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अमृतसर के अटारी विधानसभा क्षेत्र की सभी प्रमुख सड़कें शानदार बनेंगी, CM भगवंत सिंह मान ने रखी आधारशिला

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने  अमृतसर के अटारी क्षेत्र में एक व्यापक विकास अभियान की शुरुआत करते हुए 137 किलोमीटर लंबी 121 सड़कों के नवीनीकरण के लिए 57.80 करोड़ रुपये की घोषणा की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सीमा के साथ अपनी रणनीतिक स्थिति के बावजूद लंबे समय से उपेक्षित क्षेत्रों में अब निवेश, बेहतर संपर्क और नई आर्थिक गतिविधियां देखने को मिलेंगी।

इस पहल को बेहतर शासन और सीमा सुधारों के साथ रखते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब सरकार कांटेदार तार को सीमा वाले तरफ करके किसानों के लिए बिना रुकावट खेती हेतु लाखों एकड़ जमीन को खोलने, नशों के खतरे को जड़ से खत्म करने और 2027 में पंजाब को विकास के नाम पर जनादेश स्थापित करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है।

सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि हमारी सरकार के सत्ता में आने से पहले पंजाब को काला दौर भी देखना पड़ा, जब नशों के कारोबार ने पंजाब में पैर पसार लिए। सत्ता में बैठे लोगों ने इसे संरक्षण देकर राज्य में नशों के कारोबार को फलने-फूलने के लिए अपने अधिकार का दुरुपयोग किया। उन्होंने कहा कि काले दिनों के दौरान राज्य सरकार के वाहनों का उपयोग राज्य के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में नशों की सप्लाई के लिए किया जाता था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन नेताओं ने प्रदेश की तरक्की और खुशहाली को पटरी से उतार कर पंजाब और हमारी युवा पीढ़ियों के रास्ते में कांटे बोए। इन नेताओं के हाथ प्रदेश के खिलाफ इस अपराध से रंगे हुए हैं और इतिहास इन्हें पंजाब की पीठ में छुरा घोंपने के लिए कभी माफ नहीं करेगा। इन पार्टियों ने युवाओं की नसों में नशे का जहर भरकर प्रदेश की पीढ़ियों को तबाह कर दिया, जिसके लिए उन्हें कभी माफ नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि यह कितनी हास्यास्पद बात है कि जो लोग नशों से पंजाब को तबाह करने के जिम्मेदार हैं, वही लोग अब लोगों को मूर्ख बनाने के लिए झूठे दावे कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आगे कहा कि इन सरकारों ने कभी प्रदेश और लोगों की परवाह नहीं की, बल्कि सिस्टम को तबाह कर दिया, जिससे युवाओं में विदेश जाकर बसने का रुझान पैदा हुआ। प्रदेश से नशों की कुरीति को जड़ से उखाड़ने के लिए ‘आप’ सरकार ने कड़े प्रयास किए हैं। उन्होंने कहा कि नशों की समस्या प्रदेश पर एक कलंक थी और इस अभिशाप को मिटाने के लिए ‘आप’ सरकार को रणनीति बनाने में दो साल से अधिक समय लगा।

उन्होंने कहा कि आप सरकार ने ‘युद्ध नशियां विरुद्ध’ अभियान शुरू किया, जिसके तहत नशों की सप्लाई लाइन को तोड़कर इस घिनौने अपराध में शामिल तस्करों को सलाखों के पीछे डाला गया। आम लोगों के सक्रिय समर्थन और सहयोग से हर स्तर पर नशों के अभिशाप का सफाया किया जा रहा है और इस अभियान को आम लोगों के सहयोग से जन आंदोलन में बदल दिया गया है। ‘आप’ सरकार ने इस घिनौने अपराध में शामिल बड़ी मछलियों को सलाखों के पीछे डालकर और नशा तस्करों पर शिकंजा कसकर नशों के कारोबार की रीढ़ तोड़ दी है।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि अकाली दल की तथाकथित ‘पंजाब बचाओ यात्रा’ का असली नाम ‘परिवार बचाओ यात्रा’ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 15 साल प्रदेश को लूटने के बाद वे पंजाब को किससे बचाने की कोशिश कर रहे हैं? लोगों ने अकालियों को कई बार चुना, लेकिन वे गद्दार साबित हुए और उन्होंने हमेशा प्रदेश और लोगों की पीठ में छुरा घोंपा। जब पूरा किसान समुदाय अपने अधिकारों के लिए लड़ रहा था, तो अकालियों ने केंद्रीय मंत्रिमंडल में अपनी कुर्सी बचाने के लिए मोदी सरकार के काले कृषि कानूनों पर समर्थन भी किया था।

