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Mann Government की ‘Watan Wapsi’ पहल सफल, Annual Passport Applications में 30% से ज्यादा कमी

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कभी पंजाब के युवाओं के लिए विदेश जाना ही जिंदगी का सबसे बड़ा सपना हुआ करता था। गांव-गांव में हर किसी की जुबान पर कनाडा, अमेरिका, या ऑस्ट्रेलिया जाने की बातें होती थीं। पासपोर्ट दफ्तरों के बाहर लंबी लाइनें, वीज़ा कंसल्टेंट्स के दफ्तरों में भीड़ — ये नज़ारे आम थे। लेकिन अब तस्वीर धीरे-धीरे बदल रही है।

भगवंत मान सरकार की वतन वापसी पहल ने इस सोच को बदलने की शुरुआत कर दी है। अब पंजाब के युवा सिर्फ विदेश जाने के सपने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अपने ही राज्य में करियर और बिज़नेस बनाने की दिशा में सोचने लगे हैं। सरकार की नीतियों और रोज़गार के नए अवसरों की वजह से युवाओं का विश्वास लौट रहा है।

10 साल में सबसे बड़ी गिरावट: पासपोर्ट की डिमांड घटी

विदेश मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि पंजाब में विदेश जाने का क्रेज़ अब पहले जैसा नहीं रहा।

  • 1 जनवरी 2025 से 30 जून 2025 तक सिर्फ 3.50 लाख पासपोर्ट ही बनाए गए।
  • यह पिछले 10 सालों का सबसे कम आंकड़ा है।
  • रोज़ाना औसतन सिर्फ 1,978 पासपोर्ट आवेदन आ रहे हैं।
  • अगर यही रफ्तार रही तो 2025 के अंत तक लगभग 7.50 लाख पासपोर्ट ही बनेंगे।
  • पिछले चार सालों में यह सबसे कम संख्या होगी।

पहले जहां सालाना पासपोर्ट की गिनती 10-12 लाख तक पहुंच जाती थी, वहीं अब यह लगभग 30-35% तक गिर गई है।

सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता का असर

भगवंत मान सरकार ने युवाओं को 50,000 से ज्यादा सरकारी नौकरियां दी हैं।

  • खास बात यह है कि ये नौकरियां पूरी तरह पारदर्शी तरीके से दी गईं।
  • न सिफारिश, न रिश्वत — सिर्फ मेहनत और काबिलियत के आधार पर भर्ती।
  • इससे युवाओं का विश्वास बढ़ा कि अब मेरी मेहनत बेकार नहीं जाएगी।

पहले सरकारी नौकरियों को लेकर भ्रष्टाचार के आरोप लगते थे। कई बार पैसे देकर नौकरी लेने की खबरें आती थीं, जिससे युवाओं का सिस्टम पर भरोसा टूट गया था। लेकिन अब यह भरोसा दोबारा लौट रहा है।

निजी सेक्टर में भी नए मौके

सरकार ने इन्वेस्ट पंजाब प्रोजेक्ट के तहत बड़े उद्योगपतियों और निवेशकों को राज्य में निवेश करने के लिए आकर्षित किया है।

  • पॉलीकॉप जैसी बड़ी कंपनियों ने पंजाब में अपने प्लांट लगाए हैं।
  • इससे हजारों युवाओं को प्राइवेट सेक्टर में रोजगार मिल रहा है।
  • पंजाब में निवेश का नया दौर शुरू हो गया है, जिससे इंडस्ट्री और बिजनेस को बढ़ावा मिल रहा है।

विदेशी देशों की सख्ती और पंजाब का विकल्प

विदेशों में वीज़ा और इमिग्रेशन के नियम कड़े हो गए हैं, खासकर अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में।

  • वीज़ा के लिए पहले जैसी आसानी नहीं रही।
  • पढ़ाई या नौकरी के लिए बाहर जाना अब महंगा और मुश्किल हो गया है।

इस वजह से भी कई युवा अब विदेश जाने की बजाय पंजाब में ही रहने का फैसला कर रहे हैं।
जब उन्हें राज्य में ही रोज़गार, मान-सम्मान और सुरक्षा मिल रही है, तो बाहर जाने की ज़रूरत नहीं लगती।

एनआरआई के लिए नई पहलें

पहले की सरकारें एनआरआई (Non-Resident Indians) को सिर्फ डोनेशन देने वाले के रूप में देखती थीं। उनकी असली समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जाता था, खासकर:

  • जमीन या प्रॉपर्टी के विवाद,
  • कानूनी झंझट,
  • सरकारी दफ्तरों में परेशानियां।

