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Mann Government की ‘Watan Wapsi’ पहल सफल, Annual Passport Applications में 30% से ज्यादा कमी

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कभी पंजाब के युवाओं के लिए विदेश जाना ही जिंदगी का सबसे बड़ा सपना हुआ करता था। गांव-गांव में हर किसी की जुबान पर कनाडा, अमेरिका, या ऑस्ट्रेलिया जाने की बातें होती थीं। पासपोर्ट दफ्तरों के बाहर लंबी लाइनें, वीज़ा कंसल्टेंट्स के दफ्तरों में भीड़ — ये नज़ारे आम थे। लेकिन अब तस्वीर धीरे-धीरे बदल रही है।

भगवंत मान सरकार की वतन वापसी पहल ने इस सोच को बदलने की शुरुआत कर दी है। अब पंजाब के युवा सिर्फ विदेश जाने के सपने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अपने ही राज्य में करियर और बिज़नेस बनाने की दिशा में सोचने लगे हैं। सरकार की नीतियों और रोज़गार के नए अवसरों की वजह से युवाओं का विश्वास लौट रहा है।

10 साल में सबसे बड़ी गिरावट: पासपोर्ट की डिमांड घटी

विदेश मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि पंजाब में विदेश जाने का क्रेज़ अब पहले जैसा नहीं रहा।

  • 1 जनवरी 2025 से 30 जून 2025 तक सिर्फ 3.50 लाख पासपोर्ट ही बनाए गए।
  • यह पिछले 10 सालों का सबसे कम आंकड़ा है।
  • रोज़ाना औसतन सिर्फ 1,978 पासपोर्ट आवेदन आ रहे हैं।
  • अगर यही रफ्तार रही तो 2025 के अंत तक लगभग 7.50 लाख पासपोर्ट ही बनेंगे।
  • पिछले चार सालों में यह सबसे कम संख्या होगी।

पहले जहां सालाना पासपोर्ट की गिनती 10-12 लाख तक पहुंच जाती थी, वहीं अब यह लगभग 30-35% तक गिर गई है।

सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता का असर

भगवंत मान सरकार ने युवाओं को 50,000 से ज्यादा सरकारी नौकरियां दी हैं।

  • खास बात यह है कि ये नौकरियां पूरी तरह पारदर्शी तरीके से दी गईं।
  • न सिफारिश, न रिश्वत — सिर्फ मेहनत और काबिलियत के आधार पर भर्ती।
  • इससे युवाओं का विश्वास बढ़ा कि अब मेरी मेहनत बेकार नहीं जाएगी।

पहले सरकारी नौकरियों को लेकर भ्रष्टाचार के आरोप लगते थे। कई बार पैसे देकर नौकरी लेने की खबरें आती थीं, जिससे युवाओं का सिस्टम पर भरोसा टूट गया था। लेकिन अब यह भरोसा दोबारा लौट रहा है।

निजी सेक्टर में भी नए मौके

सरकार ने इन्वेस्ट पंजाब प्रोजेक्ट के तहत बड़े उद्योगपतियों और निवेशकों को राज्य में निवेश करने के लिए आकर्षित किया है।

  • पॉलीकॉप जैसी बड़ी कंपनियों ने पंजाब में अपने प्लांट लगाए हैं।
  • इससे हजारों युवाओं को प्राइवेट सेक्टर में रोजगार मिल रहा है।
  • पंजाब में निवेश का नया दौर शुरू हो गया है, जिससे इंडस्ट्री और बिजनेस को बढ़ावा मिल रहा है।

विदेशी देशों की सख्ती और पंजाब का विकल्प

विदेशों में वीज़ा और इमिग्रेशन के नियम कड़े हो गए हैं, खासकर अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में।

  • वीज़ा के लिए पहले जैसी आसानी नहीं रही।
  • पढ़ाई या नौकरी के लिए बाहर जाना अब महंगा और मुश्किल हो गया है।