उन्होंने कहा, “अकालियों ने अपने निजी सियासी हितों के लिए धर्म का दुरुपयोग किया, जिसके लिए लोग उन्हें कभी माफ नहीं करेंगे और उनके किए गए पापों के लिए उचित सबक सिखाएंगे। लोगों ने अकालियों को बार-बार चुना, लेकिन वे गद्दार साबित हुए और हमेशा पंजाब और पंजाबियों की पीठ में छुरा घोंपा।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “इस पवित्र धरती ने संतों, महापुरुषों, शहीदों, महान खिलाड़ियों और जरनैलों को पैदा किया है, लेकिन बड़े दुर्भाग्य की बात है कि पिछली सरकारों के संरक्षण में तस्करों, गैंगस्टरों और अन्य अपराधियों ने इस प्रदेश को अपना ठिकाना बनाया। युवाओं को पथभ्रष्ट करने के जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाएगा और उन्हें अपने पापों का भुगतान करना होगा। प्रदेश की पीढ़ियों को बर्बाद करने वाले इन नेताओं को अपनी बदनीयती की कीमत चुकानी होगी और ‘आप’ सरकार उनके बुरे कामों के लिए मिसाली सजा सुनिश्चित कराएगी।”

उन्होंने कहा, “हर कोई जानता है कि यह परिवार अंग्रेजों की कठपुतली बनकर रहा और देश के लिए लड़ने वाले देशभक्तों के खिलाफ अंग्रेजों का साथ देने के लिए उन्हें ‘सर’ की उपाधि दी गई थी। इस परिवार ने 13 अप्रैल, 1919 को जलियांवाला बाग कत्लेआम के दोषी जनरल डायर को इस घिनौनी घटना के बाद रात के खाने पर बुलाकर सम्मानित किया था। ऐसे काम उनकी देशविरोधी और पंजाब विरोधी मानसिकता और दोगले चरित्र का प्रत्यक्ष प्रमाण है।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आगे कहा, “सिर्फ इतना ही नहीं, इस परिवार ने जनरल डायर को श्री हरिमंदिर साहिब में सिरोपा और माफी दिलाने में भी अहम भूमिका निभाई। इतिहास को मिटाया नहीं जा सकता और बादल के पूर्वजों का संदिग्ध चरित्र इतिहास के पन्नों पर अंकित है। इस परिवार के हाथ देशभक्तों के खून से रंगे हुए हैं और राष्ट्रवादियों की पीठ में छुरा घोंपने में इन गद्दारों की भूमिका को कभी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।”

उन्होंने कहा, “2027 में होने वाले राज्य विधानसभा चुनावों में, लोगों के पास तीन कलमों को चुनने का मौका होगा। पहली कलम कांग्रेस की है, जिसमें लाल स्याही है जो श्री हरिमंदिर साहिब पर हमले, 1984 के नरसंहार और अन्य सिख विरोधी व पंजाब विरोधी रुखों का प्रतीक है। दूसरी कलम अकालियों की है, जिसमें सिर्फ एक स्याही है जिसने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी की है। तीसरी कलम ‘आप’ की है जो हर गुजरते दिन मार्गदर्शक पहलों के द्वारा पंजाब को ‘रंगला पंजाब’ बनाने का रास्ता दिखा रही है।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “आप सरकार ने हर क्षेत्र में कई लोक-पक्षीय पहलें की हैं, जिससे हर क्षेत्र में पूरे प्रदेश की सूरत बदल गई है। लोगों के टैक्स का पैसा प्रदेश का है और इसे लोगों की भलाई पर समझदारी से खर्च किया जा रहा है। लोगों का पैसा विकास, स्कूलों, अस्पतालों और सड़कों के जरिए लोगों के पास वापस पहुंच रहा है।”

