Punjab
Punjab के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने मोहाली में नाबार्ड का स्टेट फोकस पेपर जारी किया
पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने मोहाली में आयोजित राज्य ऋण संगोष्ठी (स्टेट क्रेडिट सेमिनार) में नेशनल बैंक फॉर एग्रिकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (नाबार्ड) द्वारा तैयार स्टेट फोकस पेपर 2026-27 जारी किया।
समारोह के दौरान वित्त मंत्री ने नाबार्ड के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि कृषि, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्रों में नाबार्ड द्वारा संचालित ऋण एवं वित्तीय योजनाएं पंजाब के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
स्टेट फोकस पेपर के अनुसार, पंजाब के प्राथमिकता क्षेत्रों के लिए कुल 3,08,66,614 लाख रुपये की ऋण संभाव्यता का आकलन किया गया है। इसमें कृषि ऋण, कृषि अवसंरचना, सहायक गतिविधियां, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, निर्यात ऋण, शिक्षा, आवास, सामाजिक अवसंरचना और नवीकरणीय ऊर्जा सहित अन्य क्षेत्र शामिल हैं।
फाइनेंस मंत्री ने कहा कि पंजाब ने देश को खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाई है, लेकिन इसके कारण भूजल स्तर में गिरावट आई है। उन्होंने बताया कि राज्य के 151 ब्लॉकों में से 117 को ‘डार्क ज़ोन’ घोषित किया जा चुका है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में सरकार नहरी सिंचाई और छोटे खाल के निर्माण के जरिए भूजल संरक्षण को प्रोत्साहित कर रही है। उन्होंने नाबार्ड से फसल विविधीकरण में सहयोग की अपील भी की।
इस अवसर पर व्यापारिक माहौल को सुरक्षित बनाने पर भी जोर दिया गया। वित्त मंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार अपराध-मुक्त और निवेश अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
समारोह में नाबार्ड और अन्य वित्तीय संस्थाओं के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे, जिनमें बी. रमेश बाबू (मुख्य महाप्रबंधक, नाबार्ड), रितु अग्रवाल (आईएएस, सचिव सहकारिता), मनोहर लाल (महाप्रबंधक, नाबार्ड), पंकज सेतिया (महाप्रबंधक, आरबीआई चंडीगढ़), जी.के. नेगी (अध्यक्ष, पंजाब ग्रामीण बैंक) और गुरइकबाल सिंह (महाप्रबंधक एवं ओआईसी, नाबार्ड हरियाणा) शामिल थे।
साथ ही, प्रगतिशील एफपीओ, स्वयं सहायता समूह और ड्रैगन फ्रूट उत्पादकों को सम्मानित भी किया गया।
Punjab
Ludhiana में होगा ब्लैकआउट मॉक ड्रिल, बजेंगे खतरे के सायरन
लुधियाना में संभावित आपातकालीन स्थितियों से निपटने की तैयारी के तहत एक विशेष ब्लैकआउट मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी। यह ड्रिल शुक्रवार रात 8:00 बजे से 8:15 बजे तक पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) और अग्र नगर पीएसपीसीएल डिवीजन के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में आयोजित होगी।
इस संबंध में आयोजित बैठक के दौरान सहायक आयुक्त पायल गोयल ने क्षेत्र के निवासियों से अपील की है कि वे इस ड्रिल के दौरान पूरा सहयोग करें और अपने घरों व कार्यालयों की सभी लाइटें बंद रखें। लोगों को पहले से सतर्क करने के लिए शाम 7:55 बजे के करीब धार्मिक स्थलों से सार्वजनिक घोषणाएं की जाएंगी और साथ ही सायरन भी बजाया जाएगा।
