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आज का एक्सप्लेनर: 15 दिन में तीसरी बार क्रैश, क्या खतरे में भारतीय UPI सिस्टम ? रोज़ाना 80 हजार करोड़ का ट्रांजैक्शन, दुनिया में बनी हुई है धाक।
भारत में हर घंटे ढाई करोड़ से ज्यादा UPI ट्रांजैक्शन होते हैं। यह सिस्टम इतना भरोसेमंद बन चुका है कि बहुत से लोग कैश का उपयोग ही छोड़ चुके हैं। लेकिन 12 अप्रैल को अचानक Paytm, GPay, PhonePe जैसे ऐप्स से पेमेंट फेल होने लगे। किसी ने समोसा खाते हुए ऐप को निहारा, तो किसी को सलून में हेयर कट के बावजूद पेमेंट न होने के कारण घंटों इंतजार करना पड़ा। यह घटना पिछले 15 दिनों में तीसरी बार हुई है। आखिर इन दिनों UPI बार-बार क्यों क्रैश हो रहा है, क्या आगे भी ऐसा होगा, और अगर ऐसा हो तो आपकी पेमेंट अटक जाए तो आपको क्या करना चाहिए, ये सब जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में।
सवाल-1: क्या अचानक बार-बार डाउन होने लगी है UPI सर्विस?
जवाब: भारत में डिजिटल पेमेंट को बेहद आसान और फास्ट बनाने वाले UPI की शुरुआत अप्रैल 2016 में हुई थी। महज 9 सालों में ही ये हमारी जिंदगी का जरूरी हिस्सा बन गया। देश में हर रोज करीब 60 करोड़ UPI ट्रांजैक्शन के जरिए करीब 80 हजार करोड़ रुपए का लेन-देन होता है। आमतौर पर ये सर्विस बिना किसी रुकावट के चलती है। हालांकि, पिछले 15 दिनों में तीन बार अचानक UPI की सर्विस डाउन हो गई। इस दौरान यूजर्स को पैसे के लेन-देन में देरी हुई या पेमेंट फेल हो गया…
26 मार्च 2025: करीब 3 घंटे के लिए UPI सर्विस डाउन रही। तब लोगों को गूगल पे, PhonePe और पेटीएम जैसे एप से अमाउंट ट्रांसफर करने में दिक्कतें हुईं। इस दौरान 10 से ज्यादा बैंकों के UPI और नेट बैंकिंग सर्विसेज पर भी असर पड़ा। आउटेज ट्रैकिंग साइट DownDetector के मुताबिक इस दौरान 3000 से ज्यादा शिकायतें दर्ज की गईं।
2 अप्रैल 2025: वित्त वर्ष 2025 के क्लोजिंग के चलते इस दिन देश के कई बैंकों की UPI और मोबाइल बैंकिंग सर्विसेज में समस्या आई थी। इस दौरान करीब 5000 यूजर्स ने केवल SBI की सर्विस डाउन होने की रिपोर्ट दर्ज की थी। नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया यानी NPCI ने कहा कि बैंकों की सक्सेस रेट में उतार-चढ़ाव के कारण UPI ट्रांजैक्शन में रुकावटें आईं।
12 अप्रैल 2025: सुबह 11:30 बजे से करीब 3-4 घंटे तक UPI सर्विस डाउन रही। DownDetector के मुताबिक समस्या फेस कर रहे करीब 81% लोगों को पेमेंट करने में, 17% लोगों को फंड ट्रांसफर करने और लगभग 2% को खरीदारी करने में दिक्कतें हुईं। इस दौरान तमाम UPI एप्स पर 1168 से ज्यादा शिकायतें आईं।
सवाल-2: पिछले कुछ दिनों से बार-बार UPI सर्विस डाउन होने की क्या वजह है?
