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क्या है सर्वाइकल कैंसर (Cervical Cancer) यानी गर्भाशय के मुख्य कैंसर। कैसे करें बचाव
सर्वाइकल कैंसर हमारे देश में बहुत ज्यादा कामन है लगभग 1,00,000 महिलाएं हर साल इस कैंसर से पीड़ित होती है जिनमें से 70 हज़ार की मौत हर साल इस कैंसर की वजह से होती है हर 8 मिनट में एक महिला इस कैंसर का शिकार हो रही है तो आप समझ ही सकते हैं कि ये कितना इम्पोर्टेन्ट कैंसर है।
क्या है सर्वाइकल कैंसर (Cervical Cancer) यानी गर्भाशय के मुख्य कैंसर? आम भाषा में हम इसे कहते हैं बच्चेदानी का कैंसर भी कहते हैं।
सर्वाइकल कैंसर हमारे देश में बहुत ज्यादा कामन है लगभग 1,00,000 महिलाएं हर साल इस कैंसर से पीड़ित होती है जिनमें से 70 हज़ार की मौत हर साल इस कैंसर की वजह से होती है हर 8 मिनट में एक महिला इस कैंसर का शिकार हो रही है तो आप समझ ही सकते हैं कि ये कितना इम्पोर्टेन्ट कैंसर है।
क्या इससे बचा जा सकता है
लेकिन दुख की बात ये है कि इस कैंसर से हम आसानी बचा सकते हैं क्योंकि हमें इसका कारण पता है ये कैंसर एक वाइरस यानी human papilloma virus की वजह से होता है ये वाइरस को कैंसर में बदलने में कम से कम 10 से 15 साल लगते हैं और हमारे पास इतना समय होता है कि हम अपने आप अपने आप को इस कैंसर से बचा सके ।
किन महिलाओं को होता है सर्वाइकल कैंसर
ये इन्फेक्शन ज्यादातर उन महिलाओं में होता है जिन्होंने यौन संबंध कम उम्र में बनाने शुरू कर दिए हो या बहुत ज्यादा लोगों के साथ यौन संबंध बनाए हो यां किसी वजह से उनकी इम्युनिटी कम हो जैसे की HIV इन्फेक्शन की वजह से या बहुत ज्यादा बच्चे हो यानी गर्भाशय बार बार प्रभावित हुआ हो तो इन लोगों में ये कैंसर जल्दी होता है । आमतौर पे ये कैंसर 40 साल से उम्र की ज्यादा लेडीज में ही होता है।
क्या है लक्षण
इस कैंसर के लक्षण ज्यादातर असामान्य रक्त श्राव महीने के बीच में रक्त श्राव होना या गंदा पानी जाना या यौन संबंध बनाने के बाद रक्षा होना यही रहते हैं ज्यादातर महिलाएं इसको एक नॉर्मल श्राव समझती हैं और डॉक्टर के पास नहीं जाते हैं उनको लगता है कि महीने के बीच में अगर कंधा पानी जा रहा है या रक्षा हो रहा है एक नॉर्मल कंडीशन है लेकिन ऐसा नहीं है अगर रक्त आपको सम्बन्ध बनाने के बाद या महीने के बीच में हो रहा है तो ये नॉर्मल नहीं है अगर ऐसी कुछ भी स्थिति है तो आप अपने डॉक्टर के पास जाएं और अपना चेक अप कराएं क्योंकि यह कैंसर के लक्षण हो सकते हैं और अगर आप समय पे डॉक्टर के पास जाएंगे और अपना इलाज कराएंगे तो इस कैंसर को पहली स्टेज में डायग्नोज़ किया जा सकता है और इसका इलाज साथ के साथ रोका जा सकता है।
और कैंसर ही नहीं हो सकता है ये आपको कैंसर बनने से पहले जिसको हम प्री कैंसर या Dysplasia कहते हैं उस कंडीशन में भी पकड़ पाए और उसमें तो आपका इलाज बहुत ही साधारण चीजों से हो सकता है और बच्चेदानी निकालने की या रेडिएशन कीमोथेरेपी तक जाने की कोई जरूरत नहीं पड़ती है।
कौन सा टेस्ट करवाना होता है
