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Punjab पुलिस की नशे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई: 290 तस्कर गिरफ्तार, 750 स्थानों पर छापेमारी।

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पंजाब। Punjab पुलिस ने शनिवार को राज्यभर में नशे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की, जिसमें चार घंटे के भीतर 750 स्थानों पर छापे मारकर 290 नशा तस्करों को गिरफ्तार किया गया। इस दौरान पुलिस ने 232 एफआईआर भी दर्ज कीं। यह ऑपरेशन मुख्यमंत्री भगवंत मान के आदेश पर डीजीपी गौरव यादव और स्पेशल डीजीपी अर्पित शुक्ला की अगुवाई में चलाया गया।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पुलिस अधिकारियों को तीन महीने के भीतर पंजाब को नशा मुक्त बनाने का निर्देश दिया है। पुलिस ने यह कार्रवाई मुख्यमंत्री के आदेश के एक दिन बाद की। इस अभियान में 900 पुलिस अधिकारियों ने भाग लिया, जिनमें 233 एसपी और डीएसपी रैंक के अधिकारी भी शामिल थे।

यह ऑपरेशन सुबह 9 बजे से लेकर दोपहर 1 बजे तक चला। इस दौरान पुलिस ने 8.14 किलो हेरोइन, 1.21 किलो अफीम, 3.5 किलो गांजा, 19 किलो भुक्की, 700 ग्राम चरस, 16,238 नशीली गोलियां, कैप्सूल और टीके, साथ ही 8.02 लाख रुपये की ड्रग मनी भी बरामद की है।

दो तस्करों का पाकिस्तान से नेटवर्क।

Punjab पुलिस ने दो तस्करों को नशीले पदार्थों के साथ गिरफ्तार किया है। इस बारे में अमृतसर के पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर ने कहा कि यह एक बड़ा कार्टेल है, जिसे पाकिस्तान में स्थित एक कुख्यात तस्कर चला रहा है। हमारी टीम ने इन दोनों तस्करों को पकड़ा, जिनके पास से 4 किलो हेरोइन और एक मोटरसाइकिल बरामद हुई। दोनों तस्कर तरनतारन जिले के खेमकरण शहर के निवासी हैं। उन्होंने पाकिस्तान स्थित तस्कर से संपर्क करने के बाद यह ड्रग्स प्राप्त की थी। इन पदार्थों की तस्करी फिरोजपुर सेक्टर के जरिए अंतरराष्ट्रीय सीमा से की गई थी।

नशे के खिलाफ अभियान में Punjab को जोन में बांटा।

ड्रग्स पर कड़ी कार्रवाई करने के उद्देश्य से गठित कैबिनेट सब कमेटी की पहली बैठक शनिवार को आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता वित्तमंत्री हरपाल सिंह चीमा ने की। बैठक में कमेटी के चार अन्य मंत्री सदस्य, मुख्य सचिव केएपी सिन्हा, और डीजीपी पंजाब गौरव यादव भी मौजूद थे।

चेयरमैन वित्तमंत्री हरपाल सिंह चीमा की अगुवाई में कैबिनेट सब कमेटी ने यह निर्णय लिया कि पंजाब के हर जिले को जोन के अनुसार बांटा जाएगा ताकि ड्रग्स माफिया पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सके। महत्वपूर्ण बात यह है कि कैबिनेट सब कमेटी के सभी सदस्यों की जिम्मेदारियां भी स्पष्ट रूप से तय की गई हैं। वित्तमंत्री हरपाल सिंह चीमा, आम आदमी पार्टी Punjab के प्रधान और मंत्री अमन अरोड़ा, और मंत्री तरुनप्रीत सिंह सौंद को 6-6 जिलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर को पांच जिलों की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि डॉ. बलबीर सिंह को नशा मुक्ति केंद्रों, रिहैबिलेशन सेंटरों और अस्पतालों में ड्रग्स पीड़ितों को इलाज उपलब्ध कराने की निगरानी का कार्य सौंपा गया है।

