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प्रियंका गांधी बोलीं- भाजपा की नीति बन गई है…गरीबों से खींचना और उद्योगपतियों को सींचना
नेशनल डेस्क: कांग्रेस की नेता प्रियंका गांधी ने केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधते हुए शुक्रवार को कहा कि इनका ध्यान जनता की भलाई पर नहीं, बल्कि किसी तरह सत्ता में बने रहने पर है। प्रियंका ने कहा, ‘’इनकी नीति बन गई है गरीबों से खींचना और बड़े-बड़े उद्योगपतियों को सींचना।” उन्होंने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर उसके “उद्योगपति मित्रों” के लिए काम करने का भी आरोप लगाया।
उन्होंने यह भी कहा कि लोगों को भाजपा नेताओं से पूछना चाहिए कि वे चुनाव के समय विकास के बजाय धर्म और जाति की बात क्यों करते हैं? मोदी द्वारा राज्य में अपने नाम पर वोट मांगने पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा, “क्या वे प्रधानमंत्री का पद छोड़कर, यहां आकर मुख्यमंत्री बनने वाले हैं?” प्रियंका दौसा जिले के सिकराय में जनसभा को संबोधित कर रही थीं जहां राजस्थान कांग्रेस के लगभग सभी नेता ‘एकजुट’ नजर आए।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से लेकर सचिन पायलट तक ने ‘मतभेद’ भुलाने पर जोर दिया। प्रियंका गांधी ने राज्य में भाजपा को पूरी तरह बिखरी हुई पार्टी बताते हुए कहा कि यहां पूरी कांग्रेस पार्टी एकजुट होकर मंच पर बैठी है। कांग्रेस नेता ने कहा, “(राजस्थान में) जब इनकी (भाजपा की) सरकार थी, तो इन्होंने प्रदेश में कितनी योजनाएं शुरू कीं? अभी तक ईआरसीपी का वादा क्यों नहीं पूरा किया ? … बात साफ है, मोदी जी और भाजपा का ध्यान आपकी भलाई पर नहीं है… किस तरह से सत्ता में रहना है, किस तरह से अपने आप को मजबूत करना है… यही उनका एकमात्र लक्ष्य है। इसी पर उनका ध्यान है।”
भाजपा नेता अपने अंहकार को बढ़ाने के लिए काम कर रहे
उन्होंने कहा,’‘ इनकी नीति बन गई है। आप पिछले दस साल में देखिए …नीति बन गई है, गरीबों से खींचना और बड़े-बड़े उद्योगपतियों को सींचना।” उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा के नेता सबसे पहले अपने अहंकार, अपने मान सम्मान को बढ़ाने के लिये, अपने लिये काम कर रहे हैं और अपने उद्योगपति मित्रों के लिये काम कर रहे है।” प्रियंका ने कहा, “प्रधानमंत्री आठ आठ हजार करोड़ के हवाई जहाज खरीद रहे हैं और कहते हैं कि किसानों का कर्ज माफ करने के लिये पैसा नहीं है।” धर्म पर राजनीति को लेकर भाजपा नेताओं पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि लोगों को यह समझना होगा कि वे चुनाव के दौरान विकास से जुड़े मुद्दों के बजाय धर्म और जाति के बारे में क्यों बात करते हैं। और जाति की बात करते हैं। धर्म की रक्षा, धर्म को आगे बढ़ाने की बात से कोई हिंदुस्तानी इनकार नहीं कर सकता। यह ऐसी चीज है जिससे हम सब के जज्बात जुड़े हुए हैं। लेकिन आपको समझना पड़ेगा कि ये बात चुनाव के समय क्यों उठ रही है…और चुनाव के समय आपके विकास की बातें क्यों नहीं की जा रही है?” प्रियंका ने कहा कि भाजपा नेता यह क्यों नहीं बता रहे कि पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) क्यों लागू नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा, “जब कांग्रेस अपने शासन वाले राज्यों में एक के बाद एक ओपीएस लागू कर रही है तो इनको कौन सी दिक्कत हो रही है?” प्रियंका ने कहा कि कांग्रेस राज्यों में जन कल्याण के लिए योजनाएं चलाती है जिससे भाजपा पर ऐसी घोषणाएं करने का दबाव बनता है। लेकिन वह इन घोषणाओं पर अमल नहीं करना चाहती।
अग्निवीर भर्ती योजना को लेकर पीएम पर निशाना
