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PM मोदी मेरठ Metro-Rapid रेल का करेंगे उद्घाटन: बच्चों और मजदूरों संग करेंगे सफर, 160Km की रफ्तार से दौड़ेगी Namo Bharat Train

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देश में आधुनिक परिवहन व्यवस्था की दिशा में आज एक ऐतिहासिक कदम उठाया जा रहा है। प्रधानमंत्री Narendra Modi मेरठ में देश की पहली हाईस्पीड नमो भारत रैपिड रेल और मेरठ मेट्रो का उद्घाटन करेंगे। खास बात यह है कि उद्घाटन के बाद पीएम स्कूली बच्चों और मजदूरों के साथ रैपिड रेल में सफर करेंगे, जिससे यह संदेश जाएगा कि यह परियोजना आम जनता के लिए समर्पित है। कार्यक्रम के तहत वह मोहिउद्दीनपुर में एक विशाल जनसभा को भी संबोधित करेंगे। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath पहले ही मेरठ पहुंच चुके हैं और तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं।


160 Kmph की रफ्तार, सफर होगा सुपरफास्ट

नमो भारत रैपिड रेल मेरठ के मोदीपुरम से दिल्ली के सराय काले खां तक चलेगी और कुल 13 स्टेशनों से होकर गुजरेगी। इस 82.15 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर पर ट्रेन की अधिकतम रफ्तार 160 किलोमीटर प्रति घंटा होगी।

प्रोजेक्ट की मुख्य विशेषताएं:

  • दिल्ली से मेरठ की दूरी अब सिर्फ 55 मिनट
  • 2 स्टेशन अंडरग्राउंड, बाकी एलिवेटेड
  • हाईटेक सुरक्षा सिस्टम
  • आरामदायक और वातानुकूलित कोच
  • आधुनिक टिकटिंग और डिजिटल सुविधाएं

यह परियोजना दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में रोजाना यात्रा करने वाले लाखों लोगों के लिए समय और सुविधा दोनों के लिहाज से बड़ी राहत साबित होगी।


20 फरवरी को National Capital Region Transport Corporation (NCRTC) ने बेगमपुल से सराय काले खां के बीच सफल ट्रायल रन किया था। इस दौरान ट्रेन 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली और मेरठ साउथ से सराय काले खां तक 48 मिनट में पहुंची, जबकि वापसी का सफर मात्र 39 मिनट में पूरा हुआ। ट्रायल की सफलता के बाद उद्घाटन की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई थीं।


विकास, निवेश और रोजगार को मिलेगी नई गति

विशेषज्ञों का मानना है कि यह हाईस्पीड कॉरिडोर केवल यात्रा का साधन नहीं, बल्कि क्षेत्रीय विकास का इंजन साबित होगा। इससे मेरठ, गाजियाबाद और दिल्ली के बीच औद्योगिक, शैक्षणिक और व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। बेहतर कनेक्टिविटी से निवेश बढ़ेगा, रोजगार के अवसर सृजित होंगे और शहरीकरण को नई दिशा मिलेगी।

नमो भारत रैपिड रेल के साथ अब मेरठ और दिल्ली के बीच दूरी कम नहीं, बल्कि विकास की रफ्तार ज्यादा मायने रखेगी।

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यमुना की सफाई को लेकर Haryana सरकार गंभीर, बजट सत्र के पहले दिन लिए गए कई अहम फैसले

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हरियाणा की नायब सिंह सैनी सरकार यमुना की सफाई को लेकर बेहद गंभीर नजर आ रही है. सरकार की तरफ से यमुना में सफाई, पानी की गुणवत्ता को बेहतर करने का फैसला लिया है. साथ ही सीएम नायब सिंह सैनी ने प्रदेश की तरक्की के लिए कई अहम फैसले लिए हैं. सीएम ने यमुना की सफाई को लेकर साल 2028 की मार्च तक कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट और 13 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने का निर्णय लिया है. 

साथ ही अकेले यमुना की सफाई के लिए 21 नए ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए जाएंगे. सीएम ने अहम फैसला लेते हुए प्रदेश की सड़कों को चौड़ा करने का संकल्प लिया है. इसके अलावा हरियाणा के शहरों में 650 एसी बसें चलाई जाएंगी. वहीं साल 2029 की जून तक हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरीडोर का निर्माण कार्य पूरा किया जाएगा. 

