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AAP नेताओं ने संसद में पंजाब के ज़रूरी मुद्दों को नज़रअंदाज़ करने के लिए राघव चड्ढा की आलोचना की
आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के वरिष्ठ नेताओं, जिनमें वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा, आप पंजाब प्रधान अमन अरोड़ा और आप पंजाब के मुख्य प्रवक्ता कुलदीप सिंह धालीवाल ने राज्यसभा मेंबर राघव चड्ढा पर संसद में पंजाब के ज़रूरी मुद्दे उठाने में असफल रहने पर जमकर निशाना साधा है।
नेताओं ने इस बात पर ज़ोर दिया कि बार-बार बातचीत के बावजूद, 8,500 करोड़ रुपये का आरडीएफ बकाया, 60,000 करोड़ रुपये का जीएसटी नुकसान और 1,600 करोड़ रुपये की बाढ़ राहत जैसे गंभीर मुद्दे नहीं उठाए गए। इस चुप्पी को पंजाब के लोगों और फतवे के साथ धोखा बताते हुए, नेताओं ने कहा कि किसानों की चिंताओं और बाढ़ पीड़ितों की बुरी हालत को न उठाना ज़मीनी हकीकत से पूरी तरह अलग होना दिखाता है।
संसद में रिप्रेजेंटेशन पर चिंता जताते हुए, पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि राघव चड्ढा को पंजाब के विधायकों ने इस उम्मीद से राज्यसभा के लिए चुना था कि वह नेशनल लेवल पर राज्य की चिंताओं को मज़बूती से प्रतिनिधित्व करेंगे। हालांकि, उन्होंने पंजाब से जुड़ा एक भी संवेदनशील मुद्दा उठाने से पूरी तरह परहेज किया।
मुख्य वित्तीय मुद्दों की सूचि देते हुए हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि वे लगभग 8,500 करोड़ रुपये का बकाया ग्रामीण विकास फंड, जीएसटी लागू होने के बाद पंजाब को लगभग 60,000 करोड़ रुपये का भारी जीएसटी नुकसान और जीएसटी मुआवजे में बदलाव के कारण 5,000-6,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय नुकसान सहित कई ज़रूरी मुद्दे उठाने में असफल रहे। नेशनल हेल्थ मिशन के तहत फंड का मुद्दा भी ठीक से नहीं उठाया गया।
बाढ़ राहत का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भयानक बाढ़ के बाद प्रधानमंत्री द्वारा पंजाब के लिए 1,600 करोड़ रुपये की राहत की घोषणा के बावजूद, उस रकम का एक भी हिस्सा पंजाब के खजाने में नहीं पहुंचा। ये सभी मुद्दे बार-बार राघव चड्ढा के ध्यान में लाए गए, फिर भी उन्होंने संसद में इनमें से एक भी मुद्दा नहीं उठाया।
निराशा जताते हुए पंजाब के कैबिनेट मंत्री ने कहा कि हमने उन्हें उम्मीद के साथ राज्यसभा भेजा था, लेकिन उन्होंने प्रधानमंत्री के सामने इन मुद्दों पर एक बार भी मुंह नहीं खोला। यह साफ तौर पर समझौते को दिखाता है। आम आदमी पार्टी एक ऐसी पार्टी है जो आम लोगों को मौके देती है, लेकिन ऐसे ज़रूरी मुद्दों पर चुप रहना पंजाब और उसके लोगों के साथ विश्वासघात है।
इस बीच, आप पंजाब के प्रधान अमन अरोड़ा ने कहा कि राघव चड्ढा को अरविंद केजरीवाल और पार्टी का रोल याद रखना चाहिए कि उन्होंने उन्हें राजनीतिक तौर पर ऊपर उठाया है। उन्हें पंजाब के ज्वलंत मुद्दे जैसे बकाया आरडीएफ और फंड और बाढ़ राहत पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, उन्होंने ऐसे मुद्दे उठाए जो पूरे देश ने देखे हैं।
पार्टी के सिद्धातों को दोहराते हुए, उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि आम आदमी पार्टी की स्थापना लोगों के हक के लिए बिना डरे लड़ने के सिद्धों की गई थी और उस रास्ते से कोई भी भटकाव सोचा भी नहीं जा सकता और मंज़ूर नहीं है। राघव चड्ढा को खुद आत्म मंथन करना चाहिए और अन्याय के विरुद्ध खड़े हों और लोगों के हकों की वकालत करने के पार्टी कि मुख्य सिद्धांत को याद रखना चाहिए।
दूसरी ओर, आप के प्रवक्ता और विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल ने कहा कि पंजाब में बाढ़ से प्रभावित लोगों की बुरी हालत पर राघव चड्ढा की चुप्पी से बहुत निराशा हुई है। पार्टी नेताओं और प्रभावित लोगों ने उनसे बार-बार संसद में मुआवज़े का मुद्दा उठाने की रिक्वेस्ट की थी, खासकर प्रधानमंत्री द्वारा अनाउंस किए गए 1,600 करोड़ रुपये की राहत, जो अभी तक नहीं मिली है।