इस कैंसर को डायग्नोज़ करने के लिए एक छोटा सा टेस्ट जिसको की हम बायोपिक कहते हैं उसकी जरूरत पड़ती है बायोपिक ये चेक करेगा कि ये कैंसर बना है या कैंसर से पहले की स्टेज है उसके बाद MRI या Ultrasound करके देखा जा सकता है कि बिमारी कहाँ तक फैली है बिमारी का इलाज स्टेज के हिसाब से होता है अगर बिमारी बच्चादानी तक सीमित है और पहली स्टेज में है।
ज्यादातर सर्जरी से यानी ऑपरेशन से जिसमें की बच्चेदानी निकाल दी जाती है उससे इसका इलाज पूरी तरह से हो जाता है ये ऑपरेशन थोड़ा बड़ा जरूर रहता है लेकिन 15 से 20 दिन में मरीज बिल्कुल ठीक हो जाता है और आगे किसी चीज़ की जरूरत भी नहीं पड़ती है लेकिन अगर किसी कारण वर्ष आप डॉक्टर के पास लेट पहुंचे है और बिमारी थोड़ी बढ़ गई है और बच्चेदानी से बाहर निकल चुकी है दूसरी या तीसरी स्टेज हो गई है।
तो उस स्टेज में हमें रेडिएशन थेरेपी दे सकते हैं रेडिएशन और हल्की कीमोथेरेपी से इस बिमारी को अच्छे से कंट्रोल किया जा सकता है।
इसके रिजल्ट्स बहुत अच्छे हैं और ज्यादातर पेशेंट्स बहुत अच्छे से 6070 परसेंट cases में patient बिल्कुल लंबी लाइफ अपनी जीते हैं और उनको उसके बाद ज्यादा कोई दिक्कत नहीं रहती है |
सर्वाइकल कैंसर से कैसे बचाव किया जा सकता है
इस कैंसर से हम बहुत आसानी से बच सकते हैं उसके लिए बहुत ही सिंपल टेस्ट रहते हैं जिसको कि हम Pap smear का टेस्ट कहते हैं या हम इसी वाइरस को टेस्ट कर सकते हैं यानी कि HPV यानी ह्यूमन papillomavirus infection भी टेस्ट किया जा सकता है दोनों के लिए जांच सेम रहती है यानी की जांच रहती है जो कि 12 मिनट का procedure है जिसमें कि आपके डॉक्टर आपको एक इंटरनल चेक अप करके अंदरूनी checkup से आपके अंदर से सिर्फ बच्चेदानी के मुख से हल्का सा पानी जांच करेंगे और वो पानी से हमें पता लग जाता है कि ये कैंसर है या कैंसर से पहले की स्टेज है या बहुत पहले की या सिर्फ हॉरर इन्फेक्शन ही है।
और इसको आगे इलाज की जरूरत है भी या नहीं अगर आपका और HPV बिलकुल ठीक आता है तो आपको अगले 3 से 5 साल तक कोई टेस्ट कराने की जरूरत नहीं है और अगर आपके घर में बच्चे है या आपके खुद की उम्र कम है तो आप इस कैंसर से बचने के लिए इंजेक्शन भी ले सकते हैं जिसको कि हम वैक्सीन कहते हैं HPV वैक्सीन के नाम से ही यह आती है और इसके दो या 3 ब्रांड्स मार्केट में मिलते है।
जिसके दोस्त या 3 doses लगते हैं अगर आप 15 साल से कम हैं तो दो doses से आपका काम हो जाएगा लेकिन आप 15 साल से ज्यादा हैं तो आपको इस वैक्सीन की 3 doses लेनी पड़ती हैं जो की आज फिर दो महीने बाद फिर और 6 महीने बाद के अंतर में ली जाती हैं।
ये वैक्सीन मैरिड महिलाएं यानी जिनके यौन संबंध हो चूके हैं वो महिलाएं भी ये वैक्सीन ले सकती हैं लेकिन उनमें थोड़ा सा असर कम रहता है 45 साल तक की उम्र तक ये वैक्सीन ली जा सकती है तो ये दोनों बहुत ही सिंपल टेस्ट है यानी HPV टेस्टिंग और वैक्सीनेशन जिससे आप एक बहुत बड़ी बिमारी से बच सकते हैं
ऑस्ट्रेलिया में आज कैंसर खत्म हो चुका है |