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मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ने 2025-26 के लिए नई आबकारी नीति को दी मंजूरी, 8.61% अधिक राजस्व का लक्ष्य।

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चंडीगढ़: मुख्यमंत्री Bhagwant Mann के नेतृत्व में मंत्रिमंडल ने वर्ष 2025-26 के लिए नई आबकारी नीति को मंजूरी दी है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य अगले वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान 11020 करोड़ रुपए का आबकारी राजस्व इकट्ठा करना है, जो कि पिछले वर्ष की तुलना में 874.05 करोड़ रुपए (8.61 प्रतिशत) अधिक है। यह निर्णय आज मुख्यमंत्री के सरकारी निवास पर हुई मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया।

मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता ने इस संबंध में जानकारी दी कि वर्ष 2024-25 की आबकारी नीति के दौरान 10,145 करोड़ रुपए का राजस्व लक्ष्य निर्धारित किया गया था, और राज्य सरकार अब तक 10,200 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त कर चुकी है। मौजूदा सरकार के कार्यकाल में राज्य का आबकारी राजस्व लगातार बढ़ रहा है, क्योंकि पहली बार यह राजस्व 10,000 करोड़ रुपए के आंकड़े को पार कर चुका है। उल्लेखनीय है कि अकाली-भा.ज.पा. सरकार के अंतिम वर्ष में आबकारी राजस्व केवल 4405 करोड़ रुपए था, जबकि पिछली कांग्रेस सरकार के अंतिम वर्ष में यह आंकड़ा 6151 करोड़ रुपए था।

नई नीति में यह भी प्रावधान किया गया है कि 2025-26 के लिए एल-2/एल-14ए रिटेल ठेकों की नई अलॉटमेंट ई-टेंडर के माध्यम से की जाएगी, ताकि रिटेल कारोबार को बेहतर और संतुलित किया जा सके, और व्यापक साझेदारी को सुनिश्चित किया जा सके। वर्ष 2024-25 के लिए समूह का आकार 40 करोड़ रुपए निर्धारित किया गया है। इसके अलावा, अतिरिक्त राजस्व जुटाने और देसी शराब (पंजाब मीडियम लिकर) के कोटे में पिछले साल के मुकाबले तीन प्रतिशत की वृद्धि की गई है, जिससे देसी शराब का कोटा अब 8.534 करोड़ प्रूफ लीटर होगा।

हालांकि, इस नीति में देसी शराब की दरों में कोई वृद्धि नहीं की गई है। भारतीय सेना और अन्य सशस्त्र बलों को राहत देने के लिए उनके थोक लाइसेंस की फीस 50 प्रतिशत घटा दी गई है, जिससे अब यह फीस पांच लाख रुपए से घटकर ढाई लाख रुपए रह गई है।

मुख्यमंत्री Bhagwant Mann

पंजाब में पर्यटन को और बढ़ावा देने के लिए फार्म स्टे के लाइसेंसधारकों को शराब रखने की सीमा 12 क्वार्ट्स (इंडियन मेड फॉरेन लिकर) से बढ़ाकर 36 क्वार्ट्स (आई.एम.एफ.एल.) कर दी गई है। इसके अलावा, बीयर, वाइन, जिन, वोडका, ब्रांडी, रेडी-टू-ड्रिंक और अन्य शराब उत्पादों की मात्रा रखने की सीमा में भी इसी प्रकार की वृद्धि की गई है।

वर्ष 2025-26 में उपभोक्ताओं को बेहतर अनुभव प्रदान करने के लिए नगर निगम क्षेत्रों में रिटेल लाइसेंस धारकों के लिए प्रत्येक समूह में एक मॉडल दुकान खोलना अनिवार्य किया गया है। अल्कोहल की कम मात्रा वाले उत्पादों जैसे बीयर, वाइन और रेडी-टू-ड्रिंक की खपत को बढ़ावा देने के लिए स्टैंडअलोन (इकहरी) बीयर शॉप की फीस को प्रति शॉप दो लाख रुपए से घटाकर 25,000 रुपए प्रति शॉप कर दिया गया है। नए निवेश को आकर्षित करने के लिए पंजाब में नया बॉटलिंग प्लांट स्थापित करने की अनुमति दी गई है।