एक बाढ़ प्रभावित गांव में खड़े होकर उन्होंने कहा कि यह साफ़ है कि लोगों को अपने घरों, फसलों और इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी नुकसान हुआ है, फिर भी उनकी आवाज़ कभी राष्ट्रीय स्तर पर नहीं उठाई गई। हमें उम्मीद थी कि वे पंजाब के बाढ़ पीड़ितों के लिए इंसाफ़ और राहत की ज़ोरदार मांग करेंगे, लेकिन उनकी चुप्पी बहुत निराशाजनक रही है। पंजाब के लोग इस अनदेखी को नहीं भूलेंगे।
आप नेताओं ने मिलकर कहा कि पंजाब के मुद्दों को हर मंच पर ज़ोरदार तरीके से उठाया जाना चाहिए, और ऐसा न करना लोगों और आप को मिले जनादेश के साथ धोखा होगा।
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मोगा की रैली में CM मान का ऐलान:‘30 दिन तकसीम’ योजना शुरू; आढ़तियों की हड़ताल पर सख्त रुख; 2027 के लिए मांगा जनादेश
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आज (शनिवार) को मोगा में एक विशाल रैली को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने आढ़तियों की हड़ताल से निपटने के लिए गेहूं खरीद में सहकारी समितियों की मदद लेने और ’30 दिन तकसीम’ योजना शुरू करने सहित कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। मुख्यमंत्री ने 2027 के चुनावों के लिए जनादेश भी मांगा।
मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों कांग्रेस, भाजपा और शिरोमणि अकाली दल पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके नेता जमीनी हकीकत से दूर हैं। मान ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि “ओवरकोट या टाइट पजामा पहनने वाले” लोग आधी रात को खेतों में सिंचाई करने वाले किसानों की समस्याओं को नहीं समझ सकते।
सीएम मान बोले- किसानों को नहीं होगी कोई परेशानी
आढ़तियों की हड़ताल के संदर्भ में मुख्यमंत्री मान ने स्पष्ट किया कि सरकार गेहूं की खरीद और उठान में किसानों को कोई परेशानी नहीं आने देगी। उन्होंने घोषणा की कि हड़ताल में शामिल न होने वाले आढ़तियों को अगले खरीफ सीजन में धान के आवंटन में प्राथमिकता दी जाएगी।
उन्होंने यह भी बताया कि सहकारी समितियों की सूची तैयार कर ली गई है, जो आवश्यकता पड़ने पर गेहूं खरीद का कार्य संभालेंगी। मुख्यमंत्री ने कहा, “हर एक दाने की सही तरीके से खरीद और उठान सुनिश्चित किया जाएगा।”
13 अप्रैल से शुरू होगी तकसीम योजना
मुख्यमंत्री ने एक अन्य महत्वपूर्ण घोषणा में बताया कि 13 अप्रैल से ’30 दिन तकसीम’ योजना शुरू की जाएगी। इस योजना के तहत किसानों की जमीन का बंटवारा आवेदन जमा करने के 30 दिनों के भीतर किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य लंबे समय से लंबित भूमि विवादों को समाप्त करना है।
अपनी सरकार के कामकाज को 2027 के चुनावों का आधार बताते हुए मुख्यमंत्री मान ने कई उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने 90 प्रतिशत से अधिक घरों को मुफ्त बिजली प्रदान की है, लगभग 65,000 सरकारी नौकरियां दी हैं, और 43,000 किलोमीटर सड़कों की मरम्मत व कारपेटिंग की है। किसानों को दिन के समय सहित 8 घंटे बिजली की आपूर्ति भी सुनिश्चित की गई है।
सीएम मान बोले- नहर के पानी के उपयोग में हुई है उल्लेखनीय वृद्धि
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि राज्य में नहर के पानी के उपयोग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह 22 प्रतिशत से बढ़कर 78 प्रतिशत हो गया है, और आगामी खरीफ सीजन में इसे 90 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने बताया कि फसलों को बिजली के तारों से लगने वाली आग से बचाने के लिए भूमिगत बिजली वायरिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
भगवंत मान ने कहा कि उनके गांव में खेतों में लगे 1,100 से अधिक बिजली के खंभों को हटाकर अंडरग्राउंड फाइबर वायरिंग की जा रही है और इसे पूरे राज्य में लागू करने का लक्ष्य है। शिक्षा को “हर समस्या का समाधान” बताते हुए मान ने कहा कि सरकार स्कूल शिक्षा प्रणाली को मजबूत कर रही है।
ताकि बच्चों को बेहतर अवसर मिल सकें। उन्होंने यह भी घोषणा की कि सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए अब फिंगरप्रिंट की अनिवार्यता खत्म की जाएगी, क्योंकि मेहनतकश लोगों के हाथों के निशान अक्सर मिट जाते हैं।
सीएम मान ने कांग्रेस पर कसा तंज
