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India के 53वें Chief Justice बने Justice Surya Kant, राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने दिलाई शपथ
जस्टिस सूर्या कांत ने आज (सोमवार) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साम्हणे राष्ट्रपति भवन में शपथ ली और भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में पद ग्रहण किया।
उनकी नियुक्ति उससे पहले ही 30 अक्टूबर को घोषणा की गई थी। वे वर्तमान CJI B. R. गवई की जगह ले रहे हैं, जो 23 नवंबर, 2025 को सेवानिवृत्त हुए।
उनका प्रोफाइल — सरल भाषा में
- जन्म और शिक्षा: जस्टिस कांत का जन्म 10 फरवरी, 1962 को हरियाणा के हिसार जिले में हुआ था।
- कानूनी करियर: उन्होंने 1984 में लॉ की पढ़ाई पूरी की और उसी वर्ष हिसार जिला न्यायालय में वकील के रूप में काम करना शुरू किया। बाद में वह पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट में प्रैक्टिस करने गए।
- उच्च न्यायालय अनुभव: उन्हें हरियाणा की वकालत में उल्लेखनीय अनुभव के बाद हरियाणा का एडवोकेट जनरल भी बनाया गया था। इसके बाद वे पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के जज बने और फिर हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) बने।
- शिक्षा आगे: उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से लॉ में मास्टर डिग्री भी ली और کلاس में टॉप किया (first class first)।
- उच्चतम अदालत: मई 2019 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया गया था।
सीजेआई के रूप में उनका कार्यकाल
- उन्हें लगभग 15 महीने (लगभग डेढ़ साल) के लिए नियुक्त किया गया है।
- वे 9 फरवरी, 2027 को रिटायर होंगे, क्योंकि उस दिन उनकी उम्र 65 साल पूरी हो जाएगी।
महत्वपूर्ण फैसले और उनका दृष्टिकोण
जस्टिस सूर्या कांत सुप्रीम कोर्ट में कई बड़े और संवेदनशील मामलों में सक्रिय रहे हैं। उनके जजमेंट्स ने लोगों के अधिकार, लोकतंत्र और संविधान की अहमियत को दर्शाया है। कुछ मुख्य मुद्दे ये हैं:
- Article 370: वे उस बेंच का हिस्सा रहे जिसने जम्मू-और-कश्मीर की स्पेशल स्टेटस (अनुच्छेद 370) के हटाने को संविधान के दायरे में माना।
- सेडिशन (राजद्रोह) कानून: वे उस बेंच में थे, जिसने ब्रिटिश जमाने के “सेडिशन लॉ” (IPC की धारा 124A) पर कहा कि नए FIR दर्ज न किए जाएं, जब तक कानून की समीक्षा न हो।
- पेगासस स्पाइवेयर केस: उन्होंने कहा कि “नए सुरक्षा नाम पर राज्य को पूरी छूट नहीं मिल सकती” — कोर्ट ने साइबर एक्सपर्ट्स की एक कमिटी बनाने का निर्देश दिया।
- मतदाता सूची (Electoral Rolls): उन्होंने चुनाव आयोग से कहा कि बिहार में ड्राफ्ट मतदाता सूची से 65 लाख वोटर्स को क्यों हटाया गया, इसकी जानकारी देनी चाहिए।
- जेंडर और समानता: उन्होंने एक महिला सरपंच को वापस पद पर लाने का फैसला दिया और कोर्ट बार एसोसिएशनों (SCBA समेत) में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने की मांग की।
- सेनानियों की पेंशन (One Rank, One Pension): उन्होंने इस स्कीम को संवैधानिक मान्यता दी।
- राजनैतिक शक्ति-संतुलन (Governor और राष्ट्रपति से जुड़ा): वे उस संविधान बेंच में शामिल थे, जिसने गर्वनर और राष्ट्रपति के अधिकारों की सीमा पर विचार किया — यह फैसला पूरे देश में राज्यों और केंद्र के बीच संतुलन बनाए रखने के लिहाज से अहम हो सकता है।
शपथ ग्रहण समारोह और राजनीतिक महत्व
- शपथ ग्रहण में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें पद-शपथ दिलाई।
- इस समारोह में कांग्रेस की बड़ी शख्सियतें भी मौजूद रहीं — जैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला आदि।
- उनकी नियुक्ति “सीन्योरिटी” के नियमों का पालन करते हुए हुई है — यानि सुप्रीम कोर्ट का सबसे वरिष्ठ और योग्य जज उन्हें आगे लाया गया है।
उनका व्यक्तित्व और दर्शन
- जस्टिस कांत को इंसानियत, ईमानदारी और संवैधानिक मूल्यों पर भरोसा करने वाला जज माना जाता है।
- उन्होंने पहले कहा है कि वकीलों को “हमें हमेशा सीखते रहना चाहिए” — उनका मानना है कि कानून सिर्फ एक पेशा नहीं है, बल्कि कमजोरों की आवाज़ उठाने का ज़रिया है।
- इसके अलावा, वे न्यायपालिका में सुधार चाहते हैं — जैसे डिजिटल प्रक्रिया, पारदर्शिता और बुनियादी स्तर पर अधिक सुगमता (जजिंग इनफ्रास्ट्रक्चर) लाना।
जस्टिस सूर्या कांत की नियुक्ति भारत के न्यायिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। उनके नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट को अगले डेढ़ सालों में संवैधानिक और सामाजिक मामलों में निर्णायक भूमिका निभानी पड़ सकती है। उनका अनुभव, संतुलित दृष्टिकोण और संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता यह संकेत देती है कि वे न्यायपालिका को मजबूत और विश्वसनीय बनाए रखने की दिशा में काम करेंगे।
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नशों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, सीमा पार Drug Module का भंडाफोड़, करोड़ों की हेरोइन समेत 3 गिरफ्तार!