इसके अतिरिक्त, शराब पर लगने वाली गौ भलाई फीस में 50 प्रतिशत की वृद्धि की गई है, जिससे अब यह शुल्क एक रुपए प्रति प्रूफ लीटर से बढ़कर डेढ़ रुपए प्रति प्रूफ लीटर हो गया है। इससे गौ भलाई फीस की आय, जो अब 16 करोड़ रुपए है, वर्ष 2025-26 में बढ़कर 24 करोड़ रुपए हो जाएगी। प्रवर्तन की मौजूदा संरचना को मजबूत करने के लिए आगामी वित्तीय वर्ष में आबकारी पुलिस स्टेशन स्थापित करने का भी प्रस्ताव है। कारोबार को सरल बनाने के लिए शराब के ब्रांड की एक्स-डिस्टिलरी प्राइस (टैक्स और अन्य लागतों से पहले डिस्टिलरी द्वारा थोक विक्रेता को बेची जाने वाली शराब की कीमत) में कोई वृद्धि नहीं की गई है, और आबकारी विभाग के ई-आबकारी पोर्टल के माध्यम से ब्रांडों की स्वचालित मंजूरी की प्रक्रिया शुरू की गई है।

“पंजाब तीर्थ यात्रा समिति” के गठन को मंजूरी।

पंजाबवासियों को आरामदायक तीर्थ यात्रा प्रदान करने के उद्देश्य से, मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के तहत “पंजाब तीर्थ यात्रा समिति” के गठन को भी कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। यह समिति विभिन्न विभागों के साथ समन्वय करके हवाई, रेल, सड़क और अन्य परिवहन माध्यमों के जरिए तीर्थ यात्रा के प्रबंधों को सुव्यवस्थित करेगी। उल्लेखनीय है कि पंजाब सरकार ने 2023-24 में मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना की शुरुआत की थी, और अब तक रेलगाड़ियों और बसों के माध्यम से लगभग 34 हजार श्रद्धालु विभिन्न तीर्थ स्थलों की यात्रा कर चुके हैं। “पंजाब तीर्थ यात्रा समिति” इस योजना के तहत यात्रा प्रबंधों को और अधिक कुशल और सुविधाजनक बनाएगी।

सरकारी विभागों और संस्थाओं के लिए डिजिटल हस्ताक्षर उपलब्ध कराने हेतु पी.आई.सी.टी.सी. एकमात्र एजेंसी नामित।

कैबिनेट ने पंजाब इंफॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पी.आई.सी.टी.सी.) को सरकारी विभागों और संस्थाओं के लिए डिजिटल हस्ताक्षर उपलब्ध कराने हेतु एकमात्र एजेंसी नामित करने को हरी झंडी दे दी। कॉर्पोरेशन को ‘पंजाब ट्रांसपेरेंसी इन पब्लिक प्रोक्योरमेंट एक्ट, 2019’ की सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए आई.टी. और आई.टी.ई.जी. की खरीद के लिए भी नामित किया गया है। इसके अलावा सुशासन विभाग और सूचना प्रौद्योगिकी (जिसे पहले प्रशासनिक सुधार विभाग के रूप में जाना जाता था) और पंजाब इन्फोटेक के बीच जिम्मेदारियों का औपचारिक रूप से विभाजन कर दिया गया है। इन मंजूरियों से शासन और खरीद प्रबंधन में सुधार, डिजिटल परिवर्तन को प्रोत्साहन और जनसाधारण सेवाओं में कार्यकुशलता आने की संभावना है।

