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Punjab

आप सरकार ने गुरु रविदास जी के 650वें प्रकाश पर्व के लिए वाराणसी के लिए हर महीने तीर्थ यात्रा ट्रेन चलाने का प्रस्ताव रखा, आईआरसीटीसी को लिखा पत्र

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गुरु रविदास जी के आने वाले 650वें प्रकाश पर्व को देखते हुए, मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने ‘मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा स्कीम’ के तहत पंजाब से वाराणसी के लिए एक स्पेशल तीर्थ यात्रा ट्रेन चलाने का प्रस्ताव रखा है।

पंजाब कल्चर और टूरिज्म विभाग के एडवाइजर दीपक बाली ने कहा कि राज्य सरकार ने इस प्रोजेक्ट को पूरी तरह से लागू करने के लिए इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (आईआरसीटीसी), चंडीगढ़ से संपर्क किया है। प्रस्ताव में कहा गया है कि पंजाब के अलग-अलग शहरों से हर महीने 1000 से 1200 तीर्थयात्री इस धार्मिक यात्रा पर जाएंगे।

उन्होंने कहा कि यह तीर्थयात्रा पंजाब में एक तय जगह से महीने में एक बार चलाई जाएगी और अप्रैल से नवंबर तक सेवाएं चलाने की योजना है। एक स्पेशल ट्रेन का इंतज़ाम किया जाएगा जिसमें वाराणसी में रहने, खाने और लोकल ट्रांसपोर्ट समेत पूरी सुविधाएँ दी जाएँगी, ताकि तीर्थयात्रियों के लिए एक आरामदायक और अच्छी तरह से बढ़िया प्रबंध वाली तीर्थयात्रा पक्की हो सके।

पंजाब सरकार ने आईआरसीटीसी से अपील की है कि वह इस प्रस्ताव की जांच करके जल्द से जल्द जवाब दे ताकि आपसी सहमति से एक समझौता पत्र साइन किया जा सके और इस इनिशिएटिव को बिना किसी देरी के लागू किया जा सके।

बाली ने कहा कि गुरु रविदास जी के 650वें प्रकाश पर्व के सिलसिले में वाराणसी के लिए नियमित यात्राएँ आयोजन करने का फ़ैसला खास अहमियत रखता है। यह लोगों के लिए धार्मिक तीर्थयात्राओं को आसान बनाने के लिए माननीय सरकार के प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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Chandigarh

ट्रिब्यून चौक पर अगले महीने से बनेगा फ्लाईओवर:सिंगला कंपनी को मिला 147.98 करोड़ का ठेका, चंडीगढ़ को जाम से मिलेगी राहत

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शहर के सबसे व्यस्त ट्रिब्यून चौक पर फ्लाईओवर निर्माण की प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। प्रोजेक्ट के लिए वित्तीय बोलियां (Financial Bids) खोल दी गई हैं, जिसमें सिंगला कंस्ट्रक्शंस लिमिटेड ने यह काम लिया है।

कंपनी ने 147.98 करोड़ रुपये की सबसे कम बोली लगाकर ठेका लिया है। यह रकम प्रशासन की अनुमानित लागत 214.66 करोड़ रुपये से करीब 31 प्रतिशत कम है। अब केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से अनुमति मिलते ही अगले महीने से काम शुरू हो जाएगा।

12 कंपनियों ने किया था आवेदन

इस प्रोजेक्ट के लिए देश की 12 निर्माण कंपनियों ने आवेदन किया था। जांच के बाद 8 कंपनियां तकनीकी रूप से फिट पाई गईं। 4 कंपनियों के टेंडर तकनीकी मानकों पर खरा न उतरने के कारण खारिज कर दिए गए।

1.6 किलोमीटर का होगा कॉरिडोर

अधिकारियों के अनुसार, यह सिर्फ एक फ्लाईओवर नहीं बल्कि एक इंटीग्रेटेड कॉरिडोर होगा, जिसे 30 महीने में पूरा करने का लक्ष्य है। यह 1.65 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर होगा। फ्लाईओवर की लंबाई 1442 मीटर है। इसमें 519 मीटर का अंडरपास बनेगा।

