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राष्ट्रपति मुर्मू कल ओडिशा के दो दिवसीय दौरे पर जाएंगी, पारादीप में ‘बोइता बंदना उत्सव’ में होंगी शामिल
नेशनल डेस्क : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ओडिशा के दो दिवसीय दौरे पर रविवार को यहां पहुंचीं। इस दौरान उनका सोमवार को जगतसिंहपुर जिले के पारादीप बंदरगाह पर ‘बोइता बंदना उत्सव’ (नौका पूजा) में शामिल होने का कार्यक्रम है। बीजू पटनायक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर राज्यपाल रघुबर दास, मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और अन्य ने उनका स्वागत किया। इसके बाद मुर्मू राजभवन रवाना हो गईं, जहां रात्रि विश्राम से पहले उनका कुछ लोगों से मिलने का कार्यक्रम है। यह राष्ट्रपति का एक सप्ताह में ओडिशा का दूसरा दौरा है।
इससे पहले उन्होंने अपने गृह जिले मयूरभंज और संबलपुर में 20 नवंबर से तीन दिन बिताए थे। राष्ट्रपति के कार्यक्रम के अनुसार, मुर्मू ‘बोइता बंदना’ (नौका पूजा) समारोह में भाग लेंगी। ओडिशा में हर साल राज्य के प्राचीन वैभवशाली समुद्री इतिहास को याद करते हुए ‘बोइता बंदना’ मनाया जाता है। वह पारादीप बंदरगाह के निर्माण के बाद उसका दौरा करने वाली पहली राष्ट्रपति होंगी। मुर्मू एक मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक पार्क का डिजिटल तरीके से उद्घाटन करेंगी और पोर्ट टाउनशिप के लिए एक नए जलाशय और जल उपचार संयंत्र और अगली पीढ़ी के जहाज यातायात प्रबंधन एवं सूचना प्रणाली की आधारशिला भी रखेंगी। पारादीप के अपने दौरे के दौरान मुर्मू मछुआरा समुदाय के सदस्यों के साथ बातचीत भी कर सकती हैं।
पारादीप पोर्ट टाउनशिप में उत्साह का माहौल है जहां सोमवार को राष्ट्रपति का स्वागत किया जाएगा। बंदरगाह के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि परंपरागत रूप से, मुख्यमंत्री बंदरगाह दिवस पर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होते हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति में, बंदरगाह अध्यक्ष भी कभी-कभी यह भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि हालांकि, इस वर्ष राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की उपस्थिति के साथ परंपरा टूट गई है। 27 नवंबर को मुर्मू सुबह 8.30 बजे राजभवन से निकलेंगी और 9.30 बजे पारादीप के गोपबंधु स्टेडियम के पास हेलीपैड पर पहुंचेंगी। वह जनता को संबोधित करेंगी, स्थानीय मछुआरों से मिलेंगी और पारादीप पोर्ट गेस्ट हाउस में दोपहर का भोजन करेंगी। अपराह्न 3.50 बजे पारादीप से प्रस्थान करके, वह 4.30 बजे भुवनेश्वर हवाई अड्डा पहुंचेगी और 4.40 बजे दिल्ली रवाना होंगी।
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CM बनते ही विजय का बड़ा ऐलान, “तमिलनाडु में 200 यूनिट मुफ्त बिजली, महिलाओं की सुरक्षा के लिए विशेष फोर्स”
तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के प्रमुख और साउथ फिल्म इंडस्ट्री के मशहूर अभिनेता सी. जोसेफ विजय ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के तुरंत बाद जनता के लिए कई बड़े ऐलान किए हैं। मुख्यमंत्री बनने के पहले ही दिन विजय ने आधिकारिक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने की घोषणा की। इसके साथ ही महिलाओं की सुरक्षा के लिए विशेष अभियान और हेल्पलाइन शुरू करने तथा राज्य में नशे की समस्या से निपटने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स बनाने का भी फैसला लिया गया है।
TVK और विजय की पहली ही विधानसभा चुनाव में मिली शानदार जीत ने तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव ला दिया है। फिल्मों के सुपरस्टार से मुख्यमंत्री बने विजय ने अपने पहले भाषण से ही जनता का दिल जीत लिया। उन्होंने कहा कि वह किसी शाही परिवार से नहीं आते, बल्कि एक साधारण परिवार से संबंध रखते हैं और गरीबी व संघर्ष को करीब से देखा है। उन्होंने कहा, “एक सहायक निर्देशक का बेटा आज मुख्यमंत्री बना है। मैं जनता का बेटा और भाई बनकर काम करूंगा।”
