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UPSC सिविल सेवा फाइनल रिजल्ट जारी: प्रयागराज की शक्ति दुबे रहीं टॉपर, टॉप 5 में 3 महिलाएं; मेरिट लिस्ट में 1009 कैंडिडेट्स।
UPSC ने सिविल सर्विस एग्जाम 2024 का फाइनल रिजल्ट जारी कर दिया है। प्रयागराज की शक्ति दुबे ऑल इंडिया टॉपर बनी हैं। कुल 1009 कैंडिडेट्स का नाम मेरिट लिस्ट में शामिल है। मेरिट लिस्ट ऑफिशियल वेबसाइट upsc.gov.in पर रिलीज की गई है।
रैंक 1 – शक्ति दुबे
यूपी के प्रयागराज की शक्ति दुबे ऑल इंडिया टॉपर बनी हैं। शक्ति ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से बायोकेमिस्ट्री में ग्रेजुएशन किया है। परीक्षा में पॉलिटिकल साइंस और इंटरनेशनल रिलेशंस उसके ऑप्शनल सब्जेक्ट थे।
रैंक 2 – हर्षिता गोयल
नंबर 2 पर हर्षिता गोयल रही हैं। हर्षिता शाह मूल रूप से हरियाणा की हैं और कई वर्षों से गुजरात के वडोदरा में रह रही हैं। हर्षिता का जन्म हरियाणा में हुआ। इसके बाद परिवार गुजरात के वडोदरा आ गया। यहीं वो बड़ी हुईं। क्वालिफिकेशन से वो एक CA हैं। हर्षिता थैलेसीमिया और कैंसर से पीड़ित बच्चों के लिए अहमदाबाद के बीलीफ फाउंडेशन के साथ काम कर चुकी हैं।
रैंक 3 – अर्चित पराग डोंगरे
अर्चित ने वीआईटी, वेल्लोर से इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी (बी.टेक) की डिग्री ली है। उनका एक ऑप्शनल सब्जेक्ट फिलॉसफी (दर्शनशास्त्र) था।
रैंक 4 - मार्गी चिराग शाह
गुजरात टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी, अहमदाबाद से कंप्यूटर इंजीनियरिंग में बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त शाह मार्गी चिराग ने समाजशास्त्र को वैकल्पिक विषय के रूप में लेकर चौथा स्थान हासिल किया है।
रैंक 5 – आकाश गर्ग
कंप्यूटर विज्ञान में बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी की डिग्री रखने वाले और गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, दिल्ली से इंजीनियरिंग करने वाले आकाश गर्ग को वैकल्पिक विषय के रूप में समाजशास्त्र के साथ पांचवां स्थान मिला है।

रैंक 6 – कोमल पूनिया कोमल सहारनपुर से हैं।
रैंक 7 – आयुषी बंसल आयुषी ने UPSC 2023 में 97वीं और 2022 में 188वीं रैंक हासिल की थी। इनका जन्म मध्य प्रदेश के ग्वालियर में हुआ है। मां और पिता दोनों LIC में काम करते थे। 10 साल की उम्र में, जब वे 5वीं क्लास में थीं उनके पिता का निधन हो गया था। IIT की प्रिपरेशन के लिए वो दिल्ली आ गईं। यहां मैकेंजी एंड कंपनी में काम किया। 2022 में जॉब क्विट करके UPSC CSE प्रिपरेशन शुरू की।
रैंक 8 – राज कृष्ण झा
राज कृष्ण झा बिहार के सीतामढ़ी के रहने वाले हैं। उनकी स्कूलिंग नेपाल के जापा डिस्ट्रिक्ट से हुई। बिहार बोर्ड से 12वीं की पढ़ाई के बाद मोतीलाल नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से मेकैनिकल इंजीनियरिंग में B.Tech किया। फिर साल 2018 में हिंदुस्तान पेट्रोलियम जॉइन किया। अभी कोल्हापुर में कार्यरत थे।
रैंक 9 – आदित्य विक्रम अग्रवाल आदित्य हरियाणा के बहादुरगढ़ के रहने वाले हैं। उन्होंने NIT इलाहाबद से मेकैनिकल इंजीनियरिंग में B.Tech. किया है। UPSC में एंथ्रोपॉलॉजी को मेन्स का ऑप्शनल सब्जेक्ट रखा था।
रैंक 10 – मयंक त्रिपाठी
मयंक उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले से हैं। उन्होंने अपने पहले प्रयास में UPSC CSE में 337वीं रैंक हासिल की थी। इस बार, दूसरे प्रयास में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए 10वीं रैंक प्राप्त की है। इससे पहले, उनका चयन यूपी पीसीएस के तहत डिप्टी एसपी (DSP) पद के लिए भी हो चुका है। मयंक के पिता कलेक्ट्रेट में प्रधान सहायक के पद पर कार्यरत हैं।
