Punjab

साँझा सुनेहा सम्मेलन ने सिविल सोसायटी, इन्फ्लुएंसर्स और सरकार को एक छत के नीचे लाकर पंजाब की नशा विरोधी मुहिम ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ को और मजबूत किया

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नशा विरोधी लड़ाई के लिए पूरे समाज की भागीदारी आवश्यक है, इस भावना को मजबूत करते हुए पंजाब सरकार ने ‘साँझा सुनेहा – एकजुट पंजाब’ नामक एक अनूठे कार्यक्रम का आयोजन किया। इसका उद्देश्य सरकारी एजेंसियों, सामुदायिक नेताओं, सिविल सोसायटी संगठनों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के बीच स्थायी साझेदारी स्थापित करना है, ताकि राज्य में नशे की समस्या से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।

यह सम्मेलन अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ एवं अवैध तस्करी विरोधी दिवस के अवसर पर डेटा इंटेलिजेंस एंड टेक्निकल सपोर्ट यूनिट (डिट्सू) द्वारा आयोजित किया गया, जो पंजाब में नशा विरोधी व्यापक अभियान का तकनीकी आधार है। इस कार्यक्रम में 40 से अधिक संस्थाओं के 80 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। ये संस्थाएं शिक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, नशामुक्ति, बाल संरक्षण, युवा कल्याण, महिला सशक्तिकरण, सामुदायिक पहुंच और खेलों के क्षेत्र में कार्य कर रही हैं।

इस अवसर पर पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने नशा विरोधी लड़ाई में समाज और लोगों की सामूहिक भागीदारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार ने ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ मुहिम के तहत प्रवर्तन, उपचार एवं पुनर्वास तथा रोकथाम की व्यापक रणनीति अपनाई है। उन्होंने कहा, “युवाओं को सशक्त बनाने के लिए हमने इस अभियान को स्कूलों और कॉलेजों में भी लागू किया है, खेलों को प्रोत्साहित कर रहे हैं और साथ ही नशों के खिलाफ लड़ाई में आगे आने के लिए अभिभावकों और शिक्षकों का भी मार्गदर्शन कर रहे हैं।”

“एकजुट पंजाब ही रंगला पंजाब है। नशा विरोधी अभियान की वास्तविक सफलता के लिए इसे जन आंदोलन बनाना आवश्यक है। एनजीओ, शैक्षणिक संस्थानों, सामुदायिक नेताओं से लेकर नशा प्रभावित परिवारों तक समाज के हर वर्ग को इसमें शामिल होना चाहिए। इसी उद्देश्य से आज के कार्यक्रम में 40 से अधिक एनजीओ भाग ले रहे हैं। यह ‘साझा संदेश’ को एक साझा मंच और सामूहिक संकल्प का रूप देगा, जहां अनुभव, विचार और नवाचार वास्तविक बदलाव का रूप धारण करेंगे।”

उन्होंने सरकार द्वारा नशामुक्ति सेवाओं को मजबूत करने, पुनर्वास सुविधाओं का विस्तार करने और युवाओं को नशे से बचाने के लिए जागरूकता फैलाने के प्रयासों की भी जानकारी दी।

इस सम्मेलन ने जमीनी स्तर पर कार्य कर रही विभिन्न संस्थाओं के बीच खुली चर्चा और विचार साझा करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच उपलब्ध कराया। ये संस्थाएं उपचार, रोकथाम और जागरूकता के क्षेत्र में कार्य कर रही हैं ताकि एक स्वस्थ और समृद्ध पंजाब का निर्माण किया जा सके।

इस अवसर पर भाग लेने वाली संस्थाओं में अनन्या बिड़ला फाउंडेशन, स्लैम आउट लाउड, सेंटर स्क्वेयर फाउंडेशन, लाडली फाउंडेशन, आदित्य बिड़ला एजुकेशन ट्रस्ट, समर्थ्य, लभ्या, कलगीधर ट्रस्ट, यूनाइटेड वे दिल्ली, हंस फाउंडेशन, एक्ट ह्यूमन, सर्वप्रेम फाउंडेशन, मेहर फाउंडेशन, मानस की जात सभे एक सेवा सोसाइटी, ब्रह्माकुमारी, मैजिक बस, इनिशिएटर्स ऑफ चेंज, राउंडग्लास फाउंडेशन, यूथ फुटबॉल क्लब रुड़का कलां, एसपीवाईएम, करुणा शक्ति फाउंडेशन, उदयन केयर, टीवाईसीआईए, स्वामी विवेकानंद मेडिकल मिशन और मानसा फाउंडेशन के प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा किए।

प्रतिभागियों ने मुख्य विषयों – स्कूलों और कॉलेजों में रोकथाम, स्वास्थ्य एवं वेलनेस, देखभाल की आवश्यकता वाले बच्चों तथा कानूनी मामलों से जुड़े बच्चों के लिए सहायता और खेलों एवं अन्य गतिविधियों के माध्यम से युवा सशक्तिकरण – पर चर्चा की।

“सोशल मीडिया के माध्यम से जागरूकता” विषय पर विशेष चर्चा में सिमरनजोत मक्कड़, करमन कौर मिगलानी, सुल्तान रंधावा, सिमरन कौर खालसा और कुलदीप घई जैसे डिजिटल इन्फ्लुएंसर्स ने भाग लिया। इन्फ्लुएंसर्स ने जनमत निर्माण में सोशल मीडिया की भूमिका पर चर्चा की और समाज के हित में सकारात्मक संदेश फैलाने तथा नशे की गिरफ्त में आए लोगों को नशामुक्त जीवन अपनाने के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया।

सत्रों के दौरान प्रतिभागियों ने सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों की पहचान की, जिनमें रेफरल प्रणाली को मजबूत करना, शैक्षणिक संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य सहायता का विस्तार करना, जरूरतमंद वर्गों तक पहुंच बढ़ाना तथा खेलों, कौशल विकास और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से युवाओं को अधिक से अधिक जोड़ना शामिल है।

प्रतिभागियों के विचार:

मनीष कुमार, एसपीवाईएम (दिल्ली) के टीम लीडर ने कहा, “नशामुक्ति की सबसे बड़ी चुनौती लोगों को नशे के हानिकारक प्रभावों के प्रति जागरूक करना है। हम मुख्य रूप से सरकार को उन क्षेत्रों की जानकारी उपलब्ध कराते हैं जहां सेवाओं की मांग है (जैसे नशामुक्ति केंद्र खोलना या जागरूकता शिविर आयोजित करना) और पुनर्वास के बाद नियमित फॉलो-अप सुनिश्चित करते हैं, ताकि दोबारा नशे की ओर लौटने के मामलों को न्यूनतम किया जा सके।”

लुधियाना स्थित जिला फाउंडेशन की प्रमुख डॉ. नीलम सोढ़ी ने कहा, “नशाखोरी जीवन की चुनौतियों से निपटने का एक माध्यम बन जाती है। जिला फाउंडेशन इस उद्देश्य से कार्य कर रहा है कि अभिभावक अपने बच्चों को बेहतर ढंग से समझ सकें और बच्चे स्वयं को बेहतर ढंग से समझ सकें। इसका नशाखोरी से सीधा संबंध है, क्योंकि जब जीवन में कठिनाइयां या चुनौतियां आती हैं, तो लोग उनसे निपटने के लिए नशे को एक सहारे (कोपिंग मैकेनिज्म) के रूप में न अपनाएं।”

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