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Uttar Pradesh

UP में 22% Dalit Voters: Political Parties’ की होड़ और रणनीतियाँ

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उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी गर्मी बढ़ती जा रही है। इस बार राजनीति का मुख्य मुद्दा बन रहा है दलित वोट बैंक, जो प्रदेश की लगभग 22% आबादी को कवर करता है। कुल 403 विधानसभा सीटों में 86 आरक्षित सीटें हैं, जिनमें से 84 दलितों के लिए और 2 आदिवासियों के लिए हैं। लेकिन दलित वोटर्स सिर्फ आरक्षित सीटों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि 150 सीटों पर उनका निर्णायक असर भी है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगले चुनाव में जिस पार्टी के पाले में दलित वोट जाएंगे, वही सत्ता की कुंजी हासिल करेगी।

दलित वोटर का इतिहास और बदलता रुझान

पहले जाटव वोटर्स विशेष रूप से बसपा के पक्ष में एकजुट रहते थे। लेकिन 2017 के बाद, दलित वोटर्स भाजपा, सपा और बसपा में बंटते चले गए। 2022 के विधानसभा चुनाव में कई नॉन-जाटव दलित वोटर्स भाजपा गठबंधन की ओर झुके। इसका नतीजा ये हुआ कि भाजपा लगातार दूसरी बार सत्ता में आई।

लेकिन बाद में PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) और संविधान के मुद्दों को लेकर नारों से कुछ दलित वोटर्स सपा की ओर चले गए। यही कारण रहा कि बसपा का वोट बैंक गिरकर 12% से 9.4% रह गया।

लोकनीति-सीएसडीएस सर्वे के अनुसार 2024 में:

  • सपा गठबंधन को नॉन-जाटव दलितों का 56% और जाटवों का 25% वोट मिला।
  • बसपा को जाटवों का 44% और नॉन-जाटवों का 15% वोट मिला।
  • बाकी वोट भाजपा गठबंधन को मिले।

पार्टियों की रणनीतियाँ

बसपा

बसपा के लिए दलित वोट बैंक अब भी अहम है। पार्टी कमजोर पड़ चुकी है, लेकिन इसे फिर से जोड़ने के लिए कांशीराम पुण्यतिथि पर बड़ा शक्ति प्रदर्शन किया गया। मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को सक्रिय किया ताकि युवा दलित वोटर्स को वापस लाया जा सके। बसपा के प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल का कहना है कि भारी भीड़ से साबित हुआ कि बसपा अब भी यूपी की सियासत में प्रासंगिक है।

सपा

सपा ने PDA गठबंधन के माध्यम से दलित वोटर्स को लुभाने की रणनीति अपनाई। पार्टी ने डॉ. अंबेडकर और कांशीराम जयंती पर कार्यक्रम आयोजित किए। साथ ही, अलग-अलग क्षेत्रों में दलित नेताओं को आगे बढ़ाकर वोटर्स को आकर्षित करने का प्रयास किया। सपा प्रवक्ता आजम खान कहते हैं कि सपा दलितों को उचित सम्मान और प्रतिनिधित्व देना चाहती है।

भाजपा

भाजपा ने पहली बार वाल्मीकि जयंती पर सार्वजनिक अवकाश घोषित किया। इसके साथ ही पूरे प्रदेश के मंदिरों में 24 घंटे का अखंड पाठ और कई कार्यक्रम आयोजित किए। भाजपा सफाईकर्मियों के लिए मानदेय बढ़ाना, बीमा कवर और आवास जैसी योजनाएँ लेकर सामने आई। लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी और प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने सपा शासन में हुए दलित अत्याचारों पर निशाना साधा।

कांग्रेस

कांग्रेस भी दलित वोटर्स को अपने पाले में लाने में सक्रिय है। हाल ही में हरिओम वाल्मीकि हत्या केस को लेकर कांग्रेस ने कैंडल मार्च निकाला और सोशल मीडिया पर भाजपा पर हमला किया। प्रदेश अध्यक्ष और प्रभारी नेता अविनाश पांडे और अजय राय ने विभिन्न कार्यक्रमों और श्रद्धांजलि समारोहों के माध्यम से दलितों के मुद्दों को प्रमुखता दी।

विश्लेषण

  • यूपी में पूर्वांचल और बुंदेलखंड इलाकों में दलित वोटर्स की संख्या ज्यादा है, इसलिए ये क्षेत्र चुनाव में निर्णायक होंगे।
  • बसपा अपनी स्थापित पहचान और मायावती के नेतृत्व के दम पर वोट बैंक को मजबूत करना चाहती है।
  • सपा PDA गठबंधन और स्थानीय दलित नेताओं के जरिए वोटर्स को जोड़ने में लगी है।
  • भाजपा सरकारी योजनाओं और सांस्कृतिक आयोजनों के जरिए लुभाने की कोशिश कर रही है।
  • कांग्रेस दलितों के अधिकार और न्याय के मुद्दों को उठाकर समर्थन जुटाने में लगी है।