8 साल से अटका था मामला

इस प्रोजेक्ट की शुरुआत 2016 में हुई थी और 2019 में इसे आधिकारिक मंजूरी मिली थी। लेकिन पर्यावरण प्रेमियों की याचिका पर हाईकोर्ट ने पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी थी, जिससे यह प्रोजेक्ट 5 साल तक ठंडे बस्ते में रहा। अप्रैल 2024 में हाईकोर्ट से हरी झंडी मिलने के बाद अब इसके निर्माण का रास्ता साफ हुआ है।

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Punjab

Punjab के स्कूलों में ऑनलाइन ट्रैकर सिस्टम शुरू: बच्चों की गैरहाजिरी पर पेरेंट्स को आएगा मैसेज, शिक्षा मंत्री ने समर्थ प्रोजेक्ट किया लॉन्च

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पंजाब सरकार की तरफ से आज से राज्य के 18,000 सरकारी स्कूलों में ऑनलाइन अटेंडेंस ट्रैकर सिस्टम लागू किया गया है। जिससे अब बच्चों के स्कूल से गैरहाजिर रहने पर उनके पेरेंट्स के पास मैसेज जाएगा। अगर बच्चा तीन दिन से ज्यादा गैरहाजिर रहता है, तो स्कूल की तरफ से पेरेंट्स को कॉल की जाएगी। यदि यह सिलसिला बढ़ता है तो 15 दिन के बाद जिला व फिर मुख्यालय के अधिकारी बात करेंगे।

यह दावा पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने किया। उन्होंने बताया कि आज यह सिस्टम लॉन्च कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि इससे बच्चों की सिक्योरिटी भी मजबूत होगी। इसमें सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले सारे स्टूडेंट्स कवर होंगे। सरकारी स्कूलों में 30 लाख स्टूडेंट्स पढ़ते हैं। वहीं, समर्थ प्रोजेक्ट लॉन्च किया गया है।

प्राइवेट स्कूलों की तरह किताबें मुहैया करवाईं

शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि 2022 में जब वह मंत्री बने थे तो उन्हें पता चला था कि सितंबर-अक्टूबर तक किताबें स्कूलों में नहीं पहुंचती थीं और फोटोस्टेट से बच्चों को पढ़ाया जाता था। लेकिन आप सरकार के आते ही सिस्टम में सुधार किया गया। इसके लिए स्ट्रेटजी बनाकर काम किया गया है। इस बार फरवरी में किताबें स्कूलों तक पहुंचाई गईं। इसके बाद अब प्राइवेट स्कूलों की तरह किताबों के बंडल बनाकर एक अप्रैल को बच्चों को सौंपा गया है, जिससे अब पढ़ाई शुरू हो गई है।

शिक्षा क्षेत्र में नंबर एक पर

शिक्षा विभाग का दावा है कि PARAKH 2024 सर्वे में पंजाब शिक्षा के क्षेत्र में देश में नंबर एक स्थान पर रहा है। पिछले तीन वर्षों की उपलब्धियों के बाद अब मिशन समर्थ के अगले चरण का शुभारंभ किया जा रहा है। विभाग के अनुसार, चार वर्षों के कार्यकाल में शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार हुए हैं और स्कूलों में कई नई पहल शुरू की गई हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।

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शिक्षा विभाग ने यह काम भी कियाQuoteImage

पंजाब का शिक्षा बजट बढ़कर 19,279 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। राज्य सरकार ने ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ जैसी महत्वाकांक्षी योजना के तहत 118 आधुनिक स्कूल स्थापित किए हैं। इसके अलावा, प्रिंसिपलों और शिक्षकों को सिंगापुर, फिनलैंड तथा IIM अहमदाबाद में अंतरराष्ट्रीय स्तर की ट्रेनिंग दी गई है। सरकार ने 14,500 से अधिक नए शिक्षकों की नियुक्ति भी की है। NAS 2024 की रैंकिंग में पंजाब देश में शीर्ष स्थान पर रहा, जबकि सरकारी स्कूलों के रिकॉर्ड संख्या में छात्रों ने JEE Main जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल की।

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Punjab

पंजाब सरकार ने 11 अप्रैल को बुलाई कैबिनेट मीटिंग:दोपहर तीन बजे सीएम रिहायश पर होगी, स्पेशल सेशन को लेकर बनाई जाएगी स्ट्रेटजी