राज्यपाल ने बजट सत्र के पहले दिन दी जानकारी

हरियाणा के राज्यपाल असीम कुमार घोष ने बजट सत्र के पहले दिन अपने अभिभाषण में यमुना को लेकर सरकार के संकल्प के बारे में विस्तार से जानकारी दी है. राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने अपने अभिभाषण में कहा कि प्रदेश के हर वर्ग का सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित करना ही सच्ची सेवा है. हरियाणा विजन डॉक्यूमेंट 2047 के तहत राज्य को एक ट्रिलियन डॉलर से अधिक की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा गया है. 

सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन (₹3200 प्रतिमाह), महिला सशक्तिकरण, युवाओं के शिक्षा-रोजगार, किसानों की आय वृद्धि और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी है. प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 1.56 लाख से अधिक मकान बनाए गए. राज्यपाल ने सभी विधायकों से राजनीतिक मतभेद भुलाकर हरियाणा के उज्ज्वल भविष्य के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया.

10 शहरों में चलेंगी एसी बसें

राज्य के गुरुग्राम और फरीदाबाद समेत 10 अन्य शहरों में 650 स्टैंडर्ड फ्लोर एसी बसें चलाई जाएंगी. वहीं 11 हजार 607 करोड़ की कीमत से ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर तैयार किया जा रहा है जो राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए गेमचेंजर साबित होने जा रहा है. यह परियोजना जून 2029 तक पूरी होने की उम्मीद है. इसके लिए तेजी से काम किया जा रहा है.

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पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस ने India AI Impact Summit 2026 में हुए शामिल, भविष्य की शिक्षा पर की चर्चा

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राज्य की शैक्षिक संरचना के भविष्य को तकनीकी रूप से और अधिक सक्षम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, पंजाब के शिक्षा मंत्री श्री हरजोत सिंह बैंस के नेतृत्व में स्कूल शिक्षा विभाग का उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल आज भारत मंडपम, नई दिल्ली में इंडिया ए.आई. इम्पैक्ट एक्सपो 2026 में शामिल हुआ।

यहां उन्होंने राज्य के विशाल स्कूली ढांचे के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित विस्तृत संभावनाओं और शिक्षा के अधिक रचनात्मक परिणामों के लिए समाधान तलाशने हेतु विश्व-स्तरीय तकनीकी क्षेत्र के दिग्गजों और केंद्र सरकार के संस्थानों के साथ लगातार रणनीतिक विचार-विमर्श में भाग लिया।

प्रदर्शनी हॉलों के व्यापक दौरे के दौरान, जिसमें उनके साथ स्कूल शिक्षा के सचिव सोनाली गिरि, पी.एस.ई.बी. के चेयरमैन डॉ. अमरपाल सिंह और डी.जी.एस.ई. श्री अरविंद भी मौजूद थे, शिक्षा मंत्री ने गूगल, डेलॉइट, इंटेल, ओपन एआई, एनवीडिया और डेल सहित प्रमुख विश्व तकनीकी कंपनियों के साथ बातचीत की।

उन्होंने पंजाब की शिक्षा प्रणाली में उन्नत एआई तकनीकों को अपनाने पर विशेष ध्यान देते हुए भविष्य की शिक्षा के बारे में विचार-चर्चा की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी तथा शिक्षा मंत्रालय के प्रतिनिधियों से भी बातचीत की और देश की एआई रणनीति, डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे तथा गवर्नेंस मॉडलों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की, जो पंजाब के कक्षाओं के लिए उपयुक्त हो सकते हैं।

शिक्षा मंत्री ने शिक्षा और ए.आई. पारिस्थितिकी तंत्र में अग्रणी कंपनियों, जिनमें वाधवानी एआई, जीएनएएनआई. एआई और बोध एआई शामिल हैं, के साथ विस्तृत विचार-विमर्श भी किया। ये विचार-विमर्श एआई-सक्षम स्कूल शिक्षा एप्लिकेशनों पर केंद्रित थे, जिसमें व्यक्तिगत अनुकूलित शिक्षण (पी.ए.एल.), मूलभूत साक्षरता और गणित शिक्षा (एफएलएन), एआई-सक्षम मूल्यांकन, बहुभाषी शिक्षण उपकरण, शिक्षक सहायता तथा मजबूत शासन और बुनियादी ढांचे की निगरानी के लिए समय-आधारित निगरानी प्रणालियों के विश्लेषण पर चर्चा की गई।