जवाब: UPI एक डिजिटल रास्ता है जिससे आप मोबाइल के जरिए अपने बैंक से किसी और के बैंक में तुरंत पैसे भेज सकते हैं। UPI का मालिक और ऑपरेशनल मैनेजर नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया यानी NPCI है। NPCI को रिजर्व बैंक और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन ने मिलकर बनाया है।
12 अप्रैल को जब UPI डाउन हुआ तो NPCI ने तकनीकी समस्या को इसकी वजह बताया। इससे पहले जब 2 अप्रैल को UPI डाउन हुआ था तब NPCI ने बताया था कि कुछ बैंकों से ट्रांजैक्शन की सफलता दर में उतार-चढ़ाव के कारण UPI सर्विस आंशिक रूप से डाउन चल रही है। हालांकि, पिछले दिनों बार-बार UPI सर्विस क्रैश होने के पीछे कई अन्य वजहें भी हो सकती हैं-
इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार IPL के कारण इन दिनों गेमिंग एप्स में UPI ट्रांजैक्शन बहुत ज्यादा बढ़ गए हैं। सर्वर पर लोड बढ़ने से सर्विस डाउन हो रही है।
NPCI के आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी 2025 तक अमूमन रोजाना करीब 52 करोड़ ट्रांजैक्शन होते थे, लेकिन मार्च में ये बढ़कर करीब 60 करोड़ हो गए हैं। फरवरी में करीब 1610 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए, जबकि मार्च में 1830 करोड़।
NPCI ने 8 अप्रैल को घोषणा की थी कि वह इंटरनेशनल UPI ट्रांजैक्शन के लिए QR कोड के इस्तेमाल को सीमित कर रहा है। ऐसे में हो सकता है कि इसके लिए UPI के बैकएंड पर कुछ काम चल रहा हो और सर्वर उसमें व्यस्त हो। इसके चलते घरेलू ट्रांजैक्शन प्रभावित हुए हों।
कुछ मामलों में, UPI की समस्या NPCI के सिस्टम के बजाय बैंकों के अपने सर्वर से जुड़ी होती है। उदाहरण के लिए SBI, HDFC और अन्य बैंकों ने रखरखाव या तकनीकी खराबी की बात कही है।
हालांकि, 12 अप्रैल को UPI डाउन होने के पीछे क्या तकनीकी समस्या थी, इसके बारे में NPCI ने आधिकारिक तौर पर कोई खुलासा नहीं किया है। सिर्फ इतना कहा कि वे तकनीकी खराबी को ठीक करने में जुटे हैं।
सवाल-3: क्या आगे भी UPI सर्विस डाउन हो सकती है?
जवाब: UPI आने से पहले एक बैंक से दूसरे बैंक में पेमेंट करने के लिए ट्रांजैक्शन फीस लगती थी। सभी बैंकों के अलग एप होते थे। इसे आसान बनाने के लिए NPCI ने UPI लॉन्च किया। अब NPCI का नेटवर्क सभी बैंकों के बीच में पेमेंट के लिए काम करता है। इससे ट्रांजैक्शन फीस हट गई और एक बैंक से दूसरे बैंक में पेमेंट करना आसान हो गया।
इसका एक नुकसान भी है। आप किसी भी बैंक के यूजर्स हों, कोई भी UPI ऐप इस्तेमाल करते हों, ट्रांजैक्शन के लिए NPCI का ही नेटवर्क इस्तेमाल होता है। ऐसे में अगर इस नेटवर्क में कोई भी दिक्कत आती है या ज्यादा लोड बढ़ता है तो पूरा UPI सर्वर प्रभावित होता है। RBI और NPCI UPI की क्षमता बढ़ाने और भविष्य में ऐसी समस्याओं को कम करने के लिए नए फीचर्स जैसे UPI लाइट और इंटरनेशनल पेमेंट्स पर काम कर रहे हैं।
जब तक ये सभी सुधार लागू नहीं होते, NCPI के सर्वर में कोई तकनीकी समस्या आ सकती है। इससे भविष्य में भी UPI सर्विस डाउन हो सकती है।
सवाल-4: अगर आपकी डिजिटल पेमेंट अटक जाए, तो क्या करें?
