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Punjab

Harjot Bains का तीखा हमला: “Nayab Saini बना रात का Wazir Khan, Punjab का पानी चुराने की रची साज़िश”

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पंजाब और हरियाणा के बीच पानी विवाद एक बार फिर गरमा गया है। भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) को लेकर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी के बयान पर पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरजोत बैंस ने जोरदार हमला बोला है। बैंस ने सैनी पर आरोप लगाया कि वह रात के अंधेरे में पानी चुराने की साज़िश रच रहे हैं और उन्हें “नया वज़ीर ख़ान” तक कह डाला।

हरजोत बैंस ने कहा कि जिस तरह से नायब सैनी ने बीबीएमबी के फैसले को सही ठहराया है, उससे यह साफ है कि इस साज़िश के पीछे वही मास्टरमाइंड हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सैनी ने बोर्ड पर दबाव डालकर हरियाणा को ज्यादा पानी देने का फैसला करवाया।

मुगल दौर की याद दिला रही बीजेपी की चाल

हरजोत बैंस ने भाजपा की तुलना मुगल शासकों से करते हुए कहा, “बीजेपी की साज़िशें मुगल दौर की याद दिलाती हैं। रात को मुगलों जैसा विश्वासघात और दिन में गुरुओं की परंपरा की बात करना भाजपा की दोहरी सोच को दिखाता है।”

बैंस ने कहा कि जब देश पाकिस्तान से जंग जैसे हालात में था, तब हरियाणा के मुख्यमंत्री पंजाब का पानी छीनने की साज़िश कर रहे थे। उन्होंने कहा, “पाकिस्तानी ड्रोन भारत में घुस रहे थे, और दूसरी तरफ सैनी आधी रात को पंजाब के हक का पानी चुराने में लगे थे।”

हरियाणा को अगर पानी चाहिए तो बताएं, हम देंगे

बैंस ने सैनी के उस बयान को भी आड़े हाथों लिया जिसमें कहा गया था कि हरियाणा के कई इलाकों में पीने का पानी नहीं है। जवाब में बैंस ने चुनौती देते हुए कहा, “अगर कोई जगह ऐसी है जहां पीने का पानी नहीं है, तो बताएं, हम पंजाब सरकार की तरफ से वहां पानी पहुंचाएंगे। लेकिन इसके लिए पंजाब का हक छीना नहीं जा सकता।”

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब में नहरी पानी की पहुंच 65% खेतों तक कर दी गई है। ऐसे में पंजाब के पास अतिरिक्त पानी नहीं बचा जिसे किसी और राज्य को दिया जा सके।

मोहल्ला क्लीनिक और भ्रष्टाचार पर जवाब

बैंस ने नायब सैनी के मोहल्ला क्लीनिक को लेकर दिए गए बयान पर भी पलटवार किया। उन्होंने कहा कि पंजाब और दिल्ली के मोहल्ला क्लीनिकों में लाखों गरीबों का मुफ्त इलाज हुआ है। यह मॉडल प्राइमरी हेल्थ केयर का बेस्ट उदाहरण है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दिल्ली में बीजेपी की सरकार आते ही इन क्लीनिकों को बंद करने की कोशिश शुरू हो गई।

भ्रष्टाचार को लेकर भी बैंस ने बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा, “2014 के बाद भाजपा ने देश के ज्यादातर भ्रष्ट नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल कर लिया है और फिर प्रधानमंत्री मोदी की ‘वॉशिंग मशीन’ में डालकर सबको ‘साफ’ कर दिया गया।”

हरजोत बैंस की ये बयानबाज़ी न सिर्फ सियासी गर्मी को और बढ़ा रही है, बल्कि पंजाब और हरियाणा के बीच पानी को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवाद को भी नए मोड़ पर ला खड़ा कर रही है। अब देखना होगा कि नायब सैनी और भाजपा की तरफ से इस पर क्या प्रतिक्रिया आती है।

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Chandigarh

पंजाब में Universal Healthcare Model बना मिसाल, हर परिवार को बिना शर्त 10 लाख तक कैशलेस इलाज की सुविधा!

