Uttar Pradesh

UP: योगी सरकार ने की नेपाल सीमा पर अवैध मदरसों, मस्जिदों और मजारों के खिलाफ कार्रवाई।

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UP के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार ने नेपाल सीमा से सटे जिलों में अवैध धार्मिक ढांचों के खिलाफ अपना अभियान तेज कर दिया है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस और राजस्व विभाग की टीमों ने गुरुवार (2 मई) को क्षेत्र में कई स्थलों पर संयुक्त रूप से छापे मारे और अतिक्रमण की पहचान कर उन्हें हटाया।

सरकार के अनुसार, नियमों का उल्लंघन करने वाले गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों को सील किया जा रहा है, तथा राज्य की भूमि पर बने धार्मिक ढांचों को ध्वस्त किया जा रहा है।

इस अभियान के तहत अब तक सैकड़ों अवैध निर्माणों को निशाना बनाया जा चुका है।

सरकार ने कहा कि यह अभियान गैरकानूनी अतिक्रमणों और अनियमित धार्मिक प्रतिष्ठानों के प्रति शून्य सहनशीलता के रुख को पुष्ट करता है।

श्रावस्ती जिले में गुरुवार को पांच अवैध मदरसों को सील कर दिया गया, जबकि भिनगा तहसील के भरथा और रोशन गढ़ गांव में सरकारी जमीन पर बनी अवैध मस्जिदों को ध्वस्त कर दिया गया।

श्रावस्ती में कुल 139 संरचनाओं पर कार्रवाई की गई है, जिनमें 41 धार्मिक संरचनाएं भी शामिल हैं। अधिकारियों ने कथित तौर पर नेपाल सीमा के 15 किलोमीटर के भीतर अस्थायी और स्थायी अतिक्रमण को हटा दिया है।

इसी प्रकार का अभियान पीलीभीत जिले में भी चलाया गया।

बलरामपुर जिले में आठ मदरसों को नोटिस जारी किए गए और तीन अवैध मजारों को हटाया गया। कथित तौर पर पांच और मजारों को भी नोटिस जारी किए गए।

अधिकारियों ने कुल 16 अतिक्रमणों की पहचान की है। बिना अनुमति के बनाए गए ईदगाह से जुड़े एक मामले की भी समीक्षा की जा रही है।

नियमों के उल्लंघन और अनिवार्य पाठ्यक्रम न अपनाने के चलते 20 मदरसों को बंद कर दिया गया है, जबकि दस्तावेज समय पर न देने के कारण दो अन्य मदरसों को नोटिस जारी किया गया है।

बहराइच जिले के नानपारा और मिहीपुरवा तहसीलों में बुधवार और गुरुवार को अतिक्रमण विरोधी अभियान के तहत आठ अवैध निर्माण हटाए गए। अब तक कुल 135 अतिक्रमणों को गिराया जा चुका है।

इससे पहले प्रशासन ने पांच मदरसों को सील किया था। गुरुवार को तीन मामलों में लोगों ने स्वेच्छा से अतिक्रमण हटा लिया।

सिद्धार्थ नगर जिले में प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए तीन मस्जिदों और 14 गैर-पंजीकृत मदरसों समेत कुल 17 अवैध धार्मिक निर्माणों पर शिकंजा कसा।

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