Haryana
Haryana में 3.5 लाख छात्रों को अब तक नहीं मिली किताबें: CM ने 15 अप्रैल तय की थी डेडलाइन, शिक्षा मंत्री ने मांगी जिलों से रिपोर्ट।
Haryana सरकार के दावों के बावजूद, अभी भी करीब 3.5 लाख छात्रों को नए सत्र की किताबें नहीं मिल पाई हैं। सरकार ने 21 अप्रैल तक सभी सरकारी स्कूलों में किताबें बांटने का लक्ष्य रखा था, लेकिन यह पूरा नहीं हो सका। इस पर शिक्षा निदेशालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्र में किताबों की स्थिति की समीक्षा करें और इसकी रिपोर्ट मुख्यालय को भेजें। अब तक कितनी किताबें बाँटी गई हैं, इसका पूरा ब्योरा मुख्यालय तक पहुंच चुका है।
इसके अनुसार राज्य में कुल 10 लाख 50 हजार 35 किताबों के सैट बच्चों को भेजे जाने थे। इसकी एवज में अभी तक तीन लाख 64 हजार 680 बच्चे ऐसे हैं, जिनको किताबें नहीं मिल पाई हैं।
CM ने 15 अप्रैल तक किताबें पहुंचने का दावा किया
यह हालात तब है जब मुख्यमंत्री नायब सैनी ने बैठक के बाद 15 अप्रैल तक प्रदेश के सर्वे विद्यार्थियों तक किताबें पहुंचाने का दावा किया था। इसके बाद शिक्षा मंत्री महिपाल डांडा दोबारा रिव्यू बैठक ली तो उन्होंने 21 अप्रैल तक राज्य के सभी स्कूलों में किताबें पहुंचाने का दावा किया था। इसके बावजूद प्रकाशक शत प्रतिशत स्कूलों में किताबें नहीं पहुंचा पाए हैं। अभी तक सरकार ने उनके विरूद्ध किसी तरह का जुर्माना नहीं किया है।

साढ़े दस लाख किताबों के सेट वितरित होने हैं
प्रदेश में कुल दस लाख 50 हजार किताबों के सेट विद्यार्थियों को दिए जाने थे। इनमें से अभी तक छह लाख 85 हजार 355 सैट वित्तरित किए गए हैं। शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने कहा कि सभी जिलों से किताबों को लेकर स्टेटस रिपोर्ट मंगवाई गई है। संबंधित एजेंसी तथा अधिकारियों की डयूटी लगाई गई है कि अगले दो से तीन दिनों में पाठ्य पुस्तके स्कूलों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाए।
यहां पढ़िए किस क्लास में कितनी पहुंची किताबें
Haryana के सरकारी स्कूलों में पहली क्लास में 1,27,408 स्टूडेंट हैं। इन्हें 9,06,896 किताबों का वितरण होना था, लेकिन 30,512 बच्चों को अभी तक किताबें नहीं मिल पाई हैं। वहीं दूसरी क्लास में 1,23,631 स्टूडेंट अभी पढ़ रहे हैं, जिनको 90,106 किताबें दी जानी थी, लेकिन 31,525 बच्चों को अभी तक किताबें नहीं मिल पाई हैं।
वहीं तीसरी कक्षा में 1,34,821 पढ़ रहे हैं, जिन्हें 92,004 फ्री किताबें मिलनी थी, लेकिन 42,817 बच्चों को निशुल्क किताबें नहीं मिली हैं। यहीं हाल चौथी क्लास का भी है। इस क्लास में 1,77,611 बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे हैं, इन्हें 1,76,783 किताबें मिलनी थी, लेकिन अभी तक 828 बच्चें ऐसे हैं, जिन्हें ये किताबें नहीं मिली हैं।
5वीं से 8वीं क्लास का भी यही हाल
Haryana के सरकारी स्कूलों में निशुल्क मिलने वाली किताबों में पांचवीं और आठवीं क्लास के बच्चों को भी नहीं मिल पाई है। इनमें पांचवीं क्लास में 2,10,257 स्टूडेंट पढ़ रहे हैं, जिन्हें 1,89,511 मिलनी थी, लेकिन 20,746 बच्चों को किताबें अभी नहीं मिल पाई हैं। वहीं छठी क्लास में 2,19,212 बच्चे अभी पढ़ रहे हैं, इन्हें 1,31,307 किताबों का वितरण होना था, लेकिन 87,905 बच्चें ऐसे हैं, जिन्हें निशुल्क किताबें नहीं मिल पाई हैं।
सातवीं क्लास में Haryana के सरकारी स्कूलों में 2,08,785 स्टूडेंट शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, इन्हें 1,23,888 किताबें मिलनी थी, लेकिन 84,897 बच्चों को ये किताबें नहीं मिल पाई हैं। आठवीं क्लास में 2,12,990 स्टूडेंट हैं, जिन्हें 1,47,540 किताबें मिलनी थी, लेकिन 65,450 बच्चों को ये किताबें नहीं मिली हैं।
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अब शादी के लिए मजबूर नहीं कर सकते माता-पिता, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अपनी पसंद से विवाह करने के अधिकार को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि कोई भी माता-पिता या रिश्तेदार किसी बालिग व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध शादी करने के लिए मजबूर नहीं कर सकते।
जस्टिस दीपक गुप्ता ने एक एमबीए छात्रा की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि शादी करना है या नहीं, कब करनी है और किससे करनी है, यह पूरी तरह से व्यक्ति का निजी निर्णय है। यह अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का हिस्सा है।
याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि वह नौकरी और उच्च शिक्षा के कारण स्वतंत्र रूप से रह रही है, लेकिन उसके माता-पिता, मामा और अन्य रिश्तेदार उस पर अपनी पसंद के व्यक्ति से विवाह करने का लगातार दबाव बना रहे हैं।