बैठक के दौरान मुख्य सचिव केएपी सिन्हा ने बताया कि अब केवल बड़े ड्रग्स तस्करों और माफिया की संपत्ति जब्त करने के अलावा सरकार इस दिशा में एक बड़ा कदम उठा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में मुख्यमंत्री भगवंत मान से जल्द ही प्रस्ताव लेकर मंजूरी ली जा सकती है। सिन्हा ने यह सुझाव दिया कि नशा तस्करों और माफियों के खिलाफ पंजाब के रेवेन्यू रिकॉर्ड में रेड एंट्री की योजना जैसी कार्रवाई की जा सकती है।

पांच मंत्रियों को दी इन जिलों की कमान।

पंजाब में ड्रग्स पर पूर्ण नियंत्रण पाने के लिए कैबिनेट सब कमेटी ने पांच मंत्रियों को विभिन्न जिलों की जिम्मेदारी सौंपी है। इन मंत्रियों को पंजाब को जोन वाइज बांटकर जिलों की निगरानी करने का काम सौंपा गया है। वित्त मंत्री ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वे पठानकोट, गुरदासपुर, शहीद भगत सिंह नगर, रोपड़, तरनतारन और होशियारपुर जिलों की जिम्मेदारी संभालेंगे। इसी तरह, कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा लुधियाना, पटियाला, कपूरथला, मोहाली, अमृतसर और जालंधर की निगरानी करेंगे। कैबिनेट मंत्री तरुनप्रीत सिंह सौंद संगरूर, बरनाला, बठिंडा, फतेहगढ़ साहिब, मोगा और मालेरकोटला जिलों की जिम्मेदारी संभालेंगे, जबकि कैबिनेट मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर फरीदकोट, मुक्तसर, फाजिल्का, मानसा और फिरोजपुर जिलों की निगरानी करेंगे।

अपने जिलों का दौरा कर जमीनी हकीकत परखेंगे मंत्री।

पंजाब में ड्रग्स पर पूर्ण नियंत्रण पाने के लिए कैबिनेट सब कमेटी ने पांच मंत्रियों को विभिन्न जिलों की जिम्मेदारी सौंपी है। इन मंत्रियों को पंजाब को जोन वाइज बांटकर जिलों की निगरानी करने का काम सौंपा गया है। वित्त मंत्री ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वे पठानकोट, गुरदासपुर, शहीद भगत सिंह नगर, रोपड़, तरनतारन और होशियारपुर जिलों की जिम्मेदारी संभालेंगे। इसी तरह, कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा लुधियाना, पटियाला, कपूरथला, मोहाली, अमृतसर और जालंधर की निगरानी करेंगे। कैबिनेट मंत्री तरुनप्रीत सिंह सौंद संगरूर, बरनाला, बठिंडा, फतेहगढ़ साहिब, मोगा और मालेरकोटला जिलों की जिम्मेदारी संभालेंगे, जबकि कैबिनेट मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर फरीदकोट, मुक्तसर, फाजिल्का, मानसा और फिरोजपुर जिलों की निगरानी करेंगे।

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Punjab

पंजाब के 4 जिलों में राज्य कर विभाग की रेड:तंबाकू बिक्री पर टैक्स चोरी पकड़ी, बिना बिल का 1.5 करोड़ का माल बरामद

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पंजाब सरकार ने तंबाकू पर टैक्स चोरी करने वालों पर शिकंजा कस दिया है। फाइनेंस मिनिस्टर हरपाल सिंह चीमा ने शुक्रवार को बताया कि राज्य कर विभाग की टीमों ने पूरे पंजाब में एक साथ बड़े छापेमारी अभियान चलाकर 1.5 करोड़ रुपए के अनअकाउंटेड (बिना बिल) तंबाकू उत्पाद बरामद किए हैं।

उन्होंने कहा, “सिगरेट-बीड़ी पर हाल ही में टैक्स बढ़ाए जाने के बाद इस क्षेत्र में चोरी की गतिविधियां बढ़ गई थी। सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत विभाग ने तुरंत एक्शन लिया।

