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Punjab Government का ‘Har Pind Khed Maidan’ Mission: 3,100Ultra-Modern Grounds से गांव-गांव में लाएगा Sports Revolution

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पंजाब सरकार ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी पहल शुरू की है। इस योजना का नाम है हर पिंड खेड मैदान यानी हर गांव में खेल का मैदान। इसका मकसद सिर्फ खेल का मैदान बनाना नहीं है, बल्कि ग्रामीण युवाओं को स्वस्थ, अनुशासित और नशे से दूर रखने के लिए एक सकारात्मक विकल्प देना भी है।

सरकार ने इसे मिशन मोड में लागू किया है और पहले चरण में लगभग 3,100 गांवों में अत्याधुनिक (Ultra-Modern) खेल मैदान बनाए जाएंगे। भविष्य में राज्य के 12,500 गांवों में ऐसे मैदान तैयार करने का लक्ष्य है।

योजना का उद्देश्य और महत्व

  • युवाओं को नशे से दूर रखना और उनकी ऊर्जा को खेलों की ओर मोड़ना।
  • खेल प्रतिभाओं को पहचानना और उन्हें राष्ट्रीय स्तर तक ले जाने के लिए मंच देना।
  • गांवों में सामुदायिक गतिविधियों और स्वास्थ्य सुधार के लिए केंद्र बनाना।
  • 260 स्पोर्ट्स नर्सरी भी बनाई जाएंगी ताकि बच्चों को छोटी उम्र से ही खेलों में ट्रेनिंग मिल सके।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा है कि यह योजना केवल खेड़ खेलने का मैदान नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास और युवा कल्याण की दिशा में एक बड़ा कदम है।

खेल सुविधाएँ और डिजाइन

हर स्टेडियम और खेल मैदान को गांव की जरूरत और जमीन के हिसाब से डिजाइन किया जाएगा।

  • पिच और ट्रैक: हॉकी, फुटबॉल, वॉलीबॉल, क्रिकेट और एथलेटिक्स ट्रैक।
  • बहु-पीढ़ी कल्याण केंद्र: ओपन-एयर जिम, योग और ध्यान के लिए जगह, बच्चों का खेल क्षेत्र और वरिष्ठ नागरिकों के लिए स्पेशल ज़ोन।
  • जमीन का आकार: 0.5 से 4 एकड़ तक, गांव की जरूरत के हिसाब से।

ये मैदान सिर्फ खेल के लिए नहीं होंगे, बल्कि ग्रामीण समाज के लिए सामाजिक केंद्र के रूप में भी काम करेंगे।

निर्माण और प्रगति

  • सुनाम निर्वाचन क्षेत्र: 29 स्टेडियमों की योजना, 11 में निर्माण शुरू, लागत 11.5 करोड़।
  • लहरा निर्वाचन क्षेत्र: 40-41 स्टेडियमों की योजना, 28 का नींव पत्थर रखा गया।
  • अमृतसर जिला: 495 संभावित स्थल, 174 पर निर्माण कार्य शुरू।
  • लागत: 23.94 लाख से लेकर 117.16 लाख तक, गांव की ज़रूरत के हिसाब से।

रखरखाव और स्थानीय स्वामित्व

सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि निर्माण के बाद मैदानों का संचालन और रखरखाव स्थानीय यूथ क्लबों के जिम्मे होगा। इससे गांव के लोग खुद इन सुविधाओं की देखभाल करेंगे और ₹1,194 करोड़ का निवेश लंबे समय तक सुरक्षित और उपयोगी रहेगा।

सामाजिक और खेल सुधार में योगदान

  • नशे के खिलाफ मजबूत ढाल।
  • खेल प्रतिभाओं के लिए लॉन्चपैड।
  • ग्रामीण समुदाय के लिए सामुदायिक केंद्र।
  • बदलदे पिंड, बदलदा पंजाब” और “फिट पंजाब, समृद्ध पंजाब” जैसे मंत्रों को साकार करना।

‘हर पिंड खेड मैदान’ पहल पंजाब के इतिहास में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह योजना केवल खेल का विकास नहीं करेगी, बल्कि ग्रामीण युवाओं को स्वस्थ और नशे से दूर रखेगी, नई प्रतिभाओं को मंच देगी और गांवों में सामाजिक बदलाव लाएगी। मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में, पंजाब सरकार ने यह साबित कर दिया है कि वह केवल वादे नहीं करती, बल्कि हकीकत में बदलाव लाने का काम कर रही है।

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पंजाब में Universal Healthcare Model बना मिसाल, हर परिवार को बिना शर्त 10 लाख तक कैशलेस इलाज की सुविधा!

