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Navjot Singh Sidhu ने पत्नी की सेहत में सुधार का जश्न चाय और कचौरी के साथ मनाया

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कांग्रेस नेता और पूर्व क्रिकेटर Navjot Singh Sidhu ने अपनी पत्नी डॉ. नवजोत कौर के कैंसर से स्वस्थ होने की खुशी में अमृतसर के क्वींस रोड स्थित मशहूर ज्ञानी टी स्टॉल पर चाय और कचौरी का लुत्फ उठाया। उनका यह खास पल सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

सिद्धू ने साझा की खुशी

डॉ. नवजोत कौर, जो हाल ही में कैंसर से उबरी हैं, के साथ सिद्धू ने रविवार को अमृतसर का दौरा किया। इस मौके पर उन्होंने अपनी खुशी जाहिर करते हुए सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया। वीडियो में सिद्धू और उनकी पत्नी घर से निकलते और गाना गाते नजर आए। बाद में, दोनों ज्ञानी टी स्टॉल पहुंचे, जहां उन्होंने स्थानीय लोगों के साथ समय बिताया।

सिद्धू ने वहां मौजूद लोगों को बताया कि उनकी पत्नी अब पूरी तरह स्वस्थ हैं। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि वे चार महीने बाद चाय और कचौरी का आनंद ले रहे हैं। बाजार में घूमते हुए उन्होंने लोगों को भी चाय-कचौरी खाने का न्योता दिया।

आयुर्वेदिक दावों पर यू-टर्न

सिद्धू ने कुछ समय पहले दावा किया था कि उनकी पत्नी का कैंसर आयुर्वेदिक उपचार से ठीक हुआ है। हालांकि, हाल ही में उन्होंने इस दावे से पीछे हटते हुए कहा कि डॉक्टरों का इलाज सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि वे लोगों को कैंसर से लड़ने के लिए प्रेरित करेंगे और इसके लिए किसी से एक पैसा भी नहीं लेंगे।

डॉक्टरों ने उठाए सवाल

इससे पहले, सिद्धू के आयुर्वेदिक दावों ने चिकित्सा जगत में विवाद खड़ा कर दिया था। टाटा मेमोरियल अस्पताल के नेतृत्व में 262 ऑन्कोलॉजिस्ट ने इन दावों पर सवाल उठाए। अस्पताल के निदेशक, डॉ. सीएस प्रमेश ने एक बयान में कहा कि सिद्धू द्वारा सुझाए गए घरेलू उपचार, जैसे हल्दी, नीम, और डेयरी उत्पादों का सेवन, कैंसर ठीक करने के लिए वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं हैं।

जनता से संवाद और मोटिवेशनल प्लान

सिद्धू ने अपनी पत्नी की बीमारी के दौरान की गई देखभाल और आहार संबंधी बदलावों के अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि वह लोगों को मोटिवेशनल स्पीच देकर जागरूक करेंगे। सिद्धू का कहना है कि मोटिवेशनल स्पीकिंग के लिए पैसा मिलता है, लेकिन वह इस कार्य को नि:शुल्क करेंगे।

पत्नी के लिए गाया गाना

ज्ञानी टी स्टॉल पर सिद्धू ने अपनी पत्नी के लिए “चांद सा रोशन चेहरा…” गाना गाया, जिसे लोगों ने खूब सराहा। यह खुशी और उमंग से भरा पल सिद्धू दंपत्ति के लिए खास था।

यह घटनाक्रम न केवल नवजोत कौर की दृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से लड़ाई में पेशेवर चिकित्सा की अहम भूमिका है।

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धनौला पुलिस की बड़ी कार्रवाई: नकली पुलिस बनकर ठगी करने वाले 3 आरोपी गिरफ्तार

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पंजाब के बरनाला जिले में धनौला पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए नकली पुलिस कर्मी बनकर लोगों को ठगने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से पुलिस की वर्दी और एक इनोवा कार भी बरामद की गई है।

जानकारी के अनुसार, पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि कुछ लोग पुलिस की वर्दी पहनकर भोले-भाले लोगों को नौकरी दिलाने का झांसा देकर ठगी कर रहे हैं। इस सूचना के आधार पर धनौला पुलिस ने नाका लगाकर चेकिंग शुरू की।

चेकिंग के दौरान पुलिस ने एक इनोवा कार को रोका, जिसमें तीन व्यक्ति पुलिस की वर्दी में बैठे हुए थे। शक होने पर पूछताछ की गई, जिसके बाद उन्हें मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान संदीप कुमार (चक्क महंता वाला), अजय (मुनके उताड़) और गुरप्रीत सिंह (मुनके उताड़) के रूप में हुई है। तीनों आरोपी फिरोजपुर जिले के रहने वाले हैं।

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ थाना धनौला में विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। उन्हें अदालत में पेश कर रिमांड हासिल किया गया है और आगे की जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान इस गिरोह से जुड़े और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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राजनेताओं ने अपने नेताओं के नाम पर भव्य स्मारक बनाए, लेकिन शहीद-ए-आज़म भगत सिंह को नजरअंदाज किया: CM भगवंत मान