8 जगह पर की गई छापेमारी

अमृतसर, लुधियाना, पटियाला और जालंधर की चार स्टेट इन्वेस्टिगेशन एंड प्रिवेंटिव यूनिट्स की टीमों ने 8 अलग-अलग जगहों पर एक साथ छापे मारे। इनमें 5 रजिस्टर्ड दुकानों और 3 गैर-रजिस्टर्ड अवैध कारोबार शामिल थे।” छापेमारी के दौरान लुधियाना और अमृतसर में गुप्त गोदामों और छिपे स्टॉक का भंडाफोड़ हुआ। मुख्य दुकानों से जुड़े गोदामों में भारी मात्रा में सामान बिना इनवॉइस और बिना हिसाब-किताब के रखा और बेचा जा रहा था।

यह सामान हुआ बरामद

इस दौरान भारत निर्मित सिगरेट में 1.32 लाख पैकेट, बीड़ी 18,472 पैकेट, जर्दा 302 पैकेट, विदेशी सिगरेट 13 पैकेट व 95 डिब्बे, विदेशी हुक्का सामग्री 148 पीस, कूललिप: 18 पैकेट व कुल जब्त सामान की कीमत: लगभग 1.5 करोड़ रुपए । किए गए सामान पर 50 लाख रुपए से ज्यादा का टैक्स बकाया है, जिसकी सख्ती से वसूली की जाएगी। अब तक 12 लाख रुपए की राशि वसूल की जा चुकी है और बाकी वसूली की कार्रवाई तेजी से चल रही है।

सरकार का साफ संदेश

हरपाल सिंह चीमा ने चेतावनी देते हुए कहा, “टैक्स चोरी के खिलाफ भगवंत मान सरकार का रुख बिल्कुल सख्त है। ऐसे अभियान लगातार चलते रहेंगे। व्यापारियों को सलाह है कि सही बिल-दस्तावेज रखें और कानून का पालन करें, वरना सख्त कार्रवाई से कोई नहीं बच पाएगा।” यह कार्रवाई राज्य के राजस्व की सुरक्षा और टैक्स अनुपालन सुनिश्चित करने की दिशा में भगवंत मान सरकार की मजबूत इच्छाशक्ति को दिखाती है।

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पंजाब की मुख्यमंत्री सेहत योजना ने 3 महीनों में 30.5 लाख परिवारों को कवर किया, 292 करोड़ रुपये के उपचार स्वीकृत हुए।

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मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार ने मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत बड़े स्तर पर जनस्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर एक नया मानक स्थापित किया है और 8 जनवरी 2026 को योजना की शुरुआत के बाद तीन महीनों के भीतर ही 30.51 लाख से अधिक परिवारों का पंजीकरण किया गया है और 292 करोड़ रुपये के मुफ्त इलाज को मंजूरी देकर पूरे देश में एक उदाहरण प्रस्तुत किया गया है। इस योजना के क्रियान्वयन के पैमाने और गति के बारे में जानकारी देते हुए पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि यह योजना तेजी से पंजाब के लाखों परिवारों को वास्तविक वित्तीय राहत और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रही है।

पंजाब भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए डॉ. बलबीर सिंह ने बताया, “इस योजना के तहत अब तक 30,51,325 लाभार्थियों का पंजीकरण किया जा चुका है और 1,77,097 मुफ्त उपचारों को मंजूरी दी गई है। इलाज की कुल स्वीकृत लागत 292 करोड़ रुपये है, जिसमें से 267 करोड़ रुपये पहले ही स्वीकृत किए जा चुके हैं। हमने 71,000 दावों का निपटारा कर दिया है और सूचीबद्ध अस्पतालों को 60 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।”

इस उपलब्धि के महत्व को रेखांकित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार ने हर मानक पर अन्य राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने कहा, “यह पंजाब के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। चाहे पंजीकरण की बात हो, कवर किए गए परिवारों की संख्या हो या उपचार प्राप्त करने वाले मरीजों की संख्या—हर मामले में पंजाब पहले स्थान पर है।”