जल (संरक्षण और प्रदूषण की रोकथाम) संशोधन अधिनियम, 2024 को अपनाने की सहमति।

कैबिनेट ने भारतीय संविधान की धारा 252 के उपबंध (1), जिसे उपबंध (2) के साथ पढ़ा जाए, की निरंतरता में भारतीय संसद द्वारा जल (संरक्षण और प्रदूषण की रोकथाम) संशोधन अधिनियम, 2024 को लागू करने की मंजूरी प्रदान की। यह अधिनियम फौजदारी जिम्मेदारी की जगह वित्तीय जुर्माने का प्रस्ताव करता है और यह निर्दिष्ट करता है कि अधिनियम का पालन न करने पर सक्षम अधिकारी द्वारा वित्तीय जुर्माना लगाया जाएगा। जल (संरक्षण और प्रदूषण की रोकथाम) संशोधन अधिनियम, 2024 स्वभाव से प्रगतिशील है, और इस कारण पंजाब सरकार ने इसे अपनाया है। यह छोटे अपराधों को अपराधों की श्रेणी से बाहर कर तार्किक बनाता है, जिससे व्यापार और प्रशासन को सरल बनाने में मदद मिलेगी।

पंजाब जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) नियम, 2025 में किए गए संशोधनों को मंजूरी।

पंजाब में जन्म और मृत्यु पंजीकरण की प्रक्रिया को अधिक सुचारू बनाने के लिए कैबिनेट ने पंजाब जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) नियम, 2025 में कुछ महत्वपूर्ण संशोधनों को मंजूरी दे दी है। गौरतलब है कि केंद्र सरकार द्वारा जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 में किए गए संशोधन के मद्देनजर, राज्य सरकार ने केंद्र द्वारा भेजे गए जन्म और मृत्यु पंजीकरण के मॉडल संशोधन नियम, 2024 के आधार पर पंजाब जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) नियम, 2025 तैयार किए हैं। इस संशोधन से अधिनियम में एकरूपता आएगी और लोगों को बड़े पैमाने पर लाभ होगा।

पंजाब राज्य एन.आर.आईज़. कमीशन की प्रशासनिक रिपोर्ट को मंजूरी।

कैबिनेट ने पंजाब राज्य एन.आर.आईज़. कमीशन की वार्षिक प्रशासनिक रिपोर्ट के साथ-साथ वर्ष 2022-23 के लिए ऑडिट रिपोर्ट को भी मंजूरी दे दी है।

ओ.एस.डी. (लिटिगेशन) के पद को मंजूरी।

कैबिनेट ने कार्मिक विभाग में अधिकारी ऑन स्पेशल ड्यूटी (लिटिगेशन) के अस्थायी पद को बनाए रखने की भी मंजूरी दे दी है।

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पंजाब में समान विकास सुनिश्चित करने के लिए पहली बार जाति आधारित सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण करवाया जाएगा:CM भगवंत सिंह मान

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पंजाब सरकार की ‘शानदार चार साल भगवंत मान दे नाल’ श्रृंखला के हिस्से के रूप में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज ग्रामीण विकास और पंचायत विभाग का चार साल का व्यापक रिपोर्ट कार्ड पेश किया, जिसमें यह दिखाया गया कि निरंतर नीतिगत हस्तक्षेप ने गांवों के बुनियादी ढांचे को कैसे बदला है, जमीनी स्तर पर प्रशासन को मजबूत किया है और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाए हैं।

ग्रामीण विकास को समग्र विकास के केंद्रीय स्तंभ के रूप में बताते हुए मुख्यमंत्री ने पंजाब के पहले जाति आधारित सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण की शुरुआत से लेकर बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा निर्माण, पारदर्शी भूमि प्रबंधन के माध्यम से राजस्व उत्पन्न करने और युवा-केंद्रित विकास कार्यक्रमों सहित प्रमुख पहलों की रूपरेखा पेश की।

पहली अप्रैल से शुरू होने वाले जाति आधारित सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण को समानता और नीति निर्माण सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसका उद्देश्य कार्रवाई को गोपनीय रखते हुए सभी समुदायों के जीवन स्तर का मूल्यांकन करना है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास रिपोर्ट कार्ड एक व्यापक शासन ढांचे का हिस्सा है, जिसके तहत ‘आप’ सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, सिंचाई, कृषि और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में सेक्टर-वार प्रदर्शन के साथ-साथ जवाबदेही, पारदर्शिता और परिणामों पर अपना ध्यान केंद्रित कर रही है।