सेना की अग्निवीर भर्ती योजना को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी योजना ऐसे समय में लाई गई है जब देश में बेरोजगारी दर 45 साल में सबसे अधिक है। उन्होंने कहा कि सीमा की रक्षा की चाहत लेकर युवा सेना में भर्ती की तैयारी के लिए कड़ी मेहनत करते हैं, लेकिन मोदी सरकार की इस योजना के बाद नौजवान अब कह रहे हैं कि उन्हें अब सेना भर्ती की तैयारी में कोई दिलचस्पी नहीं रही। राजस्थान भाजपा पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा, “भाजपा आपके बारे में नहीं सोच रही। वहां स्वार्थ हावी है। सब नेता खुद को मुख्यमंत्री घोषित कर रहे हैं। कहीं की ईंट कहीं का रोड़ा, भानुमति जी ने कुनबा जोड़ा… मोदी जी के अहंकार ने कुनबा तोड़ा।”
प्रियंका ने कहा, “प्रधानमंत्री जी जब यहां आते हैं तो आप उनसे पूछिए …वे कहते हैं कि आप मेरे नाम पर, मोदी जी के नाम पर वोट डालिए। उनसे पूछिए- क्या प्रधानमंत्री का पद छोड़कर, यहां आकर मुख्यमंत्री बनने वाले हैं? क्या उनको अपनी पूरी पार्टी में कोई चेहरा नहीं मिल रहा?” प्रियंका ने उपस्थित लोगों से ‘राजस्थान का रिवाज बदलने व दुबारा कांग्रेस को सत्ता में लाने’ का आह्वान करते हुए कहा कि राजस्थान में कांग्रेस पूरी तरह एकजुट है। उन्होंने कहा, “आज पूरी भाजपा बिखरी हुई है। एकजुट होने का नामोनिशान नहीं… यहां पूरी कांग्रेस पार्टी एकजुट होकर मंच पर बैठी है।” प्रियंका ने कहा, “एक तरफ गहलोत जी का अनुभव है …जिनमें आपके लिए दिन रात एक करने की इच्छा है.. आपके लिए ऐसी योजनाएं लाने का प्रयास है जिससे आपका जीवन बेहतर हो।
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पंजाब में बाजवा के ‘बैंड’ वाले बयान पर सियासत गर्म: वित्त मंत्री हरपाल चीमा का अल्टीमेटम—24 घंटे में माफी मांगें, नहीं तो कार्रवाई के लिए तैयार रहें
कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा द्वारा मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ को लेकर बैंड बजाने वाली की गई टिप्पणी पर पंजाब की सियासत गर्मा गई है। इस मामले में मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बाजवा से 24 घंटे के भीतर माफी मांगने को कहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि माफी नहीं मांगी गई तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। हरपाल सिंह चीमा ने स्पष्ट किया कि इस तरह की आपत्तिजनक टिप्पणी को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ। फाइल फोटो
फाइनेंस मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने चार प्वाइंट उठाएं है जानिए –
ईटीओ मेहनत से यहां तक पहुंचे
चीमा ने कहा कि पंजाब कांग्रेस के सीनियर नेता व विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ गलत टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि ईटीओ ने बड़ी मशक्कत कर, गरीबी से उठकर, मेहनत कर एक मिसाल कायम की है। किस तरह उन्होंने सिविल सर्विसेज का एग्जाम पास किया, कैसे अलाइड सर्विसेज में आए, ईटीओ बने और फिर उन्होंने सोचा कि समाज में और सेवा करनी है, तो नौकरी से इस्तीफा देकर आम आदमी पार्टी में आए। इसके बाद आम आदमी पार्टी की तरफ से चुने गए। सरकार ने सम्मान दिया और वह मंत्री बने।
दलित मंत्री, कांग्रेस के निशाने पर
लेकिन आज प्रताप सिंह बाजवा ने बड़े गलत शब्दों का प्रयोग किया। कांग्रेस पार्टी दलित विरोधी पार्टी है। जितने भी दलित मंत्री हैं, वे कांग्रेस के निशाने पर हैं। कभी कहते हैं कि “मैटेरियल आ गए”, तो कभी कहते हैं कि “माझे वाले आ गए”। जिस भाषा का प्रयोग दलितों के लिए किया जा रहा है, वह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।
जाति का नाम लेकर टिप्पणी की
