Chandigarh
कांग्रेसी भाग रहे चौधराहट की दौड़ में, भाजपाई कर रहे पार्टी को मजबूत
चंडीगढ़ : प्रदेश में 1 वर्ष के भीतर ही तीन चुनाव होने हैं। लोकसभा विधानसभा और शहरी निकाय चुनाव। जिसे लेकर सभी राजनीतिक दल अपने-अपने प्रयासों में लगे हुए हैं। राजनीतिक समीकरणों में उतार-चढ़ाव भी लगातार देखा जा रहा है। इसी कड़ी में लगभग तीन माह पहले जो समीकरण पूरी तरह से कांग्रेस के पक्ष में खड़े नजर आ रहे थे, वह फिर से भाजपा को जीत दिलवाने पर मोहर लगा रहे हैं। प्रदेश में जहां लगातार भाजपा संगठन तथा सरकार सक्रिय हो चुकी है, वहीं पिछले लंबे समय से सक्रिय कांग्रेस पार्टी की गतिविधियों पर रुकावट सी नजर आ रही है। ऐसा लगने लगा है कि खुद कांग्रेस पार्टी के नेता ही नहीं चाहते कि कांग्रेस सत्ता में लौटे। क्योंकि आपसी फूट में इन सभी नेताओं को डर है कि कहीं उनसे बड़ा चौधरी (नेता) किसी दूसरे को ना घोषित कर दिया जाए। इसलिए सभी इस इंतजार में दिख रहे हैं कि पार्टी प्रदेश में मुख्यमंत्री के रूप में किसे अपना चेहरा घोषणा करेगी। अगर किसी अन्य की घोषणा हुई तो फिर ऐसी भी संभावनाएं हैं कि इन नेताओं का रुख पार्टी हित की बजाय पार्टी के विरोध में भी नजर आ सकता है।
हर वार्ड, गली, मोहल्ले में मौजूद हुड्डा के समर्थक
दरअसल भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने प्रदेश की 10 साल तक मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभाली। जिस कारण से पूरे प्रदेश में कोई ऐसा वार्ड, मोहल्ला, गली नहीं जहां भूपेंद्र सिंह हुड्डा के समर्थक नहीं हैं। प्रदेश के अधिकतर कांग्रेसी नेता भी भूपेंद्र सिंह हुड्डा के पाले में खड़े नजर आते हैं। अन्य वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं की पकड़ अपने हलके या जिले में बेशक मजबूत हो सकती है, लेकिन कांग्रेस पार्टी में आज कोई भी ऐसा नेता मौजूद नहीं जो भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बराबर वजूद रखता हो। 2004 के विधानसभा चुनाव में हालांकि प्रदेश की जनता ने भजनलाल के चेहरे को देखते हुए कांग्रेस को दिल खोलकर वोट दिए थे। 90 में से 67 सीट कांग्रेस ने जीतकर एक बड़ा कीर्तिमान स्थापित किया था। लेकिन पार्टी आलाकमान ने प्रदेश की बागडोर भजनलाल की बजाए चौधरी भूपेंद्र सिंह हुड्डा को सौंप डाली। हालांकि प्रदेश की जनता कांग्रेस के इस फैसले से काफी हताश-निराश और नाराज भी दिखी।
कांग्रेस के लिए हुड्डा को साइड लाइन करना महंगा साबित हो सकता है
एक कुशल राजनीतिज्ञ एवं सटीक कूटनीति के चलते भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने काफी कम समय में प्रदेश के लगभग सभी नेताओं को एक माला में पिरोने का काम किया। विपक्ष में काफी मजबूत स्थिति वाली इनेलो पार्टी के अधिकतर ताकतवर नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी में भी खूब आए। हुड्डा ने पार्टी के लिए खूब मेहनत भी की। जिसके फलस्वरुप 2009 में भी कांग्रेस ने हुड्डा के नेतृत्व में चुनाव जीतकर सरकार बनाई। पिछले 9 सालों से सत्ता से कांग्रेस पार्टी दूर है। भूपेंद्र सिंह हुड्डा फिलहाल पिछले लगभग 4 सालों से नेता प्रतिपक्ष हैं। इस