उन्होंने आगे कहा, “आप सरकार द्वारा 90 प्रतिशत घरों को मुफ्त बिजली, युवाओं को बिना किसी भ्रष्टाचार के 65,000 से अधिक सरकारी नौकरियां, बेहतर सड़कें, बंद किए गए टोल प्लाजा से रोजाना 70 लाख रुपये की बचत और बुनियादी ढांचे का निर्माण किया जा रहा है। आप सरकार द्वारा सत्ता संभालते समय सिंचाई के लिए सिर्फ 22 प्रतिशत नहरी पानी का उपयोग किया जा रहा था, लेकिन आज 71 प्रतिशत नहरी पानी का उपयोग किया जा रहा है और धान के अगामी के सीजन तक इसे 90 प्रतिशत तक बढ़ा दिया जाएगा।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री सेहत योजना शुरू की गई है, जिसके तहत पंजाब के सभी 65 लाख परिवारों को सेहत कार्ड जारी किए जा रहे हैं। प्रदेश का हर परिवार 10 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज का हकदार है। इस योजना के तहत 30 लाख से अधिक लाभार्थियों को पहले ही सेहत कार्ड जारी किए जा चुके हैं और लगभग 1.65 लाख लोगों को मुफ्त इलाज मिल चुका है। लोगों को इन कार्डों का अधिकतम लाभ उठाना चाहिए।”

उन्होंने कहा, “प्रदेश के इतिहास में पहली बार धान के सीजन के दौरान ट्यूबवेलों को आठ घंटे से अधिक निर्बाध बिजली आपूर्ति दी गई है। किसानों को अब पहली बार सिंचाई के लिए दिन के समय बिजली मिल रही है, जिससे उनकी जिंदगी बदल गई है।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “हमारी सरकार द्वारा लोगों की भलाई के लिए सरकारी खजाने का एक-एक पैसा पूरी समझदारी से इस्तेमाल किया जा रहा है। मांवां धियां सतिकार योजना के तहत 18 साल से अधिक उम्र की अनुसूचित जाति वर्ग की महिलाओं को प्रति माह 1500 रुपये और बाकी वर्गों की महिलाओं को प्रति माह 1000 रुपये की सहायता दी जाएगी।”

उन्होंने कहा, “आप सरकार द्वारा प्रदेश भर में लिंक सड़कों की मरम्मत के लिए एक व्यापक प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। पंजाब में 43,000 किलोमीटर लिंक सड़कें हैं और उनकी मरम्मत और अपग्रेडेशन के लिए व्यापक प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। मरम्मत के साथ-साथ अगले पांच सालों के लिए इन सड़कों का रखरखाव भी किया जाएगा।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “लोगों के टैक्स का सारा पैसा प्रदेश के लोगों का है और यह उनकी भलाई पर खर्च किया जा रहा है। करदाताओं का पैसा विकास, स्कूलों, अस्पतालों और सड़कों के जरिए लोगों के पास वापस आ रहा है। चाहे ‘आप’ सरकार ने अपनी सभी गारंटियां पूरी कर ली हैं, लेकिन आगे बढ़ने के प्रयास जारी रहेंगे। दूसरी सियासी पार्टियां अपने मंचों पर सत्ता हड़पने की चालें चल रही हैं, लेकिन इस मंच से हम शिक्षा, सेहत, बिजली, खेती और समग्र विकास की बात करते हैं।”

सीमावर्ती किसानों के लिए बड़ी राहत के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, “आप सरकार के ठोस प्रयासों के कारण भारत सरकार ने कांटेदार तार को अंतरराष्ट्रीय सीमा के 300 मीटर के भीतर स्थानांतरित करने के आदेश दिए हैं, जिससे किसानों को बड़ी राहत मिली है। इससे लाखों एकड़ जमीन पर बिना किसी प्रतिबंध के खेती की जा सकेगी।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “इससे पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, तरन तारन, फाजिल्का और फिरोजपुर के किसानों को बहुत फायदा होगा। एसडीएम को सर्वेक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि इस फैसले को समय पर लागू करने के लिए 300 मीटर के क्षेत्र को सुचारू रूप से चिह्नित किया जा सके।”

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आर्मी पब्लिक स्कूलों में पंजाबी की पढ़ाई जारी रहेगी, संस्कृत लागू करने का फैसला वापस

