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Punjab न कभी झुका और न कभी झुकेगा- मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने प्रधानमंत्री मोदी को स्पष्ट संदेश दिया

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज आम आदमी पार्टी के नेताओं पर इनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ईडी) द्वारा बार-बार छापेमारी के लिए भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर तीखा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि केंद्रीय एजेंसियों के जरिए डराने-धमकाने और बदले की राजनीति के हथकंडों के आगे पंजाब कभी नहीं झुकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा के आवास पर एक साल में तीसरी बार और एक महीने में दूसरी बार ईडी की रेड के दौरान कुछ भी हाथ नहीं लगा। मुख्यमंत्री ने सवाल किया कि ऐसी छापेमारी सिर्फ उन राज्यों में क्यों की जा रही है जहां भाजपा सत्ता में नहीं है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि मोदी सरकार का असली इरादा काला धन की वसूली नहीं, बल्कि विपक्षी नेताओं पर दबाव डालकर उन्हें भाजपा में शामिल करवाना है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जहां जांच एजेंसियों की कार्रवाई का सामना कर रहे नेता बाद में भाजपा में शामिल हो गए और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त कर लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरुओं और शहीदों की धरती वाला राज्य पंजाब, औरंगजेब के जुल्मों के आगे भी नहीं झुका। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि पंजाब कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगे भी नहीं झुकेगा और यह भी कहा कि भाजपा-ईडी गठजोड़ का पतन पंजाब से ही शुरू होगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “इनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ईडी), केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), इनकम टैक्स विभाग और यहां तक कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाएं अब निष्पक्ष रूप से काम नहीं कर रही हैं, बल्कि गैर-भाजपा शासित राज्यों, खासकर पंजाब को राजनीतिक उद्देश्यों के लिए निशाना बनाया जा रहा है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा ने इन संस्थाओं को नेताओं, कारोबारियों और जनप्रतिनिधियों को धमकाने के लिए राजनीतिक दमन के साधनों में बदल दिया है। उन्होंने कहा, “अपनी ड्यूटी निष्पक्षता से निभाने की बजाय इन संस्थाओं का इस्तेमाल अब राजनीतिक हिसाब-किताब तय करने और लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकारों को अस्थिर करने के लिए किया जा रहा है।” मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा ने पूरे देश में यही तरीका अपनाया है जहां छापेमारी भ्रष्टाचार उजागर करने या काला धन वापस लाने के लिए नहीं, बल्कि लोगों पर राजनीतिक दबाव बनाने के लिए की जाती है। उन्होंने कहा, “भाजपा का संदेश साफ है- या तो भाजपा में शामिल हो जाओ या छापेमारी और जांच के जरिए परेशानी का सामना करो।”

राज्यसभा सदस्य अशोक मित्तल के हालिया मामले का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि उनके आवास, यूनिवर्सिटी और व्यावसायिक संस्थानों पर दो दिनों तक छापेमारी की गई। उन्होंने सवाल किया, “जिस पल वे भाजपा में शामिल हुए, छापेमारी बंद हो गई और इसके बजाय उन्हें केंद्र से सुरक्षा प्रदान की गई। क्या यह एजेंसियों की राजनीतिक दुरुपयोग की ज्वलंत मिसाल नहीं है?”

मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि ऐसी चालें पंजाब में कभी सफल नहीं होंगी। उन्होंने कहा, “हम अपनी शुरुआत से ही विरोधी हालातों का सामना कर रहे हैं। पंजाब ने कभी धमकियों के आगे नहीं झुका है और न कभी झुकेगा।” कैबिनेट मंत्री और कारोबारी संजीव अरोड़ा के आवास पर ईडी की कार्रवाई का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बार-बार छापों से कुछ नहीं मिला। उन्होंने कहा, “यह राजनीतिक रूप से प्रेरित छापेमारी सिर्फ डर पैदा करने, दबाव बनाने और राजनीतिक विरोधियों की बाजू मरोड़ने के लिए है, लेकिन पंजाब ऐसी चालों के आगे नहीं झुकेगा।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चेतावनी देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब गुरुओं, संतों-महापुरुषों और महान शहीदों की पवित्र धरती है। यह धरती औरंगजेब के जाबर के आगे नहीं झुकी और न ही मोदी के आगे झुकेगी।”

