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सच्चाई और ईमानदारी की सबसे बड़ी जीत, अदालत के फैसले ने तानाशाही ताकतों के मुंह पर जड़ा तमाचा: Harjot Bains

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आम आदमी पार्टी (AAP) के सीनियर नेता और पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय कन्वीनर और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल तथा पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के फर्जी शराब घोटाले से बरी होने का फैसला भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में ‘सच्चाई और ईमानदारी’ की सबसे बड़ी जीत के रूप में दर्ज होगा।


भाजपा की साजिश बेनकाब

मंत्री बैंस ने भाजपा पर सीधे हमला करते हुए कहा कि अदालत द्वारा आप नेताओं को बरी करना इस बात का सबूत है कि जांच एजेंसियों के पास कोई ठोस आधार नहीं था। उन्होंने कहा:

  • विपक्ष ने 100 करोड़ के फर्जी घोटाले का शोर मचाया, लेकिन जमीनी स्तर पर एक भी पैसा नहीं मिला।
  • यह पूरी साजिश केवल अरविंद केजरीवाल की बढ़ती लोकप्रियता को रोकने के लिए रची गई थी।
  • जांच एजेंसियों का राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया गया, जो अब बुरी तरह विफल हो चुका है।

केंद्र सरकार पर तीखा हमला

हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने:

  • मनीष सिसोदिया को दो साल तक जेल में रखा।
  • अरविंद केजरीवाल को छह महीने तक सलाखों के पीछे रखा।

उन्होंने यह भी बताया कि इस दौरान मनीष सिसोदिया की पत्नी गंभीर बीमारी से जूझ रही थी और अरविंद केजरीवाल शुगर के मरीज हैं। मंत्री ने कहा कि राजनीति अलग बात है, लेकिन विरोधियों ने मानवता की सारी हदें पार कर दीं।

निष्कर्ष:
“आज के फैसले ने इन तानाशाही ताकतों के मुंह पर करारा तमाचा जड़ा है।”


सच्चाई और विकास की जीत

हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि पूरा देश अब समझ चुका है कि अरविंद केजरीवाल की राजनीति ‘काम की राजनीति’ है।

  • सरकारी स्कूलों की हालत बदलना
  • विश्व स्तरीय अस्पताल बनाना

ये असली ‘अपराध’ था, जिसकी सजा देने की कोशिश की गई, लेकिन गुरु साहिब की कृपा से सच्चाई की जीत हुई।


आने वाले चुनावों को लेकर चेतावनी

मंत्री बैंस ने कहा:

  • यह फैसला भविष्य के लिए एक शुभ संकेत है।
  • 2027 में पंजाब विधानसभा चुनाव में आप 2022 का रिकॉर्ड तोड़ेंगे।
  • जनता विरोधियों के हर जुल्म का हिसाब वोट के माध्यम से लेगी।
  • 2029 में अरविंद केजरीवाल देश की राजनीति की कमान संभालेंगे और आप के दिल्ली-पंजाब मॉडल के जरिए भारत को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे।

मुख्य बिंदु:

  • अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया फर्जी शराब घोटाले से बरी।
  • भाजपा की राजनीतिक साजिश नाकाम।
  • जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का पर्दाफाश।
  • जनता के बीच सच्चाई और ईमानदारी की जीत।
  • आगामी चुनावों में आम आदमी पार्टी का जोरदार प्रदर्शन।
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मोदी सरकार ने आप को बदनाम करने के लिए CBI-ED का दुरुप्रयोग किया; फैसले से भाजपा की मनगढ़ंत कहानी का पर्दाफाश: हरपाल चीमा

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पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि कथित दिल्ली शराब घोटाले के मामले में आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय कन्वीनर अरविंद केजरीवाल, सीनियर नेता मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, दुर्गेश पाठक, सतिंदर जैन और अन्यों के बरी होने से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की राजनीति से प्रेरित साजिश पूरी तरह से बेनकाब हो गई है। 

शराब घोटाले केस में क्लीन चिट देने के दिल्ली अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए चीमा ने कहा कि इस फैसले से पूरे देश के सामने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह केस केंद्रीय एंजसियों का दुरुप्रयोग करके आम आदमी पार्टी लीडरशिप को बदनाम करने और उसे राजनीतिक तौर पर खत्म करने की कोशिश के तौर पर बनाया गया था।