दौरान हुडा टीम ने खूब मेहनत की। जिसका फल भूपेंद्र सिंह हुड्डा को मिला भी। उनके पुत्र दीपेंद्र हुड्डा को राज्यसभा में भेजा गया और उनकी इच्छानुसार चौ. उदयभान को संगठन में प्रदेश अध्यक्ष के पद से नवाजा गया। लेकिन कुछ समय से हुड्डा को साइडलाइन करने की नीति कांग्रेस को लगातार कमजोर कर रही है। हालांकि हुड्डा के विरोध में पार्टी के नेता कुमारी शैलजा, रणदीप सुरजेवाला और किरण चौधरी काफी मजबूत हुए हैं। जिसका सीधा असर पार्टी पर पढ़ने लगा है। 3 महीने पहले जो कांग्रेस प्रदेश की जनता की जुबान, दिल और दिमाग पर राज कर रही थी, आज वही जगह फिर से भारतीय जनता पार्टी की बनती नजर आ रही है।
नायब सिंह सैनी भाजपा के लिए साबित हो सकते हैं तुरुप के इक्के
भाजपा द्वारा हाल ही में प्रदेश अध्यक्ष के रूप में नायब सिंह सैनी को चुनना भी पार्टी के लिए काफी लाभकारी नजर आने लगा है। ऐसा लगने लगा है कि पार्टी ने सही समय पर तूरूप का इक्का निकाल कर सबको चित करने का काम किया हो। लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी ने प्रदेश संगठन की कमान ओमप्रकाश धनखड़ को दे रखी थी। हालांकि धनखड़ पार्टी के प्रति पूर्णतः समर्पित सिपेसलार हैं। लंबे अनुभव वाले धनखड़ के समय में भारतीय जनता पार्टी ने कई कामयाब कार्यक्रमों का आयोजन किए। बावजूद इसके जाट चेहरा होने की वजह से भाजपा को बहुत कम पसंद करने वाले जाट वर्ग को वह पार्टी से बहुत अधिक जोड़ने में नाकामयाब साबित हुए हैं। जाट होने की वजह से गैर जाट भी उनसे अधिक नहीं जुड़ पाए। यह चुनावी वर्ष है और छोटी सी पार्टी की चूक एक बड़े नुकसान का कारण बन सकती थी।
जीटी बेल्ट को तवज्जो देकर एक मजबूत किलेबंदी की भाजपा ने
भाजपा को दो बार सत्ता में लाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण साबित होने वाली जीटी रोड बेल्ट पर लगातार कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और इनेलो की सक्रियता बढ़ रही थी। जीटी बेल्ट लंबे समय तक कांग्रेस पार्टी की पेट वोटर रही है। इस बेल्ट पर बैकवर्ड और पंजाबी भाषी वोटरों की एक बहुत बड़ी संख्या मौजूद है जो कांग्रेस को जीत दिलवाने में हमेशा कारगर साबित हुई। 2014 के चुनाव में चल रही लहर के चलते मोदी के नाम पर हरियाणा में भाजपा को जीटी रोड बेल्ट ने उम्मीद से अधिक सीटें जितवाई थी। 2019 में भी 40 सीट जीतने वाली भाजपा की लाज जीटी रोड बेल्ट ने ही बचाई। अब इसमें सेंधमारी का डर भाजपा को लगातार शायद सता रहा था। इसी कारण से नायब सिंह सैनी जो जीटी रोड पर मौजूद कुरुक्षेत्र से संबंध रखते हैं, उन्हें संगठन की जिम्मेदारी सौंप दी गयी। जीटी रोड बेल्ट तो उनकी राजनीतिक कर्मभूमि है ही, साथ ही उनके ओबीसी वर्ग के होने के कारण पिछड़े व अति पिछड़े वर्ग के लोग भी भाजपा के इस फैसले को अपने सम्मान के रूप में देखेंगे। जिसका बहुत बड़ा लाभ भाजपा को होना लगभग तय माना जा रहा है। कुरुक्षेत्र के साथ लगते जिले अंबाला में प्रदेश के गृह, स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज एक कद्दावर नेता है। जिन्हें अजय कहा जाए तो गलत नहीं होगा। न केवल अपने विधानसभा क्षेत्र या जिला बल्कि आसपास के कई जिलों या यूं कहें कि पूरे हरियाणा में ही उनका बहुत बड़ा अपना निजी प्रभाव है। वहीं जीटी रोड पर मौजूद करनाल से खुद मुख्यमंत्री चुनाव लड़ते हैं यानि जीटी रोड बेल्ट को अधिक से अधिक तवज्जो देकर एक मजबूत किलेबंदी की तैयारी भाजपा ने की है।