मान सरकार ने इसे बदलने के लिए कदम उठाए:

  • एनआरआई मिलनी का आयोजन, जहां एनआरआई सीधे सरकार से अपनी समस्या बता सकें।
  • स्पेशल एनआरआई डेस्क, जहां उनकी समस्याओं का तुरंत समाधान किया जाता है।

इससे एनआरआई का भरोसा बढ़ा और कई लोगों ने पंजाब वापस लौटकर बिजनेस में निवेश करना शुरू कर दिया।

आम आदमी पार्टी का वादा और उसका असर

आम आदमी पार्टी ने पंजाब की राजनीति में एंट्री ही युवाओं के मुद्दों पर की थी।
उनका नारा था: भ्रष्टाचार खत्म होगा, युवाओं को रोजगार मिलेगा।”

मान सरकार ने आते ही:

  • भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की,
  • नौकरी में पैसे का खेल खत्म किया।

इससे युवाओं को यकीन हुआ कि अब सिस्टम साफ-सुथरा हो रहा है।
अब सिर्फ मेहनत करने वालों को ही आगे बढ़ने का मौका मिलेगा।

युवाओं की सोच में बदलाव: रिवर्स माइग्रेशनकी शुरुआत

पहले पंजाब के युवाओं का सपना सिर्फ विदेश जाकर सेटल होना होता था।
लेकिन अब सोच बदल रही है:

  • जो युवा विदेश जाने की तैयारी कर रहे थे, वे अब यहीं करियर बनाने की सोच रहे हैं।
  • कई ऐसे लोग भी वापस लौट रहे हैं जो पहले विदेश में काम कर रहे थे।

इसे रिवर्स माइग्रेशन कहा जा रहा है — यानी पंजाब का टैलेंट अब वापस पंजाब में लौट रहा है।
युवाओं का कहना है कि जब अपने राज्य में ही रोज़गार और इज्जत मिल रही है, तो घर छोड़ने की क्या जरूरत है।

वतन वापसीका असली मतलब

‘वतन वापसी’ सिर्फ एक सरकारी स्कीम नहीं, बल्कि एक भावनात्मक जुड़ाव है।

  • यह पंजाब के युवाओं को यह संदेश देती है कि तुम्हारा भविष्य यहीं है।
  • यह विदेशों से लौटे युवाओं की कहानी ही नहीं, बल्कि उन लोगों की भी कहानी है जो पहले विदेश जाना चाहते थे लेकिन अब यहीं रहने का फैसला कर रहे हैं।
  • यह पंजाब को दोबारा रंगला पंजाब बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।

नतीजा

  • पंजाब में अब पासपोर्ट के आवेदन घट रहे हैं।
  • विदेश जाने का क्रेज़ कम हो रहा है।
  • रोज़गार के मौके बढ़ रहे हैं।
  • एनआरआई वापस लौटकर निवेश कर रहे हैं।
  • युवाओं का विश्वास सरकार और सिस्टम पर बढ़ रहा है।

भगवंत मान सरकार की यह पहल साबित कर रही है कि अगर सही नीयत और साफ नीतियां हों तो ब्रेन ड्रेन को रोका जा सकता है।
अब पंजाब में सिर्फ लोग वापस नहीं आ रहे, बल्कि सपने और विश्वास भी लौट रहे हैं।

पंजाब का यह बदलाव आने वाले समय में राज्य की पहचान को फिर से परिभाषित कर सकता है —अब विदेश जाना ही सफलता नहीं, अपने वतन में रहकर कुछ करना ही असली कामयाबी है।

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AAP पंजाब ने चुनाव से पहले वोटरों को बांटने के लिए भाजपा पर डर और डराने-धमकाने की राजनीति करने का लगाया आरोप : अमन अरोड़ा

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आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने मंगलवार को जालंधर और अमृतसर में हाल ही में हुए धमाकों के लिए विपक्षी पार्टियों द्वारा पंजाब सरकार को ज़िम्मेदार ठहराने की कोशिशों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं का राजनीतिक फ़ायदे के लिए गलत इस्तेमाल किया जा रहा है और आरोप लगाया कि भाजपा का चुनाव से पहले डर और बांटने का इतिहास रहा है।

अरोड़ा ने कहा कि पूरे देश में एक रुझान देखा गया है जहां चुनाव से पहले वोटरों को बांटने के लिए कानून-व्यवस्था, धर्म या सुरक्षा से जुड़ी घटनाओं का सहारा लिया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी फ़ायदे के लिए अशांति फैलाने और समुदायों को बांटने के लिए अक्सर ऐसे तरीके अपनाए जाते हैं।

