षेत्र को कमजोर करने के लिए हर संभव कोशिश की जा रही है।”

‘आप’ सरकार द्वारा 26 सालों में किया गया सबसे बड़ा के.सी.सी. सुधार

भगवंत मान सरकार द्वारा पंजाब की 26 साल पुरानी किसान क्रेडिट कार्ड ढांचे को आधुनिक, डिजिटल और किसान-आधारित क्रेडिट प्रणाली में बदल दिया गया है। फसल के अनुसार कर्ज सीमा में महत्वपूर्ण वृद्धि करके, वास्तविक काश्त लागत के आधार पर कर्ज निर्धारित करके और किसानों के बैंक खातों में सीधे ट्रांसफर सुनिश्चित करके पंजाब सरकार का उद्देश्य किसानों की साहूकारों पर निर्भरता कम करना और किफायती संस्थागत कर्ज प्रदान करना है। सुधारों में डिजिटल बैंकिंग सुविधाएं जैसे ए.टी.एम. और यू.पी.आई. पहुंच, कम ब्याज दरें और छह साल की के.सी.सी. मंजूरी शामिल है, जिससे किसानों के लिए कर्ज अधिक सुलभ और सुविधाजनक हो जाता है।

संशोधित नीति ‘आप’ सरकार की फसल विविधता और टिकाऊ कृषि की ओर दी जा रही प्राथमिकता को भी दर्शाती है। पहली बार, फसलों के अवशेष प्रबंधन, कृषि-वानिकी, बागवानी, मत्स्य पालन और कई उच्च-मूल्य वाली फसलों, जिनमें ड्रैगन फ्रूट, लेमनग्रास और बांस शामिल हैं, को वित्तीय सहायता के दायरे में लाया गया है। पारंपरिक गेहूं-धान की फसलों के अलावा अन्य फसलों को कर्ज के दायरे में शामिल करके भगवंत मान सरकार द्वारा पंजाब की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हुए किसानों के लिए आय के नए अवसर पैदा किए जा रहे हैं।

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तरनतारन में बड़ी कामयाबी, BSF और पंजाब पुलिस ने हथियारों की बड़ी खेप बरामद की

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पंजाब में सीमा पार से हथियारों की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पंजाब पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। तरनतारन पुलिस ने सीमा सुरक्षा बल (BSF) के साथ संयुक्त अभियान चलाकर हथियारों की एक बड़ी खेप बरामद की है।

इस कार्रवाई के दौरान एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने उसके कब्जे से एक MP-09 राइफल और सात आधुनिक पिस्तौल बरामद की हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ये हथियार कथित तौर पर पाकिस्तान में बैठे राष्ट्रविरोधी तत्वों द्वारा पंजाब में सक्रिय गैंगस्टर नेटवर्क की मदद से भेजे गए थे।

जांच एजेंसियों के अनुसार, इन हथियारों का इस्तेमाल राज्य में टारगेट किलिंग की घटनाओं को अंजाम देने, दहशत का माहौल बनाने और पंजाब की कानून-व्यवस्था तथा सांप्रदायिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाने की साजिश के तहत किया जाना था।

पुलिस का कहना है कि यह नेटवर्क लंबे समय से सीमा पार बैठे हैंडलरों के निर्देश पर काम कर रहा था। गिरफ्तार आरोपी से लगातार पूछताछ की जा रही है, ताकि पूरे मॉड्यूल, उसके अन्य सदस्यों और इस तस्करी नेटवर्क से जुड़े सभी लोगों की पहचान की जा सके।

पंजाब पुलिस और बीएसएफ ने स्पष्ट किया है कि सीमा पार से होने वाली हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ संयुक्त अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। साथ ही इस मामले से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश और पूरे नेटवर्क की गहन जांच की जा रही है।

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अमन अरोड़ा ने शाहकोट हलके में नौकरियों के मामले में कांग्रेसी विधायक लाडी को घेरा