इस वर्ष UPSC CSE परीक्षा में कुल 1009 उम्मीदवारों का चयन हुआ है। इनमें से 335 अभ्यर्थी सामान्य वर्ग से, 109 आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) से, 318 अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) से, 160 अनुसूचित जाति (SC) से और 87 अनुसूचित जनजाति (ST) से हैं।

अगर आप चाहें तो इसे और भी सरल या भावनात्मक शैली में लिखा जा सकता है।
टॉप 25 कैंडिडेट्स में 11 महिलाएं और 14 पुरुष
UPSC टॉपर्स की टॉप 5 लिस्ट में 3 लड़कियों ने जगह बनाई है। वहीं टॉप 10 में 4 लड़कियां शामिल हैं। UPSC ने कहा कि टॉपर्स ने IIT, NIT, VIT, JNU, दिल्ली यूनिवर्सिटी और इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग, ह्यूमेनिटीज, विज्ञान, कॉमर्स, मेडिकल साइंस और आर्किटेक्ट में ग्रेजुएशन किया है।
5.8 लाख कैंडिडेट्स ने दी UPSC 2025 परीक्षा
UPSC सिविल सर्विस परीक्षा पिछले साल 16 जून को आयोजित की गई थी। इस परीक्षा के लिए कुल 9,92,599 उम्मीदवारों ने आवेदन किया था, जिनमें से 5,83,213 उम्मीदवार परीक्षा में उपस्थित हुए। कुल 14,627 उम्मीदवार लिखित (मुख्य) परीक्षा के लिए योग्य पाए गए जो सितंबर 2024 में आयोजित की गई थी। इनमें से 2,845 उम्मीदवार इंटरव्यू के चुने गए। इनमें से 1,009 उम्मीदवारों (725 पुरुष और 284 महिलाएं) को विभिन्न सेवाओं में नियुक्ति के लिए आयोग ने अनुशंसित किया है।
UPSC CSE प्रीलिम्स परीक्षा 16 जून, 2024 को हुई थी, जबकि मेन्स परीक्षा का आयोजन 20 से 29 सितंबर, 2024 के बीच हुआ था। वहीं, इंटरव्यू जनवरी से अप्रैल, 2025 के बीच आयोजित किया गया था।
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पंजाब में समान विकास सुनिश्चित करने के लिए पहली बार जाति आधारित सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण करवाया जाएगा:CM भगवंत सिंह मान
पंजाब सरकार की ‘शानदार चार साल भगवंत मान दे नाल’ श्रृंखला के हिस्से के रूप में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज ग्रामीण विकास और पंचायत विभाग का चार साल का व्यापक रिपोर्ट कार्ड पेश किया, जिसमें यह दिखाया गया कि निरंतर नीतिगत हस्तक्षेप ने गांवों के बुनियादी ढांचे को कैसे बदला है, जमीनी स्तर पर प्रशासन को मजबूत किया है और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाए हैं।
ग्रामीण विकास को समग्र विकास के केंद्रीय स्तंभ के रूप में बताते हुए मुख्यमंत्री ने पंजाब के पहले जाति आधारित सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण की शुरुआत से लेकर बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा निर्माण, पारदर्शी भूमि प्रबंधन के माध्यम से राजस्व उत्पन्न करने और युवा-केंद्रित विकास कार्यक्रमों सहित प्रमुख पहलों की रूपरेखा पेश की।
पहली अप्रैल से शुरू होने वाले जाति आधारित सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण को समानता और नीति निर्माण सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसका उद्देश्य कार्रवाई को गोपनीय रखते हुए सभी समुदायों के जीवन स्तर का मूल्यांकन करना है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास रिपोर्ट कार्ड एक व्यापक शासन ढांचे का हिस्सा है, जिसके तहत ‘आप’ सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, सिंचाई, कृषि और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में सेक्टर-वार प्रदर्शन के साथ-साथ जवाबदेही, पारदर्शिता और परिणामों पर अपना ध्यान केंद्रित कर रही है।