प्रताप सिंह बाजवा और कांग्रेस पार्टी इस बयान के लिए 24 घंटे में माफी मांगें, वरना एक्शन के लिए तैयार रहें। क्योंकि यह दलित भाईचारे का बहुत बड़ा अपमान है। जो पंजाब में मेहनत कर आगे आते हैं, उन्हें हतोत्साहित करना गलत बात है। वहीं, एक जाति का नाम लेकर इस तरह आपत्तिजनक टिप्पणी करना उन्हें शोभा नहीं देता। वह तुरंत समाज के लोगों से माफी मांगें।
रैलियों में अपमानित कर रहे
अब सार्वजनिक रैलियों में दलितों का अपमान किया जा रहा है। आज पंजाब में 95 विधायक हैं, जिनमें से कई हंबल बैकग्राउंड से आते हैं, गरीब घरों से आते हैं। गरीब घरों के बच्चों को जाति के आधार पर बेइज्जत करना गलत है।

कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा रैली को संबोधित करते हुए। फाइल फोटो
अब यह पंजाब का बैंड बजा रहा है
जंडियाला गुरु में रैली के दौरान कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा ने कहा था कि यहां वाला हरभजन सिंह ईटीओ पहले बैंड बजाता रहा है। उसकी बैंड हम बजाएंगे। जितनी बड़ी लूट हरभजन सिंह ईटीओ ने यहां की है, हमारे पास एक-एक चीज की जानकारी है।
मेरे भाइयों, शायद आपको पता नहीं होगा कि बड़े स्तर पर जो महकमा उसके पास है, उसमें लूट हो रही है। अब यह बैंड बजाने वाला नहीं रह गया है। इसने तो पंजाब का बैंड बजाना शुरू कर दिया है। इसलिए इसका बैंड अच्छी तरह बजाएंगे। यह हमारी वचनबद्धता है सभी से। नोट कर लो, हम भागने वाले नहीं हैं।
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बिना डाइट मैदान में अभ्यास करने को मजबूर हरियाणा के 37000 खिलाड़ी, नायब सरकार ने एक साल से नहीं दिया डाइट भत्ता- अनुराग ढांडा
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने चंडीगढ़ प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस माध्यम से हरियाणा की बीजेपी सरकार को घेरा है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की जन विरोधी नीति और नीयत ने देश को मेडल दिलाने वाले खिलाड़ियों को आज अपने हक, सम्मान और बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसने पर मजबूर कर दिया है। उन्होंने कहा कि हरियाणा हमेशा से खेलों की धरती रहा है। ओलंपिक, कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स में देश का तिरंगा ऊंचा करने वाले अधिकतर खिलाड़ी इसी मिट्टी से निकले हैं। लेकिन आज वही खिलाड़ी पूछ रहे हैं कि क्या मेहनत और मेडल की कीमत सिर्फ चुनावी मंचों पर तालियां बटोरने तक सीमित है? क्या खिलाड़ी सिर्फ पोस्टर और भाषणों के लिए रह गए हैं
अनुराग ढांडा ने प्रेस कांफ्रेंस के दौरान एक पोस्टर जारी करके हरियाणा के सीएम नायब सिंह को ‘जस्ट चिल सीएम’ बताया है। उन्होंने सीएम नायब सिंह को ऑन रिकॉर्ड झूठ बोलने में पीएचडी तक करार दे दिया। हरियाणा के सीएम नायब सिंह ने झूठ बोलने में पीएचडी कर ली है और नई नीति ‘आगे दौड़ पीछे छोड़’ पर काम कर रहे हैं। हरियाणा में जर्जर खेल मैदानों के कारण मारे जा रहे थे और अब नायब सिंह सरकार ने खिलाड़ियों को भूखा मारने की कोशिशों में जुटी है। अनुराग ढांडा ने मुख्यमंत्री से सीधा सवाल करते हुए कहा कि हरियाणा के खिलाड़ी पूरे दिन मैदान में अपना खून पसीने बहाते हैं और उनके माता पिता के खून पसीने की कमाई से ओलिंपिक मैडल जीत कर आते हैं वो खिलाड़ी हरियाणा के जर्जर मैदानों में पोल गिरने से मारे गए। ये क्या कम था जो अब आपने 37000 खिलाड़ियों की डाइट का पैसा रोक दिया?
अनुराग ढांडा ने कहा कि खेल नर्सरी का मकसद था कि निचले स्तर के खिलाड़ी अच्छा प्रशिक्षण-डाइट लेकर राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मुकाबला कर सके लेकिन प्रदेश की 1500 खेल नर्सरियों में 37000 खिलाड़ियों को पिछले 10 महीने से डाइट का पैसा तक नहीं मिला। इन नर्सरियों में ट्रेनिंग देने वाले कोचों को 10 महीनों से तनख्वाह भी नहीं मिली। खिलाड़ी डाइट का इंतज़ाम करे या खेल की तैयारी करे?
