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Punjab

पंजाब-चंडीगढ़ में गर्मी का कहर: 4 दिनों के लिए हीटवेव का येलो अलर्ट जारी

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पंजाब और चंडीगढ़ में इस बार लोगों को भीषण गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने 21 अप्रैल से 24 अप्रैल तक चार दिनों के लिए येलो हीटवेव अलर्ट जारी किया है।

मौसम विभाग के अनुसार, इस दौरान गर्म हवाएं चलेंगी और कई इलाकों में रातें भी सामान्य से अधिक गर्म रह सकती हैं। सोमवार की तुलना में तापमान में 0.1 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो सामान्य से 3.2 डिग्री ज्यादा है।

राज्य के 21 जिलों में तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच चुका है, जबकि कुछ क्षेत्रों में अधिकतम तापमान 41 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों के लिए हीट एडवाइजरी जारी की है, जिसमें खान-पान, पानी का सेवन और गर्मी से बचाव के जरूरी उपाय बताए गए हैं।

स्थिति को देखते हुए अस्पतालों में विशेष वार्ड तैयार किए गए हैं और मेडिकल स्टाफ को 24 घंटे के लिए तैनात किया गया है।

मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि लुधियाना, नवांशहर, रूपनगर, संगरूर, फतेहगढ़ साहिब, मोहाली और पटियाला में अलग-अलग स्थानों पर हीटवेव जैसी स्थिति बन सकती है।

सुबह से ही तेज धूप रहेगी, जबकि दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच गर्मी अपने चरम पर होगी। प्रशासन ने लोगों को सलाह दी है कि वे इस दौरान घरों में रहें और जरूरी होने पर ही बाहर निकलें।

यह स्थिति लोगों के स्वास्थ्य पर असर डाल सकती है, इसलिए सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।

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Politics

Punjab News : कई परिवार कांग्रेस-भाजपा छोड़ आप में शामिल

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राजपुरा के वार्ड 15 और 16 से बड़ी संख्या में युवा और कई परिवार कांग्रेस और भाजपा छोड़कर आम आदमी पार्टी (आप) में शामिल हो गए। विधायक नीना मित्तल और एडवोकेट लविश मित्तल ने उनका पार्टी में स्वागत किया।

पार्टी में शामिल होने वालों में महेश गर्ग, भावना गर्ग, धीरज गर्ग, हर्ष गर्ग, रघुवीर सिंह बंटी, सतवीर सिंह, वरिंदर शर्मा, गुरुमीत सिंह, इकबाल सिंह, बोहर सिंह, सतवीर शर्मा, संजीव कुमार, राज कौर, मनदीप कौर, ज्योति, कोमल, गीता, आसन रानी, सीमा कुमारी और अनुमिता शर्मा का नाम है। इस मौके पर युवा अध्यक्ष राजेश बावा, युवा नेता स्वर्णदीप सिंह मौजूद रहे।

नीना मित्तल ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में कई ऐतिहासिक और लोगों के अनुकूल फैसले लिए हैं। उन्होंने कहा कि ये फैसले किसी एक वर्ग के लिए नहीं, बल्कि पंजाब के सभी लोगों के कल्याण को ध्यान में रखते हुए लिए गए हैं, जिसका लाभ लोगों को सीधे और निष्पक्ष तरीके से दिया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि मान सरकार के पारदर्शी और ईमानदार प्रदर्शन से हर वर्ग के लोग प्रभावित हो रहे हैं और आम आदमी पार्टी के साथ जुड़ने में गर्व महसूस कर रहे हैं। आप नेता वीरेंद्र मोजी, धीरज गर्ग ने कहा कि आने वाले समय में पार्टी का आधार मजबूत होगा और बड़ी संख्या में लोग पार्टी से जुड़ेंगे।

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Punjab

मोहाली का सबसे बड़ा मॉल अचानक बंद:कंपनी ने गेट पर पब्लिक नोटिस चिपकाया; 22 एकड़ में बना, अस्पताल बनाने की चर्चा

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 ट्राईसिटी के प्रमुख शॉपिंग और एंटरटेनमेंट सेंटर वीआर पंजाब माॅल को 20 अप्रैल से अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया गया है। प्रबंधन के अचानक लिए फैसले से माॅल में खुले मल्टीनेशनल कंपनियों के आउटलेट्स 100 से अधिक रिटेल स्टोर्स बंद होने के कगार पर पहुंच गए हैं।