चीमा ने कहा कि जज का फैसला अपने आप में उस साजिश की हद को उजागर करता है जो भाजपा ने आम आदमी पार्टी के खिलाफ रची थी। सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) और एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ईडी) का गलत इस्तेमाल करके आप की ईमानदारी पर सवाल उठाने की कोशिश की गई। आज देश के लोगों को यह साफ हो गया है कि कैसे इन एजेंसियों का राजनीतिक फायदे के लिए गलत इस्तेमाल किया गया था।

    उन्होंने याद दिलाया कि आप का जन्म भ्रष्टाचार के विरुद्ध देशव्यापी आंदोलन मे से हुआ था। और इसकी स्थापना उन नेताओं ने की थी जिन्होंने अपनी ज़िंदगी साफ-सुथरी राजनीति के लिए लगा दी थी। अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, दुर्गेश पाठक, सतिंदर जैन, ये वो नेता हैं जिन्होंने आम आदमी पार्टी की नींव रखी और इसे पूरे देश में फैलाया। आज, उनके कमिटमेंट और बलिदान की वजह से ही हम कई राज्यों में सरकार और विपक्ष में हैं।

चीमा ने ज़ोर देकर कहा कि यह फ़ैसला बी.आर. अंबेडकर के बनाए संविधान की भी जीत है। डॉ. बी.आर. अंबेडकर, जिन्होंने गरीबी से उठकर भारत का संविधान बनाया, उन्होंने हर नागरिक के लिए बराबरी, निजी आज़ादी की सुरक्षा और बुनियादी अधिकारों को पक्का किया। अगर आप संविधान को ध्यान से पढ़ेंगे, तो आप समझ सकते हैं कि यह कितनी गहराई से निजी आज़ादी की रक्षा करता है। आज दिल्ली अदालत का फ़ैसला यह साबित करता है कि संविधान सबसे ऊपर है।

खुद वकालत कर चुके चीमा ने कहा कि यह केस देश के कानूनी इतिहास में याद रखा जाएगा। यह इस देश के इतिहास का ऐसा केस है जिसमें भाजपा की सीबीआई पूरी तरह से बेनकाब हो गई है। कोई सबूत नहीं था, फिर भी एक कथित घोटाला किया गया। बाबासाहेब अंबेडकर के कानून के खिलाफ खेले गए इस खेल के लिए भाजपा और केंद्रीय गृह मंत्री को जवाब देना होगा।

उन्होंने न्यायपालिका का धन्यवाद करते हुए कहा कि अदालतें हमेशा न्याय और सच्चाई के साथ खड़ी होती हैं। संविधान के तहत, हर नागरिक को सम्मान के साथ जीने, राजनीति में हिस्सा लेने और लोगों की सेवा करने का अधिकार है। आज का फैसला उस सिद्धांत को पक्का करता है।

चीमा ने भाजपा पर संवैधानिक प्रावधानों का गलत इस्तेमाल करके लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। संविधान भाजपा या किसी एक पार्टी का नहीं है। यह बाबासाहेब अंबेडकर और 140 करोड़ भारतीयों का है। इसे इसलिए बनाया गया था ताकि लोग सम्मान के साथ जी सकें और अच्छी शिक्षा पा सकें। लेकिन भाजपा यह पचा नहीं पा रही है कि अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया गरीबों को अच्छी शिक्षा दे रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा कि भाजपा सरकारी स्कूल के स्टूडेंट्स को आईआईटी जैसे बड़े इंस्टीट्यूशन में एडमिशन, गरीब परिवारों को अच्छी हेल्थ सुविधाएं मिलना और दिल्ली और पंजाब से करप्शन और ड्रग्स को खत्म करने की कोशिशों से परेशान है।

इसीलिए उन्होंने आम आदमी पार्टी को तोड़ने की कोशिश की। लेकिन आज, देश भर में संविधान में विश्वास रखने वाले लाखों लोग जश्न मना रहे हैं। सच की जीत हुई है।

चीमा ने आप कार्यकर्ताओ को मुश्किल समय में चट्टान की तरह पार्टी के साथ खड़े रहने और भाजपा की हरकतों को लगातार सामने लाने के लिए धन्यवाद दिया।