उन्होंने आगे कहा कि ईडी और भाजपा के बीच “अनैतिक गठजोड़” का अंत पंजाब से ही शुरू होगा। मुख्यमंत्री ने आगे सवाल किया कि ईडी के छापे मुख्य रूप से विपक्षी सरकार वाले राज्यों में ही क्यों किए जाते हैं जबकि भाजपा शासित राज्य इससे बाहर रहते हैं। उन्होंने बताया कि जब से ‘आप’ सरकार ने बेअदबी विरोधी सख्त कानून पास किया है, भाजपा भड़क गई है और राज्य की नेतृत्व को डराने की अपनी कोशिशें तेज कर दी हैं। उन्होंने कहा, “एक साल में तीसरी बार संजीव अरोड़ा के घर छापेमारी की गई है। पहले भी कुछ नहीं मिला था और अब भी कुछ नहीं मिलेगा।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाबियों ने मोदी सरकार को तीन काले कृषि कानून रद्द करने के लिए मजबूर किया था और अब केंद्र पंजाबियों को तंग-परेशान, बदनाम और निशाना बनाकर बदला लेने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा, “इन ईडी छापों का उद्देश्य वसूली नहीं, बल्कि नेताओं को भाजपा में शामिल करने के लिए राजनीतिक दबाव है।” मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि पंजाब के पास जुल्म का विरोध करने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने की शानदार विरासत है। उन्होंने आगे कहा कि दबाव की राजनीति कहीं और काम कर सकती है, लेकिन पंजाब कभी धमकियों या जबरदस्ती के आगे नहीं झुकेगा। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब ने जालिम ताकतों को हमेशा मुंह तोड़ जवाब दिया है और यहां के लोग जानते हैं कि चुनौतीपूर्ण हालात में भी अपने अधिकारों और मान-सम्मान की रक्षा कैसे करनी है।

उन्होंने आगे कहा कि केंद्र ने चंडीगढ़, भाखड़ा, नदियों के पानी और पंजाब यूनिवर्सिटी सहित महत्वपूर्ण मुद्दों पर पंजाब के साथ लगातार भेदभाव किया है। उन्होंने कहा, “केंद्र ने पंजाब का आरडीएफ फंड सहित हजारों करोड़ रुपए के फंड रोके हुए हैं ताकि पंजाब के विकास की रफ्तार को प्रभावित किया जा सके।” मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा और सीमाओं की सुरक्षा में पंजाब के बेमिसाल योगदान के बावजूद राज्य को राजनीतिक रूप से निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, “पंजाब राष्ट्रीय पूल में गेहूं और चावल की बड़ी मात्रा में योगदान देकर देश का पेट भरता है, जबकि पंजाबी युवा बेमिसाल हिम्मत और कुर्बानी के साथ देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं।”

फूट डालो राजनीति का सख्त विरोध करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब का सामाजिक ताना-बाना साम्प्रदायिक सद्भावना, भाईचारे की साझ और आपसी सम्मान पर टिका हुआ है। उन्होंने कहा, “पंजाब की उपजाऊ मिट्टी में नफरत के अलावा कुछ भी नहीं उग सकता। यहां राजनीतिक लाभ के लिए हिंदू और सिखों को बांटने की कोशिशें कभी सफल नहीं होंगी।” बेअदबी विरोधी कानून पर दृढ़ स्टैंड लेते हुए मुख्यमंत्री ने दोहराया कि पंजाब सरकार श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी और सभी धार्मिक ग्रंथों की पवित्रता व सम्मान की रक्षा के लिए पूरी तरह वचनबद्ध है।

उन्होंने कहा कि हाल ही में लागू किया गया बेअदबी विरोधी कानून केवल धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और शांति भंग करने की कोशिश करने वालों के लिए सख्त सजा सुनिश्चित करने के लिए लाया गया था। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि बेअदबी विरोधी कानून को दुनिया भर की संगतों से भारी समर्थन मिला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सिर्फ “एक खास परिवार” बेअदबी की पिछली घटनाओं में अपनी संलिप्तता के कारण इस कानून का विरोध कर रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा, “जो लोग दावा कर रहे हैं कि पंथ ने इस कानून को रद्द कर दिया है, उन्हें स्पष्ट करना चाहिए कि लाखों लोग इसका समर्थन क्यों कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि कुछ लोग संकीर्ण राजनीतिक लाभ के लिए आम लोगों को गुमराह कर रहे हैं और कानून के आस पास अनावश्यक उलझन पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।