भाजपा ने साबित किया कि वह दलित-पिछड़ों की सबसे हितेषी पार्टी
ओबीसी वर्ग से नायब सिंह सैनी आरएसएस की कार्य शैली में लंबे समय तक सक्रिय रहे और फिर संगठन के भी विभिन्न पदों पर काम करने के बाद उन्हें पार्टी ने पहले विधायक, फिर सांसद और अब प्रदेश संगठन के मुखिया के रूप में सम्मान बख्शा है। कार्य करने का उनके पास लंबा अनुभव है। बेहद मधुरभाषी तथा मजबूत बुद्धिमत्ता के मालिक सैनी का प्रभाव अपने समाज के साथ-साथ ओबीसी व दलित वर्ग में काफी मजबूत है। प्रदेश में कई बार ओबीसी वर्ग को बरगलाने के लिए कई नेताओं द्वारा तमाम तरह की कोशिशें की जाती रही है। मंचों से अपने को ओबीसी वर्ग के सबसे बड़े हितेषी के रूप में प्रस्तुत किया जाता रहा है। भारतीय जनता पार्टी द्वारा सैनी को मैदान में उतारना एक गेम चेंजर के रूप में दिखने लगा है। ओबीसी वर्ग के कथित हितैषी ऐसे नेताओं के मुंह बंद करने का काम भाजपा के इस फैसले ने किया है। आज नायब सिंह सैनी के प्रदेश में चल रहे दौरों में छोटी-छोटी जनसभाओं-कार्यक्रमों में भारी भीड़ का जमावड़ा तथा उनके स्वागत रूपी भावों को देखकर यह साफ नजर आने लगा है कि भाजपा को इस फैसले का एक बहुत बड़ा लाभ हो सकता है। 2014 से पहले जो ओबीसी-बीसी तथा पंजाबी वर्ग पूरी तरह से कांग्रेस के पक्ष में खड़ा नजर आता रहा है, जिनके दम पर कांग्रेस सदा राज करती रही है, आज लगभग इस पूरे वर्ग को भाजपा ने अपने पक्ष में खड़ा कर लिया है। नायब सिंह सैनी को संगठन की जिम्मेदारी सौंपने का लाभ भाजपा को पूरे प्रदेश में होना लगभग तय है।
तुलनात्मक अध्ययन करने वाली जनता आज भाजपा के प्रति रखती है झुकाव
वहीं दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने लगातार सरकारी तिजोरी खोलकर हर वर्ग को रिझाने की कोशिश शुरू कर दी है। चाहे सरकारी कर्मचारियों की बात करें या फिर व्यापारियों, मजदूरों की, हर व्यक्ति के लिए दिल खोलकर पैसा प्रदेश के मुख्यमंत्री लुटा रहे हैं। कुछ समय पहले राशन कार्ड बंद होने से नाराज जनता को सरकार द्वारा जहां बड़ी संख्या में नए राशन कार्ड बनाकर राहत प्रदान की गई, वहीं हर इन राशन कार्डों पर सरसों के तेल इत्यादि मिलने से प्रदेश की गरीब जनता सरकार की वाहवाही करती नजर आ रही है। लगातार प्रदेश के मुख्यमंत्री जन संवाद कार्यक्रम के तहत लोगों की जहां समस्याएं स्वयं दूर कर रहे हैं, वहीं उनके विधायक, सांसद भी मैदान में पूरी सक्रियता से उतरे हुए हैं। प्रदेश की जनता जो कुछ समय पहले तुलनात्मक अध्ययन करके वोट देने की बात कह रही थी या फिर यूं कहें कि जिसका मन 50-50 फ़ीसदी कांग्रेस और भाजपा से जुड़ा हुआ था, वह अब भाजपा के प्रति कुछ अधिक झुकाव वाला नजर आने लगा है।
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पंजाबी अभिनेता जसविंदर सिंह भल्ला को श्रद्धांजलि, मोहाली में उनके नाम पर बना चौक
