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पंजाब सरकार का बड़ा फैसला, आंगनवाड़ी के 28 हजार से ज्यादा स्मार्टफोन अब ‘ड्रग जनगणना’ में होंगे इस्तेमाल

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आंगनवाड़ी वर्करों के लिए स्मार्टफोन खरीद को लेकर पहले से चल रहे विवाद ने बुधवार को नया मोड़ ले लिया। पंजाब सरकार ने अब इन स्मार्टफोनों को ड्रग्स जनगणना में लगे एन्यूमरेटरों को देने का फैसला किया है। इस फैसले से पहले ही छह साल की देरी और दो आईएएस अधिकारियों के निलंबन को लेकर यह मामला चर्चा में रहा है।

सरकार ने कुल 28,515 सैमसंग 5G स्मार्टफोन खरीदे थे। इनमें से करीब 28,000 फोन अब ड्रग्स जनगणना के एन्यूमरेटरों को दिए जाएंगे। ये फोन मूल रूप से सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से आंगनवाड़ी केंद्रों में वितरित किए जाने थे, लेकिन अब इन्हें ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग को सौंपने का निर्णय लिया गया है, जो ड्रग्स जनगणना का नोडल विभाग है। इन स्मार्टफोनों की खरीद पर लगभग 57 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं और यह योजना केंद्र सरकार की ओर से वित्तपोषित है।

इन स्मार्ट फोनों को कम से कम पांच जिलों में भेजा भी गया था और बाकी जिलों में वितरण की तैयारी थी। इसी बीच सरकार ने इन्हें ड्रग्स जनगणना के लिए उपयोग करने का फैसला लिया। एन्यूमरेटर महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं, इसलिए उन्हें इन फोनों की जरूरत है। जनगणना पूरी होने के बाद ये फोन आंगनवाड़ी वर्करों को दे दिए जाएंगे।

संसाधनों के बेहतर उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। वहीं, आंगनवाड़ी वर्कर हेल्पर यूनियन की पंजाब अध्यक्ष बरिंदरजीत कौर छीना ने इस फैसले पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि सोमवार को मंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया था कि फोन आंगनवाड़ी वर्करों को दिए जाएंगे, लेकिन अब जानकारी मिली है कि इन्हें ड्रग्स जनगणना में लगाया जा रहा है, जो अनुचित है।

उन्होंने बताया कि इस संबंध में उनकी बैठक मंत्री डॉ. बलजीत कौर और विभाग के प्रशासनिक सचिव गुरकीरत किरपाल सिंह के साथ हुई थी, जिसमें उन्हें बताया गया था कि फोन खरीदे जा चुके हैं और वितरण प्रक्रिया शुरू हो रही है।

यह खरीद पोषण अभियान के तहत की गई थी, जो केंद्र सरकार की प्रायोजित योजना है। इसका उद्देश्य आंगनवाड़ी वर्करों को फील्ड से डेटा भरने के लिए ऐप के माध्यम से सशक्त बनाना है, ताकि योजना की निगरानी बेहतर ढंग से हो सके।

इस पूरे मामले में देरी को लेकर 7 फरवरी को आईएएस अधिकारी केके यादव और जसप्रीत सिंह को निलंबित किया गया था। उस समय वे क्रमशः उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के प्रशासनिक सचिव और इंफोटेक के एमडी थे। स्मार्टफोन की खरीद प्रक्रिया पंजाब इंफोटेक के जरिए की गई थी, जिसमें अनियमितताओं और देरी की बात सामने आई थी।

शुरुआत में करीब 27,515 स्मार्टफोन के लिए टेंडर जारी किया गया था। उस समय 5G फोन उपलब्ध नहीं थे, इसलिए 4G फोन के लिए प्रक्रिया शुरू हुई और एक कंपनी को एल1 घोषित किया गया। बाद में 5G फोन की जरूरत बताते हुए नया टेंडर जारी किया गया, जिसके खिलाफ कंपनी हाई कोर्ट पहुंची थी। इसके बाद अधिकारियों पर कार्रवाई की गई और खरीद प्रक्रिया को तेज किया गया। प्रत्येक फोन की कीमत करीब 20,000 रुपये बताई गई है।

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मंडियों में किसानों को किसी भी तरह की नहीं होगी परेशानी, समय पर होगी लिफ्टिंग और पेमेंट: Mahindra Singh Sidhu

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आम आदमी पार्टी (आप) ने पंजाब की मंडियों में गेहूं की फसल की सरकारी खरीद शुरू होने पर किसानों को हर मुमकिन मदद और सुविधाएं देने का भरोसा दिया है। पार्टी नेताओं ने मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार द्वारा पिछले चार सालों में कृषि के क्षेत्र में किए गए क्रांतिकारी सुधारों और मौजूदा खरीद सीजन की तैयारियों पर रोशनी डाली।

गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए किसान विंग के चेयरमैन महिंद्र सिंह सिद्धू ने कहा कि मान सरकार ने किसानों के लिए जो किया है, वह ऐतिहासिक है। उन्होंने बताया कि सरकार बिना किसी जाति या धर्म के भेदभाव के 600 यूनिट मुफ्त बिजली दे रही है, जिसका फायदा किसान परिवारों को भी मिल रहा है। उन्होंने कहा कि पहली बार किसानों को कृषि के लिए दिन में सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक बिना रुकावट बिजली मिल रही है, जिससे उन्हें रात में खेतों में नहीं जाना पड़ रहा है। इसके अलावा गांवों के सरकारी स्कूलों का रूप बदलने से किसानों और मजदूरों के बच्चे अब ऊंची शिक्षा हासिल कर बड़े अधिकारी बन रहे हैं।

सिद्धू ने आगे कहा कि किसान विंग को पंजाब की 1896 अनाज मंडियों और खरीद केंद्रों की खास जिम्मेदारी सौंपी गई है। किसान विंग के पदाधिकारी सरकारी अधिकारियों से मिलेंगे ताकि यह पक्का किया जा सके कि किसी भी किसान को अपनी फसल बेचने में कोई दिक्कत न हो। उन्होंने आढ़तियों से अपील की कि वे फसल का सही तौल करें और समय पर ‘जे-फॉर्म’ जमा करें। उन्होंने कहा कि मंडियों में किसानों के लिए पानी, बिजली और साफ-सफाई का पूरा इंतजाम होगा।

किसान विंग के महासचिव सतबीर सिंह बख्शीवाला ने पिछली सरकारों से तुलना करते हुए कहा कि पहले किसानों को मंडियों में तीन-चार रातें बितानी पड़ती थीं, लेकिन मान सरकार में फसल का उठान इतनी तेजी से हो रहा है कि किसान को मुश्किल से एक रात भी रुकना नहीं पड़ता। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की हर समस्या का समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है और उठान प्रक्रिया में किसी भी तरह की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

प्रदेश मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने कहा कि सरकारी खरीद आधिकारिक तौर पर 1 अप्रैल से शुरू हो गई है। खराब मौसम के कारण थोड़ी देरी हुई है, लेकिन आने वाले कुछ दिनों में खरीद और आवक में तेजी आएगी। मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा घोषित एक नए पायलट प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि खेतों के बीच में खंभों की समस्या को हल करने के लिए मुख्यमंत्री के पैतृक गांव सतोज से यह प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है, जिसे बाद में पूरे पंजाब में लागू किया जाएगा।

नहर के पानी के मुद्दे पर पन्नू ने कहा कि जब मान सरकार ने शपथ ली थी, तब नहर का पानी सिर्फ़ 22% खेतों तक पहुंचता था, जिसे आज बढ़ाकर 88% कर दिया गया है। हमारा लक्ष्य इसे 90% से आगे ले जाना है। पिछली सरकारें सिर्फ़ ‘पानी के रखवाले’ होने का दिखावा करती थीं, जबकि मान सरकार ने असल में नहर का पानी टेल तक पहुंचाया है। इससे न सिर्फ़ फ़सल की पैदावार बढ़ेगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए ग्राउंडवाटर भी बचेगा। उन्होंने दोहराया कि मान सरकार का हर कदम पंजाब के किसानों और युवाओं को बचाने के लिए समर्पित है।

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AAP ने जालंधर के अशोक मित्तल को दी बड़ी जिम्मेदारी:राघव चड्ढा की जगह राज्यसभा में बने उपनेता

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आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा में बड़ा संगठनात्मक फैसला लेते हुए राघव चड्ढा को उपनेता के पद से हटा दिया है। अब उनकी जगह अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस संबंध में पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को औपचारिक पत्र भी भेज दिया है।

पार्टी द्वारा भेजे गए पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि राघव चड्ढा को उपनेता के पद से हटाया जाए और उनकी जगह अशोक मित्तल को नियुक्त किया जाए। इसके साथ ही पार्टी ने यह भी अनुरोध किया है कि राघव चड्ढा को आम आदमी पार्टी के कोटे से सदन में बोलने का समय भी न दिया जाए।

राघव चड्ढा लंबे समय से राज्यसभा में पार्टी के उपनेता के रूप में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। वे पार्टी के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं और संसद में कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाते रहे हैं। ऐसे में उन्हें पद से हटाने के फैसले ने राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है।

