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Circadian Rhythm- Body के अंदर भी होती है एक घड़ी जिसे खराब कर रही है हमारी मार्डन Lifestyle
क्या कभी किसी ने सोचा है कि हमें रात में नींद क्यों आती है और हम दिन में क्यों जागते है? दरअसल हमारे शरीर में एक प्रकृतिक घड़ी होती है जिसे कहते है “सर्केडियम रिदम (Circadian rhythm)”। हमारा शरीर एक मशीन है जिसमें अनेक तरह की संवेदनशील प्रक्रियाएं चलती रहती हैं और इसी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है सर्केडियन रिदम, जो हमारे शरीर की एक आंतरिक घड़ी है। ये घड़ी हमारे शरीर के सोने और जागने का सर्किल है जो हमारे पूरे शरीर को कंट्रोल करता है। लेकिन हम इसे समय-समय पर नजरअंदाज करते रहते हैं। सर्केडियम रिदम हमारे पाचन को अनुकूलित करती है और हमारी शारीरिक प्रक्रियाओं को भी संचालित करती है। यह एक नेचुरल बायोलॉजिकल प्रक्रिया है जो हमारे शरीर की विभिन्न क्रियाओं को 24 घंटे की अवधि में संचालित करती है।
क्या है सर्केडियन रिदम (Circadian rhythm)
सर्केडियन रिदम का इस तरह समझे की यह हमारी पूरी दिनचर्या को नियंत्रित करता है, जिससे हमारा शरीर और मानसिक स्वास्थ प्रभावित होता है। यह रिदम हमारे शरीर को तैयार करता है जिस वजह से हम पूरे दिन में अपने कार्यों को अच्छी तरह से कर पाते हैं।
कहां से आया “सर्केडियन (Circadian)” शब्द
“सर्केडियन” शब्द का उत्पत्ति यूनानी शब्द “सर्केडियोस” से हुआ है, जिसका अर्थ होता है “घेराबंद” या “घेराघेर”। यह घड़ी हमारे शरीर की विभिन्न उपक्रियाओं को एक निश्चित अनुक्रम में चलाने में मदद करती है। सर्केडियन रिदम का मुख्य कार्य है हमारे शरीर को बहारी प्रकृति की परिस्थितियों के अनुसार बदलने की क्षमता प्रदान करता है। यह हमें एक स्वस्थ जीवन जीने के लिए तैयार करता है।
खराब लाइफस्टाइल कर रही इसे खराब
एक स्वस्थ सर्केडियन रिदम का शरीर में होना अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह हमारे स्वास्थ और हमारे शरीर के विकास को प्रभावित करता है। लेकिन खराब और मार्डन लाइफस्टाइल ने इस घड़ी को काफी प्रभावित किया है। मार्डन लाइफस्टाइल जीने के चक्कर में हमने शारीरिक और माससिक स्वास्थ को काफी हानि पहुंचायी है। अपनी दिनचर्या के साथ अनियमितता, काम का अधिक स्ट्रेस लेना, अनियमित डाइट का सेवन, अत्यधिक तनाव लेना, नशीले पदार्थों का सेवन, अल्कोहल का सेवन और रात भर देर तक जागना ये सभी कारण मानव शरीर के सर्केडियन रिदम को खराब कर रहे हैं। इसका परिणाम ये है कि आजकल लोगों में नींद न आने की बीमारियां, दिल की बीमारी, वजन बढ़ना और पाचन संबंधी समस्याएं बढ़ गई है। इस तरह की खराब लाइफस्टाइल हमारे शरीर और हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है। सर्केडियन रिदम बिगड़ने से ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मनोरोग और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
सर्केडियन रिदम (Circadian rhythm) बिगड़ने से समस्याएं
सर्केडियन रिदम बिगड़ने से ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मनोरोग और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। लेकिन हम इसे अनदेखा करते रहते है, खराब और मार्डन लाइफस्टाइल हमारे शरीर और हमारे स्वास्थ्य को कमजोर बना रही है जिस कारण शरीर थकान महसूस करता रहता है।
Circadian Rhythm
कैसे रखे सर्केडियन रिदम (Circadian rhythm) को संतुलित
जीवनशैली को स्वस्थ और संतुलित बनाने के लिए हमें अपने सर्केडियन रिदम को संतुलित रखना बेहद आवश्यक है। समय पर सोना और उठना, संतुलित खानपान, योगा, ध्यान, एक्सरसाइज से सभी हमें सर्केडियन रिदम को संतुलित रखने में मदद कर सकती है। फोन या स्क्रीन का कम से कम उपयोग, संगीत या ध्यान का अभ्यास करना हमारे सर्केडियन रिदम को सही से चलने के लिए प्ररित कर सकता है।
सर्केडियन रिदम (Circadian rhythm) को सही करने के लिए कुछ जरूरी तरीके
1. टाइम पर सोना: समय पर सोना और उठना हमारे सर्केडियन रिदम को संतुलित रखने में मदद करता है। रोज रात में एक समय तय कर लें और उसी समय पर सोयें और प्रतिदिन लगभग उसी समय पर उठें।
2. संतुलित आहार: स्वस्थ और संतुलित आहार लेना सर्केडियन रिदम को सही करने में मदद करता है। रात के समय कम खाने का प्रयास करें और उचित प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट्स, और विटामिन को आहार में शामिल करें।
3. रोज करें व्यायाम: नियमित रूप से व्यायाम करना भी सर्केडियन रिदम को सही करने में मदद कर सकता है। सुबह या खाली समय में कोई भी व्यायाम या योग करने का अभ्यास करें।
4. कम रोशनी का उपयोग: दिनभर की थकान के बाद धीमी रोशनी का उपयोग करें। रात में कम रोशनी में रहने से सर्केडियन रिदम को सही करने में मदद मिलती है।
5. स्क्रीन समय को कम करें: रात के टाइम पर मोबाइल, कंप्यूटर, टैब, और टीवी का उपयोग कम करें।
6. संतुलित और साकार्तमक विचार: ध्यान और मेडिटेशन का अभ्यास करना भी सर्केडियन रिदम को संतुलित करता है। यह मानसिक शांति और तनाव को कम करके स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देता है।
इसलिए हमें अपनी दिनचर्या में बदलाव की आवश्यकता है। हमें इस शरीर की घड़ी को समझने और सावधानी से ध्यान देने की जरूरत है। स्वस्थ जीवन शैली और टाइम मैनेजमैंट को अपनाकर शरीर और मानसिक स्वास्थ्य दोनों को बेहतर रख सकते है, तभी हम अपने जीवन को स्वस्थ और खुशहाल बना पाएंगे।