पंजाब में नशों के खिलाफ चल रही सख्त मुहिम के तहत बड़ी सफलता हासिल करते हुए एएनटीएफ (ANTF) और बीएसएफ (BSF) ने संयुक्त ऑपरेशन में एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ अभियान के तहत की गई इस कार्रवाई में सीमा पार से चल रहे नेटवर्क को बेनकाब किया गया।
इस ऑपरेशन के दौरान तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनकी पहचान जगजीत सिंह, मनप्रीत सिंह और रोशन सिंह के रूप में हुई है। तीनों आरोपी अमृतसर जिले के रहने वाले हैं। पुलिस ने इनके कब्जे से 24.5 किलोग्राम हेरोइन, करीब 21 लाख रुपये की ड्रग मनी और एक ड्रोन बरामद किया है, जिसका इस्तेमाल तस्करी के लिए किया जा रहा था।
पुलिस जांच में सामने आया है कि ये आरोपी पाकिस्तान स्थित तस्करों के सीधे संपर्क में थे और ड्रोन के जरिए नशीले पदार्थों की सप्लाई कर रहे थे। इस पूरे नेटवर्क के जरिए ड्रग्स को भारत में लाकर आगे सप्लाई किया जाता था।
इस संबंध में जानकारी देते हुए Gaurav Yadav ने बताया कि मामले की गहन जांच जारी है और आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब पुलिस राज्य को नशा मुक्त बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और ऐसे नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।
Chandigarh
पंजाब में Universal Healthcare Model बना मिसाल, हर परिवार को बिना शर्त 10 लाख तक कैशलेस इलाज की सुविधा!
पंजाब सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए ऐसा मॉडल पेश किया है, जो देश की पारंपरिक योजनाओं से अलग और ज्यादा व्यापक माना जा रहा है। मुख्यमंत्री Bhagwant Mann के नेतृत्व में शुरू की गई मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत अब राज्य के हर परिवार को बिना किसी शर्त के 10 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। बढ़ते इलाज के खर्च के बीच यह योजना लाखों परिवारों के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आई है।
जहां केंद्र सरकार की Ayushman Bharat योजना सीमित पात्रता और 5 लाख रुपये तक के कवर तक ही सीमित है, वहीं पंजाब का यह मॉडल हर निवासी को कवर करता है, चाहे उसकी आय कुछ भी हो। यही कारण है कि इसे Universal Healthcare Model के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें इलाज का अधिकार किसी सूची या शर्त पर नहीं बल्कि जरूरत के आधार पर तय होता है।
वित्तीय दृष्टि से भी पंजाब का यह मॉडल काफी मजबूत माना जा रहा है। केंद्र सरकार जहां 140 करोड़ आबादी के लिए 9,500 करोड़ रुपये का बजट रखती है, वहीं पंजाब सरकार करीब 3 करोड़ लोगों के लिए 2,000 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। इस हिसाब से प्रति व्यक्ति निवेश कई गुना ज्यादा है, जो राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को साफ तौर पर दर्शाता है।
इस योजना के तहत करीब 65 लाख परिवारों को लाभ मिलने की उम्मीद है। मरीज 2,300 से अधिक इलाज पैकेजों के जरिए दिल की बीमारी, कैंसर, किडनी से जुड़ी समस्याएं, एक्सीडेंट केस और अन्य गंभीर बीमारियों का मुफ्त इलाज करवा सकते हैं। इसके लिए 900 से अधिक अस्पतालों का नेटवर्क तैयार किया गया है, जहां कैशलेस सुविधा उपलब्ध है।
योजना का एक बड़ा फायदा इसकी आसान प्रक्रिया भी है। जहां अन्य योजनाओं में पात्रता साबित करने के लिए कई दस्तावेजों की जरूरत होती है, वहीं पंजाब में लोग सिर्फ आधार कार्ड या वोटर आईडी के जरिए आसानी से रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। इसके लिए सेवा केंद्रों और Common Service Centers के साथ-साथ ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी दी गई है। साथ ही, गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करने और रजिस्ट्रेशन कराने के लिए विशेष अभियान भी चलाए जा रहे हैं।
