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Sustainable Fashion आपकी जेब और प्रकृति के लिए हर तरीके से है बेस्ट, क्या है ये?
क्या कभी किसी ने सोचा कि ऑफिस या पार्टी में जाने के लिए जिन फैशनेबल कपड़ों का इस्तेमाल आप कर रहे है वो पर्यावरण नुकसान का बड़ा कारण बन जाएगा? आजकल, सोसाइटी में अपने स्टेटस सिंबल को बनाए रखने के लिए लोगों के वॉर्डरोब में कपड़ों की भरमार है। बदन को ढकने के लिए इस्तेमाल होने वाला कपड़ा आज फैशन बन गया है और देखते ही देखते कॉटन की जगह अब Synthetic Fiber या Polyster ने ले ली है। ये प्लास्टिक का ही रूप है जो कपड़ों में कॉटन से ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है।
लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि कपड़ों के निर्माण में उपयोग होने वाले सिंथेटिक फाइबर और उनके प्रक्रियाओं में उपयोग होने वाले रसायनों के कारण ये हमारी प्रकृति को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रहे है। हमारी कपड़ें खरीदने की आदत ने फैशन इंडस्ट्री को तो काफी फायदा पहुंचाया है लेकिन हमारी प्रकृति पर इसका बहुत ही गहरा और नाकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। यहीं कारण है कि “Suatainable Fashion” का क्रेज अब बढ़ रहा है। क्या आपने इससे पहले कभी सस्टेनेबल फैशन के बारे में सुना था। अगर नहीं तो समझिए ये क्या है और पर्यावरण को कैसे फायदे पहुंचा सकता है।
सस्टेनेबल फैशन (Sustainable Fashion) किसे कहते है?
सस्टेनेबल फैशन वह है जो पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाए। यह उत्पादन और उपयोग में पर्यावरण का ध्यान रखता है। इसमें नेचुरल फाइबर का उपयोग, पारंपरिक वस्त्र उत्पादन प्रक्रिया के प्रति ध्यान, और और कार्बन-न्यूट्रल तकनीकों का उपयोग होता है। जब हम प्राकृतिक फाइबर जैसे कि ऑर्गैनिक कॉटन, लिनन, जूट, और बांस का उपयोग करते हैं तो हम प्रकृति के साथ मेल खाते हैं। सस्टेनेबल फैशन में विशेष ध्यान कपड़ों की क्वालिटी पर दिया जाता है। कपड़ों की क्वालिटी पर्यावरण अनुकुल होनी चाहिए जिससे इसके नाकारात्मक प्रभाव न पड़े।
फैशन इंडस्ट्री क्यों बन रही प्रकृति के लिए अभिशाप
2019 में, संयुक्त राष्ट्र ने एक रिपोर्ट जारी की, जिसमें कहा गया था कि फैशन इंडस्ट्री जलवायु परिवर्तन में भी जिम्मेदार है। फैशन उद्योग ग्लोबल औद्योगिक जल प्रदूषण में 20% योगदान करता है, 75% प्लास्टिक का उपयोग करता है, और प्रतिवर्ष 1.5 ट्रिलियन कचरे का उत्पादन करता है। इसके अतिरिक्त, कपड़ों के निर्माण में केमिकल का उपयोग भी होता है, जो कार्बन डाइऑक्साइड और ग्रीनहाउस गैस का उत्सर्जन करता है। फैशन इंडस्ट्री में 23% केमिकल का उपयोग होता है, लेकिन इसका पर्यावरण पर बहुत बड़ा प्रभाव होता है। यही कारण है कि सस्टेनेबल फैशन अब बेहद आवश्यक है।
फैशन विश्व का दूसरा सबसे ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाला उद्योग
फैशन उद्योह विश्व का दूसरा सबसे ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाला उद्योग है। फैशन उद्योग में विभिन्न प्रकार के कपड़ों की उत्पादन प्रक्रिया में बहुत सारी ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग होता है, जिससे वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, और भू-प्रदूषण जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
