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कैबिनेट मंत्री Harbhajan Singh ने 44 जरूरतमंद बच्चों प्रोपकर, शिक्षा के लिए 4 हजार रुपये प्रति माह देने की घोषण की

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पंजाब में सरकार चलाने में मदद करने वाले Harbhajan Singh ईटीओ नामक व्यक्ति ने परिवारों को उनके बच्चों की शिक्षा के लिए भुगतान करने में मदद करने के लिए चेक दिए। प्रत्येक परिवार को हर महीने 4 हजार रुपये मिलेंगे। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार हर उस बच्चे की मदद करना चाहती है जिसे इसकी ज़रूरत है। आज, उन्होंने मिशन वात्सल्य नामक एक कार्यक्रम शुरू किया, जिसके तहत 44 परिवारों के बच्चों को यह पैसा दिया जाएगा, जिन्हें अतिरिक्त सहायता की ज़रूरत है। पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ ने कहा कि कुछ परिवारों की मदद के लिए एक विशेष कार्यक्रम है।

यह कार्यक्रम विधवाओं, उन बच्चों के लिए है जिनके माता-पिता तलाकशुदा हैं, रिश्तेदारों के साथ रहने वाले अनाथ बच्चे और ऐसे परिवार जिनके माता-पिता बहुत बीमार हैं और अपने बच्चों की देखभाल नहीं कर सकते हैं। इसका उद्देश्य इन परिवारों को पैसे देकर मदद करना है ताकि उनके बच्चे स्कूल जाते रहें। वह यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि इन परिवारों के ज़्यादा से ज़्यादा बच्चों को यह मदद मिले। पंजाब सरकार में सहायक हरभजन सिंह ईटीओ नामक व्यक्ति ने कहा कि उनके नेता मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान का मुख्य लक्ष्य बच्चों के लिए स्कूलों को बेहतर बनाना है। वे वाकई अच्छे स्कूल बना रहे हैं, जहाँ बच्चे बढ़िया शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं और निजी स्कूलों से भी बेहतर चीज़ें पा सकते हैं।

उनका मानना ​​है कि जल्द ही पंजाब शिक्षा के लिए सबसे अच्छी जगह बन जाएगा। आज, ईटीओ ने ज़रूरतमंद बच्चों की मदद के लिए 19.32 लाख रुपये के चेक बांटे। इनमें से कुछ पैसे ऐसे मामलों से थे, जिनका समाधान होना बाकी था और अब यह उन बच्चों को दिए जा रहे हैं। डिप्टी कमिश्नर घनशाम थोरी ने बताया कि कुछ बच्चे पीएम केयर स्कीम से मदद पा सकते हैं। इसमें वे बच्चे शामिल हैं, जिन्होंने मुश्किल हालात का सामना किया है, जैसे कि जिन्हें काम करने के लिए मजबूर किया गया है, जिनकी शादी बहुत कम उम्र में कर दी गई है, जो बच्चे बीमार हैं या जिन्हें चोट लगी है या जिनका शोषण हुआ है।

भीख मांगने वाले बच्चों को भी इसमें शामिल किया गया है, लेकिन अगर वे स्कूल जा रहे हैं, तो उन्हें कुछ ज़रूरी कागज़ात के साथ पंजीकरण कराना होगा। साथ ही, अगर वे ग्रामीण इलाकों में रहते हैं, तो उनके परिवार की सालाना आय 72,000 से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए या अगर वे शहर में रहते हैं, तो 96,000 से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए। डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि परिवार एक फॉर्म भरकर और बच्चे का आधार कार्ड, उसके स्कूल की रिपोर्ट, जन्म प्रमाण पत्र, सरपंच और पार्षद की रिपोर्ट जैसे ज़रूरी कागज़ात देकर मदद पा सकते हैं।

अगर किसी को इस बारे में मदद चाहिए तो वे जिला बाल संरक्षण इकाई के दफ़्तर में जा सकते हैं, जो जिला प्रशासनिक परिसर की दूसरी मंज़िल, कमरा नंबर 238 पर है। डिप्टी कमिश्नर ने वादा किया कि जिन परिवारों को मदद की ज़रूरत है, उन्हें मदद मिल सकेगी और लोगों को इस कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी जाएगी।

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धनौला पुलिस की बड़ी कार्रवाई: नकली पुलिस बनकर ठगी करने वाले 3 आरोपी गिरफ्तार

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पंजाब के बरनाला जिले में धनौला पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए नकली पुलिस कर्मी बनकर लोगों को ठगने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से पुलिस की वर्दी और एक इनोवा कार भी बरामद की गई है।

जानकारी के अनुसार, पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि कुछ लोग पुलिस की वर्दी पहनकर भोले-भाले लोगों को नौकरी दिलाने का झांसा देकर ठगी कर रहे हैं। इस सूचना के आधार पर धनौला पुलिस ने नाका लगाकर चेकिंग शुरू की।

चेकिंग के दौरान पुलिस ने एक इनोवा कार को रोका, जिसमें तीन व्यक्ति पुलिस की वर्दी में बैठे हुए थे। शक होने पर पूछताछ की गई, जिसके बाद उन्हें मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान संदीप कुमार (चक्क महंता वाला), अजय (मुनके उताड़) और गुरप्रीत सिंह (मुनके उताड़) के रूप में हुई है। तीनों आरोपी फिरोजपुर जिले के रहने वाले हैं।

