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Gurugram के Thar मालिक ने Haryana DGP को भेजा Legal Notice: कहा– “15 दिन में माफी मांगें, नहीं तो Legal Action लेंगे”

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गुरुग्राम में महिंद्रा थार गाड़ी के एक मालिक ने हरियाणा के DGP ओपी सिंह को उनके विवादित बयान पर लीगल नोटिस भेज दिया है। DGP ने कुछ दिन पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि थार और बुलेट से बदमाश चलते हैंजिसके पास थार होगी उसका दिमाग घूमा हुआ होगा। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद ये मामला और भी बढ़ गया।

अब थार मालिक ने आरोप लगाया है कि इस बयान के चलते उसका और उसके परिवार का मजाक उड़ाया जा रहा है, लोग ताने मार रहे हैं और उसकी सोशल इमेज खराब हो गई है। इसी वजह से उसने अपनी गाड़ी चलाना भी बंद कर दिया।

DGP ने क्या कहा था?

8–9 नवंबर 2025 को गुरुग्राम में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हरियाणा DGP ओपी सिंह ने कहा—

  • “Police सब गाड़ियों को नहीं पकड़ेगी… सिर्फ Thar और Bullet वालों को पकड़ेंगे।”
  • “Thar और Bullet से सारे बदमाश चलते हैं।”
  • “जिसके पास Thar होगी… उसका mind-set ही ऐसा होता है।”
  • “Thar गाड़ी नहीं, एक statement है… कि हम ऐसे हैं। मजे थोड़े ना होंगे—दादागिरी भी हो और फंसें भी ना?”

इस बयान पर वहां मौजूद कई लोग हंस पड़े और वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

थार मालिक ने क्यों भेजा नोटिस?

गुरुग्राम के सेक्टर-102 के रहने वाले सर्वो मित्र नाम के व्यक्ति ने अपने वकील वेदांत वर्मा के जरिए DGP को लीगल नोटिस भेजा है।

नोटिस में उन्होंने कई बातें लिखी हैं:

जनवरी 2023 में खरीदी थी 30 लाख की थार

उन्होंने लिखा कि उन्होंने 30 लाख रुपये से ज्यादा देकर Thar LX Hard-Top (HR26-EZ-6161) खरीदी थी।
गाड़ी परिवार और लॉन्ग ड्राइव के लिए ली थी क्योंकि वह मजबूत और आरामदायक है।

बयान के बाद मजाक और ताने शुरू

सर्वो मित्र का कहना है कि DGP के बयान के बाद:

  • रिश्तेदार, पड़ोसी और जान-पहचान वाले मजाक उड़ाने लगे
  • सोशल मीडिया पर लोग ताने देने लगे
  • समाज में उनकी गलत छवि बनने लगी

इस मानसिक दबाव की वजह से उन्होंने थार चलाना बंद कर दिया

परिवार भी शर्मिंदगी झेल रहा

उन्होंने बताया कि उनके दो बेटे—
एक कॉलेज में पढ़ता है, दूसरा नौकरी करता है।
दोनों को भी लोग चिढ़ाने लगे कि “तुम्हारे पापा भी बदमाशों वाली गाड़ी चलाते हैं?”

उनका कहना है कि DGP का बयान पूरे थार मालिक समुदाय को बदनाम करता है।
ये “Group Defamation” है, जो कानून के मुताबिक अपराध माना जाता है।

नोटिस में क्या मांगा गया?

सर्वो मित्र ने DGP OP सिंह से मांग की है कि:

  • 15 दिनों के भीतर लिखित में, बिना शर्त माफी मांगें
  • अपना बयान वापस लें

अगर ऐसा नहीं हुआ तो वे भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 356 और अन्य प्रावधानों के तहत सिविल और क्रिमिनल केस करेंगे।

इस विवाद पर राजनीति भी गर्म

DGP के बयान के बाद राजनीति भी गरमा गई।

पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने अपने X (Twitter) पोस्ट में CM नायब सैनी और पूर्व CM मनोहर लाल को टैग करते हुए पूछा:

क्या आपने कभी थार या बुलेट चलाई है?”