अपनी सरकार की स्थिति स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि बेअदबी विरोधी कानून पहले ही संवैधानिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद लागू किया जा चुका है। उन्होंने कहा, “राज्यपाल ने एक्ट को मंजूरी दे दी है। इस कानून को वापस लेने का सवाल ही पैदा नहीं होता।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह कानून लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग के बाद बनाया गया था और श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की पवित्रता की रक्षा के लिए कोई समझौता नहीं हो सकता। मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि सख्त बेअदबी विरोधी कानून की मांग करते हुए लगभग डेढ़ साल से विरोध प्रदर्शन और धरने जारी थे।

उन्होंने कहा कि आज कानून का विरोध करने वाले कई सिख बुद्धिजीवियों और विद्वानों ने पहले भी बेअदबी की घटनाओं के खिलाफ सख्त कानून की मांग की थी  उन्होंने यह भी याद दिलाया कि जुलाई 2007 में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने खुद एक प्रस्ताव पास करके सरकार को श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की रक्षा और सम्मान के लिए कानून बनाने का अधिकार दिया था। विरोधी पक्ष के बदलते स्टैंड पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने पूछा कि जिन लोगों ने पहले विधायी हस्तक्षेप का समर्थन किया था, वे अब यह कैसे दावा कर रहे हैं कि सरकार ऐसा कानून नहीं बना सकती।उन्होंने कहा कि ऐसे नेता ‘बराबर अथॉरिटी’ चलाने की कोशिश कर रहे हैं और संवेदनशील धार्मिक मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहे हैं।

*दबाव के तहत बेअदबी विरोधी कानून रद्द नहीं करेगा पंजाब; “शुक्राना यात्रा” को बड़े स्तर पर मिले हुंकारे से ध्यान हटाने की कोशिशें की जा रही हैं: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान*बेअदबी विरोधी कानून के खिलाफ मीटिंगों और विरोध प्रदर्शनों की धमकी देने वाले बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हर लोकतांत्रिक समूह को मीटिंग करने का अधिकार है, लेकिन उन्होंने दृढ़ता से कहा कि किसी भी दबाव के तहत कानून को रद्द नहीं किया जाएगा।

अपनी चल रही “शुक्राना यात्रा” पर सवालों के जवाब में, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आरोप लगाया कि ईडी के छापे, नोटिस और विवाद जानबूझकर यात्रा के साथ-साथ किए जा रहे हैं ताकि मीडिया का ध्यान पूरे पंजाब में मिल रहे भारी जनसमर्थन से हटाया जा सके।मुख्यमंत्री ने भाजपा की “तानाशाही मानसिकता” की आलोचना करते हुए कहा कि भाजपा जनजीवन के हर क्षेत्र, संस्थाओं से लेकर संस्कृति और सार्वजनिक भाषण तक को नियंत्रित करना चाहती है।

उन्होंने पंजाब को डर या अस्थिरता की ओर धकेलने की किसी भी कोशिश के खिलाफ चेतावनी दी। उन्होंने जोर देकर कहा कि पंजाबी ऐसी राजनीति का एकजुट होकर जवाब देंगे। ‘एक्स’ पर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार देश के संवैधानिक ढांचे को कमजोर कर रही है। भाजपा अपने राजनीतिक हितों के लिए सीबीआई, ईडी, इनकम टैक्स विभाग और चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं का लगातार दुरुपयोग कर रही है।”

“ईडी के छापे सिर्फ उन राज्यों में ही क्यों मारे जा रहे हैं जहां भाजपा सत्ता में नहीं है? यह सीधा लोकतंत्र का कत्ल है। पंजाबियों के खिलाफ नफरत और भेदभाव की राजनीति की जा रही है। हमें डराने और धमकाने के लिए हर रोज नए हथकंडे अपनाए जा रहे हैं।

मैं एक बात बिल्कुल स्पष्ट करना चाहता हूं: पंजाब गुरुओं और संतों-महापुरुषों की धरती है। इस उपजाऊ मिट्टी में हर बीज उग सकता है, लेकिन नफरत का बीज यहां कभी जड़ नहीं पकड़ सकता।” एक्स पोस्ट पर उन्होंने कहा, “असल में बेअदबी के खिलाफ सख्त कानून पास होने के बाद भाजपा बुरी तरह बौखलाई हुई है। पंजाब के लोगों के साथ ऐसी खेलें खेलना बंद करो। यह तानाशाही रवैया यहां काम नहीं करेगा। हम पूरी ईमानदारी से लोगों की सेवा करते रहेंगे। न तो हम झुकेंगे, न ही रुकेंगे।”