सायरन बजते ही पीएसपीसीएल द्वारा संबंधित क्षेत्रों की बिजली आपूर्ति अस्थायी रूप से बंद कर दी जाएगी।
यह मॉक ड्रिल पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना में अलार्म के साथ शुरू होगी। इसमें राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), फायर ब्रिगेड, जिला प्रशासन, नगर निगम, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, सिविल डिफेंस और एनसीसी जैसी कई प्रमुख एजेंसियां भाग लेंगी। सभी एजेंसियां मिलकर वास्तविक आपातकालीन स्थिति का अभ्यास करेंगी और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली को परखेंगी।
सहायक आयुक्त ने स्पष्ट किया कि यह अभ्यास किसी भी अचानक या अप्रत्याशित संकट से निपटने की तैयारी के रूप में किया जा रहा है। उन्होंने लोगों से यह भी अपील की कि ड्रिल के दौरान किसी भी प्रकार के जनरेटर, पावर बैकअप सिस्टम, टॉर्च, मोमबत्तियां या माचिस का उपयोग न करें, ताकि ब्लैकआउट प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया जा सके।
ड्रिल का उद्देश्य
इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य न केवल आपातकालीन प्रबंधन प्रणाली की जांच करना है, बल्कि लोगों में जागरूकता बढ़ाना और उन्हें संकट की स्थिति में सही तरीके से प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार करना भी है।
Punjab
पंजाब-नीदरलैंड्स के व्यापारिक रिश्तों को मिलेगी नई उड़ान, फूड प्रोसेसिंग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर CM Mann की नजर
नीदरलैंड्स-इंडिया चैंबर आफ कामर्स एंड ट्रेड की चेयरपर्सन मिस एडिथ नार्डमैन के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई बैठक में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पंजाब और नीदरलैंड्स के बीच द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को बढ़ाने और निवेश को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया।
उन्होंने वैल्यू एडिशन, निर्यात आधारित विकास और वैश्विक सप्लाई चेन के साथ तालमेल, विशेष रूप से फूड प्रोसेसिंग और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में पंजाब के रणनीतिक फोकस को भी रेखांकित किया। भगवंत मान ने एनआइसीसीटी से पंजाब को डच उद्योगों से जोड़ने और क्षेत्र-विशेष भागीदारी तथा व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों को सक्रिय करने की अपील की।
इस दौरान हेग में हुए निवेश रोड शो में मुख्यमंत्री ने राज्य की औद्योगिक ताकत और उभरते अवसरों को प्रस्तुत किया, जिसमें नीदरलैंड्स के उद्योगपतियों, व्यापार प्रतिनिधियों और साझेदारों ने भाग लिया। उन्होंने राज्य में अनुकूल औद्योगिक माहौल, कुशल कार्यबल, प्रगतिशील नीतियां और निवेशक अनुकूल प्रशासनिक ढांचे के बारे में जानकारी दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब की औद्योगिक व व्यापार विकास नीति 2026 देश की सबसे प्रतिस्पर्धी नीतियों में से एक है। मुख्यमंत्री ने फास्ट ट्रैक पंजाब पोर्टल के माध्यम से सिंगल-विंडो क्लीयरेंस व समयबद्ध स्वीकृति के बारे में भी बताया। मुख्यमंत्री ने निवेशकों से “पंजाब आइए, निवेश कीजिए और आगे बढ़िए” की बात कह निवेश के लिए आह्वान किया।