इस योजना का असर जमीनी स्तर पर भी देखने को मिल रहा है। कई ऐसे परिवार, जो पहले इलाज के खर्च के कारण परेशान रहते थे, अब बिना किसी आर्थिक दबाव के इलाज करवा पा रहे हैं। यह मॉडल न सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं को आसान बना रहा है, बल्कि लोगों के जीवन स्तर को भी बेहतर करने में मदद कर रहा है।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि यह योजना सिर्फ एक सरकारी स्कीम नहीं, बल्कि एक सोच में बदलाव है, जहां स्वास्थ्य सेवा को अधिकार के रूप में देखा जा रहा है। उनका कहना है कि पंजाब सरकार का उद्देश्य हर व्यक्ति तक बेहतर और सस्ती स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाना है, ताकि कोई भी व्यक्ति इलाज के अभाव में परेशान न हो।
कुल मिलाकर, पंजाब का यह यूनिवर्सल हेल्थकेयर मॉडल देश के लिए एक नई दिशा दिखाता है, जहां स्वास्थ्य सेवाएं सीमित नहीं बल्कि सभी के लिए समान रूप से उपलब्ध कराई जा रही हैं।
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O.T.S स्कीम को मिला जोरदार समर्थन: 111.16 करोड़ की वसूली, 31 मार्च के बाद सख्त कार्रवाई की चेतावनी!
पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि वैट बकाये के लिए शुरू की गई एकमुश्त निपटान (OTS) स्कीम को व्यापारियों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला है। इस योजना के तहत अब तक करीब 7,845 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें कुल 298.39 करोड़ रुपये के बकाये शामिल हैं। इनमें से सरकार 111.16 करोड़ रुपये की वसूली भी कर चुकी है।
वित्त मंत्री ने कहा कि यह स्कीम पुराने टैक्स बोझ को खत्म करने और राज्य के राजस्व को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने बताया कि लुधियाना, अमृतसर, जालंधर, पटियाला और रोपड़ जैसे प्रमुख जिलों से इस योजना को अच्छा समर्थन मिला है, जो यह दर्शाता है कि कारोबारियों में इसके प्रति जागरूकता बढ़ रही है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह राहत योजना 31 मार्च 2026 तक ही लागू है। इसके बाद सरकार सख्त रुख अपनाएगी और बकाया वसूली के लिए कानूनी कार्रवाई तेज की जाएगी। इसके लिए पहले ही करीब 8,000 संपत्तियों की पहचान कर ली गई है, जिन पर जरूरत पड़ने पर कार्रवाई की जाएगी।
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कारोबारियों से अपील करते हुए कहा कि वे इस अंतिम मौके का लाभ उठाएं और अपने लंबित वैट बकाये का निपटान कर लें। उन्होंने कहा कि OTS स्कीम के तहत ब्याज और जुर्माने में बड़ी छूट दी जा रही है, जिससे व्यापारियों को राहत मिल रही है और वे अपने वित्तीय रिकॉर्ड को साफ कर सकते हैं।
उन्होंने चेतावनी दी कि समय सीमा खत्म होने के बाद सरकार का मौजूदा रियायती रुख समाप्त हो जाएगा और बिना किसी छूट के सख्त वसूली प्रक्रिया लागू की जाएगी। ऐसे मामलों में सामान्य कानूनी जांच और कार्रवाई की जाएगी।
वित्त मंत्री ने कहा कि इस योजना को मिला समर्थन मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में चल रही पारदर्शी और व्यापार-समर्थक नीतियों पर लोगों के भरोसे को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि इस पहल का उद्देश्य न केवल राजस्व बढ़ाना है, बल्कि मुकदमेबाजी को कम करना और व्यापारियों को नई शुरुआत का अवसर देना भी है।
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