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मोदी सरकार का रातों-रात डीज़ल-पेट्रोल की कीमतें बढ़ाने का फ़ैसला पंजाब और किसान विरोधी कदम: कुलदीप सिंह धालीवाल

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आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के मुख्य प्रवक्ता और विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल ने केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा डीज़ल, पेट्रोल और सीएनजी की कीमतों में की गई ज़बरदस्त बढ़ोतरी को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। धालीवाल ने इसे देश विरोधी, पंजाब विरोधी और पूरी तरह से किसान विरोधी कदम बताते हुए कहा कि जब देश के लोग सुबह उठे तो केंद्र सरकार ने उन्हें महंगाई का बड़ा झटका दिया। इस फैसले से यह साफ हो गया है कि बीजेपी आम लोगों और देश के अन्नदाता को बर्बाद करने पर तुली हुई है।

शुक्रवार को आप नेता प्रभवीर बराड़ के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुलदीप धालीवाल ने पंजाब में मौजूदा कृषि के संकट और धान के सीजन का जिक्र करते हुए कहा कि इस समय पूरे देश में और खासकर पंजाब में धान की बुआई का सीजन शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री सरदार भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली हमारी सरकार ने किसानों के लिए नहर के पानी का इंतजाम किया है और 1 जून से धान की बुआई जोरों पर शुरू होने जा रही है। किसान अपनी गेहूं की फसल और पराली को बचाकर अगली मुख्य फसल के लिए दिन-रात अपने खेतों को तैयार करने में लगे हुए हैं। ऐसे नाजुक समय में डीजल की कीमत में 3.11 रुपये प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी पंजाब के किसानों की पीठ में छुरा घोंपने जैसा है।

भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी की नीयत पर सवाल उठाते हुए धालीवाल ने कहा कि किसानों के आंदोलन के मोदी सरकार को आगे झुकना पड़ा और तीनों काले कृषि कानून वापस लेने पड़े, तो हार की टीस प्रधानमंत्री मोदी के दिमाग से अभी नहीं निकल रही है। मोदी सरकार जानबूझकर पंजाब और उसके किसानों-मजदूरों को बार-बार परेशान कर रही है। केंद्र ने पहले पंजाब का रूरल डेवलपमेंट फंड (आरडीएएफ) रोका और अब डीजल की कीमतें बढ़ाकर किसानों पर असहनीय बोझ डाल दिया है। पंजाब देश के अनाज उत्पादन में सबसे आगे है, इसलिए इस बढ़ोतरी का सबसे बुरा असर हमारे किसानों पर पड़ेगा।

धालीवाल ने केंद्र सरकार की गलत विदेश और व्यापार नीतियों पर बोलते हुए कहा कि जब इस साल 26 फरवरी को अमेरिका-भारत व्यापार समझौते पर साइन हुए थे, तो आम आदमी पार्टी देश की पहली पार्टी थी जिसने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इस सौदे का कड़ा विरोध किया था। मैंने उसी दिन चेतावनी दी थी कि अमेरिका के सामने मोदी के घुटने टेकने से यह देश बर्बाद हो जाएगा। इससे पहले हमारा पुराना और भरोसेमंद दोस्त रूस हमें सिर्फ़ $35 से $50 प्रति बैरल पर सस्ता कच्चा तेल दे रहा था, जो आज भी चीन को मिल रहा है। लेकिन अमेरिका के दबाव में मोदी सरकार ने वहाँ से तेल खरीदना बंद कर दिया और आज देश इसका नतीजा भुगत रहा है। पेट्रोल और डीज़ल के दाम ₹100 के पार हो गए हैं।

उन्होंने पंजाब भाजपा अध्यक्ष सुनील जाखड़ और उनकी टीम पर निशाना साधते हुए कहा कि जाखड़ एंड कंपनी, जो कल तक केंद्र की वकालत कर रही थी, आज जनता को जवाब दे कि यह कैसा न्याय है? परसों केंद्र सरकार ने धान का एमएसपी ऊँट के मुँह में जीरे जैसा सिर्फ़ 72 पैसे प्रति किलोग्राम बढ़ाकर किसानों के साथ क्रूर मज़ाक किया। दूसरी तरफ़, डीज़ल के दाम 3.11 रुपये प्रति लीटर बढ़ा दिए गए। उन्होंने कहा कि लुधियाना एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के एक्सपर्ट्स से पूछिए कि धान उगाने की लागत क्या है। बाज़ार में चावल 50 रुपये से 200 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रहा है और किसान को सिर्फ़ 72 पैसे दिए जा रहे हैं।