National
कलाकार रहते हुए शब्दों से सिस्टम पर चोट की, अब सिस्टम को बदल रहा हूं; CM Mann बोले- मुफ्त सेवाएं जारी रहेंगी
देश की राजनीति में भगवंत मान एक मात्र एसे मुख्यमंत्री हैं जो स्टेज से लेकर स्टेट तक को लीड कर रहे हैं। बतौर कलाकार मुख्यमंत्री भगवंत मान की ताकत ‘पोलटिकल सटायर’ हुआ करती थी। जो राजनीतिक सिस्टम पर चोट करती थी। 2022 में भगवंत मान मुख्यमंत्री बने तो उनके हाथों में हरा कलम आ गया।
मुख्यमंत्री कहते हैं-
“बतौर कलाकार मैं अपने शब्दों से सिस्टम पर चोट करता था। लोगों ने हाथों में हरा कलम जब से थमाया है। तब से मैं सिस्टम को बदल रहा हूं। ताकि सिस्टम में सुधार हो। विचार मंच के दौरान ‘चुनौतियां और राह’ पर बोलते हुए भगवंत मान ने कहा कि 70 साल का घाटा चार वर्षों में पूरा नहीं किया जा सकता।”
आम आदमी पार्टी ने भले ही चुनाव में लोगों से किए गए गारंटियों को पूरा कर दिया हो लेकिन अभी बहुत कुछ करना बाकी है। इस दौरान उन्होंने न अपने निजी जीवन से लेकर पंजाब के राजनीतिक व सामाजिक मुद्दों पर खुल कर विचार रखे।
गरीबों को मिलने वाली मुफ्त योजना जारी रहेगी
मु्ख्यमंत्री ने कहा कि जब आम आदमी पार्टी ने 300 यूनिट फ्री बिजली का वायदा किया तो कहा गया कि ‘रेवड़ियां’ बांट रहे हैं। उन्होंने कहा ‘फिर 15 लाख का पापड़ पहले किसने बेचा था। अब कह रहे हैं कि जुमला था। नेताओं का तो टोल भी फ्री है और गाड़ी भी। तेल भी फ्री हैं जो टेलीफोन का बिल भी। जब गरीबों को बिजली, राशन, ईलाज, बस सफर मिलता हैं तो इन नेताओं को दर्द क्यों होता है।
गरीब आदमी भले ही डायरेक्ट टैक्स नहीं देता लेकिन इन डायरेक्ट टैक्स तो देता ही है। गरीब आदमी के चाय से लेकर रात को सोते समय चलने वाले पंखे पर भी टैक्स है।’ उन्होंने कहा कि अंबानियों का जब कर्जा माफ हो जाता हैं तो गरीबों को सहूलियत क्यों नहीं दिया जा सकता है।
यह योजनाएं बंद नहीं होगी। क्योंकि जब आम लोगों को यह भरोसा हो जाए कि उसके द्वारा दिए जाने वाला इन-डायरेक्ट का लाभ उन्हें ही मिलेगा तो उन्हें टैक्स देने का दुख नहीं होता।
भेदभाव- बस चले तो राष्ट्रीय गान से पंजाब का नाम हटा दें
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि केंद्र पंजाब के साथ हमेशा ही भेदभाव करता हैं। क्योंकि पंजाब के किसानों ने दिल्ली में धरना देकर तीन काले कानून वापस करवाए। केंद्र ने पंजाब के 9000 करोड़ रुपये का ग्रामीण विकास फंड रोका हुआ है।
उन्होंने ओटीटी प्लेटफार्म पर वेब-सिरीज महारानी-4 का जिक्र करते हुए कहा कि उसें भी यही दिखाया गया हैं कि किस प्रकार से प्रधानमंत्री दूसरी पार्टी की सरकारों की बाह मरोड़ते हैं। फर्क सिर्फ इतना हैं कि वेब सिरीज में बिहार है और यहां पर पंजाब है।
मुख्यमंत्री ने यहां तक कहा कि अगर इनका बस चले तो जन-गण-मन से पंजाब का नाम हटाकर उसमें उत्तर प्रदेश फिट कर लें। भगवंत मान ने कहा पंजाब में फसलें खराब हुई लेकिन सबसे पहले छूट राजस्थान को और उसके बाद हरियाणा को दी गई। जबकि सबसे ज्यादा अन्न पंजाब उपजाता है।
फसल बीमा योजना फ्लाप