मोहाली शहर में दिवंगत पंजाबी अभिनेता डॉ. जसविंदर सिंह भल्ला को एक अनोखी श्रद्धांजलि दी गई है। शहर के एक प्रमुख जंक्शन का नाम उनके नाम पर रखा गया है। मोहाली में Fortis Hospital के पास स्थित इस चौक का औपचारिक उद्घाटन उनके जन्मदिन के मौके पर किया गया।
यह पहल पंजाबी सिनेमा और कॉमेडी जगत में डॉ. भल्ला के योगदान को सम्मान देने के उद्देश्य से की गई है। इस कार्यक्रम में उनके बेटे पुखराज भल्ला ने मुख्य भूमिका निभाई, जबकि स्थानीय विधायक कुलवंत सिंह समेत पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कई कलाकार और गणमान्य लोग मौजूद रहे। इस दौरान बड़ी संख्या में प्रशंसकों ने भी पहुंचकर अपने प्रिय कलाकार को श्रद्धांजलि दी।
गौरतलब है कि इस संबंध में फैसला मोहाली नगर निगम की हाउस मीटिंग में लिया गया था। प्रस्ताव के अनुसार फोर्टिस अस्पताल और पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड कार्यालय के पास स्थित इस सर्कल का नाम डॉ. जसविंदर सिंह भल्ला के नाम पर रखने का निर्णय सर्वसम्मति से पारित किया गया था, जिसे अब लागू कर दिया गया है।
समारोह के दौरान वक्ताओं ने डॉ. भल्ला के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी अनोखी अदाकारी, सरल हास्य और तीखे व्यंग्य के जरिए पंजाबी मनोरंजन जगत में खास पहचान बनाई। उनकी कॉमिक टाइमिंग और अलग अंदाज ने हर वर्ग के दर्शकों को प्रभावित किया और उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बना दिया।
डॉ. भल्ला का काम सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं था, बल्कि उनके संवाद और किरदार सामाजिक मुद्दों को भी छूते थे। उनकी फिल्मों और प्रस्तुतियों ने पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री को नई दिशा दी और उन्हें एक अलग मुकाम दिलाया।
इस मौके पर परिवार के सदस्यों ने प्रशासन और लोगों का धन्यवाद करते हुए कहा कि यह सम्मान उनके लिए बेहद भावुक करने वाला है और यह साबित करता है कि डॉ. जसविंदर सिंह भल्ला आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं।
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Punjab में बदलेगा मौसम का मिजाज: बारिश, आंधी और तेज हवाओं का अलर्ट जारी
पंजाब में इन दिनों भीषण गर्मी और बढ़ते तापमान से लोग परेशान हैं, लेकिन अब मौसम में बदलाव के संकेत मिलने लगे हैं। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में राज्य में मौसम करवट ले सकता है, जिससे लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिल सकती है।
हालांकि रविवार को तापमान में हल्की 0.4 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई, लेकिन यह अभी भी सामान्य से करीब 3.3 डिग्री अधिक बना हुआ है। गर्मी का असर जारी है, लेकिन अब राहत की उम्मीद जताई जा रही है।
मौसम विभाग ने 27 अप्रैल से 30 अप्रैल तक चार दिनों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। इस दौरान तेज हवाएं, आंधी, गरज-चमक और बारिश की संभावना है।
27 अप्रैल को गुरदासपुर, होशियारपुर, पठानकोट, मुक्तसर, फाजिल्का, बठिंडा और मानसा जिलों में आंधी और बारिश के साथ तेज हवाएं चलने की संभावना है। वहीं फिरोजपुर, फरीदकोट, मोगा, लुधियाना, बरनाला, संगरूर, फतेहगढ़ साहिब, पटियाला और मोहाली में लू चलने का अनुमान है।