जवाब: जब UPI सर्वर डाउन चल रहा होता है, तो उस समय कई बार UPI ट्रांजैक्शन पेंडिंग बताने लगता है। अगर आपका पेमेंट भी इसी तरह अटक जाता है तो इसमें घबराने की जरूरत नहीं है। आपका पेमेंट या तो रिसीवर के खाते में जाएगा या वापस आपके बैंक खाते में आएगा। आमतौर पर ये कुछ मिनटों में ही क्लियर हो जाता है। इसमें ज्यादा से ज्यादा 72 घंटे का वक्त लगता है। कोई भी पैसा बीच में नहीं अटक सकता।

इस दौरान आपको डबल पेमेंट से बचना है। यानी अगर आपका ट्रांजैक्शन पेंडिंग दिखा रहा है और आपने कैश पेमेंट भी कर दिया। बाद में वो UPI ट्रांजैक्शन सक्सेसफुल हो गया तो आपके दोहरे पैसे लग गए। इससे बचने के लिए आपको पेमेंट ट्रांसफर होने का इंतजार करना है। अगर कैश दे भी रहे हैं, तो रिसीवर की कॉन्टैक्ट डिटेल ले लें, ताकि दोहरे पेमेंट की स्थिति में पैसे वापस ले सकें।
सवाल-5: क्या बार-बार सर्विस डाउन होने पर बैंक में रखा आपका पैसा सुरक्षित है?
जवाब: बैंक में रखा आपका पैसा पूरी तरह सुरक्षित है। UPI सर्विस डाउन होने से उस पर कोई असर नहीं पड़ता। UPI पेमेंट भी सिक्योर होती है। सबसे पहले UPI एप्स (जैसे GPay, PhonePe) में लॉक या फिंगरप्रिंट होता है। हर बार ट्रांजैक्शन से पहले आपको अपना UPI PIN डालना पड़ता है। बैंक और NPCI के सर्वर बहुत सिक्योर होते हैं।
इसलिए बिना ट्रांजैक्शन पिन डाले आपके बैंक अकाउंट से पैसे डेबिट नहीं हो सकते। सर्विस डाउन होने के कारण अगर पेमेंट के दौरान अकाउंट से पैसे डेबिट हो जाते हैं, लेकिन ट्रांजैक्शन फेल हो जाता है, तो भी आपके पैसे सुरक्षित हैं।
सवाल-6: कैसे काम करता है UPI पेमेंट सिस्टम?
जवाब: पहले अगर किसी के बैंक अकाउंट में पैसे भेजने होते थे तो आपको उनका अकाउंट नंबर, बैंक का नाम, ब्रांच का नाम और IFSC कोड पता होना जरूरी होता था। अब सिर्फ फोन नंबर या फिर UPI ID या सिर्फ एक QR कोड से पेमेंट हो जाता है।
यह NPCI के माध्यम से हो पाता है। NPCI बैंकों के बीच लिंक का काम करता है जिससे एक बैंक से दूसरे बैंक में रियल-टाइम ट्रांजैक्शन हो पाते हैं। इसे उदाहरण से समझ सकते हैं।
मान लीजिए श्रेया का बैंक खाता SBI में है और उसके दोस्त अभिषेक का खाता HDFC में। श्रेया PhonePe इस्तेमाल करती है और अभिषेक GPay। अब श्रेया अपने दोस्त को 500 रुपए भेजना चाहती है। ये प्रोसेस कुछ इस तरह होगा…
श्रेया अपना PhonePe ओपन करके अभिषेक की UPI ID डालती है। ₹500 टाइप करने के बाद UPI PIN डालती है।
श्रेया की रिक्वेस्ट PhonePe के जरिए NPCI के पास जाती है।
NPCI चेक करता है कि श्रेया का अकाउंट SBI में है या नहीं, अभिषेक का अकाउंट HDFC में है या नहीं और दोनों बैंक UPI नेटवर्क में हैं या नहीं।
इन सवालों का जवाब मिलने के बाद NPCI श्रेया के बैंक SBI से कहता है कि ₹500 श्रेया के अकाउंट से काटो। फिर HDFC बैंक से कहता है कि ‘₹500 अभिषेक के अकाउंट में जमा करो’।
आमतौर पर ये सब कुछ 2-3 सेकेंड में हो जाता है। सब कुछ सही होने पर ट्रांजैक्शन सक्सेस का मैसेज आ जाता है। इस तरह बिना किसी चार्ज के श्रेया के अकाउंट से 500 रुपए अभिषेक के पास पहुंच जाते हैं।
अगर पेमेंट QR कोड के माध्यम से हो तो कोड में रिसीवर के बैंक अकाउंट की डिटेल होती है जिससे NPCI को उसके बैंक के बारे में पता चलता है।
सवाल-7: भारत का ये पेमेंट सिस्टम पूरी दुनिया में क्यों धमक जमा रहा है?