श्री हरजोत सिंह बैंस ने एक्सपो में पंजाब स्टार्टअप पैवेलियन का दौरा किया, जहां उन्होंने पंजाब सरकार के कार्यक्रमों के तहत तैयार किए गए कई विशेष, क्षेत्र-विशेष एआई स्टार्टअप्स के साथ बातचीत की, जो शैक्षिक तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में पंजाब को एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभार रहे हैं।

श्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि यह दौरा पंजाब की आने वाली पीढ़ियों को भविष्य के साधनों से लैस करने में मदद करेगा। एनवीडिया, गूगल और ओपन एआई जैसी वैश्विक कंपनियों के साथ चल रही हमारी चर्चा और हमारे घरेलू स्टार्टअप्स ने हमें एक स्पष्ट भविष्य की दिशा प्रदान की है। हम अब विशेष रूप से व्यक्तिगत अनुकूलित शिक्षण और एआई के माध्यम से फाउंडेशनल लिटरेसी तथा न्यूमरेसी को मजबूत करने पर केंद्रित हैं।

इन तकनीकों को एमईआईटीवाई और शिक्षा मंत्रालय द्वारा साझा किए गए मजबूत नीतिगत ढांचे के साथ जोड़कर, हम ऐसा मॉडल तैयार करेंगे जहां तकनीक हमारे शिक्षकों के लिए एक सार्थक साधन और पंजाब के प्रत्येक विद्यार्थी के लिए एक व्यक्तिगत मार्गदर्शक के रूप में कार्य करेगी।

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हमारे गुरुद्वारे हमारे अस्तित्व का केंद्र हैं, इनका प्रबंधन पारदर्शी होना चाहिए: Kultar Singh Sandhwan

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पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने कहा कि सिख संस्थाएं और गुरुद्वारे कौम की सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक पहचान के प्रतीक हैं और यही इसकी असली शक्ति का स्रोत हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि गुरुद्वारे हमारे अस्तित्व का केंद्र हैं, इसलिए उनका प्रबंधन पूरी पारदर्शिता और ‘सरबत दा भला’ की भावना से होना चाहिए।

एसजीपीसी की ऐतिहासिक भूमिका का जिक्र

संधवां ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की ऐतिहासिक भूमिका का हवाला देते हुए इसे एक सम्मानित संस्था बताया। उन्होंने कहा कि एक सदी पहले इसी संस्था ने सामूहिक पंथिक शक्ति के बल पर ताकतवर ब्रिटिश साम्राज्य को झुकने पर मजबूर किया और गुरुद्वारों को आजाद करवाया।

उन्होंने कहा कि उस समय न तो कोई राजनीतिक ताकत थी और न ही आर्थिक बल, फिर भी गुरु की कृपा और विश्वास के साथ पारदर्शी ढंग से यह संघर्ष सफल हुआ।

सवालों को गंभीरता से लेने की अपील

स्पीकर ने कहा कि जब भी शिरोमणि कमेटी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते हैं, तो उन्हें गंभीरता से लिया जाना चाहिए। यह कोई सियासी कुश्ती नहीं, बल्कि कौम की पहचान और सम्मान का प्रश्न है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा किसी खास परिवार के खिलाफ नहीं, बल्कि एक पारदर्शी और जवाबदेह प्रबंधन प्रणाली सुनिश्चित करने से जुड़ा है।

आलोचनाओं को निजी हमलों में न बदलें

संधवां ने अपील की कि सम्मानित धार्मिक शख्सियतों द्वारा उठाई गई चिंताओं को किसी व्यक्ति या परिवार को बचाने के लिए खारिज न किया जाए और न ही इन्हें निजी हमलों में बदला जाए।

उन्होंने कहा कि यह संघर्ष किसी परिवार के खिलाफ नहीं, बल्कि पंथ के धार्मिक, राजनीतिक और सामाजिक भविष्य के लिए है।

एकता और सुधार का आह्वान

एकता की अपील करते हुए उन्होंने कौम से आग्रह किया कि इस मुद्दे को टकराव के बजाय सुधार की दिशा में ले जाया जाए। उन्होंने अरदास की कि ज्ञानी रघबीर सिंह और भाई रणजीत सिंह द्वारा जताई गई चिंताओं पर सुधार की भावना से गंभीरता से विचार किया जाए।

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