उन्होंने तीन तस्वीरें भी पोस्ट कीं—

  1. वे खुद बुलेट चलाते हुए
  2. मनोहर लाल खट्टर बुलेट पर
  3. राहुल गांधी और तेजस्वी यादव SUV में

ऊपर DGP का बयान लिखा था—
थार और बुलेट से बदमाश चलते हैं।
नीचे सवाल—
तो क्या ये सभी भी…?”

इस पर सोशल मीडिया में खूब बहस हुई।

DGP का पक्ष क्या है?

DGP OP सिंह ने सड़क हादसों और रात-रातभर चलने वाले pub/night-life culture पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि:

  • थार और बुलेट वाले कई लोग स्टंट करते हैं
  • ड्रिंक-ड्राइव, ओवरस्पीडिंग और नशे में चालन के मामले बढ़ रहे हैं
  • इसलिए इन वाहनों पर extra vigilance चाहिए

हालांकि उन्होंने यह स्वीकार नहीं किया कि उनका बयान किसी को व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाता है।

विवाद क्यों बढ़ा?

इस मामले में दो बड़े मुद्दे सामने आए—

1.Vehicle Profiling

लोगों का कहना है कि किसी खास गाड़ी को चलाने वालों को “बदमाश” कहना गलत है।
हर Thar मालिक अपराधी नहीं होता।

2. Social Image & Mental Harassment

DGP जैसे उच्च अधिकारी के बयान से लोगों के बीच गलत संदेश जाता है।
कई लोग इसे सोशल स्टिग्मा मान रहे हैं।

आगे क्या हो सकता है?

  • DGP माफी मांगते हैं या नहीं—यह देखना होगा।
  • अगर मामला कोर्ट जाता है तो यह एक महत्वपूर्ण केस बन सकता है:
    क्या किसी अधिकारी का बयान मानहानिमाना जा सकता है?
  • इससे “vehicle-based stereotyping” पर भी कानूनी बहस हो सकती है।
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हरियाणा CM नायब सैनी का दावा: बंगाल में भाजपा का एकतरफा माहौल, पंजाब में भी खिलेगा कमल

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भाजपा के प्रमुख स्टार प्रचारकों में शामिल हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का मानना है कि बंगाल चुनाव में पार्टी के पक्ष में एकतरफा माहौल है। दीदी जा रही हैं। जनता ने कमल खिलाने का मन बना लिया है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में किए जा रहे विकास कार्यों की चर्चा बंगाल में हर तरफ हो रही है। केंद सरकार की कल्याणकारी नीतियों को लोग पसंद कर रहे हैं। बंगाल के बाद पंजाब का नंबर है। वहां के लोगों ने भी कमल खिलाने का मन बना लिया है।

पहली बार गुरुग्राम में हुई कैबिनेट बैठक

बुधवार को हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक की अध्यक्षता करने के लिए साइबर सिटी पहुंचे मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राजनीतिक विषयों पर किए गए सवालों के जवाब में कहा कि बंगाल का माहौल पूरी तरह बदला हुआ है। वहां की सरकार को लोगों ने पूरी तरह उखाड़ फेंकने का मन बना रखा है। जहां तक पंजाब का सवाल है तो वहां के काफी लोग उनसे मिलने आते रहते हैं।

कुछ दिन पहले भी काफी लोग मिलने पहुंचे थे। सभी वहां की सरकार से परेशान हैं। सभी चाहते हैं कि जल्द से जल्द पंजाब में कमल खिले। नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विरोध कर विपक्ष ने देश की आधी आबादी को नाराज कर दिया है। कई देशों की जितनी आबादी नहीं है, उससे अधिक महिलाएं अपने देश में है।