जवाब : पिछले साल जनवरी में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैन्युल मैक्रों भारत आए थे। इस दौरान अपनी एक स्पीच में उन्होंने कहा था- ‘मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ पी गई चाय कभी नहीं भूलूंगा, क्योंकि इसका पेमेंट UPI से हुआ है।’
मैक्रों के अलावा विदेशी लीडर्स से लेकर पर्यटक तक सभी भारतीय UPI से प्रभावित हैं। इससे पेमेंट जल्दी, आसानी से और सुरक्षित तरीके से हो जाता है। हर समय अपने साथ कैश या कार्ड रखने की जरूरत नहीं होती। मोबाइल के एक क्लिक पर बड़े से बड़ा पेमेंट हो जाता है। यह खासियत दुनियाभर के लोगों को आकर्षित कर रही है।
2021 में सबसे पहले भूटान ने इसे अपनाया था। इसके बाद UAE, कतर और फ्रांस ने भी UPI से प्रभावित होकर इसे अपने देश में लॉन्च किया। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के चेयरमैन आशीष चौहान ने भी कहा था कि जापान और ब्रिटेन सहित कई देशों ने UPI को अपनाने की मंशा जताई है।
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पंजाब में समान विकास सुनिश्चित करने के लिए पहली बार जाति आधारित सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण करवाया जाएगा:CM भगवंत सिंह मान
पंजाब सरकार की ‘शानदार चार साल भगवंत मान दे नाल’ श्रृंखला के हिस्से के रूप में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज ग्रामीण विकास और पंचायत विभाग का चार साल का व्यापक रिपोर्ट कार्ड पेश किया, जिसमें यह दिखाया गया कि निरंतर नीतिगत हस्तक्षेप ने गांवों के बुनियादी ढांचे को कैसे बदला है, जमीनी स्तर पर प्रशासन को मजबूत किया है और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाए हैं।
ग्रामीण विकास को समग्र विकास के केंद्रीय स्तंभ के रूप में बताते हुए मुख्यमंत्री ने पंजाब के पहले जाति आधारित सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण की शुरुआत से लेकर बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा निर्माण, पारदर्शी भूमि प्रबंधन के माध्यम से राजस्व उत्पन्न करने और युवा-केंद्रित विकास कार्यक्रमों सहित प्रमुख पहलों की रूपरेखा पेश की।
पहली अप्रैल से शुरू होने वाले जाति आधारित सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण को समानता और नीति निर्माण सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसका उद्देश्य कार्रवाई को गोपनीय रखते हुए सभी समुदायों के जीवन स्तर का मूल्यांकन करना है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास रिपोर्ट कार्ड एक व्यापक शासन ढांचे का हिस्सा है, जिसके तहत ‘आप’ सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, सिंचाई, कृषि और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में सेक्टर-वार प्रदर्शन के साथ-साथ जवाबदेही, पारदर्शिता और परिणामों पर अपना ध्यान केंद्रित कर रही है।
ग्रामीण विकास और पंचायत विभाग का रिपोर्ट कार्ड पेश करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पिछले चार वर्षों में गांवों का पूर्ण विकास हुआ है, जिसमें बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य, तालाबों की सफाई शामिल है क्योंकि राज्य ने सरकारी जमीनों से अवैध कब्जे हटाकर और अन्य तरीकों से पैसा कमाया है।”