माल के निर्देशों के बाद सभी दुकानदारों और ब्रांड्स को तत्काल प्रभाव से अपने-अपने आउटलेट बंद करने के लिए कहा गया, जिससे पूरे माल में एकाएक सन्नाटा छा गया। इससे हजारों कर्मचारियों और स्टाफ को नौकरी जाने का संकट सताने लगा है। कारोबारियों ने भी माल प्रबंधन के इस फैसले पर नाराजगी जताई है। 

माल प्रबंधन के आधिकारिक नोटिस में बताया गया है कि 3 अप्रैल को उत्तर भारत में आए भूकंप के कारण इमारत को नुकसान पहुंचा है। इस घटना के बाद भवन की संरचनात्मक मजबूती को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आई हैं।

इसी के मद्देनजर मैनेजमेंट ने आम जनता और कर्मचारियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए माॅल को तत्काल प्रभाव से बंद करने और परिसर को पूरी तरह सील करने का निर्णय लिया है। नोटिस में साफ तौर पर कहा गया है कि अगली सूचना तक माल में प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

इन कंपनियों के आउटलेट्स

माॅल में संचालित प्रमुख ब्रांड्स में एचएंडएम, रिलायंस ट्रेंड्स, क्रोमा, स्टारबक्स), केएफसी, बर्गर किंग, लेंसकार्ट, गैप, कोस्टा काफी और हल्दीराम जैसे नाम शामिल हैं। इसके अलावा लाइफस्टाइल, मैक्स, जाकी, सेंट्रो, रिलायंस स्मार्ट बाजार, गो कलर्स, कैफे काफी डे, टैको बेल, स्केचर्स, स्पिन्नी, डीआइवाय और पाइरेट्स ऑफ ग्रिल जैसे कई आउटलेट भी यहां चल रहे हैं। माल में 9 स्क्रीन वाला पीवीआर सिनेमा भी लोगों के मनोरंजन कर रहा है।

कभी ट्राईसिटी का नंबर-1 माॅल था

करीब 22 एकड़ क्षेत्र में फैला और एक मिलियन वर्ग फीट से अधिक में विकसित यह माॅल एक समय ट्राईसिटी का सबसे बड़ा और सबसे व्यस्त माल माना जाता था। कभी 250 के करीब आउटलेट खुले हुए थे यहां। यह एलांते माॅल को भी कड़ी टक्कर देता था। वीकेंड और त्योहारों पर यहां भारी भीड़ उमड़ती थी और यह युवाओं का पसंदीदा हैंगआउट स्पाट बन चुका था।

धीरे-धीरे कम हुई रौनक

हालांकि, बीते कुछ वर्षों में माॅल की लोकप्रियता में गिरावट देखी गई। माॅल के सामने फ्लाईओवर बनने के बाद यहां की पहुंच प्रभावित हुई और विजिटर्स की संख्या घटने लगी। इसके अलावा, माल प्रबंधन द्वारा समय-समय पर उचित मार्केटिंग और मेंटेनेंस पर ध्यान न देने के कारण कई बड़े ब्रांड्स यहां से अपना कारोबार समेटते चले गए।

अस्पताल बनने की भी चर्चा

इधर, सूत्रों के हवाले से यह भी जानकारी सामने आ रही है कि भविष्य में इस माॅल को किसी बड़े अस्पताल समूह को दिए जाने की योजना बनाई जा रही है। इस संबंध में माल मैनेजमेंट के अधिकारी अभिनव राणा से बात करते की कोशिश की गई लेकिन उन्होंने फोन नहीं उताया। वाट्सएप पर मैसेज भी किया गया लेकिन फिर भी कोई जवाब नहीं दिया गया।

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Punjab

बेअदबी विरोधी कानून पर सुखबीर बादल की चुप्पी बुनियादी सवाल खड़े करती है: Baltej Pannu

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आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने ‘जगत जोत गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार बिल, 2026’ पर शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल की लगातार चुप पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे समय जब बेअदबी को रोकने के लिए सख्त कानून बनाया है, अकाली दल द्वारा कोई जवाब न आना कई गंभीर राजनीतिक सवाल खड़े करता है।

सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आप पंजाब के स्टेट जनरल सेक्रेटरी और मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने कहा कि आप की पंजाब सरकार ने बेअदबी की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कानून लाकर अपना वादा पूरा किया है, लेकिन जो लोग ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर राजनीति करते थे, वे अब चुप रहना पसंद कर रहे हैं। यह चुप्पी राजनीतिक रूप से बहुत कुछ कहती है।