इस वजह से भी कई युवा अब विदेश जाने की बजाय पंजाब में ही रहने का फैसला कर रहे हैं।
जब उन्हें राज्य में ही रोज़गार, मान-सम्मान और सुरक्षा मिल रही है, तो बाहर जाने की ज़रूरत नहीं लगती।

एनआरआई के लिए नई पहलें

पहले की सरकारें एनआरआई (Non-Resident Indians) को सिर्फ डोनेशन देने वाले के रूप में देखती थीं। उनकी असली समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जाता था, खासकर:

  • जमीन या प्रॉपर्टी के विवाद,
  • कानूनी झंझट,
  • सरकारी दफ्तरों में परेशानियां।

मान सरकार ने इसे बदलने के लिए कदम उठाए:

  • एनआरआई मिलनी का आयोजन, जहां एनआरआई सीधे सरकार से अपनी समस्या बता सकें।
  • स्पेशल एनआरआई डेस्क, जहां उनकी समस्याओं का तुरंत समाधान किया जाता है।

इससे एनआरआई का भरोसा बढ़ा और कई लोगों ने पंजाब वापस लौटकर बिजनेस में निवेश करना शुरू कर दिया।

आम आदमी पार्टी का वादा और उसका असर

आम आदमी पार्टी ने पंजाब की राजनीति में एंट्री ही युवाओं के मुद्दों पर की थी।
उनका नारा था: भ्रष्टाचार खत्म होगा, युवाओं को रोजगार मिलेगा।”

मान सरकार ने आते ही:

  • भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की,
  • नौकरी में पैसे का खेल खत्म किया।

इससे युवाओं को यकीन हुआ कि अब सिस्टम साफ-सुथरा हो रहा है।
अब सिर्फ मेहनत करने वालों को ही आगे बढ़ने का मौका मिलेगा।

युवाओं की सोच में बदलाव: रिवर्स माइग्रेशनकी शुरुआत

पहले पंजाब के युवाओं का सपना सिर्फ विदेश जाकर सेटल होना होता था।
लेकिन अब सोच बदल रही है:

  • जो युवा विदेश जाने की तैयारी कर रहे थे, वे अब यहीं करियर बनाने की सोच रहे हैं।
  • कई ऐसे लोग भी वापस लौट रहे हैं जो पहले विदेश में काम कर रहे थे।

इसे रिवर्स माइग्रेशन कहा जा रहा है — यानी पंजाब का टैलेंट अब वापस पंजाब में लौट रहा है।
युवाओं का कहना है कि जब अपने राज्य में ही रोज़गार और इज्जत मिल रही है, तो घर छोड़ने की क्या जरूरत है।

वतन वापसीका असली मतलब

‘वतन वापसी’ सिर्फ एक सरकारी स्कीम नहीं, बल्कि एक भावनात्मक जुड़ाव है।

  • यह पंजाब के युवाओं को यह संदेश देती है कि तुम्हारा भविष्य यहीं है।
  • यह विदेशों से लौटे युवाओं की कहानी ही नहीं, बल्कि उन लोगों की भी कहानी है जो पहले विदेश जाना चाहते थे लेकिन अब यहीं रहने का फैसला कर रहे हैं।
  • यह पंजाब को दोबारा रंगला पंजाब बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।

नतीजा

  • पंजाब में अब पासपोर्ट के आवेदन घट रहे हैं।
  • विदेश जाने का क्रेज़ कम हो रहा है।
  • रोज़गार के मौके बढ़ रहे हैं।
  • एनआरआई वापस लौटकर निवेश कर रहे हैं।
  • युवाओं का विश्वास सरकार और सिस्टम पर बढ़ रहा है।

भगवंत मान सरकार की यह पहल साबित कर रही है कि अगर सही नीयत और साफ नीतियां हों तो ब्रेन ड्रेन को रोका जा सकता है।
अब पंजाब में सिर्फ लोग वापस नहीं आ रहे, बल्कि सपने और विश्वास भी लौट रहे हैं।