चुनाव से पहले TVK ने कई जनकल्याणकारी वादे किए थे। इनमें महिलाओं को हर महीने ₹2500 की आर्थिक सहायता, साल में छह मुफ्त गैस सिलेंडर, गरीब परिवारों की बेटियों के लिए 8 ग्राम सोना और एक रेशमी साड़ी देने का वादा शामिल था। इसके अलावा शिक्षा, स्वास्थ्य, महिलाओं की सुरक्षा और युवाओं के रोजगार को भी चुनावी एजेंडे का अहम हिस्सा बनाया गया था।
मुख्यमंत्री विजय ने अपने संबोधन में कहा कि उनकी सरकार सबसे पहले बुनियादी सेवाओं, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत करने पर ध्यान देगी। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि किसानों और मछुआरों के हितों की रक्षा के लिए विशेष योजनाएं लाई जाएंगी।
विजय ने डीएमके सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि पिछली सरकार राज्य का खजाना खाली कर गई है और अब नई सरकार को लगभग ₹10 लाख करोड़ के कर्ज के साथ वित्तीय वर्ष की शुरुआत करनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि चुनौतियां बड़ी हैं, लेकिन जनता के सहयोग से उनकी सरकार हर वादा पूरा करने की कोशिश करेगी।
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में TVK ने 234 में से 108 सीटें जीतकर सभी को चौंका दिया। हालांकि पार्टी बहुमत से कुछ सीटें पीछे रह गई, लेकिन कांग्रेस, VCK, CPI, CPI(M) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के समर्थन से विजय ने सरकार बना ली। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, विजय की यह जीत तमिलनाडु की पारंपरिक राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत मानी जा रही है।
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तमिलनाडु के 9वें मुख्यमंत्री बने विजय थलापति
तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के प्रमुख और साउथ फिल्म इंडस्ट्री के मशहूर अभिनेता से नेता बने सी. जोसेफ विजय ने आज तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले ली। चेन्नई के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित भव्य समारोह के दौरान राज्यपाल राजेंद्र अरलेकर ने उन्हें तमिलनाडु के नौवें मुख्यमंत्री के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। विजय ने तमिल भाषा में शपथ ली और इस दौरान बड़ी संख्या में समर्थक मौजूद रहे।
इस शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय नेता भी शामिल हुए। विजय के साथ उनकी कैबिनेट के नौ मंत्रियों ने भी पद और गोपनीयता की शपथ ली। इनमें एन आनंद, आधव अर्जुन, डॉ. के. जी. अरुणराज, के. ए. सेंगोटैयन, पी. वेंकटरमणम, आर. निर्मलकुमार, राजमोहन, डॉ. टी. के. प्रभु और सेल्वी एस. कीर्तना के नाम शामिल हैं। ये सभी TVK पार्टी के विधायक हैं। खास बात यह रही कि विजय की पहली कैबिनेट में सहयोगी दलों के किसी भी विधायक को शामिल नहीं किया गया।
इससे पहले शनिवार को विजय ने TVK, कांग्रेस, CPI, CPM, VCK और IUML के कुल 121 विधायकों के समर्थन पत्र राज्यपाल को सौंपे थे। इसके बाद राज्यपाल ने उन्हें सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया। विजय की केवल दो साल पुरानी पार्टी TVK ने अपनी पहली ही विधानसभा चुनाव में 234 में से 108 सीटें जीतकर सभी को चौंका दिया। सहयोगी दलों के समर्थन के साथ विजय के पास अब 121 विधायकों का समर्थन है, जबकि सरकार बनाने के लिए 118 सीटों की आवश्यकता थी।
विजय के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही तमिलनाडु की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो गया है। वर्ष 1967 के बाद यह पहली बार है जब राज्य में किसी गैर-द्रविड़ पार्टी का मुख्यमंत्री बना है। इससे पहले एम. भक्तवत्सलम 1963 से 1967 तक कांग्रेस सरकार के दौरान तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रहे थे।
राजनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक विजय की जीत ने तमिलनाडु की पारंपरिक द्रविड़ राजनीति को बड़ी चुनौती दी है। फिल्मी दुनिया से राजनीति में आए विजय को युवाओं और पहली बार वोट डालने वाले मतदाताओं का बड़ा समर्थन मिला, जिसने TVK को ऐतिहासिक जीत दिलाई।
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AAP पंजाब ने चुनाव से पहले वोटरों को बांटने के लिए भाजपा पर डर और डराने-धमकाने की राजनीति करने का लगाया आरोप : अमन अरोड़ा
आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने मंगलवार को जालंधर और अमृतसर में हाल ही में हुए धमाकों के लिए विपक्षी पार्टियों द्वारा पंजाब सरकार को ज़िम्मेदार ठहराने की कोशिशों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं का राजनीतिक फ़ायदे के लिए गलत इस्तेमाल किया जा रहा है और आरोप लगाया कि भाजपा का चुनाव से पहले डर और बांटने का इतिहास रहा है।
अरोड़ा ने कहा कि पूरे देश में एक रुझान देखा गया है जहां चुनाव से पहले वोटरों को बांटने के लिए कानून-व्यवस्था, धर्म या सुरक्षा से जुड़ी घटनाओं का सहारा लिया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी फ़ायदे के लिए अशांति फैलाने और समुदायों को बांटने के लिए अक्सर ऐसे तरीके अपनाए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि पंजाब चुनाव की ओर बढ़ रहा है और मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार के लोगों के पक्ष के कामों से घबराई हुई है। इसीलिए ऐसी साज़िशें रची जा रही हैं।
उन्होंने आगे कहा कि ऐसी घटनाओं की ज़िम्मेदारी केंद्र सरकार की है, क्योंकि इंटरनेशनल बॉर्डर पर बॉर्डर सिक्योरिटी फ़ोर्स (बीएसएफ) का अधिकार क्षेत्र 15 किलोमीटर से बढ़ाकर 50 किलोमीटर कर दिया गया है। यह देखते हुए कि अमृतसर और जालंधर दोनों इस दायरे में आते हैं, अरोड़ा ने कहा कि जवाबदेही केंद्रीय एजेंसियों और केंद्र में भाजपा की सरकार की है।
अरोड़ा ने आतंकवाद की यादें ताज़ा करके पंजाब को अस्थिर करने और डर पैदा करने की कोशिशों के ख़िलाफ़ भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि पंजाबी इन “नापाक इरादों” से वाकिफ़ हैं और बांटने वाली राजनीति का शिकार नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि पंजाब सांप्रदायिक सद्भाव की ज़मीन है, जहाँ सबसे बुरे समय में भी नफ़रत के बीज कभी नहीं उगे। लोगों को धर्म के आधार पर बांटने की कोशिशें यहाँ कभी कामयाब नहीं होंगी।
पंजाब की एकता और धर्मनिरपेक्षता की विरासत को दोहराते हुए, अरोड़ा ने भाजपा और केंद्र सरकार से ऐसी चालों से बचने और राज्य के सामाजिक ताने-बाने का सम्मान करने की अपील की। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि पंजाब के लोग शांति और सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने की किसी भी कोशिश के खिलाफ एकजुट रहेंगे।
पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ, डॉ. बलबीर सिंह और हरजोत सिंह बैंस ने भी हाल के धमाकों को लेकर भाजपा और केंद्र सरकार पर निशाना साधा और कहा कि इसके लिए केंद्रीय एजेंसियां ज़िम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र ने इंटरनेशनल बॉर्डर पर बीएसएफ का अधिकार क्षेत्र 15 किलोमीटर से बढ़ाकर 50 किलोमीटर कर दिया है, जिससे अमृतसर और जालंधर जैसे इलाके इसके दायरे में आ गए हैं। इसे देखते हुए, उन्होंने कहा कि सुरक्षा में किसी भी चूक की ज़िम्मेदारी सीधे केंद्र की है। मंत्रियों ने आगे कहा कि राजनीतिक फ़ायदे के लिए पंजाब की शांति को बिगाड़ने की भाजपा की कोशिशें कभी कामयाब नहीं होंगी, क्योंकि राज्य के लोग एकजुट हैं और ऐसी बांटने वाली चालों के खिलाफ़ सतर्क हैं।
पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने राजनीतिक फ़ायदे के लिए पंजाब को अस्थिर करने की भाजपा की कोशिशों की निंदा करते हुए कहा कि राज्य “कोई ट्रॉफी नहीं बल्कि एक इमोशनल पहचान है।” अमन अरोड़ा की चिंताओं का ज़िक्र करते हुए, बैंस ने कहा कि चुनाव से पहले डर, अशांति और पोलराइज़ेशन पैदा करने के ऐसे तरीके बहुत गैर-ज़िम्मेदाराना और खतरनाक हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब की विरासत भारत की आज़ादी की लड़ाई के दौरान दिए गए बड़े बलिदानों पर बनी है और इसे सिर्फ़ चुनावी महत्वाकांक्षाओं तक सीमित नहीं रखा जा सकता। भाजपा के “बंगाल की तरह पंजाब जीतने” के दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए, बैंस ने इन बातों को शर्मनाक और असंवेदनशील बताया और कहा कि पंजाबी अपने निजी राजनीतिक फ़ायदों के लिए अपनी एकता और शांति को कभी भी टूटने नहीं देंगे।
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