अदालत ने कहा कि विवाह किसी व्यक्ति के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण निजी निर्णय होता है और इस मामले में किसी भी प्रकार का बाहरी दबाव या जबरदस्ती स्वीकार नहीं की जा सकती। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि किसी भी व्यक्ति को उसकी इच्छा के खिलाफ विवाह के बंधन में नहीं बांधा जा सकता।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में राज्य की जिम्मेदारी है कि वह नागरिकों के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा सुनिश्चित करे।
मामले का निपटारा करते हुए अदालत ने मोहाली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) या उनके द्वारा अधिकृत अधिकारी को छात्रा की शिकायत पर विचार करने, खतरे का आकलन करने और यदि उसकी जान या स्वतंत्रता को वास्तविक खतरा हो तो तत्काल सुरक्षा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
इस फैसले को बालिग व्यक्तियों के अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने और स्वतंत्र रूप से जीवन जीने के संवैधानिक अधिकार को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।
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भीषण गर्मी के चलते हरियाणा में स्कूल बंद, छुट्टियों का ऐलान
हरियाणा के स्कूली बच्चों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान को देखते हुए हरियाणा सरकार ने गर्मियों की छुट्टियों का ऐलान कर दिया है। मुख्यमंत्री द्वारा शिक्षा विभाग के साथ बैठक करने के बाद यह फैसला लिया गया।
अब हरियाणा के सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में 25 मई से 30 जून तक गर्मियों की छुट्टियां रहेंगी। पहले ये छुट्टियां 1 जून से शुरू होनी थीं, लेकिन मौसम विभाग द्वारा जारी हीटवेव और लू के अलर्ट के बाद सरकार ने छुट्टियां एक सप्ताह पहले करने का निर्णय लिया है।
मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ सकता है तथा कई इलाकों में लू चलने की संभावना है। इसे ध्यान में रखते हुए बच्चों की सेहत और सुरक्षा के लिए यह अहम कदम उठाया गया है। शिक्षा मंत्री और शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ चर्चा के बाद मुख्यमंत्री सैनी ने छुट्टियों के फैसले को मंजूरी दी।
गौरतलब है कि इससे पहले चंडीगढ़ प्रशासन ने भी बढ़ती गर्मी को देखते हुए सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में छुट्टियों का ऐलान किया था। अब हरियाणा सरकार ने भी इसी तरह का फैसला लेते हुए विद्यार्थियों को गर्मी से राहत दी है।
वहीं अभिभावकों ने भी सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है, क्योंकि पिछले कुछ दिनों से पड़ रही तेज गर्मी ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी थी। दोपहर के समय तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण बच्चों की सेहत पर बुरा असर पड़ने का खतरा बढ़ गया था।
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हरियाणा CM नायब सैनी का दावा: बंगाल में भाजपा का एकतरफा माहौल, पंजाब में भी खिलेगा कमल
भाजपा के प्रमुख स्टार प्रचारकों में शामिल हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का मानना है कि बंगाल चुनाव में पार्टी के पक्ष में एकतरफा माहौल है। दीदी जा रही हैं। जनता ने कमल खिलाने का मन बना लिया है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में किए जा रहे विकास कार्यों की चर्चा बंगाल में हर तरफ हो रही है। केंद सरकार की कल्याणकारी नीतियों को लोग पसंद कर रहे हैं। बंगाल के बाद पंजाब का नंबर है। वहां के लोगों ने भी कमल खिलाने का मन बना लिया है।
पहली बार गुरुग्राम में हुई कैबिनेट बैठक
बुधवार को हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक की अध्यक्षता करने के लिए साइबर सिटी पहुंचे मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राजनीतिक विषयों पर किए गए सवालों के जवाब में कहा कि बंगाल का माहौल पूरी तरह बदला हुआ है। वहां की सरकार को लोगों ने पूरी तरह उखाड़ फेंकने का मन बना रखा है। जहां तक पंजाब का सवाल है तो वहां के काफी लोग उनसे मिलने आते रहते हैं।
कुछ दिन पहले भी काफी लोग मिलने पहुंचे थे। सभी वहां की सरकार से परेशान हैं। सभी चाहते हैं कि जल्द से जल्द पंजाब में कमल खिले। नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विरोध कर विपक्ष ने देश की आधी आबादी को नाराज कर दिया है। कई देशों की जितनी आबादी नहीं है, उससे अधिक महिलाएं अपने देश में है।
इसके बाद भी उन्हें उनके अधिकारों से वंचित करने का प्रयास विपक्ष ने किया है। चुनावों में देश की जनता जवाब देगी। बंगाल या पंजाब ही नहीं बल्कि जहां पर भी चुनाव होंगे वहां महिलाएं विपक्ष को माफ नहीं करेंगी।
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