ढांडा ने सवाल उठाते हुए कहा कि नायब सरकार साल में 2 महीने के लिए नर्सरियों को बंद कर रही है। सीएम नायब सिंह बताएं कि क्या कोई खिलाड़ी 2 महीने की छुट्टी काट कर इंटरनेशनल मैडल की तैयारी करता है? रोज़ सुबह जल्दी उठकर घंटों मेहनत करने वाले खिलाड़ी को सरकार 2 महीने छुट्टी लेने को कह रही है। ताकि अब 2 महीने और ना खिलाड़ियों की डाइट का पैसा देना पड़े और न कोचों को उनकी तनख्वाह। खिलाड़ियों को खेल से दूर ले जा कर नायब सरकार उन्हें नशे के चंगुल में धकेल रही है। इसके अलावा जहां पुरानी खेल नर्सरियों के खिलाड़ियों को डाइट नहीं मिल रही वहां नायब सरकार नई खेल नर्सरियां खोलने की बात कह रही है।
सरकार ने 75000 बुज़ुर्गों की पेंशन की बंद : अनुराग ढांडा
- अनुराग ढांडा ने बुढ़ापा पेंशन को लेकर भी सीएम नायब सिंह को जमकर घेरते हुए कहा कि पिछले कल मीडिया में सीएम बयान देते हैं कि किसी की पेंशन नहीं कटी जबकि हरियाणा के 75000 से अधिक बुज़ुर्गों की पेंशन काट दी गई है। और पेंशन न दिए जाने के बेतुके तर्क दिए जा रहे हैं। किसी किसान के खाते में फसल का पैसा डेढ़ या दो लाख आया तो उसे कहा जा रहा है कि 3 लाख की कमाई है तुम्हें पेंशन नहीं मिल सकती। इसका मतलब नायब सरकार 3 लाख की फसल बेचने वाले किसान को संपन्न मान रही है। ढांडा ने कहा कि किसान की खेती से कोई कमाई नहीं होती बल्कि किसान का खर्च इतना होता है कि पूरे परिवार का घर चलाना भी मुश्किल होता है। कहीं परिवार पहचान पत्र में पूरे परिवार की कमाई का हवाला देकर पेंशन बंद की जा रही है तो कहीं नाम, सरनेम, उम्र मिसमैच के नाम पर। अधिकारियों और पोर्टल की गलतियों का ठीकरा बुज़ुर्गों के सिर पर फोड़ा जा रहा है। इसके अलावा कई जगहों पर पूरे परिवार की आय को जोड़कर भी देखा जा रहा है जबकि बुज़ुर्ग की आय का परिवार की आय से कोई लेना देना नहीं है।
- अनुराग ढांडा बोले कि बुज़ुर्ग को पेंशन देने का मकसद ही जीवन के अंतिम वर्षों को स्वाभिमान के साथ जीने का मौका देना है और नायब सिंह कहते हैं कि इनका परिवार बहुत कमाता है इसलिए पेंशन नहीं मिलेगी। पूरे हरियाणा में सैंकड़ों बुर्ज़ुर्गों और महिलाओं की लाइनें सरकारी दफ्तरों में लगी पड़ी है जो अपनी पेंशन कट जाने की वजह पूछते हैं। दफ्तर के अधिकारियों के पास उनकी पेंशन कट जाने का कोई वाजिब जवाब नहीं है। ढांडा ने कहा कि नायब सिंह ऑन रिकॉर्ड झूठ बोलने में पीएचडी हो गए हैं?