ग्रामीण विकास और पंचायत विभाग का रिपोर्ट कार्ड पेश करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पिछले चार वर्षों में गांवों का पूर्ण विकास हुआ है, जिसमें बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य, तालाबों की सफाई शामिल है क्योंकि राज्य ने सरकारी जमीनों से अवैध कब्जे हटाकर और अन्य तरीकों से पैसा कमाया है।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “राज्य के सख्त प्रयासों के कारण पंचायत चुनावों में सर्वसम्मति में वृद्धि हुई है। पंजाब में 13,236 पंचायतों के लिए चुनाव 2024 में हुए थे, जिनमें बड़ी संख्या में पंचायतें सर्वसम्मति से चुनी गईं। 2018 में लगभग 1,870 पंचायतें सर्वसम्मति से चुनी गई थीं, लेकिन 2024 में 2,970 पंचायतें सर्वसम्मति से चुनी गईं थी।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “1,100 से अधिक पंचायतें सर्वसम्मति से चुनी गईं, जिससे गांवों में सामुदायिक सौहार्द मजबूत होता है और गांवों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित होता है।”

उन्होंने कहा, “पंजाब सरकार ने सरपंचों का मानभत्ता 1,200 रुपये से बढ़ाकर 2,000 रुपये प्रति माह कर दिया है।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “ग्रामीण विकास के लिए 15वें वित्त आयोग के तहत वर्ष 2025-26 में ग्रामीण विकास पर 2,367.64 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, जो 2024-25 के मुकाबले दोगुने थे। वर्ष 2017-22 के दौरान पांच वर्षों में गांवों के विकास पर 1,883 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, जबकि राज्य सरकार ने इस नेक कार्य के लिए पिछले चार वर्षों में 3,847 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “पंचायत इमारतों, लाइब्रेरियों, आंगनवाड़ी केंद्रों, खेल मैदानों, गलियों, नालियों और अन्य विकास कार्यों पर 1,030.94 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पीने के पानी, स्वच्छता, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और अन्य जरूरी सेवाओं पर 1,336.70 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे और यह फंड जिला परिषदों, पंचायत समितियों और पंचायतों के माध्यम से जारी किए गए थे।”

उन्होंने आगे कहा, “पंजाब सरकार ने गांवों में शामलात जमीनों को लीज पर देकर आय में वृद्धि की है। पंचायती जमीनों से अवैध कब्जे हटाए गए हैं, जिससे राज्य का राजस्व बढ़ा है। चार वर्षों में राज्य सरकार ने शामलात जमीन को लीज पर देकर 1,842.78 करोड़ रुपये कमाए हैं।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “वर्ष 2025-26 में पिछले साल के मुकाबले राजस्व 50.75 करोड़ रुपये बढ़ा है। लगभग 1.35 लाख एकड़ जमीन लीज पर दी गई, जिससे 520.54 करोड़ रुपये का राजस्व आया, जबकि 2024-25 में 469.79 करोड़ रुपये आए थे।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “नौजवानों की असीम ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देने के लिए लगभग 3,000 ग्रामीण खेल मैदान विकसित किए जा रहे हैं और इस पर 1,166 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। ये मैदान 6,500 एकड़ क्षेत्र में फैले होंगे, जिनके लिए 3,148 स्थानों की पहचान की गई है।”

उन्होंने कहा, “2,400 मैदानों पर काम पहले ही शुरू हो चुका है और इनमें से अधिकांश इस वर्ष जून तक पूरे हो जाएंगे, जिनमें वॉलीबॉल कोर्ट, फुटबॉल मैदान, बच्चों के खेलने का सामान और बैठने की व्यवस्था जैसी सुविधाएं होंगी।”