ग्रामीण विकास और पंचायत विभाग का रिपोर्ट कार्ड पेश करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पिछले चार वर्षों में गांवों का पूर्ण विकास हुआ है, जिसमें बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य, तालाबों की सफाई शामिल है क्योंकि राज्य ने सरकारी जमीनों से अवैध कब्जे हटाकर और अन्य तरीकों से पैसा कमाया है।”
मुख्यमंत्री ने कहा, “राज्य के सख्त प्रयासों के कारण पंचायत चुनावों में सर्वसम्मति में वृद्धि हुई है। पंजाब में 13,236 पंचायतों के लिए चुनाव 2024 में हुए थे, जिनमें बड़ी संख्या में पंचायतें सर्वसम्मति से चुनी गईं। 2018 में लगभग 1,870 पंचायतें सर्वसम्मति से चुनी गई थीं, लेकिन 2024 में 2,970 पंचायतें सर्वसम्मति से चुनी गईं थी।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “1,100 से अधिक पंचायतें सर्वसम्मति से चुनी गईं, जिससे गांवों में सामुदायिक सौहार्द मजबूत होता है और गांवों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित होता है।”
उन्होंने कहा, “पंजाब सरकार ने सरपंचों का मानभत्ता 1,200 रुपये से बढ़ाकर 2,000 रुपये प्रति माह कर दिया है।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “ग्रामीण विकास के लिए 15वें वित्त आयोग के तहत वर्ष 2025-26 में ग्रामीण विकास पर 2,367.64 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, जो 2024-25 के मुकाबले दोगुने थे। वर्ष 2017-22 के दौरान पांच वर्षों में गांवों के विकास पर 1,883 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, जबकि राज्य सरकार ने इस नेक कार्य के लिए पिछले चार वर्षों में 3,847 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।”
मुख्यमंत्री ने कहा, “पंचायत इमारतों, लाइब्रेरियों, आंगनवाड़ी केंद्रों, खेल मैदानों, गलियों, नालियों और अन्य विकास कार्यों पर 1,030.94 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पीने के पानी, स्वच्छता, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और अन्य जरूरी सेवाओं पर 1,336.70 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे और यह फंड जिला परिषदों, पंचायत समितियों और पंचायतों के माध्यम से जारी किए गए थे।”
उन्होंने आगे कहा, “पंजाब सरकार ने गांवों में शामलात जमीनों को लीज पर देकर आय में वृद्धि की है। पंचायती जमीनों से अवैध कब्जे हटाए गए हैं, जिससे राज्य का राजस्व बढ़ा है। चार वर्षों में राज्य सरकार ने शामलात जमीन को लीज पर देकर 1,842.78 करोड़ रुपये कमाए हैं।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “वर्ष 2025-26 में पिछले साल के मुकाबले राजस्व 50.75 करोड़ रुपये बढ़ा है। लगभग 1.35 लाख एकड़ जमीन लीज पर दी गई, जिससे 520.54 करोड़ रुपये का राजस्व आया, जबकि 2024-25 में 469.79 करोड़ रुपये आए थे।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “नौजवानों की असीम ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देने के लिए लगभग 3,000 ग्रामीण खेल मैदान विकसित किए जा रहे हैं और इस पर 1,166 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। ये मैदान 6,500 एकड़ क्षेत्र में फैले होंगे, जिनके लिए 3,148 स्थानों की पहचान की गई है।”
उन्होंने कहा, “2,400 मैदानों पर काम पहले ही शुरू हो चुका है और इनमें से अधिकांश इस वर्ष जून तक पूरे हो जाएंगे, जिनमें वॉलीबॉल कोर्ट, फुटबॉल मैदान, बच्चों के खेलने का सामान और बैठने की व्यवस्था जैसी सुविधाएं होंगी।”
