Chandigarh
अशोक तंवर ने सरकार को घेरा- बिजली मंत्री के हरियाणा में 24 घंटे बिजली देने का बयान झूठ का पुलिंदा
चंडीगढ़ (चंद्र शेखर धरणी) : आम आदमी पार्टी के चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर ने बिजली मंत्री रणजीत चौटाला के बयान हरियाणा के 5700 से ज्यादा गांव में 24 घंटे में बिजली मिल रही है को लेकर खट्टर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि बिजली मंत्री अपने खुद के गांव में तो 24 घंटे बिजली दे नहीं सकते पूरे हरियाणा को क्या देंगे। उन्होंने कहा कि बिजली मंत्री के खुद के गांव में 8 से 10 घंटे बिजली के कट लग रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूरा हरियाणा बिजली संकट से जूझ रहा है और महंगे बिजली बिलों से से हर हरियाणा वासी त्रस्त है। उन्होंने कहा कि कैथल में एक बुजुर्ग जो पेंशन से गुजारा करते हैं। एक कमरे का टूटा हुआ मकान है और मकान में एक पंख और एक बल्ब है। उसका बिजली बिल 4 लाख से ज्यादा का आया है। यदि आम आदमी पार्टी की सरकार होती तो बिजली बिल ही नहीं आता।
उन्होंने कहा कि गरीब लोगों के लिए बिजली का बिल भरना किस आफत से कम नहीं है। आम लोगों का 50 हजार से एक लाख रुपए तक का बिल आ रहा है। उन्होंने कहा कि दिल्ली और पंजाब में 24 घंटे बिजली मुफ्त मिल रही है जबकि हरियाणा में महंगी बिजली मिल रही है। लोग आम आदमी पार्टी के साथ मिलकर बिजली के बिलों जला रहे हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब में आम आदमी पार्टी ने सरकार बनते ही बकाया बिजली बिलों को माफ कर दिया था। जब पंजाब और दिल्ली में बिजली के बिल माफ हो सकते हैं तो हरियाणा में क्यों नहीं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता पंजाब और दिल्ली की तर्ज पर प्रदेश से गठबंधन सरकार का जल्द सफाया करेगी।
उन्होंने कहा कि गठबंधन सरकार पहले महंगी बिजली और अब स्मार्ट मीटर के नाम पर लोगों को चूना लगा रही है। हरियाणा सरकार के भ्रष्टाचार और स्मार्ट मीटर में जबरदस्त प्रतिस्पर्धा चल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर का उपभोक्ताओं को कोई फायदा नहीं हो रहा है। स्मार्ट मीटर लगने के बाद अब लोगों के कई गुना बिजली के बिल आ रहे हैं। स्मार्ट मीटर से प्रदेश के गरीब और जरूरतमंद लोगों का शोषण हो रहा है। हरियाणा में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के तुरंत बाद पंजाब की तर्ज पर बकाया बिजली के बिल माफ किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी प्रदेश के लोगों को गठबंधन सरकार के बिजली बिलों से मुक्ति दिलाएगी। आज हरियाणा के सभी जिलों में बिजली पूरी तरफ से गुल और बिजली के बिल फुल हैं। प्रदेश की गठबंधन सरकार बिजली उत्पादन के झूठे आंकड़े पेश कर रही है। पूरे प्रदेश में बिजली उपभोक्ता बिजली की कमी से जूझ रहे हैं। गठबंधन सरकार पिछले साढ़े 8 सालों में प्रदेश में एक भी बिजली का संयंत्र नया नहीं लगा पाई। फतेहाबाद के कुम्हारिया में परमाणु बिजली संयंत्र का काम भी अधर में लटका पड़ा है, और सिरसा में 62 हजार से अधिक बिजली उपभोक्ता हैं व उसके अनुपात में स्टाफ बेहद कम है। सिरसा में बिजली मंत्री रणजीत चौटाला और उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला का गृह जिला होने के बावजूद भी बिजली कट का बुरा हाल है।
उन्होंने ने कहा कि पंजाब में 300 यूनिट बिजली मुफ्त, ट्यूबवेल की बिजली 24 घंटे दी जा रही है और सारे बकाया बिल माफ कर दिए हैं। दिल्ली में 80 प्रतिशत और पंजाब में 90 प्रतिशत घरों का बिजली बिल जीरो आता है। जबकि हरियाणा में 300 यूनिट का 1700 और 600 यूनिट का 3700 रुपये बिजली बिल भरना पड़ता है। इसके अलावा पंजाब में किसानों का 15 लाख ट्यूबवेलों को बिजली बिल जीरो आता है। बिजली बिलों को माफ करने का जादू सिर्फ अरविंद केजरीवाल के पास है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी वादे नहीं करती गारंटी देती है।
आम आदमी पार्टी पूरे देश में एक विकल्प बनकर उभर रही है। अरविंद केजरीवाल ने पूरे देश की राजनीति का माहौल बदला। उन्होंने कहा कि झाड़ू से ही भ्रष्टाचार की सफाई हो सकती है। उन्होंने कहा कि आज हरियाणा की जनता आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल की तरफ आशाओं भरी निगाहों से देख रही है। 2024 में पंजाब और दिल्ली के बाद हरियाणा में भी भारी बहुमत से आम आदमी पार्टी की सरकार बनेगी।
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पंजाब में Universal Healthcare Model बना मिसाल, हर परिवार को बिना शर्त 10 लाख तक कैशलेस इलाज की सुविधा!