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शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के शहादत दिवस पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि यह दिन देश के लिए दी गई उनकी महान कुर्बानी को याद करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि शहीदों के आदर्शों पर चलकर ही एक मजबूत और खुशहाल पंजाब का निर्माण किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल श्रद्धांजलि देने का दिन नहीं, बल्कि उनके विचारों और अन्याय के खिलाफ संघर्ष की भावना को आगे बढ़ाने का संकल्प लेने का दिन है। उन्होंने शहीदों को भारत रत्न न दिए जाने पर भी सवाल उठाया और कहा कि अगर देश की बागडोर आजादी के शुरुआती वर्षों में ऐसे नौजवानों के हाथ में होती, तो भारत की तस्वीर अलग होती।

उन्होंने कहा कि शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की शहादत हमें अन्याय और अत्याचार के खिलाफ डटकर खड़े होने की प्रेरणा देती है। समाज से बुराइयों को खत्म करना हर नागरिक का कर्तव्य है।

शिक्षा पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीबी और सामाजिक बुराइयों को खत्म करने का सबसे बड़ा हथियार शिक्षा है। पंजाब सरकार इस दिशा में लगातार काम कर रही है और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीदों ने सत्ता या लाभ के लिए नहीं, बल्कि देश की आजादी के लिए अपनी जान न्यौछावर की। उनकी कुर्बानी के कारण ही आज हमें वोट देने का अधिकार मिला है, इसलिए हर नागरिक को अपने मताधिकार का सही उपयोग करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि पंजाब ने देश की आजादी और एकता के लिए सबसे अधिक कुर्बानियां दी हैं। देश की कुल आबादी का केवल 2% होने के बावजूद, आजादी की लड़ाई में 80% शहीद पंजाब से थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार शहीदों की विरासत को संभालने और उनके सपनों का पंजाब बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि हुसैनीवाला में 24.99 करोड़ रुपये की लागत से ‘विरासत प्रोजेक्ट’ शुरू किया जा रहा है, जिससे आने वाली पीढ़ियां शहीदों के इतिहास और बलिदान से प्रेरणा ले सकेंगी।

उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे शहीदों के रास्ते पर चलें और देश की सेवा में अपना योगदान दें। मुख्यमंत्री ने कहा कि वोट की ताकत सबसे बड़ी ताकत है और सही नेतृत्व चुनकर ही देश में असली बदलाव लाया जा सकता है।

अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार शहीद भगत सिंह के सपनों को साकार करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी और राज्य को तरक्की और खुशहाली की राह पर आगे बढ़ाती रहेगी।

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नशे के खिलाफ मुहिम में नया कदम: इलाज और रोजगार से युवाओं को मिल रहा दूसरा मौका

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पंजाब में नशों के खिलाफ जारी जंग अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। भगवंत मान सरकार की ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ मुहिम अब केवल कार्रवाई तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसे पुनर्वास (rehabilitation) और समाज में दोबारा जोड़ने (reintegration) तक बढ़ा दिया गया है। सरकार अब नशा तस्करी के नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई के साथ-साथ प्रभावित लोगों को इलाज, काउंसलिंग और रोजगार के अवसर भी उपलब्ध करवा रही है, ताकि वे एक नई और बेहतर जिंदगी शुरू कर सकें।

इस बदलाव की एक मिसाल जुगराज सिंह (बदला हुआ नाम) है। कॉलेज के दिनों में वह अपने साथियों के प्रभाव में आकर नशे की लत का शिकार हो गया था। शुरुआत में केवल जिज्ञासा के तौर पर शुरू हुई यह आदत जल्द ही उसकी जिंदगी पर हावी हो गई। लेकिन अब सरकारी सहायता और काउंसलिंग के जरिए उसने खुद को संभाला है और अपनी जिंदगी को नई दिशा दी है।

जुगराज सिंह का कहना है कि अब उसका पूरा ध्यान अपनी पढ़ाई पूरी करने और अपने भविष्य को बेहतर बनाने पर है। उसने बताया कि वह अब पहले से ज्यादा आत्मविश्वासी है और उसे लगता है कि वह एक बेहतर इंसान बन गया है।

सरकार द्वारा चलाए जा रहे पुनर्वास कार्यक्रमों के तहत ऐसे युवाओं को मानसिक समर्थन, इलाज और स्किल डेवलपमेंट की सुविधा दी जा रही है। इससे वे न केवल नशे की लत से बाहर निकल रहे हैं, बल्कि समाज में दोबारा सम्मान के साथ अपनी पहचान भी बना रहे हैं।

पंजाब सरकार का मानना है कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल सख्त कार्रवाई से नहीं जीती जा सकती, बल्कि इसके लिए प्रभावित लोगों को दूसरा मौका देना भी उतना ही जरूरी है। यही कारण है कि अब इस मुहिम में मानवीय दृष्टिकोण को भी शामिल किया गया है।

इस पहल के जरिए सरकार युवाओं को एक नई शुरुआत का मौका दे रही है, जिससे वे अपने जीवन को सही दिशा में ले जाकर समाज के लिए सकारात्मक योगदान दे सकें।

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