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पंजाब सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए ऐसा मॉडल पेश किया है, जो देश की पारंपरिक योजनाओं से अलग और ज्यादा व्यापक माना जा रहा है। मुख्यमंत्री Bhagwant Mann के नेतृत्व में शुरू की गई मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत अब राज्य के हर परिवार को बिना किसी शर्त के 10 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। बढ़ते इलाज के खर्च के बीच यह योजना लाखों परिवारों के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आई है।

जहां केंद्र सरकार की Ayushman Bharat योजना सीमित पात्रता और 5 लाख रुपये तक के कवर तक ही सीमित है, वहीं पंजाब का यह मॉडल हर निवासी को कवर करता है, चाहे उसकी आय कुछ भी हो। यही कारण है कि इसे Universal Healthcare Model के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें इलाज का अधिकार किसी सूची या शर्त पर नहीं बल्कि जरूरत के आधार पर तय होता है।

वित्तीय दृष्टि से भी पंजाब का यह मॉडल काफी मजबूत माना जा रहा है। केंद्र सरकार जहां 140 करोड़ आबादी के लिए 9,500 करोड़ रुपये का बजट रखती है, वहीं पंजाब सरकार करीब 3 करोड़ लोगों के लिए 2,000 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। इस हिसाब से प्रति व्यक्ति निवेश कई गुना ज्यादा है, जो राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को साफ तौर पर दर्शाता है।

इस योजना के तहत करीब 65 लाख परिवारों को लाभ मिलने की उम्मीद है। मरीज 2,300 से अधिक इलाज पैकेजों के जरिए दिल की बीमारी, कैंसर, किडनी से जुड़ी समस्याएं, एक्सीडेंट केस और अन्य गंभीर बीमारियों का मुफ्त इलाज करवा सकते हैं। इसके लिए 900 से अधिक अस्पतालों का नेटवर्क तैयार किया गया है, जहां कैशलेस सुविधा उपलब्ध है।

योजना का एक बड़ा फायदा इसकी आसान प्रक्रिया भी है। जहां अन्य योजनाओं में पात्रता साबित करने के लिए कई दस्तावेजों की जरूरत होती है, वहीं पंजाब में लोग सिर्फ आधार कार्ड या वोटर आईडी के जरिए आसानी से रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। इसके लिए सेवा केंद्रों और Common Service Centers के साथ-साथ ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी दी गई है। साथ ही, गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करने और रजिस्ट्रेशन कराने के लिए विशेष अभियान भी चलाए जा रहे हैं।

इस योजना का असर जमीनी स्तर पर भी देखने को मिल रहा है। कई ऐसे परिवार, जो पहले इलाज के खर्च के कारण परेशान रहते थे, अब बिना किसी आर्थिक दबाव के इलाज करवा पा रहे हैं। यह मॉडल न सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं को आसान बना रहा है, बल्कि लोगों के जीवन स्तर को भी बेहतर करने में मदद कर रहा है।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि यह योजना सिर्फ एक सरकारी स्कीम नहीं, बल्कि एक सोच में बदलाव है, जहां स्वास्थ्य सेवा को अधिकार के रूप में देखा जा रहा है। उनका कहना है कि पंजाब सरकार का उद्देश्य हर व्यक्ति तक बेहतर और सस्ती स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाना है, ताकि कोई भी व्यक्ति इलाज के अभाव में परेशान न हो।

कुल मिलाकर, पंजाब का यह यूनिवर्सल हेल्थकेयर मॉडल देश के लिए एक नई दिशा दिखाता है, जहां स्वास्थ्य सेवाएं सीमित नहीं बल्कि सभी के लिए समान रूप से उपलब्ध कराई जा रही हैं।

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O.T.S स्कीम को मिला जोरदार समर्थन: 111.16 करोड़ की वसूली, 31 मार्च के बाद सख्त कार्रवाई की चेतावनी!