यूपी के अगले विधानसभा चुनाव में दलित वोटर्स की भूमिका बेहद निर्णायक होगी। जिस पार्टी के पास यह वोट बैंक होगा, वही सत्ता की कुंजी अपने हाथ में रखेगी।

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लखनऊ में महिला आरक्षण मुद्दे पर उबाल—25 हजार महिलाओं का जन आक्रोश मार्च, सीएम योगी ने विपक्ष पर साधा निशाना

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लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पास न होने पर लखनऊ में भाजपा ने मंगलवार को जन आक्रोश महिला पदयात्रा निकाली। सीएम योगी खुद इस पदयात्रा में महिलाओं के साथ पैदल चले। उनके साथ करीब 15 हजार महिलाएं चलीं। योगी के अलावा दोनों डिप्टी सीएम, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी समेत पार्टी के सीनियर लीडर भी कड़ी धूप में पैदल चले।

पदयात्रा सीएम आवास से शुरू होकर विधानसभा तक करीब 2 किमी तक गई। यहां भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने रैली को संबोधित किया। उन्होंने कहा- नकाब वालों के चक्कर में सपा-कांग्रेस ने 80% महिलाओं का नुकसान किया। महिलाओं के मन में जबरदस्त गुस्सा है।

वहीं, सीएम योगी ने कहा- सपा हो या कांग्रेस, इनके कृत्य महिला विरोधी रहे हैं। आज महिलाओं में इनके प्रति कितना गुस्सा है। इसका अंदाजा भीषण गर्मी में इस भीड़ को देखकर लगाया जा सकता है। देश के अंदर केवल 4 जातियां हैं। पहली जाति महिला है। दूसरी गरीब की, तीसरी युवा और चौथी किसान की।

उन्होंने कहा- कांग्रेस, सपा और उनके सहयोगी दलों से जुड़ी महिलाएं भी इस रैली में आई हैं। आज की रैली यहीं समाप्त नहीं होती है। यह आंदोलन बूथ, मंडल, ब्लॉक और जिले स्तर तक जारी रखना है।

गर्मी को देखते हुए पदयात्रा में जगह-जगह प्याऊ, एंबुलेंस की व्यवस्था की गई थी। रैली में शामिल महिलाओं ने राहुल गांधी मुर्दाबाद, नारी के सम्मान में भाजपा मैदान में जैसे नारे लगाए। माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी ने संबोधन में कहा-

सपा और कांग्रेस की स्थिति मेंढक की तरह है। इन्हें चाहे चांदी के चबूतरे में बैठा लो या सोने के। ये उछलेंगे तो नाले में ही कूंदेंगे। महिलाओं को आरक्षण जाति देखकर नहीं दिया जा सकता।

पदयात्रा में सीएम योगी, दोनों डिप्टी सीएम के अलावा कैबिनेट की महिला मंत्री भी हैं। इसके अलावा, गठबंधन की पार्टियां भी शामिल हुई हैं। इनमें ओपी राजभर, आशीष पटेल भी हैं। राजनीति के जानकार इसे भाजपा के शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देख रहे हैं।

भाजपा संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा- नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लोकसभा में पारित न होने पर यह पदयात्रा निकाली गई। उन्होंने बताया कि महिलाओं को राजनीतिक रूप से मजबूत बनाने के लिए पीएम मोदी का महत्वपूर्ण कदम था। सभी दलों से सहयोग मांगने के बावजूद अधिनियम गिर गया।

सीएम योगी ने जन आक्रोश रैली को संबोधित किया। उन्होंने कहा- सपा हो या कांग्रेस, इनके कृत्य महिला विरोधी हैं। महिलाओं में इनके प्रति कितना गुस्सा है। यह दिखा रहा है कि भीषण गर्मी में भी हजारों की संख्या में बहनें आई हैं। देश के अंदर केवल 4 जातियां हैं- महिला, गरीब, युवा और किसान।

देश के अंदर इंस्फ्रास्ट्रक्चर का विकास हो, देश के संरक्षण का काम हो, समाज के हर तबके के उत्थान के लिए चलने वाली योजनाएं हों। इन सबके केंद्र बिंदु में महिलाएं हैं। उन्होंने कहा- पीएम आवास, स्वच्छ भारत मिशन, हर घर शौचालय, हर गरीब को छत, हर महिला को उज्ज्वला योजना से जोड़ना उन्हें ईंधन उपलब्ध कराना ही नहीं है, यह उनके स्वावलंबन के लिए भी है।

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स्मार्ट मीटर को लेकर एक्शन में UPPCL, चार सदस्यीय तकनीकी कमेटी बनी, IIT और रिसर्च एंड डेवलपमेंट के अधिकारी शामिल

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उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर की शिकायतें लगातार बढ़ती जा रही हैं. प्रदेश के लगभग सभी जनपदों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर रोजाना ही विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. ऐसे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले का संज्ञान लिया और अब पावर कॉरपोरेशन की तरफ से स्मार्ट मीटर की गुणवत्ता जांचने और तकनीकी परीक्षण के लिए चार सदस्यीय विशेषज्ञों की समिति का गठन किया गया है. इस समिति में आईआईटी, रिसर्च एंड डेवलपमेंट के साथ ही पावर कारपोरेशन के अधिकारी भी शामिल होंगे.

उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन (UPPCL) ने मुख्यमंत्री के निर्देश पर स्मार्ट मीटर की गुणवत्ता की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय तकनीकी समिति का गठन किया है. इस समिति में आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर अंकुश शर्मा और प्रबोध वाजपेई, इलेक्ट्रिकल रिसर्च एंड डेवलपमेंट एसोसिएशन वडोदरा के अनुभाग प्रमुख तेजस मिस्त्री और पावर कारपोरेशन के निदेशक (वितरण) जीडी द्विवेदी को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है.

समिति के गठन से यह स्पष्ट है कि पावर कारपोरेशन ने स्वयं स्मार्ट मीटर की गुणवत्ता और कनेक्टिविटी से संबंधित शिकायतों को गंभीरता से स्वीकार किया है. उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि पहली बार पावर कारपोरेशन ने यह माना है कि स्मार्ट मीटरों में तकनीकी कमियां मौजूद हैं.

उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश में अब तक लगभग 85 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जो केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की एक अप्रैल 2026 की अधिसूचना के अनुसार स्थापित किए जा रहे हैं. इस स्थिति में यह आवश्यक है कि प्रीपेड आधार पर दिए जा रहे नए बिजली कनेक्शनों को तत्काल प्रभाव से रोका जाए. बिना उपभोक्ताओं की सहमति के प्रीपेड मोड में किए गए 70 लाख से अधिक कनेक्शनों को पोस्टपेड मोड में परिवर्तित किया जाए.

उपभोक्ता परिषद ने पावर कारपोरेशन और प्रदेश सरकार से मांग की है कि जब तक वर्तमान जांच समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक (पब्लिक डोमेन) में जारी नहीं हो जाती, तब तक पूरे उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर की स्थापना पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए.

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सकौती में जाटों का जमावड़ा: CM मान समेत कई दिग्गज पधारे, मंच से गरजे जाट नेता-पहचान व सम्मान से समझौता नहीं

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मेरठ जिले के दौराला क्षेत्र के सकौती स्थित हितकारी इंटर कॉलेज में आज महाराजा सूरजमल की प्रतिमा का अनावरण किया गया। इस अवसर पर जाट संसद की ओर से देशभर में समाज के महापुरुषों की प्रतिमाएं स्थापित करने के अभियान की शुरुआत की गई है। कार्यक्रम में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, समाज के लोग, जनप्रतिनिधि और विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी बड़ी संख्या में मौजूद हैं।

जाट संसद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनु चौधरी ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि आने वाले एक से दो वर्षों में देश के सभी जाट बहुल गांवों में समाज के महापुरुषों की प्रतिमाएं स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। उनका कहना है कि इससे समाज को अपने इतिहास और गौरव से जोड़ने में मदद मिलेगी।

प्रतिमाएं स्थापित करने का अभियान शुरू


मनु चौधरी ने बताया कि जाट संसद की ओर से यह राष्ट्रव्यापी अभियान समाज के महापुरुषों के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू किया गया है। इसके तहत देश के विभिन्न राज्यों में चरणबद्ध तरीके से प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी और समाज के लोगों को इतिहास के प्रति जागरूक किया जाएगा।

कार्यक्रम को लेकर विवाद का आरोप


मनु चौधरी ने आरोप लगाया कि शनिवार रात पुलिस ने कार्यक्रम स्थल पर लगे जाट शब्द को हटवा दिया और चालान करने की चेतावनी दी। उन्होंने इस कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा कि समाज अपनी पहचान और सम्मान से कोई समझौता नहीं करेगा।

कई जनप्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद


कार्यक्रम में कई सांसद, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और क्षेत्रीय नेता मौजूद हैं। आयोजकों के अनुसार पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के प्रमुख हनुमान बेनीवाल के भी कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना है। दोनों नेताओं के कार्यक्रम स्थल की ओर आने की जानकारी दी गई है।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने महाराजा सूरजमल के योगदान को याद करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का आह्वान किया। साथ ही समाज में एकजुटता बढ़ाने और शिक्षा के प्रसार पर विशेष जोर दिया गया।

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