उन्होंने कहा कि पंजाब चुनाव की ओर बढ़ रहा है और मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार के लोगों के पक्ष के कामों से घबराई हुई है। इसीलिए ऐसी साज़िशें रची जा रही हैं।

उन्होंने आगे कहा कि ऐसी घटनाओं की ज़िम्मेदारी केंद्र सरकार की है, क्योंकि इंटरनेशनल बॉर्डर पर बॉर्डर सिक्योरिटी फ़ोर्स (बीएसएफ) का अधिकार क्षेत्र 15 किलोमीटर से बढ़ाकर 50 किलोमीटर कर दिया गया है। यह देखते हुए कि अमृतसर और जालंधर दोनों इस दायरे में आते हैं, अरोड़ा ने कहा कि जवाबदेही केंद्रीय एजेंसियों और केंद्र में भाजपा की सरकार की है।

अरोड़ा ने आतंकवाद की यादें ताज़ा करके पंजाब को अस्थिर करने और डर पैदा करने की कोशिशों के ख़िलाफ़ भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि पंजाबी इन “नापाक इरादों” से वाकिफ़ हैं और बांटने वाली राजनीति का शिकार नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि पंजाब सांप्रदायिक सद्भाव की ज़मीन है, जहाँ सबसे बुरे समय में भी नफ़रत के बीज कभी नहीं उगे। लोगों को धर्म के आधार पर बांटने की कोशिशें यहाँ कभी कामयाब नहीं होंगी।

पंजाब की एकता और धर्मनिरपेक्षता की विरासत को दोहराते हुए, अरोड़ा ने भाजपा और केंद्र सरकार से ऐसी चालों से बचने और राज्य के सामाजिक ताने-बाने का सम्मान करने की अपील की। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि पंजाब के लोग शांति और सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने की किसी भी कोशिश के खिलाफ एकजुट रहेंगे।

पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ, डॉ. बलबीर सिंह और हरजोत सिंह बैंस ने भी हाल के धमाकों को लेकर भाजपा और केंद्र सरकार पर निशाना साधा और कहा कि इसके लिए केंद्रीय एजेंसियां ज़िम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र ने इंटरनेशनल बॉर्डर पर बीएसएफ का अधिकार क्षेत्र 15 किलोमीटर से बढ़ाकर 50 किलोमीटर कर दिया है, जिससे अमृतसर और जालंधर जैसे इलाके इसके दायरे में आ गए हैं। इसे देखते हुए, उन्होंने कहा कि सुरक्षा में किसी भी चूक की ज़िम्मेदारी सीधे केंद्र की है। मंत्रियों ने आगे कहा कि राजनीतिक फ़ायदे के लिए पंजाब की शांति को बिगाड़ने की भाजपा की कोशिशें कभी कामयाब नहीं होंगी, क्योंकि राज्य के लोग एकजुट हैं और ऐसी बांटने वाली चालों के खिलाफ़ सतर्क हैं।

पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने राजनीतिक फ़ायदे के लिए पंजाब को अस्थिर करने की भाजपा की कोशिशों की निंदा करते हुए कहा कि राज्य “कोई ट्रॉफी नहीं बल्कि एक इमोशनल पहचान है।” अमन अरोड़ा की चिंताओं का ज़िक्र करते हुए, बैंस ने कहा कि चुनाव से पहले डर, अशांति और पोलराइज़ेशन पैदा करने के ऐसे तरीके बहुत गैर-ज़िम्मेदाराना और खतरनाक हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब की विरासत भारत की आज़ादी की लड़ाई के दौरान दिए गए बड़े बलिदानों पर बनी है और इसे सिर्फ़ चुनावी महत्वाकांक्षाओं तक सीमित नहीं रखा जा सकता। भाजपा के “बंगाल की तरह पंजाब जीतने” के दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए, बैंस ने इन बातों को शर्मनाक और असंवेदनशील बताया और कहा कि पंजाबी अपने निजी राजनीतिक फ़ायदों के लिए अपनी एकता और शांति को कभी भी टूटने नहीं देंगे।

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पंजाब में बेअदबी विरोधी कानून लागू होने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने श्री आनंदपुर साहिब से ‘शुक्राना यात्रा’ का किया नेतृत्व