पिछले वर्ष आई बाढ़ और अप्रैल माह में हुई बारिश व ओलावृष्टि के कारण खराब हुई फसल के बाद विपक्षी पार्टियों द्वारा फसली बीमा का मुद्दा उठाने को लेकर उठे सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा ‘यह योजना फ्लाप है। जिन राज्यों में फसली बीमा लागू हैं वहां पर जाकर किसानों से पूछे तो पता चल जाएगा कि उन्हें इसका कोई लाभ नहीं मिला।’
मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन बीमा बेचना होता हैं तो कंपनी कई प्रकार के वायदे करती हैं लेकिन बाद में मुकर जाती है। अपने एक दोस्त का उद्हारण देते हुए कहा कि वह अपने बेटे के जीवन बीमा का कवर लेने के लिए कोर्ट के चक्कर काट रहा है। उन्होंने कहा कि पूरे देश में फसल खराबे की सबसे अच्छी भरपाई आम आदमी पार्टी ने की है।
बाढ़ के कारण फसलों को नुकसान हुआ तो पंजाब सरकार ने देश में सबसे अधिक 20,000 रुपये प्रति एकड़ की भरपाई की। बारिश और ओलावृष्टि के कारण हुए नुकसान की भी गिरदावरी हो चुकी है। किसानों की भरपाई की जाएगी।
फसली विविधिकरण संभव नहीं, धान होगा तो पराली भी होगी
किसानों को पारंपरिक खेती से मुक्ति दिलवाने के उठ रहे सवालों के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि विज्ञापन देने मात्र से फसली चक्र नहीं टूटने वाला है। इसके लिए किसानों को बदली हुई फसल का मूल्य देना होगा। दीवारों पर हमने बहुत लिखा कि ‘हम दो हमारे दो’ तो इससे क्या जनसंख्या नियंत्रित हो गई। पराली में लगने वाली आग के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि असली कारण को समझना ही होगा।
अक्टूबर-नवंबर में दशहरा-दीपावली और दशहरा एक साथ आते हैं। किसान धान की पराली में इसलिए आग लगाता हैं क्योंकि उसे 10 से 12 दिन के भीतर गेहूं की फसल लगानी होती है। जब पंजाब 185 लाख मिट्रिक टन धान सेंट्रल पूल में देता हैं तो पंजाब बहुत अच्छा लेकिन इसके साथ पराली भी तो होगी। जब किसान पराली जलाते हैं तो कहा जाता हैं कि किसानों पर पर्चा दर्ज कर दो।
10 दिन से किसान अन्नदाता से अपराधी बन जाता है
दस दिन पहले जो किसान अन्नदाता होता हैं 10 दिन बाद ही वह अपराधी बन जाता है। किसानों को पराली संभालने का इंसेंटिव देना होगा। उन्होंने कहा कि पंजाब में पराली जलती भी नहीं हैं कि दिल्ली में हंगामा शुरू हो जाता है। एनजीटी के सेवानिवृत्त जज ने भी स्पष्ट किया कि पंजाब को यूं ही बदनाम किया जाता है।
पंजाब के धुएं से दिल्ली को असर नहीं पड़ता। लेकिन जज साहब ने यह बात तब कहीं जब वह सेवानिवृत्त हो गए। सर्विंग में होते हुए उन्होंने यह बात नहीं कहीं। मुख्यमंत्री ने मार्डन खेती पर विशेष जोर दिया।
पंजाब के छात्र जमीन पर नहीं बैठते
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब में शिक्षा क्षेत्र में काफी सुधार हुआ है। स्कूल आफ एमिनेंस तो बने ही हैं साथ ही पंजाब का अब कोई भी ऐसा स्कूल नहीं हैं जहां पर बच्चे जमीन पर पढ़ते हो। कोई स्कूल ऐसा नहीं हैं जो बिना चाहरदिवारी के हो। स्कूलों में लैब बने हैं और सकरारी स्कूल के बच्चे जेईई और नीट की परीक्षा पास कर रहे हैं। यह वहीं स्कूल जहां दो-तीन साल पहले तक बच्चों को जेईई और नीट के बारे में पता तक नहीं था।
ड्रग्स को लेकर पंजाब बदनाम किया जा रहा