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पंजाब विधान सभा में विपक्ष को घेरते हुए पंजाब के रोजगार सृजन, कौशल विकास और प्रशिक्षण तथा उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री श्री अमन अरोड़ा ने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले साढ़े चार सालों में 68000 से अधिक सरकारी नौकरियां प्रदान की हैं और 1,83,837 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करने के साथ-साथ निजी क्षेत्र में 6,36,636 नौकरियों के अवसर पैदा किए हैं।

आज सदन में विधायक स. कुलदीप सिंह धालीवाल द्वारा रोजगार के अवसरों के बारे में पेश किए गए प्रस्ताव पर चर्चा का समापन करते हुए श्री अमन अरोड़ा ने सदन को बताया कि इस बड़े निवेश प्रवाह ने सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से निजी क्षेत्र में 6.36 लाख से अधिक नौकरियों के अवसर पैदा किए हैं। उन्होंने जापान की प्रमुख स्टील कंपनी आइची स्टील का उदाहरण दिया, जिसने मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली राज्य सरकार की सुविधाओं और कारोबार को आसान बनाने वाली नीतियों से प्रभावित होकर अपने नियोजित निवेश को 500 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1100 करोड़ रुपये कर दिया है।

कांग्रेस के विधायक हरदेव सिंह लाडी शेरोवालिया द्वारा उनके शाहकोट विधानसभा हलके में किसी भी व्यक्ति को सरकारी नौकरी न मिलने के आरोप पर श्री अमन अरोड़ा ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें अपने शाहकोट हलके में सभा रखने की चुनौती दी। उन्होंने कहा, ”मैं आऊंगा और हम लोगों से पूछेंगे, क्या उन्हें नौकरियां मिली हैं। अगर मैं गलत हुआ, तो मैं मंत्री पद और विधायक के तौर पर इस्तीफा दे दूंगा। अगर मैं सही हुआ तो लाडी को इस्तीफा देना होगा।” कांग्रेसी विधायक लाडी ने यह चुनौती स्वीकार नहीं की और चर्चा छोड़कर बैठ गए।

उन्होंने जोर देकर कहा कि पंजाब सरकार ने सभी सरकारी नौकरियां बिना किसी रिश्वत या सिफारिश के केवल योग्यता के आधार पर दी हैं।

श्री अमन अरोड़ा ने कौशल विकास के लिए राज्य सरकार के रिकॉर्ड प्रयासों का हवाला देते हुए बताया कि राज्य के बजट में 75 सालों में पहली बार कौशल विकास मिशन के लिए 25 करोड़ रुपये रखे गए हैं, जो पिछले साल 10 करोड़ रुपये थे। उन्होंने दावा किया कि 22 लाख से अधिक नौजवानों को रोजगार में प्लेसमेंट कैंपों और हैंडहोल्डिंग अभ्यासों के माध्यम से सुविधा दी गई है। उन्होंने बताया कि सुनाम में हाल ही में आयोजित एक मेगा रोजगार मेले में, 61 कंपनियों ने भाग लिया और लगभग 700 नौजवानों को मौके पर ही नियुक्ति पत्र जारी किए।

रोजगार सृजन मंत्री ने आगे बताया कि राज्य सरकार द्वारा 100 करोड़ रुपये की लागत से संगरूर जिले में विश्व स्तरीय संत अतर सिंह महाराज आर्म्ड फोर्सेज प्रेपरेटरी इंस्टीट्यूट स्थापित किया जा रहा है। यह विश्व स्तर पर अपनी तरह का पहला संस्थान है, जहां सशस्त्र सेनाओं में अधिकारी स्तर के पदों के लिए वार्षिक 500 नौजवानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।

केंद्र सरकार के आंकड़ों का हवाला देते हुए श्री अमन अरोड़ा ने बताया कि 15-29 साल आयु वर्ग में पंजाब की बेरोजगारी दर वर्ष 2022 की 19.1 प्रतिशत से घटकर 2025 में 17 प्रतिशत हो गई है। मंत्री ने पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वेक्षण का हवाला देते हुए बताया कि अब पंजाब बेहतर रोजगार मैट्रिक्स वाले राज्यों में शामिल है।