उन्होंने अंत में कहा कि जहां कांग्रेस और भाजपा दोनों ने डॉ. अंबेडकर के नाम का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए किया है, वहीं आम आदमी पार्टी ने ही असल में उनकी विचारधारा को आगे बढ़ाया है।

चीमा ने कहा कि यह फैसला सच की जीत है। आज देश के करोड़ों लोग समझ गए हैं कि भाजपा झूठ का सहारा लेती है, लेकिन आखिर में जीत संविधान और इंसाफ की होती है।

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मोदी सरकार ने आप को बदनाम करने के लिए CBI-ED का दुरुप्रयोग किया; फैसले से भाजपा की मनगढ़ंत कहानी का पर्दाफाश: हरपाल चीमा

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पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि कथित दिल्ली शराब घोटाले के मामले में आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय कन्वीनर अरविंद केजरीवाल, सीनियर नेता मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, दुर्गेश पाठक, सतिंदर जैन और अन्यों के बरी होने से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की राजनीति से प्रेरित साजिश पूरी तरह से बेनकाब हो गई है। 

शराब घोटाले केस में क्लीन चिट देने के दिल्ली अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए चीमा ने कहा कि इस फैसले से पूरे देश के सामने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह केस केंद्रीय एंजसियों का दुरुप्रयोग करके आम आदमी पार्टी लीडरशिप को बदनाम करने और उसे राजनीतिक तौर पर खत्म करने की कोशिश के तौर पर बनाया गया था।

चीमा ने कहा कि जज का फैसला अपने आप में उस साजिश की हद को उजागर करता है जो भाजपा ने आम आदमी पार्टी के खिलाफ रची थी। सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) और एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ईडी) का गलत इस्तेमाल करके आप की ईमानदारी पर सवाल उठाने की कोशिश की गई। आज देश के लोगों को यह साफ हो गया है कि कैसे इन एजेंसियों का राजनीतिक फायदे के लिए गलत इस्तेमाल किया गया था।

    उन्होंने याद दिलाया कि आप का जन्म भ्रष्टाचार के विरुद्ध देशव्यापी आंदोलन मे से हुआ था। और इसकी स्थापना उन नेताओं ने की थी जिन्होंने अपनी ज़िंदगी साफ-सुथरी राजनीति के लिए लगा दी थी। अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, दुर्गेश पाठक, सतिंदर जैन, ये वो नेता हैं जिन्होंने आम आदमी पार्टी की नींव रखी और इसे पूरे देश में फैलाया। आज, उनके कमिटमेंट और बलिदान की वजह से ही हम कई राज्यों में सरकार और विपक्ष में हैं।

चीमा ने ज़ोर देकर कहा कि यह फ़ैसला बी.आर. अंबेडकर के बनाए संविधान की भी जीत है। डॉ. बी.आर. अंबेडकर, जिन्होंने गरीबी से उठकर भारत का संविधान बनाया, उन्होंने हर नागरिक के लिए बराबरी, निजी आज़ादी की सुरक्षा और बुनियादी अधिकारों को पक्का किया। अगर आप संविधान को ध्यान से पढ़ेंगे, तो आप समझ सकते हैं कि यह कितनी गहराई से निजी आज़ादी की रक्षा करता है। आज दिल्ली अदालत का फ़ैसला यह साबित करता है कि संविधान सबसे ऊपर है।

खुद वकालत कर चुके चीमा ने कहा कि यह केस देश के कानूनी इतिहास में याद रखा जाएगा। यह इस देश के इतिहास का ऐसा केस है जिसमें भाजपा की सीबीआई पूरी तरह से बेनकाब हो गई है। कोई सबूत नहीं था, फिर भी एक कथित घोटाला किया गया। बाबासाहेब अंबेडकर के कानून के खिलाफ खेले गए इस खेल के लिए भाजपा और केंद्रीय गृह मंत्री को जवाब देना होगा।

उन्होंने न्यायपालिका का धन्यवाद करते हुए कहा कि अदालतें हमेशा न्याय और सच्चाई के साथ खड़ी होती हैं। संविधान के तहत, हर नागरिक को सम्मान के साथ जीने, राजनीति में हिस्सा लेने और लोगों की सेवा करने का अधिकार है। आज का फैसला उस सिद्धांत को पक्का करता है।