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बेअदबी की घटनाओं को लेकर बने कानून को मूर्त रूप देने को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। पंजाब सरकार ने 13 अप्रैल को विधान सभा का विशेष सत्र बुलाया हैं। जिसमें सरकार जागत जोत गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट 2008 में संशोधन करके इसमें सजा का प्रावधान करना चाहती है।

इस संशोधन बिल पर चर्चा करने के लिए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 11 अप्रैल शनिवार को कैबिनेट बैठक बुला ली है। यह बेहद संजीदा बिल हैं। क्योंकि जागत जोत गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट 2008 राज्य का कानून हैं।

इसके तहत सरकार ने गुरु ग्रंथ साहिब के प्रकाशन, वितरण और बीड़ के प्रबंधन का अधिकार शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) को दिया है। ताकि सिख रहत मर्यादा के अनुसार पवित्रता बनी रहे। अब सरकार इस बिल में संशोधन करके उसमें सजा का प्रावधान भी शामिल करना चाहती है।

बीते साल विधेयक किया गया था पेश

बता दें कि 15 जुलाई 2025 को पंजाब सरकार पंजाब पवित्र धर्मग्रंथों के विरुद्ध अपराधों की रोकथाम विधेयक, 2025 पेश किया था। इस पर बहस के बाद इसे सेलेक्ट कमेटी को भेज दिया है। सेलेक्ट कमेटी को 6 माह में अपनी रिपोर्ट देनी थी। इस बिल में सभी धार्मिक ग्रंथों को शामिल किया गया था। जिसके तहत 10 साल से लेकर उम्र कैद तक की सजा का प्रावधान किया गया था।

जानकारी के अनुसार सरकार ने इस बिल को ठंडे बस्ते में डाल कर जागत जोत गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट 2008 में संशोधन करने का फैसला किया है। सरकार मान रही हैं कि इस बिल में संशोधन करने से श्री गुरु ग्रंथ साहिब को शामिल किया जाएगा। जबकि पवित्र धर्मग्रंथों के विरुद्ध अपराधों की
रोकथाम विधेयक, 2025 में सभी ग्रंथ आते थे।

विधेयक राष्ट्रपति को भेजना जरूर नहीं

बता दें कि मुख्यमंत्री भगवंत मान पहले ही यह दावा कर चुके है कि यह स्टेट बिल है, इसलिए इसे राष्ट्रपति को भेजने की जरूरत नहीं है। जबकि माहिरों का कहना है कि 2008 का कानून केवल रेगुलेटरी कानून है जबकि अगर इसमें गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी किए जाने पर सजा का प्रविधान दस साल या इससे ज्यादा किया जाता है तो यह बिल राष्ट्रपति के पास पारित होने के लिए भेजना पड़ेगा।

उनका यह भी कहना है कि रेगुलेटरी एक्ट को पीनल एक्ट में बदला तो जा सकता है लेकिन तब यह क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम में आ जाएगा। फिर यह स्टेट एक्ट नहीं रहेगा बल्कि समवर्ती सूची में आ जाएगा। ऐसा नहीं है कि राज्य यह कानून बना नहीं सकता लेकिन अगर यह केंद्रीय कानून से टकराया तो केंद्रीय कानून ही माना जाएगा।

13 अप्रैल को विधानसभा में होगा पेश

यही कारण हैं कि शिरोमणि अकाली दल अपने सरकार के दौरान 2016 में लाए गए बिल को मंजूरी दिलवाने की मांग कर रही हैं तो कांग्रेस अपने कार्यकाल के दौरान 2018 में लाए गए बिल को कानून बनाने की मांग कर रही है। बता दें कि 2016 के बिल में श्री गुरु ग्रंथ साहिब के अपमान पर उम्र कैद और अन्य धार्मिक ग्रंथों के अपमान पर दस साल की सजा का प्रविधान किया गया था।

2018 में सरकार ने इसमें संशोधन करते हुए सभी धर्मों को शामिल कर लिया लेकिन आठ साल बीतने के बावजूद राष्ट्रपति से इसे मंजूरी नहीं दी है। 11 अप्रैल को बुलाई गई कैबिनेट बैठक में बिल के अंतिम स्वरूप को मंजूरी मिलेगी। जिसे बाद में 13 अप्रैल को विधान सभा में पेश किया जाएगा।

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