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आर्मी पब्लिक स्कूलों में पंजाबी भाषा की पढ़ाई पहले की तरह जारी रहेगी। आर्मी वेलफेयर एजुकेशन सोसाइटी (AWES), जालंधर ने अपने उस पहले के फैसले को वापस ले लिया है, जिसमें स्कूलों में संस्कृत को अनिवार्य रूप से लागू करने की बात कही गई थी। अब छठी से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थी पहले की तरह अपनी मातृभाषा पंजाबी की पढ़ाई जारी रख सकेंगे।

इस फैसले का स्वागत करते हुए पंजाब चेतना मंच के अध्यक्ष डॉ. लखविंदर सिंह जौहल, महासचिव सतनाम सिंह मानक और संगठन सचिव प्रिंसिपल गुरमीत सिंह पलाही ने कहा कि नए नियमों के तहत छठी से आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों को पंजाबी या संस्कृत में से किसी एक भाषा का चयन करने की स्वतंत्रता होगी। इसके साथ ही वे अंग्रेजी और हिंदी से जुड़े निर्धारित विषयों का भी चयन कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि नौवीं कक्षा में अंग्रेजी, हिंदी और संस्कृत के विकल्प उपलब्ध रहेंगे, जबकि दसवीं कक्षा की व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

डॉ. जौहल ने पंजाबी भाषा को बचाने के लिए चलाए गए अभियान का समर्थन करने वाले सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों, विद्यार्थियों और अभिभावकों का धन्यवाद किया। उन्होंने भारत सरकार के राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष तरलोचन सिंह और राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को लिखे गए उनके पत्र ने इस मामले के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इसके अलावा पंजाबी भाषा से जुड़े विभिन्न संगठनों और सामाजिक संस्थाओं ने भी लगातार इस मुद्दे को उठाया। कानूनी और सामाजिक स्तर पर किए गए प्रयासों के साथ-साथ केंद्रीय पंजाबी लेखक संघ के नेतृत्व में चंडीगढ़ में प्रदर्शन भी किए गए। पंजाब चेतना मंच ने पंजाब के मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को भी पत्र लिखकर स्कूलों में पंजाबी भाषा को बनाए रखने की मांग की थी। अब इस फैसले को पंजाबी भाषा के संरक्षण और उसके अधिकारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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श्री गुरु हरिकृष्ण साहिब जी के प्रकाश पर्व पर श्री हरिमंदिर साहिब में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

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श्री गुरु हरिकृष्ण साहिब जी के पावन प्रकाश पर्व के अवसर पर सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत वातावरण देखने को मिल रहा है। पंजाब ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु माथा टेकने के लिए पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं ने पवित्र सरोवर में स्नान कर गुरबाणी कीर्तन का आनंद लिया और गुरु घर का आशीर्वाद प्राप्त किया।

श्री हरिमंदिर साहिब के मैनेजर गुरिंदर सिंह देवीदासपुरा ने समस्त संगत को प्रकाश पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि श्री गुरु हरिकृष्ण साहिब जी ने बहुत कम आयु में ही मानवता की सेवा, दया, विनम्रता और परोपकार का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि गुरु साहिब की शिक्षाएं आज भी पूरी मानवता को सेवा, प्रेम और करुणा का संदेश देती हैं। उन्होंने संगत से गुरु साहिब के उपदेशों को अपने जीवन में अपनाने और जरूरतमंदों की सेवा के लिए सदैव आगे आने की अपील की।

प्रकाश पर्व के विशेष अवसर पर रात्रि के समय सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब में विशेष रोशनी और आतिशबाजी का आयोजन किया जाएगा। रोशनी से जगमगाता श्री हरिमंदिर साहिब श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा और इस पावन पर्व की रौनक को और भी भव्य बना देगा।

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नीति आयोग की रैंकिंग में पंजाब ने केरल को पछाड़ा; शिक्षा मंत्री ने विधानसभा में चार सालों का रिपोर्ट कार्ड पेश किया