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पंजाब सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए ऐसा मॉडल पेश किया है, जो देश की पारंपरिक योजनाओं से अलग और ज्यादा व्यापक माना जा रहा है। मुख्यमंत्री Bhagwant Mann के नेतृत्व में शुरू की गई मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत अब राज्य के हर परिवार को बिना किसी शर्त के 10 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। बढ़ते इलाज के खर्च के बीच यह योजना लाखों परिवारों के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आई है।

जहां केंद्र सरकार की Ayushman Bharat योजना सीमित पात्रता और 5 लाख रुपये तक के कवर तक ही सीमित है, वहीं पंजाब का यह मॉडल हर निवासी को कवर करता है, चाहे उसकी आय कुछ भी हो। यही कारण है कि इसे Universal Healthcare Model के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें इलाज का अधिकार किसी सूची या शर्त पर नहीं बल्कि जरूरत के आधार पर तय होता है।

वित्तीय दृष्टि से भी पंजाब का यह मॉडल काफी मजबूत माना जा रहा है। केंद्र सरकार जहां 140 करोड़ आबादी के लिए 9,500 करोड़ रुपये का बजट रखती है, वहीं पंजाब सरकार करीब 3 करोड़ लोगों के लिए 2,000 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। इस हिसाब से प्रति व्यक्ति निवेश कई गुना ज्यादा है, जो राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को साफ तौर पर दर्शाता है।

इस योजना के तहत करीब 65 लाख परिवारों को लाभ मिलने की उम्मीद है। मरीज 2,300 से अधिक इलाज पैकेजों के जरिए दिल की बीमारी, कैंसर, किडनी से जुड़ी समस्याएं, एक्सीडेंट केस और अन्य गंभीर बीमारियों का मुफ्त इलाज करवा सकते हैं। इसके लिए 900 से अधिक अस्पतालों का नेटवर्क तैयार किया गया है, जहां कैशलेस सुविधा उपलब्ध है।

योजना का एक बड़ा फायदा इसकी आसान प्रक्रिया भी है। जहां अन्य योजनाओं में पात्रता साबित करने के लिए कई दस्तावेजों की जरूरत होती है, वहीं पंजाब में लोग सिर्फ आधार कार्ड या वोटर आईडी के जरिए आसानी से रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। इसके लिए सेवा केंद्रों और Common Service Centers के साथ-साथ ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी दी गई है। साथ ही, गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करने और रजिस्ट्रेशन कराने के लिए विशेष अभियान भी चलाए जा रहे हैं।

इस योजना का असर जमीनी स्तर पर भी देखने को मिल रहा है। कई ऐसे परिवार, जो पहले इलाज के खर्च के कारण परेशान रहते थे, अब बिना किसी आर्थिक दबाव के इलाज करवा पा रहे हैं। यह मॉडल न सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं को आसान बना रहा है, बल्कि लोगों के जीवन स्तर को भी बेहतर करने में मदद कर रहा है।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि यह योजना सिर्फ एक सरकारी स्कीम नहीं, बल्कि एक सोच में बदलाव है, जहां स्वास्थ्य सेवा को अधिकार के रूप में देखा जा रहा है। उनका कहना है कि पंजाब सरकार का उद्देश्य हर व्यक्ति तक बेहतर और सस्ती स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाना है, ताकि कोई भी व्यक्ति इलाज के अभाव में परेशान न हो।

कुल मिलाकर, पंजाब का यह यूनिवर्सल हेल्थकेयर मॉडल देश के लिए एक नई दिशा दिखाता है, जहां स्वास्थ्य सेवाएं सीमित नहीं बल्कि सभी के लिए समान रूप से उपलब्ध कराई जा रही हैं।

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चंडीगढ़ में देर रात दहशत: सेक्टर-29 के रिहायशी इलाके में दिखा तेंदुए जैसा जानवर, सीसीटीवी में कैद