अस्पतालों को समय पर भुगतान का भरोसा दिलाते हुए डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि भगवंत मान सरकार ने बकाया भुगतान के लिए एक मजबूत प्रणाली विकसित की है। उन्होंने बताया कि 31 मार्च तक के सभी बकाया 15 अप्रैल तक चुका दिए जाएंगे, जिससे किसी भी अस्पताल का एक भी रुपया बकाया नहीं रहेगा।

उन्होंने 1 अप्रैल से लागू होने वाले नए भुगतान ढांचे की जानकारी देते हुए बताया कि 1 लाख रुपये तक के दावों का निपटारा 15 दिनों के भीतर किया जाएगा, जबकि 1 लाख रुपये से अधिक के बिल एक सप्ताह के भीतर निपटाए जाएंगे। विवादित या सत्यापन की आवश्यकता वाले मामलों में यह प्रक्रिया एक महीने के भीतर पूरी कर ली जाएगी।

योजना के वास्तविक प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि यह योजना पहले ही हर आयु वर्ग के लोगों को लाभ पहुंचा रही है। इसके लाभार्थियों में एक वर्ष के बच्चे से लेकर 99 वर्ष की बुजुर्ग महिला तक शामिल हैं, जिन्होंने इस योजना के तहत कैंसर का इलाज करवाया है। उन्होंने बताया कि इस योजना में दिल से जुड़ी 100 से अधिक गंभीर बीमारियों सहित जटिल प्रक्रियाओं को भी कवर किया गया है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि योजना के तहत पटियाला मेडिकल कॉलेज में “रप्चर्ड साइनस” जैसी गंभीर स्थिति वाले मरीज का सफल इलाज किया गया है।

डॉ. बलबीर सिंह ने आगे कहा कि जब सरकार मुफ्त इलाज सेवाओं पर 292 करोड़ रुपये खर्च कर रही है, तो इसका सीधा अर्थ है कि आम जनता का पैसा बच रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य स्वास्थ्य एजेंसी, यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस के सहयोग से पूरे पंजाब में सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की निर्बाध सुविधा सुनिश्चित कर रही है।

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देश में शादी से पहले लड़कों का डोप और medical test होगा जरूरी! जानें- क्यों शुरु हुई ये चर्चा?

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आम आदमी पार्टी के सांसद मालविंदर सिंह कांग ने देश की बेटियों और बहनों की सुरक्षा से संबंधित एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मुद्दा उठाया। उन्होंने समाज में तलाक और घरेलू हिंसा के बढ़ते मामलों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार से विवाह संबंधी कानूनों में कड़े सुधार लाने का आग्रह किया।

संसद को संबोधित करते हुए मालविंदर सिंह कांग ने कहा कि हमारे देश में विवाह टूटने और परिवार बिखरने की प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है। उन्होंने आगे कहा कि यह समस्या केवल पंजाब तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश के परिवारों को प्रभावित कर रही है।

समाज में व्याप्त दोहरे मापदंडों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि शादी से पहले हम लड़की की शिक्षा, चरित्र और पारिवारिक पृष्ठभूमि की बारीकी से जांच करते हैं, लेकिन लड़के के मामले में हम आंखें मूंद लेते हैं। शादी के बाद पुरुषों में सामने आने वाले मादक पदार्थों का सेवन, गंभीर बीमारियां और आपराधिक प्रवृत्ति जैसी समस्याएं अनगिनत जिंदगियों को बर्बाद कर रही हैं।

कांग ने भारत सरकार और सभी राज्य सरकारों से इस दिशा में तत्काल और कड़े कदम उठाने की अपील की। ​​उन्होंने मांग की कि विवाह प्रमाण पत्र जारी करने से पहले दूल्हे का ‘डोप टेस्ट’ अनिवार्य किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि शादी से पहले दूल्हे के लिए ‘मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट’ कानूनी रूप से अनिवार्य किया जाए।

कांग ने कहा कि यह छोटा सा सुधार हमारे देश की महिलाओं के लिए एक बड़ा सुरक्षा कवच साबित हो सकता है।

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