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प्रदेश में शिक्षा में ऐतिहासिक बदलाव का दावा करते हुए पंजाब के शिक्षा मंत्री स. हरजोत सिंह बैंस ने आज कहा कि पंजाब ने केरल को पछाड़कर ‘नीति आयोग स्कूल एजुकेशन क्वालिटी इंडेक्स 2026’ में शीर्ष स्थान हासिल किया है। जहां वर्ष 2022 में 8,000 स्कूलों में चारदीवारी नहीं थी और लगभग 4 लाख विद्यार्थी ताटों (चटाइयों) पर बैठकर पढ़ने को मजबूर थे, वहीं आज पंजाब के सरकारी स्कूलों के 882 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा पास की है और पंजाब पहली से 12वीं कक्षा तक ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ को मुख्य विषय के रूप में शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। यह वह बदलाव है जिसका वादा आप की अगुवाई वाली पंजाब सरकार ने किया था।

विधायक प्रो. जसवंत सिंह गज्जनमाजरा द्वारा लाए गए शिक्षा संबंधी प्रस्ताव पर बहस में भाग लेते हुए, स्कूल शिक्षा मंत्री स. हरजोत सिंह बैंस ने जुलाई 2022 में पदभार संभालने के समय स्कूलों की खराब स्थिति को याद करवाया।

बुनियादी ढांचे के प्रारंभिक सर्वेक्षण के नतीजों के बारे में बताते हुए स. बैंस ने कहा कि 8,000 से अधिक स्कूलों में चारदीवारी नहीं थी, 3,200 में उपयोग योग्य बाथरूम नहीं थे और लगभग 4 लाख बच्चे जमीन पर बैठने को मजबूर थे। पाठ्यपुस्तकें अक्टूबर-नवंबर में स्कूलों तक पहुंचती थीं, जिससे शैक्षणिक सत्र के कई महीने बर्बाद हो जाते थे।

किसी भी सरकारी शिक्षक से इसकी पुष्टि करने की चुनौती देते हुए उन्होंने आगे कहा, “अब वही पाठ्यपुस्तकें 15 फरवरी तक जिला मुख्यालयों तक पहुंच जाती हैं और 31 मार्च तक वितरित कर दी जाती हैं।”

अपने शासन मॉडल के बारे में बताते हुए स. बैंस ने कहा कि उन्होंने पंजाब के हर जिले के 2,000 से अधिक सरकारी स्कूलों का निजी तौर पर दौरा किया है, जिनमें सीमावर्ती स्कूल, जीरो-लाइन से सटे गांव और दूर-दराज के क्षेत्र शामिल हैं।

उन्होंने सदन को बताया कि सरकार का प्रमुख ‘मिशन समरथ’ भारत के सबसे बड़े बुनियादी शिक्षा कार्यक्रमों में से एक के रूप में उभरा है। इसके लेवल बेस्ड टीचिंग मॉडल के तहत, हर बच्चे को अच्छी तरह पढ़ना, लिखना और गणित सिखाना सुनिश्चित करने के लिए विद्यार्थियों को ग्रेड के बजाय उनकी सीखने की क्षमता के अनुसार समूहों में बांटा जाता है।

स. हरजोत बैंस ने कहा, “जब मैंने सितंबर-अक्टूबर 2022 में स्कूलों का दौरा किया, तो मैंने 8वीं कक्षा के ऐसे विद्यार्थी भी देखे जो सामान्य वाक्य भी नहीं लिख सकते थे। कुछ विद्यार्थी सामान्य जोड़ और घटाव नहीं कर सकते थे। हमने इन विद्यार्थियों की पहचान की और इन्हें तीसरी कक्षा के सिलेबस के स्तर से पढ़ाया। आज वे बहुत सुधार कर रहे हैं।” उन्होंने आगे बताया कि इस कार्यक्रम के तहत अब सालाना लगभग 12 लाख विद्यार्थियों और 70,000 से अधिक शिक्षकों को कवर किया जाता है।

सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के प्रदर्शन में हुए सुधार के बारे में स. हरजोत बैंस ने सदन को बताया कि पंजाब के सरकारी स्कूलों से नीट-यू.जी. परीक्षा पास करने वालों की संख्या वर्ष 2021 में मात्र 80 से बढ़कर वर्ष 2026 में 882 हो गई है। उन्होंने कहा कि ये नतीजे ‘पंजाब अकादमिक कोचिंग फॉर एक्सीलेंस’ (पेस) पहल का स्पष्ट परिणाम हैं।