मौसम विभाग के मुताबिक, इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। 28 अप्रैल को पूरे राज्य में आंधी का असर देखने को मिल सकता है, जबकि 29 अप्रैल से मौसम में धीरे-धीरे बदलाव शुरू होगा। 30 अप्रैल को कुछ इलाकों में बारिश होने से तापमान में गिरावट आ सकती है।
इसके अलावा 27 अप्रैल से 2 मई तक कई हिस्सों में हल्की बारिश की संभावना जताई गई है। अगले दो दिन तापमान स्थिर रहने के बाद इसमें 2 से 4 डिग्री तक गिरावट आ सकती है। 26 और 27 अप्रैल को कुछ इलाकों में हीटवेव का असर भी जारी रह सकता है।
कुल मिलाकर, जहां एक तरफ लोगों को गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है, वहीं तेज हवाओं और आंधी-तूफान को देखते हुए सतर्क रहने की जरूरत भी है।
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विवादों में घिरा चंडीगढ़ का Elante Mall , फूड कोर्ट के खाने में मिली सुंडी
चंडीगढ़ के प्रसिद्ध एलांते मॉल के फूड कोर्ट में खाने की गुणवत्ता को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। सेक्टर 40-ए के रहने वाले एक व्यक्ति ने दावा किया है कि उन्हें परोसे गए खाने में सुंडी मिली, जिससे वह हैरान और नाराज हो गए।
बताया जा रहा है कि वह अपने छोटे बेटे के साथ फूड कोर्ट के एक कैफे में खाना खाने गए थे, जहां उन्होंने “चाइनीज वेज सुप्रीम सिज़लर” ऑर्डर किया। खाना खाते समय अचानक उनकी नजर डिश में मौजूद सुंडी पर पड़ी। खास बात यह रही कि उनका बेटा भी वही खाना खाने वाला था, जिससे स्थिति और अधिक चिंताजनक हो गई।
वीडियो बनाकर दर्ज कराई शिकायत
घटना के तुरंत बाद ग्राहक ने खाना खाना बंद कर दिया और पूरी घटना की वीडियो बनानी शुरू कर दी। इसके बाद उन्होंने फूड कोर्ट के इंचार्ज को मौके पर बुलाकर शिकायत दर्ज कराई। इंचार्ज ने भी माना कि खाने में कीड़ा मौजूद था।
इसके बाद कैफे के इंचार्ज को भी बुलाया गया, जिसने जांच के बाद ग्राहक से माफी मांगी। हालांकि, ग्राहक सिर्फ माफी से संतुष्ट नहीं हुआ और उसने मामले को आगे बढ़ाने का फैसला किया।
खाद्य विभाग को भेजे सबूत
ग्राहक ने घटना से जुड़ी वीडियो और तस्वीरें खाद्य सुरक्षा विभाग को भेज दी हैं और सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि इस तरह की लापरवाही लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
कैफे की सफाई
दूसरी ओर, कैफे के प्रतिनिधि ने इसे एक अलग-थलग घटना बताते हुए कहा कि इससे पहले ऐसा मामला सामने नहीं आया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
पीड़ित ग्राहक ने प्रशासन से अपील की है कि मामले की गंभीरता से जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी अन्य ग्राहक को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।
यह घटना एक बार फिर खाने-पीने के स्थानों में साफ-सफाई और गुणवत्ता को लेकर बड़े सवाल खड़े करती है और संबंधित विभागों के लिए चेतावनी के रूप में सामने आई है।
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