इसके बाद भी उन्हें उनके अधिकारों से वंचित करने का प्रयास विपक्ष ने किया है। चुनावों में देश की जनता जवाब देगी। बंगाल या पंजाब ही नहीं बल्कि जहां पर भी चुनाव होंगे वहां महिलाएं विपक्ष को माफ नहीं करेंगी।

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जालंधर में विपक्ष पर गरजे पूर्व CM खट्टर: महिला आरक्षण विधेयक पर बोले- कांग्रेस को भुगतना पड़ेगा परिणाम

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जालंधर में केंद्रीय मंत्री और हरियाणा के पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर और केंद्रीय मंत्री बेबी मोर्या ने प्रैस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। खट्टर ने कहा कि लोकसभा में महिलाओं के साथ और देश की आधी आबादी के साथ अन्याय हो रहा था। कांग्रेस सरकार ने कभी इसके बारे में नहीं सोचा।

जब कभी भी भारतीय जनता ने इस क्षेत्र में काम करना चाहता तब-तब कांग्रेस सरकार सहित अन्य पार्टियों ने अड़चन डाली। 1971-74 तक महिलाओं को आरक्षण देने के लिए काम शुरू किया गया लेकिन विपक्ष ने कोई न कोई अड़चन डाल दी। इसके बाद 1979 में पहली बार पंचायत में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्ति हुई। कुछ पंचायतों ने इसे 50 प्रतिशत तक भागीदारी दी।

2023 में नहीं लाया जा सका बिल

2023 में 128वें संशोधन के रूप में पीएम मोदी के नेतृत्व में महिला आरक्षण बिल को लाया गया। लेकिन कुछ कमियों के कारण नहीं लाया जा सका। अब फिर से मोदी सरकार ने 2029 से पहले महिला आरक्षण को लागू करने की पहल की। हमने इसका प्रारूप तैयार किया। अब फिर से विपक्ष घिनौना खेल खेल रहा है। कांग्रेस ने इस बिल पर सरकार का साथ नहीं दिया।

आरक्षण को राजनीतिक एंगल नहीं दिया जाना चाहिए

खट्टर ने कहा कि कांग्रेस को इस अपराध का परिणाम भुगतना पड़ेगा। चुनाव परिणाम के रूप में महिलाओं का गुस्सा दिखेगा। पीएम ने कहा है कि इस आरक्षण को राजनीतिक एंगल नहीं दिया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि मुझे तो इसका श्रेय भी नहीं चाहिए। अगर इसका श्रेय कोई भी लेना चाहता है तो ले ले। खट्टर ने कहा कि महिलाओं को जो राजनीति में 33 फीसदी आरक्षण मिलना था वो कांग्रेस के चलने नहीं मिल पाया है। अब ये गैर राजनीतिक मुद्दे की तरह आगे बढ़ेगा। खट्टर ने कहा कि चैन्नई के अंदर को एक विधायक ने इस विधेयक की प्रतियां तक जलाईं। तमिलनाड़ू में इसका विरोध किया।

बेबी रानी मोर्या बोलीं- महिलाएं अपमान नहीं सहतीं, वो बदला जरूर लेंगी

आगरा की पहली मेयर, पूर्व राज्यापाल और नेशनल वूमेन कमीशन चेयपर्सन रह चुकीं बेबी रानी मौर्या ने कहा कि जब ये बिल संसद में पेश हुआ। जब इस पर वोटिंग होनी थी तो विरोधी पार्टियों ने मिलकर देश की आधी आबादी के अधियनियम को गिरा दिया। ये महिलाओं को बड़ा अपमान है। महिलाएं सब सह लेती हैं लेकिन अपना अपमान नहीं सहती। महिलाएं इस अपमान का बदला आने वाले चुनाव में लेंगी।