उन्होंने आगे कहा, “पंजाब सरकार की शिक्षा क्रांति ने विद्यार्थियों के लिए उम्मीद की नई किरण जगाई है।” स. बैंस ने आगे कहा कि मजीठा में सरकारी स्कूलों के छह विद्यार्थियों और दीनानगर में 17 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा पास की है। ये कोई प्राइवेट कोचिंग के आंकड़े नहीं, बल्कि हमारे सरकारी स्कूलों की महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं।

उन्होंने एक साधारण परिवार से संबंधित लड़की हरनूरप्रीत कौर का विशेष जिक्र किया, जिसने अपनी श्रेणी में ऑल इंडिया रैंक 3140 हासिल की, जो आज के सरकारी स्कूलों की काबिलियत को दर्शाता है।

विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने पलटवार किया, “अगर आप चाहते हैं तो मुझे व्यक्तिगत तौर पर निशाना बनाएं। सरकारी स्कूलों को क्यों निशाना बना रहे हो? कुछ नकारात्मक सोच वाले लोगों द्वारा गढ़े गए झूठे प्रचार ने लोगों को पहले ही सरकारी स्कूलों से दूर कर दिया है।”

सरकारी स्कूलों में घटती दाखिला दर से संबंधित सवालों का जवाब देते हुए स. बैंस ने कहा कि यह रुझान सिर्फ पंजाब तक ही सीमित नहीं था, बल्कि कोविड के बाद देश भर में देखा गया है।

उन्होंने आगे कहा, “ऑल इंडिया आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के दाखिले की संख्या 1.76 करोड़ तक घटी है। कोविड के दौरान, सरकारी स्कूलों में दाखिला वास्तव में बढ़ा था। परंतु उसके बाद, हर जगह यह संख्या घटी है।”

उदाहरण देते हुए स. बैंस ने कहा कि बिहार में 2.49 करोड़ विद्यार्थी थे, जो पहले घटकर 2.13 करोड़ रह गए और इस साल यह और घटकर 1.95 करोड़ रहने का अनुमान है। इसी तरह उत्तर प्रदेश में, यह संख्या पहले 4.44 करोड़ से घटकर 4.16 करोड़ हो गई है, जो इस साल 4.1 करोड़ रहने का अनुमान है। इसके अलावा महाराष्ट्र में यह संख्या 2.32 करोड़ से घटकर 2.13 करोड़ रह गई।

स. बैंस ने कहा, “उन्होंने भारत सरकार की 2023 में शुरू की गई अपार आई.डी. पहल का भी हवाला दिया। ‘अब हर विद्यार्थी के पास एक अनोखी आई.डी. है। पहले एक बच्चा छह स्कूलों में दाखिल होता था परंतु किसी में भी नहीं पढ़ रहा था। इसी कारण अब ये आंकड़े सही हो रहे हैं।’”

शिक्षा मंत्री ने विस्तार से बताया कि 19,125 सरकारी स्कूलों में 2,638 करोड़ रुपये के बुनियादी ढांचे के काम किए गए हैं। इस साल विश्व बैंक से और सुधारों के लिए 1,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त मंजूरी ली गई है।

स. हरजोत बैंस ने कई ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ की सूची दी, जिनका पूरी तरह कायाकल्प किया गया है। उन्होंने लुधियाना के शहीद सुखदेव थापर के नाम पर बने स्कूल ऑफ एमिनेंस का हवाला दिया, जिसके बारे में उन्होंने कहा कि कभी इसे पूरी तरह उपेक्षित कर दिया गया था। उन्होंने कहा, “आज इस स्कूल को विश्व स्तरीय बनाने के लिए 18 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इस साल स्कूल के 17 विद्यार्थी नीट परीक्षा भी पास कर चुके हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार सरकारी स्कूलों को आखिरी विकल्प से पहली पसंद में बदल रही है। हम यहीं नहीं रुक रहे। हम हर साल और ऊंचे लक्ष्य निर्धारित कर रहे हैं।

स. बैंस ने कहा, “शिक्षकों को अब सरकारी स्कूल चलाने के लिए फंड मांगने की जरूरत नहीं। हमने स्कूलों के लिए आवश्यक फंड मुहैया करवाए हैं, पिछली सरकारों की तरह नहीं जब शिक्षकों को फंड मांगने जाना पड़ता था। अपमान का दौर अब खत्म हो गया है।”

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