सीएम मान रैली के दौरान मान अपने व्यंग्यात्मक अंदाज में नजर आए और कांग्रेस के राष्ट्रीय नेताओं पर स्थानीय नेतृत्व को न पहचानने को लेकर कटाक्ष किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सभी विपक्षी दल केवल आम आदमी पार्टी को निशाना बनाने के लिए एकजुट हो रहे हैं।
उन्होंने 32 लाख परिवारों को 10 लाख रुपए तक का स्वास्थ्य बीमा, मोहल्ला क्लीनिक और टोल प्लाजा हटाने जैसे कदमों का भी जिक्र किया। इस मौके पर दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी रैली को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि मोगा में उमड़ी भारी भीड़ इस बात का संकेत है कि आम आदमी पार्टी 2027 में भारी बहुमत के साथ दोबारा सत्ता में लौटेगी।
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भगवंत मान सरकार ने रिकॉर्ड कायम किया, पंजाब के इतिहास में पहली बार सिर्फ 4 सालों में 65,264 सरकारी नौकरियां दी गईं
आम आदमी पार्टी (आप) सरकार की ‘शानदार चार साल भगवंत मान दे नाल’ श्रृंखला के तहत पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मुख्य क्षेत्रों में आप सरकार की कारगुजारी पर प्रकाश डालते हुये अपनी सरकार का रिपोर्ट कार्ड पेश करते हुए इसे पारदर्शी, जवाबदेह और जन-केंद्रित शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव बताया।
सरकारी क्षेत्र में रोजगार और प्रशासन में नया मानदंड स्थापित करते हुए भगवंत मान सरकार ने पिछली सरकारों की कमियों को दूर करते हुए युवाओं को आयु सीमा में 5 साल की छूट दी और केवल चार वर्षों में रिकॉर्ड 65,264 सरकारी नौकरियां प्रदान कीं, जो पंजाब के इतिहास में दी गई अब तक की सबसे अधिक नौकरियां हैं।
शिक्षा, पुलिस, बिजली, स्वास्थ्य और स्थानीय निकायों सहित प्रमुख क्षेत्रों में पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के जरिए सरकार ने पक्षपात की पुरानी परंपराओं से दूरी बनाई है और अब आम नागरिकों को बिना रिश्वत या सिफारिश के नौकरियां दी जा रही हैं।
इसके साथ ही सेवा केंद्रों में हर महीने 30 लाख लोगों की पहुंच और 8.20 करोड़ से अधिक सेवाओं की डिजिटल डिलीवरी के माध्यम से ‘डिजिटल पंजाब’ की दिशा में तेजी से प्रगति हो रही है, जो पारदर्शी प्रशासन, कौशल विकास और प्रणालीगत सुधारों को दर्शाती है जिसका मकसद पंजाब के भविष्य को नई दिशा देना है।
विभिन्न विभागों के रिपोर्ट कार्ड पेश करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब एक नए डिजिटल हब के रूप में उभर रहा है, जिसने अपने कामकाज में पारदर्शिता लाते हुए युवाओं के लिए सरकारी नौकरियों और अवसरों के नए रास्ते खोले हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पंजाब के इतिहास में पहली बार चार सालों में 65,264 सरकारी नौकरियां प्रदान की गई हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग में 16,308 नौकरियां, पंजाब पुलिस में 12,966 नौकरियां, बिजली विभाग में 8,765 नौकरियां, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और मेडिकल शिक्षा में 16,320 तथा स्थानीय निकाय विभाग में 5,771 लोगों को नौकरियां दी गई हैं।
उन्होंने आगे कहा कि इससे राज्य में युवाओं की विदेशों की ओर पलायन की प्रवृत्ति पर रोक लगी है और पंजाब के हर गांव, कस्बे और शहर के युवाओं को इन नौकरियों का लाभ हुआ है।
भर्ती में पारदर्शिता पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि सभी नौकरियां बिना किसी रिश्वत या पक्षपात के केवल मेरिट और योग्यता के आधार पर दी गई हैं। कोई पेपर लीक नहीं हुआ और न ही किसी भर्ती को अदालत में चुनौती दी गई है।
उन्होंने आगे कहा कि कई उम्मीदवारों को तो अलग-अलग विभागों में कई-कई बार नौकरियां भी मिली हैं और इनमें से अधिकांश युवा ये नौकरियां लेने के लिए विदेशों से लौटकर वापस आए हैं।
उन्होंने कहा कि पहले अदालतों में चुनौती के चलते भर्ती प्रक्रियाओं में देरी होना आम बात थी, जिसके चलते अक्सर कई उम्मीदवारों की उम्र निर्धारित सीमा को पार कर जाती थी। अब युवा आईईएलटीएस सेंटर्स में जाने की बजाय सरकारी नौकरियों की तैयारी को प्राथमिकता दे रहे हैं।
मौजूदा गवर्नेंस मॉडल की पिछली सरकारों से तुलना करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पिछली सरकारों ने आम लोगों के बजाय अपने ही परिवारों का पक्ष लिया, लेकिन राज्य की सरकार ने सबकी भलाई के लिए काम किया है, जिसके चलते प्राइवेट कंपनियों में भी सात लाख के करीब युवाओं को नौकरियां मिली हैं।