वैश्विक स्तर का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि आजादी के समय भारत की जीडीपी चीन से थोड़ी अधिक थी। उन्होंने कहा, ”चीन ने अपने प्रत्येक व्यक्ति को काम पर लगाया और दुनिया की सबसे बड़ी फैक्ट्री बनकर उभरा। चीन निकट भविष्य में अमेरिका को पछाड़ सकता है। हमारे पास वही क्षमता है, लेकिन सही वातावरण की कमी थी। पर अब हम इसे ठीक कर रहे हैं।”

कैबिनेट मंत्री ने जोर देकर कहा कि दुनिया की कोई भी सरकार प्रत्येक नागरिक को नौकरी देने की गारंटी नहीं दे सकती। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सरकार का असल कर्तव्य उद्योग और रोजगार के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना होता है। उन्होंने कहा, ”हम यहां केवल आंकड़े पेश करने के लिए नहीं हैं। हम ऐसा माहौल बना रहे हैं, जहां हर नौजवान अपने पैरों पर खड़ा हो सके।”

विपक्ष द्वारा नौकरियों के बारे में व्हाइट पेपर जारी करने की मांग पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, ‘सबसे अच्छा, सस्ता और टिकाऊ व्हाइट पेपर लोगों से सीधे तौर पर पूछना है। आरटीआई दायर करो या लोगों के साथ मीटिंग करो। लोग खुद बताने देंगे कि उन्हें नौकरियां मिली हैं या नहीं।”

श्री अमन अरोड़ा ने पिछली कांग्रेस सरकार के ‘हर घर नौकरी’ वादे पर कटाक्ष करते हुए इसे पंजाब के नौजवानों के साथ ‘सबसे बड़ा धोखा’ बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि ‘आप’ सरकार ने बिना किसी रिश्वत के पारदर्शी तरीके से 68000 से अधिक सरकारी नौकरियां प्रदान की हैं। उन्होंने दोहराया कि सरकार का एकमात्र उद्देश्य पंजाब को ‘कारोबार करने में आसानी’ के लिए एक मॉडल राज्य बनाना और सम्मानजनक, कौशल-आधारित रोजगार पैदा करना है।

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सियाम ने भी माना, ई-20 में ज्यादा क्लोराइड और नमी के कारण खराब हो रही गाड़ियां- केजरीवाल

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आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने ई-20 को लेकर सियाम की सौंपी गई रिपोर्ट को वापस कराने पर केंद्र की मोदी सरकार को आड़े हाथ लिया है। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि सियाम (सोसायटी ऑफ इंडिया ऑटोमोबाइल मैनुफैक्चरर्स) की एक रिपोर्ट आई है, जिसमें साफ़ लिखा है कि ई-20 में बहुत ज्यादा क्लोराइड और नमी है, जिससे आपकी गाड़ियां ख़राब हो रही हैं। मोदी सरकार ने सियाम पर दबाव डालकर वो रिपोर्ट वापस करवा दी। क्यों? जब विज्ञान और इंजीनियरिंग कह रहे हैं कि ई-20 ख़राब है, तो मोदी सरकार इसे देश पर जबरन क्यों थोप रही है?

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि ई-20 को लेकर सियाम की यह रिपोर्ट चौंकाने वाली है। सियाम ने रिसर्च की और ऑटोमोबाइल के सभी मैन्युफैक्चरर्स ने मिलकर यह पाया कि क्लोराइड और मॉइस्चर ज्यादा होने की वजह से ई-20 गाड़ियों को खराब कर रहा है। सियाम ने 28 जुलाई को मोदी सरकार को यह रिपोर्ट सौंपी थी। 4 अगस्त तक केंद्र सरकार ने सियाम पर जबरदस्ती करके वह रिपोर्ट वापस करा दी। रिपोर्ट वापस करने के बाद सियाम की तरफ से कहा गया कि शायद उनकी रिपोर्ट में कुछ गड़बड़ी है और कुछ तथ्यों को दोबारा चेक करने की जरूरत है। एक तरह से मोदी सरकार जबरदस्ती करके पूरे देश पर ई-20 थोप रही है, लेकिन क्यों?

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