पंजाब का यह बदलाव आने वाले समय में राज्य की पहचान को फिर से परिभाषित कर सकता है —अब विदेश जाना ही सफलता नहीं, अपने वतन में रहकर कुछ करना ही असली कामयाबी है।

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अमन अरोड़ा ने शाहकोट हलके में नौकरियों के मामले में कांग्रेसी विधायक लाडी को घेरा

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पंजाब विधान सभा में विपक्ष को घेरते हुए पंजाब के रोजगार सृजन, कौशल विकास और प्रशिक्षण तथा उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री श्री अमन अरोड़ा ने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले साढ़े चार सालों में 68000 से अधिक सरकारी नौकरियां प्रदान की हैं और 1,83,837 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करने के साथ-साथ निजी क्षेत्र में 6,36,636 नौकरियों के अवसर पैदा किए हैं।

आज सदन में विधायक स. कुलदीप सिंह धालीवाल द्वारा रोजगार के अवसरों के बारे में पेश किए गए प्रस्ताव पर चर्चा का समापन करते हुए श्री अमन अरोड़ा ने सदन को बताया कि इस बड़े निवेश प्रवाह ने सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से निजी क्षेत्र में 6.36 लाख से अधिक नौकरियों के अवसर पैदा किए हैं। उन्होंने जापान की प्रमुख स्टील कंपनी आइची स्टील का उदाहरण दिया, जिसने मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली राज्य सरकार की सुविधाओं और कारोबार को आसान बनाने वाली नीतियों से प्रभावित होकर अपने नियोजित निवेश को 500 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1100 करोड़ रुपये कर दिया है।

कांग्रेस के विधायक हरदेव सिंह लाडी शेरोवालिया द्वारा उनके शाहकोट विधानसभा हलके में किसी भी व्यक्ति को सरकारी नौकरी न मिलने के आरोप पर श्री अमन अरोड़ा ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें अपने शाहकोट हलके में सभा रखने की चुनौती दी। उन्होंने कहा, ”मैं आऊंगा और हम लोगों से पूछेंगे, क्या उन्हें नौकरियां मिली हैं। अगर मैं गलत हुआ, तो मैं मंत्री पद और विधायक के तौर पर इस्तीफा दे दूंगा। अगर मैं सही हुआ तो लाडी को इस्तीफा देना होगा।” कांग्रेसी विधायक लाडी ने यह चुनौती स्वीकार नहीं की और चर्चा छोड़कर बैठ गए।

उन्होंने जोर देकर कहा कि पंजाब सरकार ने सभी सरकारी नौकरियां बिना किसी रिश्वत या सिफारिश के केवल योग्यता के आधार पर दी हैं।

श्री अमन अरोड़ा ने कौशल विकास के लिए राज्य सरकार के रिकॉर्ड प्रयासों का हवाला देते हुए बताया कि राज्य के बजट में 75 सालों में पहली बार कौशल विकास मिशन के लिए 25 करोड़ रुपये रखे गए हैं, जो पिछले साल 10 करोड़ रुपये थे। उन्होंने दावा किया कि 22 लाख से अधिक नौजवानों को रोजगार में प्लेसमेंट कैंपों और हैंडहोल्डिंग अभ्यासों के माध्यम से सुविधा दी गई है। उन्होंने बताया कि सुनाम में हाल ही में आयोजित एक मेगा रोजगार मेले में, 61 कंपनियों ने भाग लिया और लगभग 700 नौजवानों को मौके पर ही नियुक्ति पत्र जारी किए।

रोजगार सृजन मंत्री ने आगे बताया कि राज्य सरकार द्वारा 100 करोड़ रुपये की लागत से संगरूर जिले में विश्व स्तरीय संत अतर सिंह महाराज आर्म्ड फोर्सेज प्रेपरेटरी इंस्टीट्यूट स्थापित किया जा रहा है। यह विश्व स्तर पर अपनी तरह का पहला संस्थान है, जहां सशस्त्र सेनाओं में अधिकारी स्तर के पदों के लिए वार्षिक 500 नौजवानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।