उन्होंने आगे कहा कि हुनर विकास मिशन शुरू किया गया है, जिसके तहत अमृतसर, बठिंडा, होशियारपुर, जालंधर और लुधियाना में पांच बहु-हुनर विकास केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों में अब तक 1.25 लाख युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है, जिनमें से 73,250 को रोजगार भी मिल गया है।
उन्होंने बताया कि माइक्रोसॉफ्ट और आईबीएम जैसी कंपनियों के साथ एआई, साइबर सिक्योरिटी और क्लाउड टेक्नोलॉजी में प्रशिक्षण के लिए एमओयू साइन किए गए हैं।
रोजगार पहलों का विवरण देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि 1,799 स्वरोजगार कैंपों ने 1,99,000 युवाओं को व्यवसाय शुरू करने के लिए ऋण हासिल करने में मदद की और 6,724 प्लेसमेंट कैंपों तथा नौकरी मेलों ने लाखों युवाओं को रोजगार हासिल करने में मदद की।
उन्होंने आगे कहा कि 11 प्रशिक्षण केंद्रों का आधुनिकीकरण करने के साथ-साथ तीन नए कैंप स्थापित किए गए हैं और 36,342 युवाओं को फौज, जल सेना, वायु सेना और अर्धसैनिक बलों में भर्ती के लिए प्रशिक्षण दिया गया है, जिनमें से 5,509 भर्ती हो चुके हैं।
रक्षा प्रशिक्षण संस्थानों के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि महाराजा रणजीत सिंह आर्म्ड फोर्सेज़ प्रिपरेटरी इंस्टीट्यूट ने 218 लड़कों को प्रशिक्षण दिया है, जिनमें से 106 एनडीए और अन्य अकादमियों के लिए चयनित हुए हैं तथा 85 कमीशंड अधिकारी बन चुके हैं। वहीं माई भागो आर्म्ड फोर्सेज़ प्रिपरेटरी इंस्टीट्यूट ने 199 लड़कियों को प्रशिक्षण दिया है, जिनमें से 24 कमीशंड अधिकारी बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि होशियारपुर में जल्द ही एक नया इंस्टीट्यूट शुरू किया जाएगा।
डिजिटल गवर्नेंस पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब डिजिटल पंजाब बनने की ओर कदम बढ़ा रहा है क्योंकि 544 सेवा केंद्र 465 से अधिक सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि लगभग 30 लाख लोग इन केंद्रों से हर महीने सेवाएं ले रहे हैं, यानी रोजाना एक लाख लोग सेवाओं का लाभ प्राप्त कर रहे हैं और अब तक 8,20 करोड़ डिजिटल सेवाएं प्रदान की जा चुकी हैं।
उन्होंने आगे कहा कि जन्म, मृत्यु और विवाह जैसे प्रमाण-पत्र एसएमएस और व्हाट्सएप के माध्यम से भेजे जा रहे हैं तथा एक करोड़ से अधिक प्रमाण-पत्र डिजिटल रूप में भेजे गए हैं। उन्होंने कहा कि सेवाओं की बकाया दर में भारी कमी आई है, जो 14 प्रतिशत से घटकर सिर्फ 0.52 प्रतिशत रह गई है।
नागरिक-केंद्रित पहलकमियों को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि ‘भगवंत मान सरकार तुम्हारे द्वार’ स्कीम दिसंबर 2023 में लुधियाना से शुरू की गई थी, जिसके तहत नागरिक 1076 हेल्पलाइन के माध्यम से घर बैठे 437 सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि यह स्कीम खास तौर पर बुजुर्गों और दफ्तरों में जाकर अपना काम करवाने में असमर्थ लोगों के लिए अधिक मददगार साबित हो रही है तथा अब तक 2.66 लाख लोग इसका लाभ ले चुके हैं।
आपदा राहत सुधारों के बारे में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब ने देश में अपनी तरह की पहली डिजिटल बाढ़ मुआवजा प्रणाली पेश की है। उन्होंने आगे कहा कि 3,700 गांवों में डिजिटल तरीके से मुआवजे का वितरण किया गया है, जिसने पूरी पारदर्शिता के साथ सही लोगों तक राहत पहुंचाने को सुनिश्चित किया है।
जमीन सुधारों के बारे में बात करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि ‘ईजी रजिस्ट्री’ ने तहसील दफ्तरों से भ्रष्टाचार को खत्म कर दिया है और जुलाई 2025 से अब तक छह लाख से अधिक दस्तावेज रजिस्टर किए गए हैं। उन्होंने आगे कहा कि बिचौलिया प्रणाली को खत्म कर दिया गया है और रजिस्ट्रेशन अब एक क्लिक से ऑनलाइन करवाई जा सकती है।
उन्होंने आगे कहा कि सब-रजिस्ट्रार 48 घंटों के अंदर-अंदर आपत्ति उठा सकते हैं और उच्च अधिकारी इसकी समीक्षा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि लोग जिले के किसी भी सब-रजिस्ट्रार दफ्तर से अपनी संपत्ति रजिस्टर करवा सकते हैं और व्हाट्सएप के माध्यम से रीयल-टाइम अपडेट्स प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि रिश्वतखोरी के लिए शिकायत दर्ज करवाने का ऑप्शन और ‘ड्राफ्ट माई डीड’ विशेषता भी प्रदान की गई है।