पार्टी ने अशोक मित्तल पर भरोसा जताया

वहीं, अशोक मित्तल को नई जिम्मेदारी सौंपते हुए पार्टी ने उन पर भरोसा जताया है। अशोक मित्तल राज्यसभा सदस्य के रूप में अपनी भूमिका निभा रहे हैं और अब उन्हें उपनेता बनाकर पार्टी ने उन्हें और बड़ी जिम्मेदारी दी है। माना जा रहा है कि वह सदन में पार्टी की रणनीति को मजबूत तरीके से आगे बढ़ाने का काम करेंगे।

आप के राज्यसभा में 10 सदस्य

 पार्टी के वर्तमान में राज्यसभा में 10 सदस्य हैं, जिनमें सात पंजाब और तीन दिल्ली से हैं। राघव चड्ढा ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 2012 में अरविंद केजरीवाल के साथ दिल्ली लोकपाल विधेयक पर काम करते हुए की थी। वह जल्द ही पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता बने और 2015 के चुनावों के बाद सबसे युवा कोषाध्यक्ष भी बने।

सबसे युवा राज्यसभा सदस्य राघव चड्‌ढा

उन्होंने 2019 में दक्षिणी दिल्ली से चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। इसके बाद 2020 में राजेंद्र नगर से विधायक बने और दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष भी रहे। 2022 में वह 33 वर्ष की उम्र में राज्यसभा के सबसे युवा सदस्य बने।

उन्होंने संसद में कई अहम मुद्दे उठाए, जिनमें पंचायतों में महिलाओं की वास्तविक भागीदारी और मासिक स्वच्छता जैसे विषय शामिल हैं। हाल ही में उन्होंने कामगारों की समस्याएं समझने के लिए एक दिन डिलीवरी कर्मी के रूप में भी काम किया।

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मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत ₹4 लाख की जीवनरक्षक सर्जरी कैशलेस, भगवंत मान सरकार के स्वास्थ्य मॉडल की प्रभावशीलता का प्रमाण

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मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत अब तक के सबसे बड़े दावों में शामिल एक मामले में ₹4 लाख की जीवनरक्षक सर्जरी पूरी तरह कैशलेस की गई। यह भगवंत मान सरकार के उस स्वास्थ्य मॉडल की मज़बूती को दर्शाता है, जो स्थानीय स्तर पर तेज़, प्रभावी और भरोसेमंद तरीके से काम कर रहा है।

लाभार्थी सुखपाल कौर आयु: (37 वर्ष), निवासी चंडीगढ़, गंभीर एओर्टिक डिसेक्शन, एक जानलेवा हृदय एवं रक्तवाहिका संबंधी बीमारी के कारण पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया। इस स्थिति में तुरंत सर्जरी आवश्यक थी। इलाज, अस्पताल में दाखिला और विशेष देखभाल का अनुमानित खर्च लगभग ₹4 लाख था, जिसे इतनी कम अवधि में जुटाना परिवार के लिए बेहद कठिन हो जाता।

अस्पताल में सेहत कार्ड प्रमाणित होते ही बिना किसी देरी के इलाज शुरू कर दिया गया। पूरी सर्जरी, योजना के तहत, प्रति परिवार ₹10 लाख तक की कवरेज में कैशलेस तरीके से पूरी की गई।

परिवार के एक सदस्य ने बताया, “सब कुछ बहुत तेज़ी से हुआ। डॉक्टरों ने बताया कि स्थिति गंभीर है और तुरंत सर्जरी ज़रूरी है। इतनी बड़ी रकम तुरंत जुटा पाना संभव नहीं था। सेहत कार्ड के कारण इलाज बिना किसी देरी के शुरू हो सका।”

मामले के चिकित्सकीय पहलू पर प्रकाश डालते हुए पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ के डॉ. सचिन महाजन ने कहा, “एओर्टिक डिसेक्शन एक अत्यंत गंभीर स्थिति है, जिसमें तुरंत सर्जरी ज़रूरी होती है। ऐसे मामलों में थोड़ी सी भी देरी जोखिम को काफी बढ़ा सकती है। मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत सेहत कार्ड प्रमाणित होते ही हम बिना किसी वित्तीय मंजूरी का इंतज़ार किए इलाज शुरू कर सकते हैं, जिससे उच्च जोखिम वाले हृदय रोगियों को समय पर और निरंतर उपचार मिल पाता है।”

सरकार की नीति को रेखांकित करते हुए पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “सुखपाल कौर जैसे गंभीर मामले में एक अनमोल जीवन को बचा पाना बेहद संतोषजनक है। मुख्यमंत्री भगवंत मान जी के नेतृत्व में मुख्यमंत्री सेहत योजना स्थानीय स्तर पर वास्तविक बदलाव ला रही है, जहाँ परिवार बिना आर्थिक दबाव के तुरंत इलाज प्राप्त कर पा रहे हैं।”

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