पंजाब सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए ऐसा मॉडल पेश किया है, जो देश की पारंपरिक योजनाओं से अलग और ज्यादा व्यापक माना जा रहा है। मुख्यमंत्री Bhagwant Mann के नेतृत्व में शुरू की गई मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत अब राज्य के हर परिवार को बिना किसी शर्त के 10 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। बढ़ते इलाज के खर्च के बीच यह योजना लाखों परिवारों के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आई है।
जहां केंद्र सरकार की Ayushman Bharat योजना सीमित पात्रता और 5 लाख रुपये तक के कवर तक ही सीमित है, वहीं पंजाब का यह मॉडल हर निवासी को कवर करता है, चाहे उसकी आय कुछ भी हो। यही कारण है कि इसे Universal Healthcare Model के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें इलाज का अधिकार किसी सूची या शर्त पर नहीं बल्कि जरूरत के आधार पर तय होता है।
वित्तीय दृष्टि से भी पंजाब का यह मॉडल काफी मजबूत माना जा रहा है। केंद्र सरकार जहां 140 करोड़ आबादी के लिए 9,500 करोड़ रुपये का बजट रखती है, वहीं पंजाब सरकार करीब 3 करोड़ लोगों के लिए 2,000 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। इस हिसाब से प्रति व्यक्ति निवेश कई गुना ज्यादा है, जो राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को साफ तौर पर दर्शाता है।
इस योजना के तहत करीब 65 लाख परिवारों को लाभ मिलने की उम्मीद है। मरीज 2,300 से अधिक इलाज पैकेजों के जरिए दिल की बीमारी, कैंसर, किडनी से जुड़ी समस्याएं, एक्सीडेंट केस और अन्य गंभीर बीमारियों का मुफ्त इलाज करवा सकते हैं। इसके लिए 900 से अधिक अस्पतालों का नेटवर्क तैयार किया गया है, जहां कैशलेस सुविधा उपलब्ध है।
योजना का एक बड़ा फायदा इसकी आसान प्रक्रिया भी है। जहां अन्य योजनाओं में पात्रता साबित करने के लिए कई दस्तावेजों की जरूरत होती है, वहीं पंजाब में लोग सिर्फ आधार कार्ड या वोटर आईडी के जरिए आसानी से रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। इसके लिए सेवा केंद्रों और Common Service Centers के साथ-साथ ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी दी गई है। साथ ही, गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करने और रजिस्ट्रेशन कराने के लिए विशेष अभियान भी चलाए जा रहे हैं।
इस योजना का असर जमीनी स्तर पर भी देखने को मिल रहा है। कई ऐसे परिवार, जो पहले इलाज के खर्च के कारण परेशान रहते थे, अब बिना किसी आर्थिक दबाव के इलाज करवा पा रहे हैं। यह मॉडल न सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं को आसान बना रहा है, बल्कि लोगों के जीवन स्तर को भी बेहतर करने में मदद कर रहा है।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि यह योजना सिर्फ एक सरकारी स्कीम नहीं, बल्कि एक सोच में बदलाव है, जहां स्वास्थ्य सेवा को अधिकार के रूप में देखा जा रहा है। उनका कहना है कि पंजाब सरकार का उद्देश्य हर व्यक्ति तक बेहतर और सस्ती स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाना है, ताकि कोई भी व्यक्ति इलाज के अभाव में परेशान न हो।
कुल मिलाकर, पंजाब का यह यूनिवर्सल हेल्थकेयर मॉडल देश के लिए एक नई दिशा दिखाता है, जहां स्वास्थ्य सेवाएं सीमित नहीं बल्कि सभी के लिए समान रूप से उपलब्ध कराई जा रही हैं।
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चंडीगढ़ में देर रात दहशत: सेक्टर-29 के रिहायशी इलाके में दिखा तेंदुए जैसा जानवर, सीसीटीवी में कैद