ट्रांसपोर्ट सुधारों को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब में पहली बार फेसलेस आरटीओ सेवाएं पेश की गई हैं, जो एक बड़ी डिजिटल तब्दीली को दर्शाती हैं। उन्होंने आगे कहा कि अब आरटीओ दफ्तरों में जाने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि लाइसेंस और आरसी समेत 56 सेवाएं पूरी तरह फेसलेस कर दी गई हैं, जो हेल्पलाइन 1076 और सेवा केंद्रों के माध्यम से उपलब्ध हैं, जिससे अब तक 25,236 लोगों को लाभ मिला है।
सरकार के भ्रष्टाचार विरोधी रुख को दोहराते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध ‘कतई ना बर्दाश्त’ नीति अपनाई है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में 23 मार्च, 2022 को भ्रष्टाचार विरोधी एक्शन लाइन भी शुरू की गई थी।
उन्होंने आगे कहा कि इस हेल्पलाइन पर 12,218 शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें से 10,820 संबंधित विभागों को और 1,398 विजीलेंस ब्यूरो को भेजी गई हैं। उन्होंने आगे कहा कि सही मामलों में कार्रवाई करते हुए 275 एफआईआर दर्ज की गई हैं और 341 मुलजिमों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें 16 गजेटेड अधिकारी, 161 सरकारी कर्मचारी, 88 पुलिस कर्मचारी और 77 आम व्यक्ति शामिल हैं। उन्होंने आगे कहा कि विजीलेंस ब्यूरो ने 487 छापेमारी करते हुए 1,215 मुलजिमों के विरुद्ध 534 केस दर्ज किए हैं।
इस संबंध में अधिक जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बताया कि 112 गजेटेड अफसरों, 162 सरकारी मुलाजिमों और 83 निजी व्यक्तियों समेत 357 व्यक्तियों के खिलाफ जांच चल रही है। उन्होंने आगे कहा कि 143 केसों में दोषियों को सजा सुनाई गई है और कई मुलाजिमों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह सिर्फ चार साल का रिपोर्ट कार्ड है और आने वाले समय में भी ऐसे लोग भलाई प्रयास जारी रहेंगे।
एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि देश की हालत इस हद तक अजीबोगरीब बन गई है और देश में जो भी बुरा हुआ है, उसके लिए नेहरू को, दिल्ली के लिए अरविंद केजरीवाल को और पंजाब व चंडीगढ़ के लिए मुझे जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि भाजपा सब कुछ सियासी विरोधियों के नाम पर थोपकर अपनी जिम्मेदारी से भाग रही है, जबकि 15 लाख रुपये के वादे से लेकर एमएसपी तक कुछ भी नहीं दिया गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भाजपा शब्दों की खेल और कठपुतलियों की तरह विरोधियों को निशाना बनाकर अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकती।
किसान भलाई के बारे में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि सरकार किसानों की जमीनों के नीचे हाई टेंशन तारें डालने की संभावना की पड़ताल कर रही है। उन्होंने आगे कहा कि यह प्रभावशाली योजना किसानों को लाभ पहुंचाने और फसलों के जोखिम को कम करने के लिए जल्द ही लागू की जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि यह प्रोजेक्ट मेरे पैतृक गांव से शुरू होगा जहां 2,000 एकड़ में 413 ट्यूबवेल मोटरें और 1,100 बिजली के खंभे मौजूद हैं, जिन्हें जमीनदोज करने का काम जल्द ही शुरू हो जाएगा।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि ‘जगत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सतिकार एक्ट, 2008’ में संशोधन के लिए बैसाखी के मौके पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया है। उन्होंने आगे कहा कि इस एक्ट के तहत बेअदबी की कोशिश करने वाले किसी भी व्यक्ति को न्यूनतम 10 साल से लेकर उम्र कैद तक की सख्त सजा का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित संशोधनों के बारे में संत समाज और कानूनी विशेषज्ञों से सलाह-मशविरा चल रहा है।
– मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने पंजाब में गेहूं की निर्विघ्न खरीद का भरोसा दिया, आढ़तियों की चिंताओं को केंद्र के पास बार-बार उठाया