उन्होंने कहा, “राज्य के इतिहास में पहली बार पंचायत घरों का निर्माण किया गया है। दूसरे चरण में 125 करोड़ रुपये के बजट से 500 आधुनिक पंचायत घर बनाए जा रहे हैं।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “प्रति इमारत 25 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं और पहले चरण में 373 इमारतें पहले ही पूरी हो चुकी हैं।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब सरकार ने गांवों में 251 लाइब्रेरियां बनाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है, जिनमें से 231 पहले ही पूरी हो चुकी हैं। इसका उद्देश्य गांवों के लोगों को साहित्य से जोड़ना और नौजवानों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद करना है।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने मनरेगा योजना के बारे में बात करते हुए कहा, “2017-2022 तक केवल 4,708 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, जबकि 2022 से अब तक 5,146 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। 8.96 लाख लोगों को रोजगार मिला है और 2.40 करोड़ दिहाड़ियों का रोजगार सृजित हुआ है।”
मुख्यमंत्री ने कहा, “2025-26 में लगभग 63,357 नए जॉब कार्ड जारी किए गए थे, जिनमें से 2,480 दिव्यांग व्यक्तियों के लिए थे।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब मनरेगा योजना में तर्कहीन संशोधनों का सख्त विरोध करता है। पंजाब विधानसभा ने केंद्र सरकार द्वारा किए गए परिवर्तनों का विरोध किया था, जो ग्रामीण रोजगार को कम कर सकते हैं। ऐसी प्रतिबंध-आधारित संशोधन गैर-वाजिब हैं क्योंकि ये संशोधन ऐसी योजनाओं के मकसद पर गंभीर सवालिया निशान लगाते हैं।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब सरकार ने ग्रामीण परिवारों के लिए आवासीय सुविधाएं प्रदान करने के लिए अनुकरणीय पहल की हैं। इस वर्ष 76 हजार घरों के लिए मंजूरी दी गई थी, जिनमें 30 हजार बाढ़ प्रभावित परिवार शामिल थे।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “2016-2022 तक राज्य में केवल 39 हजार घर बनाए गए थे, जबकि इस वर्ष राज्य सरकार ने समाज के गरीब वर्ग के लिए एक लाख घर बनाने का लक्ष्य रखा है।”
उन्होंने कहा, “पंजाब सरकार ने 17,080 गांवों के तालाबों की सफाई के लिए बड़ी योजना शुरू की है। 13,414 तालाबों से पानी निकाला गया है और 4,706 तालाबों से गाद निकालने का काम पूरा हो गया है, जिसके लिए 235 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब के इतिहास में पहली बार जाति आधारित सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण किया जा रहा है। इसका उद्देश्य सभी जातियों और उप-जातियों के जीवन स्तर का मूल्यांकन करना है ताकि उनकी भलाई के लिए नीतियां बनाई जा सकें। इस उद्देश्य के लिए 250 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है, जिसमें 28,000 गणनाकार तैनात किए जाएंगे और प्रत्येक को 62,500 रुपये मानभत्ता मिलेगा।”
उन्होंने कहा, “नशों के विरुद्ध जंग में राज्य के सभी गांवों ने अपना समर्थन दिया है। मैं पंचायतों और वॉलंटियरों का नशा विरोधी प्रयासों में सक्रिय रूप से जुड़ने के लिए दिल से धन्यवाद करता हूं क्योंकि पहले ही 1.25 लाख सदस्य इस मुहिम में शामिल हो चुके हैं।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “12 हजार विलेज डिफेंस कमेटियां बनाई गई हैं और वॉलंटियर ‘गांव के सरपरस्त’ के रूप में काम कर रहे हैं। कई नशा तस्करों को इन कमेटियों की रिपोर्टों के आधार पर गिरफ्तार किया जाता है।”
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा, “पंजाब राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 23 जिलों की 100 अग्रणी महिला उद्यमियों को प्रमाण पत्र और स्मृति चिन्हों से सम्मानित किया गया। उन्हें 25,000 रुपये प्रति व्यक्ति भी दिए गए।”