उन्होंने कहा, “राज्य के इतिहास में पहली बार पंचायत घरों का निर्माण किया गया है। दूसरे चरण में 125 करोड़ रुपये के बजट से 500 आधुनिक पंचायत घर बनाए जा रहे हैं।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “प्रति इमारत 25 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं और पहले चरण में 373 इमारतें पहले ही पूरी हो चुकी हैं।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब सरकार ने गांवों में 251 लाइब्रेरियां बनाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है, जिनमें से 231 पहले ही पूरी हो चुकी हैं। इसका उद्देश्य गांवों के लोगों को साहित्य से जोड़ना और नौजवानों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद करना है।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने मनरेगा योजना के बारे में बात करते हुए कहा, “2017-2022 तक केवल 4,708 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, जबकि 2022 से अब तक 5,146 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। 8.96 लाख लोगों को रोजगार मिला है और 2.40 करोड़ दिहाड़ियों का रोजगार सृजित हुआ है।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “2025-26 में लगभग 63,357 नए जॉब कार्ड जारी किए गए थे, जिनमें से 2,480 दिव्यांग व्यक्तियों के लिए थे।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब मनरेगा योजना में तर्कहीन संशोधनों का सख्त विरोध करता है। पंजाब विधानसभा ने केंद्र सरकार द्वारा किए गए परिवर्तनों का विरोध किया था, जो ग्रामीण रोजगार को कम कर सकते हैं। ऐसी प्रतिबंध-आधारित संशोधन गैर-वाजिब हैं क्योंकि ये संशोधन ऐसी योजनाओं के मकसद पर गंभीर सवालिया निशान लगाते हैं।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब सरकार ने ग्रामीण परिवारों के लिए आवासीय सुविधाएं प्रदान करने के लिए अनुकरणीय पहल की हैं। इस वर्ष 76 हजार घरों के लिए मंजूरी दी गई थी, जिनमें 30 हजार बाढ़ प्रभावित परिवार शामिल थे।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “2016-2022 तक राज्य में केवल 39 हजार घर बनाए गए थे, जबकि इस वर्ष राज्य सरकार ने समाज के गरीब वर्ग के लिए एक लाख घर बनाने का लक्ष्य रखा है।”

उन्होंने कहा, “पंजाब सरकार ने 17,080 गांवों के तालाबों की सफाई के लिए बड़ी योजना शुरू की है। 13,414 तालाबों से पानी निकाला गया है और 4,706 तालाबों से गाद निकालने का काम पूरा हो गया है, जिसके लिए 235 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब के इतिहास में पहली बार जाति आधारित सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण किया जा रहा है। इसका उद्देश्य सभी जातियों और उप-जातियों के जीवन स्तर का मूल्यांकन करना है ताकि उनकी भलाई के लिए नीतियां बनाई जा सकें। इस उद्देश्य के लिए 250 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है, जिसमें 28,000 गणनाकार तैनात किए जाएंगे और प्रत्येक को 62,500 रुपये मानभत्ता मिलेगा।”

उन्होंने कहा, “नशों के विरुद्ध जंग में राज्य के सभी गांवों ने अपना समर्थन दिया है। मैं पंचायतों और वॉलंटियरों का नशा विरोधी प्रयासों में सक्रिय रूप से जुड़ने के लिए दिल से धन्यवाद करता हूं क्योंकि पहले ही 1.25 लाख सदस्य इस मुहिम में शामिल हो चुके हैं।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “12 हजार विलेज डिफेंस कमेटियां बनाई गई हैं और वॉलंटियर ‘गांव के सरपरस्त’ के रूप में काम कर रहे हैं। कई नशा तस्करों को इन कमेटियों की रिपोर्टों के आधार पर गिरफ्तार किया जाता है।”

मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा, “पंजाब राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 23 जिलों की 100 अग्रणी महिला उद्यमियों को प्रमाण पत्र और स्मृति चिन्हों से सम्मानित किया गया। उन्हें 25,000 रुपये प्रति व्यक्ति भी दिए गए।”

उन्होंने कहा, “117 विधानसभा क्षेत्रों में 11,700 महिलाओं को सम्मानित किया गया है और 2,300 महिलाओं को जिला स्तर के कार्यक्रमों में सम्मानित किया गया है। मिशन के तहत 58,303 स्व-सहायता समूह बनाए गए हैं और 5.89 लाख परिवारों को जोड़ा गया है, जिन्हें 147 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “महिला सशक्तिकरण पहल के हिस्से के रूप में महिलाओं को डेयरी फार्मिंग से जोड़ने के लिए नई योजना शुरू की गई है। इस योजना के तहत 1,100 दूध सहकारी समितियां रजिस्टर्ड की गई हैं और महिलाओं को 18 करोड़ रुपये के ब्याज मुक्त ऋण दिए गए हैं।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “ये समितियां मिल्कफेड को रोजाना एक लाख लीटर दूध सप्लाई कर रही हैं। पूरे पंजाब में सखी शक्ति मेले लगाए गए थे, जिनमें 1,500 से अधिक महिलाओं ने हिस्सा लिया और उनके द्वारा तैयार किए गए नौ करोड़ रुपये के उत्पाद बेचे गए।”