आढ़तियों की चिंताओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि आढ़तियों को हरियाणा में कारोबार करने की पूरी छूट है और वे यह भी बताना चाहते हैं कि उनके मुद्दे सिर्फ केंद्र द्वारा ही हल किए जा सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि मैंने उनकी जायज मांगों को भारत सरकार के सामने कई बार उठाया है लेकिन केंद्र की ओर से इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने दोहराया कि राज्य सरकार गेहूं की निर्विघ्न और मुश्किल रहित खरीद को सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह वचनबद्ध है तथा सारे प्रबंध पहले ही कर लिए गए हैं।
इस मौके पर कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा और अन्य मौजूद थे।
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राघव चड्ढा बताएं, जनहित के मुद्दों पर मोदी सरकार के खिलाफ बोलने से क्यों डर रहे हैं? AAP का सवाल
आम आदमी पार्टी ने पंजाब से राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा को उपनेता पद से हटाने को समान्य कार्रवाई बताते उनके बयान पर पलटवार किया है। पार्टी ने राघव चड्ढा पूछा है कि वह देश और पार्टी से जुड़े मुद्दों पर भाजपा या मोदी सरकार के खिलाफ बोलने से क्यों डर रहे हैं? लगातार पार्टी लाइन के खिलाफ काम रहे थे। मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने और एलपीजी संकट पर सदन में बोलने से इन्कार करने समेत कई बार राघव चड्ढा ने पार्टी व्हिप का उल्लंघन किया। एक लंबे अरसे से राघव चड्ढा ने संसद में ऐसा कोई मुद्दा नहीं उठाया है, जिसमें उन्होंने मोदी सरकार से सवाल किए हों। पार्टी का कहना है कि केजरीवाल ने सबको निडरता और साहस से लड़ना सिखाया है, लेकिन राघव चड्ढा भाजपा और मोदी सरकार से सवाल करने से डर रहे हैं। ऐसे डर की राजनीति कैसे चलेगी?
भगवंत सिंह मान ने राघव चड्ढा के मुद्दे पर कहा कि यह पार्टी का फैसला है। पार्टियां इस तरह के फैसले लेती रहती हैं। संसद में अपना नेता और उपनेता बदलती रहती है। जब मैं पहली बार चुनाव जीता तो उस समय पार्टी ने डॉ. गांधी को नेता बनाया। कुछ समय बाद मैं भी पार्लियामेंट बोर्ड का नेता बना। यह पार्टी का निर्णय है। ऐसे छोटे-छोटे निर्णय होते रहते हैं। कई बार लोकसभा और राज्यसभा में सभी विपक्षी पार्टियों को एकमत में फैसला लेना होता है। जैसे सदन से वॉकआउट करना या सरकार की नीतियों का विरोध करना हो। अगर कोई व्यक्ति इन सामूहिक फैसलों का समर्थन नहीं करता है और पार्टी लाइन के विपरित जाता है तो फिर वह पार्टी के व्हिप के खिलाफ है। कोई भी पार्टी के व्हिप के खिलाफ जाएगा, तो उस पर कार्रवाई होगी।
‘‘आप’’ के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय सिंह ने कहा कि हम लोग अरविंद केजरीवाल के सच्चे सिपाही हैं और हमने अरविंद केजरीवाल से एक ही बात सीखी है- निडरता, हिम्मत और साहस के साथ लड़ना और संघर्ष करना। लेकिन बड़े अफसोस के साथ यह कहना पड़ रहा है कि देश के तमाम मुद्दों पर जब मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रस्ताव आता है, तो राघव चड्ढा उस पर हस्ताक्षर नहीं करते हैं। पश्चिम बंगाल में लोगों के वोट के अधिकार छीने जा रहे हैं। दिल्ली में हम लोगों ने देखा कि किस तरह से चुनाव आयोग का दुरुपयोग हुआ। जब पंजाब का मुद्दा होता है, तो उस वक्त वह खामोश रहते हैं, कुछ नहीं बोलते हैं। वह प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ आवाज नहीं निकालते हैं।
संजय सिंह ने आगे कहा कि जनहित से जुड़े जो मुद्दे, देश, आम आदमी पार्टी और पार्टी के कार्यकर्ताओं से जुड़े हुए हैं, उन पर राघव चड्ढा चुप रहते हैं। गुजरात में “आप” कार्यकर्ताओं को पीटा-मारा जाता है, उस पर वह नहीं बोलते हैं। पंजाब के तमाम अधिकारों को छीनने का काम मोदी सरकार करती है, उस पर भी वह कुछ नहीं बोलते हैं। जब बहुत सारे मुद्दों पर सदन से वॉकआउट करने का मामला आता है, तो उस समय वह वॉकआउट नहीं करते हैं। ये तमाम चीजें हैं, जिसका जवाब देश और जनता राघव चड्ढा से चाहती है।
आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने राघव चड्ढा से कहा कि हम सब लोग अरविंद केजरीवाल के सिपाही हैं और हमने तो एक ही बात सीखी है कि ‘‘जो डर गया, समझो मर गया।’’ हम सबको तो सरकार की आंखों में आंखें डालकर जनता के मुद्दे उठाने थे। पिछले कुछ दिनों में हमने देखा है कि जो भी व्यक्ति सरकार के खिलाफ गंभीर मुद्दे उठाता है, सरकार से सवाल पूछता है और लोगों की बात करता है, सरकार एक तानाशाह की तरह उसे तमाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बैन कर रही है। चाहे वह एक्स हो, फेसबुक हो या यूट्यूब, हर जगह बैन किया जा रहा है। एफआईआर दर्ज कराई जा रही है। मुकदमे किए जा रहे हैं।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि सरकार को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई संसद में अपना सॉफ्ट पीआर करे। संसद में एक छोटी सी पार्टी के पास बेहद सीमित समय होता है। उसमें अगर कोई समोसों की बात उठा रहा है, तो उससे कहीं ज्यादा जरूरी है कि देश के बड़े मुद्दों को उठाया जाए। उन्होंने कहा कि पूरे देश के हर राज्य में हमने देखा है कि चुनाव से पहले सही लोगों के वोट काटे जाते हैं और फर्जी व झूठे वोट बनाकर सरकार पूरी बेईमानी से सिस्टम पर कब्जा करके चुनाव जीत रही है। पश्चिम बंगाल में भी यही हो रहा है।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि अभी सारी विपक्षी पार्टियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर महाभियोग चलाने के लिए प्रस्ताव लाना चाहा, लेकिन आपने (राघव चड्ढा) उस पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया। जब भी कोई ऐसा मुद्दा आता है, जिस पर विपक्ष वॉकआउट करता है, तो आप वॉकआउट नहीं करते हैं। पिछले काफी अरसे से मैंने देखा है कि आपने सदन में ऐसा कोई भी मुद्दा नहीं उठाया, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी या भाजपा सरकार से कोई सवाल किया गया हो। ऐसे डर की राजनीति कैसे चलेगी?
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि हम लोगों को पंजाब के मुद्दे उठाने हैं। जहां से आप चुनकर आए हैं, आप उन मुद्दों को उठाने से भी घबराते हैं। अभी गुजरात में आम आदमी पार्टी के करीब 160 कार्यकर्ताओं पर झूठे मुकदमों के तहत एफआईआर दर्ज की गई, कई लोगों को गिरफ्तार किया गया, लेकिन आप उस पर भी चुप रहे। आम आदमी पार्टी के तमाम नेता जेल में थे। अरविंद केजरीवाल को बतौर मुख्यमंत्री सरकार ने एक झूठे मुकदमे में गिरफ्तार कर लिया, उस समय भी आप देश में नहीं थे और कहीं जाकर छिप गए थे।
सौरभ भारद्वाज ने आगे कहा कि मेरा मानना यह है कि देश के लिए असली मुद्दे हमें निडरता और साहस के साथ उठाने पड़ेंगे। भाजपा की आंखों में आंखें डालकर मुद्दे उठाने पड़ेंगे। वरना आपके इन सॉफ्ट मुद्दों से सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ता। बल्कि भाजपा तो गुरुवार से आपको सोशल मीडिया पर सपोर्ट कर रही है। आप इस बारे में सोचिएगा और देखिएगा कि आप कहां से चले थे और कहां आ गए हैं। देश को किन चीजों की जरूरत है और आप कैसे बेहतर कर सकते हैं।
उधर, दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने राघव चड्ढा से सवाल करते हुए कहा कि वह भाजपा से इतना क्यों डरते हैं? वह भाजपा पर सवाल उठाने से क्यों डरते हैं? वह मोदी जी से सवाल पूछने से क्यों डरते हैं? आज हमारा देश एक बहुत बड़े संकट से गुजर रहा है। आज हमारे देश के लोकतंत्र और संविधान पर खतरा मंडरा रहा है। आज हमारी आंखों के सामने चुनाव आयोग का दुरुपयोग करके पश्चिम बंगाल का चुनाव चुराया जा रहा है, लेकिन वह उस पर सवाल नहीं उठा रहे हैं। वह उस पर बोलने से डर रहे हैं।
आतिशी ने कहा कि हम सबने देखा है कि किस तरह से दिल्ली में गलत तरीके से वोट काटे गए। भाजपा के कार्यकर्ताओं ने गलत तरीके से वोट बनाए और भाजपा चुनाव चुराकर ले गई। आज पश्चिम बंगाल में भी यही हो रहा है, वहां भी चुनाव आयोग का दुरुपयोग हो रहा है। लेकिन जब तृणमूल कांग्रेस और पूरा विपक्ष चुनाव आयोग के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लेकर आता है, तो राघव चड्ढा उस पर हस्ताक्षर करने से मना कर देते हैं। क्या उन्होंने एक बार भी संसद में पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र पर हो रहे हमले पर सवाल उठाए? वोट काटने पर सवाल उठाए? गलत तरीके से बन रहे वोटों पर सवाल उठाए? उन्होंने ये सवाल क्यों नहीं उठाए? क्या वह भाजपा से डर रहे हैं? क्या वह मोदी जी से डर रहे हैं?