मुख्यमंत्री ने कहा, “राज्य के सख्त प्रयासों के कारण पंचायत चुनावों में सर्वसम्मति में वृद्धि हुई है। पंजाब में 13,236 पंचायतों के लिए चुनाव 2024 में हुए थे, जिनमें बड़ी संख्या में पंचायतें सर्वसम्मति से चुनी गईं। 2018 में लगभग 1,870 पंचायतें सर्वसम्मति से चुनी गई थीं, लेकिन 2024 में 2,970 पंचायतें सर्वसम्मति से चुनी गईं थी।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “1,100 से अधिक पंचायतें सर्वसम्मति से चुनी गईं, जिससे गांवों में सामुदायिक सौहार्द मजबूत होता है और गांवों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित होता है।”
उन्होंने कहा, “पंजाब सरकार ने सरपंचों का मानभत्ता 1,200 रुपये से बढ़ाकर 2,000 रुपये प्रति माह कर दिया है।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “ग्रामीण विकास के लिए 15वें वित्त आयोग के तहत वर्ष 2025-26 में ग्रामीण विकास पर 2,367.64 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, जो 2024-25 के मुकाबले दोगुने थे। वर्ष 2017-22 के दौरान पांच वर्षों में गांवों के विकास पर 1,883 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, जबकि राज्य सरकार ने इस नेक कार्य के लिए पिछले चार वर्षों में 3,847 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।”
मुख्यमंत्री ने कहा, “पंचायत इमारतों, लाइब्रेरियों, आंगनवाड़ी केंद्रों, खेल मैदानों, गलियों, नालियों और अन्य विकास कार्यों पर 1,030.94 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पीने के पानी, स्वच्छता, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और अन्य जरूरी सेवाओं पर 1,336.70 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे और यह फंड जिला परिषदों, पंचायत समितियों और पंचायतों के माध्यम से जारी किए गए थे।”
उन्होंने आगे कहा, “पंजाब सरकार ने गांवों में शामलात जमीनों को लीज पर देकर आय में वृद्धि की है। पंचायती जमीनों से अवैध कब्जे हटाए गए हैं, जिससे राज्य का राजस्व बढ़ा है। चार वर्षों में राज्य सरकार ने शामलात जमीन को लीज पर देकर 1,842.78 करोड़ रुपये कमाए हैं।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “वर्ष 2025-26 में पिछले साल के मुकाबले राजस्व 50.75 करोड़ रुपये बढ़ा है। लगभग 1.35 लाख एकड़ जमीन लीज पर दी गई, जिससे 520.54 करोड़ रुपये का राजस्व आया, जबकि 2024-25 में 469.79 करोड़ रुपये आए थे।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “नौजवानों की असीम ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देने के लिए लगभग 3,000 ग्रामीण खेल मैदान विकसित किए जा रहे हैं और इस पर 1,166 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। ये मैदान 6,500 एकड़ क्षेत्र में फैले होंगे, जिनके लिए 3,148 स्थानों की पहचान की गई है।”
उन्होंने कहा, “2,400 मैदानों पर काम पहले ही शुरू हो चुका है और इनमें से अधिकांश इस वर्ष जून तक पूरे हो जाएंगे, जिनमें वॉलीबॉल कोर्ट, फुटबॉल मैदान, बच्चों के खेलने का सामान और बैठने की व्यवस्था जैसी सुविधाएं होंगी।”
उन्होंने कहा, “राज्य के इतिहास में पहली बार पंचायत घरों का निर्माण किया गया है। दूसरे चरण में 125 करोड़ रुपये के बजट से 500 आधुनिक पंचायत घर बनाए जा रहे हैं।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “प्रति इमारत 25 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं और पहले चरण में 373 इमारतें पहले ही पूरी हो चुकी हैं।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब सरकार ने गांवों में 251 लाइब्रेरियां बनाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है, जिनमें से 231 पहले ही पूरी हो चुकी हैं। इसका उद्देश्य गांवों के लोगों को साहित्य से जोड़ना और नौजवानों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद करना है।