कुलदीप धालीवाल ने कहा कि डीज़ल के दाम बढ़ने से न सिर्फ़ किसान बल्कि आम नागरिक भी बुरी तरह प्रभावित होंगे। माल ढुलाई और ट्रांसपोर्टेशन महंगा होने से खाने-पीने की हर ज़रूरी चीज़ के दाम आसमान छूने लगेंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि एक तरफ़ तो जनता को कम गाड़ी चलाने, ऑफ़िस में कार न लाने, मोटरसाइकिल और साइकिल इस्तेमाल करने की सलाह दी जा रही है और दूसरी तरफ़, वह खुद देश को महंगाई के दलदल में धकेलकर सरकारी हवाई जहाज़ उड़ाकर विदेश दौरे पर निकल गए हैं। उन्होंने कहा कि हम केंद्र सरकार के इस जनविरोधी फ़ैसले की कड़ी निंदा करते हैं। केंद्र सरकार को इसे तुरंत वापस लेना चाहिए।

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भाजपा ने पश्चिम बंगाल में वोट चुराए, अब तेल की कीमतें बढ़ाकर लोगों को लूट रही है: अमन अरोड़ा

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बढ़ती महंगाई से पैदा हुई मुश्किलों का सामना कर रहा है। उन्होंने आगे कहा कि भाजपा सरकार ने एक बार फिर आम लोगों, किसानों और छोटे व्यापारियों पर तेल की बढ़ती कीमतों और महंगाई का बोझ डाल दिया है। पूरा देश देख रहा है कि 12 साल पहले सत्ता में आने से पहले पीएम मोदी ने जो बड़े-बड़े वादे किए थे, उसके बावजूद लोग महंगाई की मार झेल रहे हैं।

तेल और एलपीजी की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी का जिक्र करते हुए अमन अरोड़ा ने कहा कि पश्चिम बंगाल चुनाव के तुरंत बाद केंद्र सरकार ने कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत ₹943 बढ़ाकर छोटे बिजनेसमैन और ट्रेडर्स पर भारी चोट की है। इसके साथ ही केंद्र ने पेट्रोल की कीमत में ₹3.14 प्रति लीटर, डीज़ल की कीमत में ₹3.11 प्रति लीटर और सीएनजी की कीमत में ₹2 की बढ़ोतरी की है। यह देश के लोगों के लिए शर्मनाक तोहफ़ा है।

उन्होंने दावा किया कि भाजपा को सिर्फ़ चुनाव के समय ही लोगों की भलाई याद आती है, लेकिन वोट मिलने के बाद वह लोगों पर आर्थिक बोझ डाल देती है। अमन अरोड़ा ने कहा कि भाजपा चुनाव के समय लोगों की भलाई की बात करती है, लेकिन वोट मिलने के बाद वह लोगों की मेहनत की कमाई लूटने लगती है। कीमतों में यह बढ़ोतरी सिर्फ़ सत्ताधारी पार्टी के करीबी कुछ चुनिंदा कॉर्पोरेट घरानों को फ़ायदा पहुँचाने के लिए की जा रही है।

भाजपा के चुनावी वादों पर निशाना साधते हुए अमन अरोड़ा ने कहा कि भाजपा ने हर नागरिक के बैंक अकाउंट में ₹15 लाख जमा करने, दो करोड़ नौकरियाँ देने और किसानों की इनकम दोगुनी करने का वादा किया था। किसानों की इनकम दोगुनी करने के बजाय, भाजपा सरकार ने महंगाई और तेल की बढ़ती कीमतों के ज़रिए किसानों पर लगातार आर्थिक बोझ बढ़ाया है।

पंजाब के कृषि क्षेत्र पर पड़ने वाले असर का ज़िक्र करते हुए आप पंजाब के स्टेट प्रेसिडेंट ने कहा कि डीज़ल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर धान की बुआई के सीज़न में खेती के कामों पर पड़ेगा। उन्होंने आगे कहा कि धान की बुआई के दौरान किसानों को सिंचाई के लिए हज़ारों लीटर पानी और तेल की ज़रूरत होती है। डीज़ल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर उनके खेती के कामों पर पड़ेगा और उन पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।