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पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि वैट बकाये के लिए शुरू की गई एकमुश्त निपटान (OTS) स्कीम को व्यापारियों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला है। इस योजना के तहत अब तक करीब 7,845 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें कुल 298.39 करोड़ रुपये के बकाये शामिल हैं। इनमें से सरकार 111.16 करोड़ रुपये की वसूली भी कर चुकी है।

वित्त मंत्री ने कहा कि यह स्कीम पुराने टैक्स बोझ को खत्म करने और राज्य के राजस्व को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने बताया कि लुधियाना, अमृतसर, जालंधर, पटियाला और रोपड़ जैसे प्रमुख जिलों से इस योजना को अच्छा समर्थन मिला है, जो यह दर्शाता है कि कारोबारियों में इसके प्रति जागरूकता बढ़ रही है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह राहत योजना 31 मार्च 2026 तक ही लागू है। इसके बाद सरकार सख्त रुख अपनाएगी और बकाया वसूली के लिए कानूनी कार्रवाई तेज की जाएगी। इसके लिए पहले ही करीब 8,000 संपत्तियों की पहचान कर ली गई है, जिन पर जरूरत पड़ने पर कार्रवाई की जाएगी।

वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कारोबारियों से अपील करते हुए कहा कि वे इस अंतिम मौके का लाभ उठाएं और अपने लंबित वैट बकाये का निपटान कर लें। उन्होंने कहा कि OTS स्कीम के तहत ब्याज और जुर्माने में बड़ी छूट दी जा रही है, जिससे व्यापारियों को राहत मिल रही है और वे अपने वित्तीय रिकॉर्ड को साफ कर सकते हैं।

उन्होंने चेतावनी दी कि समय सीमा खत्म होने के बाद सरकार का मौजूदा रियायती रुख समाप्त हो जाएगा और बिना किसी छूट के सख्त वसूली प्रक्रिया लागू की जाएगी। ऐसे मामलों में सामान्य कानूनी जांच और कार्रवाई की जाएगी।

वित्त मंत्री ने कहा कि इस योजना को मिला समर्थन मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में चल रही पारदर्शी और व्यापार-समर्थक नीतियों पर लोगों के भरोसे को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि इस पहल का उद्देश्य न केवल राजस्व बढ़ाना है, बल्कि मुकदमेबाजी को कम करना और व्यापारियों को नई शुरुआत का अवसर देना भी है।

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29 मार्च को होगी Punjab Cabinet की अहम बैठक, कई बड़े फैसलों पर लग सकती है मुहर !

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पंजाब में प्रशासनिक स्तर पर एक महत्वपूर्ण हलचल देखने को मिल रही है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्य मंत्रिमंडल की अहम बैठक बुलाने का फैसला किया है। यह कैबिनेट बैठक 29 मार्च, रविवार को शाम 5 बजे मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास, कोठी नंबर 45, सेक्टर-2, चंडीगढ़ में आयोजित की जाएगी। इस बैठक की अध्यक्षता स्वयं मुख्यमंत्री भगवंत मान करेंगे।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में राज्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। माना जा रहा है कि सरकार विभिन्न विकास योजनाओं, जनकल्याणकारी नीतियों और प्रशासनिक सुधारों को लेकर बड़े फैसले ले सकती है। इसके अलावा कुछ नई योजनाओं को मंजूरी मिलने और चल रही परियोजनाओं की समीक्षा भी इस बैठक का हिस्सा हो सकती है।

यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि बैठक में आम जनता से जुड़े मुद्दों—जैसे बुनियादी सुविधाएं, रोजगार, इंफ्रास्ट्रक्चर और सामाजिक योजनाएं—पर खास ध्यान दिया जाएगा। सरकार की प्राथमिकता राज्य के विकास को गति देना और लोगों को राहत पहुंचाना है, ऐसे में कई अहम प्रस्तावों पर मुहर लगने की संभावना जताई जा रही है।

पंजाब कैबिनेट की इस बैठक को काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसमें लिए गए फैसले आने वाले समय में राज्य की नीतियों और दिशा को तय कर सकते हैं। यही वजह है कि राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों के साथ-साथ आम जनता की नजरें भी इस बैठक पर टिकी हुई हैं।

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