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने मनरेगा योजना के बारे में बात करते हुए कहा, “2017-2022 तक केवल 4,708 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, जबकि 2022 से अब तक 5,146 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। 8.96 लाख लोगों को रोजगार मिला है और 2.40 करोड़ दिहाड़ियों का रोजगार सृजित हुआ है।”
मुख्यमंत्री ने कहा, “2025-26 में लगभग 63,357 नए जॉब कार्ड जारी किए गए थे, जिनमें से 2,480 दिव्यांग व्यक्तियों के लिए थे।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब मनरेगा योजना में तर्कहीन संशोधनों का सख्त विरोध करता है। पंजाब विधानसभा ने केंद्र सरकार द्वारा किए गए परिवर्तनों का विरोध किया था, जो ग्रामीण रोजगार को कम कर सकते हैं। ऐसी प्रतिबंध-आधारित संशोधन गैर-वाजिब हैं क्योंकि ये संशोधन ऐसी योजनाओं के मकसद पर गंभीर सवालिया निशान लगाते हैं।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब सरकार ने ग्रामीण परिवारों के लिए आवासीय सुविधाएं प्रदान करने के लिए अनुकरणीय पहल की हैं। इस वर्ष 76 हजार घरों के लिए मंजूरी दी गई थी, जिनमें 30 हजार बाढ़ प्रभावित परिवार शामिल थे।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “2016-2022 तक राज्य में केवल 39 हजार घर बनाए गए थे, जबकि इस वर्ष राज्य सरकार ने समाज के गरीब वर्ग के लिए एक लाख घर बनाने का लक्ष्य रखा है।”
उन्होंने कहा, “पंजाब सरकार ने 17,080 गांवों के तालाबों की सफाई के लिए बड़ी योजना शुरू की है। 13,414 तालाबों से पानी निकाला गया है और 4,706 तालाबों से गाद निकालने का काम पूरा हो गया है, जिसके लिए 235 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब के इतिहास में पहली बार जाति आधारित सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण किया जा रहा है। इसका उद्देश्य सभी जातियों और उप-जातियों के जीवन स्तर का मूल्यांकन करना है ताकि उनकी भलाई के लिए नीतियां बनाई जा सकें। इस उद्देश्य के लिए 250 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है, जिसमें 28,000 गणनाकार तैनात किए जाएंगे और प्रत्येक को 62,500 रुपये मानभत्ता मिलेगा।”
उन्होंने कहा, “नशों के विरुद्ध जंग में राज्य के सभी गांवों ने अपना समर्थन दिया है। मैं पंचायतों और वॉलंटियरों का नशा विरोधी प्रयासों में सक्रिय रूप से जुड़ने के लिए दिल से धन्यवाद करता हूं क्योंकि पहले ही 1.25 लाख सदस्य इस मुहिम में शामिल हो चुके हैं।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “12 हजार विलेज डिफेंस कमेटियां बनाई गई हैं और वॉलंटियर ‘गांव के सरपरस्त’ के रूप में काम कर रहे हैं। कई नशा तस्करों को इन कमेटियों की रिपोर्टों के आधार पर गिरफ्तार किया जाता है।”
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा, “पंजाब राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 23 जिलों की 100 अग्रणी महिला उद्यमियों को प्रमाण पत्र और स्मृति चिन्हों से सम्मानित किया गया। उन्हें 25,000 रुपये प्रति व्यक्ति भी दिए गए।”
उन्होंने कहा, “117 विधानसभा क्षेत्रों में 11,700 महिलाओं को सम्मानित किया गया है और 2,300 महिलाओं को जिला स्तर के कार्यक्रमों में सम्मानित किया गया है। मिशन के तहत 58,303 स्व-सहायता समूह बनाए गए हैं और 5.89 लाख परिवारों को जोड़ा गया है, जिन्हें 147 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है।”