परिवारवादी पार्टियों ने किया बिल का विरोध

पीएम मोदी ने महिलाओं के लिए शुरू से काम किया है। उज्ज्वला का सिलेंडर दिया, शौचालय दिया ताकि महिलाओं की जिंदगी आसान हो सके। महिला वंदन बिल भी इसी कड़ी का हिस्सा है। मैं आपको बताना चाहती हूं कि जब पंचायती राज में महिलाएं इतना अच्छा काम कर रही हैं। अगर ये राष्ट्रीय राजनीति में आ जातीं तो कितना अच्छा होता। मोर्या ने कहा कि सभी परिवारवारवादी पार्टियों ने इस विधेयक का विरोध किया है।

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हरियाणा सरकार का बड़ा ऐलान, क्लास-IV कर्मचारियों को मिलेगा 27 हजार का ब्याजमुक्त एडवांस, 7 मई तक करें आवेदन

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हरियाणा सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान गेहूं खरीदने के लिए नियमित क्लास-IV राज्य सरकारी कर्मचारियों (स्थायी और अस्थायी दोनों) को ₹27,000 का ब्याज-मुक्त अग्रिम (advance) देने का फैसला किया है. यह सुविधा विशेष रूप से उन कर्मचारियों के लिए उपलब्ध होगी जो अपने या अपने परिवार के उपभोग के लिए गेहूं खरीद रहे हैं.

मुख्य सचिव कार्यालय द्वारा जारी आदेश


मुख्य सचिव कार्यालय द्वारा जारी आदेशों के अनुसार, इच्छुक स्थायी/अस्थायी क्लास-IV कर्मचारी निर्धारित आवेदन पत्र भरकर 7 मई, 2026 (गुरुवार) तक लेखा और विभाजन शाखा (Accounts and Partition Branch) में जमा कर सकते हैं. आवेदन केवल शाम 4:00 बजे से शाम 5:00 बजे के बीच स्वीकार किए जाएंगे. उसके बाद कोई भी आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा. आवेदन पत्र मुख्य सचिवालय की वेबसाइट www.csharyana.gov.in से डाउनलोड किया जा सकता है.

क्या हैं मुख्य शर्तें?


अग्रिम की पूरी राशि वित्तीय वर्ष 2026-27 (31 मार्च, 2027) के अंत से पहले किस्तों में वसूल कर ली जाएगी.अस्थायी कर्मचारियों को यह अग्रिम केवल एक स्थायी कर्मचारी की जमानत (surety) देने पर ही दिया जाएगा. जिन मामलों में पति और पत्नी दोनों सरकारी सेवा में कार्यरत हैं, उनमें से केवल एक ही इस लाभ को प्राप्त करने के लिए पात्र होगा.जो कर्मचारी वर्तमान में प्रतिनियुक्ति (deputation) पर हैं, साथ ही वर्क-चार्ज, आकस्मिक, दैनिक-मजदूरी और संविदा कर्मचारी, वे इस सुविधा के लिए पात्र नहीं होंगे. अग्रिम राशि प्राप्त होने के एक महीने के भीतर, कर्मचारी को एक प्रमाण पत्र जमा करना होगा जिसमें यह पुष्टि हो कि राशि का उपयोग केवल गेहूं खरीदने के लिए किया गया है.

सरकार ने अधिकारियों को जारी किए निर्देश


यह व्यवस्था वित्त विभाग के आदेश संख्या 46/1/2011-WM(6)/1557-1562 (दिनांक 16 अप्रैल, 2026) के तहत स्थापित की गई है.वसूली की प्रक्रिया मई 2026 के वेतन (जिसका भुगतान जून में होगा) के साथ शुरू होगी.सरकार ने सभी विभागाध्यक्षों, मंडल आयुक्तों, उपायुक्तों और आहरण एवं संवितरण अधिकारियों (Drawing and Disbursing Officers) को निर्देश जारी किए हैं, जिसमें चेतावनी दी गई है कि किसी भी ऐसे संबंधित अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाएगी जो किसी अपात्र कर्मचारी को अग्रिम स्वीकृत करता है. खर्च से संबंधित विवरण 31 मई, 2026 तक वित्त विभाग को जमा किए जाने चाहिए.

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