उन्होंने कहा, “117 विधानसभा क्षेत्रों में 11,700 महिलाओं को सम्मानित किया गया है और 2,300 महिलाओं को जिला स्तर के कार्यक्रमों में सम्मानित किया गया है। मिशन के तहत 58,303 स्व-सहायता समूह बनाए गए हैं और 5.89 लाख परिवारों को जोड़ा गया है, जिन्हें 147 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है।”
मुख्यमंत्री ने कहा, “महिला सशक्तिकरण पहल के हिस्से के रूप में महिलाओं को डेयरी फार्मिंग से जोड़ने के लिए नई योजना शुरू की गई है। इस योजना के तहत 1,100 दूध सहकारी समितियां रजिस्टर्ड की गई हैं और महिलाओं को 18 करोड़ रुपये के ब्याज मुक्त ऋण दिए गए हैं।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “ये समितियां मिल्कफेड को रोजाना एक लाख लीटर दूध सप्लाई कर रही हैं। पूरे पंजाब में सखी शक्ति मेले लगाए गए थे, जिनमें 1,500 से अधिक महिलाओं ने हिस्सा लिया और उनके द्वारा तैयार किए गए नौ करोड़ रुपये के उत्पाद बेचे गए।”
उन्होंने कहा, “समन्वय को बेहतर बनाने के लिए पहली बार विधानसभा क्षेत्रों के अनुसार ब्लॉकों का पुनर्गठन किया गया है। ग्रामीण विकास अधिकारियों और पंचायत सचिवों को राज्य कैडर में शामिल कर दिया गया है। कार्य कुशलता में सुधार लाने के लिए राज्य में 3,327 पंचायत विकास सचिवों के लिए प्रांतीय कैडर बनाया गया है।”
एक प्रश्न के जवाब में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “केंद्र सरकार पंजाब के साथ सौतेली मां वाला सलूक कर रही है। आरडीएफ, जीएसटी, एनएचएम और अन्य ग्रांट्स को केंद्र ने रोक रखा है। इसका एकमात्र कारण यह है कि पंजाब में भाजपा को वोट नहीं मिलते, जिस कारण केंद्र सरकार पंजाब के साथ अन्याय कर रही है।”
मुख्यमंत्री ने कहा, “केंद्र द्वारा आवंटित आपदा प्रबंधन फंड बहुत कम है और जनता के बड़े हित में इसमें संशोधन की आवश्यकता है। राज्य इस भेदभाव का सख्त विरोध करेगा और राज्य का जायज हिस्सा प्राप्त करने के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जाएगी। इस मुद्दे को कानूनी और प्रशासनिक रूप से हर प्लेटफॉर्म पर उठाया जाएगा।”
एक और सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “यह हैरान करने वाली बात है कि पंजाब कांग्रेस के नेता अपनी पार्टी की अगुवाई वाली हिमाचल सरकार द्वारा एंट्री टैक्स लगाए जाने पर चुप्पी साधे बैठे हैं, जबकि यह मुद्दा पंजाबियों के एक बड़े हिस्से से संबंधित है।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “एक तरफ राज्य सरकार टोल टैक्स खत्म कर रही है और आम आदमी को राहत दे रही है, वहीं दूसरी तरफ पड़ोसी राज्य लोगों पर बिना जरूरी टैक्स लगा रहे हैं।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “राज्य सरकार गेहूं की फसल की सुचारू और परेशानी मुक्त खरीद तथा लिफ्टिंग के लिए वचनबद्ध है और इसके लिए व्यापक प्रबंध पहले ही कर लिए गए हैं। सुचारू खरीद को खतरे में डालने के लिए अपनाई जा रही ब्लैकमेलिंग की रणनीति को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसी ताकतों के विरुद्ध अनुकरणीय कार्रवाई की जाएगी।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब के इतिहास में पहली बार एक अच्छी सरकार काम कर रही है, जबकि पहले वाली सरकारें लोगों को लूटने तक सीमित थीं।”
उन्होंने कहा, “पंजाब सरकार किसानों की जमीन से गुजरने वाली हाई टेंशन तारों को जमीनदोज करने की संभावना की पड़ताल कर रही है और रणनीति बनाई जा रही है। यह किसानों के लिए राहत होगी क्योंकि ये तारें फसलों के लिए बहुत बड़ा खतरा पैदा करती हैं।”