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चंडीगढ़ के सेक्टर-29 में बुधवार रात तेंदुआ दिखाई देने की खबर से इलाके में दहशत फैल गई। लोगों ने पूरी रात घरों से बाहर निकलने से परहेज किया। सूचना मिलने के बाद पुलिस और फॉरेस्ट विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और देर रात तक सर्च ऑपरेशन चलाया, लेकिन तेंदुए का कोई सुराग नहीं मिला। हालांकि, इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों में एक तेंदुआ पीर दरगाह के पास पानी पीते हुए कैद हुआ है।

पार्क में महिला ने सबसे पहले देखा

जानकारी के अनुसार बुधवार शाम करीब 7:30 से 8 बजे के बीच सेक्टर-29 के एक पार्क में एक महिला अपने बच्चों के साथ टहल रही थी। इसी दौरान उसकी नजर झाड़ियों के पास घूमते हुए एक तेंदुए पर पड़ी। यह देखते ही महिला घबरा गई और तुरंत बच्चों को लेकर पार्क से बाहर निकल गई।

घर पहुंचकर महिला ने इस बारे में अपने पति को बताया। इसके बाद उसके पति ने यह जानकारी पास में स्थित पीर दरगाह के लोगों को दी।

CCTV में कैद हुआ तेंदुआ

सूचना मिलने के बाद जब दरगाह परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखी गई तो उसमें साफ दिखाई दिया कि एक तेंदुआ दरगाह के पास बने स्थान पर पानी पी रहा है। इसके बाद तुरंत पुलिस और फॉरेस्ट विभाग को सूचना दी गई।

सूचना के बाद पुलिस और फॉरेस्ट विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और आसपास के इलाके में पूरी रात तलाशी अभियान चलाया। हालांकि देर रात तक चलाए गए सर्च ऑपरेशन में तेंदुए का कोई सुराग नहीं मिल पाया।

फिलहाल पुलिस और फॉरेस्ट विभाग दोनों ही तेंदुए की मौजूदगी को लेकर आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं कर रहे हैं, लेकिन सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद इलाके के लोग काफी दहशत में हैं और सतर्कता बरत रहे हैं।

पुलिसकर्मी हाथ में डंडा लेकर खड़ा हुआ।

पुलिसकर्मी हाथ में डंडा लेकर खड़ा हुआ।

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चंडीगढ़ में अगले माह से महंगी होंगी जमीनें:कलेक्टर रेट में 30 से 60% तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव, 1 अप्रैल से लागू करने की तैयारी

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चंडीगढ़ में एक बार फिर प्रॉपर्टी महंगी होने जा रही है। चंडीगढ़ प्रशासन ने कलेक्टर रेट बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। डीसी निशांत यादव की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें कलेक्टर रेट संशोधित करने के लिए एक कमेटी गठित की गई।

प्रशासन ने शहर के अलग-अलग इलाकों के अनुसार कलेक्टर रेट में 30 से 60 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्तावित नए रेटों को लेकर अगले सप्ताह ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा, जिसमें आम लोगों से सुझाव और आपत्तियां मांगी जाएंगी।

1 अप्रैल से लागू हो सकते हैं नए रेट

प्रशासन के अनुसार, लोगों से सुझाव लेने के बाद अंतिम नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा। योजना है कि नए कलेक्टर रेट 1 अप्रैल से लागू कर दिए जाएं। पिछले साल भी कलेक्टर रेट में बढ़ोतरी की गई थी। इससे पहले वर्ष 2021 और 2017 में संशोधन हुआ था।

ग्रामीण क्षेत्रों में तीन से चार गुना तक बढ़ोतरी

सूत्रों के मुताबिक, नए प्रस्ताव के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि के रेट तीन से चार गुना तक बढ़ सकते हैं। वहीं कई सेक्टरों में रेट डेढ़ गुना तक बढ़ाने की तैयारी है। कलेक्टर रेट बढ़ने से प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री महंगी होगी, क्योंकि स्टांप ड्यूटी और अन्य शुल्क इन्हीं रेटों के आधार पर तय होते हैं। ऐसे में रियल एस्टेट बाजार और आम लोगों पर इसका सीधा असर पड़ेगा।

संभावना है कि रेट बढ़ाने के प्रस्ताव पर कुछ संगठनों और प्रॉपर्टी मालिकों की ओर से विरोध भी किया जा सकता है।

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