उन्होंने कहा, “समन्वय को बेहतर बनाने के लिए पहली बार विधानसभा क्षेत्रों के अनुसार ब्लॉकों का पुनर्गठन किया गया है। ग्रामीण विकास अधिकारियों और पंचायत सचिवों को राज्य कैडर में शामिल कर दिया गया है। कार्य कुशलता में सुधार लाने के लिए राज्य में 3,327 पंचायत विकास सचिवों के लिए प्रांतीय कैडर बनाया गया है।”

एक प्रश्न के जवाब में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “केंद्र सरकार पंजाब के साथ सौतेली मां वाला सलूक कर रही है। आरडीएफ, जीएसटी, एनएचएम और अन्य ग्रांट्स को केंद्र ने रोक रखा है। इसका एकमात्र कारण यह है कि पंजाब में भाजपा को वोट नहीं मिलते, जिस कारण केंद्र सरकार पंजाब के साथ अन्याय कर रही है।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “केंद्र द्वारा आवंटित आपदा प्रबंधन फंड बहुत कम है और जनता के बड़े हित में इसमें संशोधन की आवश्यकता है। राज्य इस भेदभाव का सख्त विरोध करेगा और राज्य का जायज हिस्सा प्राप्त करने के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जाएगी। इस मुद्दे को कानूनी और प्रशासनिक रूप से हर प्लेटफॉर्म पर उठाया जाएगा।”

एक और सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “यह हैरान करने वाली बात है कि पंजाब कांग्रेस के नेता अपनी पार्टी की अगुवाई वाली हिमाचल सरकार द्वारा एंट्री टैक्स लगाए जाने पर चुप्पी साधे बैठे हैं, जबकि यह मुद्दा पंजाबियों के एक बड़े हिस्से से संबंधित है।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “एक तरफ राज्य सरकार टोल टैक्स खत्म कर रही है और आम आदमी को राहत दे रही है, वहीं दूसरी तरफ पड़ोसी राज्य लोगों पर बिना जरूरी टैक्स लगा रहे हैं।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “राज्य सरकार गेहूं की फसल की सुचारू और परेशानी मुक्त खरीद तथा लिफ्टिंग के लिए वचनबद्ध है और इसके लिए व्यापक प्रबंध पहले ही कर लिए गए हैं। सुचारू खरीद को खतरे में डालने के लिए अपनाई जा रही ब्लैकमेलिंग की रणनीति को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसी ताकतों के विरुद्ध अनुकरणीय कार्रवाई की जाएगी।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब के इतिहास में पहली बार एक अच्छी सरकार काम कर रही है, जबकि पहले वाली सरकारें लोगों को लूटने तक सीमित थीं।”

उन्होंने कहा, “पंजाब सरकार किसानों की जमीन से गुजरने वाली हाई टेंशन तारों को जमीनदोज करने की संभावना की पड़ताल कर रही है और रणनीति बनाई जा रही है। यह किसानों के लिए राहत होगी क्योंकि ये तारें फसलों के लिए बहुत बड़ा खतरा पैदा करती हैं।”

इस मौके पर ग्रामीण विकास और पंचायत मंत्री तरुनप्रीत सिंह सौंद तथा अन्य भी मौजूद थे।

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CM मान की हरियाणा सरकार को सलाह: संयम के साथ पानी बरतें, 21 मई तक अतिरिक्त पानी नहीं देगा पंजाब

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मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने हरियाणा को संयम से पानी बरतने को कहा है। चंडीगढ़ में प्रेस कांफ्रेंस के दाैरान सीएम ने कहा कि हरियाणा सरकार इन्हीं दिनों पानी के लिए पंजाब से लड़ती है इसलिए पंजाब ने पहले ही हरियाणा को सचेत कर दिया है कि पानी की खपत पूरे संयम के साथ की जाए। इसके लिए हरियाणा सरकार को पत्र भी लिख दिया गया है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब द्वारा हरियाणा को उसके कोटे का पानी दिया जा रहा है और यह 21 मई तक चलता रहेगा। पंजाब निर्धारित सप्लाई से अधिक पानी हरियाणा को नहीं दे सकता।