इस मौके पर ग्रामीण विकास और पंचायत मंत्री तरुनप्रीत सिंह सौंद तथा अन्य भी मौजूद थे।
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जंगी तनाव के बीच PM मोदी ने बुलाई हाई लेवल मीटिंग, मिडिल ईस्ट संकट पर होगी चर्चा
भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi ने पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और जंग जैसे हालात को देखते हुए आज शाम 7 बजे एक अहम उच्च-स्तरीय बैठक बुलाई है। इस बैठक में देश की सुरक्षा, बिजली सप्लाई, जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता और युद्ध के संभावित असर पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
इस मीटिंग में विदेश मंत्री S. Jaishankar, रक्षा मंत्री Rajnath Singh, गृह मंत्री Amit Shah और वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman समेत कई वरिष्ठ मंत्री शामिल होंगे। इस उच्च-स्तरीय बैठक में देश के अहम क्षेत्रों पर युद्ध के प्रभाव का आकलन किया जाएगा।
खास तौर पर यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाएगा कि युद्ध की स्थिति के बावजूद देशभर में बिजली सप्लाई प्रभावित न हो। इसके साथ ही पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस और अन्य जरूरी सामानों की उपलब्धता की भी समीक्षा की जाएगी।
सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों से दूर रहें और इस मुश्किल समय में एकजुट होकर काम करें। पश्चिम एशिया के हालातों के कारण देश के कई महत्वपूर्ण सेक्टर प्रभावित हो सकते हैं, इसलिए सरकार पूरी तरह सतर्क है।
गौरतलब है कि इससे पहले 22 मार्च को भी Cabinet Committee on Security की बैठक हुई थी और कुछ ही दिनों बाद फिर से यह बैठक बुलाई गई है। यह समिति देश की राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक मामलों पर बड़े फैसले लेने वाली सबसे अहम संस्था है, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री Narendra Modi करते हैं।
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CM मान की हरियाणा सरकार को सलाह: संयम के साथ पानी बरतें, 21 मई तक अतिरिक्त पानी नहीं देगा पंजाब
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने हरियाणा को संयम से पानी बरतने को कहा है। चंडीगढ़ में प्रेस कांफ्रेंस के दाैरान सीएम ने कहा कि हरियाणा सरकार इन्हीं दिनों पानी के लिए पंजाब से लड़ती है इसलिए पंजाब ने पहले ही हरियाणा को सचेत कर दिया है कि पानी की खपत पूरे संयम के साथ की जाए। इसके लिए हरियाणा सरकार को पत्र भी लिख दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब द्वारा हरियाणा को उसके कोटे का पानी दिया जा रहा है और यह 21 मई तक चलता रहेगा। पंजाब निर्धारित सप्लाई से अधिक पानी हरियाणा को नहीं दे सकता।
उन्होंने कहा कि मालूम चला है कि अभी तक हरियाणा ने अपने कोटे का 70 से 75 फीसदी पानी ही खर्च किया है, यह अच्छी बात है। 21 मई तक इस पानी की खपत की जा सकती है, उसके बाद ही आगे कोटे के तहत पानी सप्लाई दी जाएगी। यह भी अच्छी बात है कि इस बार हरियाणा सरकार ने इस बार अपने बजट में एसवाईएल के लिए कोई बजट तय नहीं किया है। हरियाणा को अब यह मसला खत्म ही कर देना चाहिए।
मान ने कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार ने पहली बार पंजाब का पानी पंजाब के लोगों और किसानों के लिए बरतना शुरू कर दिया है। अंतिम टेल तक किसानों को सिंचाई के लिए नई पानी उपलब्ध करवाया जा रहा है। दूसरे राज्यों के लिए पंजाब के पास कोई अतिरिक्त पानी नहीं है और न ही दूसरे राज्य इसके लिए उम्मीद रखें।
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