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज यहां तख्त श्री केसगढ़ साहिब में माथा टेकने के बाद पूरे उत्साह के साथ ‘शुक्राना यात्रा’ शुरू की। कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस की मौजूदगी में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह यात्रा परमात्मा का शुक्राना करने के लिए की जा रही है, जिसने उन्हें बेअदबी के मामलों में सख्त सजा की व्यवस्था करने वाला जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सतिकार (संशोधन) एक्ट 2026 लागू करके मानवता की सेवा करने का अवसर बख्शा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “जिस पवित्र धरती पर खालसा पंथ प्रकट हुआ था, उससे ‘शुक्राना यात्रा’ शुरू हुई है। बेअदबी रोकने के लिए सख्त कानून बनाने की पवित्र जिम्मेदारी हमें बख्शने के लिए गुरु साहिब के चरणों में शुक्राना किया जा रहा है। पंजाब की शांति और ‘सर्बत्त के भला’ के लिए अरदासें जारी रहेंगी।”

पवित्र तख्त साहिब में माथा टेकते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “मेरा रोम-रोम परमात्मा का ऋणी है कि उसने मुझे जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सतिकार (संशोधन) एक्ट 2026 लागू करके मानवता की सेवा करने का अवसर बख्शा। हम भाग्यशाली हैं कि हमें इस ऐतिहासिक कानून को पास करने की जिम्मेदारी मिली, जो भविष्य में बेअदबी की घटनाओं को खत्म करने में मददगार होगा।”उन्होंने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी एक गहरी साजिश का हिस्सा थी, जिसका उद्देश्य पंजाब की शांति, भाईचारक साझ और एकता को तोड़ना था। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह एक्ट यह सुनिश्चित करता है कि इस अक्षम्य अपराध के दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को माफ नहीं किया जाएगा और इस घिनौने अपराध के दोषियों को अनुकरणीय सजा दी जाएगी। यह कानून निवारक के रूप में काम करेगा और भविष्य में कोई भी ऐसा गुनाह करने की हिम्मत नहीं करेगा।”

सिखों की श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के साथ आध्यात्मिक साझ पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी हर सिख के लिए पिता के समान हैं और इसकी पवित्रता की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है। दुनिया भर के लोग इस ऐतिहासिक कदम पर खुशी प्रकट कर रहे हैं और धन्यवाद कर रहे हैं।” शुक्राना यात्रा के बारे में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि श्री आनंदपुर साहिब के बाद वे 9 मई तक तख्त श्री केसगढ़ साहिब, श्री अकाल तख्त साहिब, श्री दमदमा साहिब, मस्तुआणा साहिब, गुरुद्वारा दुख निवारण साहिब और श्री फतेहगढ़ साहिब में नतमस्तक होंगे। उन्होंने अत्यधिक गर्मी के बावजूद यहां एकत्रित हुए लोगों का धन्यवाद करते हुए कहा कि “इस यात्रा का एकमात्र मंतव्य इस महत्वपूर्ण एक्ट को पास करने के लिए ताकत और बख्शने के लिए परमात्मा का शुक्राना करना है।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “हम तो एक माध्यम हैं, जिसे गुरु साहिब ने यह पवित्र जिम्मेदारी निभाने के लिए चुना है। मैं इस एक्ट को पास करने वाला कोई नहीं हूं। गुरु साहिब ने खुद यह सेवा मुझसे ली है। परमात्मा ऐसी सेवा सिर्फ उन्हीं को सौंपता है, जिन्हें उसने खुद चुना होता है। मैं गुरु साहिब का एक विनम्र सेवक हूं, जिसे यह कार्य सौंपा गया है।” उन्होंने आगे कहा कि समाज के सभी वर्गों के लोग लंबे समय से बेअदबी की घटनाओं को रोकने के लिए ऐसे कानून की मांग कर रहे थे। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “इस एक्ट का एकमात्र उद्देश्य पिछली सरकारों की लापरवाही के कारण लोगों की अशांत हुई भावनाओं को शांत करना है। इस कानून के पीछे कोई भी राजनीतिक मंतव्य नहीं है।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि दुनिया भर के लोग इस पहल के लिए हमारा धन्यवाद करने के लिए रोजाना फोन कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि कुछ व्यक्ति इस एक्ट का विरोध सिर्फ इसलिए कर रहे हैं क्योंकि उनके राजनीतिक आका नाखुश हैं। उन्होंने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ लोग अपने निजी हितों के लिए इस पवित्र मुद्दे पर भी राजनीति कर रहे हैं क्योंकि वे जानते हैं कि उन्हें जल्दी अपने गुनाहों के नतीजे भुगतने पड़ेंगे।” लोकसभा सदस्य के रूप में अपने कार्यकाल को याद करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि उन्होंने पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन के साथ मिलकर छोटे साहिबजादों को उनके शहीदी दिवस पर श्रद्धांजलि देने के मामले की सदन में सफलतापूर्वक पैरवी की थी। उन्होंने कहा कि पूरा पंजाब उस समय को शोक के महीने के रूप में मनाता है क्योंकि छोटे साहिबजादों को जालिम शासकों ने जिंदा नींव में चिनवा दिया था। मुझसे पहले 190 से अधिक सांसदों ने पंजाब का प्रतिनिधित्व किया, लेकिन उनमें से किसी ने भी संसद में यह मुद्दा नहीं उठाया।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि छोटे साहिबजादों की शहादत आने वाली पीढ़ियों को अत्याचार, बेइंसाफी और दमन के खिलाफ जूझने के लिए प्रेरित करती रहेगी। श्री आनंदपुर साहिब के ऐतिहासिक महत्व का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, “इस पवित्र धरती पर श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने 13 अप्रैल 1699 को खालसा पंथ प्रकट किया था, जो इतिहास को नया मोड़ देने वाली घटना थी। इसी दिन हमारी सरकार ने बेअदबी के खिलाफ ऐतिहासिक कानून पास किया है।”मुख्यमंत्री ने यह भी चेताया कि श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के 350 साला शहीदी दिवस के अवसर पर पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र श्री आनंदपुर साहिब में बुलाया गया। उन्होंने कहा कि इतिहास में यह पहला अवसर है, जब पंजाब विधानसभा गुरु साहिब के चरणों में नतमस्तक हुई। इस विशेष सत्र के दौरान विधानसभा ने अमृतसर, तलवंडी साबो और श्री आनंदपुर साहिब को पवित्र शहर का दर्जा देने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास किया।”