उन्होंने कहा कि मालूम चला है कि अभी तक हरियाणा ने अपने कोटे का 70 से 75 फीसदी पानी ही खर्च किया है, यह अच्छी बात है। 21 मई तक इस पानी की खपत की जा सकती है, उसके बाद ही आगे कोटे के तहत पानी सप्लाई दी जाएगी। यह भी अच्छी बात है कि इस बार हरियाणा सरकार ने इस बार अपने बजट में एसवाईएल के लिए कोई बजट तय नहीं किया है। हरियाणा को अब यह मसला खत्म ही कर देना चाहिए। 

मान ने कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार ने पहली बार पंजाब का पानी पंजाब के लोगों और किसानों के लिए बरतना शुरू कर दिया है। अंतिम टेल तक किसानों को सिंचाई के लिए नई पानी उपलब्ध करवाया जा रहा है। दूसरे राज्यों के लिए पंजाब के पास कोई अतिरिक्त पानी नहीं है और न ही दूसरे राज्य इसके लिए उम्मीद रखें।

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पंजाब की आप सरकार ने पूरे किए 4 साल, मुख्यमंत्री मान की घोषणा- पंचायतों को मिलेगा इनाम

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की सरकार को राज्य में चार साल पूरे हो गए हैं. इसी उपलक्ष्य में वह ‘शानदार चार साल भगवंत मान दे नाल’ के तहत सरकार की उपलब्धियों का ब्यौरा साझा कर रहे हैं. आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान  मुख्यमंत्री मान ने हर विभाग की तरह ग्रामीण विकास और पंचायत विभाग के कार्यों का ‘रिपोर्ट कार्ड’ पेश किया. उन्होंने इस दौरान पंचायतों के लिए एक खास घोषणा भी की. 

 मुख्यमंत्री मान ने इस दौरान बताया कि पंजाब में कुल 13,236 पंचायतें हैं.  2024 में हुए पंचायत चुनावों के दौरान अधिकतर पंचायतों का गठन सर्वसम्मति से हुआ है. उन्होंने कहा कि साल 2018 में हुए चुनावों के दौरान 1,870 पंचायतें निर्विरोध चुनी गई थीं. वहीं, 2024 में यह संख्या बढ़कर 2,970 हो गईं. यह दर्शाता है कि 1,100 से अधिक गांवों ने मिलकर सर्वसम्मति पंचायत चुनी है.

पंचायतों के लिए की खास घोषणा

 मुख्यमंत्री मान ने बताया कि इससे स्पष्ट है कि गांवों में एकता और सामुदायिक सद्भाव बढ़ा है. इस दौरान उन्होंने ‘विशेष विकास अनुदान’ योजना की घोषणा के बारे में भी बताया. इस योजना के तहत उन पंचायतों को  ₹5 लाख का विशेष अनुदान दिया जाएगा जो निर्विरोध चुनी गई हैं. इसका उद्देश्य गांवों के बीच  एकता और सामुदायिक सद्भाव को बढ़ावा देना है. इससे न केवल चुनाव पर होने वाले खर्च में कमी आयेगी, बल्कि समय की भी बचत होगी. 

जन-जन तक पहुंचाना है सरकार की उपलब्धियां- मान

बता दें कि इससे पहले मुख्यमंत्री मान ने अपने शासन में राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में हुए कामों का चार साल का विस्तृत रिपोर्ट कार्ड पेश किया था.  उन्होंने इस दौरान पंजाब के सरकारी स्कूलों और उसके परिणामों को सराहा था. वास्तव में सरकार की योजना उसकी उपलब्धियों को हर गांव, गली और घर तक पहुंचाना है. बता दें कि पंजाब में आम आदमी पार्टी  2022 को सत्ता में आई थी और भगवंत मान ने मुख्यमंत्री की कमान संभाली थी.

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