मुख्यमंत्री ने कहा, “महिला सशक्तिकरण पहल के हिस्से के रूप में महिलाओं को डेयरी फार्मिंग से जोड़ने के लिए नई योजना शुरू की गई है। इस योजना के तहत 1,100 दूध सहकारी समितियां रजिस्टर्ड की गई हैं और महिलाओं को 18 करोड़ रुपये के ब्याज मुक्त ऋण दिए गए हैं।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “ये समितियां मिल्कफेड को रोजाना एक लाख लीटर दूध सप्लाई कर रही हैं। पूरे पंजाब में सखी शक्ति मेले लगाए गए थे, जिनमें 1,500 से अधिक महिलाओं ने हिस्सा लिया और उनके द्वारा तैयार किए गए नौ करोड़ रुपये के उत्पाद बेचे गए।”
उन्होंने कहा, “समन्वय को बेहतर बनाने के लिए पहली बार विधानसभा क्षेत्रों के अनुसार ब्लॉकों का पुनर्गठन किया गया है। ग्रामीण विकास अधिकारियों और पंचायत सचिवों को राज्य कैडर में शामिल कर दिया गया है। कार्य कुशलता में सुधार लाने के लिए राज्य में 3,327 पंचायत विकास सचिवों के लिए प्रांतीय कैडर बनाया गया है।”
एक प्रश्न के जवाब में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “केंद्र सरकार पंजाब के साथ सौतेली मां वाला सलूक कर रही है। आरडीएफ, जीएसटी, एनएचएम और अन्य ग्रांट्स को केंद्र ने रोक रखा है। इसका एकमात्र कारण यह है कि पंजाब में भाजपा को वोट नहीं मिलते, जिस कारण केंद्र सरकार पंजाब के साथ अन्याय कर रही है।”
मुख्यमंत्री ने कहा, “केंद्र द्वारा आवंटित आपदा प्रबंधन फंड बहुत कम है और जनता के बड़े हित में इसमें संशोधन की आवश्यकता है। राज्य इस भेदभाव का सख्त विरोध करेगा और राज्य का जायज हिस्सा प्राप्त करने के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जाएगी। इस मुद्दे को कानूनी और प्रशासनिक रूप से हर प्लेटफॉर्म पर उठाया जाएगा।”
एक और सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “यह हैरान करने वाली बात है कि पंजाब कांग्रेस के नेता अपनी पार्टी की अगुवाई वाली हिमाचल सरकार द्वारा एंट्री टैक्स लगाए जाने पर चुप्पी साधे बैठे हैं, जबकि यह मुद्दा पंजाबियों के एक बड़े हिस्से से संबंधित है।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “एक तरफ राज्य सरकार टोल टैक्स खत्म कर रही है और आम आदमी को राहत दे रही है, वहीं दूसरी तरफ पड़ोसी राज्य लोगों पर बिना जरूरी टैक्स लगा रहे हैं।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “राज्य सरकार गेहूं की फसल की सुचारू और परेशानी मुक्त खरीद तथा लिफ्टिंग के लिए वचनबद्ध है और इसके लिए व्यापक प्रबंध पहले ही कर लिए गए हैं। सुचारू खरीद को खतरे में डालने के लिए अपनाई जा रही ब्लैकमेलिंग की रणनीति को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसी ताकतों के विरुद्ध अनुकरणीय कार्रवाई की जाएगी।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब के इतिहास में पहली बार एक अच्छी सरकार काम कर रही है, जबकि पहले वाली सरकारें लोगों को लूटने तक सीमित थीं।”
उन्होंने कहा, “पंजाब सरकार किसानों की जमीन से गुजरने वाली हाई टेंशन तारों को जमीनदोज करने की संभावना की पड़ताल कर रही है और रणनीति बनाई जा रही है। यह किसानों के लिए राहत होगी क्योंकि ये तारें फसलों के लिए बहुत बड़ा खतरा पैदा करती हैं।”
इस मौके पर ग्रामीण विकास और पंचायत मंत्री तरुनप्रीत सिंह सौंद तथा अन्य भी मौजूद थे।