कपड़ों के रंग और डिजाइन के लिए अधिकतम रंगीन रसायनों का उपयोग किया जाता है, जो प्राकृतिक वायुमंडल को प्रदूषित करते हैं। साथ ही, कपड़ों की उत्पादन प्रक्रिया में अधिक जल संयोजन की आवश्यकता होती है, जिससे जल प्रदूषण होता है। इसके अलावा, कपड़ों के उत्पादन में पॉलिएस्टर और नायलॉन का उपयोग होता है, जो प्लास्टिक से बने होते हैं, यह प्राकृतिक भू-संसाधनों को नुकसान पहुंचाते हैं।
CArdon dioxide पैदा कर रहे रिजेक्टेड कपड़े
क्या आपने कभी सोचा है कि फैशन के पीछे कितना भारी पर्यावरण नुकसान है? विश्व में फैशन उद्योग एक संवेदनशील विषय बन गया है। एक सवाल है कि जब कोई कपड़ा रिजेक्ट होता है तो उसका क्या किया जाता है? तो इसका उत्तर है ऐसे कपड़ों को या तो जला दिया जाता है या फिर डंपिंग ग्राउंड में फेंक दिया जाता है।
फैशन इंडस्ट्री आज की तारीख में बहुत सारा कार्बन डाइऑक्साइड निकाल रही है। दरअसल, कॉटन की तुलना में, पॉलिएस्टर के कपड़े को नष्ट होने में बहुत अधिक समय लगता है। जहां कॉटन के कपड़े नष्ट होने में कम समय लेते है (5 महीने) वहीं पॉलिएस्टर नष्ट होने मे बहुत ज्यादा समय लेता है , बल्कि उसका नष्ट होना भी प्राकृतिक जीवन के लिए खतरा है। इस परिस्थिति में, हमें एक सतत और सामर्थ्यपूर्ण समाधान की ओर बढ़ना चाहिए। सामाजिक जागरूकता और पर्यावरण के प्रति सचेतना बढ़ाने के माध्यम से हम संवेदनशीलता बढ़ा सकते हैं।
पर्यावरण संरक्षण के लिए कपड़ों की अपसाइकलिंग
कपड़ों की अपसाइकलिंग फैशन इंडस्ट्री में बहुत जरूरी है, और इसके कई कारण हैं:
पर्यावरण संरक्षण: कपड़ों की अपसाइकलिंग पर्यावरण संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है। अधिकतर कपड़ों को बनाने के लिए पोलिएस्टर, नायलॉन, और अन्य सिंथेटिक धागों और रसायनिक रंगों का उपयोग किया जाता है जो पर्यावरण के लिए हानिकारक होते है। अपसाइकलिंग के माध्यम से, पुराने कपड़ों को पुनः उपयोग किया जा सकता है, जिससे नए कपड़ों का उत्पादन कम होता है और प्रकृति को भी कम नुकसान पहुंचता है।
कम संसाधन की खपत: कपड़ों की अपसाइकलिंग से, संसाधनों का खपत कम होगी। नए कपड़ों को बनाने के लिए नए धातु, पानी, ऊर्जा, और अन्य संसाधनों की आवश्यकता होती है, जो उत्पादन प्रक्रिया में इस्तेमाल होते हैं। लेकिन, पुराने कपड़े को पुनः उपयोग करके, इन संसाधनों की खपत कम किया जा सकता है और संसाधनों की बर्बादी को रोका जा सकता है।
इसलिए, हमें फैशन को स्वच्छता की दृष्टि से देखने की आवश्यकता है। हमें समाज में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ानी चाहिए और साथ ही फैशन उद्योग में पर्यावरण के साथ मिलकर काम करने की जरूरत है। वैसे देखा जाए तो फैशन इंडस्ट्री में अब बहुत से डिजाइनर्स और ब्रांड्स हैं जो पर्यावरण को महत्व देते हुए अपने कपड़ों का निर्माण सस्टेनेबल फैशन के तहत कर रहे हैं। इसके साथ-साथ, ये कपड़े स्टाइलिश और फैशनेबल भी होते हैं, इसलिए आप इन्हें पहनकर न केवल अच्छे दिख सकते हैं बल्कि आप प्रकृति और आने वाले भविष्य के लिए भी अच्छा कर रहे हैं।