ड्रग्स के मुद्दे पर उठे सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, बदनाम तो पंजाब को किसा जाता हैं लेकिन 3000 किलों ड्रग्स मुंद्रा पोर्ट से पकड़ी जाती है। पंजाब सरकार ड्रग्स के खिलाफ मुहीम चला रही है। वहीं, नए इनोवेशन का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय था जब प्रति दिन 15 मौतें सड़कों पर हो रही थी।
लोग इसे कुदरती आपदा मानते थे लेकिन यह मानवीय आपदा थी। मुख्यमंत्री ने कहा जब मैंने सड़क सुरक्षा फोर्स का गठन किया तो सड़क हादसों में जान गंवाने वालों की संख्या में कमी आई। आज प्रति वर्ष 2600 कीमती जानें बचाई जा रही है।
पंजाब से हमेशा भेदभाव हुआ
मुख्यमंत्री ने केंद्र पर हमला बोलते हुए कहा कि केंद्र पंजाब के साथ हमेशा ही भेदभाव करता है। उन्होंने ओटीटी प्लेटफार्म पर आई वेब सीरीज महारानी-4 का जिक्र करते हुए कहा कि उसमें भी यही दिखाया गया है कि किस प्रकार से प्रधानमंत्री दूसरी पार्टी की सरकारों की बाह मरोड़ते हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि वेब सीरीज में बिहार है और यहां पर पंजाब है।
सीएम ने कहा कि अगर इनका बस चले तो राष्ट्रगान जन-गण-मन से पंजाब का नाम हटाकर उसमें यूपी फिट कर लें। खराब मौसम से पंजाब में फसलें खराब हुईं लेकिन सबसे पहले छूट राजस्थान को और उसके बाद हरियाणा को दी गई, जबकि सबसे ज्यादा अन्न पंजाब उपजाता है।
पंजाब के अंतिम छोर तक पहुंचा नहरी पानी
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2022 में सरकार संभालने के बाद उन्होंने पंजाब के लोगों से वादा किया था कि वह पंजाब के अंतिम छोर तक नहरी पानी पहुंचाएंगे, क्योंकि नहरी पानी में मिनरल्स होते हैं जो फसल के लिए अच्छे होते हैं। पहले हम 21 फीसद नहरी पानी का प्रयोग कर रहे थे, जोकि अब 74 फीसद हो चुका है। अगर इसे क्यूसिक के हिसाब से देखे तो चार वर्षों में 11,000 क्यूसिक अतिरिक्त पानी खेतों तक पहुंचा।
इसका मतलब है कि भाखड़ा नहर के बराबर पानी। इसका असर भी देखने को मिला। पंजाब में 12 ब्लाकों में पहली बार जलस्तर बढ़ गया। जब नहरी पानी खेतों में जाएगा तो किसान को ट्यूबवेल नहीं चलाना पड़ेगा। इससे भूजल भी बचेगा। पिछली सरकारों ने कभी इस पर ध्यान ही नहीं दिया। पहले तो एसी कमरों में बैठकर ही फैसले हो जाते थे। मैं जब वहां गया तो दिक्कत देखी और यह फैसला लिया।
केंद्र से काम करवाना नहीं आसान
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार को कृषि कानून वापस लेने का अब भी मलाल है। इसकी टीस भाजपा को हमेशा रहती है और इसी कारण वह पंजाब के लोगों की आवाज दबाने का प्रयास करती रहती है। इस सरकार से कोई काम निकलवाने के लिए उंगली टेढ़ी करनी पड़ती है।
हमें भी पता है कि सीधी उंगली से घी नहीं निकलने वाला, इसलिए हमने तो पूरा पंजा ही टेढ़ा किया है। उन्होंने कहा कि पंजाब की राह में कदम-कदम पर केंद्र सरकार बाधाएं खड़ी करती है। ग्रामीण विकास फंड का नौ हजार करोड़ रुपये अभी तक रोक रखा है।
अन्य फंड जारी करने में भी अड़चनें डाली जाती हैं। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि उड़ीसा से कोयला पंजाब लाने के लिए कहा गया कि वाया श्रीलंका, मुंद्रा पोर्ट लेकर आओ, लेकिन जब हमने यह मामला अपने तरीके से तत्कालीन कोयला मंत्री आरके सिंह के समक्ष उठाया तो उन्होंने अपना आदेश वापस लिया।
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