चीमा ने भाजपा पर संवैधानिक प्रावधानों का गलत इस्तेमाल करके लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। संविधान भाजपा या किसी एक पार्टी का नहीं है। यह बाबासाहेब अंबेडकर और 140 करोड़ भारतीयों का है। इसे इसलिए बनाया गया था ताकि लोग सम्मान के साथ जी सकें और अच्छी शिक्षा पा सकें। लेकिन भाजपा यह पचा नहीं पा रही है कि अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया गरीबों को अच्छी शिक्षा दे रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा कि भाजपा सरकारी स्कूल के स्टूडेंट्स को आईआईटी जैसे बड़े इंस्टीट्यूशन में एडमिशन, गरीब परिवारों को अच्छी हेल्थ सुविधाएं मिलना और दिल्ली और पंजाब से करप्शन और ड्रग्स को खत्म करने की कोशिशों से परेशान है।

इसीलिए उन्होंने आम आदमी पार्टी को तोड़ने की कोशिश की। लेकिन आज, देश भर में संविधान में विश्वास रखने वाले लाखों लोग जश्न मना रहे हैं। सच की जीत हुई है।

चीमा ने आप कार्यकर्ताओ को मुश्किल समय में चट्टान की तरह पार्टी के साथ खड़े रहने और भाजपा की हरकतों को लगातार सामने लाने के लिए धन्यवाद दिया।

उन्होंने अंत में कहा कि जहां कांग्रेस और भाजपा दोनों ने डॉ. अंबेडकर के नाम का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए किया है, वहीं आम आदमी पार्टी ने ही असल में उनकी विचारधारा को आगे बढ़ाया है।

चीमा ने कहा कि यह फैसला सच की जीत है। आज देश के करोड़ों लोग समझ गए हैं कि भाजपा झूठ का सहारा लेती है, लेकिन आखिर में जीत संविधान और इंसाफ की होती है।

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मनीष सिसोदिया सहित सभी 23 आरोपियों के विरुद्ध मामला समाप्त होना दर्शाता है कि आरोप न्यायिक जांच में टिक नहीं सके: Kultar Singh Sandhwan

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पंजाब विधान सभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने कहा कि आबकारी नीति मामले में माननीय न्यायालय का हालिया निर्णय संवैधानिक नैतिकता और कानून के शासन की सशक्त पुनर्पुष्टि है। उन्होंने कहा कि पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया सहित सभी 23 आरोपियों के विरुद्ध मामलों को निरस्त किया जाना स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि राजनीतिक क्षेत्र में प्रचारित आरोप न्यायिक जांच में टिक नहीं सके।

स्पीकर संधवां ने कहा, “जब लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित मुख्यमंत्री का नाम बिना ठोस साक्ष्य के लिया जाता है और जांच एजेंसियां प्रथम दृष्टया भी कोई मामला स्थापित करने में असमर्थ रहती हैं, तो यह संस्थागत शुचिता और विधिसम्मत प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। जांच अधिकारी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के संबंध में न्यायालय का निर्देश हमारे संवैधानिक ढांचे में जवाबदेही की सर्वोच्चता को रेखांकित करता है।”

निर्णय के व्यापक राजनीतिक और नैतिक प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए स्पीकर संधवां ने कहा, “अरविंद केजरीवाल केवल बरी ही नहीं हुए, बल्कि सत्य सिद्ध होकर उभरे हैं। जमीनी संघर्षों से तपे हुए नेता के रूप में उन्होंने सदैव आम नागरिकों की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व किया है। वे आधुनिक दृष्टि के दूरदर्शी नेता हैं, जो पारदर्शिता, जनसेवा और सहभागी लोकतंत्र पर आधारित ‘जनता का, जनता के द्वारा और जनता के लिए’ शासन की अवधारणा को साकार करते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “यह फैसला इस धारणा को मजबूत करता है कि उन्हें बदले की राजनीति का शिकार बनाया गया, किंतु साथ ही यह एक बड़े सत्य की पुष्टि भी करता है—संवैधानिक लोकतंत्र में सत्य की विजय होती है और ईमानदारी भय और दबाव के बावजूद अडिग रहती है। अरविंद केजरीवाल का संघर्षपूर्ण सफर उनकी दृढ़ता, नैतिक साहस और जनता के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

 अंततः जब न्याय की विजय होती है, तभी लोकतंत्र सशक्त होता है, और यह निर्णय उसी शाश्वत सिद्धांत का प्रमाण है।”

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