आतिशी ने कहा कि आज देश के आम आदमी के सामने सबसे बड़ा संकट एलपीजी गैस सिलेंडर का है। राघव चड्ढा तो बड़े आदमी हैं, राज्यसभा के सांसद हैं, हो सकता है उनको दिक्कत ना आती हो। लेकिन एक आम परिवार, एक छोटे से मकान या कच्ची कॉलोनी में रहने वाले और एक गैस सिलेंडर कनेक्शन वाले परिवार को आज अपने बच्चों के लिए खाना बनाने में भारी दिक्कत हो रही है। पिता सोच रहे हैं कि काम पर जाऊं और दिहाड़ी लेकर आऊं, या लंबी-लंबी लाइनों में खड़ा होकर गैस का सिलेंडर ले आऊं ताकि कल मेरे बच्चों के लिए लंच बन सके।
आतिशी ने कहा कि जब आम आदमी पार्टी ने पंजाब में और दिल्ली विधानसभा में सिलेंडर का सवाल उठाया, जब आम आदमी पार्टी के सांसदों ने एलपीजी सिलेंडर का मुद्दा उठाया और जब राघव चड्ढा को एलपीजी के मुद्दे पर बोलने के लिए कहा गया, तो वह चुप रह गए। क्या वह मोदी जी से डर गए हैं? आज इस देश में हर इंसान को यह तय करना होगा कि क्या वह मोदी जी के साथ है या वह संविधान और लोकतंत्र के साथ है।
आतिशी ने कहा कि मुझे याद आ रहा है कि जब अरविंद केजरीवाल गिरफ्तार हुए थे, तब हम सब सड़कों पर खड़े होकर लड़ रहे थे। पुलिस हम पर लाठियां बरसा रही थी और हमें घसीट-घसीट कर पकड़ कर ले जा रही थी। दिल्ली के अलग-अलग थानों में, कहीं नरेला में, तो कहीं बवाना में हम डिटेन किए गए थे। हम रोज सड़कों पर लड़ रहे थे और तब राघव चड्ढा लंदन में थे। उन्होंने हमें बताया था कि उनकी आंख का ऑपरेशन हो रहा है, इसलिए वह लंदन में हैं। तब मीडिया ने हमसे बहुत सवाल पूछे। बार-बार हमने मीडिया से कहा कि राघव चड्ढा डरे नहीं हैं। उनकी आंख में दिक्कत है और वह अपना ऑपरेशन करवाने गए हैं। लेकिन आज मेरे मन में भी यह सवाल आ रहा है कि जब अरविंद केजरीवाल गिरफ्तार हुए, क्या तब भी वह भाजपा से डर गए थे? क्या तब भी वह मोदी जी से डर गए थे? क्या वह डर कर लंदन भाग गए थे?
आतिशी ने आगे कहा कि हो सकता है कि राघव चड्ढा मोदी जी से डरते हों, हो सकता है कि वह जेल जाने से डरते हों। लेकिन हम अरविंद केजरीवाल के सिपाही हैं। हम ना भाजपा से डरते हैं, ना मोदी जी से डरते हैं, ना उनकी एजेंसियों से डरते हैं और ना ही जेल जाने से डरते हैं। इसलिए हम इस देश के आम आदमी की आवाज उठाते आए हैं और आगे भी उठाते रहेंगे। हम इस लोकतंत्र के लिए आवाज उठाते आए हैं और लोकतंत्र के लिए आवाज उठाते रहेंगे। मोदी जी या भाजपा से डरने से संविधान और लोकतंत्र नहीं बचेगा। आज राघव चड्ढा को यह तय करना है कि क्या वह संविधान के साथ हैं या फिर मोदी जी के साथ हैं।
वहीं, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने कहा कि हम केजरीवाल के सिपाही हैं। निडरता ही हमारी पहली पहचान है। कोई मोदी से डर जाए तो देश के लिए क्या लड़ेगा? पार्टी को संसद में बोलने का थोड़ा सा समय मिलता है। उसमें या तो देश बचाने का संघर्ष कर सकते हैं या एयरपोर्ट कैंटीन में समोसे सस्ते करवाने का। गुजरात में हमारे सैंकड़ों कार्यकर्ता भाजपा की पुलिस ने गिरफ्तार कर लिए, क्या सांसद साहब सदन में कुछ बोले?
अनुराग ढांडा ने कहा कि पश्चिम बंगाल में वोट का अधिकार छीना जा रहा है। सदन में मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ प्रस्ताव आया तो भाई साहब ने साइन करने से मना कर दिया। पार्टी ने सदन से वाकआउट किया तो मोदी जी की हाज़िरी लगाने के लिए बैठे रहते हैं। पिछले कुछ सालों से तुम डर गए हो राघव। मोदी के खिलाफ बोलने से घबराते हो। देश के असली मुद्दों पर बोलने से घबराते हो। जो डर गया वो समझो मर गया।
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