Delhi
Pakistan-Saudi Arabia Defense Deal: ‘अगर किसी पर हमला, तो दोनों का साथ’
पाकिस्तान और सऊदी अरब ने हाल ही में एक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए हैं। इस डील का सबसे अहम हिस्सा यह है कि “अगर किसी पर हमला होगा, तो इसे दोनों देशों पर हमला माना जाएगा।” यानी अगर पाकिस्तान पर हमला होगा, तो सऊदी उसका साथ देगा और अगर सऊदी पर हमला होगा, तो पाकिस्तान साथ देगा।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने रियाद में सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से मिलकर इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। दोनों देशों ने इसे अपनी लगभग 8 दशक पुरानी ऐतिहासिक और रणनीतिक दोस्ती को और मजबूत करने वाला कदम बताया। डील में इस्लामिक भाईचारा और साझी सुरक्षा हित को भी मुख्य आधार बनाया गया है।
भारत की प्रतिक्रिया
भारत ने इस डील पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि यह एक पुराने समझौते को औपचारिक रूप देने जैसा कदम है। विदेश मंत्रालय ने कहा:
“हम इस डील के नतीजों और इसके प्रभाव को राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के दृष्टिकोण से समझेंगे। भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है।”
पाकिस्तान के लिए डील का मतलब
पाकिस्तान के लिए यह डील भारत के खतरे को देखते हुए की गई है। हाल ही में 22 अप्रैल 2025 को हुआ पाहलगाम आतंकी हमला और उसके जवाब में भारत का ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पाकिस्तान को डराने वाला साबित हुआ। ऑपरेशन में भारत ने पाकिस्तान और उसके आतंकियों के खिलाफ सटीक कार्रवाई की, जिससे पाकिस्तान को अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए मजबूत सहयोगी की जरूरत महसूस हुई।
इस डील से पाकिस्तान का संदेश साफ है: अगर भारत ने कभी हमला किया, तो उसके पास सऊदी अरब का समर्थन रहेगा। पाकिस्तान परमाणु संपन्न देश होने के नाते यह कदम अपनी सुरक्षा रणनीति को और मजबूत करने के लिए भी उठा रहा है।
सऊदी अरब की मजबूरी और रणनीति
सऊदी अरब के लिए यह डील केवल पाकिस्तान की वजह से नहीं, बल्कि कुछ बड़े कारणों और मजबूरी के चलते भी है:
- इजरायल का खतरा: हाल ही में इजरायल ने कतर की राजधानी दोहा में हमास नेताओं पर हमला किया, जिससे सऊदी की सुरक्षा चिंता बढ़ी।
- ईरान के साथ तनाव: सऊदी और ईरान के बीच लंबे समय से तल्ख रिश्ते हैं।
- अमेरिका पर भरोसा कम: सऊदी अब अमेरिका की सुरक्षा गारंटी पर पूरी तरह भरोसा नहीं करता। अमेरिका चाहता है कि सऊदी अरब इजरायल के साथ अपने रिश्ते सामान्य करे, लेकिन सऊदी इसे पूरी तरह नहीं मानता।
- पाकिस्तान का परमाणु हथियार: पाकिस्तान के साथ डील होने से सऊदी की सुरक्षा और मजबूत हो जाती है।
- इस्लामिक देशों को एकजुट करना: सऊदी इस डील के जरिए इस्लामिक देशों में एकता का संदेश भी देना चाहता है।
सऊदी क्राउन प्रिंस ने पहले भी गाजा युद्ध पर ‘नरसंहार’ का शब्द इस्तेमाल किया था और इज़राइल की आलोचना की थी। इस डील से सऊदी अरब अपनी क्षेत्रीय सुरक्षा और रणनीतिक स्थिति को मजबूत करना चाहता है।
जियो-पॉलिटिकल असर
यह समझौता मिडिल ईस्ट और साउथ एशिया के जियो-पॉलिटिक्स में हलचल पैदा कर रहा है। भारत-पाकिस्तान के हालिया तनाव और Operation Sindoor के बाद यह डील क्षेत्रीय सुरक्षा और रणनीति के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण है।
सऊदी अरब ने इस कदम से अमेरिका पर अपनी सुरक्षा निर्भरता को कम करने और क्षेत्र में अपनी स्वतंत्र भूमिका सुनिश्चित करने की कोशिश की है।
पाकिस्तान-सऊदी अरब डिफेंस डील सिर्फ एक सैन्य समझौता नहीं, बल्कि राजनीतिक, रणनीतिक और क्षेत्रीय सुरक्षा की मजबूरी का नतीजा है। पाकिस्तान अपनी सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहता है, जबकि सऊदी अरब अमेरिका पर भरोसा कम होने के बाद अपनी सुरक्षा और इस्लामिक दुनिया में नेतृत्व मजबूत करना चाहता है।
इस डील से साफ है कि अगर भविष्य में कोई बड़ा संकट आया, तो दोनों देशों का साथ मिलेगा, और यह South Asia और Middle East के लिए एक नया रणनीतिक परिदृश्य तैयार कर रहा है।
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हलवा सेरेमनी ‘; यूनियन बजट 2026-27 की तैयारियां अंतिम दौर में वित्त मंत्री ने ‘हलवा सेरेमनी’ के साथ बजट को दिया अंतिम रूप 1 फरवरी को खुलेगा पिटारा |
यूनियन बजट 2026-27: नॉर्थ ब्लॉक में अंतिम चरण की तैयारी, हलवा सेरेमनी के साथ शुरू हुआ ‘लॉक-इन’ पीरियड
नई दिल्ली:
नॉर्थ ब्लॉक में यूनियन बजट 2026-27 की तैयारियां अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। इस मौके पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पारंपरिक हलवा सेरेमनी के जरिए बजट टीम के परिश्रम और समर्पण को सम्मानित किया। इसके साथ ही बजट से जुड़ी गोपनीय प्रक्रिया यानी ‘लॉक-इन पीरियड’ की आधिकारिक शुरुआत हो गई है।
क्या है लॉक-इन पीरियड?