- अनुराग ढांडा ने सीएम नायब सैनी और भाजपा सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि इससे पहले कि लोग सड़कों पर उतर कर उनके पुतले जलाये। बेहतर होगा कि सरकार लोगों की मूलभूत समस्याओ पर ध्यान देकर उनका काम करें। सीएम नायब सिंह खिलाड़ियों की डाइट का करीब 10 करोड़ रूपए जल्दी जारी करे। किसानों की फसल की बिक्री को आय मांनना बंद करके सभी बुज़ुर्गों की बुढ़ापा पेंशन को जल्द से जल्द बहाल की जाए।
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केंद्रीय बजट पर आई आम आदमी पार्टी पंजाब की प्रतिक्रिया, जानिए क्या बोले CM भगवंत मान
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्रीय बजट पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि यह बजट एक बार फिर पंजाब के साथ नाइंसाफ़ी का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि बजट में न तो किसानों के लिए एमएसपी की कोई कानूनी गारंटी है, न युवाओं के लिए रोज़गार का भरोसा और न ही उद्योग या टैक्स प्रणाली को कोई राहत दी गई है।
सीएम मान ने कहा कि केंद्र सरकार ने पंजाब की आर्थिक स्थिति को मज़बूत करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इससे साफ़ है कि राज्य और यहां के लोगों की जरूरतों को एक बार फिर नज़रअंदाज़ किया गया है।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि केंद्र की लगातार अनदेखी के बावजूद आम आदमी पार्टी सरकार और पंजाब के लोग मिलकर अपने दम पर राज्य को आर्थिक रूप से मज़बूत बनाएंगे।
केंद्रीय बजट ने पंजाब-हरियाणा के किसानों को फिर दिया धोखा: हरपाल चीमा
पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि केंद्रीय बजट ने एक बार फिर पंजाब और हरियाणा के किसानों की जायज़ चिंताओं को अनसुना किया है। उन्होंने बताया कि न तो एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड में कोई बढ़ोतरी की गई है और न ही मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत करने के लिए कोई मदद दी गई है।
चीमा ने कहा कि बजट में नारियल, काजू, चंदन और सूखे मेवों जैसी फसलों का ज़िक्र तो है, लेकिन उत्तर भारत के किसानों के लिए कुछ भी नहीं, जो गेहूं-धान जैसी फसलों पर निर्भर हैं। यह साफ़ तौर पर अनाज उत्पादक राज्यों के प्रति केंद्र की उदासीनता को दिखाता है।
केंद्रीय बजट ने पंजाब के अन्नदाता से मुंह मोड़ा: कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुडियां
पंजाब के कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुडियां ने बजट को “बड़ी निराशा” बताते हुए कहा कि इसमें न तो एमएसपी का कोई स्पष्ट रोडमैप है, न फसल विविधीकरण के लिए कोई सहायता और न ही बाढ़ प्रभावित किसानों के लिए कोई राहत पैकेज।
उन्होंने कहा कि पंजाब देश का अन्न भंडार भरता है, फिर भी किसानों की आय सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार गंभीर नहीं दिखती।
केंद्रीय बजट लोगों के लिए सिर्फ निराशा लेकर आया: अमन अरोड़ा
मंत्री अमन अरोड़ा ने कहा कि भाजपा ने एक बार फिर पंजाब के साथ सौतेली माँ जैसा व्यवहार किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों, युवाओं, महिलाओं और आम नागरिकों के लिए बजट में कोई ठोस घोषणा नहीं की गई।
उन्होंने कहा कि आज़ादी से लेकर देश को भोजन उपलब्ध कराने तक पंजाब का योगदान ऐतिहासिक रहा है, लेकिन इसके बावजूद राज्य के लिए कोई बड़ा प्रोजेक्ट नहीं दिया गया।
केंद्रीय बजट पंजाब के साथ खुला भेदभाव दिखाता है: कुलदीप सिंह धालीवाल
आप के मुख्य प्रवक्ता और विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल ने कहा कि बजट में न एमएसपी की गारंटी है, न रोजगार और न ही पंजाब के लिए कोई बड़ा विकास प्रोजेक्ट।
उन्होंने कहा कि देश के लिए सबसे ज़्यादा कुर्बानियां देने वाले पंजाब को बार-बार उसके हक से वंचित किया जा रहा है।
किसानों के अधिकारों से मुंह मोड़ता बजट: लालजीत सिंह भुल्लर
मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर ने कहा कि केंद्रीय बजट में एमएसपी, फसल विविधीकरण और प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए कोई गंभीर प्रावधान नहीं है।
उन्होंने कहा कि यह बजट केंद्र सरकार की किसान विरोधी सोच को उजागर करता है।
बजट में पंजाब के किसानों के लिए कोई विज़न नहीं: लाल चंद कटारुचक
मंत्री लाल चंद कटारुचक ने कहा कि जिस राज्य ने देश के अन्न भंडार भरे हैं, उसे बजट में कोई दिशा या ठोस सहायता नहीं दी गई।
उन्होंने कहा कि यह बजट केंद्र की पंजाब-विरोधी मानसिकता को साफ़ दर्शाता है।
बड़े दावे, लेकिन ज़मीनी हकीकत में खोखला बजट: नील गर्ग
आप के वरिष्ठ नेता नील गर्ग ने बजट की तुलना पंजाबी कहावत “पटिया पहाड़, निकलेआ चूहा” से करते हुए कहा कि बड़ी घोषणाओं के बावजूद पंजाब, किसान, युवा और आम आदमी के लिए कोई राहत नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह बजट बड़े कॉर्पोरेट घरानों के पक्ष में है, जबकि देश का पेट भरने वाले किसान और आम लोग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
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