केंद्र सरकार के आंकड़ों का हवाला देते हुए श्री अमन अरोड़ा ने बताया कि 15-29 साल आयु वर्ग में पंजाब की बेरोजगारी दर वर्ष 2022 की 19.1 प्रतिशत से घटकर 2025 में 17 प्रतिशत हो गई है। मंत्री ने पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वेक्षण का हवाला देते हुए बताया कि अब पंजाब बेहतर रोजगार मैट्रिक्स वाले राज्यों में शामिल है।

वैश्विक स्तर का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि आजादी के समय भारत की जीडीपी चीन से थोड़ी अधिक थी। उन्होंने कहा, ”चीन ने अपने प्रत्येक व्यक्ति को काम पर लगाया और दुनिया की सबसे बड़ी फैक्ट्री बनकर उभरा। चीन निकट भविष्य में अमेरिका को पछाड़ सकता है। हमारे पास वही क्षमता है, लेकिन सही वातावरण की कमी थी। पर अब हम इसे ठीक कर रहे हैं।”

कैबिनेट मंत्री ने जोर देकर कहा कि दुनिया की कोई भी सरकार प्रत्येक नागरिक को नौकरी देने की गारंटी नहीं दे सकती। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सरकार का असल कर्तव्य उद्योग और रोजगार के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना होता है। उन्होंने कहा, ”हम यहां केवल आंकड़े पेश करने के लिए नहीं हैं। हम ऐसा माहौल बना रहे हैं, जहां हर नौजवान अपने पैरों पर खड़ा हो सके।”

विपक्ष द्वारा नौकरियों के बारे में व्हाइट पेपर जारी करने की मांग पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, ‘सबसे अच्छा, सस्ता और टिकाऊ व्हाइट पेपर लोगों से सीधे तौर पर पूछना है। आरटीआई दायर करो या लोगों के साथ मीटिंग करो। लोग खुद बताने देंगे कि उन्हें नौकरियां मिली हैं या नहीं।”

श्री अमन अरोड़ा ने पिछली कांग्रेस सरकार के ‘हर घर नौकरी’ वादे पर कटाक्ष करते हुए इसे पंजाब के नौजवानों के साथ ‘सबसे बड़ा धोखा’ बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि ‘आप’ सरकार ने बिना किसी रिश्वत के पारदर्शी तरीके से 68000 से अधिक सरकारी नौकरियां प्रदान की हैं। उन्होंने दोहराया कि सरकार का एकमात्र उद्देश्य पंजाब को ‘कारोबार करने में आसानी’ के लिए एक मॉडल राज्य बनाना और सम्मानजनक, कौशल-आधारित रोजगार पैदा करना है।

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सियाम ने भी माना, ई-20 में ज्यादा क्लोराइड और नमी के कारण खराब हो रही गाड़ियां- केजरीवाल

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आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने ई-20 को लेकर सियाम की सौंपी गई रिपोर्ट को वापस कराने पर केंद्र की मोदी सरकार को आड़े हाथ लिया है। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि सियाम (सोसायटी ऑफ इंडिया ऑटोमोबाइल मैनुफैक्चरर्स) की एक रिपोर्ट आई है, जिसमें साफ़ लिखा है कि ई-20 में बहुत ज्यादा क्लोराइड और नमी है, जिससे आपकी गाड़ियां ख़राब हो रही हैं। मोदी सरकार ने सियाम पर दबाव डालकर वो रिपोर्ट वापस करवा दी। क्यों? जब विज्ञान और इंजीनियरिंग कह रहे हैं कि ई-20 ख़राब है, तो मोदी सरकार इसे देश पर जबरन क्यों थोप रही है?