लॉक-इन पीरियड के दौरान बजट से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी अगले कुछ दिनों तक नॉर्थ ब्लॉक परिसर में ही रहेंगे। इस अवधि में वे पूरी तरह बाहरी दुनिया से कटे रहते हैं, ताकि बजट की गोपनीयता बनी रहे।
वित्त मंत्री ने किया बजट प्रेस का निरीक्षण
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्वयं नॉर्थ ब्लॉक स्थित बजट प्रेस का दौरा किया। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था और बजट दस्तावेजों की छपाई से जुड़ी तैयारियों का बारीकी से जायजा लिया और यह सुनिश्चित किया कि सभी इंतजाम पूरी तरह दुरुस्त हों।
डिजिटल इंडिया को मिलेगा नया बल
इस बार का यूनियन बजट ‘डिजिटल इंडिया’ मिशन को और मजबूती देने वाला माना जा रहा है। 1 फरवरी, 2026 को संसद में पेश होने वाला यह बजट आम लोगों तक ‘यूनियन बजट मोबाइल ऐप’ के जरिए तुरंत पहुंच जाएगा।
मोबाइल ऐप पर मिलेगा पूरा बजट
बजट भाषण समाप्त होते ही सभी दस्तावेज डिजिटल पोर्टल और मोबाइल ऐप पर उपलब्ध करा दिए जाएंगे।
- बजट हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध होगा
- आम नागरिक, सांसद और विशेषज्ञ एक क्लिक में बजट से जुड़े सभी आंकड़े देख सकेंगे
- भारी-भरकम फाइलों की जरूरत नहीं होगी
केवल आंकड़े नहीं, अनुशासन और समर्पण की कहानी
यूनियन बजट सिर्फ आय-व्यय का ब्योरा नहीं होता, बल्कि यह उन अधिकारियों की मेहनत, अनुशासन और गोपनीयता का प्रतीक भी है, जो महीनों तक पर्दे के पीछे रहकर देश की आर्थिक दिशा तय करने में जुटे रहते हैं।
हलवे की मिठास के साथ अब पूरी बजट टीम उस दिन का इंतजार कर रही है, जब देश का नया वित्तीय खाका जनता के सामने पेश किया जाएगा। यह बजट न सिर्फ आर्थिक नीतियों की दिशा तय करेगा, बल्कि डिजिटल इंडिया के सपने को साकार करने की दिशा में एक अहम कदम साबित होगा।
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जम्मू-कश्मीर ; की 26 साल की CRPF अधिकारी सिमरन बाला आज रिपब्लिक डे परेड में पुरुष सदस्यीय टुकड़ी का कमान संभाल रही हैं।
गणतंत्र दिवस परेड में इतिहास रचेंगी सिमरन बाला
CRPF की 26 वर्षीय अधिकारी पहली बार करेंगी 140 से अधिक पुरुष जवानों का नेतृत्व
नई दिल्ली:
आज दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित गणतंत्र दिवस परेड में जम्मू-कश्मीर की 26 वर्षीय सिमरन बाला इतिहास रचने जा रही हैं। वह केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की सहायक कमांडेंट के रूप में 140 से अधिक पुरुष जवानों की टुकड़ी का नेतृत्व करेंगी। यह पहला मौका है जब किसी महिला अधिकारी को गणतंत्र दिवस परेड में इतनी बड़ी पुरुष टुकड़ी की कमान सौंपी गई है।
कौन हैं सिमरन बाला?