अमन अरोड़ा ने आगे कहा कि एक समय था जब पेट्रोल की कीमतों में थोड़ी सी भी बढ़ोतरी पर देश भर में विरोध शुरू हो जाता था, लेकिन पिछले 12-13 सालों से महंगाई झेल रहे लोग अब थक चुके हैं और निराश हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार की घरेलू आर्थिक नीतियों की पूरी तरह से नाकामी का नतीजा हैं।

भारत को “आत्मनिर्भर” बनाने के केंद्र के दावों पर सवाल उठाते हुए, अमन अरोड़ा ने कहा कि पिछले एक दशक में रिवर्स इंपोर्ट पर निर्भरता काफी बढ़ गई है। तेल इंपोर्ट से जुड़े केंद्र की विदेश नीति के फैसलों पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा, “यह समझना मुश्किल है कि रूस जैसे देशों से मौके मिलने के बावजूद भारत तेल खरीदने पर खुद से फैसले लेने में क्यों हिचकिचा रहा है।”

पेट्रोल, डीज़ल और सीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी की कड़ी निंदा करते हुए, अमन अरोड़ा ने केंद्र सरकार से मांग की कि वह तुरंत इस बढ़ोतरी को वापस ले। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर महंगाई इसी तरह आम आदमी का दम घोंटती रही, तो जनता का गुस्सा सड़कों पर उतर सकता है, जिसके भाजपा सरकार के लिए बड़े राजनीतिक नतीजे भुगतने पड़ेंगे।

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Punjab में हाइपरटेंशन के बढ़ते मामलों के बीच बुज़ुर्गों और मध्यम आयु वर्ग के मरीज़ों को बिना आर्थिक बोझ के जीवनरक्षक उपचार उपलब्ध करवा रही ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना

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विश्व हाइपरटेंशन दिवस के अवसर पर,भगवंत मान सरकार की मुख्यमंत्री सेहत योजना उच्च रक्तचाप और उससे जुड़ी बीमारियों से जूझ रहे मरीज़ों को किफायती और समय पर स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध करवाकर उन्हें महत्त्वपूर्ण राहत प्रदान कर रही है। जैसे-जैसे विभिन्न आयु वर्गों में उच्च रक्तचाप के मामले बढ़ रहे हैं, यह योजना पंजाब के हज़ारों परिवारों को समय पर उपचार उपलब्ध करवाने के साथ-साथ भारी चिकित्सा खर्चों से भी सुरक्षा प्रदान कर रही है।

हाइपरटेंशन ,जिसे आमतौर पर हाई ब्लड प्रेशर कहा जाता है, को डॉक्टर अक्सर ‘साइलेंट किलर’ कहते हैं। यह बिना किसी स्पष्ट चेतावनी के स्ट्रोक, हार्ट फेलियर या किडनी रोग जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। यह बीमारी लगभग हर आयु वर्ग में देखने को मिल रही है।

अस्पतालों में बुज़ुर्ग पुरुष जाँच रिपोर्ट का इंतज़ार करते दिखाई देते हैं, महिलाएँ अपने पर्स में दवाइयों की पर्चियाँ संभालकर रखती हुई दिखाई देती हैं। जबकि युवा मरीज़, जिन्हें पहले इस बीमारी के लिए बहुत कम उम्र का माना जाता था, अब रक्तचाप की बढ़ती रीडिंग को लेकर चिंता व्यक्त करते नज़र आते हैं। हर मरीज़ की फ़ाइल के पीछे एक ऐसा परिवार है जो बीमारी और बढ़ते इलाज के ख़र्च के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, भारत में उच्च रक्तचाप का बोझ तेज़ी से बढ़ रहा है, जिसके प्रमुख कारण अस्वस्थ खान-पान, तनाव, तंबाकू का सेवन, शारीरिक गतिविधियों की कमी और अनियमित जीवनशैली हैं।

डॉक्टरों का कहना है कि कई मरीज़ों को इस बीमारी का पता तब चलता है जब गंभीर जटिलताएँ उत्पन्न हो चुकी होती हैं। ऐसे बढ़ते स्वास्थ्य संकट के बीच पंजाब की मुख्यमंत्री सेहत योजना एक महत्त्वपूर्ण सुरक्षा कवच साबित हो रही है। यह योजना हज़ारों मरीज़ों को उच्च रक्तचाप और उससे जुड़ी जटिलताओं का इलाज बिना भारी चिकित्सा बिलों के बोझ के उपलब्ध करवा रही है।