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ थाना धनौला में विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। उन्हें अदालत में पेश कर रिमांड हासिल किया गया है और आगे की जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान इस गिरोह से जुड़े और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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राजनेताओं ने अपने नेताओं के नाम पर भव्य स्मारक बनाए, लेकिन शहीद-ए-आज़म भगत सिंह को नजरअंदाज किया: CM भगवंत मान

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शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के शहादत दिवस पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि यह दिन देश के लिए दी गई उनकी महान कुर्बानी को याद करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि शहीदों के आदर्शों पर चलकर ही एक मजबूत और खुशहाल पंजाब का निर्माण किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल श्रद्धांजलि देने का दिन नहीं, बल्कि उनके विचारों और अन्याय के खिलाफ संघर्ष की भावना को आगे बढ़ाने का संकल्प लेने का दिन है। उन्होंने शहीदों को भारत रत्न न दिए जाने पर भी सवाल उठाया और कहा कि अगर देश की बागडोर आजादी के शुरुआती वर्षों में ऐसे नौजवानों के हाथ में होती, तो भारत की तस्वीर अलग होती।

उन्होंने कहा कि शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की शहादत हमें अन्याय और अत्याचार के खिलाफ डटकर खड़े होने की प्रेरणा देती है। समाज से बुराइयों को खत्म करना हर नागरिक का कर्तव्य है।

शिक्षा पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीबी और सामाजिक बुराइयों को खत्म करने का सबसे बड़ा हथियार शिक्षा है। पंजाब सरकार इस दिशा में लगातार काम कर रही है और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीदों ने सत्ता या लाभ के लिए नहीं, बल्कि देश की आजादी के लिए अपनी जान न्यौछावर की। उनकी कुर्बानी के कारण ही आज हमें वोट देने का अधिकार मिला है, इसलिए हर नागरिक को अपने मताधिकार का सही उपयोग करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि पंजाब ने देश की आजादी और एकता के लिए सबसे अधिक कुर्बानियां दी हैं। देश की कुल आबादी का केवल 2% होने के बावजूद, आजादी की लड़ाई में 80% शहीद पंजाब से थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार शहीदों की विरासत को संभालने और उनके सपनों का पंजाब बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि हुसैनीवाला में 24.99 करोड़ रुपये की लागत से ‘विरासत प्रोजेक्ट’ शुरू किया जा रहा है, जिससे आने वाली पीढ़ियां शहीदों के इतिहास और बलिदान से प्रेरणा ले सकेंगी।

उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे शहीदों के रास्ते पर चलें और देश की सेवा में अपना योगदान दें। मुख्यमंत्री ने कहा कि वोट की ताकत सबसे बड़ी ताकत है और सही नेतृत्व चुनकर ही देश में असली बदलाव लाया जा सकता है।

अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार शहीद भगत सिंह के सपनों को साकार करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी और राज्य को तरक्की और खुशहाली की राह पर आगे बढ़ाती रहेगी।

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नशे के खिलाफ मुहिम में नया कदम: इलाज और रोजगार से युवाओं को मिल रहा दूसरा मौका

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पंजाब में नशों के खिलाफ जारी जंग अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। भगवंत मान सरकार की ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ मुहिम अब केवल कार्रवाई तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसे पुनर्वास (rehabilitation) और समाज में दोबारा जोड़ने (reintegration) तक बढ़ा दिया गया है। सरकार अब नशा तस्करी के नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई के साथ-साथ प्रभावित लोगों को इलाज, काउंसलिंग और रोजगार के अवसर भी उपलब्ध करवा रही है, ताकि वे एक नई और बेहतर जिंदगी शुरू कर सकें।

इस बदलाव की एक मिसाल जुगराज सिंह (बदला हुआ नाम) है। कॉलेज के दिनों में वह अपने साथियों के प्रभाव में आकर नशे की लत का शिकार हो गया था। शुरुआत में केवल जिज्ञासा के तौर पर शुरू हुई यह आदत जल्द ही उसकी जिंदगी पर हावी हो गई। लेकिन अब सरकारी सहायता और काउंसलिंग के जरिए उसने खुद को संभाला है और अपनी जिंदगी को नई दिशा दी है।

जुगराज सिंह का कहना है कि अब उसका पूरा ध्यान अपनी पढ़ाई पूरी करने और अपने भविष्य को बेहतर बनाने पर है। उसने बताया कि वह अब पहले से ज्यादा आत्मविश्वासी है और उसे लगता है कि वह एक बेहतर इंसान बन गया है।

सरकार द्वारा चलाए जा रहे पुनर्वास कार्यक्रमों के तहत ऐसे युवाओं को मानसिक समर्थन, इलाज और स्किल डेवलपमेंट की सुविधा दी जा रही है। इससे वे न केवल नशे की लत से बाहर निकल रहे हैं, बल्कि समाज में दोबारा सम्मान के साथ अपनी पहचान भी बना रहे हैं।

पंजाब सरकार का मानना है कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल सख्त कार्रवाई से नहीं जीती जा सकती, बल्कि इसके लिए प्रभावित लोगों को दूसरा मौका देना भी उतना ही जरूरी है। यही कारण है कि अब इस मुहिम में मानवीय दृष्टिकोण को भी शामिल किया गया है।

इस पहल के जरिए सरकार युवाओं को एक नई शुरुआत का मौका दे रही है, जिससे वे अपने जीवन को सही दिशा में ले जाकर समाज के लिए सकारात्मक योगदान दे सकें।

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