सिमरन बाला जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले की रहने वाली हैं। वह अपने जिले से CRPF में अधिकारी बनने वाली पहली महिला हैं। CRPF देश का सबसे बड़ा पैरामिलिट्री बल है, जिसमें लगभग 3.25 लाख जवान कार्यरत हैं और यह भारत की आंतरिक सुरक्षा की रीढ़ माना जाता है।
CRPF मुख्य रूप से तीन अहम क्षेत्रों में काम करता है:
- नक्सल विरोधी अभियान
- जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी कार्रवाई
- उत्तर-पूर्वी राज्यों में उग्रवाद विरोधी ऑपरेशन
शिक्षा और करियर
- स्नातक: राजनीति शास्त्र, सरकारी महिला कॉलेज, गांधी नगर (जम्मू)
- UPSC CAPF परीक्षा: वर्ष 2025 में उत्तीर्ण
- बल: केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF)
- पहली पोस्टिंग: छत्तीसगढ़ की ‘बस्तरिया’ बटालियन
छत्तीसगढ़ में तैनाती के दौरान सिमरन बाला को नक्सल विरोधी अभियानों में सक्रिय रूप से काम करने का अवसर मिला।
प्रशिक्षण में उत्कृष्ट प्रदर्शन
CRPF अकादमी, गुरुग्राम में प्रशिक्षण के दौरान सिमरन बाला ने:
- उत्कृष्ट प्रशिक्षण प्रदर्शन
- प्रभावशाली सार्वजनिक भाषण
के लिए विशेष पुरस्कार भी प्राप्त किए।
गणतंत्र दिवस परेड में महिला शक्ति का प्रदर्शन
इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड में महिलाओं की भागीदारी और भी खास होगी।
CRPF और सशस्त्र सीमा बल (SSB) की संयुक्त महिला टीम ‘डेयर डेविल्स’ के रूप में रॉयल एनफील्ड बुलेट मोटरसाइकिलों पर रोमांचक करतब दिखाएगी।
उल्लेखनीय है कि इन दोनों बलों की महिला जवानों ने 2020 की गणतंत्र दिवस परेड में भी यह साहसिक प्रदर्शन किया था।
प्रेरणा का प्रतीक
सिमरन बाला की यह उपलब्धि न सिर्फ जम्मू-कश्मीर बल्कि पूरे देश की युवा महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनका नेतृत्व, समर्पण और साहस यह साबित करता है कि भारतीय सुरक्षा बलों में महिलाएं किसी भी भूमिका में पीछे नहीं हैं।
Blog
77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को राष्ट्रपति ने अशोक चक्र से सम्मानित किया,यह सम्मान के अवसर पर कड़ी सुरक्षा और भव्य समारोहों के बीच औपचारिक परेड के दौरान प्रदान किया गया।
77वें गणतंत्र दिवस पर ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र से किया गया सम्मानित
नई दिल्ली:
आज देश 77वां गणतंत्र दिवस पूरे उत्साह और गर्व के साथ मना रहा है। इस अवसर पर कर्तव्य पथ पर भव्य परेड का आयोजन किया गया, जहां देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वीरता और असाधारण साहस के लिए कई जांबाजों को सम्मानित किया।
इसी क्रम में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की यात्रा करने वाले पहले भारतीय ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को राष्ट्रपति ने देश के सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार अशोक चक्र से सम्मानित किया।
कर्तव्य पथ पर हुआ सम्मान समारोह
77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और भव्य समारोहों के बीच औपचारिक परेड का आयोजन किया गया। इस दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को असाधारण साहस और राष्ट्र के प्रति उनके योगदान के लिए अशोक चक्र प्रदान किया।
अंतरिक्ष में भारत का गौरव
ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला पिछले वर्ष जून में एक्सिओम मिशन-4 (Ax-4) के तहत अंतरिक्ष गए थे। इस मिशन के साथ वे:
- अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय
- और ISS का दौरा करने वाले पहले भारतीय बने
उनकी 18 दिनों की अंतरिक्ष यात्रा, 41 वर्ष पहले राकेश शर्मा की ऐतिहासिक उड़ान के बाद भारत के मानव अंतरिक्ष अभियानों में एक नई उपलब्धि मानी जा रही है।
अनुभवी फाइटर पायलट
भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला एक अनुभवी फाइटर पायलट भी हैं। उनके पास:
- Su-30 MKI
- MiG-21
- MiG-29
- Jaguar
- Hawk
- Dornier
- An-32
जैसे विमानों में 2,000 घंटे से अधिक उड़ान अनुभव है।
एक्सिओम-4 मिशन में अहम भूमिका
Ax-4 मिशन अमेरिका की निजी कंपनी Axiom Space द्वारा संचालित किया गया था, जिसमें:
- NASA
- यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA)
- ISRO
भी शामिल थे। मिशन के दौरान शुभांशु शुक्ला ने पायलट के रूप में कार्य करते हुए कई जटिल वैज्ञानिक प्रयोगों में महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिसकी वैश्विक स्तर पर सराहना हुई।
देश के लिए प्रेरणा
सफल अंतरिक्ष मिशन के बाद ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला देश-विदेश में चर्चा का विषय बने और आज उनका अशोक चक्र से सम्मानित होना हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण है।
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