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि ई-20 को लेकर सियाम की यह रिपोर्ट चौंकाने वाली है। सियाम ने रिसर्च की और ऑटोमोबाइल के सभी मैन्युफैक्चरर्स ने मिलकर यह पाया कि क्लोराइड और मॉइस्चर ज्यादा होने की वजह से ई-20 गाड़ियों को खराब कर रहा है। सियाम ने 28 जुलाई को मोदी सरकार को यह रिपोर्ट सौंपी थी। 4 अगस्त तक केंद्र सरकार ने सियाम पर जबरदस्ती करके वह रिपोर्ट वापस करा दी। रिपोर्ट वापस करने के बाद सियाम की तरफ से कहा गया कि शायद उनकी रिपोर्ट में कुछ गड़बड़ी है और कुछ तथ्यों को दोबारा चेक करने की जरूरत है। एक तरह से मोदी सरकार जबरदस्ती करके पूरे देश पर ई-20 थोप रही है, लेकिन क्यों?

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RBI ने लगातार तीसरी बार रेपो रेट 5.25% पर रखा, ब्याज दरों में नहीं किया कोई बदलाव

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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बुधवार को लगातार तीसरी बार अपनी प्रमुख नीतिगत ब्याज दर यानी रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया। मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर ही बरकरार रखने का फैसला किया। RBI के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, ऊर्जा कीमतों में अनिश्चितता और आपूर्ति से जुड़े जोखिमों को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।

RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि भारत अब भी दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है। उन्होंने कहा कि मजबूत घरेलू मांग से आर्थिक विकास को सहारा मिल रहा है और अप्रैल-जून तिमाही का प्रदर्शन RBI के अनुमान से बेहतर रहा है।

तीसरी द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए गवर्नर ने कहा कि सेवा क्षेत्र की मजबूती से शहरी खपत में और बढ़ोतरी की उम्मीद है। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, वैश्विक वित्तीय बाजारों में अस्थिरता और अल नीनो से जुड़े जोखिम अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बने हुए हैं। उनके अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से प्रमुख व्यापारिक मार्ग भी प्रभावित हो रहे हैं।

संजय मल्होत्रा ने कहा कि कच्चे तेल और खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों के कारण आने वाले महीनों में खुदरा महंगाई बढ़ सकती है। उनका अनुमान है कि तीसरी तिमाही में महंगाई अपने उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद धीरे-धीरे कम होगी। उन्होंने कहा कि महंगाई पर सबसे अधिक असर खाद्य और ईंधन की कीमतों का है।

RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP वृद्धि दर का अनुमान 6.6 फीसदी से बढ़ाकर 6.7 फीसदी कर दिया है। वहीं, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई का अनुमान 5.1 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया गया है।

गवर्नर ने बताया कि जून से बैंकिंग प्रणाली में औसत तरलता (Liquidity) 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक बनी हुई है। उन्होंने कहा कि बैंकिंग प्रणाली में ऋण वृद्धि मजबूत बनी हुई है और पर्याप्त तरलता उपलब्ध है।

RBI ने यह भी चेतावनी दी कि वैश्विक व्यापार में सुस्ती, ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी और व्यापार नीतियों से जुड़ी अनिश्चितता भारत के चालू खाते के घाटे पर दबाव डाल सकती है।

इस बीच रुपया भी लगातार दबाव में है। डॉलर के मुकाबले रुपया 95 से 96 रुपये प्रति डॉलर के बीच कारोबार कर रहा है। महंगा कच्चा तेल, विदेशी निवेश की निकासी, बढ़ता व्यापार घाटा और मजबूत होता डॉलर रुपये पर लगातार दबाव बना रहे हैं। वर्ष 2026 में अब तक रुपया करीब 7 फीसदी कमजोर हो चुका है, जबकि ईरान के साथ तनाव शुरू होने के बाद इसमें लगभग 6 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।

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