चंडीगढ़ के सेक्टर-29 में बुधवार रात तेंदुआ दिखाई देने की खबर से इलाके में दहशत फैल गई। लोगों ने पूरी रात घरों से बाहर निकलने से परहेज किया। सूचना मिलने के बाद पुलिस और फॉरेस्ट विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और देर रात तक सर्च ऑपरेशन चलाया, लेकिन तेंदुए का कोई सुराग नहीं मिला। हालांकि, इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों में एक तेंदुआ पीर दरगाह के पास पानी पीते हुए कैद हुआ है।
पार्क में महिला ने सबसे पहले देखा
जानकारी के अनुसार बुधवार शाम करीब 7:30 से 8 बजे के बीच सेक्टर-29 के एक पार्क में एक महिला अपने बच्चों के साथ टहल रही थी। इसी दौरान उसकी नजर झाड़ियों के पास घूमते हुए एक तेंदुए पर पड़ी। यह देखते ही महिला घबरा गई और तुरंत बच्चों को लेकर पार्क से बाहर निकल गई।
घर पहुंचकर महिला ने इस बारे में अपने पति को बताया। इसके बाद उसके पति ने यह जानकारी पास में स्थित पीर दरगाह के लोगों को दी।
CCTV में कैद हुआ तेंदुआ
सूचना मिलने के बाद जब दरगाह परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखी गई तो उसमें साफ दिखाई दिया कि एक तेंदुआ दरगाह के पास बने स्थान पर पानी पी रहा है। इसके बाद तुरंत पुलिस और फॉरेस्ट विभाग को सूचना दी गई।
सूचना के बाद पुलिस और फॉरेस्ट विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और आसपास के इलाके में पूरी रात तलाशी अभियान चलाया। हालांकि देर रात तक चलाए गए सर्च ऑपरेशन में तेंदुए का कोई सुराग नहीं मिल पाया।
फिलहाल पुलिस और फॉरेस्ट विभाग दोनों ही तेंदुए की मौजूदगी को लेकर आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं कर रहे हैं, लेकिन सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद इलाके के लोग काफी दहशत में हैं और सतर्कता बरत रहे हैं।

पुलिसकर्मी हाथ में डंडा लेकर खड़ा हुआ।
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चंडीगढ़ में अगले माह से महंगी होंगी जमीनें:कलेक्टर रेट में 30 से 60% तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव, 1 अप्रैल से लागू करने की तैयारी
चंडीगढ़ में एक बार फिर प्रॉपर्टी महंगी होने जा रही है। चंडीगढ़ प्रशासन ने कलेक्टर रेट बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। डीसी निशांत यादव की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें कलेक्टर रेट संशोधित करने के लिए एक कमेटी गठित की गई।
प्रशासन ने शहर के अलग-अलग इलाकों के अनुसार कलेक्टर रेट में 30 से 60 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्तावित नए रेटों को लेकर अगले सप्ताह ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा, जिसमें आम लोगों से सुझाव और आपत्तियां मांगी जाएंगी।
1 अप्रैल से लागू हो सकते हैं नए रेट
प्रशासन के अनुसार, लोगों से सुझाव लेने के बाद अंतिम नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा। योजना है कि नए कलेक्टर रेट 1 अप्रैल से लागू कर दिए जाएं। पिछले साल भी कलेक्टर रेट में बढ़ोतरी की गई थी। इससे पहले वर्ष 2021 और 2017 में संशोधन हुआ था।
ग्रामीण क्षेत्रों में तीन से चार गुना तक बढ़ोतरी
सूत्रों के मुताबिक, नए प्रस्ताव के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि के रेट तीन से चार गुना तक बढ़ सकते हैं। वहीं कई सेक्टरों में रेट डेढ़ गुना तक बढ़ाने की तैयारी है। कलेक्टर रेट बढ़ने से प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री महंगी होगी, क्योंकि स्टांप ड्यूटी और अन्य शुल्क इन्हीं रेटों के आधार पर तय होते हैं। ऐसे में रियल एस्टेट बाजार और आम लोगों पर इसका सीधा असर पड़ेगा।
संभावना है कि रेट बढ़ाने के प्रस्ताव पर कुछ संगठनों और प्रॉपर्टी मालिकों की ओर से विरोध भी किया जा सकता है।
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