पंजाब में सिखी के आध्यात्मिक महत्व को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि सिखों के पांच तख्तों में से तीन – श्री अकाल तख्त साहिब (अमृतसर), श्री दमदमा साहिब (तलवंडी साबो) और तख्त श्री केसगढ़ साहिब (श्री आनंदपुर साहिब) – पंजाब में पड़ते हैं। उन्होंने कहा, “लोगों की लंबे समय से लटकती मांग को ध्यान में रखते हुए पंजाब सरकार ने इन शहरों को पवित्र शहर का दर्जा दिया है। इन शहरों के समग्र विकास के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जाएगी और इस कार्य के लिए फंडों की कोई कमी नहीं है।”

यात्रा के दौरान कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस और कई अन्य हस्तियां भी मौजूद थीं।

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सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने को कैबिनेट की मंजूरी

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केंद्र सरकार ने न्यायपालिका से जुड़ा एक अहम फैसला लेते हुए भारत का सर्वोच्च न्यायालय में जजों की संख्या बढ़ाने को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के तहत अब जजों की कुल संख्या 33 से बढ़ाकर 37 की जाएगी।

यह बढ़ोतरी करीब छह साल बाद की जा रही है। इससे पहले 2019 में जजों की संख्या 31 से बढ़ाकर 33 की गई थी। सरकार के अनुसार इस कदम का मुख्य उद्देश्य अदालत में लंबित मामलों की संख्या कम करना और न्याय प्रक्रिया को तेज करना है।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस समय सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस सहित 34 जज कार्यरत हैं। नए प्रस्ताव को लागू करने के लिए संसद के आगामी सत्र में बिल पेश किया जाएगा। बिल पास होने के बाद जजों की संख्या 37 हो जाएगी।

मौजूदा समय में सुप्रीम कोर्ट में 92 हजार से अधिक मामले लंबित हैं, जिससे न्याय व्यवस्था पर काफी दबाव बना हुआ है। सरकार का मानना है कि जजों की संख्या बढ़ने से मामलों की सुनवाई में तेजी आएगी और लोगों को जल्दी न्याय मिल सकेगा।

इतिहास पर नजर डालें तो सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) अधिनियम, 1956 के तहत शुरुआत में चीफ जस्टिस के अलावा सिर्फ 10 जजों का प्रावधान था। समय के साथ मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए यह संख्या कई बार बढ़ाई गई—1960 में 13, बाद में 17, 1986 में 25, 2009 में 30 और 2019 में 33 की गई थी।

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 124 के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या संसद तय करती है और जरूरत के अनुसार इसमें बदलाव किया जा सकता है।

हालांकि, कई कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि केवल जजों की संख्या बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है। न्याय प्रणाली को प्रभावी बनाने के लिए प्रशासनिक सुधार और तकनीक का बेहतर उपयोग भी उतना ही जरूरी है।

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