आप पंजाब के जनरल सेक्रेटरी ने आगे कहा कि जब भगवंत मान सरकार ने बेअदबी के खिलाफ सख्त कानून लाने का ऐलान किया था, तो विरोधी पार्टियों ने इसे राजनीतिक बयानबाजी कहकर खारिज कर दिया था। वे कहते थे, ‘कानून लाओ, फिर देखेंगे।’ आज यह कानून न सिर्फ पास हो गया है बल्कि पूरी तरह से लागू भी हो गया है, और वही लोग अब शांत हो गए हैं।

बलतेज पन्नू ने कहा कि नए कानून में बेअदबी के कामों के लिए सख्त सज़ा का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि कानून में उम्रकैद और 25 लाख रुपये तक के जुर्माने जैसे कड़े प्रावधान हैं, जो सज़ा और डर दोनों पक्का करते हैं।

पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि अकाली-भाजपा गठबंधन और कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार बेअदबी पर कोई असरदार कानून बनाने में नाकाम रही, हालांकि वे ऐसे बिल लाए जो कभी कानून बनने के लिए नहीं थे। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि राजनीतिक फायदे के लिए यह मुद्दा ज़िंदा रहे। कुछ लोगों ने इस मुद्दे पर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकीं और वे चाहते थे कि यह सिलसिला चलता रहे।

पिछली घटनाओं का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि चाहे 2015 की घटनाएं हों, 1986 में नकोदर की घटना हो या 1978 की, हर कोई जानता है कि उस समय सत्ता में कौन था और वे कैसे कोई अहम कार्रवाई करने में नाकाम रहे। 2015 की बेअदबी की घटनाओं के दौरान, बार-बार उकसाने और धमकियों के बावजूद, उस समय की सरकार असरदार तरीके से कार्रवाई करने में नाकाम रही। महीनों तक गाली-गलौज वाले पोस्टर लगाए गए, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

बलतेज पन्नू ने पिछली सरकारों के जांच के तरीकों की भी आलोचना की और कहा कि जस्टिस ज़ोरा सिंह कमिशन और जस्टिस रणजीत सिंह कमिशन जैसे कमिशन की रिपोर्ट को नज़रअंदाज़ किया गया। गंभीर नतीजों को मामूली बताया गया और रिपोर्ट की कॉपियां सार्वजनिक तौर पर बहुत कम कीमत पर बांटी गईं।

कानून बनाने के प्रक्रिया पर उन्होंने कहा कि आप सरकार ने बिल का मसौदा तैयार करने से पहले कानूनी माहिरों और धार्मिक नेताओं से काफी सलाह-मशविरा किया था। यह कोई जल्दबाज़ी में लिया गया फ़ैसला नहीं था, बल्कि कड़ी सज़ा देने और डर पैदा करने के मकसद से बनाया गया एक मज़बूत कानूनी ढांचा है।

बलतेज पन्नू ने कहा कि कानून पास होने के बाद भी, न तो शिरोमणि अकाली दल और न ही उसकी लीडरशिप ने इसके समर्थन या विरोध में कोई आधिकारिक बयान जारी किया है। एसजीपीसी प्रधान हरजिंदर सिंह धामी की चुप्पी भी उतनी ही चिंताजनक है। एसजीपीसी मीटिंग के बाद प्रेस से बात न करना राजनीतिक दबाव और स्पष्टता की कमी को दिखाता है।

उन्होंने आगे कहा कि अकाली दल का इकलौता विधायक भी विधानसभा के उस स्पेशल सेशन में शामिल नहीं हुआ, जहाँ यह बिल पास हुआ था। इतिहास में यह दर्ज होगा कि गुरु ग्रंथ साहिब की मर्यादा की रक्षा के लिए कौन खड़ा हुआ और किसने गैरहाजिर रहना चुना।

बलतेज पन्नू ने कहा कि 13 अप्रैल को बिल पेश होने से लेकर 17 अप्रैल को राज्यपाल की मंज़ूरी और 20 अप्रैल तक नोटिफिकेशन जारी होने तक, यह ‘आप’ सरकार की मज़बूत राजनीतिक इच्छाशक्ति को दिखाता है। कुछ ही दिनों में यह कानून पूरी तरह से बन गया और लागू हो गया, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। सुखबीर सिंह बादल की चुप्पी दिखाती है कि वह पंजाब और उसकी धार्मिक भावनाओं के लिए मज़बूती से खड़े होने के बजाय अपने निजी और राजनीतिक हितों की रक्षा पर ज़्यादा ध्यान दे रहे हैं।

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