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जंगी तनाव के बीच PM मोदी ने बुलाई हाई लेवल मीटिंग, मिडिल ईस्ट संकट पर होगी चर्चा
भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi ने पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और जंग जैसे हालात को देखते हुए आज शाम 7 बजे एक अहम उच्च-स्तरीय बैठक बुलाई है। इस बैठक में देश की सुरक्षा, बिजली सप्लाई, जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता और युद्ध के संभावित असर पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
इस मीटिंग में विदेश मंत्री S. Jaishankar, रक्षा मंत्री Rajnath Singh, गृह मंत्री Amit Shah और वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman समेत कई वरिष्ठ मंत्री शामिल होंगे। इस उच्च-स्तरीय बैठक में देश के अहम क्षेत्रों पर युद्ध के प्रभाव का आकलन किया जाएगा।
खास तौर पर यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाएगा कि युद्ध की स्थिति के बावजूद देशभर में बिजली सप्लाई प्रभावित न हो। इसके साथ ही पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस और अन्य जरूरी सामानों की उपलब्धता की भी समीक्षा की जाएगी।
सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों से दूर रहें और इस मुश्किल समय में एकजुट होकर काम करें। पश्चिम एशिया के हालातों के कारण देश के कई महत्वपूर्ण सेक्टर प्रभावित हो सकते हैं, इसलिए सरकार पूरी तरह सतर्क है।
गौरतलब है कि इससे पहले 22 मार्च को भी Cabinet Committee on Security की बैठक हुई थी और कुछ ही दिनों बाद फिर से यह बैठक बुलाई गई है। यह समिति देश की राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक मामलों पर बड़े फैसले लेने वाली सबसे अहम संस्था है, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री Narendra Modi करते हैं।
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CM मान की हरियाणा सरकार को सलाह: संयम के साथ पानी बरतें, 21 मई तक अतिरिक्त पानी नहीं देगा पंजाब
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने हरियाणा को संयम से पानी बरतने को कहा है। चंडीगढ़ में प्रेस कांफ्रेंस के दाैरान सीएम ने कहा कि हरियाणा सरकार इन्हीं दिनों पानी के लिए पंजाब से लड़ती है इसलिए पंजाब ने पहले ही हरियाणा को सचेत कर दिया है कि पानी की खपत पूरे संयम के साथ की जाए। इसके लिए हरियाणा सरकार को पत्र भी लिख दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब द्वारा हरियाणा को उसके कोटे का पानी दिया जा रहा है और यह 21 मई तक चलता रहेगा। पंजाब निर्धारित सप्लाई से अधिक पानी हरियाणा को नहीं दे सकता।
उन्होंने कहा कि मालूम चला है कि अभी तक हरियाणा ने अपने कोटे का 70 से 75 फीसदी पानी ही खर्च किया है, यह अच्छी बात है। 21 मई तक इस पानी की खपत की जा सकती है, उसके बाद ही आगे कोटे के तहत पानी सप्लाई दी जाएगी। यह भी अच्छी बात है कि इस बार हरियाणा सरकार ने इस बार अपने बजट में एसवाईएल के लिए कोई बजट तय नहीं किया है। हरियाणा को अब यह मसला खत्म ही कर देना चाहिए।
मान ने कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार ने पहली बार पंजाब का पानी पंजाब के लोगों और किसानों के लिए बरतना शुरू कर दिया है। अंतिम टेल तक किसानों को सिंचाई के लिए नई पानी उपलब्ध करवाया जा रहा है। दूसरे राज्यों के लिए पंजाब के पास कोई अतिरिक्त पानी नहीं है और न ही दूसरे राज्य इसके लिए उम्मीद रखें।
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