अनियंत्रित रक्तचाप के चलते होने वाले स्ट्रोक, हृदय संबंधी गंभीर आपात स्थितियों और किडनी से जुड़ी बीमारियों के उपचार एवं अस्पताल में भर्ती होने का ख़र्च अब इस योजना के तहत वहन किया जा रहा है, जिससे मानसिक तनाव से गुज़र रहे परिवारों को राहत मिल रही है।

पंजाब में अधिकांश मरीज़ अभी भी मध्यम आयु वर्ग और बुज़ुर्ग आबादी से संबंधित हैं, जिनमें 40 से 80 वर्ष आयु वर्ग सबसे अधिक प्रभावित है। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार, गुरदासपुर में 94 वर्ष तक की आयु वाले मरीज़ दर्ज किए गए, जबकि एस.ए.एस.नगर में 98 वर्ष आयु तक के मरीज़ दर्ज किए गए, जिससे स्पष्ट होता है कि यह रोग बुज़ुर्गों में व्यापक रूप से फैला हुआ है।

पटियाला,एस.ए.एस.नगर ,होशियारपुर, जालंधर और फरीदकोट जैसे जिलों में पुरुषों और महिलाओं दोनों में बड़ी संख्या में मामले दर्ज किए गए। वहीं अमृतसर और लुधियाना के अस्पताल रिकॉर्ड में 50 से 77 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं में मामलों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक पाई गई है।

डॉ. सौरभ शर्मा, जो कि सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं राजिंद्रा अस्पताल में कार्डियोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष हैं, कहते हैं कि उच्च रक्तचाप अब केवल बुज़ुर्गों तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने कहा,“आधुनिक जीवनशैली हर आयु वर्ग के लिए नई स्वास्थ्य चुनौतियाँ लेकर आई है। हालाँकि अधिकांश मामले 40 से 90 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों में देखे जाते हैं, लेकिन अब किशोरों और 20 से 30 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं में भी हाइपरटेंशन के मामले सामने आ रहे हैं।”

डॉ. शर्मा ने कहा,“तनाव, खराब खान-पान, व्यायाम की कमी और अनियमित दिनचर्या जैसे जीवनशैली संबंधी कारक उच्च रक्तचाप के प्रमुख कारण हैं, हालाँकि कुछ चिकित्सीय स्थितियाँ भी इसका कारण बन सकती हैं।” उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अब यह जटिलताएँ पहले की तुलना में कम उम्र में सामने आने लगी हैं।

अब केवल हाई ब्लड प्रेशर ही नहीं, बल्कि उससे जुड़ी जटिलताएँ जैसे स्ट्रोक,हार्ट फेलियर और किडनी रोग भी पहले की तुलना में जल्दी सामने आ रहे हैं।

डॉ. शर्मा के अनुसार, मुख्यमंत्री सेहत योजना जैसी योजनाएँ इसलिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं क्योंकि वे मरीज़ों को आर्थिक डर के कारण इलाज टालने से रोकती हैं। उन्होंने कहा,“उच्च रक्तचाप आपातकालीन स्थिति (हाइपरटेंसिव इमरजेंसी) में इलाज में देरी कई बार जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर साबित होती है।”

स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता केवल इलाज उपलब्ध करवाना नहीं, बल्कि इलाज समय पर सुनिश्चित करना है। पहले कई परिवार आर्थिक डर के कारण मरीज़ को अस्पताल में भर्ती करवाने में देरी कर देते थे, जो कई बार घातक साबित होती थी। अब सेहत योजना के तहत मरीज़ समय रहते चिकित्सा सहायता लेने लगे हैं, जिससे उनके स्वस्थ होने की संभावनाएँ बढ़ रही हैं। मध्यम वर्गीय परिवारों, पेंशनभोगियों और सरकारी कर्मचारियों के लिए यह योजना भारी चिकित्सा खर्चों के ख़िलाफ एक सुरक्षा कवच बनकर उभरी है।

इस विश्व उच्च रक्तचाप दिवस पर, सेहत कार्ड की सबसे बड़ी उपलब्धि केवल निपटाए गए मामलों की संख्या नहीं, बल्कि वह सम्मान और आत्मविश्वास भी है जो इसने मरीज़ों को दिया है, ताकि वे आर्थिक कठिनाई के भय के बिना इलाज करवा सकें।

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